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आरबीआई गवर्नर व संयुक्त राष्ट्र महासचिव के नाम से हो रही धोखाधड़ी की कोशिष

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RBI Letter
RBI Letter

-अनेक लोगों को आए ईमेल में चार करोड़ रुपए देने का झांसा देकर मांगे जा रहे 19,500 रुपए
नवीन जोशी, नैनीताल। अब तक शातिर अपराधियों के द्वारा झूठे नामों से इंटरनेट के माध्यम से ठगी के प्रयास करने के ही मामले प्रकाश में आते रहे हैं, लेकिन इधर अनेक लोगों के पास आए ईमेल में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर एवं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के नाम से ठगी करने का अपनी तरह का अनूठा मामला प्रकाश में आया है। ठगी भी इन बड़े नामों की तरह बड़ी धनराशि की ही करने की कोशिष की जा रही है। इन ईमेल में संबंधित व्यक्ति की चार करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि देने का झांसा दिया जा रहा है, और इस धनराशि को प्राप्त करने के लिए 19,500 रुपए बैंक खाते में जमा करने को कहा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि अमूमन लोगों को करोड़ों रुपए की लॉटरी निकलने के झांसे देकर लूटने के अनेक मामले प्रकाश में आते रहते हैं, लेकिन ताजा मामला देश के सबसे बड़े भारतीय रिजर्व बैंक के साथ ही विश्व की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ के नाम से की जा रही धोखाधड़ी से जुड़ा है। इसलिए उम्मीद की जा रही है आगे देश और दुनिया में इस दिशा में कोई कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। अनेक लोगों को भेजे गए ई-मेल मिल रेह हैं, जिनमें बताया गया है कि 25 अगस्त को ही भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर एवं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने 25 अगस्त को ही आरबीआई मुम्बई व दिल्ली की टैक्स कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक की और आरबीआई में लंबे समय से किसी के द्वारा अपनी ना बताई जा रही (अनक्लेम्ड) बड़ी धनराशि को जिन लोगों की है, उन्हें वापस लौटाने को निर्णय लिया गया। पत्र के अनुसार डा. राजन ने कहा कि सरकार के द्वारा किसी अन्य के धन को अपने पास रखना अच्छी बात नहीं है। इसलिए संबंधित व्यक्ति का पांच लाख डॉलर यानी चार करोड़ 14 हजार 667 रुपए 91 पैंसे अवमुक्त कर दिए जाएंगे। इसके लिए आरबीआई की कमेटी ने वादा भी कर दिया है। इसके लिए व्यक्ति को तत्काल क्रेडिट फीस के रूप में 19,500 रुपए बैंक में नगद जमा करने होंगे। उल्लेखनीय है कि जिस ई-मेल पर संपर्क करने को कहा गया है वह (रिमीटेंस एट द रेट मैनेजर डॉट इन डॉट टीएच) थाईलेंड का लगता है, जबकि इसे भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा स्थानांतरण सेल के प्रभारी महाप्रंबंधक का बताया गया है। मामले में कुछ लोगों ने पुलिस से संपर्क करने की कोशिष की है, लेकिन मामले में किसी के फंसने तक अपराध न होने, तथा धोखाधड़ी की कोशिष होने पर अपराध अपने क्षेत्र न होने की बात कह पल्ला ही झाड़ने की कोशिष कर रही है।

ईमेल पर पुरस्कार बता रहे, ईमेल ही पूछ रहे

नैनीताल। सामान्यतया आम और कई बार समझदार लोग भी इस तरह की ईमेल या एसएमएस के जरिए की जाने वाली ऐसी ही धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं, लेकिन इस धोखाधड़ी को आसानी से समझा जा सकता है। पहली बात भेजी गई ईमेल पर सामान्यतया व्यक्ति का नाम नहीं लिखा जाता। इसका अर्थ यह होता है कि संबंधित व्यक्ति को आपका नाम पता नहीं है, अथवा उसने इतनी अधिक संख्या में यह ई-मेल भेजे हैं कि उसके लिए सबके नाम व ई-मेल पते के जरिए पता होने के बावजूद लिखना आसान नहीं होता। दूसरे, ऐसी मेल से व्यक्ति के नाम, पता, पेशा, मोबाइल नंबर, उम्र, लिंग व वैवाहिक स्थिति आदि के साथ ही ई-मेल पता भी पूछा जाता है। जबकि ऊपर लिखा जाता है कि आपके मोबाइल नंबर या ई-मेल पर ही यह पुरस्कार या लाटरी अथवा किसी अन्य प्रकार से ब़डी धनराशि मिलने जा रही है, तो फिर मोबाइल नंबर या ई-मेल पूछने की जरूरत ही क्या है। ऐसा केवल इसलिए होता है कि पूछी गई समस्त जानकारियां बताने से धोखेबाजों के लिए व्यक्ति से बड़ी धनराशि ऐंठना आसान हो जाता है।

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