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मध्य प्रदेश : कमलनाथ सरकार की बुझी ‘ज्योति’, फिर ‘कमल’ सरकार…!

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ज्योतिरादित्य सहित 20 कांग्रेस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ी, होंगे भाजपा में शामिल

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 10 मार्च 2020। मध्य प्रदेश में सियासी उठापटक अपने चरम पर पहुंचती नजर आ रही है। अपने पिता के जमाने से, पिछले 18 वर्षों से कांग्रेस पार्टी के नेता, मध्य प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कल यानी 9 मार्च को ही अपना इस्तीफा कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया था। सोमवार को उन्होंने अपने ट्विटर के जरिए इसकी औपचारिक तौर पर घोषणा भी कर दी है। सिंधिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने जा रहे हैं। इसके बाद सिंधिया के भाजपा में आज शाम को ही शामिल होने की चर्चाएं गर्म हैं। चर्चा है शाम को होने वाली बीजेपी सीईसी की बैठक से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल हो जाएंगे। उल्लेखनीय है कि ज्योतिरादित्य के पिता माधव राव सिंधिया अपनी माता राजमाता विजयराजे सिंधिया की नाराजगी के बावजूद कांग्रेस में थे, जबकि राजमाता पूरी जिंदगी कांग्रेस के उलट जनसंघ व भाजपा में रहीं।

देखें ज्योतिरादित्य सिंधिया का इस्तीफे वाला ट्वीट :

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के 20 सिंधिया समर्थक बताए जा रहे मंत्रियों-विधायकों के भी नौ मार्च को ही इस्तीफा देने की खबरें हैं। जबकि एक विधायक पहले ही विधान सभा से इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ की कुुर्सी जाने और मध्य प्रदेश में एक बार फिर कमल खिलने की बातें सियासी हलकों में तैरने लगी हैं। सोनिया गांधी को भेजे गए इस्तीफे में सिंधिया ने अपना दुख बयां किया है। उन्होंने लिखा है कि उनके अंदर जो कुछ भी चल रहा था, वह विधानसभा चुनाव के वक्त से ही चल रहा था।

यह भी पढ़ें : देश के लिये बड़ा समाचार : ब्रिटेन तथा फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया की 5वीं अर्थव्यवस्था बना भारत..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 18 फरवरी 2020। कई नकारात्मक खबरों के बीच मोदी सरकार के लिए आखिर एक बड़ी अच्छी खबर आई है। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। 2.94 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ भारत ने साल 2019 में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले पांच साल के भीतर भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है।
अमेरिका के शोध संस्थान वर्ल्ड पॉपुलेशन रीव्यू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आत्मनिर्भर बनने की पूर्व की नीति से भारत अब आगे बढ़ते हुए एक खुली बाजार वाली अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में भारत 2.94 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। इस मामले में उसने 2019 में ब्रिटेन तथा फ्रांस को पीछे छोड़ दिया।’ न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 2.83 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि फ्रांस का 2.7 ट्रिलियन डॉलर है। क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) के आधार पर भारत का जीडीपी 10.51 ट्रिलियन डॉलर है और यह जापान तथा जर्मनी से आगे है। हालांकि, भारत में अधिक आबादी के कारण प्रति व्यक्ति जीडीपी महज 2170 डॉलर है। अमेरिका में प्रति व्यक्ति जीडीपी 62,794 डॉलर है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत की रियल जीडीपी वृद्धि दर लगातार तीसरी तिमाही में कमजोर रह सकती है और 5 फीसदी के आसपास रह सकती है।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति ने की राजमाता को ‘राष्ट्रीय रत्न’ देने की मांग

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जनवरी 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केएस राणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राजमाता विजयराजे सिंधिया को ‘राष्ट्रीय रत्न’ देने की मांग उठाई है। प्रो. राणा ने अपने पत्र को अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर भी साझा किया है। हम यहां प्रो. राणा के पत्र को ज्यों का त्यों प्रकाशित कर रहे हैं। पढ़िए प्रो. राणा का प्रधानमंत्री को लिखा पत्र :

माननीय मोदी जी
प्रधान मंत्री ,
भारत सरकार , दिल्ली

राजमाता विजयाराजे सिंधिया क्या राष्ट्रीय रत्न की हक़दार नहीं ..?

सरलता, सहजता और संवेदनशीलता की त्रिवेणी ;भारतीय राजनीति में उन्होंने मध्य प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री डी.पी. मिश्रा की सरकार को जब गिराया और जनसंघ के विधायकों के समर्थन से स्व. गोविंद नारायण सिंह को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था, तभी से लोग राजनैतिक तौर पर राजमाता की ताकत का एहसास करने लगे थे।
उन्हें राजमाता के नाम पर अवश्य जानते थे, पर जिस दिन उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस की सरकार पलटी थी और गठबंधन की सरकार बनाई थी, उसी समय लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि अब राजमाता विजयाराजे सिंधिया जनसंघ की सदस्यता ग्रहण कर लेंगी।
हुआ भी यही, और राजमाता ने जनसंघ की सदस्यता ग्रहण की। अटलजी और आडवाणीजी से चर्चा कर भारतीय जनसंघ की राजमाता से लोकमाता की ओर अग्रसर होने लगीं। उनका कुशाभाऊ ठाकरे से बहुत लगाव था। वे उन्हें पुत्रवत मानती थीं। उन्होंने बिना कुशाभाऊ ठाकरे से पूछे कभी कोई राजनैतिक निर्णय नहीं लिया।
राजमाता के पुत्र स्व. माधवराव सिंधिया और राजमाता के तत्कालीन सहयोगी स्व. महेन्द्र सिंह कालूखेडा, दोनों ही जनसंघ से चुनाव लड़े। राजमाता ने स्व. माधवराव सिंधिया को पहली बार सांसद का चुनाव भारतीय जनसंघ से लड़ाया और वे भारतीय जनसंघ के सांसद बने। इसी तरह महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा भी जनसंघ से ही निर्वाचित हुए, स्व. माधवराव सिंधिया सदैव अपनी माता जी के साथ रहे।
धीरे-धीरे राजमाता जनसंघ की नेता के नाते पूरे देश में उनका अखंड दौरा प्रारम्भ हुआ। भारतीय जनसंघ को एक सशक्त महिला नेत्री मिली। राजमाता पूरी तरह अपने चुनाव चिह्न “दीए“ को लेकर गांव-गांव पहुंचने लगीं। भारतीय जनसंघ की वैचारिक पृष्ठभूमि तेजी से तैयार होने लगी। इस बीच देश में स्व. इंदिराजी ने आपातकाल लगा दिया। इस दौरान “राजमाता’ को इंदिराजी ने बुलाया और कहा कि आप बीस सूत्रीय का समर्थन करें। इंदिराजी की इस बात पर राजमाता उनके सामने खड़ी हो गईं, उन्होंने इंदिरा जी से साफ तौर कहा कि “मैं” जीवन में कांग्रेस के बीस सूत्रीय का समर्थन नहीं करूंगी। मैं जनसंघ की विचारधारा को नहीं छोडूंगी।” राजमाता ने आगे कहा कि मैं जेल जाना पंसद करूंगी-लेकिन आपातकाल जैसे काले कानून का कभी समर्थन नहीं करूंगी। विचारधारा के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता और समर्पण ही देश में और दल में उन्हें रातों रात ऊंचाई पर ले गयी। धीरे-धीरे उनका संपर्क अनेक वरिष्ठ लोगों से होने लगा।

राजमाता जेल गईं, पर इंदिरा जी के सामने झुकी नहीं। किंतु .. आपातकाल के भय से माधवराव सिंधिया भारत छोड़कर चले गए, उन्होंनें “माँ” की तरह हिम्मत नहीं दिखाई। लोगों का मानना है कि “वे” घबड़ा गए, यहीं पर राजमाता ने कहा कि मुझे ऐसा लगा रहा था ‘भैया’ माधवराव भी इंदिराजी के आगे नहीं झुकेंगे पर ऐसा नहीं हुआ। पता नहीं स्माधवराव सिंधिया कहां चले गए, सन् 1977 में चुनाव हुए तो स्माधवरावजी जनसंघ के बजाए गुना से लोकसभा चुनाव निर्दलीय लड़े। वहीं जब जनता पार्टी चली गई तो स्माधवराव सिंधियाजी कांग्रेस में चले गए, राजमाता को अच्छा नहीं लगा। उनका कहना था कि जिस इंदिराजी ने उन्हें 19 महिने जेल की कालकोठरी में बिना वजह डाल दिया था, और मुझे यातनाएं दी थीं, ऐसी इंदिराजी की पार्टी में “भैया” को नहीं जाना था। सन् 1980 में राजमाता को जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष चन्द्रशेखर ने आग्रह किया कि “वे” इंदिरा गांधी के विरुद्ध जनता पार्टी की ओर से रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ें। राजमाता ने कहा कि जो पार्टी तय करे। राजमाता रायबरेली गईं और इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ीं। वे पीछे नहीं हटीं। वे चुनाव हार गईं। लेकिन उन्होंने संगठन के निर्णय को बिना किसी विरोध के शिरोधार्य किया। संगठन निष्ठ होने को यह अनुपम उदाहरण है। जनता पार्टी की सरकार केन्द्र में बनी। उस समय तत्कालीन नेताओं को अनेक सरकारी पद दिये गये। पर राजमाता ने उसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने सदैव संगठन को ही महत्व दिया।
एक ऐसा क्षण आया कि राजमाता को बैंक बैलेंस से अपना पैसा निकालने पर तत्कालीन कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने आपातकाल में रोक लगा दी थी। राजमाता ने विश्व हिन्दू परिषद के तत्कालीन महासचिव अशोक सिंघल को विहिप के लिए एक लाख रूपये दान देने की घोषणा कर दी। वे जेल चली गईं। आपातकाल हटा और राजमाता जेल से बाहर आयीं तो उन्होंने अशोक सिंघल से कहा कि मुझे आपको अशोक जी एक लाख रूपये देने हैं। लेकिन मेरे खाते पर रोक लगी है। मैं खाता ऑपरेट नहीं कर सकती। अतः आप एक काम करें कि यह मेरी हीरे की अंगूठी है, इसे कहीं देकर एक लाख रूपये ले लें। यह बात मैं इसलिए कह रही हूं कि मैंने आपको वचन दिया था। श्री अशोक सिंघल ने कहा कि राजमाताजी आपका इतना कहना ही हमें प्रेरणा देता है। इसी बीच श्रीमती यशोधरा राजे ने अम्मा महाराज से कहा कि “अम्मा” आप ये क्या कर रही हैं। यह तो आपकी अंगुली में महाराज साहब की निशानी है। आप चिंता नहीं करें हम विहिप को यह राशि दे देंगे। इस पर राजमाता ने यशोधरा राजेजी से कहा की वचन की प्रतिबद्धता मेरे लिए पहले है, इसलिए मैं यह आग्रह कर रही हूँ। राजमाता की इस घटना को जब याद करते हैं तो मन भाव विभोर हो जाता है। साथ ही लगता है कि उनकी अपने वचन के प्रति कितनी बड़ी प्रतिबद्धता थी। वचन की प्रतिबद्धता से व्यक्ति के चरित्र को समाज स्वीकरता है।
राजमाता सात्विक और आध्यात्मिक थीं।
राजमाता की सैद्धान्तिक प्रतिबद्धता का अनुपम उदाहरण उस समय आया, जब माधवराव सिंधिया जनसंघ छोड़कर कांग्रेस में चले गए। उन्हें बहुत दुख हुआ ऐसे अवसर पर उन्होंने कहा कि मेरा एक बेटा मुझे छोड़कर चला गया। लेकिन आज भाजपा के लाखों बेटे मेरे साथ हैं। उनके जीवन के एक नहीं अनेक उदाहरण ऐसे हैं, जो हमें सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।एक बार प्रख्यात वकील श्री राम जेठमलानी के मुकदमे में ग्वालियर हाईकोर्ट आए। उनके आगमन पर कांग्रेस के लोगों ने उन पर पथराव किया। जेठमलानी के सिर में चोट आयी। उस समय राम जेठमलानी भाजपा में थे। राजमाता को जब ज्ञात हुआ तो वे भाजपा का झंडा लेकर स्वयं ग्वालियर के इंदरगंज थाने में हजारों कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचीं और रिपोर्ट दर्ज करायी। उन्होंने अपने ऊपर कभी भी राजघराने या राजशाही को हावी नहीं होने दिया। वे राजमाता होते हुए सदैव लोकमाता के मार्ग पर चलीं। यही कारण है कि देश ने उन्हें लोकमाता के रूप में स्वीकार किया।
राजमाताजी वात्सल्य की धनी थीं। वे ममतामयी थीं। उन्हें एक बार जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की दृष्टि से सन् 1972 में स्वयं अटलजी और आडवाणीजी उनके पास आए, राजमाता से दोनों नेताओं ने चर्चा की। राजमाता ने कहा कि मुझे एक दिन का समय चाहिए। राजमाता आध्यात्मिक भी थीं। वे दतिया पीताम्बरा पीठ गईं, अपने गुरु जी से चर्चा की और लौटीं तो उन्होंने अटलजी और आडवाणीजी से कहा कि वे भारतीय जनसंघ की सेवा एक कार्यकर्ता के रूप में सदैव करती रहेंगी। उन्हें पदों के प्रति कभी आकर्षण नहीं रहा।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भारतीय राजनीति में महिला के नाते देश में एक आदर्श कायम किया। जनसंघ से भाजपा तक उनकी यात्रा में उनेक उतार-चढ़ाव आए, पर उन्होंने अपने सिद्धांत और विचारधारा के प्रति जो समर्पण रहा उसे कभी नहीं छोड़ा। भारतीय राजनीति में उनकी आदर्श भूमिका के कारण ही केन्द्र सरकार और मध्य प्रदेश की सरकार ने साथ ही भाजपा संगठन ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जन्म शताब्दी मनाने का निर्णय किया। राजमाता के प्रति सरकार और संगठन का यह निर्णय स्वयं जाहिर करता है कि राजमाता का क्रतित्वत्कितना महान था ..!

सवाल है क्या वो राष्ट्रीय रत्न की हक़दार नहीं ..? कृपया गम्भीरता से विचार करें !

यह भी पढ़ें : शादी के कार्ड पर लिखा-हम CAA-NRC का….

नवीन समाचार, देहरादून, 20 जनवरी 2020। देश के कई शहरों, खासकर दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के बीच देहरादून के एक युवक ने शादी के कार्ड के जरिए से सीएए और एनआरसी पर अलग तरीके से अपना समर्थन जताया है। 26 वर्षीय मोहित मिश्रा ने कार्ड पर छपवाया है, ‘हम सीएए और एनआरसी का समर्थन करते हैं।’

देखें CAA-NRC पर नैनीताल में बनी व खूब लोकप्रिय हुई देश की पहली लघु फ़िल्म :

मूलतः यूपी के संभल के रहने वाले व इधर पिछले सात सालों से रह रहे, एक प्राइवेट कॉस्मेटिक कंपनी में बतौर मार्केटिंग मैनेजर काम करने वाले मोहित की आगामी तीन फरवरी को शादी है। मिश्रा का कहना है कि देश का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते उन्हें लगता है कि सीएए और एनआरसी दोनों ही देश के हित के लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि शादी में आने वाले सभी मेहमानों और उनके माता-पिता को यह आईडिया काफी बढि़या लगा है। मोहित ने कहा, ‘मेरे पिता ने संभल में यूपीएसआरटीसी का कर्मचारी होने के नाते इसका पूरा समर्थन किया है। उन्होंने देखा कि जिले में सीएए के प्रदर्शनकारियों ने बसों को कैसे नुकसान पहुंचाया। मेरी होने वाली पत्नी ने भी इस कदम की सराहना की है।’ हालांकि, मोहित ने अपने फैसले के पीछे किसी भी राजनीतिक दल के प्रति निष्ठा से इनकार भी किया है। उन्होंने कहा कि मैं किसी पार्टी का समर्थक नहीं हूं, मैंने देश के लिए ऐसा किया है। मोहित के चाचा ने भी उनके इस कदम की सराहना करते हुए की अगर वह सीएए और एनआरसी के समर्थन के लिए जीवन के इस अवसर को चुन रहा है। हम सब उसके साथ हैं।

यह भी पढ़ें : दो बार के कांग्रेसी सांसद भाजपाई अभियान में सीएए के पक्ष में आये…!

-दो बार के कांग्रेसी सांसद ने भाजपाई अभियान में सीएए के पक्ष में हस्ताक्षर किए

नवीन समाचार, काशीपुर, 15 जनवरी 2020। 14वीं एवं 15 मई लोकसभा में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के सांसद रहे, कुमाऊं के चंद राजवंश के राजकुमार केसी सिंह बाबा पार्टी की विचारधारा से हटकर सीएए यानी नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में उतर आए हैं। उन्होंने मंगलवार को शहर में भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा सीएएए के पक्ष में आयोजित हस्ताक्षर अभियान में बड़े होल्डिंग में हस्ताक्षर किए और भारतीय जनता युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं के साथ फोटो भी खिंचवाई। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी की ओर से कथित तौर पर दबाव बढ़ने पर कह दिया गलती-धोखे से हस्ताक्षर कर बैठे।उल्लेखनीय है कि श्री बाबा पूर्व में भी देश हित के मुद्दों पर पार्टी की विचारधारा से इतर खुलकर अपने विचार रखते रहे हैं,और पूर्व में भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में भी जा चुके हैं।

यह भी पढ़ें : भाजपा ने सीएए के समर्थन में जुलूस निकालकर यह भी किया…

नैनीताल विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को निकटवर्ती भवाली नगर में नागरिकता संशोधन अधिनियम-सीएए के समर्थन में विशाल जन जागरण रैली निकाली। इस दौरान मुख्यालय के पार्टी कार्यकर्ता भी भवाली नगर में जुटे और राष्ट्रध्वज तिरंगा हाथों में लहराते हुए आम जन को नागरिक संशोधन अधिनियम के पक्ष में जागरूक किया। साथ ही जनता को विपक्ष की सीएए के विरोध पर भी आईना दिखाया। रैली की अगुवाई करते हुए विधायक संजीव आर्य ने कहा कि देश में नागरिक संशोधन अधिनियम के विरोध में विपक्षी दलों द्वारा देश में भ्रम और विरोध की स्थिति बनाई जा रही है और जनता को भड़काकर आगजनी, तोड़फोड़ और दंगे-फसाद करवाये जा रहे हैं, वह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। प्रदर्शन में भवाली के नगर पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा, नैनीताल मंडल अध्यक्ष आनंद बिष्ट, पूर्व अध्यक्ष मनोज जोशी, भवाली मंडल अध्यक्ष पुष्कर जोशी, विवेक साह, दयाकिशन पोखरिया, कुंदन बिष्ट, भावना मेहरा व अरविंद पडियार आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। रैली के जरिये भाजपा ने अपने संगठन में नया जोश भरने के साथ भवाली नगर में अपनी ताकत का अहसास भी कराया।

यह भी पढ़ें : जेएनयू हिंसा पर नैनीताल में बोले देश के पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल, कहा-बर्खास्त हों कुलपति व पुलिस कमिश्नर

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जनवरी 2020। केंद्रीय कानून मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने दिल्ली के जेएनयू यानी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में गत दिवस हुई हिंसा के लिए जेएनयू के कुलपति एवं दिल्ली पुलिस के आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग की। मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सीबीआई से संबंधित मामले की पैरवी करने के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय आए सिब्बल पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे।
जेएनयू की हिंसा पर देश के मानव संशाधन मंत्री डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के शिक्षा के मंदिर में हिंसा की निंदा करने की बात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिब्बल ने कहा, जेएनयू में हिंसा कौन फैला रहा है। सबको पता है। कहा कि पुलिस की मौजूदगी में नकाबपोश जेएनयू के भीतर चले गए और कुलपति मूकदर्शक बने रहे। इसलिए मामले में कुलपति एवं पुलिस आयुक्त को कार्य में लापरवाही करने के लिए बर्खास्त किया जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि हरीश रावत मामले में उच्च न्यायालय से आज ही सुनवाई करने का निवेदन किया। इसीलिए वे दिल्ली से यहां आए भी थे। लेकिन सीबीआई मामले को लटकाना चाहती है। न्यायालय ने आज मामले में अगली सुनवाई की तिथि दो मार्च तय करते हुए यह भी दोहराया कि बिना न्यायालय की इजाजत के सीबीआई कुछ नहीं कर सकती है। इस मौके पर कांग्रेस नेता डा. रमेश पांडे सहित अन्य स्थानीय कांग्रेस नेता भी उनके साथ रहे।

यह भी पढ़ें : नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा से पास, पक्ष में 311 जबकि विपक्ष में 80 वोट पड़े

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2019। रात्रि के ठीक 12 बजे जब देश की बड़ी आबादी सो रही होगी, देश की संसद ने जागते हुए नागरिक संशोधन बिल पास कर दिया है। बिल के समर्थन में 80 के सापेक्ष 311 सदस्यों ने मतदान किया। आगे राज्य सभा इस बिल के लिए बड़ी बाधा व चुनौती हो सकती है। नागरिता संशोधन विधेयक को लेकर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बिल लाखों करोड़ों लोगों को यातना से मुक्ति देगा। उन्होंने कहा कि यह बिल किसी समुदाय विशेष के लिए नहीं है बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए है। उन्होंने इस बिल से आर्टिकल 14 के समानता के अधिकार के उल्लंघन के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस आर्टिकल में भेदभाव वाले किसी कानून को पारित करने पर रोक लगाई गई है, लेकिन यह बिल किसी धर्म नहीं बल्कि वर्ग के लिए लाई गई है, जो शरणार्थी हैं।

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धर्म के आधार पर देश न बंटता तो न आता यह बिल

गृह मंत्री ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि अच्छा तो यह होता कि इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता। ऐसा न होता तो फिर यह बिल लाने की जरूरत ही न पड़ती। धर्म के आधार पर विभाजन हुआ, जहां मुस्लिम भाई अधिक थे वह पाकिस्तान बना। फिर पाकिस्तान में भी विभाजन हुआ और एक हिस्सा बांग्लादेश में तब्दील हुआ। लेकिन इस बीच एक विभीषिका आई और लाखों लोगों को यातना झेलनी पड़ी।

पाक, बांग्लादेश से कहां गायब हुए अल्पसंख्यक
अमित शाह ने कहा कि 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23 पर्सेंट थी, लेकिन 2011 में 3.7 पर्सेंट हो गई। बांग्लादेश में 47 में 22 प्रतिशत आबादी 22 प्रतिशत थी, लेकिन 2011 में यह 7.8 पर्सेंट हो गई। आखिर ये लोग कहां चले गए या तो मार दिए गए। भगा दिए गए या फिर धर्मांतरण हो गए। आखिर उनका क्या दोष था। हम चाहते हैं कि इन लोगों का सम्मान बना रहे। कहा जा रहा है कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने जा रहा है।

‘भारत में हिंदू कम हुए, मुस्लिमों की आबादी बढ़ी’
अमित शाह ने कहा कि भारत के अंदर 1951 में 84 पर्सेंट हिंदू था, लेकिन 2011 में 79 पर्सेंट हो गया। 1951 में मुस्लिम 9.8 पर्सेंट था, लेकिन आज 14.23 प्रतिशत है। हमने किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया। मैं इस सदन को यकीन दिलाना चाहता हूं कि आगे भी ऐसा नहीं होगा। लेकिन पड़ोसी देशों में यदि अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता है तो उन्हें बचाना होगा। भारत चुप नहीं रह सकता।

शाह ने बताया, कैसे आर्टिकल 14 का उल्लंघन नहीं

आर्टिकल 14 को लेकर शाह ने कहा कि यह कहा गया है कि जिसमें समानता का अधिकार न हो, वह कानून संसद नहीं बना सकती। आप समझिए कि इसमें किसी धर्म के लिए नहीं हुआ है बल्कि क्लास के लिए हुआ है। इसमें किसी एक धर्म के लिए नहीं है। इसलिए इस नियम का कोई उल्लंघन नहीं है। प्रताड़ित माइनॉरिटी के लिए कानून बनाने पर अनुच्छेद का कोई उल्लंघन नहीं होता है। यदि आर्टिकल 14 के तहत ऐसा नहीं होता सकता है फिर माइनॉरिटी संस्थान क्यों बने हैं।

‘रोहिंग्याओं को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा’
रोहिंग्या को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। म्यांमार सेक्युलर देश है और रोहिंग्या बांग्लादेश से होते हुए यहां आना चाहते हैं। मैं यह स्पष्ट कर दूं कि उन्हें कभी भी भारत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

‘कांग्रेस जैसी पार्टी नहीं, कहीं लीग, कहीं शिवसेना साथ’
अमित शाह ने कहा कि मैंने कांग्रेस जैसी गैर-सांप्रदायिक पार्टी अपनी जिंदगी में नहीं देखी। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ है और महाराष्ट्र में शिवसेना कांग्रेस के साथ है।

‘अब न लम्हों में खता होगी, न सदियां सजा पाएंगी’
होम मिनिस्टर अमित शाह ने मनीष तिवारी की ओर से पारसियों को शरण दिए जाने के उदाहरण पर बात करते हुए कहा वे भी धार्मिक उत्पीड़न के चलते ही आए थे और यहां भी ऐसा ही है। मनीष तिवारी के शेर का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है और अब न लम्हों की खता होगी और न सदियों तक सजा मिलेगी।

‘पूर्वोत्तर के लोगों को चिंता की जरूरत नहीं’

पूर्वोत्तर भारत को लेकर अमित शाह ने कहा कि मिजोरम, नगालैंड और मणिपुर में इनर लाइन परमिट लागू होगा। इसके चलते किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। असम, त्रिपुरा, मेघालय और अरुणाचल को भी किसी तरह की चिंता नहीं होनी चाहिए।

कांग्रेस ने आखिर क्यों स्वीकार किया देश का बंटवारा?
सावरकर की ओर से द्विराष्ट्र सिद्धांत दिए जाने के कांग्रेस के आरोपों को लेकर शाह ने कहा कि आखिर जब देश कि विभाजन हुआ तो कांग्रेस ने इसका विरोध क्यों नहीं किया। धर्म के आधार पर देश का विभाजन कांग्रेस ने ही स्वीकार किया था।

TMC पर किया वार तो सदन में हंगामा

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के भाषण का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि उन्होंने टैगोर और बंकिम चंद्र चटर्जी का जिक्र किया। लेकिन क्या टैगोर का बंगाल ऐसा था, जिसमें किसी को दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन की अनुमति के लिए कोर्ट जाना पड़ेगा।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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