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नैनीताल: एक पार्किंग बनाने का मामला रक्षा मंत्री तक पहुंचा, दूसरी पार्किंग बंद करवाई..

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-कैंट में पार्किंग के लिए रक्षा मंत्री से मिले पूर्व सांसद कोश्यारी

नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री को ज्ञापन सोंपते सांसद भगत सिंह कोश्यारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 अगस्त 2019। नगर से दो किमी दूर कैंट क्षेत्र में पार्किंग के निर्माण के लिए पूर्व सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से दिल्ली में मुलाकात की और उनसे वाहन पार्किंग के लिए भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। श्री कोश्यारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि रक्षा मंत्री ने इस मामले में उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। अपने पत्र में कोश्यारी ने कहा है कि नैनीताल उत्तराखंड की विश्वविख्यात पर्यटन नगरी है। यहां पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। इससे नगर में पार्किंग व्यवस्था अपर्याप्त हो गयी है, जिस कारण नगर का पर्यटन व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। बताया है कि नैनी झील से दो किमी दूर रक्षा संपदा विभाग की एक एकड़ भूमि है, जिस पर पार्किंग बनाने से नगर की पार्किंग व्यवस्था का समाधान हो सकता है। उन्होंने इस भूमि को बी4 से सी श्रेणी में परिवर्तित करने की भी मांग की, ताकि यह भूमि छावनी परिषद के प्रबंधन में आ जाएगी और इसका पार्किंग हेतु प्रयोग किया जा सकेगा।

डीएम के आदेशों पर सूखाताल पेट्रोल पम्प के समीप चलायी जा रही अवैध पार्किंग बंद कराई

नैनीताल। एक ओर प्रशासन नगर में नई पार्किंग स्थापित करने की नगर वासियों से अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर के सूखाताल पेट्रोल पम्प के समीप चलायी जा रही अवैध पार्किंग को डीएम सविन बंसल के आदेशों के क्रम में बंद करा दिया गया है। डीएम श्री बंसल के हवाले से बताया गया है कि देवदार लौंज सूखाताल निवासी कंुवर एमए खान द्वारा पेट्रोल पम्प के नजदीक खाली पड़ी भूमि पर पार्किंग कर वसूली की जा रही थी, जिससे जहां सरकार को राजस्व की हानि हो रही थी और अनावश्यक तौर पर यातायात बाधित हो रहा था। इस सम्बन्ध में कुमाऊं आयुक्त को शिकायत भी सौंपी गयी थी। इस सम्बन्ध में नगर पालिका द्वारा नोटिस जारी किया गया था कि पार्किंग वाली खाली पड़ी भूमि के अभिलेख प्रस्तुत करें। किंतु संबंधित व्यक्ति के द्वारा भूमि के स्वात्मित्व सम्बन्धी अभिलेख प्रस्तुत न किये जाने तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए पार्किंग को सीज कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि सूखाताल क्षेत्र की कुमाऊं विवि, केएमवीएन पार्किंग आदि से लगी काफी जमीन के मूल स्वामी कुंवर एमए खान के बंशज ही बताये जाते हैं।

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-संवादहीनता, रूसी पार्किंग में आधारभूत सुविधाओं के अभाव का आरोप लगाया
-नैनीताल में सड़कों को चौड़ा करने व स्थायी पार्किंग विकसित व तल्ली-मल्ली के बीच रोप वे बनाने की भी जरूरत जताई

होटल एसोसिएशन के सदस्यों से बैठक करते पर्यटन सचिव दिलीप जावलेकर।

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जुलाई 2019। नैनीताल में हालिया ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में पर्यटन को पहुंचे खासे नुकसान पर शुक्रवार को नगर के होटल व्यवसायियों की प्रदेश के पर्यटन सचिव दिलीप जावलेकर के साथ बैठक हुई। बैठक में जहां श्री जावलेकर ने रानीबाग से नैनीताल के लिए रोपवे निर्माण की योजना बताई, साथ ही होटल व्यवसायियों से नगर में भी छोटे रोप-वे निर्माण की संभावनाएं बताने को कहा। वहीं होटल व्यससायियों ने उन्हें पिछले सीजन के दौरान आई समस्याओं पर जमकर खरीखोटी सुनाई। यहां तक कि पर्यटन सीजन में 60 फीसदी कारोबारियों को घाटा होने की बात कहते हुए इसके लिए जिला प्रशासन पर संवादहीनता बनाने का आरोप भी लगाया। नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में कोई भी स्थायी पार्किंग की स्थापना की दिशा में ठोस कार्य नहीं हुआ है।
टीआरसी सूखाताल में हुई बैठक में श्री साह ने रूसी बायपास पर बनाई गयी पार्किंग व्यवस्था मेंॅ पेयजल, शौचालय, भोजनालय तथा सुरक्षा के इंतजाम जैसी आधारभूत सुविधाओं का नितान्त अभाव होने का आरोप लगाया, और नारायण नगर, मल्लीताल, तल्लीताल तथा भवाली रोड पर एक स्थायी पार्किंग व्यवस्था कराने का सुझाव दिया। उन्होंने तल्लीताल से मल्लीताल के बीच रज्जु मार्ग के निर्माण की भी बात कही। साथ ही बलियानाला में भूस्खलन को एक बहुत बड़ी एवं विकराल समस्या बताते हुए इससे निपटने की आवश्यकता जताई। कहा कि यदि बलियानाला प्रभावित होता है तो शहर का पर्यटन समाप्त हो जाएगा। उन्होंने काठगोदाम-नैनीताल तथा कालाढुंगी-नैनीताल सड़कों के चौड़ीकरण करने तथा पूर्व की भॉति पर्यटक बसों को नैनीताल शहर में प्रवेश करने की अनुमति दिए जाने की भी मांग भी रखी। कहा कि पहले पर्यटक बसें पर्यटकों को शहर में छोड़कर बाहर पार्क हो जाती थीं, इस सम्बन्ध में माननीय उच्च न्यायालय से सरकार को अनुरोध करना चाहिए। बैठक में केएमवीएन के प्रबन्ध निदेशक रोहित मीणा सहित होटल व्यवसायी कमल जगाती, दिग्विजय सिंह, आलोक साह, वेद साह, विशाल खन्ना, ब्रज साह, अतुल साह, प्रदीप जेटली, अनूप साह, डीडी बहुगुणा, जिला पर्यटन अधिकारी अरविन्द गौड़, महाप्रबन्धक केएमवीएन अशोक जोशी के अलावा अन्य पर्यटक व्यवसायी मौजूद रहे।

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-प्रशासन पर बिना व्यवस्थाएं सैलानियों को रोक कर नगर के पर्यटन व्यवसाय को 60 फीसद तक गिराने का आरोप
-आगे मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व डीजीपी से मांगा मिलने का समय, स्थानीय प्रशासन से निराश

तल्लीताल गांधी चौक पर धरने पर बैठे होटल मालिक।

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जून 2019। बुधवार को रूसी बैंड पर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने के बाद बृहस्पतिवार को नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के सदस्य गांधी जी की शरण में आ गये। उन्होंने नगर के तल्लीताल गांधी चौक स्थित गांधी मूर्ति के नीचे प्रदर्शन किया। वे ‘सेव नैनीताल टूरिज्म’ जैसे संदेश लिखे होर्डिंग लगाये हुए थे। इस मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने कहा प्रशासन पर्यटन के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाये रहा। अपने वादे के अनुरूप रूसी बाइपास पर पार्किंग के साथ जरूरी व्यवस्थाएं नहीं कीं, और घंटों वाहनों को रोकर नगर के पर्यटन का 60 फीसद तक नुकसान कर दिया। इससे केवल नैनीताल ही नहीं, पूरे कुमाऊं मंडल के पर्यटन का नुकसान हुआ। वहीं शिकायत करने और गत दिनों आंदोलन की चेतावनी देने पर भी प्रशासन का रवैया केवल आश्वासन देकर आंदोलन को टालने का रहा। कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस मौके पर एसोसिएशन के बृज साह, वेद साह, दिग्विजय बिष्ट, आलोक साह, गीता पांडे, नरेश गुप्ता, रमनजीत सिंह, घनश्याम बेलवाल, कमल जगाती, अमर जगाती, अतुल साह, मोहन खुल्बे, ओम प्रकाश मैद, विशाल खन्ना व महेंद्र बिष्ट सहित बड़ी संख्या मं होटल मालिक मौजूद रहे।

हम वाहनों को रोके जाने के खिलाफ नहीं: अध्यक्ष

नैनीताल। नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने कहा कि एसोसिएशन वाहनों को शहर के बाहर रोके जाने के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन वाहन 10-15 मिनट के लिए रोके जाने चाहिए, न कि चार-पांच घंटों तक। जैसा कि इस बार पुलिस ने सैलानियों के साथ किया है। कहा कि पुलिस ने रूसी बाईपास पर सड़क किनारे वाहनों को 200 रुपए तक पार्किंग शुल्क लेकर रोका, लेकिन वहां शौचालय ही नहीं हैं। एसोसिएशन के युवा सदस्य दिग्विजय बिष्ट ने कहा कि महिला सैलानी अपनी कारों की आढ़ में शौच एवं लघुशंका निवारण करने को मजबूर हुई हैं।

बन रहा विस्तृत प्रस्ताव

नैनीताल। होटल एसोसिएशन के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं डीजीपी को दिखाने के लिए नगर की यातायात एवं अन्य अव्यवस्थाओं में सुधार के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। युवा होटल व्यवसायी आलोक साह ने आईआईटी के विशेषज्ञों की गत वर्ष तैयार रिपोर्ट के हवाले से बताया कि इसमें नगर में प्रतिदिन आने वाली करीब 3700 टैक्सियों के भार को केवल 200 बसों से वहन किया जाने का सुझाव दिया था। जबकि नगर में प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर बसों पर रोक लगाए हुए है। जबकि सुबह 7-8 बजे व रात्रि में 10 बजे के बाद भी बसें आकर नगर से सैलानियों व वाहनों का काफी दबाव कम कर सकती हैं।

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रुसी बाईपास में सड़क पर बैठे नैनीताल के होटल वाले।

नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जून 2019। नैनीताल में प्रशासन की नीतियों के विरोध में ब्लैक आउट व काले झंडे लगाने के बाद बुधवार को नगर के होटल मालिक सड़क पर उतर आये। उन्होंने रूसी बाईपास में सांकेतिक विरोध-प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि प्रशासन ने शहर में वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए रूसी बाइपास आदि में सैलानियों के लिए शौचालय, अच्छी शटल टैक्सी आदि की जो वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने का आश्वासन दिया था, उन्हें पूरा करे, और तभी वाहनों का नगर में प्रवेश रोके। पर्यटक नगरी में किसी को आने से रोका नहीं दिया जा सकता। ऐसा किया जाना सैलानियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
उधर नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के विरोध-प्रदर्शन का हल्द्वानी व्यापार मंडल के बाद मुक्तेश्वर होटल एसोसिएशन ने भी समर्थन किया है। मुक्तेश्वर होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन भी शासन-प्रशासन के ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में यातायात सुविधाओं की अनदेखी से नाराज है। नाराजगी के ये सुर आज एसोसिएशन की मुक्तेश्वर में आयोजित बैठक में सुनायी दिये। होटलों में काले झंडे व बाहर की लाइट बुझाने का असर मुक्तेश्वर क्षेत्र के होटलों में भी दिखाई दिया। मुक्तेश्वर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप दर्मवाल ने बताया ट्रैफिक असुविधाओं के कारण वहां भी 60 फीसद तक कारोबार का नुकसान हुआ है। पुलिस द्वारा रूट डाइवर्ट करने से कई सैलानी हल्द्वानी से आगे नहीं पहुंच पाये। इस मौके पर सुदर्शन शाही उपाध्यक्ष, सयैद फराज शाह सचिव, दिलावर सिंह बिष्ट उपसचिव आदि भी उपस्थित रहे। वहीं नगर के अधिवक्ता होटल वालों के विरोध में दिखाई दिये। उन्होंने एक तरह से होटल वालों से उलट नगर में वाहनों का प्रवेश रोके जाने की वकालत की।

अधिवक्ताओं ने की इस वर्ष की यातायात व्यवस्था की प्रशंसा

नैनीताल। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष दीपक रुबाली की अगुवाई में जिला बार के कई वर्तमान एवं पुराने पदाधिकारियों ने कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला को ज्ञापन सोंपकर इस वर्ष के ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में अपनायी गयी यातायात व्यवस्था की प्रशंसा की है। बुधवार को आयुक्त को सोंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि इस वर्ष प्रशासन के द्वारा नगर में जो यातायात व पार्किंग की व्यवस्था अपनाई गयी, उससे नगर के आमजन, विद्यार्थियों व पर्यटकों को जाम का सामना नहीं करना पड़ा, व आम जनजीवन भी अधिक प्रभावित नहीं हुआ। नगर में पहुंचने के बाद सैलानी भी आराम से नगर में आवाजाही कर पाये। किंतु कुद लोग व्यक्तिगत स्वार्थों के तहत इस व्यवस्था का विरोध कर आम जनजीवन को पुनः प्रभावित कर नगर वासियों के साथ यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को भी परेशान कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था को जारी रखते हुए अनावश्यक वाहनों की नैनीताल में आवाजाही रोक कर नगर के अन्य छोरों में पार्किंग आदि की व्यवस्था कर, सिर्फ पर्यटकों को नैनीताल आने दिया जाए, जिससे पर्यटकों के साथ नगरवासी भी अपने आम जनजीवन को सुचारू रूप से जी सकें। ज्ञापन में बार के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप परगाई, पूर्व अध्यक्ष ओमकार गोस्वामी, मनीश जोशी, शंकर चौहान, संजय सुयाल, पुलक अग्रवाल, भुवन जोशी, प्रमोद तिवारी, पंकज बिष्ट, भरत भट्ट, पीयूष सिंह, पंकज चौहान, अशोक मौलेखी, हेमू बोरा, यूनुस खान, कमला अधिकारी, मान सिंह बिष्ट व भूपाल बिष्ट आदि अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर हैं।

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पालिका ने बदला बोर्ड, अब 18 नई 5 घंटे ही देना पड़ेगी दोगुनी चंुगी

मंगलवार को नगर पालिका द्वारा लेक ब्रिज चुंगी पर बदला गया बोर्ड।

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 जून 2019। आपके प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ की खबर का बड़ा असर हुआ है। अब नगर में आने वाले सैलानियों को नगर में आगमन पर लेक ब्रिज चुंगी पर नियमानुसार दिन में केवल 5 घंटे ही दोगुना शुल्क देना पड़ेगा। जबकि अब तक पालिका के अधिशासी अधिकारी के आदेशों का हवाला देते हुए 18 घंटे दो गुना शुल्क देना पड़ रहा था। इस विषय को प्रमुखता से उठाने के बाद मंगलवार को चुंगी पर बोर्ड बदल दिया गया है, और नियमानुसार चुंगी वसूली जाने लगी है।
उल्लेखनीय है कि ‘राष्ट्रीय सहारा’ ने गत 20 जून को समाचार प्रकाशित किया था कि नगर की लेक ब्रिज चुंगी के जरिये इस वर्ष स्वयं नगर पालिका की सरपरस्ती में पालिका के कई उप नियमों (बाईलॉज), कायदे-कानूनों को खुले आम तोड़ा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पालिका के उप नियमों के अनुसार ग्रीष्मकाल में 16 मार्च से 15 नवंबर तक शाम चार से रात्रि नौ बजे तक एवं शीतकाल में यानी 16 नवंबर से 15 मार्च तक शाम तीन बजे से रात्रि आठ बजे तक वाहनों से निर्धारित से दोगुना शुल्क लिया जाने का प्राविधान है। यानी दोनों अवधि में दिन में केवल पांच घंटे ही दोगुना शुल्क लिया जाना है। किंतु लेक ब्रिज चुंगी पर इस उपनियम की अलग ही व्याख्या कर प्रातः नौ से दोपहर तीन बजे के बीच के 6 घंटे छोड़कर दिन के शेष 18 घंटों में दो गुना शुल्क लिया जा रहा था। साथ ही ग्रीष्मकाल होने के बावजूद शीतकाल का समय लागू किया गया था, यानी शाम चार बजे की जगह तीन बजे ही दोगुना शुल्क लिया जा रहा था। इस संबंध में बकायदा चुंगी पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के नाम से सूचना भी सार्वजनिक की गयी थी।

इस समाचार का हुआ असर : बड़ा एक्सक्लूसिव समाचार: नैनीताल की लेक ब्रिज चुंगी पर ‘नगर पालिका ईओ के आदेशों पर’ बड़ा घोटाला ! एक दिन में पांच की जगह 18 घंटे वसूला जा रहा है दो गुना शुल्क !!

-लेक ब्रिज चुंगी में टूट रहे कई कायदे-कानून

लेक ब्रिज चुंगी पर नगर पालिका के आदेशों का बोर्ड।

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जून 2019। नगर की लेक ब्रिज चुंगी के जरिये इस वर्ष स्वयं नगर पालिका की सरपरस्ती में पालिका के कई उप नियमों (बाईलॉज), कायदे-कानूनों को खुले आम तोड़ा जा रहा है। पालिका के उप नियमों के अनुसार ग्रीष्मकाल में 16 मार्च से 15 नवंबर तक शाम चार से रात्रि नौ बजे तक एवं शीतकाल में यानी 16 नवंबर से 15 मार्च तक शाम तीन बजे से रात्रि आठ बजे तक वाहनों से निर्धारित से दोगुना शुल्क लिया जाने का प्राविधान है। यानी दोनों अवधि में दिन में केवल पांच घंटे ही दोगुना शुल्क लिया जाना है। किंतु लेक ब्रिज चुंगी पर इस उपनियम की अलग ही व्याख्या कर दिन के 18 घंटे दो गुना शुल्क लिया जा रहा है। साथ ही ग्रीष्मकाल होने के बावजूद शीतकाल का समय लागू किया गया है, यानी शाम चार बजे की जगह तीन बजे ही दोगुना शुल्क लिया जा रहा है। इस संबंध में बकायदा चुंगी पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के नाम से सूचना भी सार्वजनिक की गयी है। यह बड़ा बड़ा घोटाला हो सकता है।

नगर पालिका के उपनियमों में लेक ब्रिज चुंगी के प्राविधान।

सूचना पट के अनुसार प्रातः नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक जीएसटी सहित 59 रुपए एवं दोपहर तीन बजे के पश्चात (कब तक का जिक्र नहीं जबकि यह शीतकाल के अनुसार आठ बजे, एवं ग्रीष्मकाल के अनुसार शाम चार से रात्रि नौ बजे होना चाहिए) पूरी रात्रि और सुबह नौ बजे तक दोगुना यानी 118 रुपए शुल्क वसूला जा रहा है। इसमें भी यात्रियों की शिकायत है कि खुले पैंसे न होने की आढ़ में 60 व 120 रुपए वसूले जाते हैं। बताया गया है कि इस संबंध में कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला से भी शिकायत की गयी हैं पूछे जाने पर सभी संबंधित लोग अज्ञानता जाहिर कर रहे हैं, व जानकारी से इंकार कर रहे हैं। लेक ब्रिज चुंगी के ठेकेदार के प्रतिनिधि का कहना है, हो सकता है चुंगी कर्मी अज्ञानतावश ऐसा कर रहे हों। वहीं नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने भी उनके आदेश से लगे किसी सूचना पट की जानकारी से इंकार करते हुए मामले का संज्ञान लेने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व लेक ब्रिज चुंगी को शहर से बाहर करके, खासकर बल्दियाखान में स्थानांतरित कर ऐसी पर्यटक बसों से भी शुल्क बसूले जाने की शिकायतें आई थीं, जिनका मूल लेक ब्रिज यानी माल रोड पर गुजरने का प्राविधान ही नहीं है। वहीं ऐसे वाहनों से भी शुल्क वसूला गया, जिन्हें पुलिस ने शहर में प्रवेश ही नहीं करने दिया और रूसी बाईपास पर ही रोक दिया।

यह भी पढ़ें : होटलों के ‘ब्लेक आउट’ व काले झंडों का सांसद अजय भट्ट ने यूं लिया संज्ञान…

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जून 2019। नैनीताल होटल एंड रेस्टोरंेट एसोसिएशन के द्वारा नगर के होटलो के बाहर सोमवार शाम को काले झंडे लगाने एवं शाम से होटलों के बाहर लाइट न जलाकर ‘ब्लेक आउट’ करने पर क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट ने संज्ञान लिया है। भट्ट ने इस संबंध में होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह से दूरभाष पर वार्ता की है, तथा उनकी आपत्तियों का जल्द समाधान करने की बात कही है। साथ ही कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला से भी बात करके उन्हें होटल एसोसिएशन की समस्याओं व आपत्तियों का संज्ञान लेकर समाधान निकालने के निर्देश दिये हैं। इस हेतु एक कमेटी बनाने को भी कहा गया है। साथ ही श्री भट्ट ने कहा है कि वह नगर में केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कैंट जैसे स्थानों की भूमि पर शीघ्र नई पार्किंग के निर्माण के लिए प्रयास करेंगे। श्री भट्ट के प्रतिनिधि के तौर पर नगर के वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल रावत ने यह जानकारी दी है। सांसद के निर्देशों के बाद मंगलवार को ही मंडलायुक्त राजीव रौतेला की ओर से होटलों के विरोध प्रदर्शन को स्थगित कराने के प्रयास शुरू हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के होटलों में प्रशासन के खिलाफ शुरू हुआ ‘ब्लेक आउट’, लगे काले झंडे

-इतिहास में पहली बाद नैनीताल प्रशासन के खिलाफ खुलकर मुखर हुआ होटल एसोसिएशन, लगाया पर्यटन को बरबाद करने व अनदेखी का आरोप

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 जून 2019। नगर व जिला प्रशासन पर नैनीताल के पर्यटन को बरबाद करने का आरोप लगाते हुए नैनीताल होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने इतिहास में पहली बार आंदोलन की राह पकड़ ली है। इतिहास में पहली बार नैनीताल होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने सोमवार से अपनी पूर्व घोषणा पर अमल करते हुए होटलों के बाहर काले झंडे टांक दिये हैं और शाम ढलने के बाद होटलो के बाहर की लाइटें बंद कर ‘ब्लेक आउट’ कर दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व मंे यह घोषणा की गयी थी किंतु तब डीएम व एसएसपी की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार करने का आश्वासन किया गया था। किंतु कोई कार्रवाई कर व्यवस्थओं में सुधार नहीं किया गया। शनिवार से वाहनों को घंटों नगर से बाहर हनुमानगढ़ी व अन्य स्थानों पर रोका गया, लिहाजा अपनी घोषणा को अमल में लाने पर विवश हो गये हैं। आगे देहरादून जाकर मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से मिलकर अपनी व्यथा बताएंगे।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में एसोसिएशन ने प्रशासन पर पर्यटन के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने, शहर की पार्किंगों की व्यवस्था न करने और नगर की पार्किंग एवं होटलों में स्थान खाली होने के बावजूद वाहनों को बाहर रोकने, इस वजह से नगर की पर्यटन छवि को खराब करने एवं छवि को ठीक करने के लिए कोई प्रबंध नहीं करने, जिस कारण इस वर्ष नगर के पर्यटन में 50 फीसद तक की गिरावट आने की बात कही। बताया कि इस बाबत सोमवार सुबह एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक में विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया गया। बैठक में ब्रिज साह, वेद साह, आलोक साह, प्रीति भट्ट, आशीश नंदा, पिंकी सेठी, गीता भट्ट, एपी सिंह, शैलेश साह व कमल जगाती सहित बड़ी संख्या में होटल व्यवसायी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : पर्यटन के लिए मई-जून में नैनीताल से अन्यत्र स्थानांतरित हो हाईकोर्ट : सईद शेरवानी

-नैनीताल में होटलों की दरें सार्वजनिक करने, अभी से पार्किंग के लिए प्रयास करने एवं बैटरी चालित वाहन चलाने की जताई जरूरत

पत्रकार वार्ता करते शेरवानी होटल के प्रबंध निदेशक सईद शेरवानी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जून 2019। अखिल भारतीय होटल एवं रेस्टोरेंट फेडरेशन तथा उत्तराखंड होटल एवं रेस्टारेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष तथा नगर के शेरवानी होटल के प्रबंध निदेशक सईद शेरवानी ने सरोवरनगरी में इस वर्ष पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आने पर गहरी चिंता व्यक्त की, एवं अगले वर्ष से नगर के पर्यटन को बेहतर करने के लिए अपने सुझाव भी दिये।

उन्होंने नगर के शीर्ष ग्रीष्मकालीन पर्यटन सत्र के दौरान 15 मई से 30 जून महीनों में उत्तराखंड उच्च न्यायालय को अन्यत्र स्थानांतरित करने का सुझाव दिया।

साथ ही नगर के होटल मालिकों से अपनी दरें सार्वजनिक करने की पहल करने का आह्वान करते हुए पर्यटन विभाग से नगर के होटलों की जानकारी देने के लिए काउंटर खोलने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि नगर में पार्किंग समस्या के समाधान के लिए इसी वर्ष जुलाई माह से प्रयास तेज कर दिये जाने चाहिए। इसके अलावा उन्होंने नगर में स्थानीय आवागमन के लिए प्रदूषणरहित बैटरी चाहित वाहन चलाये जाने का सुझाव भी दिया। इस मौके पर शेरवानी होटल के महाप्रबंधक गोपाल दत्त, दिनेश पालीवाल आदि लोग भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : पर्यटन में 50 फीसद तक गिरावट, प्रशासन के बाद अब सरकार व सत्तारूढ़ दल के खिलाफ पर्यटन व्यवसायियों में गुस्सा

-माल रोड के होटलों में भी 50 फीसद से अधिक कमरे खाली, न प्रशासन-न ही सरकार के स्तर से पर्यटन में सुधार, पर्यटकों को आमंत्रित करने के कोई प्रयास किये गये

सोमवार को नौकाओं से काफी हद तक खाली पड़ी नैनी झील और खाली नौकाएं।

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जून 2019। पर्यटन उत्तराखंड का प्रमुख आय का स्रोत है। प्रदेश सरकार कहने को राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दे चुकी है। देश भर की मीडिया में राज्य के पर्यटन को लेकर नकारात्मक छवि बनाई गयी है। इससे बीते रविवार के बाद सरोवरनगरी सहित सभी निकटवर्ती पर्यटन स्थलों का पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह से चौपट हो गया है। किंतु राज्य सरकार के द्वारा इन स्थितियों में सुधार, प्रदेश के पर्यटन की छवि को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं शुरू नहीं किये गये हैं। वहीं जिला-पुलिस प्रशासन का पर्यटन के प्रति रवैया शुरू से नकारात्मक दिखा है। यहां तक कि पिछले वर्षों में पर्यटन व्यवस्थाओं को बनाने के लिए होने वाले औपचारिक बैठकें भी इस वर्ष नहीं हुईं। ऐसे में पर्यटन व्यवसायियों में जिला प्रशासन के बाद अब गुस्सा राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचता नजर आ रहा है। लोग पूछ रहे हैं, लोक सभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल को ऐसा प्रचंड बहुमत देने का यही सिला मिला है।
उल्लेखनीय है कि बीते रविवार तक सरोवरनगरी में रही सैलानियों की जबर्दस्त भीड़भाड़ रही। किंतु रविवार को प्रशासन द्वारा सैलानियों के वाहनों को नगर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इससे अनेक सैलानी वापस लौटने को मजबूर हुए। इस कारण रविवार को सप्ताहांत के दिन ही नगर के होटलों में आने वाले सैलानियों की संख्या में गिरावट दर्ज हो गयी थी। वहीं आगे इस संबंध में राष्ट्रीय मीडिया चैनलों में भी खबरें आने के बाद तो सोमवार से नगर में सैलानियों की संख्या में ऐसी गिरावट दर्ज की गयी है कि अब पुलिस को वाहन रोकने को ही नहीं मिल रहे हैं। फलस्वरूप नगर के छोटे-बड़े सभी होटलों में 50 फीसद से अधिक कमरे खाली हैं। इसका असर टैक्सी, घोड़े, नाव वालों सहित पर्यटन से जुड़े हर वर्ग पर पड़ रहा है। इससे पर्यटन व्यवसायियों में शासन-प्रशासन के साथ राज्य सरकार व सत्तारूढ़ दल तक गुस्सा महसूस किया जा रहा है।

प्रशासन सुन नहीं रहा, सरकार कुछ कर नहीं रही: दिनेश

नैनीताल। इन स्थितियों पर नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्षा दिनेश साह ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश केवल कहने को कहती है। जिस तरह पर्यटन नगरी में पर्यटकों को प्रशासन ने आने से रोका है, उससे इस वर्ष का पर्यटन चौपट हो गया है। माल रोड के होटल भी 50 फीसद से अधिक खाली हैं। बावजूद न प्रशासन सुन रहा है, और न ही सरकार कुछ कर रही है। अगर यह सिलसिला अगले वर्षों में भी जारी रहा तो तीन-चार वर्ष के भीतर नैनीताल-मसूरी की पर्यटन नगरी के रूप में पहचान ही समाप्त हो जाएगी।

वीआईपी कल्चर में फंस कर परेशान हो रहे सैलानी

नैनीताल, एसएनबी। सरोवरनगरी नैनीताल में रविवार को सैलानियों के वाहनों को शहर से बाहर रोके जाने के बाद नगर का पर्यटन व्यवसाय ध्वस्त हो चुका है। पुलिस को नगर से बाहर रोकने के लिए शहर से बाहर पर्यटकों के वाहन ढूंढे नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं अब पुलिस वीआईपी कल्चर के नाम पर पर्यटक वाहनों को रोककर परेशान कर रही है। बृहस्पतिवार को अपराह्न करीब ढाई बजे से ही वाहनों को माल रोड के डायवर्जन सहित विभिन्न स्थानों पर रोक दिया गया। बताया गया कि राज्यपाल बेबी रानी मौर्या राजभवन से लोवर माल रोड पर स्थित बोट हाउस क्लब आ रही हैं, लेकिन जब वाहनों को रोक दिया गया था, तब तक राज्यपाल की फ्लीट करीब तीन किमी दूर राजभवन से चलना भी प्रारंभ नहीं हुई थी। इससे सैलानी परेशान रहे और वीआईपी कल्चर के व्याप्त रहने के प्रति आक्रोश जताते दिखे।

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-शहर में न आने वाले वाहनों से भी ली जा रही लेक ब्रिज चुंगी
-कार पार्किंग में वसूला जा रहा ढाई गुना तक शुल्क
-अवैध होटल, टैक्सियां भी काट रहीं चांदी
नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जून 2019। पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल में प्रशासन नगर की वैश्विक प्रसिद्धि को गर्त में धकेलने पर आमादा नजर आता है। नगर में स्वयं प्रशासन की व्यवस्थाओं में ‘अतिथि देवों’ के साथ लूट का खुला खेल खेला जा रहा है। शहर में प्रवेश न करने वाली टैक्सियों के साथ ऐसी बसों से भी ‘लेक ब्रिज चुंगी’ वसूले जाने की बात कही जा रही है, जो लेक ब्रिज यानी माल रोड से गुजरने के लिए ही अनुमन्य नहीं हैं। वहीं प्रशासन के दो वर्ष पुराने वादों के बावजूद ‘बिना किसी सुरक्षा एवं शौचालय’ आदि की व्यवस्थाओं के खड़े होने वाले वाहनों से भी मनमाना, यहां तक कि मुख्यालय स्थित कार पार्किंग में दो पहिया वाहनों से निर्धारित 20 रुपए की जगह 50 रुपए यानी ढाई गुना तक शुल्क वसूला जा रहा है। साथ ही प्रशासन के अज्ञात कारणों से मिल रहे संरक्षण में नगर के अवैध रूप से चल रहे होटलों में सैलानियों के साथ इससे भी बड़ी लूट हो रही है। घरों और केवल सीजन के दौरान बिना नाम के चलने वाले गेस्ट हाउसों में सैलानियों से भीड़भाड़ का मौका देखकर 5 से 10 हजार रुपए तक भी वसूले जा रहे हैं। यही स्थिति टैक्सियों की भी है। यहां तक कि प्रशासन द्वारा स्वयं स्थापित किये गये प्रीपेड बूथों से भी तय दरों पर टैक्सियां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन को सूचना के अधिकार से प्राप्त सूचना के अनुसार मुख्यालय में केवल 154 पंजीकृत होटल व 50 के करीब गेस्ट हाउस ही पंजीकृत हैं। लेकिन शहर में कुल मिलाकर वैध-अवैध एक हजार के करीब होटल, गेस्ट, रेस्ट हाउस व होम स्टे आदि चल रहे हैं। यानी 200 वैध संस्थाओं के उलट 800 यानी करीब चार गुना अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इतनी संख्या को सही न भी माना जाए, लेकिन प्रशासन की मानें तो शहर में औपचारिक तौर पर एक भी अवैध संस्थान नहीं चल रहा है, क्योंकि प्रशासन ने आज तक एक भी अवैध संस्थान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। होटल एसोसिएशन के केंद्रीय पदाधिकारी प्रवीण शर्मा ने बताया कि प्रशासन से कई बार अवैध होटलों की शिकायत और कार्रवाई किये जाने की मांग कर चुके हैं।

टैक्सियों का तय से अधिक वसूला जा रहा किराया

नैनीताल। पुलिस-प्रशासन, आरटीओ ने वर्ष 2000 में हल्द्वानी से नैनीताल का टैक्सी का किराया 75 रुपए प्रति सीट तय किये गये थे। यह अलग बात है कि बीते 9 वर्षो से यह दरें बदलने की प्रशासन को फुरसत नहीं मिली है, इसलिए अभी भी यही दरें लागू हैं। जबकि प्रति व्यक्ति किराया आम तौर पर 150 से 200 प्रति सवारी तथा भीड़ बढ़ने पर इससे भी अधिक किराया वसूला जा रहा है। यहां तक कि गत दिवस 10 किमी दूर जहां का किराया आम तौर पर 20 रुपए है, प्रति यात्री 100 रुपए वसूला गया। वहीं शटल टैक्सी का किरासा रूसी बाईपास से तल्लीताल डांठ और खुर्पाताल बाइपास से सूखाताल तक 500 तथा पाइंस से तल्लीताल तक का 300 रुपए एवं काठगोदाम से नैनीताल का 8-9 सीट वाली बड़ी गाड़ी का 975 रुपए तय किया गया था। जबकि रूसी बाइपास व खुर्पाताल से नगर के लिए 12 से 1500 एवं पाइंस से 600 से 800 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। बड़ी बात यह भी है कि प्रशासन की ओर से इन दरों को जांचने के लिए प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था ही नहीं है।

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-सोमवार को रही सैलानियों व वाहनों की अपेक्षाकृत 

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जून 2019। न जाने क्या हुआ कि एक दिन के भीतर ही सरोवरनगरी में सब कुछ शांत नजर आ रहा है। नगर में सप्ताहांत पर रही सैलानियों व वाहनों की जबर्दस्त भीड़भाड़ सोमवार को सिमटती दिखाई दी। आज न ही नगर और न ही शहर के बाहर कोई बड़ा जाम दिखाई दिया। नगर की सड़कें तो कमोबेश पिछले कई वर्षों के मुकाबले सीजन में काफी हद तक खाली दिखाई दीं। नैनी झील में भी अपेक्षाकृत कम संख्या में नौकाएं नजर आईं। नगर के बाहर भी सड़कों पर वाहनों की संख्या कल के मुकाबले काफी कम रही। कालाढुंगी रोड पर तो सैलानी एवं स्थानीय लोग बिना किसी समस्या के नगर में पहुंच पाये। हल्द्वानी रोड पर भी स्थिति काफी अच्छी रही। एएसपी राजेश भट्ट ने बताया कि आज शहर एवं शहर के बाहर कहीं भी जाम नहीं लगे और यातायात व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य रही। बताया जा रहा है कि आज पुलिस कर्मियों को भी आराम करने का समय दे दिया गया।
इन स्थितियों पर नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने दावा किया कि आज होटलों के 50 फीसद कमरे खाली पड़े हैं। वहीँ एसोसिएशन के सदस्य दिग्विजय सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रशासन के नकारात्मक रवैये एवं मीडिया में नगर में बुकिंग वाले वाहनों को भी न आने देने व बाईपास पर पार्क किये वाहनों को भी जाम दिखाने जैसी ‘नकारात्मक खबरों’ की वजह से नगर में आने वाले सैलानी यहां से बड़ी संख्या में अपनी बुकिंग निरस्त कराकर अन्यत्र चले गये हैं। प्रशासन को इस संबंध में पत्रकार वार्ता कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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अपनी व्यथा सुनाते बुजुर्ग दंपत्ति पूर्व अधिकारी

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जून 2019। बीती शाम हल्द्वानी रोड पर नगर को आ रहे जनपद में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता रहे 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग वीके गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी के साथ पुलिस कर्मियों ने हल्द्वानी रोड पर कथित तौर पर अभद्रता व दुर्व्यवहार किया। इस पर नगर के पर्यटन व्यवसायियों में जबर्दस्त गुस्सा नजर आ रहा है। नगर के सबसे, 120 वर्ष पुराने प्रतिष्ठान राम लाल एंड ब्रदर्श के स्वामी श्री पुनीत टंडन को अपनी व्यथा सुनाते बताया कि वे 1980 से 1984 तक यूपी जल निगम के अधिशासी अभियंता के रूप में नैनीताल में रहे हैं, तथा उनकी पत्नी नगर के सेंट मेरी कान्वेंट में शिक्षिका थीं। वे तभी से नैनीताल आते रहे हैं। बीती शाम वे दो कारों से अपने परिवार सहित नैनीताल आ रहे थे। उनकी नगर के ग्रांड होटल में दो सुइट्स की बुकिंग भी थी। बावजूद एक पुलिस कांस्टेबल ने उनके द्वारा अपनी बुकिंग की पर्ची दिखाने के बावजूद उनकी उम्र आदि का कोई लिहाज न करते हुए उनसे बदतमीजी की, और उनकी कार पीछे लौटा दी। पुलिस कर्मी ने कहा कि उनके पास नगर को भेजे जाने वाले होटलों की लिस्ट है, पर जब उन्हें फुरसत होगी तब देखेंगे। उन्होंने कहा कि वे अब कभी नैनीताल नहीं आएंगे। इस पूरी घटना का वीडियो भी सोमवार को नगर के पर्यटन व्यवसायियों के बीच वायरल रहा और राज्यपाल, कुमाऊं आयुक्त, डीआईजी, डीएम व एसएसपी आदि अधिकारियों को भी भेजा गया।

नैनीताल में सीजन के दौरान इंटरनेट, मोबाइल सिग्नल, पानी, आवागमन हर तरह की दिक्कत

नैनीताल। नैनीताल नगर में पर्यटन सीजन और इस दौरान पिछले कुछ दिनों से भारी संख्या में सैलानियों के उमड़ने से नगर की सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गयी हैं। नगर में न किसी भी कंपनी का इंटरनेट ठीक से काम कर रहा है, न ही फोन पर ही ठीक से बात हो पा रही है। वहीं आवागमन की समस्या भी इतनी बड़ी है कि लोग पैदल भी अपने दैनंदिन कार्यों के लिए घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। सुबह तड़के ही लग जा रहे जाम से बच्चों का स्कूल जाना और दिन में लौटना भी मुश्किल हो गया है। वहीं नगर के विभिन्न स्थानों पीने के पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। बारापत्थर मल्लीताल के कई जगह घरों में पीने के पानी की अनियमित पेयजल आपूर्ति से उपभोक्ताओं में रोष है। मल्लीताल के मेट्रोपोल के रहने बाले वकील अहमद, लियाकत अली व बारा पत्थर के घोड़ा संचालक समिति के लोगों ने बताया कि जल संस्थान के कर्मियों की उदासीन कार्यप्रणाली के चलते उपभोक्ताओं को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द पेयजल आपूर्ति नहीं की गई तो आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। वहीं जल संस्थान के अवर अभियंता ने बताया कि विभागीय कर्मियों को पेयजल आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। शीघ्र ही पेयजल आपूर्ति शुचारू कर दी जायेगी।

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-जहां पुलिस कर्मी खड़े होते हैं वहीं बैरियर लगाकर बनाये गये हैं ‘बॉटल नेक’

-मस्जिद तिराहे और आगे हमेशा खड़े हो रहे हैं एक लाइन में वाहन, जो है जाम का कारण

-मेट्रोपोल होटल की पार्किंग का बड़ा हिस्सा कूड़े, मलबे तथा पालिका के पुराने वाहनों व कूड़ेदानों से पटा

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जून 2019। नगर में सीमित संख्या में वाहनों को आने देने की व्यवस्था के फलस्वरूप नगर में वाहनों की भीड़भाड़ कुछ ही स्थानों पर सीमित हो गयी है। अलबत्ता, यह कुछ स्थान वे हैं, जहां पुलिस कर्मी खड़े होते हैं और उन स्थानों पर बैरियर लगाकर अथवा वाहनों को सामने ही खड़े कर ‘बॉटल नेक’ बना दिया गया है। मल्लीताल रिक्शा स्टेंड, स्टेट बैंक चौराहा व मस्जिद तिराहे पर ऐसी स्थिति है। मस्जिद तिराहे पर तो हमेशा अज्ञात कारण से मैदान की रेलिंग की ओर वाहन खड़े दिखते हैं। वहीं मेट्रोपोल होटल की पार्किंग का बड़ा हिस्सा कूड़े, मलबे तथा पालिका के पुराने वाहनों व कूड़ेदानों से पटा हुआ है। यदि इन बैरियरों, वाहनों व कूड़ा, कूड़ेदानों आदि को हटा दिया जाए तो जाम व पार्किंग की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। 

इधर नगर के बाहरी क्षेत्रों में वाहनों की अत्यधिक जांच के बावजूद स्थानीय लोगों, मुख्यालय में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों व नगर में कार्यरत लोगों एवं नगर के होटलों में विधिवत बुकिंग के बावजूद आने वाले सैलानियों को आने देने की कोई अलग से व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। इस कारण निकटवर्ती बल्दियाखान, रूसी, खुर्पाताल आदि क्षेत्रों के शहर में आने वाले स्कूली बच्चे तथा कामकाजी लोग व दूधिये आदि लोग भी शहर में नहीं आ पा रहे हैं। इसके लिए स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों व शहर में बुकिंग कर आ रहे सैलानियों को प्राथमिकता में आने देने की व्यवस्था किये जाने से भी समस्या का समाधान हो सकता है। 

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-सवाल: पर्यटन नगरी में पर्यटकों को रोकने वाली कैसी ‘व्यवस्था’ ?
नवीन जोशी नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जून 2019। सरोवरनगरी में सैलानियों के ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के कुछ गिने-चुने बचे दिनों में नगर में उमड़ रहे सैलानियों को खुद पर आ रही ‘मुसीबत’ मानकर जिला, पुलिस व नगर प्रशासन ने लगता है नगर में ‘व्यवस्था’ बनाने का नया फॉर्मूला लागू कर दिया है। यह फॉर्मूला है, नगर में सैलानियों को ही न आने दो। उन पर इतना दुर्व्यवहार और इतनी ‘नकारात्मक अव्यवस्थाएं’ थोपो कि वे शहर में आने से ही तौबा कर लें। और जब वे शहर में नहीं आएंगे, तो शहर में अव्यवस्थाएं भी नहीं होंगी, और जन सेवक कहे जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को समस्याएं भी नहीं आएंगी। साथ ही शहर में आने वाले माननीयों के समक्ष भी ‘अपनी’ अच्छी छवि पेश कर सकेंगे। इसीलिए न शहर, न शहर के बाहर सुरक्षित पार्किंग और न शटल टैक्सियों या सार्वजनिक यायातात की ही कोई व्यवस्था की गयी है।
यह आरोप नगर के होटल, रेस्टोरेंट सहित अन्य गतिविधियों में शामिल पर्यटन व्यवसायियों के हैं, जो नगर में काफी हद तक सही भी प्रतीत हो रहे हैं। शुक्रवार को नगर में जहां अपेक्षित शांति रही। कहीं वाहनों के जाम क्या लंबी कतारें भी नहीं लगीं। मल्लीताल रिक्शा स्टेंड से पिछले दिनों लोवर माल रोड पर तल्लीताल तक लगने वाला वाहनों का जाम करीब 50-75 मीटर तक में सिमटा रहा। वहीं दूसरी ओर नगर से बाहर हल्द्वानी रोड पर बल्दियाखान से रूसी बाइपास तक करीब दो किमी और चील चक्कर मोड़ से हनुमानगढ़ी तक करीब एक-डेढ़ किमी का जाम लगा रहा। यही स्थिति कालाढुंगी रोड पर कालाढंुगी, सड़ियाताल व बारापत्थर तथा भवाली रोड पर मस्जिद तिराहा व पाइंस में भी रही। कई लोग खुर्पाताल से नगर में पैदल आने का मजबूर हुए। प्रशासन अपने वादे के अनुसार सैलानियों के वाहनों को शहर में प्रवेश करने से रोकने पर उन्हें शहर के बाहर सुरक्षित तरीके से खड़ा करने, वहां सैलानियों व उनके चालकों के लिए शौचालय व धूप से बचने के लिए शेड तथा शैलानियों को शहर में लाने के लिए अच्छी शटल टैक्सियों की व्यवस्था भी नहीं कर पाया। ऐसे में होटल एसोसिएशन भी जाम पर लगातार नजर रखे रहा और जिला प्रशासन से लगातार संपर्क में रहकर समस्याएं बताते रहे। कभी कालाढुंगी में ही वाहनों को रोकने की खबरें तो कभी रूसी बाईपास में केवल दो शटल टैक्सी ही उपलब्ध होने तो कभी केवल अपनी पार्किंग की सुविधा वाले 32 होटलों के सैलानियों को ही शहर में आने देने की खबरें आती रहीं। उधर प्रशासन का कहना है कि नगर से वाहनों के बाहर निकलने के साथ बाहर से आने वाले वाहनों को पांच-पांच के समूह में शहर में प्रवेश कराया जा रहा है।

मेट्रोपोल में कूडे़ के डिब्बे हटें तो 150 वाहन आ जाएं

नैनीताल। नैनीताल होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने कहा कि नगर की मेट्रोपोल होटल की पार्किंग में बड़ी संख्या में नगर पालिका के कूड़े के डिब्बे और कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां तथा भारी मात्रा में मलबा पड़ा है। इन्हें हटा दिया जाए तो यहां करीब 150 गाड़ियां खड़ी हो सकती हैं, और नगर में पार्किंग समस्या का काफी समाधान हो सकता है।

फ्लैट्स में पार्किंग खोलने को बड़ी मुहिम की सुगबुगाहट

नैनीताल। नगर के खासकर युवा पर्यटन व्यवसायियों में पिछले दो वर्षों से फ्लैट्स मैदान में वाहनों के खड़े न किये जाने को लेकर प्रशासन के खिलाफ आक्रोश की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। युवा व्यवसायियों का कहना है कि प्रशासन उत्तराखंड उच्च न्यायालय का हवाला देकर मैदान को वाहनों के लिए नहीं खोल रहा है, जबकि उनका दावा है कि हाईकोर्ट से ऐसा कोई आदेश नहीं है। यदि मैदान का एक हिस्सा सप्ताहांत या भीड़ बढ़ने पर वाहनों की पार्किंग के लिए खोला जाता है तो समस्या का काफी समाधान हो सकता है। बताया गया है कि इस हेतु युवा व्यवसायी प्रदेश की राज्यपाल, नवनिर्वाचित सांसद अजय भट्ट आदि तक अपनी बात पहुंचा भी चुके हैं, और आगे उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी मिल सकते हैं। वहीं दूसरी ओर नगर के तल्लीताल, मल्लीताल व माल रोड के व्यापारियों की संयुक्त कल्याण समिति बनाने की मुहिम भी शुरू हो गयी है, जो केवल व्यवसायियों के व्यवसायिक हितों के संरक्षण के लिए कार्य करेगी।

हर चार दिन में समन्वय बैठक के आश्वासन पर होटल एसोसिएशन का विरोध शांत

नैनीताल। नैनीताल होटल एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार को प्रशासन पर ‘नकारात्मक रवैये’ का आरोप लगाकर होटलों में ‘ब्लैक आउट’ करने, काले झंडे लगाने व होटलों को बंद करने की धमकी दी थी, लेकिन डीएम विनोद कुमार सुमन के आमंत्रण पर हुई वार्ता के बाद एसोसिएशन का विरोध शांत पड़ गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने बताया कि रूसी बाईपास पर वाहनों को पार्क करने, वहां से शटल टैक्सियों से सैलानियों को लाने, बुकिंग वाले सैलानियों को आने-देने तथा हर चार दिन में प्रशासन व एसोसिएशन की समन्वय वार्ता का आश्वासन दिया गया है।

परेशानियों के बावजूद सरोवरनगरी का आकर्षण बरकरार

नैनीताल। नगर में पहुंचने के लिए हो रही तमाम परेशानियों के बावजूद सैलानियों में शहर में आने के लिए आकर्षण बरकरार है। सैलानी किसी भी तरह नगर में आने को लालायित नजर आ रहे हैं और नगर में पहुंचकर यहां जून की मैदानी क्षेत्रों में आग उगलती दुपहरी में भी अफगानी चिनार, पांगर व पॉपुलर के पेड़ों की शीतल छांव में नगर को प्रकृति से मिली सबसे बड़ी नैनी झील की नेमत के ठंडे पानी को छूने से अपनी तमाम दुश्वारियों को पल भर में खुद से दूर पा रहे हैं। सैलानियों का कहना है कि प्रशासन नगर से बाहर ही पार्किंग की व्यवस्था और वहां से शटल टैक्सियों की व्यवस्था कर दे तो वे बार-बार यहां आना चाहेंगे।

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-बृहस्पतिवार शाम को 7 से 9 बजे रात तक ‘ब्लैक आउट’ करने, शुक्रवार से होटलों में काले झंडे लगाकर प्रशासन के नकारात्मक रवैये का विरोध करने और इसके बावजूद प्रशासन का रवैया न बदलने पर होटलों को बंद कर विरोध व्यक्त करने की घोषणा
-डीएम ने शाम छह बजे वार्ता के लिए बुलाया
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जून 2019। सैलानियों के प्रति पुलिस-प्रशासन पर नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए नैनीताल होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने होटलों को बंद करने जैसी ऐतिहासिक चेतावनी दी है। इस कड़ी में बृहस्पतिवार शाम को 7 से 9 बजे रात तक ‘ब्लैक आउट’ करने, शुक्रवार से होटलों में काले झंडे लगाकर प्रशासन के नकारात्मक रवैये का विरोध करने और इसके बावजूद प्रशासन का रवैया न बदलने पर होटलों को बंद कर विरोध व्यक्त करने की घोषणा की गयी है। हालांकि इसके बाद प्रदेश में राजकीय शोक और कोई शासकीय कार्यक्रम न करने के बावजूद डीएम ने जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों को शाम को वार्ता के लिए बुला लिया है। वार्ता के बाद कोई हल निकलने की उम्मीद है।
बृहस्पतिवार को होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने सदस्यों की एक आकस्मिक बैठक बुलाई। मॉल रोड के एक होटल में हुई बैठक में काफी संख्या में सदस्य पहुंचे। सदस्यों ने आरोप लगाया कि आयुक्त राजीव रौतेला, जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन और एसएसपी सुनील कुमार मीणा से सकारात्मक वार्ता व उनके द्वारा आश्वासन दिये जाने के बावजूद पुलिस द्वारा मेहमान पर्यटकों के वाहनों को पुलिस द्वारा ‘नैनीताल फुल’ कहते हुए हल्द्वानी रोड पर बल्दियाखान, भवाली रोड के मस्जिद तिराहे और कालाढुंगी रोड के चारखेत से आगे शहर में नहीं आने दिया जा रहा है, जबकि नगर में उनके पास पार्किंग के स्थल खाली हैं। जबकि प्रशासन रूसी बाई पास पर विगत वर्ष की भांति पार्किंग की पूरी व्यवस्था और शटल सेवा देने का आश्वासन पर आज तक अमल नहीं कर सका है। इससे शहर में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष साह ने बताया कि प्रशासन और सरकार ऐसा करके पूरे कुमाऊं क्षेत्र के पर्यटन को प्रभावित कर रही है। उनकी इस साजिश के खिलाफ रामनगर, भीमताल, मुक्तेश्वर, भवाली, अल्मोड़ा, कौसानी, रानीखेत, पिथौरागढ़ आदि संगठनों से भी आंदोलन के लिए वार्ता की जा रही है। एसोसिएशन प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय पर्यटन मंत्री से भी संपर्क कर यहां की समस्याओं से अवगत कराएगी। बैठक में तय किया गया कि सभी सदस्य बृहस्पतिवार शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक अपने होटलों की बिजली बंद कर ‘ब्लैक आउट’ कर अपना विरोध जताएंगे। इसके बाद समाधान नहीं होने पर शुक्रवार से होटलों में काले झंडे लगाकर प्रशासन की नकारात्मक नीतियों का विरोध किया जाएगा, और इतने पर भी अगर समस्या का समाधान नहीं निकला तो होटलों को बंद करने का कड़वा व कठोर कदम भी लिया जाएगा। सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि रूसी बाई पास पर पार्किंग खोली जाए, चार खेत में पार्किंग को अनुमति दी जाए। दिनेश साह ने इस दौरान होटल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप साहनी और पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर से संपर्क किया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से वार्ता करने की बात कही। वहीं पूछे जाने पर साह ने बताया कि डीएम विनोद कुमार सुमन ने उन्हें बृहस्पतिवार शाम छह बजे मिलने को आमंत्रित किया है। इस मौके पर वेद साह, दिग्विजय बिष्ट, आलोक साह, राजू जेठी, कमल जगाती, प्रवीण शर्मा, एपी सिंह, गीता पांडे, अमर जगाती, विशाल खन्ना, प्रीति सेठी, सीपी भट्ट, देवेंद्र कुमार, बीडी बहुगुणा, अरुण साह व कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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-कमिश्नरी में डीएम-एसएसपी से यातायात व्यवस्था की समीक्षा करते आयुक्त राजीव रौतेला।
-मंडलायुक्त व मुख्यमंत्री के सचिव ने नैनीताल की सीजन में यातायात व्यवस्था की समीक्षा करते हुए दिये निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जून 2019। कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव राजीव रौतेला ने शनिवार को मंडलायुक्त कार्यालय में ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में नैनीताल शहर की यातायात एवं पार्किंग व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों को कहा कि शहर में पार्किंग फुल होने पर ही अन्य स्थलों पर पार्किंग हेतु रोका जाए तथा शहर में पार्किंग की गुंजाईश होने पर वाहनों को शहर में आने दिया जाए। इस कार्य हेतु संचार व्यवस्था दुरस्त होनी चाहिए।
समीक्षा के दौरान श्री रौतेला ने पुलिस विभाग को पर्यटन सीजन में यातायात व्यवस्थाएं बेहतर कर समस्या से निजात दिलाने को कहा, ताकि यहां आने वाले पर्यटक सुःखद यादें एवं शहर की अच्छी छवि अपने साथ लेकर जायें। इस हेतु जाम लगने की संभावना वाले स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाए। साथ ही पार्किंग के स्थानों पर मोबाईल टॉयलेट की व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने को झील विकास प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह को निर्देश दिए। साथ ही पुलिस तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को पार्किंग हेतु चिन्हित स्थानों से पर्यटकों को लाने एवं ले जाने के लिए पर्याप्त मात्रा में वाहनों एवं टैक्सियों की व्यवस्था करने को भी कहा। उन्होंने पर्यटन सीजन के दौरान तल्लीताल लेक ब्रिज टॉल टैक्स को हल्द्वानी रोड पर बल्दियाखान-रूसी बाईपास के पास तथा भवाली रोड पर पाईंस के पास शिफ्ट करने के लिए संभावनाएं तलाश करते हुए शिफ्ट करने तथा सूखाताल क्षेत्र में सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था करने के नगर पालिका के अधिकारियों को निर्देश भी दिए। बैठक में डीएम विनोद कुमार सुमन तथा एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने बताया कि शहर में पार्किंग फुल होने पर कालाढ़ुंगी रोड पर चारखेत तथा हल्द्वानी रोड पर रूसी बाईपास व भवाली रोड पर पाईंस के पास पार्किंग की तथा वहां से पर्यटकों को लाने एवं ले जाने के लिए टैक्सियों की व्यवस्था की गयी है। बताया कि सीजन के दौरान अल्मोड़ा, रानीखेत, पिथौरागढ़ आदि जाने ट्रक, डम्पर, एवं अन्य भारी वाहनों को ज्योलीकोट के रास्ते ही भेजा जा रहा है ताकि भीमताल तथा भवाली में जाम की स्थिति उत्पन्न न हो। बैठक में एडीएम केएस टोलिया, एसडीएम विनोद कुमार व सीओ विजय थापा के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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-कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने पर्यटन सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए दिये निर्देश, केवल 121 पंजीकृत फड़वाले ही मल्लीताल में लगेंगे

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मई 2019। सरोवर नगरी की माल रोड एवं ठंडी सड़क को ‘जीरो वेण्डर जोन’ घोषित किया जाएगा। इस संबंध में कुमाऊं मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने पर्यटन सीजन की तैयारियों के संबंध में समीक्षा करते हुए शुक्रवार को पर्यटन व पुलिस से जुड़े अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिये। इसके बाद माल रोड पर कोई भी फड़-ठेली वाले सड़क पर कारोबार नहीं कर पायेंगे। साथ ही उन्होंने माल रोड पर साइकिलों के संचालन पर भी रोक लगाने के आदेश दिये हैं। आयुक्त का कहना है कि माल रोड पर सैलानियों एवं रिक्शों की निर्बाध आवाजाही के लिये यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने सुबह-शाम आवारा कुत्तों को भी सड़कों पर पूर्णतः रोके जाने को कहा है। इसके अलावा उन्होंने सीजन में आने वाले बाहरी फड़-ठेली वालों का सत्यापन करने एवं पुलिस की गस्त बढ़ाने के भी पुलिस को निर्देश दिये हैं।
इसके अलावा आयुक्त ने साफ किया कि नयना देवी मंदिर, कैपिटल सिनेमा तथा भोटिया मार्केट के पास केवल 121 पंजीकृत वेंडरों को ही स्टॉल लगाने की अनुमति होगी। अनाधिकृत रूप से लगने वाले गैर पंजीकृत वेंडरों के पालिका नियमानुसार चालान करेगी। उन्होंने पालिका से नौकायन के लिए हर नाविक को जीवन रक्षक जैकेट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। बैठक में जिला विकास प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक रुचिता जुयाल, सीओ विजय थापा, अपर आयुक्त संजय खेतवाल के अलावा नगर पालिका, लोनिवि आदि के अधिकारी मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : सरोवरनगरी में जोर से पड़ रहा सीजन, नैनीताल फिर वाहनों से पैक

-नगर की सभी पार्किंग भरने पर फिर से रूसी बाईपास में गाड़ियां रोककर शटल टैक्सियां चलानी पड़ीं, 200 से अधिक वाहन रूसी बाइपास पर रोके
-अगले चार दिन पड़ सकते हैं भारी, अलबत्ता आगामी सोमवार से मैदानी क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज खुलने के मद्देनजर माना जा रहा है आखिरी सप्ताहांत

नैनीताल। सरोवरनगरी में यह सप्ताह ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन का आखिरी सप्ताह माना जा रहा है। क्योंकि अगले सप्ताह के शुरू में ही यानी सोमवार से मैदानी क्षेत्रों में गर्मियों व ईद की लंबी छुट्टियों के बाद स्कूल-कॉलेज खुलने जा रहे हैं। लेकिन इस सप्ताह के आखिरी चार दिन सरोवरनगरी के पर्यटन व्यवसायियों के लिए बांछें खिलाने वाले, किंतु नगरवासियों और व्यवस्थाओं में लगे पुलिस प्रशासन के लिए भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। इसकी झलक बुधवार को नगर के सभी पार्किंग स्थलों के, फ्लैट्स मैदान के निर्धारित पार्किंग से बाहर के क्षेत्र के भी दोपहर में ही भर जाने के बाद पर्यटकों के वाहनों को रूसी बाइपास में रोकना पड़ गया। अपराह्न तीन बजे तक ही रूसी बाइपास पर 200 से अधिक वाहनों को रोके जाने की प्रशासन की ओर से एएसपी हरीश चंद्र सती ने पुष्टि की है। रोके गये वाहनों में आये सैलानियों के लिए शटल वाहनों की व्यवस्था की गयी, वहीं बड़ी संख्या में सैलानी वाहन रोके जाने के बाद दूसरे पर्यटन स्थलों की ओर चले गये। उल्लेखनीय है कि ईद के बाद पुलिस ने दो पहिया और चार पहियों का नगर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था, और केवल नगर के होटलों में बुकिंग वाले सैलानियों को ही वाहनों से आने दिया जा रहा था, किंतु इधर पिछले सप्ताह भीड़ कुछ छंटने के बाद वाहनों को नगर में आने दिया जाने लगा था, और शटल वाहन भी बंद कर दिये थे। बुधवार को पुलिस को फिर से प्रतिबंध वाली व्यवस्था शुरू करनी पड़ी। आगे समझा जा सकता है कि नगर को आने वाले सैलानियों की भीड़ आज जितनी ही भी रहने पर नगर में पार्किंग का स्थान उपलब्ध न होने के कारण समस्या अगले चार दिन यानी शनिवार या रविवार तक बढ़ती जा सकती है।
इधर नगर में बुधवार को पार्किंगों के भरने के साथ ही सड़कें भी वाहनों से पटी रही। मस्जिद तिराहे पर पुलिस ने फ्लैट्स मैदान की पार्किंग के फुल होने का बोर्ड लगाकर वाहनों को आगे मेट्रोपोल की ओर भेजा और वे मेट्रोपोल पार्किंग में भी जगह न मिलने के कारण सड़कों पर ही घूमने को मजबूर रहे। इससे नैनीताल क्लब-बीडी पांडे रोड पर भी वाहन जाम रहे, जबकि लोवर माल रोड पर मल्लीताल से नगर पालिका पुस्तकालय से आगे तक वाहनों की पूरे दिन कतारें लगी रहीं। ऐसे में पुलिस के लिये यातायात को सुचारू रखना मुश्किल साबित हुआ। स्वयं एएसपी सती पूरे दिन मल्लीताल मस्जिद तिराहे पर जमे रहे। नगर में माल रोड तथा नैनीझील में घूमने व नौकायन करने निकले सैलानियों तथा निकटवर्ती पर्यटन स्थलों पर भी वाहनों व सैलानियों की भारी भीड़भाड़ रही।

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-नैनीताल चिड़ियाघर के आंकड़े बयां कर रहे पर्यटन को पहुंच रहे नुकसान का दर्द

नैनीताल चिड़ियाघर की शान, रॉयल बंगाल टाइगर का बिल्कुल करीब से दीदार कर फोटो खींचते सैलानी।

नैनीताल। नैनीताल मुख्यालय में इस वर्ष पर्यटन में 28 फीसद की गिरावट दर्ज की गयी है। हम यह दावा मुख्यालय में सैलानियों के लिए बड़े आकर्षण के केंद्र पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर के पुष्ट आंकड़ों के आधार पर कर रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष 2017 के ग्रीष्मकालीन पर्यटन के तीन महीनों, अप्रैल, मई व जून में 1 लाख 62 हजार 858 यात्री पहुंचे, जबकि इस वर्ष इन तीन महीनों के 10 दिन शेष रहते केवल 1 लाख 16 हजार 767 यानी 46 हजार 91 सैलानी चिड़ियाघर के दीदार के लिए कम पहुंचे। जबकि इससे पूर्व बीते एक दशक में हर वर्ष करीब 10 फीसद की वृद्धि होती थी। यानी इस वर्ष 10 फीसद की वृद्धि तो हाथ से गयी ही, 28 फीसद का उल्टा नुकसान हो गया। इस तरह गिरावट को 38 फीसद भी मान सकते हैं।
वहीं महीने वार बात करें तो 2017 में अप्रैल माह में 27,926 और 2018 में 24,992, 2017 के मई माह में 50,096 तो 2018 में 42,916 एवं 2017 के जून माह में 84,836 तो इस वर्ष 20 जून तक मात्र 48,859 सैलानी ही पहुंचे। इस गिरावट में साफ तौर पर जून में बड़ी गिरावट देखी जा रही है, जो कि इस वर्ष सैलानियों को जून माह में नैनीताल पुलिस के द्वारा कालाढुंगी, रानीबाग आदि में रोकने और ‘नैनीताल फुल’ के बोर्ड लगाने का परिणाम माना जा रहा है।

वन विभाग के लिय आय की बड़े श्रोत साबित हो रहीं आईएफएस मनोज चंद्रन की पहलें

नैनीताल। वर्ष 2007-08 में तत्कालीन वन वर्धनिक व वर्तमान में मुख्य वन संरक्षक केरल मूल के आईएफएस अधिकारी मनोज चंद्रन ने मुख्यालय के निकट सरियाताल में ताल से बेहद सामान्य से गधेरे के रूप में बहने वाले पानी को सरियाताल वाटरफॉल का नाम देकर और इसे देखने के लिए मात्र 20 रुपए का शुल्क लगाने की व्यवस्था की थी। पहले वर्ष यहां मात्र 31 यात्री आये और इनसे वन विभाग को केवल 620 रुपए की आय हुई। लेकिन तब की इस बेहद सामान्य सी पहल से वन विभाग को वर्ष 2017-18 तक पहुंचते 51,265 यात्रियों से 11 लाख 85 हजार 40 रुपए की आय प्राप्त हुई है। इसी तरह श्री चंद्रन ने ही वर्ष 2008-09 में मात्र 90 लाख रुपए से सरियाताल के पास ही पथरीली बंजर पहाड़ी पर हिमालयन बॉटनिकल गार्डन बनाना शुरू किया था। इसमें पहले वर्ष 74,850 यात्री आये और 3 लाख 74 हजार 250 रुपए की आय हुई थी। वहीं आय का यह आंकड़ा वर्ष 2017-18 में 2 लाख 29 हजार 785 सैलानी पहुंचे और विभाग को इससे 40 लाख 63 हजार 660 रुपए की आय हुई है। वहीं नैनीताल चिड़ियाघर की बात करें तो वर्ष 2008-09 में यहां 1 लाख 63 हजार 156 यात्री पहुंचे थे, और इनसे 36 लाख 41 हजार 200 रुपए की आय हुई थी, जबकि वर्ष 2017-18 में यहां 3 लाख 23 हजार 661 यात्री पहुंचे और इनसे 1 करोड़ 57 लाख 45 हजार 720 रुपए की आय प्राप्त हुई है।

नैनीताल में दोपहिया वाहनों का आपातकाल, पूरी तरह से रोकी आवक, पहाड़ों पर उमड़े सैलानी, वहाँ भी जाम

-शटल वाहनों से भेजा जा रहा है नैनीताल, एसएसपी-एएसपी सहित सभी पुलिस के अधिकारी यातायात नियंत्रण के लिए उतरे मैदान में

कालाढुंगी में दोपहिया वाहनों को रोकते थाना प्रभारी।
मंगोली में रोके गये दोपहिया वाहन एवं चारपहिया वाहनों की लगी कतारें।

नैनीताल, 17 जून 2018। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरोवरनगरी नैनीताल में ईद के बाद दोपहिया वाहनों के आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। उत्तराखंड के मैदानी तथा निकटवर्ती यूपी के रुहेलखंड मंडल के शहरों के खासकर युवा दोपहिया वाहनों से सरोवरनगरी की ओर किसी तूफान की तरह भारी संख्या में उमड़ पड़े हैं। ऐसे में ऐसी स्थितियों से पहले से आशंकित नैनीताल पुलिस ने दोपहिया वाहनों के लिए आपातकाल सरीखी ही रणनीति अपनाते हुए इनका प्रवेश पूरी तरह से नगर के लिए प्रतिबंधित किया है। यातायात नियमों की अवहेलना कर बिना हेलमेट, तीन सवारी या बिना आरसी व ड्राइविंग लाइसेंस के आ रहे ऐसे सैकड़ों दोपहिया वाहन चालकों के मोटर यान अधिनियम के तहत चालान किये गये हैं, तथा हजारों रुपए का जुर्माना वसूला गया है। कालाढुंगी, काठगोदाम, रानीबाग, मंगोली व रूसी बाईपास आदि स्थानों पर दोपहिया वाहनों को रोका जा रहा है, तथा वहां से शटल वाहनों से वाहन चालकों को नगर में आने दिया जा रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालक बिना आये भी लौट गये हैं। वहीं चार पहिया वाहनों को भी नगर के पार्किंग स्थलों में स्थान की उपलब्धता के आधार पर पहले नगर से बाहर कई चरणों में रोककर और वहां से सीमित संख्या में ही नगर में आने दिया जा रहा है। बावजूद नगर में वाहनों-सैलानियों की भारी भीड़ है। नगरवासियों का पैदल आसपास, बाजार जाना भी मुश्किल हो रहा है। एसएसपी, एएसपी से लेकर पुलिस के सभी अधिकारी यातायात को नियंत्रित करने के लिए मैदान में उतरे हुए हैं।

नैनीताल में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने के बाद पर्यटकों ने रानीखेत, अल्मोड़ा कौसानी जागेश्वर आदि पर्वतीय पर्यटन स्थलों का रुख कर दिया है। इससे वहाँ रौनक बढ़ गयी है, वहीँ अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। रविवार दोपहर हाइवे पर दोपाखी क्षेत्र में पर्यटकों के वाहन आड़े-तिरछे खड़े हो जाने से जाम लगा रहा। दोनों ओर कई किलोमीटर तक छोटे बड़े वाहनों की कतार लग गई, और हाईवे पर आवाजाही में समस्या आई।

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-पर्यटन को वापस पटरी पर लाने के प्रयास शुरू, मंडलायुक्त ने किये प्रयास शुरू
-सैलानियों को रोके जाने पर पुलिस के साथ होटल-टैक्सी आदि के प्रतिनिधि भी रखेंगे नजर

नैनीताल, 14 जून 2018। बीते दो दिनों से अपने वाहनों से सरोवरनगरी नैनीताल आने वाले सैलानियों को पार्किंग की व्यवस्था न होने पर रोके जाने के कारण नगर के पर्यटन को काफी नुकसान पहुंचा। जबकि अब पर्यटन को वापस अपने पुराने परंतु बेहतर स्वरूप में लाने के प्रशासनिक व अन्य स्तरों पर प्रयास शुरू हो गये हैं। नगर के भाजपा नेताओं ने जहां उच्च न्यायालय में महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर से मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने के प्रयास शुरू किये वहीं मंडलायुक्त नगर के पर्यटन को वापस अपनी धुरी पर लाने के लिए कमान हाथ में लेते नजर आ रहे हैं। नैनीताल नागरिक मंच ने भी 17 जून से अनिश्चितकालीन बंद की धमकी वापस ले ली है।इसके साथ ही नगर में वाहनों की कमी के साथ सैलानियों की रौनक लौटती भी नजर आ रही है। नगर में फिर पहले की तरह जाम और भीड़भाड़ हो गयी है।

इससे पूर्व बृहस्पतिवार को मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने इस बाबत पत्रकार वार्ता की, और बताया कि कई संगठनों के लोग उनसे नगर के पर्यटन को हो रहे नुकसान की शिकायत लेकर मिले, इसके बाद उन्होंने डीएम एवं अन्य अधिकारियों को कुछ निर्देश दिये हैं। नये निर्देशों के तहत सैलानियों को जहां रोका जाएगा, वहां पुलिस के अलावा होटल, टैक्सी आदि संबंधित संगठनों के प्रतिनिधियों की कोर कमेटी के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे, ताकि सैलानियों के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार पुलिस या किसी के भी स्तर से न होने पाये। इसके अलावा सैलानियों को मुख्यालय में लाने के लिए एयरकंडीशन्ड बसों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही कहा कि सैलानियों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
वहीं इधर नगर में बृहस्पतिवार को जहां वाहनों की संख्या बेहद सीमित रही, अलबत्ता सैलानियों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी गयी। इससे नगर की माल रोड व नैनी झील सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर वाहनों के बिना सैलानियों की रौनक लौटती नजर आई।

नागरिक मंच ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट सहित कई को भेजी थी 17 से बेमियादी बंद की जानकारी

नैनीताल। जिला प्रशासन की अपने वाहनों से बिना पार्किंग की व्यवस्था किये आ रहे सैलानियों के प्रति बरती जा रही कड़ाई के बाद नैनीताल नागरिक मंच ने जहां आगामी 17 जून से अनिश्चितकालीन बंद की धमकी देते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट व उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय कानून मंत्री, पर्यटन मंत्री, स्थानीय सांसद व विधायक आदि को शुक्रवार को ज्ञापन भिजवाये थे, अलबत्ता शाम को जिला प्रशासन से वार्ता के बाद बंद का फैसला वापस ले लिया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि 12 जून को प्रशासन ने नगर में पार्किंग का स्थान उपलब्ध होने के बावजूद वाहनों को नगर से बाहर रोक दिया, साथ ही टैक्सी चालकों से दुर्व्यवहार किया, और कई टैक्सियां सीज कर दीं। इससे नगर का पर्यटन बुरी तरह से प्रभावित हो गया है, और वर्ष 2013 की आपदा के बाद की जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है।

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-प्रशासन की सख्ती के बाद 60 फीसद से अधिक बुकिंग हुईं निरस्त, अन्य स्थानों को निकल गये सैलानी, या आये ही नहीं
-रानीबाग व कालाढुंगी से केवल दो-दो रोडवेज बस शटल सेवा के रूप में चल रही हैं

बुधवार दोपहर तल्लीताल डांठ पर सुनसानी का नजारा।
बुधवार दोपहर नैनीझील में नौकायन के लिए निकली गिनी-चुनी नौकाएं।
बुधवार दोपहर को नगर के व्यस्ततम मल्लीताल रिक्शा स्टेंड चौराहे पर वाहनों की सुनसानी का नजारा।

नैनीताल। सरोवरनगरी नैनीताल में जिला-पुलिस प्रशासन के मंगलवार से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए पर्यटक वाहनों को नगर में प्रवेश नहीं करने देने और समाचार पत्रों में बिना पार्किंग की व्यवस्था किये नैनीताल न आने के विज्ञापन देने के बाद नगर का पर्यटन अचानक से ध्वस्त होने की स्थिति में आ गया है। नगर में बाहरी सैलानियों के वाहनों की आवक नां के बराबर है, वहीं काठगोदाम-रानीबाग व कालाढुंगी से शटल सेवा के रूप में लगीं केवल दो अतिरिक्त रोडवेज की बसों से थोड़े-बहुत सैलानी ही नगर में आ पा रहे हैं। इससे नगर की सड़कें सुनसान हो गयी हैं। वहीं नैनी झील में भी नौकाओं की संख्या काफी कम रह गयी है, जबकि फ्लैट्स मैदान के खेल वाले हिस्से तक पहले से भरी पार्किंग से भी वाहन घट रहे हैं, नये नहीं आ रहे हैं। अलबत्ता, नगर में अभी मोबाइल दूरसंचार कंपनियांे, इंटरनेट आदि की सभी सरकारी-निजी कंपनियों की सेवाएं कन्जेशन के कारण बुरी तरह बाधित ही हैं।
एएसपी हरीश चंद्र सती ने बताया कि कल की तरह ही पर्यटक वाहनों को पहले कालाढुंगी व रानीबाग में रोककर यहां से लगायी गयीं दो-दो शटल रोडवेज बसों के माध्यम से नैनीताल भेजा जा रहा है। इन बसों के भरने और चलने के बाद वाहनों को नगर में पार्किंग में स्थान की उपलब्धता के आधार पर सीमित संख्या में नगर में भेजा जा रहा है। वहीं उन्होंने एवं एसएसपी जनमेजय खंडूड़ी ने आईजी कार्यालय में हुई मुलाकात में स्वीकारा कि प्रचार के बाद सैलानियों की नैनीताल की ओर आवक ही अत्यधिक घट गयी है। ऐसे में अब जाम की समस्या जैसी कोई स्थिति नहीं रह गयी है।

विरोध कर रहे संगठनों के बंद पर हित टकराये, मशाल जुलूस पर सिमटे

नैनीताल। मंगलवार को नैनीताल को बंद करने की धमकी दे रहे नैनीताल नागरिक मंच के होटल, टैक्सी व व्यापार मंडल आदि विभिन्न संगठनों में मंगलवार देर शाम हुई बैठक में आपसी हित टकराते दिखे। बैठक में जहां एक पक्ष के लोग तत्काल ही नगर में व्यापक व अनिश्चितकालीन बंद की पैरवी कर रहे थे, वहीं दूसरे इस पर राजी नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन लाल साह ने कहा कि पहले होटल अपने यहां सैलानी लेना भी बंद करें, तभी व्यवसायी भी दुकानें बंद करेंगे। इसके बाद किसी ने 15 जून को कैंची मेला, तो किसी ने ईद आदि का हवाला देते हुए तीन दिन मशाल जुलूस निकालने और इसके बाद बंद करने को कहा, और यही सर्वमान्य प्रस्ताव मान लिया गया।

नगर में एक वर्ग पर्यटकों के न आने से खुश भी

नैनीताल। पर्यटन से सीधे तौर पर न जुड़े लोगों का एक वर्ग नगर में पर्यटन गतिविधियां कमोबेश ठप होने, सड़कों पर जाम न लगने से खुश एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय की पहल का समर्थन करता भी नजर आ रहा है। उनका कहना है कि सीजन में वाहनों की भीड़भाड़ से दैनिक कार्य प्रभावित हो जाते हैं। पर्यटक वाहन नहीं आयेंगे तो वे कहीं आ-जा तो पाएंगे। अलबत्ता, यह बताना समीचीन होगा कि नैनीताल नगर में जो कुद भी है, वह परोक्ष-अपरोक्ष तौर पर पर्यटन से ही जुड़ा है। नगर में पर्यटन न होता, तो शायद यहां जिला व मंडल मुख्यालय तथा अन्य उच्च विभागीय कार्यालय भी न होते। तथा इनके न होने पर यहां कितने लोग होते, तथा नैनीताल नगर जिले की अन्य झीलों सूखाताल, सातताल या नौकुचियाताल से कितना अलग होगा, समझना अधिक कठिन नहीं है।

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मंगलवार को तल्लीताल में जाम लगाने के साथ ही एडीएम व एएसपी के समक्ष जिला प्रशासन व हाईकोर्ट के खिलाफ नारेबाजी करते विभिन्न संगठनों के लोग।

-हाईकोर्ट के आदेशों के बाद जिला-पुलिस प्रशासन के द्वारा नगर में पर्यटक वाहनों का प्रवेश रोकने पर गुस्साए विभिन्न संगठनों से लगाया जाम

नैनीताल, 9 जून 2018। नैनीताल जिला-पुलिस प्रशासन ने मंगलवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए सुबह 9 बजे से पर्यटक वाहनों को नगर में प्रवेश नहीं करने दिया। वाहनों को हल्द्वानी रोड पर 8 किमी पहले रूसी बाईपास, कालाढुंगी रोड पर खुर्पाताल एवं भवाली रोड पर पाइंस के पास रोक दिया। इससे आक्रोशित नगर के होटल, टैक्सी, व्यापारियों आदि के विभिन्न संगठनों, नैनीताल नागरिक मंच के लोगों ने नगर के मुख्य तल्लीताल डाँठ चौराहे पर जाम लगा दिया। इस दौरान जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे व समझाने का नाकाम प्रयास किया। वहीं लोगों ने अधिकारियों के सामने ही जिला प्रशासन के साथ ही उत्तराखंड हाइकोर्ट के विरोध में भी जमकर नारे लगाये। साथ ही आगे 24 घंटे में हल न निकलने पर नैनीताल नागरिक मंच की ओर से नैनीताल में होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी आदि समस्त पर्यटन गतिविधियां बंद करने की डीएम व एसएसपी के समक्ष घोषणा की गयी।
इससे पूर्व सुबह बताया गया कि सोमवार को उच्च न्यायालय में नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन व एसएसपी जनमेजय खंडूड़ी को करीब डेढ़ माह पुराने, पार्किंग की पहले से बुकिंग न कराने वाले सैलानियों को नगर में प्रवेश न करने देने व नगर में वाहनों का जाम लगने पर लगी फटकार के बाद पुलिस-प्रशासन ने अपने निजी वाहनों से नैनीताल आ रहे पर्यटकों को सुबह 9 बजे के करीब नगर से बाहर ही रोक दिया, और बसों-शटल टैक्सियों के माध्यम से नगर को भेजा। वहीं टैक्सी यूनियन का आरोप था कि पुलिस ने खुर्पाताल की ओर कुछ टैक्सी वालों की कथित तौर पर पिटाई भी की। इससे गुस्साए टैक्सी-ट्रेवल यूनियन, होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन व व्यापार मंडल तथा नैनीताल नागरिक मंच के साथ ही पार्किंग व लेक ब्रिज चुंगी के व्यवसाय से जुड़े लोग सुबह साढ़े 10 बजे के करीब तल्लीताल डांठ पर जमा हो गये, एवं जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर पहुंचे एएसपी हरीश चंद्र सती व एडीएम हरबीर सिंह ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का काफी प्रयास किया। इस दौरान बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डा. आरके वर्मा के बीमार पिता सहित कई रोगी, बच्चे आदि भी जाम में फंसे रहे। आखिर एक बजे के करीब प्रदर्शनकारी अधिकारियों की डीएम-एसएसपी के सीएम की वीडियो कांफ्रेंस के बाद दो बजे तक कोई हल निकलने के आश्वासन पर जाम लगाने पर माने। दो बजे के बाद डीएम-एसएसमी बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे, और उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए मजबूरी बताई। इस पर नैनीताल नागरिक मंच के अध्यक्ष किसन नेगी ने शाम को रात्रि आठ बजे होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष दिनेश साह के प्रतिष्ठान में सभी संगठनों की बैठक करने और प्रशासन को समाधान के लिए 24 घंटे का समय देते हुए इसके बाद मुख्यालय में सब कुछ बंद कर देने की चेतावनी दी। प्रदर्शन में टैक्सी-ट्रेवल यूनियन के अध्यक्ष नीरज जोशी, नगर के बड़े होटलों, मनु महारानी व विक्रम विंटेज के जीएम, दिग्विजय बिष्ट, आलोक साह, बृज साह सहित अनेक होटल मालिक एवं अन्य पर्यटन से जुड़े व्यवसायी भी पहली बार किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होते दिखे।

पार्किंग बुकिंग और हाईकोर्ट सहित बड़े कार्यालयों में भी पार्किंग की सुविधा ही नहीं

नैनीताल। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने नगर में सैलानियों के लिए पार्किंग की अग्रिम बुकिंग कराये बिना वाहनों का प्रवेश नहीं कराने के आदेश जारी किये हैं, लेंिकन सच्चाई यह है कि नगर में पार्किंग बुकिंग कराने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। इस हेतु होटल एसोसिएशन ने एक मोबाइल ऐप बनाने की कोशिश की थी, पर बताया गया कि उच्च न्यायालय की कसौटी पर वह ऐप खरा नहीं उतरा। नगर में पिछले दो दशकों में 200 वाहनों की पार्किंग की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गयी है। यही नहीं उच्च न्यायालय के साथ कुमाऊं कमिश्नरी, कुमाऊं परिक्षेत्र के डीआईजी, डीएम एवं एसएसपी व जिला न्यायालय जैसे उच्चाधिकारियों के कार्यालयों में दर्जनों-सैकड़ों लोगों-वादकारियों के प्रतिदिन आने के बावजूद वाहनों के पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। इधर प्रशासन द्वारा पिछले एक वर्ष से एडीबी के माध्यम से करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से नारायणनगर में करीब 300 वाहनों की पार्किंग निर्माण की स्वीकृति को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया। नगर में अशोक टॉकीज की जगह करीब 400 वाहनों की यांत्रिक पार्किंग के साथ ही जिला प्रशासन की ओर से एचएमटी रानीबाग में करीब 500 तथा कैलाखान में भी पार्किंग विकसित करने की जानकारी दी गयी, लेकिन यह बातें भी धरातल पर कहीं नहीं उतरी हैं। जबकि नैनीताल पुलिस द्वारा उच्च न्यायालय में दिये गये हलफनामे में नगर में सीजन में 4000 वाहनों के प्रवेश करने और नगर में करीब 1200 वाहनों की पार्किंग की सुविधा ही उपलब्ध होने की बात भी कही गयी है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में वाहनों की क्षमता पार, कालाढुंगी-हल्द्वानी में रोक दिये वाहन

10 जून 2018 को रानीबाग में सैलानियों के स्वागत के बजे नैनीताल पुलिस द्वारा लगाया गया ‘नैनीताल हाउसफुल’ का बोर्ड

नैनीताल, 9 जून 2018। सरोवरनगरी में सैलानियों की पिछले वर्ष से कम आवक की हर ओर से सुनी जा रही शिकायतों के बावजूद शनिवार को वाहनों की आवक नगर की क्षमता से पार हो गयी। इस पर निजी छोटे वाहनों से सरोवरनगरी आ रहे सैलानियों को दोपहर से पहले ही पुलिस के द्वारा पहले कालाढुंगी, फिर हल्द्वानी, रानीबाग और रूसी बैंड से आगे आने से रोक दिया गया। इसके बावजूद नगर की सड़कें भी वाहनों से पटी रहीं, और पूरे दिन यातायात रैंगता नजर आया। एएसपी हरीश चंद्र सती व सीओ विजय थापा आदि दोपहर 12.30 बजे स्वयं सड़क पर उतरे और लाउडस्पीकर के माध्यम से वाहनेां से आ रहे सैलानियों को सूचना दी कि नगर की फ्लैट्स मैदान एवं शत्रु संपत्ति मेट्रोपोल होटल के मैदान की प्रमुख पार्किंगें पूरी तरह भर गयी हैं। लिहाजा अब वाहनों को नगर से बाहर नारायण नगर ले जाकर पार्क करें।

शनिवार को हर ओर वाहनों से पटे नैनीताल नगर का एक बिहंगम नजारा।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नगर की सभी पार्किंग के पूरी तरह से भर जाने के कारण अब नगर में वाहनों को पार्क करने की बिलकुल भी सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसलिए वाहनों को पहले कालाढुंगी में रोककर हल्द्वानी को भेजा जा रहा है, और हल्द्वानी से अपने वाहनों के बजाय रोडवेज की बसों से आने को कहा जा रहा है। इसके बाद भी आगे आ रहे वाहनों को रानीबाग से भीमताल की ओर भेजा जा रहा है। बावजूद आने वाले वाहनों को रूसी बैंड बाइपास से नगर की ओर नहीं आने दिया जा रहा है, तथा बाईपास से नारायण नगर की ओर भेजकर वहीं रुकने व शटल टैक्सी से नगर में आने को कहा जा रहा है।

कैसा पर्यटन प्रदेश, कैसा उद्योग के दर्जे वाला पर्यटन, डेढ़ दशक में पार्किंग क्षमता 100 भी नहीं बढ़ी
नैनीताल। सैलानियों को नैनीताल आने से रोके जाने पर होटल एवं पर्यटन व्यवसायियों में खासी नाराजगी है। उनका कहना है कि पिछले डेढ़ दशक में नगर में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ी है, और तभी से प्रशासन से नयी पार्किंग बनाने के लिए कहा भी जाता है, किंतु डेढ़ दशक में नगर में 100 वाहनों की नयी पार्किंग भी तैयार नहीं की जा सकी है। ऐसे में सरकार का राज्य को पर्यटन प्रदेश कहना और पर्यटन को उद्योग का दर्जा देना बेमानी हो जाता है।

यह भी पढ़ें : ऐसी हड़बड़ी में क्यों नैनीताल पुलिस ? खुद बनाई पार्किंग से भी किए दोपहिया वाहन सीज

शनिवार को पुलिस द्वारा जिला अस्पताल के सामने चेन से बांधे गये दोपहिया वाहन।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>-एक दिन में 619 वाहनों के चालान कर वसूला 75,950 रुपए जुर्माना, 23 वाहन भी किए सीज, कप्तान से मिले भाजपा अध्यक्ष
नैनीताल। नैनीताल पुलिस शनिवार को नगर में अधिक भीड़भाड़ न होने के बावजूद आवश्यकता से अधिक सक्रिय व चालान करने की हड़बड़ी में दिखी। हद से अधिक सक्रियता दिखाते हुए पुलिस ने पूर्व में स्वयं ही तय किये गये बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के सामने के स्थान पर खड़े दोपहिया वाहनों को भी सीज और चालान कर दिया। कई दोपहिया वाहनों पर चेन लगाकर ताले लगा दिये, इससे कई लोग स्कूल की छुट्टी के समय बच्चों को लेने भी नहीं जा पाये।इस पर नगर वासियों, रोगियों के तीमारदारों में पुलिस के प्रति गहरी नाराजगी देखी गयी। कई लोगों की पुलिस से झड़प भी हुई। यहां तक कि सत्तारूढ़ भाजपा कार्यकर्ताओं का भी पारा चढ़ गया। इसी कड़ी में भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज जोशी की अगुवाई में शिष्टमंडल ने जिले के पुलिस कप्तान से मिल कर शिकायत की, उनका कहना था कि इस स्थान पर सड़क चौड़ी हेै, तथा यहां सामने ही अस्पताल, शौचालय व बाजार है, लिहाजा दोपहिया वाहन खड़े करने दिये जाएं। जोशी ने बताया कि एसएसपी ने पूर्व की तरह वाहन खड़े करने की इजाजत देने का आश्वासन दिया। शिष्टमंडल में अरविंद पडियार, विवेक साह, विक्की जुनेठा, नितिन कार्की, दीप नारायण, विकास जोशी, कुंदन बिष्ट, भानु पंत, उमेश गड़िया, मनोज जगाती व मोहित रौतेला आदि मौजूद रहे।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नैनीताल में 54 सहित जिले में सैकड़ों वाहनों के किये गये चालान
नैनीताल। रोज की बजाय एक ही दिन में मानो चालान के रिकार्ड पूरे करने निकली नैनीताल पुलिस ने शनिवार को जिले भर में वाहनों के जबर्दस्ती चालान करने का अभियान चलाया। पुलिस द्वारा ही उपलब्ध कराये गये आंकड़े गवाह हैं कि किस तरह कार्रवाई की गई। कोतवाली मल्लीताल द्वारा कुल 44 चालान कर संयोजन शुल्क 6000, तल्लीताल द्वारा 10 चालान, एक सीज कर 1900 जुर्माना वसूला। इसी तरह थाना मुक्तेश्वर द्वारा 8 चालान, एक सीज, 800 जुर्माना, बेतालघाट द्वारा 15 चालान, 5 सीज, 7000 जुर्माना, रामनगर द्वारा 47 चालान, 3 सीज, 9700 जुर्माना, लालकुआ द्वारा 21 चालान, 2450 जुर्माना, हल्द्वानी द्वारा 46 चालान, 5800 जुर्माना, मुखानी द्वारा 21 चालान, 3100 जुर्माना, बनभूलपुरा द्वारा 17 चालान, 2100 जुर्माना, काठगोदाम द्वारा 50 चालान, 6000 जुर्माना, चोरगलिया द्वारा 8 चालान, 5 सीज, 1900 जुर्माना, यातायात पुलिस हल्द्वानी द्वारा 42 चालान, 6 सीज व 6200 जुर्माना तथा सीपीयू हल्द्वानी द्वारा 286 चालान, 3 सीज व 23000 जुर्माना वसूला गया। इस प्रकार कुल 619 वाहनों के चालान कर कुल 75,950 रुपए जुर्माना वसूला गया, जबकि 23 वाहन सीज किये गए। सवाल उठता है कि पुलिस रोज इतनी ही सक्रिय क्यों नहीं रहती है। ऐसा क्यों कि पहले लोगों को अनुशासन तोड़ने का मौका दो, और जब वे अनुशासन तोड़ना सीख लें तो पकड़ो। नियम रोज के लिए क्यों लागू नहीं रखे जा सकते ? और खासकर नैनीताल के मामले में पुलिस खुद ही जिला अस्पताल के सामने बनाई गयी पार्किंग को क्यों बंद कर रही है, जबकि इसके बंद करने से हर किसी को परेशानी है। आखिर पुलिस-प्रशासन के फैसले जनता के हित के लिए ही तो होने चाहिए कि नहीं !

दीपक तले अधेरा: राज भवन रोड पर पुलिस लाइन, प्राधिकरण, कमिश्नरी, कलक्ट्रेट, एसएसपी ऑफिस व कचहरी के बाहर अक्सर जबर्दस्त जाम

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>-जिले-मंडल में व्यवस्थाएं बनाने वाले कार्यालयों के पास नहीं हैं अपने पार्किंग स्थल, इनके आगे ही सड़क पर खड़े होते हैं वाहन
नैनीताल। बोर्ड की परीक्षाओं के बीच नगर के प्रमुख स्कूलों के मार्ग पर पुलिस लाइन से लेकिन जिला विकास प्राधिकरण, कुमाऊं आयुक्त कार्यालय, जिला सत्र न्यायालय, एसएसपी कार्यालय, जिला कलक्ट्रेट में जिला अधिकारी कार्यालय, तहसील कार्यालय से लेकर राजभवन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर जबर्दस्त जाम लग रहा है। इससे परीक्षार्थियों को भी परीक्षा में पहुंचने में देरी हो रही है। उल्लेखनीय है कि यह मार्ग बेहद संकरा है, बावजूद सड़क के किनारे वाहन खड़े रहते हैं, और परीक्षा के दौरान भी पुलिस की ओर से वाहनों के आवागमन साफ करने की विशेष पहल नहीं की जा रही है। वहीं इतने महत्वपूर्ण कार्यालय जहां जिले व मंडल भर में यातायात व्यवस्थाएं बनाने के लिए पहल करते हैं, किंतु इनके खुद के पास पार्किंग स्थल नहीं हैं, जोकि अपने आप में ‘दीपक तले अंधेरा’ जैसी स्थिति है।

चार बहुमंजिला पूर्णतया ऑटोमेटेड पार्किंग का स्वीकृत प्रस्ताव गायब !

नैनीताल। २०१५ में सरोवरनगरी में शुरुआत में २५३ व बाद में ४०० वाहनों की विस्तारित क्षमता की चार, चार मंजिला पूर्णतया ऑटोमेटेड मल्टी स्टोरी पार्किंग स्वीकृत हो गयी थीं। इनमें से ८.५ करोड़ की लागत से तीन पार्किंग मल्लीताल में बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पास, नगर पालिका कार्यालय के पीछे पुराने घोड़ा स्टेंड में और पुलिस कोतवाली के पीछे पुराने कोयला टाल में एशियाई विकास बैंक के जरिए, जबकि चौथी लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कालाढुंगी रोड पर नगर से करीब छह किमी दूर नारायणनगर में बननी प्रस्तावित थी। एडीबी ने इन पार्किंगों के लिए निविदा की प्रक्रिया भी पूरी की। किंतु अज्ञात कारणों से प्रस्ताव ही गायब हो गये। इधर बमुश्किल कुमाऊं आयुक्त ने नारायणनगर वाली पार्किंग के लिये ठीक चुनाव से पहले कुछ हरकत की थी, लेकिन फिर नतीजा सिफर ही रहा है। उल्लेखनीय है कि नगर में वर्तमान में पार्किंग की ढांचागत सुविधा के नाम पर एकमात्र सूखाताल स्थित कुमाऊं मंडल विकास निगम की पार्किंग ही उपलब्ध है, जिसका नगर से दूर होने की वजह से पूरा उपयोग नहीं हो पाता है। इन दिनों इस पर्किंग में निगम मुख्यालय भी संचालित हो रहा है। ऐसी स्थिति में नगर के एकमात्र खेल के मैदान फ्लैट्स पर खेल गतिविधियां रोककर वाहनों को खड़ा करने की नौबत आना आम बात है। डीएम की कस्टडी में मौजूद शत्रु संपत्ति मेट्रोपोल होटल के मैदान का प्रयोग भी पार्किंग के लिए करना पड़ता है। पूर्व में हनुमानगढ़ी में एक पार्किंग प्रस्तावित की गई थी, लेकिन पर्यावरण प्रेमियों के हस्तक्षेप से वह भी नहीं बन पाई थी। इस दौरान नगर में पार्किंग तो नहीं बनीं, उल्टे नगर पालिका के पीछे की घोड़ा स्टेंड पार्किंग को पार्क बना दिया गया।

सरोवरनगरी में पार्किग स्थलों की वाहन क्षमता :

    • डीएसए मैदान- ३००
    • मोहन-को पार्किग-३०
    • हल्द्वानी रोड-५०
    • मेट्रोपोल (अस्थायी)-६००
    • सूखाताल- ३००
    • अंडा मार्केट-२०
  • इसके अलावा बड़े होटलों की पार्किग में करीब ७०० वाहन पार्क किए जा सकते हैं।

यह भी पढ़ें : 2013 की आपदा से अभी भी नहीं उबर पाया नैनीताल का पर्यटन

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>-अभी भी 2013 के स्तर पर है नैनीताल में आने वाले सैलानियों की संख्या
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, वर्ष 2013 में केदारनाथ में आई आपदा से कमोबेश बेवजह और तत्कालीन सरकार द्वारा किये गये दुष्प्रचार के कारण सैकड़ों किमी दूर नैनीताल जनपद के पर्यटन को तब तो बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ ही, लेकिन इसके बाद भी नगर के पर्यटन को ऐसे बड़े झटके लगते रहे हैं कि यह चार वर्षों के बाद भी बुरे दौर से उबर नहीं पाया है। स्थिति यह है कि 2017 में भी नगर में करीब उतने ही सैलानी पहुंचे हैं, जितने 5 वर्ष पूर्व 2012 में पहुंचे थे। इसके साथ ही यहां पहुंचने वाले सैलानियों के बीते तीन वर्षों के आंकड़े देखें तो वर्ष-दर-वर्ष सैलानियों के पहुंचने की दर लगातार घटती जा रही है।

सिंगापुर-मैक्सिको की संस्थाएं तैयार करेंगी उत्तराखंड के सभी भवनों का विस्तृत जोखिम आंकलन

नैनीताल, 7 मार्च 2018। उत्तराखंड प्रदेश में सभी तरह के सरकारी, गैर सरकारी, रिहायसी, व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल, कालेज सहित अन्य भवनों का एक विस्तृत जोखिम आंकलन किया जा रहा है, ताकि इसका उपयोग विकास योजनाओं में करते हुये एक आपदा प्रतिरोधक समाज की स्थापना की जा सके। इस हेतु राज्य सरकार ने सिंगापुर की संस्था डीएचआई को चयनित किया है। डीएचआई अपनी तकनीकी सहयोगी ईआरएम मैक्सिको, एशियन तकनीकी संस्थान व भू-वेधशाला, सिंगापुर के साथ मिलकर कार्य कर रही है। योजना के तहत राज्य के सभी जनपदों में समस्त सरकारी, गैर सरकारी, रिहायसी-गैर रिहायसी एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल, कालेज तथा अन्य भवनों का सर्वे कार्य किया जा रहा है।
बुधवार को कुमाऊं मण्डल के जिला स्तरीय अधिकारियों की उत्तराखंड प्रशासन अकादमी में आयोजित एक दिवसीय आपदा आंकलन एवं न्यूनीकरण कार्यशाला में यह जानकारी दी गयी। कार्यशाला का शुभारम्भ उत्तराखंड प्रशासन अकादमी के निदेशक अवनेन्द्र सिंह नयाल ने करते हुए बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों के साथ आपदा पूर्व तैयारियां, न्यूनीकरण, प्रतिवेदन तथा पुनः प्राप्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर रणनीति बनाना व चर्चा करना है। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये आपदा न्यूनीकरण एवं जोखिम आंकलन मास्टर ट्रेनर श्री टॉम व डा. पीडी माथुर ने कहा कि उत्तराखण्ड एक मध्य हिमालयी राज्य है। भूगर्भीय संरचना, अत्यधिक वर्षा एवं अन्य कारक इस राज्य को प्राकृतिक घटनाओं के प्रति अतिसंवेदनशील बनाते हैं जिसमें भूकम्प, भूस्खलन, त्वरित बाढ़, बादल फटना आदि प्रमुख हैं। राज्य का समग्र, आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय विकास तभी सम्भव है जब हम इन प्राकृतिक आपदाओं के खतरों को भांपते हुये अनियोजित विकास पर विराम लगायें व समाज को जागरूक कर क्षमता वृद्धि करें।

पर्यटन विभाग द्वारा जनपद के होटलों में आने वाले सैलानियों की संख्या के आधार पर तैयार पर्यटन सांख्यिकी के अनुसार राज्य बनने के 17 वर्षों में जनपद में आने वाले सैलानियों की संख्या में सरसरी तौर पर देखने पर करीब तीन गुने की बढ़ोत्तरी दिखती है, किंतु 17 वर्षों के औसत के लिहाज से देखें तो यह 8.99 फीसद यानी नौ फीसद से भी कम है। वहीं पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े देखने पर पर्यटन का घटना साफ तौर पर नजर आ रहा है। वर्ष 200-09 के बीच जनपद के पर्यटन में जहां 21.32 फीसद की रिकार्ड वृद्धि दर्ज की गयी थी, वहीं 2012 में जनपद में 9,06,333 सैलानी पहुंचे थे। लेकिन ठीक ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के बीच 15-16 जून 2013 में सैकड़ों किमी दूर केदारनाथ और धारचूला से आगे कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग पर आई आपदा से यहां का पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। स्मरणीय रहे कि तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने राष्ट्रीय मीडिया में पूरे प्रदेश को आपदाग्रस्त बताते हुए सैलानियों से प्रदेश में न आने को कह दिया था। ऐसी स्थितियों में 2013 में जनपद में माइनस 1.3 फीसद के नुकसान के साथ 7,44,218 सैलानी ही आये। स्थितियां आगे भी बेहतर नहीं हुईं, बल्कि विज्ञापनों आदि के जरिए स्थितियों में भरपाई के प्रयास भी नदारद रहे। फलस्वरूप 2014 में केवल 1.86 फीसद की बढ़ोत्तरी के साथ 7,58,123 सैलानी ही आये। इसके बाद केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद जिले का पर्यटन 7.6 फीसद चढ़ा तो आगे नोटबंदी व जीएसटी जैसे ‘इमानदारी के प्रयासों’ के फलस्वरूप अगले वर्षों में पर्यटन तो बढ़ा किंतु इसकी दर वर्ष-दर-वर्ष गिरती रही है। 2015-16 के बीच यह 7.06 फीसद रही तो बीते वर्ष 9,17,652 सैलानियों की संख्या के साथ 2016-17 के बीच बढ़ोत्तरी की दर केवल 5.06 फीसद रही है।

नैनीताल जनपद की पर्यटन सांख्यिकी:

वर्ष       देशी सैलानी विदेशी सैलानी कुल

2001    356941      5793               362734

2002    412440      4224               416664

2003    441593      4839               446432

2004    478133      6277               484410

2005     510957     6789               517748

2006     554527     7533               562060

2007     580079     9437              589516

2008     615469     7070              622539

2009     749556     5722              755278

2010     786705     7123              793828

2011     834405     9410              843815

2012     898077    8256              906333

2013     737130    7088              744218

2014     750501    7622              758123

2015      808903    6902             815805

2016      866164    7231             873395

2017      910323    8329             917652

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>2015-16 के बाद लगातार 10-15 फीसद गिरा बड़े होटलों का कारोबार
नैनीताल। जनपद की पर्यटन सांख्यिकी की तर्ज पर ही नगर के बड़े होटलों का कारोबार भी लगातार गिर रहा है। नगर के शेरवानी हिलटॉप इनके के मैनेजर कमलेश सिंह के अनुसार वर्ष 2015 में नगर के होटलों ने अच्छा कारोबार किया था, लेकिन इसके बाद 2016 में 10 और इधर 2017 में 10 से 15 फीसद तक कारोबार प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद नगर के 7.5 हजार रुपए से अधिक किराये वाले स्तरीय होटल 28 फीसद टैक्स के दायरे में आ गये हैं। इसके साथ ही नगर में बसों का प्रवेश प्रतिबंधित होने से बेहद मामूली मार्जिन पर कार्य करने वाले टेªवल एजेंटों का कारोबार चौपट हो गया है, इस कारण नगर में अच्छे पर्यटन समूहों का आना कमोबेश पूरी तरह से बंद हो गया है। यह नगर के पर्यटन कारोबार के गिरने की मुख्य वजह है।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>महीनेवार पर्यटक सांख्यिकी नैनीताल 2012
भारतीय विदेशी योग
जनवरी 50130 624 50754
फरवरी 28676 930 29606
मार्च 32908 995 33903
अप्रैल 53748 952 54700
मई 112092 575 112667
जून 285565 533 285998
जुलाई 84074 408 84482
अगस्त 58418 419 58837
सितम्बर 54236 512 54748
अक्टूबर 66578 861 67439
नवम्बर 34990 829 35819
दिसम्बर 36762 618 37380
योग:- 898077 8256 906333

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>महीनेवार पर्यटक सांख्यिकी नैनीताल 2013
भारतीय विदेशी योग
जनवरी 54140 590 54730
फरवरी 32977 724 33701
मार्च 362032 1259 37491
अप्रैल 58748 1067 59815
मई 121254 503 121757
जून 254098 408 254506
जुलाई 18074 214 18288
अगस्त 16077 276 16353
सितम्बर 32542 322 32864
अक्टूबर 46605 671 47276
नवम्बर 31123 556 31679
दिसम्बर 35260 498 35758
योग:- 737130 7088 744218

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>महीनेवार पर्यटक सांख्यिकी नैनीताल 2014
भारतीय विदेशी योग
जनवरी 52516 486 53002
फरवरी 32395 518 32913
मार्च 33334 990 34324
अप्रैल 54049 1070 55119
मई 111554 453 112007
जून 272247 394 272641
जुलाई 20298 402 20700
अगस्त 19292 314 19606
सितम्बर 33619 885 34504
अक्टूबर 48935 435 49370
नवम्बर 33612 930 34542
दिसम्बर 38650 745 39395
योग:- 750501 7622 758123
पर्यटक सांख्यिकी नैनीताल 2015
भारतीय विदेशी योग
ज्नवरी 34338 556 34894
फरवरी 55666 515 56181
मार्च 35886 1223 37109
अप्रैल 56692 796 57488
मई 117131 564 117695
जून 3,00,424 259 3,00,683
जुलाई 22157 253 22410
अगस्त 20111 319 42840
सितम्बर 35292 344 35636
अक्टूबर 52849 575 53424
नवम्बर 36600 807 37407
दिसम्बर 41742 791 42533
योग:- 8,08,903 6902 8,15,805

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>महीनेवार पर्यटक सांख्यिकी नैनीताल 2016
भारतीय विदेशी योग
जनवरी 52740 545 53285
फरवरी 37102 817 37919
मार्च 38756 1032 39788
अप्रैल 61344 880 62224
मई 126501 491 126992
जून 3,82,446 302 3,82,748
जुलाई 23974 362 24336
अगस्त 12128 264 12392
सितम्बर 37057 509 37566
अक्टूबर 55491 722 56213
नवम्बर 38795 608 39403
दिसम्बर 43830 696 44526
योग:- 8,66,164 7,231 8,73,395

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>महीनेवार पर्यटक सांख्यिकी नैनीताल 2017
भारतीय विदेशी योग
जनवरी 55,910 552 56462
फरवरी 39328 891 40219
मार्च 40693 1342 42035
अप्रैल 66152 1102 66254
मई 1,37,122 375 1,37,497
जून 3,59,288 394 3,59,682
जुलाई 24155 340 24495
अगस्त 15,405 372 15777
सितम्बर 33507 328 33835
अक्टूबर 52605 993 53598
नवम्बर 40,508 1021 41,529
दिसम्बर 45,650 619 46,269
योग:- 9,10,323 8,329 9,17,652

हद है, राज्य बनने के बाद औसतन सवा फीसद ही बढ़े नैनीताल में विदेशी सैलानी

-पिछले पांच वर्षों में तो विदेशी सैलानियों की संख्या में हो गयी करीब 27 फीसद की कमी 

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>-कुल आने वाले सैलानियों में भी राज्य बनने के बाद औसतन सवा आठ फीसद की दर से ही बढ़त
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, पर्यटन प्रदेश कहे जाने वाले उत्तराखंड प्रदेश में पर्यटन शहरों में सर्वप्रमुख सरोवरनगरी नैनीताल में भले सीजन में पर्यटकों की जितनी बढ़ी संख्या, भीड़-भाड़ दिखाई देती हो, पर पर्यटन विभाग के आंकड़े गवाह हैं कि प्रकृति के स्वर्ग कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी में अपार संभावनाओं के बावजूद विदेशी सैलानियों की संख्या राज्य बनने के डेढ़ दशक में औसतन महज सवा फीसद (1.26 फीसद) की दर से ही बढ़ रही है। वहीं इधर तो हालात और भी बुरे हैं। पिछले पांच वर्षों में तो विदेशी सैलानियों की संख्या में करीब 27 फीसद की कमी हो गयी है। नगर में कुल आने वाले सैलानियों की बात भी करें तो राज्य बनने के बाद औसतन सवा आठ फीसद की दर से बढ़ रही है।

उल्लेखनीय है उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश के रूप में प्रदेश सरकारों के द्वारा खूब प्रचारित किया जाता है। प्रदेश में नैनीताल, मसूरी व कार्बेट पार्क रामनगर जैसे अपार पर्यटन संभावनाओं वाले अनेक पर्यटन स्थलों वाले प्रदेश में ऐसी संभावनाएें भी मौजूद हैं। लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते राज्य बनने के बाद पर्यटन विभाग का ठीक से ढांचा ही न बन पाने और बेहतर ‘कनेक्टिविटी’ और प्रचार-प्रसार जैसे कारण राज्य के पर्यटन को गर्त में धकेल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य के पर्यटन को बढ़ाने के नाम पर मंत्रियों-विधायकों व नौकरशाहों के विदेशी दौरों की बात करें तो ऐसे कई दौरों पर साथ गये भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार जितना विदेशी धन इन लोगों के द्वारा खर्च किया गया है, उतना विदेशी धन राज्य में आये सैलानियों से प्राप्त नहीं हो पाया है। अधिकारी -जनप्रतिनिधि विदेशों में आयोजित होने वाले ‘ट्रेड फेयर’ और ‘ट्रेवल व टूरिज्म मेलों “के नाम पर होने वाले दौरों को तफरी के लिये ही अधिक लेते हैं, और वहां राज्य के पर्यटन को बढ़ाने के कोई प्रयास नहीं करते हैं। यहां तक ​​कि पिछले दिनों जर्मनी जैसे देशों में हुये मेलों में हिंदी में प्रदेश के पर्यटन के ब्रोशर बांटे गये। अधिकांश अधिकारी देश लौटने पर सरकार को अपनी रिपोर्ट भी नहीं देते हैं। आंकड़े भी इसके गवाही कर रहे हैं।

राष्ट्रीय सहारा, 22 जनवरी 2016

वर्ष 2001 में यहां 5793 विदेशी सैलानी आये थे , जबकि बीते वर्ष 2015 में यह संख्या केवल 6902 रही है। जबकि इससे पूर्व 2011, 4109 में में 8256, 12 और 2014 में 13 में 7088 के 7622 में साथ यह संख्या लगातार गिरती गयी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व विदेशी सैलानियों की संख्या में वृद्धि हो रही थी। वर्ष 2009 व 10 के बीच वृद्धि दर 24.48 फीसद व 2010 व 11 के बीच वृद्धि दर 32 फीसद रही थी। इस बाबत नार्थ इंडिया होटल ऐसोसिऐशन के प्रबंधन कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य इन स्थितियों को स्वीकारते हुये कहते हैं कि राज्य के पर्यटन को अपनी साहसिक पर्यटन, योग, ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग जैसी विशेषताओं (यूएसपी) पर फोकस करते हुए अपने प्रचार को बढ़ाना तथा इस दिशा में ठोस कार्य करना होगा, तभी स्थितियां बेहतर हो सकती हैं, वरना मौजूदा ट्रेड तो स्थितियों के और भी बदतर होने का ही इशारा कर रहा है।

विदेशी सैलानियों की पसंद हैं बसंत व शरदकाल

नैनीताल। बीते वर्षों में सरोवरनगरी में आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या की वृद्धि दर देशी सैलानियों के मुकाबले अधिक रिकार्ड की गई है। विदेशी पर्यटकों के लिये बसंत व शरद ऋतुएें नगर में पहुंचने के लिये सर्वाधिक पसंदीदा समय रहते हैं। बीते वर्ष की बात करें तो यहां जनवरी में 515, फरवरी में 456, मार्च में 1223, अप्रैल में 796, मई में 564, जून में 259, जुलाई में 253, अगस्त में 319, सितंबर में 344, अक्टूबर में 575, नवंबर में 807 तथा दिसंबर में 791 विदेशी सैलानी पहुंचे। यह भी कहा जाता है कि सरोवरनगरी आने वाले विदेशी सैलानियों में सर्वाधिक संख्या अमेरिका और दूसरे स्थान पर इंग्लेंड, ग्रेट ब्रिटेन के सैलानियों की रहती है। इंग्लेंड व ग्रेट ब्रिटेन के कई सैलानी तो अपने पूर्वजों के निसान तलाशने भी यहां आते हैं।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>केवल ढाई फीसद की दर से ही बढ़ रहा विदेशी सैलानियों का आना
नैनीताल। वैश्विक पहचान होने और जनपद में सरोवरनगरी नैनीताल व जिम कार्बेट पार्क जैसे स्थलों की मौजूदगी के साथ अपार संभावनाओं के बावजूद विदेशी सैलानियों की संख्या राज्य बनने के 17 वर्षों में औसतन महज ढाई फीसद (2.57 फीसद) की दर से ही बढ़ रही है। वहीं इधर तो हालात और भी बुरे हैं। वर्ष 2011 में जनपद में 9,410 विदेशी सैलानी पहुंचे थे, जबकि 2017 में 8,329 विदेशी सैलानी पहुंचे हैं, यानी यह संख्या 2011 से भी कम है।

ऐसे पर्यटन की चाह शायद किसी को नहीं

  • सड़कों पर हुआ सैलानियों-वाहनों का कब्जा, नगरवासी हुए पैदल चलने को मजबूर, खेल मैदान के वाहनों से पटने से बच्चे खेलने से महरूम
  • नैनी झील और माल रोड पर खुले में कर रहे शौच
  • निकटवर्ती क्षेत्रों के सैलानियों के भारी संख्या में उमड़ने से नगर की व्यवस्थाएं तार-तार

नवीन जोशी। नैनीताल। उत्तराखंड पर्यटन प्रदेश है। पर्यटन से यहां सर्वाधिक रोजगार मिलता है, तथा आगे भी अपार संभावनाएं हैं। किंतु सरोवरनगरी में पिछले दो दिनों से जिस तरह का पर्यटन नजर आ रहा है, शायद ऐसे पर्यटन की चाह किसी को न हो। यहां निकटवर्ती क्षेत्रों के सैलानियों के भारी संख्या में उमड़ने से नगर की व्यवस्थाएं तार-तार हो गयी हैं। खुद के वाहनों पर आकर, साथ में अपना दिन का भोजन लेकर आने वाले यूपी के सीमावर्ती रुहेलखंड मंडल के ये सैलानी न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को पलीता लगाते हुए अपनी प्राकृतिक सुंदरता व पर्यावरण के लिये वैश्विक महत्व की नैनी झील और नगर की शान माल रोड में खुले में शौच करने से भी बाज नहीं आ रहे, वहीं इन्होंने नगर की सड़कों पर कमोबेश कब्जा ही कर लिया है।

परिणामस्वरूप नगर के मूल वासी अपने वाहनों को घर पर ही रखकर पैदल चलने को मजबूर हो गये हैं। नगर का एकमात्र खेल मैदान, डीएसए फ्लैट्स भी इन सैलानियों के वाहनों से पट गया है, जिस कारण नगर बच्चे मैदान में सुबह-शाम खेलने से महरूम हो गये हैं। यह सैलानी न तो नगर के बड़े पंजीकृत होटलों की सेवाएं ले रहे हैं, और न ही नौकाओं पर नैनी झील की सैर करने का चाव ही इनमें दिख रहा है। अलबत्ता ये झील में पैदल ही उतर कर मछलियों को ब्रेड, बन के साथ नमकीन तक उड़ेल रहे हैं। अलबत्ता, इनकी वजह से नगर के गैर पंजीकृत और अवैध होटलों की जरूर पौ-बारह है। क्योंकि वहां ये कम दरों पर एक ही कमरे में दर्जनों की संख्या में रात्रि गुजार रहे हैं। ऐसे दर्जनों सैलानी बीती रात्रि फ्लैट्स मैदान, रोडवेज बस स्टेशन और पार्कों में भी सोते हुए मिले और सुबह खुले में ही शौच आदि नित्य कर्मों से निवृत्त भी हुए। इससे नगर में गंदगी का भी अंबार लग गया है।

बैंड स्टेंड व यहां लगे कुमाउनी संस्कृति के संग्रहालय को किया तबाह

नैनीताल। नगर के ऐतिहासिक धरोहर महत्व के, अंतर्राष्ट्रीय शिकारी व पर्यावरणविद् जिम कॉर्बेट द्वारा अपने पैंसे से निर्मित और इधर दशकों बाद जीर्णाेद्धार हुए ऐतिहासिक बैंड स्टेंड में इन दिनों कुछ कुमाउनी लोक संस्कृति के प्रेमी युवाओं ने बकायदा अनुमति लेकर आगामी 30 जून तक के लिये कुमाउनी संस्कृति का संग्रहालय स्थापित किया है। इधर बुधवार को ये युवा किसी कारण से संग्रहालय से दूर गये कि सैलानी संग्रहालय में चढ़ आये, और यहां लगी माता नंदा देवी के चित्र युक्त पोस्टर सहित कुमाउनी लोक संस्कृति से संबंधित अनेक पोस्टरों को पैरों तले कुचलकर और फाड़कर जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया। यही नहीं बैंड स्टेंड को पान-गुटखे की पीक से रंग डाला, और बैंड स्टेंड के बीच में बच्चों के शौच युक्त हगीज तथा अन्य गंदगी बिखेर दी। इससे आहत आयोजक युवाओं ने बताया कि वे संग्रहालय को तीन दिन पूर्व ही समेटने की सोच रहे हैं।

सैलानियों को नगर से बाहर ही रोके जाने की उठ रही मांग