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नैनीताल की बेटी स्वाति ने अमेरिका में पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर बढ़ाया मान

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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 दिसंबर 2018। सरोवरनगरी की एक बेटी स्वाति रावत ने सात समुंदर पार अमेरिका के टेक्सास विवि से पीएचडी की डिग्री हासिल कर अपने माता-पिता व परिजनों के साथ ही नगर एवं राज्य वासियों का सिर भी गर्व से ऊंचा कर दिया है।

टेक्सास विवि में पीएचडी की डिग्री प्राप्त करती स्वाति रावत।

स्वाति नगर के आर्य समाज मंदिर के मंत्री केदार सिंह रावत की पुत्री हैं। उन्होंने इंटर तक की शिक्षा नगर के सेंट मेरीज कान्वेंट कॉलेज से वर्ष 2002 में प्राप्त की है। इसी वर्ष उन्होंने अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रतियोगिता उत्तीर्ण करके पं. गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्यागिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से कृषि इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसी बीच उनका कैंपस सलेक्स टेफे-चेन्नई हेतु हो गया था। 2006-2007 में वहां कार्य करने के बाद वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश में अध्ययन करने हेतु जीआरई एवं टोकिल परीक्षा उत्तीर्ण कर अमेरिका के बेलर यूनिवर्सिटी चली गयीं, और वहां से 2011 में एमएस इन्वायरमेंटल साइंस में डिग्री प्राप्त की। आगे अमेरिका की इनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी में भी नियुक्त हुईं और इधर उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर एंड इन्वायरमेंटल साइंस में पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर ली है। विदेश में रह कर एवं वहीं शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी स्वाति अपनी मातृभूमि को नहीं भूलने की बात करती हैं। आगे उनकी इच्छा वैज्ञानिक बनने की है।

-पिता डा. राजेश साह बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में पीएमएस एवं माता डा. विनीता साह अल्मोड़ा की सीएमओ
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 दिसंबर 2018। नगर के होनहार छात्र विभूति रतन साह सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बन गये हैं। रविवार को गुरुग्राम में आयोजित हुई सीआरपीएफ की पासिंग आउट परेड में उन्हें देश के उपराष्ट्रपति वेंकया नायडू की उपस्थिति में 52 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के उपरांत यह उपलब्धि हासिल हुई। उल्लेखनीय है कि विभूति के पिता डा. कैप्टन राजेश बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में पीएमएस हैं, तथा पूर्व में भारतीय सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं, जबकि उनकी माता डा. विनीता साह अल्मोड़ा जिले की सीएमओ यानी मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई नगर के सेंट जोसफ कॉलेज से हुई है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके माता-पिता के साथ ही सभी परिचित व नगरवासी गौरवान्वित हैं।

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 8 दिसंबर 2018। नगर के पार्वती प्रेमा जगाती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सरस्वती विहार के 12वीं कक्षा के छात्र शिव त्यागी ने अपने नवोन्मेष से इतिहास रच दिया है। शिव का प्रोजेक्ट अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान पर चयनित हुआ है। बताया गया है कि गत तीन व चार दिसंबर को दिल्ली में भारत-अमेरिका के संयुक्त तत्वावधान में इंटेल द्वारा नीति आयोग के अटल टिकरिंग लैब व इंडो-यूएस विज्ञान और तकनीकी फोरम के माध्यम से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की ‘मेक टुमॉरो फॉर इनोवेशन जनरेशन शोकेश 2018’ प्रतियोगिता में देश के कुल 50 सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट आमंत्रित किये गये थे, जिसमें शिव के प्रोजेक्ट ‘स्मार्ट इलेक्ट्रो प्लेटर’ नाम के प्रोजेक्ट को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। प्रधानाचार्य डा. किशन वीर सिंह शाक्य ने कहा है कि विद्यालय की ओर से शिव के प्रोजेक्ट को पेटेंट भी कराया जाएगा। साथ ही इसे आगामी मई 2019 में अमेरिका में आयोजित होने जा रहे ‘मेकर्स मेले’ में भी भारत सरकार की ओर से भी भेजा जाएगा। इसका खर्च इंटेल के द्वारा वहन किया जाएगा।
इस विशिष्ट उपलब्धि पर शनिवार को लौटने पर शिव का विद्यालय में फूल मालाओं से भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। विद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष कामेश्वर प्रसाद काला, प्रबंधक डा. केपी सिंह, सह प्रबंधक श्री राम एवं प्रधानाचार्य एवं शिव तथा उनके कोच रजत कुमार सिंह की इस उपलब्धि की मुक्त कंठ से प्रशंषा करते हुए विश्वास जताया कि वे भविष्य में देश ही नहीं विश्व में अपना, अपने परिवार तथा विद्यालय का नाम रोशन करेंगे।

बिना तोले पता चल जाएगा किसी वस्तु पर चढ़ाई जाने वाली धातु का वजन

नैनीताल। शिव त्यागी ने आपके भरोसेमंद ‘नवीन समाचार’ को बताया कि उनके प्रोजेक्ट से किसी वस्तु-आभूषण पर चढ़ाई जाने वाली सोने या अन्य धातु की परत का वजन बिना तोले ही इलेक्ट्रो प्लेटिंग यानी परत चढ़ाये जाने की प्रक्रिया के दौरान ही स्क्रीन पर आ सकेगा। इससे सही मात्रा में धातु की परत चढ़ाई जाएगी। यह मशीन स्वर्णाभूषण बनाने वाले छोटे स्वर्णकारों के लिए अत्यधिक लाभप्रद हो सकती है। क्योंकि कम या अधिक धातु की परत चढ़ने पर कई बार उन्हें नुकसान होता है, अथवा ग्राहक को अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ती है। दिल्ली निवासी शिव ने बताया कि उनके पिता संजय त्यागी इलेक्ट्रो प्लेटिंग की मशीनों का व्यवसाय करते हैं। इस कार्य में होने वाली दिक्कत को देखकर एवं पिता से प्रेरणा लेकर उन्होंने इस कार्य की नयी प्रविधि की खोज की है, जो इस क्षेत्र में करिश्माई हो सकती है। उल्लेखनीय है कि बीते सितंबर माह में नगर के बिड़ला विद्या मंदिर में आयोजित नगर एवं आसपास के 13 विद्यालयों की प्रतियोगिता में भी वे प्रथम आये थे।

ऐसे काम करती है शिव की डिवाइस

शिव की डिवाइस किसी वस्तु (अंगूठी, गाड़ियों के पार्ट आदि) पर किसी अन्य धातु (सोना, चांदी, तांबा, क्रोमियम) आदि की परत इलेक्ट्रोप्लेटिंग के द्वारा चढ़ा सकता है। इस डिवाइस की यह विशेषता है की ये बिना उस वस्तु को तोले और बिना इलेक्ट्रोप्लेटिंग को रोके उस वस्तु में वज़न के अंतर को एलसीडी डिस्प्ले पर बता सकता है। यह डिवाइस वजन का अंतर सर्किट में करंट के प्रवाह से पता लगाता है, और करंट में छोटे से छोटे अंतर को भी भांप सकता है। यह डिवाइस किसी भी समय करंट को नाप कर प्रक्रिया पूरे होने में शेष बचे समय को भी बताता है। इस डिवाइस को इस तरह बनाया गया है कि इसे कोई भी नया व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है। यह डिवाइस छोटे सुनार आदि लोगों के लिए लगभग 5000  रूपए में उपलब्ध होगा, साथ भी इस डिवाइस को बड़े उद्योगों (जैसे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री आदि जहाँ इलेक्ट्रोप्लेटिंग होती है) के बड़े इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्लांटों के सर्किट में भी जोड़ा जा सकता है। इस डिवाइस से एलेक्ट्रोप्लेटिंग करने वाले व्यक्तियों के समय की बचत होगी और वस्तुओं पर धातुओं के ज़्यादा चढ़ जाने के  वजह से हो रहे नुकसान में भी कमी आएगी।

हिमांशु नेगी

नैनीताल, 3 दिसंबर 2018। डीएसबी परिसर के एमएससी भूविज्ञान प्रथम सेमेस्टर के छात्र हिमांशु नेगी पुत्र शंकर सिंह नेगी ने पहले प्रयास में ही प्रतिष्ठित नेट परीक्षा 68वीं रैंक से उत्तीर्ण कर गजब का प्रदर्शन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर परिसर के निदेशक प्रो. एलएम जोशी, डीएसडब्लू प्रो. पीएस बिष्ट, कुलानुशासक प्रो. एचसीएस बिष्ट व भूविज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. जीके शर्मा ने हिमांशु को स्वयं उपस्थित होकर बधाई एवं उज्जवल भविष्य हेतु शुभकामनाएं दीं। बताया गया कि हिमांशु मूलतः सोमेश्वर के निवासी हैं और सोमेश्वर के जीआईसी से ही हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण की है।

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-पिता की है अंडों की दुकान, दो बहनों व एक भाई में है सबसे बड़ी, परिवार में लेखन का कोई संस्कार नहीं

रामा मांटेसरी की प्रधानाचार्या व नैनीताल बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मा के साथ अपनी पुस्तक को प्रदर्शित करती अर्शिया मोईन।

नैनीताल, 22 नवंबर 2018। नगर की एक 10वीं कक्षा की छात्रा अर्शिया मोईन ने अंग्रेजी भाषा में पुस्तक लिखकर मिसाल पेश कर दी है। नगर के रामा मांटेसरी स्कूल की छात्रा रही और इसी विद्यालय की प्रधानाचार्या नीलू एल्हेंस की प्रेरणा से पुस्तक प्रकाशित कराने वाली छात्रा अर्शिया ने बताया कि उन्होंने 10वीं कक्षा की छुट्टियों के दौरान ‘मिस्टीरियस मिसिंग’ पुस्तक लिखी है। उनकी पुस्तक उनकी ही उम्र की एक ऐसी किशोरी की कहानी है जिसके अभिभावक उसे रोज बुरी तरह से पीटते हैं। इस उत्पीड़न से तंग आकर वह घर से कहीं चली जाती है, और अकेले संघर्ष करती है। आखिर उसका दोस्त उसे इन स्थितियों से वापस लेकर आता है। इस तरह उनकी पुस्तक एक अकेली किशोरी के संघर्ष के जरिये ‘महिला सशक्तीकरण’ का संदेश भी देती है। अर्शिया नगर के मल्लीताल क्षेत्र के एक सामान्य परिवार से है। पिता की संयुक्त परिवार में अंडों की दुकान है, और वह दो बहनों व एक भाई में सबसे बड़ी है। वर्तमान में नगर के मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर की छात्रा है।

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डीएसबी की कैडेट प्रिया का यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए श्रीलंका जाने को हुआ चयन

नेवल कैडेट प्रिया बमेठा।

नैनीताल, 27 अक्तूबर। कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर नैनीताल की नेवल एनसीसी की पैटी ऑफीसर कैडेट प्रिया बमेठा का चयन इस वर्ष के यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत आगामी 7 से 9 नवंबर तक श्रीलंका जाने के लिए हुआ है। डीएसबी परिसर के एनसीसी अधिकारी सब लेफ्टिनेंट डा. रीतेश साह ने प्रिया के चयन को कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के साथ ही 5 उत्तराखंड नेवल डीएसबी सब यूनिट के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि करार देते हुए बताया कि मूलतः हल्दूचौड़ निवासी पिता चंद्र बल्लभ बमेठा व माता बसंती बमेठा की पुत्री प्रिया बीएससी पांचवे सेमेस्टर की छात्रा है और यहां डीएसबी के केपी हॉस्टल में रहती है। एनसीसी का यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम अखिल भारतीय स्तर का सबसे प्रतिष्ठित कैंप है। इसमें प्रतिभाग करने के लिए कैडेट को प्रतिष्ठित गणतंत्र दिवस परेड में प्रतिभाग करना अनिवार्य होता है, और इसमें प्रदर्शन के जरिये ही इस प्रोग्राम के लिये चयन अन्य निदेशालयों के कैडेटों के बीच लिखित परीक्षा, समूह चर्चा, व्यक्तिगत ड्रिल प्रतिस्पर्धा और डीजी साक्षात्कार जैसे कई चरणों की राष्ट्रीय स्तर की कड़ी प्रस्पिर्धा के जरिये होता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के एनसीसी कैडेटों द्वारा मेजबान देश की एनसीसी गतिविधियों में प्रतिभाग कर अपने देश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक श्रेष्ठता को प्रदर्शित करना और वहां की इन्ही विशिष्टताओं से अवगत होना होता है। प्रिया इससे पूर्व गणतंत्र दिवस शिविर दिल्ली, अखिल भारतीय नौसैनिक शिविर व वार्षिक प्रशिक्षण शिविर आदि में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं। उनके चयन पर विवि, परिसर एवं उत्तराखंड एनसीसी नेवल यूनिट में हर्ष की लहर है।

बड़ी गौरवपूर्ण उपलब्धि: वैश्विक कंपनी एमवे के पहले ग्लोबल सीईओ बने नैनीताल के मिलिंद पंत

एमवे के नये सीईओ मिलिंद पंत।

नैनीताल, 12 अक्तूबर 2018। नैनीताल के एक बेटे, नैनीताल के निकटवर्ती भीमताल के निवासी और नैनीताल के प्रतिष्ठित सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे मिलिंद पंत (64) 1959 में स्थापित दुनिया की पहली मल्टी लेवल मार्केटिंग-डायरेक्ट होम सेलिंग के कान्सेंप्ट वाली प्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘एमवे’ के पहले ‘ग्लोबल सीईओ’ यानी वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किये गये हैं। वे आगामी 2 जनवरी 2019 को इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। सीईओ का पद पहली बार रखा गया है।

उनके साथ पहले सेंट जोसेफ कॉलेज में तीसरी से दसवीं कक्षा तक और फिर देहरादून के सेंट जोसफ एकेडमी में 11वीं व 12वीं कक्षा में भी साथ पड़े तथा इधर सोशल मीडिया के जरिये लगातार जुड़े उनके सहपाठी, नैनीताल के अल्का होटल के स्वामी वेद साह ने बताया कि मिलिंद मिशीगन अमेरिका स्थित इस कंपनी के पहले गैर अमेरिकी, भारतीय सीईओ होंगे। 

पंत को एमवे के बोर्ड में भी जगह मिलेगी और सीधे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को उनकी रिपोर्टिंग होगी। मिलिंद पंत फिलहाल पिज्जा हट व केएफसी की पैतृक अमेरिकी कंपनी यम ब्रांड्स के साथ जुड़े हुए हैं। वो पिज्जा हट इंटरनेशनल के प्रेसिडेंट हैं। यम ब्रांड्स से पहले पंत ने 14 साल तक यूनीलीवर कंपनी में काम किया। पंत ने वहां अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। वो अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और टर्की रीजन के वाइस प्रेसिडेंट (फूड) भी रहे। मिलिंद  अपने परिवार के साथ अमेरिका के डलास शहर में रह रहे हैं। एमवे में टॉप मैनेजेमेंट फिलहाल स्टीव वैन एंडल और डग देवोस संभाल रहे हैं। एंडल साल 1995 से चेयरमैन के पद पर हैं। देवोस साल 2002 से प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दोनों अब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल होंगे।
वेद साह ने बताया कि मिलिंद ने वर्ष 1978 में सेंट जोसेफ में तीसरी कक्षा में प्रवेश लिया था, और 1985 में यहीं से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। सेंट जोसेफ से पढ़ाई के बाद दोनों ने साथ ही सेंट जोसेफ अकादमी देहरादून से इंटरमीडिएट किया। सीधे और सरल स्वभाव के मिलिंद बेहद मेहनती थे, तथा हमेशा पढ़ाई में लगे रहते थे। इंटर के बाद मिलिंद ने बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग और फिर बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस से मैनेजमेंट में पीजी किया था। आज भी मिलिंद के संपर्क में रहने वाले वेद को ही सबसे पहले मिलिंद के एमवे में सीईओ बनने की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व मिलिंद यूनीलीवर व यम ब्रांड कंपनी में दक्षिण एशिया के प्रमुख रहे। बताया कि मिलिंद के पिता देहरादून में एलआईसी में मैनेजर पद पर और माता गृहिणी थी। 

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नैनीताल, 30 सितंबर 2018। उत्तराखंड की एक बहू और एक बेटे की ओर से सीना चौड़ा करने वाली खबरें हैं। उत्तराखंड की एक बहू डॉ. अमरप्रीत कौर चावला को प्रतिष्ठित मिसेज नार्थ पैसिफिक एशिया यूनिवर्स-2018 के खिताब से नवाजा गया है। इस सफलता के बाद वह इस साल के अंत में फिलीपींस में होने वाले 41 वें मिसेज यूनिवर्स खिताब के लिए प्रतिभाग करेंगी। वहीं उत्तराखंड के एक बेटा चंपावत के मूल निवासी अनिल चंद्र पुनेठा को सुदूर दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया गया है।
पेशे से डेंटिस्ट (एंडोडोंटिस्ट) डा. अमरप्रीत लंदन तथा हल्द्वानी में डेंटल स्पा क्लिनिक संचालित करती हैं। उन्हें इससे पहले मिसेज इंडिया क्वीन ऑफ सबस्टेंस और मिसेज इंडिया यूके खिताब से भी नवाजा जा चुका है। उनके सास-ससुर हल्द्वानी के तिकोनिया में रहते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पति बनमीत सिंह नरुला के साथ ही स्व. पिता गुरभेज सिंह चावला, माता सुरजीत कौर चावला और सास-ससुर को दिया है।
वहीं पुनेठा की बात करें तो 1984 बैच के यह आईएएस अधिकारी लोहाघाट के सरकारी स्कूल से पढ़े हैं। उनके एक भाई रमेश पुनेठा भारतीय रेल में और दूसरे अलकेश पुनेठा जर्मनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। अनिल को आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पसंदीदा अधिकारी होने के कारण उनसे आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के होने के बावजूद मुख्य सचिव बनाया जा रहा है। वे मई 2019 में अपनी सेवानिवृत्ति तक इस पद पर बने रह सकते हैं।

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आईएएस की परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल करने पर अपूर्वा का मुंह मीठा करते परिजन

नैनीताल की ‘तीसरी’ बेटी हल्द्वानी निवासी और नैनीताल के सेंट मेरीज स्कूल की पूर्व छात्रा अपूर्वा पांडे ‘मन्नू’ ने दूसरे ही प्रयास में आईएएस की परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल कर किया उत्तराखंड में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने अपना और परिजनों का सपना पूरा कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में प्रदेश के दो और मेधावियों ने भी परचम लहराया है। इनमें से 188वीं रैंक हासिल करने वाली श्वेता मेहरा भी हल्द्वानी के लोहारियासाल तल्ला की हैं, जबकि ऋषिकेश निवासी वर्णित नेगी ने 504वीं व देहरादून की मोनिका राणा ने 577वीं रैंक हासिल की है।

आइएएस ज्योति साह

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व नैनीताल के सेंट मेरीज कान्वेंट की ही छात्रा रही, कुमाऊँ विवि के भूगोल विभाग के प्राध्यापक नैनीताल निवासी डा. जीएल साह की पुत्री ज्योति साह ने 2009 में आइएएस परीक्षा में 115वीं रैंक हासिल की थी। वर्तमान में वे अहमदाबाद में संयुक्त आयकर आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं।

अपने माता-पिता के साथ सोनाक्षी तोमर

इनके अलावा नैनीताल के सेंट मेरीज कान्वेंट की ही छात्रा सोनाक्षी सिंह तोमर ने संघ लोक सेवा आयोग की 2016 में परीक्षा में 747वीं रेंक हासिल की थी। मूल रूप से पौड़ी जिले के तहसील लैंसडाउन स्थित ग्राम गुमखाल निवासी सोनाक्षी सिंह तोमर के पिता मुकेश तोमर क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ी, तथा वर्तमान में कुमाऊं मंडल विकास निगम नैनीताल के पर्यटन अनुभाग में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर तथा माता पुष्पा तोमर भारतीय स्टेट बैंक नैनीताल में स्पेशल असिस्टेंट हैं।
सोनाक्षी ने प्राथमिक से लेकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सेंट मैरी कालेज से की। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं सोनाक्षी ने हाईस्कूल की परीक्षा 91.3 फीसदी तथा इंटर की परीक्षा 92.3 फीसदी अंकों से उत्तीर्ण की। उसके बाद उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र विषय में ऑनर्स किया। फिर दिल्ली ओपन यूनिवर्सिटी से एमए समाजशास्त्र किया। पहले प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की प्री परीक्षा उत्तीर्ण की। दूसरे प्रयास में प्री परीक्षा के साथ मुख्य परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी लेकिन इंटरव्यू में रह गईं। लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने कामयाबी हासिल कर की।वर्तमान में वे त्रिपुरा कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। 

कंचन कांडपाल

वहीं 2017 में नैनीताल के भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय के छात्र कंचन कांडपाल ने इस इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 263वीं रैंक हासिल की थी।

अपूर्वा जीजीआईसी नैनीताल में रसायन विज्ञान की शिक्षिका मीना पांडे और कोटाबाग पॉलिटेक्निक के अध्यापक किशन चंद्र पांडे की पुत्री हैं। वर्तमान में उनका परिवार अमरावती कॉलोनी हल्द्वानी में रहता है। उनके चाचा डा. विमल पांडे व चाची डा. सीमा पांडे नैनीताल में डीएसबी परिसर में भौतिकी के प्राध्यापक हैं, जबकि भाई इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट से बैचलर ऑफ मैथमेटिक्स कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2010 में नैनीताल के सेंट मेरीज स्कूल से हाईस्कूल और हल्द्वानी के बीरशिबा स्कूल से इंटर करके जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। 
अपूर्वा ने बीटेक के बाद एक वर्ष घर पर ही रह कर आईएएस की तैयारी की। इसके लिए उन्होंने बिल्कुल नए विषय राजनीतिशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संबंध चुनकर पहले ही प्रयास में सफलता की बुलंदियां छू लीं। उन्होंने बताया कि उनका बचपन से ही आईएएस बनने का ख्वाब था। इसके लिए उन्होंने भरपूर परिश्रम किया लेकिन उसके माता-पिता ने उनका सपना पूरा करने को उससे भी ज्यादा परिश्रम किया और वे ही उनके प्रेरणा स्रोत रहे। अपूर्वा ने अपने माता पिता की 23 साल की मेहनत को अपनी सफलता का श्रेया दिया। कहा कि आज इस मुकाम को हासिल करने में उनके माता पिता का बहुत बड़ा योगदान है।  दृढ निश्चय और अपने लक्ष्य को निर्धारित कर ही आज उन्होंने यह स्थान पाया है। इस लक्ष्य को पाने में काफी कठिन परिश्रम भी किया है। उन्होंने बताया की पहली बार कॉलेज में पढ़ते हुए परीक्षा के पैटर्न को समझने के लिए उन्होंने यह परीक्षा दी थी लेकिन दूसरे प्रयास में उन्हें इस परिणाम को पाने की पूर्ण उम्मीद एवं विश्वास था। 
पढ़ना और वाद-विवाद प्रतियोगितायें हैं पसंद 
अपूर्वा को बचपन से ही किताबें पढ़ने, वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने का शौक था। वादविवाद में उन्होंने अनेक पुरस्कार भी जीते और यह दोनों शौक आईएएस में मददगार भी बने।
अनुशासन और लगन से मिलती है मंजिल
अपूर्वा का कहना है कि अनुशासन, लगन, सतत प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इस परीक्षा के लिए पांच से छह घंटे पढ़ाई की। परीक्षा से तीन माह पहले से उन्होंने 12 घंटे प्रतिदिन पढ़ाई की।
शिक्षा, लैंगिक समानता प्राथमिकता रहेगी
 आईएएस बनने के बाद अपूर्व का इरादा देश की शिक्षा व्यवस्था, जेंडर की समानता के सुधार के लिए कार्य करने का है। यातायात व्यवस्था में सुधार करना भी उनकी प्राथमिकता रहेगी। 
शैलेंद्र कुमार जोशी

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(10 जून 2017) बागेश्वर जनपद के ग्राम तोली के बेटे शैलेंद्र कुमार जोशी ने इसरो में वैज्ञानिक बनकर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। उन्होंने इसरो में सेटेलाइट सेंटर बंगलूरू में ज्वाइन कर लिया है। उनकी इस कामयाबी पर उनके गांव में खुशी का माहोल है। शैलेंद्र के पिता पितांबर जोशी केंद्रीय जल आयोग हल्द्वानी में एसडीओ हैं। जबकि माता दीपा जोशी आश्रम पद्वति विद्यालय बागेश्वर में प्रधानाचार्य हैं। मूल रूप से बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील के तोली गांव का रहने वाला शैलेंद्र का परिवार अल्मोड़ा के जाखन देवी में रहता है। उनकी प्राथमिक से लेकर जूनियर तक की शिक्षा नेशनल मिशन हाइस्कूल बागेश्वर से हुई। 2008 में विवेकानंद विद्या मंदिर मंडलसेरा से 84 प्रतिशत अंक के साथ जिला टॉपर किया। 2010 में इसी स्कूल से 80 प्रतिशत अंक के साथ इंटर परीक्षा उत्तीर्ण की। विरला इंस्टूयूट ऑफ एप्लाइड सांइसेज भीमताल से बीटेक और आईआईआईटी हैदराबाद से एमटेक किया। इस बीच इसरो से आईसीआरबी के रिटर्न एक्जाम का फार्म भरा और पहले ही प्रयास में उन्हें सफलता मिल गई। 07 जून को उन्होंने इसरो सेटेलाइट सेंटर बंगलूरू में ज्वाइन किया। उनके पिता के अनुसार शैलेंद्र बच्चपन से मेधावी थे। क्विज प्रतियोगिता में वे हमेशा अव्वल रहे। उनकी बड़ी बहन गरिमा जोशी पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने कभी भी इसरो के बारे में नहीं सोचा था। हालांकि वह एक अच्छी जॉब के बारे में जरूर सोचते रहे हैं। शैलेंद्र के गांव में खुशी: जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर तोली गांव में शैलेंद्र के वैज्ञानिक बनने की खबर पहुंची, तो गांव के लोग खुशी में झूम उठे। जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने कहा कि सुविधाओं के अभाव में कपकोट के तमाम गांवों के बच्चे पढ़ाई के लिए पलायन कर रहे हैं। उनमें से एक परिवार जोशी का भी रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने कपकोट से नाज है। वैज्ञानिक बनकर राज्य का नाम रोशन किया है।

उत्तराखंड की बेटी बनी ‘मिस इंडिया खादी’

Iअपने माता-पिता व उपविजेता रही प्रतिभागियों के साथ मिस इंडिया खादी खुशबू रावत।

नैनीताल। बीता वर्ष-2017 अपनी आखिरी शाम उत्तराखंड की एक बेटी के ‘मिस इंडिया खादी-2017’ बनने की खबर लेकर आया है। मूलतः अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण के ग्राम बघाड़ की तथा नैनीताल के राजकीय पॉलीटेक्निक क्षेत्र में रहने वाले राजकीय वाहन चालक हीरा सिंह रावत व गृहणी दीपाली रावत की होनहार बेटी खुशबू रावत ने बीते वर्ष के आखिरी दिन दिल्ली के ताज होटल में केंद्रीय खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा खादी के वस्त्रों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित प्रतियोगिता को जीतकर ‘मिस इंडिया खादी’ का तमगा हासिल किया। वर्तमान में निफ्ट यानी नॉदर्न इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी चंडीगढ़ की द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा खुशबू इससे पूर्व ‘मिस हरियाणा-खादी’ भी रह चुकी हैं। बताया गया है कि इस प्रतियोगिता के दिल्ली में आयोजित हुए ऑडिशन में देश के करीब 200 विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थान की करीब 50 हजार छात्राओं ने हिस्सा लिया था। इसका ऑडिशन दिल्ली में कराया गया था। इस प्रतियोगित में खूशबू को हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए पहला जबकि मोहाली चंडीगढ़ की घुरलीन मधोक को दूसरा स्थान मिला है। उन्होंने 12वीं कक्षा नैनीताल के ही मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी।

ज्योलीकोट के धवल शेखर जोशी बने आईटीबीपी में अधिकारी

धवल जोशी को आईटीबीपी में सहायक सेनानायक पद के लिए तैयार करते माता-पिता।

नैनीताल। मुख्यालय के निकटवर्ती ज्योलीकोट के ग्राम भल्यूटी निवासी रमेश चंद्र जोशी के पुत्र धवल शेखर जोशी आईटीबीपी में सहायक सेनानायक के पद पर नियुक्त हो गये हैं। गत दिवस आयोजित हुई आईटीबीपी की पासिंग आउट परेड में उन्हें सहायक सेनानायक पद प्रदान किया गया। धवल के बड़े भाई रजत जोशी भी सेना में मेजर पद पर हैं, जबकि पिता उत्तराखंड पुलिस में उपाधीक्षक पद से सेवानिवृत्त एवं माता ललिता जोशी गृहणी हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा बरेली से हुई है, जबकि वे कक्षा छह से 12 तक सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में पढ़े हैं। जिसके बाद उन्होंने एमेटी यूनिवर्सिटी से बीटेक किया। उनकी उपलब्धि पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य लोगों ने हर्ष जताया है।

इतिहास रच, वीरों की भूमि-उत्तराखंड का लाल बना एनडीए का टॉपर

शिवांश जोशी
सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने के जुनून ने बनाया शिवांश को एनडीए का टाॅपर

रवीन्द्र देवलियाल, नैनीताल, 26 नवम्बर। सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का जुनून उत्तराखंड के एक होनहार छात्र पर ऐसा छाया कि उसने आज के दौर में प्रचलित आईआईटी व एनआईटी जैसे विकल्पों को छोड़कर, एनडीए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी की प्रवेश परीक्षा दी और इस सर्वोच्च परीक्षा में देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर अपना, अपने परिवार, शहर व प्रदेश का नाम रोशन करते हुए इतिहास रच दिया है। दिलचस्प बात यह कि छात्र शिवांश जोशी देश के पहले सेनाध्यक्ष जनरल सैम मानेकशॉ,  पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा, पूर्व सेना प्रमुख जनरल बीसी जोशी, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी व वर्तमान सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत जैसे वीरों की भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड के एक छोटे से कस्बे रामनगर का रहने वाला है। शिवांश की इस उपलब्धि से सैनिक पृष्ठभूमि वाला पूरा उत्तराखंड झूम उठा और गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उम्मीद करनी होगी कि शिवांश सत्य एवेम सुन्दर के सहगामी सृष्टि के संहारक ‘शिव’ के ‘अंश’ के रूप में देश की सुरक्षा के आगे मिलने वाले दायित्व में भी अपने नाम को साकार करेगा।

शिवांश जोशी (17) कार्बेट सिटी के नाम से प्रसिद्ध रामनगर के भवानीगंज स्थित पंचवटी कालोनी का रहने वाला है। शिवांश एक सामान्य परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता सुभाष जोशी भारतीय जीवन बीमा निगम में सहायक प्रशासनिक अधिकारी, और मां तनूजा जोशी अध्यापिका हैं। शिवांश जोशी ने गत 24 अप्रैल को संपन्न एनडीए की प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया था। आज घोषित परिणाम में शिवांश ने 97 प्रतिशत अंक हासिल कर देश भर के 371 अभ्यर्थियों में प्रथम स्थान हासिल किया है।

शिवांश ने इसी साल काशीपुर के लिटिल स्काॅलर स्कूल से 12वीं की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की है। शिवांश की इस उपलब्धि पर परिवारजन अत्यधिक प्रसन्न महसूस कर रहे हैं। पिता सुभाष जोशी ने बताया कि शिवांश को सेना में अफसर बनकर देश सेवा करने का बड़ा शौक है, और उसी जुनून से उसने यह स्थान हासिल किया है। मृदुभाषी शिवांश अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता पिता और गुरूजनों को देता है। शिवांश की इस उपलब्धि पर उत्तराखंड के लोगों खासकर सैनिकों व उनके परिवारजन गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

एनडीए प्रवेश परीक्षा के लिए शिवांश जोशी को मुख्यमंत्री ने दी बधाई

एनडीए प्रवेश परीक्षा में देशभर में टाॅप करने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शिवांश जोशी एवं उसके परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने शिवांश जोशी के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शिवांश ने अपनी लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह सफलता हासिल की है। इससे अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के लोगों में देशप्रेम का असीमित जज्बा है। उत्तराखण्ड ने ऐसे बहुत से वीर सपूत दिये हैं जो देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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