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जिला मुख्यालय के इस नजदीकी गांव वालों का ‘जीते जी चार कंधों पर’ कटता है परेशानी में सफर…

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अगस्त 2019। देश की चहुंमुखी प्रगति के बीच जिला व मंडल मुख्यालय का निकटवर्ती जमीरा गांव दीपक तले अधेरा की कहावत को साकार कर रहा है। प्राकृतिक सुंदरता एवं संसाधनों से परिपूर्ण यह गांव आजादी के 70 वर्ष बाद भी, कई बार सर्वेक्षण होने के बावजूद केवल 5 किमी सड़क के लिए तरस रहा है। गांव के नरेंद्र सिंह रावत, केशर सिंह रावत, पूरन सिंह, जगत सिंह, महेंद्र सिंह, चंदन सिंह, बसंती देवी, अनीता देवी व भवानी देवी आदि का कहना है कि सड़क न होने की वजह से उनके बच्चों केा स्कूल जाने के लिए भी पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। वहीं गर्भवती महिलाओं, बीमारों को अस्पताल लाने के लिए डोली या चारपाइयों पर जीते जी चार कंधों पर लाना पड़ता है। इस बाबत कई बार डीएम को ज्ञापन देने, मिलने के बावजूद उनकी सड़क की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

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-मां पांवों में पड़ी बावजूद मकान मालिक ने किराये के कमरे में नहंी आने दिया पार्थिव शरीर
-दो माह पूर्व ही हुआ था मृतक जल संस्थान कर्मी का विवाह, घर में अब केवल नवविवाहिता पत्नी और बिकलांग बहन

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जून 2019। सरोवरनगरी में मानवता को शर्मशार करने वाली एक घटना को जो भी सुन रहा है, मानवता पर शर्म कर रहा है। मुख्यालय में जल संस्थान के पंप हाउस में चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यरत मात्र 28 वर्षीय योगेश कुंवर का दो माह पूर्व ही विवाह हुआ था, किंतु इसी बीच वह पीलिया की चपेट में आ गये। बीमारी बढ़ने पर साथी उसे एम्स दिल्ली उपचार के लिए ले गये, किंतु चार दिन तक वहां उपचार करने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस पर साथी उन्हें उनके मल्लीताल रामलीला मैदान के पीछे की ओर स्थित माल्डन कॉटेज क्षेत्र के किराये के कक्ष की ओर लाने लगे। यहां उनकी मां खिमुली देवी व पत्नी रहते थे। मृत्यु की सूचना मिलने पर मकान मालिक ने शव को उसके घर में आने देने से इंकार कर दिया। मां खिमुली देवी मकान मालिक के पैरों में पड़ गयी, बावजूद मकान मालिक का दिल नहीं पसीजा। इस पर साथी उसकी मां व पत्नी तथा योगेश के शव को उसके मूल गांव-ग्राम पपोली पोस्ट दन्या जिला अल्मोड़ा लेकर गये। वहां बूढ़ी मां खिमुली बेटे के शव से लिपटकर रोती रही। साथी एवं ग्रामीण योगेश के शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले, जबकि बूढ़ी मां वहीं पड़ी रही। थोड़ी देर बाद पता चला कि बेटे के दुःख में उसका शरीर भी निष्चेत हो गया था, जांच की गयी तो वह मृत मिली। इसके बाद ग्रामीण उसका शव भी अंतिम संस्कार के लिए लेकर निकले। बताया गया है कि मृतक के पिता का पहले ही निधन हो चुका था। अब उसके घर में केवल उसकी नवविवाहिता पत्नी के अलावा एक अविवाहित भाई और एक बिकलांग बहन ही बची है। पालिका कर्मी शिवराज ने बताया कि पूरी घटना को देखकर मानवता पर शर्मशार हैं।

सीजन में अपना रोजगार छोड़कर चार दिन उपचार कराता रहा नौका चालक

नैनीताल। इस घटना में जहां एक ओर मानवता को शर्मशार करने वाला चेहरा दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर योगेश के साथी व परिचित अंतिम क्षणों तक बिना कोई रिस्ता होते हुए भी उसके साथ लगे रहे। बताया गया कि एक पड़ोसी नौका चालक तो उसके साथी कर्मियों के साथ चार दिन दिल्ली के एम्स में उसकी सुश्रुसा में लगा रहा, जबकि गर्मियों के ये कुछ दिन ही उसे पूरे वर्ष के लिए रोजगार जुटाने के होते हैं। उसके जल संस्थान के साथियों के साथ ही नगर पालिका के कर्मी भी उसके उपचार से लेकर अंतिम संस्कार तक साथ रहे। आगे साथी उसके परिवार की मदद के लिए धनराशि भी एकत्र कर रहे हैं।

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-कब तक डोली का सहारा लगे सड़क तक आने में ओखलकांडावासी, आज भी सड़क से महरूम हैं कई गांव, पूर्व सरकार की सड़क योजनाएं अधर पर लटकाने का आरोप
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली (नैनीताल), 8 मई 2019। आज के दौर में हर घर मे इंटरनेट, बिजली, व पानी की व्यवस्था सरकार ने करीब-करीब पूरी कर दी है, पर आज भी ओखलकांडा के कई गांव दशको से सड़क सुविधा से महरूम है। जिससे किसी भी बीमार व्यक्ति को सड़क मार्ग तक लाने के लिए चार कंधों का सहारा लेने को मजबूर हैं। स्थिति यहां तक दयनीय है कि गांवों में 108 डोली की कई वर्षों पूर्व हुई घोषणा के बावजूद गांवों में डोली भी उपलब्ध नहीं है, और ग्रामीणों को कुर्सी में डंडे बांधकर डोली बनानी पड़ रही है।

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बुधवार को ओखलकांडा के दूरस्थ गांव धैना गांव की कमला देवी (28) पत्नी रमेश सिह सिग्वाल को प्रसव की पीड़ा हुई तो गांव के जगदीश जोशी, नरेन्द्र सिंह, देव सिंह, योगेश सिंह, रघुवर सिंह, खीम सिंह, शेर सिंह व हरीश सिंह आदि युवा उसे कुर्सी की डोली बना कर करीव 6 किमी सड़क मार्ग तक लाये। जहाँ से उसे वाहन से पाटी चंपावत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधि मदन नौलिया व गणेश सिंह धौनी ने बताया कि माँ स्वस्थ है जबकि बच्चे को साँस लेने में दिक्कत हो रही है। जिसे हायर सेंटर भेजने की तैयारी की जा रही है। नौलिया ने बताया कि कैड़ागाँव, कूकना व सुनकोट गांव आज भी सड़क ना होने से कई परेशानियां उठानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली हरीश सरकार ने वर्ष 2015 में यहाँ सड़क मार्ग निमार्ण के लिए टोकन मनी जारी कर दी थी, पर आज तक फाइल कहीं दबी है, किसी को पता नहीं है। उनका कहना है कि 6 से 17 किमी तक सड़क तक आज दूरी है। आये दिन स्थानीय बीमार लोगो को कुर्सी की डोली में लाने को मजबूर है। पर आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है। वही स्थानीय भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा का कहना है ढोलीगाव से कैड़ागाँव और पैजना से कूकना तक कि सड़क मार्ग के टेंडर हो चुके है। देहरादून में नोडल अधिकारी व आरओ की स्वीकृति मिलनी है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है कार्य शुरू हो जाएगा। अभी करीब तीन महीने लग सकते हैं। उधर पीएमजीएसवाई की अधिशासी अभियंता बीना भट्ट का कहना है दोनों सड़क मार्गों के टेन्डर हो चुके है। वन विभाग द्वारा पहले चार-पाँच आपत्तियां लगाई थीं, जिसे हमने ठीक कर नए सिरे से फिर भेज दिया है। जैसे ही वन विभाग से स्वीकृति मिलती है सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा। कहा कि स्वीकृति मिलने में देर हुई तो टेंडर बॉन्ड को बढ़ा दिया जाएगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मई 2019। जनपद के दूरस्थ धारी विकासखंड के बबियाड ग्राम का तोक बिरसिंग्याँ आजादी के 70 वर्षों के बाद भी विकास की मुख्य धुरी सड़क से पांच किमी दूर है। खास बात यह भी है कि आजादी के बाद से ही अनुसचित जाति के लोगों के उत्थान के लिए तमाम सरकारों द्वारा किये जा रहे दावों के बावजूद इस अनुसूचित जाति बहुल जनसंख्या वाले गांव के लोग बीते लोक सभा चुनाव का बहिष्कार करने की हद तक जा चुके हैं, बावजूद सड़क निर्माण की आस दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।

क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चंद्र टम्टा ने बताया कि ग्रामीणों का सड़क के लिए संघर्ष आजादी के बाद से ही जारी है। बीते चुनाव में ग्रामीणों ने सड़क को चुनावी मुद्दा भी बना दिया। बावजूद शासन-प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। कोई अधिकारी ग्रामीणों को चुनाव में में मतदान के लिए समझाने तक नहीं पहुंचा। इससे पहले भी ठीक चुनाव के समय इस सड़क का सर्वे मात्र किया जाता रहा है, और बाद में कभी वन अधिनियम तो कभी धन स्वीकृत नहीं होने की दुहाई देकर निर्माण शुरू नहीं किया जाता। ऐसे में गांव के बीमारों, गर्भवती महिलाओं को जान हथेली में रख कर, जीते-जी चार कंधों पर ढोकर मुख्य मार्ग तक लाया जाता है। सड़क न होने से गांव की साग-सब्जियां खेतों में ही सड़ जाती हैं, और स्कूल दूर होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है।

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-पीड़िता को बिना एम्बुलेंस के किया रेफर, बस ड्राइवर ने भी आधे रास्ते में छोड़ा, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में चल रहा है महिला का इलाज
-स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा सामने आया, इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना से लोग हैरत में
नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 4 दिसंबर 2018 । घाट ब्लॉक के घूनी गांव की एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस न मिलने के कारण सड़क पर ही मृत बच्चे को जन्म दे दिया। इस घटना से स्वास्य सेवाओं का बदसूरत चेहरा एक बार फिर सामने आया है।दरअसल घाट ब्लॉक के दूरस्थ घूनी गांव की नंदी देवी (32) गर्भवती थी। इसके चलते वह जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में प्रसव के लिए भर्ती थी। बताया जा रहा है कि गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराया गया। अल्ट्रासाउंड में रिपोर्ट में बच्चे की धड़कन तेज होने की बात सामने आई। इसके साथ ही डाक्टरों ने सर्जन न होने की बात कह कर प्रसव गोपेश्वर में ही करवाने से हाथ खड़े कर दिए।

महिला के पति मोहन सिंह ने बताया कि मंगलवार को शाम चार बजे उन्हें बताया गया कि प्रसव के लिए नंदा देवी को हायर सेंटर श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाना होगा। इसके चलते उनकी पत्नी को श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया। उनका कहना है कि गर्भवती महिला को हायर सेंटर रेफर तो कर दिया गया किंतु एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध न होने की बात कह कर बहानेबाजी की। इसके चलते गर्भवती महिला को रात गोपेश्वर में ही रखा गया और बुधवार सुबह जीएमओयूलि की बस (यूके 15 टीए-0117) से पति पत्नी श्रीनगर बेस अस्पताल को रवाना हुए। इस बीच रुद्रप्रयाग के समीप तिलणी के निकट गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। मोहन सिंह का कहना है कि उन्होंने बस चालक से पत्नी को शौच आदि की बात कह कर बस रूकवाई। इतने भर में पत्नी को भारी दर्द होने लगा।उन्होंने इस तरह की स्थिति के चलते बस ड्राइवर से कुछ इंतजार करने की गुहार लगाई किंतु ड्राइवर ने उनकी एक न सुनी और बस को लेकर रुद्रप्रयाग की ओर तेजी से चल दिया। इसी बीच दर्द से क राहती महिला ने तिलणी में ही सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया, दुर्भाग्य से बच्चा मृत पैदा हुआ। हालांकि इससे पूर्व बस चालक से रुद्रप्रयाग से श्रीनगर तक के किराए को वापस करने की भी मांग की गई, लेकिन उसकी एक न सुनी गई।मोहन सिंह के अनुसार फिर 108 को रिंग किया गया। 108 सेवा भी करीब 2 किमी दूर डेढ़ घंटे विलंब से पहुंची। इस कारण प्रसूता सड़क पर ही तड़पती रही। जब एंबुलेंस पहुंची तो प्रसूता को लेकर जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग ले कर गई। प्रसूता को रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, वहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है। इस तरह की घटना से उत्तराखंड में एक बार फिर लचर स्वास्य सेवा जानलेवा साबित हुई है। इंसानियत को शर्मशार करने वाली इस घटना से सभी लोग दंग हैं, वैसे भी जिला चिकित्सालय गोपेश्वर से गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर करने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रसव कालीन महिलाओं को अंतिम समय में रेफर किया जाता रहा है। इस कारण प्रसवकालीन महिलाओं के लिए जिला चिकित्सालय की यह कार्रवाई जानलेवा साबित होती रही है। इससे स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा भी उभर कर सामने आ गया है। 

महिला को डंडी के सहारे पहुंचाया अस्पताल

अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव की शाकुंवरी देवी (80) को सुबह दिल का दौरा पड़ा। परिजनों की सूचना पर ग्रामीणों ने महिला को डंडी के सहारे सड़क मार्ग तक लाए, जहां से उसे श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां महिला का इलाज चल रहा है।जानकारी के अनुसार अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव सड़क से चार किमी दूर है। सुबह आठ बजे के करीब शाकुंवरी देवी को दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में ग्रामीणों ने डंडी से उबड़-खाबड़ रास्ते से साढ़े तीन किमी पैदल चलते हुए महिला को फतेहपुर बैंड लाये, यहां से वाहन बुक कर उन्हें बेस अस्पताल श्रीनगर पहुंचाया गया। पीड़िता के पुत्र भरत सिंह रौथाण, ग्रामीण कृपाल सिंह रौथाण, पुष्कर सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि यातायात सुविधा के अभाव में ग्रामीण आज भी मीलों पैदल नापने को मजबूर हैं। दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग निर्माण की मांग तीन दशक से की जा रही है, लेकिन 5 किमी स्वीकृत मार्ग आज तक नहीं बन पाया है। सड़क के अभाव में बीमार व गर्भवती को दंडी से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। इधर, लोक निर्माण विभाग के ईई इंद्रजीत बोस ने बताया कि दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग का 1.65 किमी निर्माण होना है, जो प्रगति पर है। शेष के लिए दोबारा वित्तीय स्वीकृति को प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

नवीन जोशी

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