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उत्तराखंड में जमकर उठाया गया कोरोना का फायदा, देश से अधिक बढ़ी महंगाई, गांवों में शहरों से भी अधिक…

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नवीन समाचार, देहरादून, 17 जून 2021। कोविड 19 महामारी से उबरने के लिए जद्दोजहद कर रहे उत्तराखंड पर महंगाई की मार भी पड़ रही है। बल्कि यह कहना अधिक सही होगा कि कोरोना काल मे उत्तराखंड में जमाखोरों ने जमकर मौके का फायदा उठाया। इस बात की पुष्टि इस तथ्य से भी होती है कि शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक महंगाई रही। कुल मिलाकर भी स्थिति यह रही कि अप्रैल से मई महीने के दौरान उत्तराखंड देश से अधिक महंगाई बढ़ी।
आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में अप्रैल से मई महीने के मध्य महंगाई की मासिक वृद्धि दर 1.85 प्रतिशत रही। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मासिक वृद्धि दर 1.64 प्रतिशत रही है। देश के प्रमुख राज्यों से तुलना करने पर उत्तराखंड में दिल्ली (1.57 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (1.17), जम्मू और कश्मीर (1.41), चंडीगढ़ (0.06), गुजरात (1.65), हरियाणा (1.64) पंजाब (1.69) और राजस्थान (1.42 प्रतिशत) से अधिक महंगाई दर्ज हुई है। उत्तराखंड के गांवों में अप्रैल से मई में महंगाई 1.73 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2.03 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यानी राज्य के शहरी क्षेत्रों में कुल मासिक दर से अधिक महंगाई में बढ़ोतरी हुई। अलबत्ता पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड से अधिक महंगाई है। वहां पिछले एक महीने में वस्तुओं के मूल्यों में 2.14 प्रतिशत की वृद्धि हुई। (डॉ.नवीन जोशी)  आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 04 मार्च 2021। बृहस्पतिवार को उत्तराखंड के 20वें बजट में राज्य की मांग के साथ ही अवधारणा से जुड़ी ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसेंण को कमिश्नरी बनाने की घोषणा की गई है। इस पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। वहीं बजट को अधिकांश लोग चुनावी बजट बता रहे हैं।

पर्यटन व पर्यटक सुविधाओं के लिए बजट में कुछ नहीं: टंडन

पुनीत टंडन

नवीन समाचार, नैनीताल, 04 मार्च 2021। नगर के मां नयना देवी व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन ने कहा कि सारी घोषणाएं चुनावी माहौल में की गई अच्छी घोषणाएं है। बशर्ते वह धरातल पर उतरें। बजट का बड़ा हिस्सा सड़कों के पुर्ननिर्माण व नवीनीकरण को दिया गया है, जबकि राज्य बनने के 20 वर्षों में इसी मद में बजट जा रहा है, फिर भी धरातल पर कुछ खास नजर नहीं आ रहा है। आज भी पर्यटन की अर्थव्यवस्था वाले राज्यों में पर्यटक सुविधाओं का पूरी तरह से अकाल है। इस बजट में धार्मिक पर्यटन की ओर तो ध्यान दिया गया है, पर नैनीताल-मसूरी जैसे राज्य के पर्यटन स्थलों के बारे में जो किया जाना चाहिए था। धरातल पर कोरोना के बाद पर्यटन को जो सपोर्ट चाहिए था, वह नहीं दिखता है। इस वर्ष 15 अप्रैल से ही राज्य में भारी संख्या में सैलानी आने वाले हैं। राज्य सरकार के लिए बेहतर सुविधाएं देकर सैलानियों के मन में घर बनाने का यह स्वर्णिम अवसर है, ताकि वे बार-बार आएं। लेकिन जिस तरह पार्किंग, नए रोपवे आदि के लिए बजट में कुछ भी नहीं रखा गया है, इससे साफ नजर आ रहा है कि इस वर्ष भी पर्यटन कुप्रबंधन की भेंट चढ़ने वाला है। बजट में व्यवसायियों को आने वाली समस्याओं के समाधान करने, अधिक जीएसटी या कर अंश देने वालों के प्रोत्साहन के लिए भी कुछ नहीं है। सिर्फ महिला उद्यमियों के लिए कुछ दिख रहा है। बजट में अधिकतर योजनाएं प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार की हैं। राज्य सरकार की ओर से कुछ भी नया नजर नहीं आ रहा है। तमिलनाडु से साड़ी बांटने व किसानों पर पंजाब की योजनाएं उठाई गई हैं।

चुनावी बजट: डा. बिष्ट
नैनीताल। राज्य के बजट पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉं नंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि बजट की मूल भावना संसाधनों एवं आर्थिक संरचना का विकास हेतु बजट प्रस्ताव किया जाना स्वागत योग्य है। बजट में गरीब कल्याण योजना, राज्य एवं ग्रामीण मार्गों के निर्माण, स्वास्थ्य योजनाओं एवं विकास कार्यों हेतु बड़ी धनराशि का आवंटन, परम्परागत खेती को बढ़ावा, मुख्यमंत्री रोजगार योजना, मुख्यमंत्री पलायन योजना व मुख्यमंत्री घसियारी योजना आदि के लिये बजट आवंटन करना भी स्वागत योग्य कदम है। लेकिन डीजल व पेट्रोल पर वैट कम किया होता तो बढती महंगाई कम हो सकती थी पर ऐसा किया नहीं गया है। इससे आम जन को इसका फायदा नहीं होगा और महंगाई गरीबों की कमर तोड़ेगी। पलायन रोकने के लिए 18 करोड़ की घोषणा की गई है जो बहुत कम है। इससे पलायन नही रुकने वाला है। यदि पलायन को रोकना ही था तो ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्योग खोलने चाहिए थे। ऐसा बजट में नही किया गया है। कुल मिलाकर इस बजट को चुनावी बजट कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा।

गैरसेंण को कमिश्नरी बनाने का फैसला स्वागत योग्य: डा. ललित तिवारी
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोध निदेशक प्रो. ललित तिवारी ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गैरसेंण में तीसरी कमिश्नरी का बनाने का फैसला अच्छा है। कमिश्नरी, जिलों को दूरस्थ क्षेत्रों में ले जाने पर ही विकास होगा। पलायन को रोकने के लिए केवल 18 करोड़ रखे गए हैं, जो काफी कम है। बजट में रोजगार के लिए बात नहीं की गई है। इस दिशा में ठोस प्रयास भी नजर नहीं आ रहे हैं। आयुष्मान योजना का लाभ सबको मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। राज्य में 20 हजार फलदार वृक्ष लगाने का फैसला भी अच्छा हो सकता है। पर संख्या काफी कम रखी गई है। जहां भी अनुकूल वातावरण हो वहां फलदार पौधे लगने चाहिए। जमरानी बांध के लिए चुनावी वर्ष में बजट में 240 करोड़ रखे हैं। यदि पहले से रखे गए होते तो जमरानी बांध बन भी जाता। इस पर विश्वास करना कठिन है।

गैरसेंण पर फैसला स्वागत योग्य पर राजधानी व जिलों की घोषणा भी होनी चाहिए थी: डॉ जंतवाल
नैनीताल। उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष व पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि गैरसेंण को राजधानी बनाने का फैसला अच्छा है, लेकिन राज्य में छोटे जिले भी बनते तो अच्छा होता। गैरसेंण को स्थायी राजधानी बनाने की घोषणा भी चुनावी वर्ष में की जानी चाहिए थी। गैरसेंण को कमिश्नरी बनाया जाना उक्रांद के 1992 के ब्लू प्रिंट में शामिल था। चार कमिश्नरी, 20 जिलों। पहले ही करना चाहिए था। इसकी सीमाओं को नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
वहीं बजट को चुनावी साल में चुनावी बजट है। रोजगार के लिए दृढ संकल्प नहीं, रोडमैप भी स्पष्ट नहीं। घोषणाएं धरातल पर उतर पाएगा। इस पर भी शंका लग रही है। जमरानी बांध जितना जल्दी बने अच्छा है। वहां के लोगों के पुनर्वास में वहां के लोगों की भावनाओं का खयाल रखा जाए।

कमिश्नरी बनाना गैर जरूरी: साह
नैनीताल। उत्तराखंड लोक वाहिनी के नेता व वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह ने गैरसेंण को कमिश्नरी बनाने को गैरजरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्य में सचिवालय व जिलों के बीच कमिश्नरी की एक परत और बनाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इससे बेमतलब के खर्च ही बढ़ेंगे। वैसे ही सरकार की आर्थिक स्थिति बुरी है। राज्य बनने के बाद राज्य की दोनों कमिश्नरी खत्म करने की मांग भी उठी थी। अलबत्ता कर्मचारियों के विरोध के बाद तब यह मामला दब गया था।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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