यह सामग्री कॉपी नहीं हो सकती है, फिर भी चाहिए तो व्हात्सएप से 8077566792 पर संपर्क करें..
 

डा. निशंक बने उत्तराखंड से देश के दूसरे मानव संसाधन विकास मंत्री, उनसे पहले उत्तराखंड के यह नेता भी संभाल चुके हैं यह मंत्रालय, यह है UK को उनसे उम्मीद…

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये

'
'

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2019। उत्तराखंड के हरिद्वार से सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को देश का नया मानव संसाधन विकास मंत्रालय सोंपा गया है। इसके बाद डा. निशंक ने देश के अगले मानव संसाधन विकास मंत्री के पद का पदभार ग्रहण कर लिया है। उत्तराखंड के लिए यह बड़ी बात, और बड़ा संयोग है कि इससे पूर्व भी पूर्ववर्ती अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपानीत एनडीए सरकार में उत्तराखंड के ही अल्मोड़ा के मूल निवासी डा. मुरली मनोहर जोशी भी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया था। वे 1998 से 2004 तक पूरे पांच वर्ष इस पद पर रहे थे। डा. निशंक को देश का इतने महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने पर उत्तराखंड की जनता में हर्ष का माहौल है। डा. निशंक के केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री बनने से उत्तराखंड एक और केंद्रीय विश्वविद्यालय मिलने और राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति सुधरने की उम्मीद की जा सकती है।

शिशु मंदिर के आचार्य से केंद्रीय मंत्री तक, गुरबत की जिंदगी से संघर्ष कर शिखर तक ऐसे पहुंचे ‘निशंक’

Modi swearing-in: Union Minister Ramesh pokhriyal Nishank Struggle and success storyमोदी कैबिनेट में जगह बनाने वाले उत्तराखंड में हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक गुरबत की जिंदगी से गुजरकर संघर्ष के दम पर शिखर तक पहुंचे है। पौड़ी गढ़वाल के पिनानी में गरीब परिवार में जन्में निशंक की जीवन यात्रा कई उतार चढ़ावों से गुजरी। सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य से मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनने की उनकी यात्रा बेहद अनूठी है। जोशीमठ स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में निशंक प्राचार्य रहे। जो उनके जीवन का कठिन दौर था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक होने के साथ-साथ उन्हें अध्यापन का दोहरा दायित्व निभाना होता था। अध्यापन कार्य के दौरान निशंक समाज सेवा और सक्रिय राजनीति से जुड़ गए। राजनीति में उनके कदम जमें तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अस्सी के दशक में निशंक उत्तराखंड राज्य के संघर्ष समिति के केंद्रीय प्रवक्ता बनें। 1991 में वे पहली कर्णप्रयाग विधानसभा से निर्वाचित हुए और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे। वे इस सीट पर 1993 और 1996 में भी चुनाव जीते। वे उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में पांच बार विधायक निर्वाचित हुए और दो बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। 2009 में मुख्यमंत्री बनें और अब केंद्रीय मंत्री बनने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

यह भी पढ़ें : डा. निशंक केन्द्रीय मंत्री के रूप में मोदी मंत्रिमंडल में शामिल, इसलिए मिल सकता है बड़ा मंत्रालय…

Imageनवीन समाचार, नई दिल्ली, 30 मई 2019। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य मंत्री डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने राष्ट्रपति भवन में मोदी मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ले ली है। निशंक उत्तराखंड से एकमात्र मंत्री हैं, और उन्हें केन्द्रीय मंत्री बनाया गया है। इसे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उत्तराखंड को विशेष महत्व दिए जाने के रूप में देखा जा रहा है। इससे पूर्व पिछली मोदी सरकार में उत्तराखंड से बाद में  केवल एक राज्य मंत्री के रूप में अजय टम्टा कोशामिल किया गया था। जिस तरह निशंक ने 24 केन्द्रीय मंत्रियों में 12वें नंबर पर, खासकर स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, मुख्तार अब्बास नकवी आदि पिछली बार भी वरिष्ठ मंत्री रहे नेताओं से पहले शपथ ग्रहण की, माना जा रहा है कि उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है। जबकि संसद के सबसे वरिष्ठ सांसद होने के नाते प्रोटेम स्पीकर चुने गये आठ बार के सांसद व मंत्री संतोष गंगवार व राव इंद्रजीत सिंह जैसे बड़े नेताओं को भी कैबिनेट मंत्री नहीं वरन राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है।
https://twitter.com/ANI/status/1134097767490564097/photo/1
 
उल्लेखनीय है कि निशंक राज्य में सबसे कम वोटों के अंतर से जीते हैं, परंतु पूर्व में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री एवं 1991 से यूपी के दौर में भी मंत्री रहे हैं। वे हरिद्वार से सांसद हैं, और काफी तेज-तर्रार नेता माने जाते हैं। संभवतया इस कारण उन्हें वरीयता मिली हो। उल्लेखनीय है कि राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी, पिछले मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री रहे अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा एवं प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को सर्वाधिक वोटों से हराने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के भी केंद्र में मंत्री बनने की चर्चा थी।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट ने फिर ‘निशंक’ की पूर्व मुख्यमंत्री ‘निशंक’ की राह…

-नामांकन को चुनौती देती एसएलपी याचिका भी खारिज

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 अप्रैल 2019। पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार से भाजपा प्रत्याशी डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के नामांकन को चुनौती देने वाली एसएलपी यानी विशेष याचिका भी उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूति रमेश रंगनाथन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने खारिज कर उनकी राह ‘निशंक’ यानी शंका रहित कर दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व एकलपीठ ने भी उनके विरुद्ध याचिका खारिज कर दी थी। खंडपीठ ने कहा कि याचिका नियमानुसार पोषणीय ही नहीं है। मालूम हो कि एकलपीठ ने भी इसी आधार पर याचिका को खारिज किया था।
गौरतलब है कि भाजपा के बागी व हरिद्वार से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे देहरादून निवासी मनीष वर्मा ने मतदान के मात्र 2 दिन शेष रहते उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिका में कमोबेश उन्हीं बिंदुओं को उठाया गया है, जिन पर उनकी याचिका को उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ पिछली 2 अप्रैल को खारिज कर दिया गया था। खंडपीठ ने कहा कि याचिका चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार धारा 80 व 81 का उल्लंघन होने के कारण पोषणीय नहीं है। नामांकन को चुनाव का परिणाम आ जाने के बाद ही 45 दिन के अंतर्गत चुनौती दी जा सकती है। चूंकि अभी नामांकन प्रक्रिया चल रही है और चुनाव नहीं हुए हैं, इसलिए चुनाव के दौरान इसे चुनौती नही दी जा सकती है। साथ ही यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकार तथा राज्य एवं केंद्रीय निर्वाचन आयोग को पार्टी नही बनाया जा सकता।

उल्लेखनीय है कि हरिद्वार से निशंक के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे भाजपा के बागी बताये जा रहे देहरादून निवासी मनीष वर्मा ने पूर्व में गत 28 मार्च को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि निशंक ने अपने नामांकन में भरे गए शपथपत्र पत्र में कई तथ्यों को छुपाया है। खासकर अपनी पुत्रियों श्रीयाशी व विदूषी निशंक के बैंक खातों का उल्लेख नही किया है। साथ ही निशंक ने उत्तराखंड का मुख्यमंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री आवास के बकाया भुगतान का भी शपथपत्र में उल्लेख नहीं किया है। सांसद आवास के संबंध में भी निशंक ने प्रोविजनल सर्टिफिकेट लगाया है, जबकि इसके स्थान पर वास्तविक नोड्यूज सर्टिफिकेट लगाने का नियम है। प्रोविजनल नोड्यूज सर्टिफिकेट लगाने पर खास तौर पर आपत्ति की गयी थी। याची का कहना है कि उन्होंने इसकी शिकायत रिटर्निंग ऑफिसर से भी की, लेकिन निशंक ने रिटर्निंग अधिकारी को दिए जवाब में कहा कि उनकी बेटी श्रीयांशी उन पर निर्भर नहीं बल्कि आत्मनिर्भर हैं। सांसद आवास के बारे में उन्होंने कहा कि वह अब भी सांसद हैं। रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याची की आपत्ति निरस्त कर दी। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

यह भी पढ़ें : निशंक का भवाली टीबी सेनीटोरियम को इमामी समूह को देने का आदेश निरस्त

-मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने का पूर्व आदेश होगा प्रभावी

भवाली

नैनीताल, 16 अगस्त 2018। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खण्डपीठ ने भवाली टीबी सेनीटोरियम के एक हिस्से को वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमन्त्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा आयुश ग्राम बनाने के लिए इमामी ग्रुप को 35 साल के लिये लीज पर देने के आदेश को निरस्त कर दिया है मामले के अनुसार भवाली निवासी मोहम्मद आजम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि भवाली सेनीटोरिएम ब्रिटिश कालीन ऐतिहासिक अस्पताल है। यह अस्पताल कई राजनेताओं के इलाज का गवाह बना है। पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने इस अस्पताल को चेस्ट इंस्टिट्यूट के रूप में विकसित करने के लिए करोड़ो रूपये की मशीने मंगाई थीं, जो अब बिना किसी उपयोग के बेकार हो गयी हैं। वहीं वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने टीबी सेनीटोरियम के एक हिस्से को आयुष ग्राम बनाने के लिए 35 साल की लीज पर दे दी। याची ने इसे इस सम्पति को खुर्द-बुर्द करने की साजिश बताया। मामले को सुनने के बाद खंडपीठ ने सरकार के 2010 के आदेश को निरस्त कर दिया, साथ ही इस अस्पताल को मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने के संदर्भ में अधिवक्ता दीपक रुवाली की जनहित याचिका में दिए गए निर्देशो को प्रभावी माना है।

यह भी पढ़ें : ऐतिहासिक भवाली सेनिटोरियम को लगाया 22 लाख का ‘चूना’

    • भवाली सेनिटोरियम में लघु निर्माण मद में अलग-अलग भागों में 11 लाख एवं अनुरक्षण मद में रंगाई-पुताई पर 11 लाख के घोटाले का अंदेशा
    • महानिदेशक के आदेशों पर स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं की जांच में सेनिटोरियम की तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक सहित तीन अधिकारियों को उत्तरदायी बताते हुये की गई है विशेष जांच की संस्तुति
  • गठिया के पूर्व ग्राम ट्रेवोर मेसी व नैनीताल के पूर्व सभासद संजय साह द्वारा सूचना के अधिकार के तहत ली गयी जानकारी में हुआ खुलासा 

नवीन जोशी, नैनीताल। जनपद में एनआरएचएम के बाद भवाली स्थित ऐतिहासिक टीबी सेनीटोरियम में पिछले वित्तीय वर्ष 2014-15 में 22 लाख रुपये के कार्यों में घोटाले का नया मामला प्रकाश में आया है। प्रदेश की स्वास्थ्य महानिदेशक के आदेशों पर स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं डा. गीता शर्मा द्वारा की गई जांच सूचना के अधिकार के तहत उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर इस धनराशि से हुये रंगाई-पुताई व अन्य लघु निर्माण के कार्यों को गैर तर्कसंगत तरीके से गैंग मजदूरों से बिना आगणन गठित किये करने व बिलों का सत्यापन किसी अभियंता से न कराये जाने का हवाला देते हुये कहा गया है कि तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डा. तारा आर्या, सहायक अधीक्षक केएल गौतम और प्रधान सहायक डीडी पांडे उत्तरदायी प्रतीत होते हैं, लिहाजा मामले में विशेष सम्प्रेक्षा की संस्तुति की गई है। इसके अलावा आगे ऐसे कार्यों में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाये जाने की भी संस्तुति की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 में श्रय रोगाश्रम भवाली में लघु निर्माण मद में अलग-अलग भागों में 11 लाख एवं अनुरक्षण मद में 11 लाख का बजट आवंटित हुआ था। इसमें से अनुरक्षण पद में आवासीय एवं अनावासीय भवनों की दीपावली पर रंगाई-पुताई का कार्य तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक के स्तर पर गठित कमेटी द्वारा कोटेशन के आधार पर प्राप्त दरों से न्यूनतम दरों पर सामग्री क्रय करने के उपरांत सभी कार्मिकों को सामग्री वितरित कर दी गई। इन कार्यों का पूर्व आगणन तथा कार्य के उपरांत बिलों का सत्यापन विभागीय अभियंता से नहीं कराया गया। इसे जांच अधिकारी निदेशक डा. शर्मा ने गलत ठहराया है।

कमला नेहरु चेस्ट इंस्टिट्यूट और आयुष ग्राम बनने के टूटे ख्वाब भी देख चुका है ऐतिहासिक भवाली सेनीटोरियम

नैनीताल। वर्ष 1912 में अंग्रेजों ने 220 एकड़ भूमि में सम्राट एडवर्ड सप्तम की याद में भवाली में एशिया के सबसे बड़े 320 बेड के टीबी संस्थान की स्थापना की थी। 16 जून 1929 को यहां महात्मा गांधी भी आये थे, और 11 अक्टूबर 1934 को नैनी जेल में रहने के दौरान देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू को यहां डा. प्रेम लाल से टीबी के उपचार कराने के लिये भर्ती कराया गया था। इस कारण 1935 में नेहरू को पत्नी के करीब रहने के लिये नैनी से अल्मोड़ा जेल स्थानांतरित किया गया था। यहां कमला नेहरू के नाम से एक वार्ड अब भी है। इधर टीबी का इलाज घर बैठे डॉट विधि से किये जाने की व्यवस्था के बाद से इसके बुरे दिन शुरू हुये। वर्ष 2002 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी की सरकार ने यहां बेडों की संख्या 150 तक सीमित करते हुये जापान के सहयोग व 50 करोड़ रुपये की लागत से कमला नेहरू चेस्ट इंस्टिट्यूट की स्थापना के लिये शासनादेश भी जारी कर दिया था, और इस हेतु 2.67 करोड़ रुपये से अत्याधुनिक सीटी स्कैन, 44 लाख रुपये से अल्ट्रासाउंड व 11.89 लाख से ऑटो ऐनालाइजर सहित कई अन्य मशीनें भी ले आई गई थीं। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डा. तिलक राज बेहड़ ने चेस्ट इंस्टिट्यूट का उद्घाटन भी कर दिया था। लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने से करोड़ों की मशीनें कबाड़ में तब्दील हो गयीं। आगे 2010 में तत्कालीन सीएम डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने यहां करीब 10 एकड़ भूमि पर देश की प्रमुख सौंदर्य प्रसाधन कंपनी-इमामी की मदद से करीब 50 करोड़ रुपये से आयुष ग्राम बनाने का प्रस्ताव तैयार करवाया, लेकिन डा. निशंक का यह ड्रीम प्रोजेक्ट भी परवान नहीं चढ़ पाया।

नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

Leave a Reply

Next Post

नैनीताल में ‘नेचुरल एसी’ बना कौतूहल का केंद्र, उमड़ रहे सैलानी

Fri May 31 , 2019
यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये ' ' -बारापत्थर चौराहे पर सैलानी आकर लेने लगे हैं इसका अनुभव नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2019। सरोवरनगरी में एक पहाड़ी चट्टान पर करीब पांच वर्ष पूर्व प्रकाश में आया ‘नेचुरल एसी’ सैलानियों के साथ ही नगरवासियों के बीच भी आकर्षण […]
Loading...

Breaking News

ads (1)