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उत्तराखंड के पहाड़ी बच्चे नहीं मनाते गणतंत्र दिवस, जानिए क्यों ?

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-शीतकालीन विद्यालय रहते हैं बंद, अधिकांश बच्चों को नहीं पता कैसे मनाते हैं गणतंत्र दिवस
नवीन जोशी, नैनीताल। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के पहाड़ी अंचलों में अधिकांश बच्चों को गणतंत्र दिवस मनाने के बारे में जानकारी नहीं है। कारण, उनके विद्यालय गणतंत्र दिवस के दौरान शीतकालीन अवकाश के लिए बंद होते हैं, इसलिए न स्कूलों में गणतंत्र दिवस का आयोजन होता है, और न ही बच्चों को ही देश के अपने संविधान के साथ वास्तविक स्वतंत्रता के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के आयोजन की जानकारी हो पाती है। इसलिये वे गणतंत्र दिवस आयोजनों में भी भागेदारी नहीं कर पाते हैं।

2ntl725ntl10उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस, देश की आजादी का वास्तविक पर्व है। इसी दिन 1930 में देश ने ‘संपूर्ण स्वराज” की घोषणा की थी, और इसी दिन से राष्ट्र में अपने संविधान के साथ अपना वास्तविक राज कायम हुआ था। देश भर में यह आयोजन खासकर विद्यालयों में बेहद हर्षोल्लास से मनाया जाता है। लेकिन नैनीताल जनपद की बात करें तो यहां कुल 976 प्राथमिक विद्यालयों में से 215 तथा जूनियर हाई स्कूल से इंटरमीडिएट तक के 91 सरकारी, मुख्यालय के एक स्थानीय निकाय संचालित नगर पालिका नर्सरी स्कूल एवं तीन अर्धशासकीय विद्यालयों भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, सीआरएसटी इंटर कालेज व मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर के साथ ही सभी निजी पब्लिक स्कूलों में इन दिनों शीतकालीन अवकाश होने के कारण गणतंत्र दिवस का आयोजन नहीं होता है। 1st republic dayमुख्यालय में जहां अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर सुबह प्रभात फे री से लेकर अपराह्न तक कार्यक्रम बच्चों से ही गुलजार रहते हैं, वहीं गणतंत्र दिवस की इकलौती प्रभात फेरी ऐसी होती है, जिसमें बच्चे शामिल नहीं होते हैं, तथा शिक्षक भी अन्य संस्थानों में उपस्थिति दर्ज कराकर औपचारिकता निभा लेते हैं। वर्षों से ऐसा परिपाटी के रूप में हो रहा है। इसका एक नुकसान यह भी है कि बच्चों को गणतंत्र दिवस के इस महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी ही नहीं हो पाती है, या तब होती है, जब वह ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में जाते हैं। इसका निदान क्या हो यह एक विचारणीय प्रश्न हो सकता है।

हल्द्वानी के स्कूली बच्चों को बुलाकर चलाया गया काम

नैनीताल। फ्लैट्स मैदान में गणतंत्र दिवस के अवसर पर नगर के स्कूलों के बंद होने की वजह से हल्द्वानी के निर्मला कान्वेंट, आर्यमन बिड़ला, सेंट थरेसा, निमोनिक कान्वेंट व डॉन बास्को स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत, योग पर आधरित कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी। गीत व नाट्य प्रभाग के कलाकारों तथा पुलिस लाईन के बच्चों ने भी कार्यक्रम पेश किये।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड