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पक्षी-तितली प्रेमियों का सर्वश्रेष्ठ गंतव्य है पवलगढ़ रिजर्व

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उत्तराखंड का नैनीताल जनपद में रामनगर वन प्रभाग स्थित पवलगढ़ रिजर्व पक्षी प्रेमियों के लिए बेहतरीन गंतव्य है। दिल्ली से सड़क और रेल मार्ग से करीब 260 किमी तथा नजदीकी हवाई अड्डे पंतनगर से करीब 87 किमी दूर रामनगर के जिम कार्बेट नेशनल पार्क से कोसी नदी के दूसरी-पूर्वी छोर से सटा 5824 हैक्टेयर में फैला प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधिता से लबरेज पवलगढ रिजर्व, पक्षियों को देखने यानी बर्ड वाचिंग के शौकीनों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है। यहां अब तक करीब 365 प्रजातियों के पक्षी देखे और पहचाने जा चुके हैं। साथ ही यहां मिलती करीब 83 तरह की तितलियां और 100 प्रकार के मॉथ यानी तितलियों की ही दूसरी प्रजातियां भी मिलती हैं।

पवलगढ़ में दिख सकते हैं ये खूबसूरत परिंदे :

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान से सटे पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व रिजर्व में सैलानियों को तन-बदन में रोमांच का नया जोश भर देने वाले शानदार बाघ-रॉयल बंगाल टाइगर, भारतीय हाथी और बूटेदार गुलदार के रोमांचक दीदार अमूमन हो जाते हैं, इसके साथ ही कार्बेट पार्क की तरह यहां भी इन तथा ऐसे ही अन्य अनेकों सैकड़ों प्रजातियों के वन्य जीवों की काफी संख्या मौजूद है।

और यदि यहां आने वाले सैलानी खुशकिस्मत हुए तो उन्हें यहां एक सफेद खूबसूरत हिरन के भी दीदार हो सकते हैं, जिसे अभी जून 2015 में यहां के क्यारी गांव के रहने वाले विनोद बुधानी नाम के व्यक्ति ने देखकर वन विभाग के अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया है। इसके अलावा यहां इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) द्वारा भारत में खतरे में बताई गई, दुनिया की सबसे तेज उड़ने वाली पैरीग्रिराइन फाल्कन चिड़िया के साथ ही ग्रेट स्लेटी वुड पीकर चिड़िया की भी अच्छी-खासी संख्या मौजूद है। अपनी इन्ही खासियतों की वजह से बीती चार से आठ फरवरी 2015 के बीच यहां स्प्रिंग बर्ड फेस्टिवल आयोजित किया गया, जिसमें पहुंचे पक्षी विशेषज्ञों के समूहों ने यहां सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों, तितलियों और मॉथ के दीदार किए। यहां की सीतावनी-क्यारी की ट्रेल में एक ही जगह पर ग्रेट स्लेटी वुड पीकर के साथ खतरे में पड़ी कॉमन क्रैस्ट्रल, स्टीपी ईगल और ब्लैक शोल्डर्ड के साथ ही अनेकों प्रजातियों के शिकारी परिंदों के दीदार भी हो सकते हैं। आगे, उत्तराखंड का वन विभाग यहां 85 लाख रुपये से बर्ड वाचिंग ट्रेल विकसित कर रहा है, जिसमें ग्रामीणों की भी बराबरी की सहभागिता से लगातार सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास किये जा रहे हैं, जिनके माध्यम से सैलानियों को ग्रामीणों के बीच रहकर उनके जन-जीवन को समझने और उनके व्यंजनों का लजीज जायके भी मिल सकेंगे। साथ ही पवलगढ़ रिजर्व के चुनिंदा स्थानों पर सैलानियों को पैदल बर्ड वाचिंग ट्रेल की सुविधा, ठीक-ठाक स्थिति में वन मार्ग व आवासीय तथा अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं, जिससे सैलानी यहां का भरपूर आनंद ले पाते हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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