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जानिये मामले सर्वाधिक तेजी से बढ़ रहे हैं, फिर भी क्यों सब कुछ खुलने जा रहा है

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नवीन समाचार, देहरादून, 31 मई 2020।
देश-प्रदेश में कोरोना के आने की गति अभी अब तक के शीर्ष स्तर पर है। देश में 24 घंटों में आठ हजार के करीब जबकि राज्य में एक दिन पहले 200 से अधिक मामले आये हैं। फिर भी केंद्र एवं राज्य लॉकडाउन 5.0 की जगह अनलॉक-1 में आने जा रहा है। यानी अब कोरोना विषाणु से डरने की जगह सावधानी बरतते हुए आगे निकलने का समय है। ऐसे में बहुतों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि जब स्थितियां इतनी खराब हैं तो सरकार क्यों सब कुछ खोलने का निर्णय ले रही है। इस पोस्ट में हम यही बताने की कोशिश कर रहे हैं।
पहली बात देश-प्रदेश में भले कोरोना के अधिक मामले प्रकाश में आ रहे हैं, परंतु यह बड़ी सफलता है कि करीब 70 दिन के लॉक डाउन की वजह से देश में कोरोना समाज में नहीं फैला है। यह अभी भी गहरे जुड़़ाव वाले परिवारजनों एवं काफी समय एक साथ रहे लोगों में ही संक्रमित हुआ है और ऐसे लोगों की आसानी से पहचान कर उन्हें समाज में घुले-मिले बिना सीधे उपचार कराया जा रहा है।

13 शहरों में 70 प्रतिशत मामले
देश में कोरोना अब भी पूरे देश में नहीं बल्कि कुछ खास शहरों और उनकी कुछ गलियों तक सीमित है। देश के 13 शहरों-मुंबई, पुणे व ठाणे (महाराष्ट्र), नई दिल्ली, चेन्नई (तमिलनाडु), कोलकाता-हावड़ा (पश्चिम बंगाल), अहमदाबाद (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना), (महाराष्ट्र), इंदौर (मध्य प्रदेश), जयपुर व जोधपुर (राजस्थान), चेंगलपट्टु व थिरूवल्लूर (तमिलनाडु) की कुछ इलाकों व गलियों में 70 फीसद मामले हैं। और शेष पूरे देश में केवल 30 प्रतिशत मामले हैं।

मुख्य सचिव ने भी समझाया कि डरने की कोई वजह नहीं है
इधर उत्तराखंड में भी स्थितियां काफी बेहतर हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने भी यही बात कही है। उन्होंने कहा कि भले उत्तराखंड में हाल के दिनों में कोराना संक्रमितों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। राज्य में अभी तक सामुदायिक संक्रमण नहीं हुआ है। जितने भी मामले आ रहे हैं, उनकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री यानी यात्रा इतिहास रहा है या किसी कोरोना संक्रमित के साफ तौर पर संपर्क मंे रहने का मामला है। ऐसे सभी लोग पहले से निगरानी में चल रहे थे। अभी कुछ दिन और कुल मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है परंतु

10-15 दिनों में सक्रिय मामलों की संख्या में कमी आने लगेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण औसत राष्ट्रीय औसत से कम है। राज्य में कोरोना संक्रमण में मृत्यु दर देश के औसत लगभग 2.8 प्रतिशत से काफी कम मात्र एक प्रतिशत से भी कम है। प्रदेश में अभी 31 जोखिम क्षेत्र यानी कंटेन्मेंट जोन बनाए गए हैं, जहां बहुत सख्त व्यवस्था लागू है। राजय में नमूने लेने की गति भी अच्छी है। पहले सप्ताह में प्रतिदिन नमूने लेने का औसत एक था जबकि 16वें सप्ताह में यह औसत बढ़कर 834 हो गया है। यह जल्द ही 1000 प्रतिदिन हो जाएगा। देहरादून में लगभग 5500 प्रति 10 लाख और नैनीताल में 3185 प्रति 10 लाख जनसंख्या टेस्ट किए जा रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं।

कोरोना के लक्षण आने से पहले ही उत्तराखंड में स्वस्थ हो रहे हैं संक्रमित
उत्तराखंड में जितने लोग कोरोना संकमित हो रहे हैं, उनमें ना के बराबर या बहुत कम लक्षण आ रहे हैं। यानी बहुत शुरुआत में ही उनके कोरोना संक्रमित होने का पता लग जा रहा है, और वे बिना लक्षण बढ़े ही स्वस्थ भी हो जा रहे हैं। यहां आ रहे संक्रमितों में से 41 प्रतिशत में कोई लक्षण नहीं है, 53 प्रतिशत में बहुत ही मामूली लक्षण हैं, 4.5 प्रतिशत में मध्यम और 1.74 प्रतिशत अधिक लक्षण वाले हैं। स्पष्ट है कि उत्तराखंड में गम्भीर मामले नहीं हैं।

अधिकांश प्रवासी लाए जा चुके हैं
मुख्य सचिव ने बताया कि बाहर से प्रदेश में आने के लिए लगभग 2 लाख 62 हजार प्रवासियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से 1 लाख 81 हजार लोगों को ट्रेन, बस या निजी वाहनों के माध्यम से लाया जा चुका है। अब लोग आने के लिए कम इच्छुक हैं। 28 मई को 98 हजार लोगों को एसएमएस किए गए, जिनमें से लगभग 3 हजार लोगों ने ही आने की इच्छा व्यक्त की है।

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