Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

उत्तराखंड में एक और नेता-पूर्व मंत्री का निधन, एक सप्ताह में पांचवे नेता का हुआ देहावसान

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये

मध्य प्रदेश के मंत्री शिवनारायण मीणा (ANI)नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 12 जून 2019। उत्तराखंड में एक और नेता के असामयिक निधन का दुःखद समाचार है। मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता शिवनारायण मीणा का बुधवार को निधन हो गया। मीणा को केदारनाथ मंदिर जाते हुए रुद्रप्रयाग में दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका देहावसान हो गया। बताया गया हे कि बुधवार को ही उनका पार्थिव शरीर उनके मध्य प्रदेश के पैत्रृक स्थान चाचौड़ा ले जाया जाएगा और गुरुवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। मीणा का नाम मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शामिल था। वे चार बार चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र से जीत कर विधानसभा पहुंचे। दिग्विजय सिंह के काफी करीबी माने जाने वाले मीणा दिग्विजय के मुख्यमंत्रित्व काल में वे दो बार मंत्री भी रहे। उनके निधन पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी शोक संदेश जारी किया है. उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, ‘मप्र सरकार के पूर्व मंत्री शिवनारायण मीणा जी की हृदयघात से निधन की खबर बेहद दुःखद है. मेरी गहरी संवेदनाएं. ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करें और शोक संतप्त परिजनों को यह आघात सहने की शक्ति दे।’
उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का 5 जून को, भाजपा के देहरादून महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल एवं उत्तरप्रदेश के पूर्व एमएलसी व पर्यटन विकास परिषद के चेयरमैन रहे रानीखेत निवासी वयोवृद्ध नेता बीडी शर्मा (97) का 9 जून को एवं 10 जून को भाजपा के पूर्व हल्द्वानी नगर अध्यक्ष् भुवन भंडारी का भी निधन हो गया था।

यह भी पढ़ें: 5 दिन के भीतर उत्तराखंड भाजपा के तीसरे बड़े नेता का देहावसान

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 10 जून 2019। उत्तराखंड भाजपा में बीते एक सप्ताह में निजी क्षति की तीसरी बड़ी खबर आई है। काबीना मंत्री प्रकाश पंत और देहरादून महानगर के पूर्व अध्यक्ष उमेश अग्रवाल के बाद अब हल्द्वानी के पूर्व नगर अध्यक्ष भुवन भंडारी के आकस्मिक निधन का दुःखद समाचार आया है। शरीर से अच्छे डील डौल के परंतु बेहद शांत प्रकृति के 54 वर्षीय भंडारी गत दिवस प्रकाश पंत के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए थे, लेकिन इसके बाद स्वास्थ्य में गिरावट होने पर उनका नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में किडनी का उपचार चल रहा था। लेकिन बताया गया है कि सोमवार को किडनी फेल होने से उनको बचाया नही जा सका। उनकी पार्थिव देह देर शाम तक हल्द्वानी स्थित उनके आवास पर पहुंचेगी। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद राजनैतिक, सामाजिक व व्यवसायी जगत में शोक की लहर छा गयी है। उल्लेखनीय है कि 1991 वह हल्द्वानी छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे थे। उल्लेखनीय है कि प्रकाश पंत का 5 जून, उमेश अग्रवाल का 9 जून एवं अब 10 जून को भुवन भंडारी के निधन से भाजपा शोक से उबर नहीं पा रही है। उल्लेखनीय है कि रविवार 9 जून को ही उत्तरप्रदेश के पूर्व एमएलसी व पर्यटन विकास परिषद के चेयरमैन रहे रानीखेत निवासी वयोवृद्ध नेता बीडी शर्मा (97) का भी निधन हो गया था।

यह भी पढ़ें: अमेरिका से विमान में तिरंगे में लिपटकर भारत के लिए निकला पंत का शव

अमेरिका से तिरंगे में लिपटकर भारत के लिए निकलता स्वर्गीय पंत का पार्थिव शरीर

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जून 2019। उत्तराखंड के दिवंगत वित्त मंत्री प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर अमेरिका के ह्यूस्टन टेक्सास से भारत के लिए निकल गया है, और शनिवार सुबह तक प्रदेश में राजधानी देहरादून और दोपहर तक उनके गृह नगर पिथौरागढ़ पहुंच जाएगा, जहां अपराह्न में उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।
भारतीय समय के अनुसार शुक्रवार दोपहर एवं अमेरिका के अनुसार शुक्रवार रात्रि तिरंगे में लिपटे स्वर्गीय पंत के पर्थिव शरीर को एयरपोर्ट पर सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। अमेरिका से आई तस्वीरों में प्रकाश पंत के पार्थिव शरीर को उनके परिवार के सदस्यों के साथ विशेष विमान से भारत लाने की तैयारी नजर आ रही है। इधर देहरादून में एसडीआरएफ मुख्यालय में उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए रखे जाने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। इसके बाद पिथौरागढ़ स्थित उनके पैतृक आवास ले जाया जाएगा. वहां से शनिवार को ही उनको अंतिम विदाई दी जाएगी। उनकी अंतिम यात्रा में केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री, पार्टी सांसद, विधायक व पार्टी पदाधिकारी शामिल होंगे।  

यह भी पढ़ें : प्रकाश पंत के निधन पर उत्तराखंड में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित, गुरुवार को रहेगी छुट्टी

स्व. प्रकाश पंत द्वारा अमेरिका रवाना होने से पूर्व दिल्ली के अस्पताल के आइसीयू में लिखी आखिरी कविता

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जून 2019। उत्तराखंड के पहले विधान सभा अध्यक्ष रहे वित्त तथा संसदीय कार्य, विधायी, भाषा, वित्त, आबकारी, पेयजल एवं स्वच्छता, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री रहे प्रकाश पंत का बुधवार को निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास के अस्पताल में कैंसर का इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। सबसे पहले समाचार एजेंसी एएनआई ने यह जानकारी दी है। इधर, उत्तराखंड के वित्त मंत्री रहे प्रकाश पंत के निधन पर 3 दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया गया है। उत्तराखंड शासन के प्रभारी सचिव पंकज पांडे ने इस सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा 6 जून को एक दिवसीय बैंक/उप कोषागार/कोषागार बंद रखने, 6 जून से लेकर 8 जून तक 3 दिवसीय प्रदेश में राजकीय शोक के तहत समस्त जनपदों के सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रखने, तथा पिथौरागढ़ जनपद में अंतिम संस्कार पूरे पुलिस सम्मान के साथ संपन्न करने के आदेश जारी कर दिये हैं। वहीं प्रशासनिक जानकारी के अनुसार शनिवार तक दिवंगत प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर देहरादून पहुँचेगा और पिथौरागढ़ में पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इधर, नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन ने बताया कि स्वर्गीय पंत के सम्मान में कल दिनांक 6 जून गुरुवार को जनपद के सभी कार्यालय, विद्यालय, बैंक व कोषागार आदि बंद रहेंगे। जनपद में 6 जून से 8 जून तक 3 दिन का राजकीय शोक भी रहेगा। इस दौरान जनपद के सभी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज झुके आधे रहेंगे, तथा शोक की अवधि में किसी भी प्रकार के मनोरंजक कार्यक्रम आदि भी नहीं किए जाएंगे। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी 6 जून के सभी प्रश्न पत्र स्थगित कर दिये है। इन प्रश्नपत्रों की अगली तिथियां बाद में घोषित की जाएंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य एवं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित अनेक लोगों ने भी पंत के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया है।

विदित हो कि स्वर्गीय पंत पिथौरागढ़ विधानसभा से 2002 से 2007 तक निर्वाचित हुए थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद उनका नाम प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए भी आया था। हाल ही में बजट सत्र के दौरान विधानसभा में बजट पेश करते हुए उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिस कारण वे पूरा बजट भाषण भी नहीं पढ़ पाए थे, और शेष बजट भाषण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूरा किया था। इधर उनके सभी विभाग मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत संभाल रहे हैं। बीमारी के बाद पंत दिल्ली स्थित राजीव गांधी अस्पताल के आईसीयू में भी कुछ दिन भर्ती रहे थे। हालांकि उनकी बीमारी के बारे में किसी को भी स्पष्ट जानकारी नहीं थी, लेकिन बताया गया है कि उनका अमेरिका में फेफड़े की बीमारी का इलाज चल रहा था। उनके आकस्मिक निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दा गयी है। मुख्यालय में चल रहे ग्रीष्मकालीन गीत-संगीत के कार्यक्रम रोक दिये गये हैं। कार्यक्रम संयोजक एडीएम हरबीर सिंह ने बताया कि उनके अंतिम संस्कार तक कार्यक्रम रोक दिये गये हैं।

यह भी पढ़ें: नव सांस्कृतिक सत्संग समिति के संस्थापक सदस्य पंत नहीं रहेे

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जून 2019। नव सांस्कृतिक सत्संग समिति शेर का डाडा के संस्थापक सदस्य व मित्र संस्था के संस्थापक अध्यक्ष रघुवर दत्त पंत ( 82) का रविवार की रात्रि में निधन हो गया। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार समीपवर्ती पाईंस स्थित शमशान घाट में कर दिया गया। पंत अपने पीछे पत्नी गीता पंत, दो विवाहित पुत्रियां ममता व तारा तथा पुत्र संतोष पंत का भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। बता दें कि रघुवर पंत विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रामलीला मंचन के दौरान बढ़ चढ़कर भागीदारी किया करते थे उनकी ओर से रामलीला में किए गए कई किरदार अविस्मरणीय हैं। पंत बीते 6 -7 बर्षों से बीमार चल रहे थे। रविवार की रात्रि मेंं उन्होंने अपने निवास स्थान प्लेंस व्यू में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर  नव सांस्कृतिक सत्संग समिति शेर का डाडा के अध्यक्ष खुशहाल सिंह रावत, उपाध्यक्ष कंचन चंदोला, सचिव पूरन चंद्र पांडे, उप सचिव महावीर बिष्ट, कोषाध्यक्ष उमेश सनवाल, प्रयाग दत्त तिवारी, ललित गोस्वामी, दीपक जोशी, दीपक पांडे,  सुरेश कांडपाल, प्रकाश चंदोला, मोहन चंद्र जोशी, विरेंद्र जोशी, कैलाश जोशी, दिनेश जोशी, विपिन चंद्र पंत, राजेश जोशी, श्री राम सेवक सभा के अध्यक्ष मनोज साह, सचिव राजेंद्र लाल साह, तल्लीताल रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रविंद्र पांडे रवि, सचिव हेमंत रुबाली, पूर्व विधायक डा.नारायण सिंह जंतवाल, प्रकाश पांडे, समाजसेवी डा. सरस्वती खेतवाल, मुन्नी तिवारी आदि ने गहरा दु:ख जताया है। दूसरी ओर कुमाऊं मंडल विकास निगम परिवार ने भी पर्वत गैस सर्विस के प्रबंधक संतोष पंत  के पिता के निधन पर गहरा दु:ख जताया है।

पूर्व समाचार : नगर के संस्थापक परिवार के दीपक शाह का असामयिक निधन

दीपक शाह

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अप्रैल 2019। सरोवरगरी नैनीताल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व संस्थापकों में शामिल स्वर्गीय मोती राम शाह परिवार से आने वाले, नगर की आराध्य देवी माता नयना देवी मंदिर की व्यवस्था देखने वाले अमर-उदय ट्रस्ट के सदस्य तथा स्नो व्यू स्थित राधा चिल्ड्रन एकेडमी स्कूल के मालिक दीपक शाह का रविवार को अचानक निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब मात्र 42-43 वर्षीय युवा दीपक पिछले कुछ समय से पेट की आंत में गांठ बनने का एम्स दिल्ली में उपचार चल रहा था। एक-दो दिन में वह फिर एम्स जाने वाले थे। बावजूद वे रविवार को सुबह ठीक थे। किंतु दोपहर में अचानक उन्हें कुछ समस्या हुई। जिसके बाद परिजन उन्हें बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखाने के लिये लाये, किंतु इससे पूर्व ही वे दम तोड़ चुके थे। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार उनका देहांत हृदयाघात की वजह से हुआ। वे अपने पीछे पत्नी रिंकू साह व मात्र 4 वर्ष की बेटी वैष्णवी को रोता-बिलखता छोड़ गये हैं। उल्लेखनीय है दीपक दो भाइयों में छोटे थे। उनके बड़े भाई कंचन शाह का भी नगर में अच्छा कारोबार था, किंतु 2010 के आसपास उनका भी अचानक देहांत हो गया था। देर शाम स्थानीय पाइंस स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

यह भी पढ़ें : शौर्य चक्र विजेता बद्री दत्त तिवारी का देहांत

तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा से शौर्य चक्र प्राप्त करते बद्री दत्त तिवारी (फाइल फोटो)।

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2019। जनपद के शौर्य चक्र विजेता वीर सेनानी बद्री दत्त तिवारी (82) का रविवार को हल्द्वानी स्थित उत्तरांचल कॉलोनी कुसुमखेड़ा स्थित आवास पर स्वर्गवास हो गया। उन्होंने अपने आवास पर दिन में एक बजे अंतिम सांस ली। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनकी अंतिम यात्रा सोमवार को सुबह आठ बजे रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट के लिए रवाना होगी। वे अपने पीछे पत्नी पुष्पा तिवारी, दो पुत्र रविंद्र कुमार तिवारी व राहुल तिवारी एवं दो पुत्रियों पूनम व प्रीति तथा उनके भरे-पूरे परिवार को रोता-बिलखता छोड़ गये हैं।

अनादि निधनं देवः शंख चक्र गदाधरः अव्यय पुण्डरीकाक्ष प्रेत मोक्ष प्रदो भवः।💐💐

यह भी पढ़ें : दुःखद समाचार : प्रो. तिवारी की शतायु माता का देहावसान

अमर उजाला के नैनीताल ब्यूरो प्रभारी एवं कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. गिरीश रंजन तिवारी जी की माता जी का कल रात्रि 12 बजे लखनऊ में स्वर्गवास हो गया है। संस्कार आज 8 फरवरी को लखनऊ में गोमती तट पर 4 बजे शाम को होगा। अभी हाल ही में वे शतायु हुई थीं।

ईश्वर उन्हें मोक्ष प्रदान करें एवं शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।

यह भी पढ़ें : ‘कगार की आग’ के लेखक प्रख्यात हिंदी साहित्यकार हिमांशु जोशी का निधन, श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 23 नवंबर 2018। ‘कगार की आग’ के लेखक प्रख्यात हिंदी साहित्यकार हिमांशु जोशी का निधन हो गया है। 83 वर्षीय हिमांशु जोशी लंबे समय से बीमार थे। गुरुवार रात दिल्ली में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन से पत्रकारिता जगत के साथ ही उनके मूल उत्तराखंड में शोक की लहर है।

हिंमांशु जोशी का जन्म 4 मई 1935 को लोहाघाट से अल्मोड़ा जाने वाली सड़क के किनारे बसे उत्तराखंड के चम्पावत जिले के खेतीखान के निकट जोस्यूडा गांव में हुआ था। उन्होंने दिल्ली में साप्ताहिक हिन्दुस्तान से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। उनका उपन्यास ‘कगार की आग’ विश्व प्रसिद्ध है। हिमांशु जोशी के चले जाने से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। हिमांशु जोशी के पिता प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्णानन्द जोशी थे। इनकी माता का नाम तुलसी देवी था। उनका बालपन जोस्यूड़ा से कही अधिक खेतीखान में बीता। वर्ष 1951 में इनके पिता का निधन हो गया। उनकी कक्षा 8 तक की पढ़ाई हिंदुस्तानी वर्नाकुलर स्कूल खेतीखान में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वह नैनीताल चले गए। पांच साल वह नैनीताल में रहे।उन्होंने वर्ष 1956 से पत्रकारिता में कदम रखा। ‘कादम्बिनी’ (1968-71), वरिष्ठ पत्रकार ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’(1971-1993)। दूरदर्शन व आकाशवाणी के लिए भी कार्य किया। हिन्दी फिल्मों में भी लेखन कार्य किया। हिमांशु जोशी के तीन पुत्र अमित, सिद्धार्थ और असित हैं। हिमांशु जोशी को हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू का अच्छा ज्ञान था। उनके उपन्यासों में अरण्य, महासागर, छाया मत छूना मन, कगार की आग, समय साक्षी है, तुम्हारे लिए, सु-राज शामिल हैं। उनके कहानी संग्रह-अन्तत: तथा अन्य कहानियाँ, अथचक्र, मनुष्य-चिह्न तथा अन्य कहानियां, जलते हुए डैने तथा अन्य कहानियां,, तपस्या तथा अन्य कहानियां, आंचलिक कहानियां, गंधर्व-गाथा, श्रेष्ठ प्रेम कहानियां आदि हैं। 
कविता संग्रह-नील नदी का वृक्ष, जीवनी तथा खोज-अमर शहीद अशफाक उल्ला खां, यात्रा वृतांत : यातना-शिविर में (अंडमान की अनकही कहानी), रेडियो-नाटक-सु-राज तथा अन्य एकांकी, कागज की आग तथा अन्य एकांकी, समय की शिला पर, बाल साहित्य-अग्नि संतान, विश्व की श्रेष्ठ लोककथाएं, तीन तारे, बचपन की याद रही कहानियां, भारतरत्न : पं. गोविन्द बल्लभ पन्त आदि।

पुरस्कार व सम्मान :
‘छाया मत छूना मन’, ‘मनुष्य चिह्न’, ‘श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां’ तथा ‘गंधर्व-गाथा’ को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से पुरस्कार। ‘हिमांशु जोशी की कहानियां’ तथा ‘भारत रत्न: पं. गोबिन्द बल्लभ पन्त’ को हिन्दी अकादमी, दिल्ली का सम्मान। ‘तीन तारे’ राजभाषा विभाग, बिहार द्वारा पुरस्कृत। पत्रकारिता के लिए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा ‘स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी’ पुरस्कार से सम्मानित। 
अनेक उपन्यासों, कहानियों के अधिकतर भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, नेपाली, बर्मी, चीनी, जापानी, इटालियन, बल्गेरियाई, कोरियाई, नार्वेजियन, स्लाव, चैक आदि भाषाओं में अनुवाद हुए।
विशेष : उपन्यास ‘सु-राज’ पर आधारित फिल्म बनी। ‘तुम्हारे लिए’ पर आधारित दूरदर्शन धारावाहिक। ‘तर्पण’, ‘सूरज की ओर’ आदि पर टीवी फिल्में। शरत चन्द्र के उपन्यास ‘चरित्रहीन’ पर आधारित रेडियो धारावाहिक का निर्देशन। अनेक सरकारी, अर्द्धसरकारी समितियों में हिन्दी सलाहकार रहे। 
वर्तमान में वे नार्वे से प्रकाशित पत्रिका ‘शांतिदूत’ के विशेष सलाहकार तथा हिन्दी अकादमी, दिल्ली की पत्रिका ‘इन्द्रप्रस्थ भारती’ के सम्पादन मंडल के सदस्य थेे।

डीएसबी के संस्थापक ठाकुर दान सिंह की धर्मपत्नी की जम्मू में गुमनामी में मौत

<

p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 9 नवंबर 2018। कुमाऊं विवि के सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर के संस्थापक स्वर्गीय ठाकुर दान सिंह बिष्ट की धर्मपत्नी लीलावती बिष्ट शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गयीं। जम्मू के शास्त्री नगर में शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनका बृहस्पतिवार को देहावसान हो गया था।
उल्लेखनीय है कि स्वर्गीया बिष्ट ठाकुर दान सिंह बिष्ट की तीसरी पत्नी थीं। बताया गया है कि पूर्व में वह नगर के वर्तमान सबसे बड़े मन्नू महारानी होटल के स्थान पर स्थित ग्रासमेयर स्टेट में वह रहती थीं। लेकिन 30-35 वर्ष पूर्व पारिवारिक संपत्ति संबंधी विवाद के बाद वह अपनी पुत्री नीलम एवं दामाद डा. अशोक परिहार के साथ जम्मू चली गयीं एवं वहां गांधी नगर क्षेत्र में रह रही थीं। बताया गया है कि नैनीताल में रहते भी उन्हें मिलने योग्य सम्मान नहीं मिल पाया। डीएसबी परिसर में भी उन्हें कभी नहीं बुलाया गया, जो कि उनके पति के नाम पर था। उल्लेखनीय है कि ठाकुर दान सिंह बिष्ट कुमाऊं के प्रसिद्ध मालदार परिवार से थे। कहते हैं आजादी के दौर में ‘टिंबर किंग’ कहे जाने वाले मालदार परिवार देश के शीर्ष 10 पूंजीपतियों में शामिल था। उनका भारत सहित नेपाल तक लकड़ी का कारोबार था। पिथौरागढ़ जिले के चौकोड़ी में इस परिवार का चाय का बागान आज भी प्रसिद्ध है। यहां की चाय कभी विश्वप्रसिद्ध थी। 1919 से चौकोड़ी से लेकर बेरीनाग तक की कई किमी लंबी संपत्ति ठाकुर दान सिंह बिष्ट के पिता ठाकुर देव सिंह बिष्ट व चाचा ठाकुर चंचल सिंह बिष्ट के नाम रही। नैनीताल के दुर्गापुर क्षेत्र में ‘बिष्ट स्टेट’ भी इसी परिवार की कोठी है। इधर उनके निधन के समाचार से डीएसबी परिसर में शोक का माहौल है।

वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी श्रीश कुमार की माता के शांति कार्यक्रम 11 नवंबर को

नैनीताल, 1 नवंबर 2018। वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी, नैनीताल झील विकास प्राधिकरण एवं जिला विकास प्राधिकरण के सचिव रहे श्रीश कुमार की पूज्य माता शशि सिंह का बृहस्पतिवार शाम देहावसान हो गया है। वह 81 वर्ष की थीं, एवं वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं। उनका हल्द्वानी के एक निजी चिकित्सालय में उपचार चल रहा था। इसी दौरान शाम करीब साढ़े पांच बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके उपरांत उनके पार्थिव शरीर को उनके काशीपुर स्थित आवास पर लाया गया है। जहां से उनकी अंतिम यात्रा शुक्रवार पूर्वाह्न 11.30 बजे को निकलेगी। स्वर्गीया शशि सिंह अपने पीछे पति जनार्दन सिंह, तीन पुत्र पीयूष, श्रीश एवं अंशुमन तथा नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़कर गयी हैं। नवीन समाचार परिवार दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना तथा शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी में सांत्वना प्रदान करने एवं ईश्वर से उन्हें इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना करता है।

Loading...

Leave a Reply