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संवेदनहीनता ! आदेश अधिकतम 45 दिन के, और लगातार 90 दिन से अधिक, बिना छु्ट्टी, ड्यूटी दे रहे कोरोना योद्धा

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नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अगस्त 2020। कोरोना की भयावहता सबके लिए है। कोरोना किसी को बड़ा-छोटा नहीं देखता। ऐसी कठिन स्थितियों में भी बहुत से लोग कोरोना योद्धाओं के युद्ध में सामान्य लोगों को बचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। लेकिन नैनीताल जनपद में ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो इन कोरोना योद्धाओं के प्रति जिला प्रशासन की संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण है। हम बात कर रहे हैं राज्य में बाहर से आने वाले लोगों के पंजीकरण, जांच आदि की व्यवस्थाओं को देख रहे गौलापार स्टेडियम स्थित स्टेजिंग एरिया की। जनपद के मुख्य विकास अधिकारी के गत 13 अगस्त के, किसी भी कर्मचारी को 45 दिन से अधिक लगातार ड्यूटी न करने देने के आदेश के बावजूद यहां कुछ कर्मचारियों को बिना एक भी छुट्टी लिये काम करते हुए 80-90 दिन से अधिक हो गए हैं। इनमें कई कोरोना योद्धा ऐसे भी हैं जो लगातार रात्रि की ड्यूटी कर रहे हैं। लेकिन सबकी सुध ले रहे इन कोरोना योद्धा अधिकारियों व कर्मचारियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यह कोरोना योद्धाओं के मानवाधिकारों का भी साफ तौर पर उल्लंघन है। यहां यह स्थितियां हैं, जबकि पड़ोसी जनपद ऊधमसिंह नगर में यही कार्य कर रहे कोरोना योद्धाओं के लिए ‘रोटेशन’ की व्यवस्था लागू है, और वे सप्ताह में अधिकतम 3-4 दिन ड्यूटी कर रहे हैं और शेष दिन आराम कर रहे हैं।
बताया गया है कि गौलापार स्टेडियम स्थित स्टेजिंग एरिया में कई कोरोना योद्धाओं को ड्यूटी करते हुए 45 दिन से अधिक हो गए हैं। संभवतया इसकी जानकारी लगने पर सीडीओ नरेंद्र भंडारी ने गत 13 अगस्त को 45 दिन से अधिक लगातार ड्यूटी न कराने के आदेश जारी किए। किंतु इसके बाद भी ड्यूटी लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी है। यहां प्रशासनिक संवेदनहीनता और जुगाड़ू व्यवस्था का आलम यह है कि कुछ कार्मियों को तो चार-पांच दिन की ड्यूटी के बाद ही ड्यूटी से हटा दिया गया, जबकि अन्य के हाल ऐसे हैं। इसके अलावा भी स्टेजिंग एरिया में कोरोना योद्धाओं के लिए पानी, चाय पीने या नास्ते की कोई व्यवस्था नहीं है। हद तो यह है कि मजिस्ट्रियल ड्यूटी में कार्यरत अधिकारियों के लिए मास्क, ग्लब्स व सैनिटाइजर की व्यवस्था भी प्रशासन ने नहीं कराई है। यह जनपद प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा नजर आती है।

यही हाल स्वास्थ्य विभाग सहित कई अन्य विभागों में भी दिखता है। नैनीताल जिला मुख्यालय अघोषित तौर पर हल्द्वानी में स्थापित हो गया है, और नैनीताल में कार्यरत कर्मचारी कोरोना काल में हल्द्वानी में बैठे अधिकारियों के लिए हर रोज सुबह नैनीताल से हल्द्वानी व शाम को हल्द्वानी से नैनीताल की दौड़ लगा रहे हैं। उन्हें ही महीनों से अवकाश नहीं मिल रहा है। नैनीताल जिला मुख्यालय में महीनों से कई अधिकारियों के दर्शन नहीं हुए हैं। ऐसे में मुख्यालय स्थित कार्यालय और यहां की जनता यह भी महसूस करने लगी है कि ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों के बिना भी उनका काम चल ही सकता है।

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