December 13, 2025

कुमाऊं विश्वविद्यालय की शाख पर प्रश्न, आरोप : यहाँ 20 वर्ष से पवन की जगह प्रमोद कर रहा प्रवक्ता की नौकरी !

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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अप्रैल 2025 (Questions on Kumaon University-Pramod-Pawan Case)। कुमाऊं विश्वविद्यालय में कई बार अजीबोगरीब विवाद हो जाते हैं। अब यहाँ दो अभ्यर्थियों के मिलते-जुलते नामों के चलते भौतिकी विभाग में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस मामले में इंदिरापुरम, गाजियाबाद निवासी चयनित अभ्यर्थी पवन कुमार मिश्र पुत्र इंद्रजीत मिश्र की ओर से दायर याचिका पर नैनीताल उच्च न्यायालय ने सुनवाई की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने इस नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित समस्त अभिलेख कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस याचिका पर अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2025 को निर्धारित की गई है।

पवन की जगह प्रमोद को षड्यंत्रपूर्वक नियुक्त करने का आरोप

(Questions on Kumaon University-Pramod-Pawan Caseपवन कुमार मिश्र ने अपनी याचिका में कहा है कि वर्ष 2005 में उनका चयन कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर स्थित भौतिकी विभाग में प्रवक्ता पद के लिए हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया है कि इसी नाम से मिलते-जुलते प्रमोद कुमार मिश्रा पुत्र लक्ष्मी शंकर मिश्रा (पी.के. मिश्रा) को षड्यंत्रपूर्वक नियुक्ति दे दी गई। याचिकाकर्ता के अनुसार यह षड्यंत्र तत्कालीन कुलसचिव, विज्ञान संकायाध्यक्ष, भौतिकी विभागाध्यक्ष और अन्य संबंधित कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया, जिसके अंतर्गत प्रमोद कुमार मिश्रा को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया।

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बीस वर्षों बाद आया मामला सामने

पवन कुमार मिश्र के अनुसार उन्हें इस गंभीर नियुक्ति त्रुटि की जानकारी लगभग बीस वर्षों बाद नवंबर 2024 में हुई। उन्होंने तत्काल कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल सहित मुख्यमंत्री उत्तराखंड को भी पत्र प्रेषित कर न्याय की गुहार लगाई, किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके उपरांत उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

अदालत ने तलब किया अभिलेख, अगली सुनवाई 30 अप्रैल को

हाईकोर्ट ने याचिका पर प्राथमिक सुनवाई करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रशासन से इस नियुक्ति से संबंधित संपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। यह मामला नियुक्ति प्रक्रियाओं की पारदर्शिता व उत्तरदायित्व से जुड़ा होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय में अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2025 को होगी, जिसके दौरान विश्वविद्यालय के दस्तावेजों के आधार पर अगली कार्यवाही तय होगी।

विवि की छवि दांव पर, कार्रवाई की मांग तेज

शिक्षाविदों का मानना है कि यदि नियुक्ति में इस प्रकार की गड़बड़ी सिद्ध होती है, तो यह न केवल विश्वविद्यालय की शुचिता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाएगा, बल्कि पूर्व में हुई अन्य नियुक्तियों की निष्पक्षता पर भी संदेह उत्पन्न करेगा। ऐसे में यह मामला केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति का नहीं, अपितु संस्था की साख का प्रश्न बन गया है। याचिकाकर्ता ने मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई एवं नियुक्ति को अवैध घोषित करने की मांग की है।

30 अप्रैल को हो सकती है दिशा तय (Questions on Kumaon University-Pramod-Pawan Case)

अब सभी की निगाहें 30 अप्रैल की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या नियुक्ति प्रक्रिया में वास्तविक गड़बड़ी हुई है अथवा नहीं। यदि अदालत को याचिकाकर्ता के आरोपों में तथ्य मिलते हैं, तो कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रशासन को बड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, वर्तमान में प्रवक्ता पद पर कार्यरत प्रमोद कुमार मिश्रा की नियुक्ति भी निरस्त हो सकती है। (Questions on Kumaon University-Pramod-Pawan Case, Nainital News, Kumaon Univesity News, Court News, High Court News)

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