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झकझोर देगी उत्तराखंड की व्यवस्थाओं की यह कहानी : गर्भवती महिला, अस्पताल से आखिरी समय में रेफर, दूसरी सुबह बस से बड़े अस्पताल, रस्ते में उतारा और सड़क पर मृत बच्चे को जन्म

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पीड़िता को बिना एम्बुलेंस के किया रेफर, बस ड्राइवर ने भी आधे रास्ते में छोड़ा, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में चल रहा है महिला का इलाज
स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा सामने आया, इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना से लोग हैरत में
नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 4 दिसंबर 2018 । घाट ब्लॉक के घूनी गांव की एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस न मिलने के कारण सड़क पर ही मृत बच्चे को जन्म दे दिया। इस घटना से स्वास्य सेवाओं का बदसूरत चेहरा एक बार फिर सामने आया है।दरअसल घाट ब्लॉक के दूरस्थ घूनी गांव की नंदी देवी (32) गर्भवती थी। इसके चलते वह जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में प्रसव के लिए भर्ती थी। बताया जा रहा है कि गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराया गया। अल्ट्रासाउंड में रिपोर्ट में बच्चे की धड़कन तेज होने की बात सामने आई। इसके साथ ही डाक्टरों ने सर्जन न होने की बात कह कर प्रसव गोपेश्वर में ही करवाने से हाथ खड़े कर दिए।

महिला के पति मोहन सिंह ने बताया कि मंगलवार को शाम चार बजे उन्हें बताया गया कि प्रसव के लिए नंदा देवी को हायर सेंटर श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाना होगा। इसके चलते उनकी पत्नी को श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया। उनका कहना है कि गर्भवती महिला को हायर सेंटर रेफर तो कर दिया गया किंतु एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध न होने की बात कह कर बहानेबाजी की। इसके चलते गर्भवती महिला को रात गोपेश्वर में ही रखा गया और बुधवार सुबह जीएमओयूलि की बस (यूके 15 टीए-0117) से पति पत्नी श्रीनगर बेस अस्पताल को रवाना हुए। इस बीच रुद्रप्रयाग के समीप तिलणी के निकट गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। मोहन सिंह का कहना है कि उन्होंने बस चालक से पत्नी को शौच आदि की बात कह कर बस रूकवाई। इतने भर में पत्नी को भारी दर्द होने लगा।उन्होंने इस तरह की स्थिति के चलते बस ड्राइवर से कुछ इंतजार करने की गुहार लगाई किंतु ड्राइवर ने उनकी एक न सुनी और बस को लेकर रुद्रप्रयाग की ओर तेजी से चल दिया। इसी बीच दर्द से क राहती महिला ने तिलणी में ही सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया, दुर्भाग्य से बच्चा मृत पैदा हुआ। हालांकि इससे पूर्व बस चालक से रुद्रप्रयाग से श्रीनगर तक के किराए को वापस करने की भी मांग की गई, लेकिन उसकी एक न सुनी गई।मोहन सिंह के अनुसार फिर 108 को रिंग किया गया। 108 सेवा भी करीब 2 किमी दूर डेढ़ घंटे विलंब से पहुंची। इस कारण प्रसूता सड़क पर ही तड़पती रही। जब एंबुलेंस पहुंची तो प्रसूता को लेकर जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग ले कर गई। प्रसूता को रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, वहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है। इस तरह की घटना से उत्तराखंड में एक बार फिर लचर स्वास्य सेवा जानलेवा साबित हुई है। इंसानियत को शर्मशार करने वाली इस घटना से सभी लोग दंग हैं, वैसे भी जिला चिकित्सालय गोपेश्वर से गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर करने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रसव कालीन महिलाओं को अंतिम समय में रेफर किया जाता रहा है। इस कारण प्रसवकालीन महिलाओं के लिए जिला चिकित्सालय की यह कार्रवाई जानलेवा साबित होती रही है। इससे स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा भी उभर कर सामने आ गया है। 

महिला को डंडी के सहारे पहुंचाया अस्पताल

अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव की शाकुंवरी देवी (80) को सुबह दिल का दौरा पड़ा। परिजनों की सूचना पर ग्रामीणों ने महिला को डंडी के सहारे सड़क मार्ग तक लाए, जहां से उसे श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां महिला का इलाज चल रहा है।जानकारी के अनुसार अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव सड़क से चार किमी दूर है। सुबह आठ बजे के करीब शाकुंवरी देवी को दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में ग्रामीणों ने डंडी से उबड़-खाबड़ रास्ते से साढ़े तीन किमी पैदल चलते हुए महिला को फतेहपुर बैंड लाये, यहां से वाहन बुक कर उन्हें बेस अस्पताल श्रीनगर पहुंचाया गया। पीड़िता के पुत्र भरत सिंह रौथाण, ग्रामीण कृपाल सिंह रौथाण, पुष्कर सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि यातायात सुविधा के अभाव में ग्रामीण आज भी मीलों पैदल नापने को मजबूर हैं। दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग निर्माण की मांग तीन दशक से की जा रही है, लेकिन 5 किमी स्वीकृत मार्ग आज तक नहीं बन पाया है। सड़क के अभाव में बीमार व गर्भवती को दंडी से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। इधर, लोक निर्माण विभाग के ईई इंद्रजीत बोस ने बताया कि दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग का 1.65 किमी निर्माण होना है, जो प्रगति पर है। शेष के लिए दोबारा वित्तीय स्वीकृति को प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

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