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शिक्षक की नौकरी छोड़ ‘बांज बचाने’ को जुटे चंदन

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जुलाई 2019। वन महोत्सव के उपलक्ष्य पर पर्यावरण प्रेमी चंदन सिंह नयाल और उनकी टीम के द्वारा जनपद के धारी ब्लाक के परबडा वन पंचायत में पौधा रोपड किया जा रहा। उल्लेखनीय है कि चंदन शिक्षक की नौकरी छोड़ कर पिछले पांच वर्षों से पौधे रोपित कर रहे हैं। इधर उन्होंने ‘बांज लगाओ-बांज बचाओ का नारा दिया था। उनका कहना है कि जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए चौड़ी पत्ती के बांज के पौधे अत्यधिक उपयोगी हैं। इस अभियान के तहत वे बांज के कई पौधे रोपित कर चुके है, तथा जंगलों में बर्षा जल के जल संरक्षण के लिए चाल-खाल का निरीक्षण भी किया है। इस अभियान में थान सिंह बिष्ट, महेन्द्र सिंह बिष्ट, बचे सिंह, हरेन्द्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, गंगा सिंह बिष्ट आदि भी उनका सहयोग कर रहे हैं।

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डा.आशुतोष पन्त

-पेड़ लगाने के जुनूनी हैं डा. पंत
-अपने पिता की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लाखों औषधीय एवं फलदार पौधे लगा चुके हैं पेशे से चिकित्सक पर्यावरण प्रेमी
-प्रतिवर्ष न्यूनतम 10 हजार पौधे लगाने का है लक्ष्य
नवीन जोशी, नैनीताल। बीते कुछ वर्षों से शीतकाल में अपेक्षित बर्फ नहीं गिरने से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के साथ आसमान में ओजोन परत के छिद्र में लगातार वृद्धि होने, ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन आदि पर चिंता तो सभी करते हैं, लेकिन विरले लोग ही हैं जो इन स्थितियों से स्वयं की चिंता किये बिना पूरी धरती को बचाने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। पेशे से हल्द्वानी में चिकित्सक डा. आशुतोष पंत जैसा कार्य राज्यों की पूरी सरकारें भी कर लें तो कम है। डा. पंत अपने पिता स्वर्गीय सुशील चंद्र पंत की प्रेरणा से वर्ष 1988 से लगातार अपने स्वयं के संसाधनों से यथासंभव अधिक से अधिक संख्या में औषधीय और फलदार पेड़ लगाते आ रहे हैं, और अब तक लाखों पौधे लगा चुके हैं। उनका लक्ष्य प्रतिवर्ष कम से कम दस हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह भी है कि इसके लिये अब तक उन्होंने किसी भी संस्था या व्यक्ति से किसी प्रकार का कोई आर्थिक सहयोग नहीं लिया है, तथा आगे भी ऐसी कोई अपेक्षा नहीं रखते हैं। इधर उन्होंने प्रदेश के नैनीताल, चम्पावत और टिहरी जिलों के पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट की अच्छी प्रजातियों के तीन हजार पौधे लगाए हैं। बताया कि अखरोट के पेड़ों की आयु बहुत लंबी होती है, तथा इनके रोपण से पर्यावरण को लाभ के साथा ही ग्रामीणों की अच्छी आय भी होगी। कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपनी भूमि पर लगाने के लिए उनसे नि: शुल्क पौधे प्राप्त कर सकता है।

डा. पंत ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष पर्वतीय क्षेत्र में शीतकालीन पौधारोपण करने का जबकि जुलाई-अगस्त में मैदानी क्षेत्र में पौधे लगाना तय किया है। आगे इसी तरह इच्छुक काश्तकारों को पौधे वितरित किये जाएंगे, तथा इसके बाद फरवरी में चम्पावत जिले में निशुल्क पौध वितरण कार्यक्रम होगा। डा. पंत का कहना है कि सभी को मिलकर इस धरती को बचाने की मुहिम में जुटना होगा वरना आने वाले कुछ सालों में यहां सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। ग्लोबल वार्मिंग से पृथ्वी को केवल हरियाली ही बचा सकती है। हरियाली बढ़ाने के लिये हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे। अपने अनुभव के आधार पर वह कहते हैं कि सड़कों के किनारे, सार्वजनिक पार्कों आदि में पौधारोपण करने पर सफलता की दर अर्थात पौधे से वयस्क बनने की दर बहुत कम होती है। इसलिये पिछले कुछ वर्षाें से सफलता की दर बढ़ाने के लिए चारों ओर से दीवार से सुरक्षित विद्यालय परिसरों में पौधरोपण का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिधरों को उनकी जमीन में लगाने के लिए ओर शहरी क्षेत्रों में जागरूक व चिंतनशील सम्मानित को अपनी या सार्वजनिक भूमि पर लगाने के लिए पौधे भेंट करना शुरू किया है लोगों। वह कहते हैं कि हम वर्ष भर में चाहे दो-चार पेड़ ही लगाएं, पर कम से कम तीन वर्ष तक उनकी देखभाल (नियमित सिंचाई और गाय-भैंस-बकरी आदि से रक्षा) जरूर करें। इसके बाद तो पेड़ स्वयं ही हमें बहुत कुछ देने लगते हैं।

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