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योगी की पुलिस की हरकत से दूसरे धर्म की मासूम के अपहर्ताओं के होंसले बुलंद, उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव

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बिलासपुर, 3 सितंबर 2018। बिलासपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के एक गांव में पड़ोस में रहने वाली दूसरे साम्प्रदाय की एक महिला द्वारा नाबालिग किशोरी को अगवा कर उसको बेचने के प्रयास के मामले में यूपी पुलिस की हरकत से गांव में साम्प्रदायिक तनाव पैदा हो गया है। आरोप है कि अपेक्षा के विपरीत योगी सरकार की पुलिस आरोपियों पर कार्यवाही करने के बजाए उल्टा पीड़ित परिवार और किशोरी पर बयान बदलने का दवाब बनाने लगी। जिस पर परिजन और मौहल्लेवासी आक्रोशित हो उठे और कोतवाली पुलिस और रूद्रबिलास चौकी प्रभारी के विरुद्ध नारेबाजी करने लगे।

मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के डिबडिबा गांव का है। रविवार की शाम गांव निवासी एक दंपति ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पड़ोस में रहने वाली दूसरे साम्प्रदाए की एक महिला उनकी नाबालिग पुत्री को शनिवार की शाम किसी बहाने से अगवा कर उसको बेचने के इरादे से अपने साथ ले गई थी।घर से किशोरी के अचानक लापता होने से परिवार सहित पुरे मौहल्ले में भय का माहौल बन गया तथा परिजन किशोरी को रिश्तेदारों सहित इधर-उधर तलाश करने लगे, लेकिन उसका कुछ पता नही चल पाया। इसी बीच परिजनों को महिला द्वारा किशोरी को अगवा करने का सुराग हाथ लग गया।जिसपर उन्होंने महिला से कड़ाई के साथ जब किशोरी के बारे पूछताछ की तो उसने बताया कि किशोरी को रुद्रपुर की एक कालोनी निवासी अपने दामाद के घर बेहोशी की हालत में रखा हुआ है। इस पर परिजन महिला के दामाद के घर पहुंच गए और किशोरी को बरामद कर अपने साथ ले आए। इसके बाद परिजनों ने शाम के समय कोतवाली पुलिस को मामले की तहरीर देकर घटना से अवगत कराया। लेकिन पुलिस आरोपियों पर कार्यवाही करने के बजाए और उल्टा पीड़ित परिवार को धमकाने पहुंच गई। सोमवार की सुबह रूद्रबिलास चौकी प्रभारी पूछताछ के लिए पीड़ित के घर पहुंच गए और परिवार द्वारा महिला के विरुद्ध झूठा केस दर्ज करवाने की बात कहकर अपना बयान वापस लेने का दवाब बनाने लगे।जिस पर पीड़ित परिवार सहित मौहल्लेवासी आक्रोशित हो उठे और पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए हाय-हाय के नारे लगाने लगे। लोगों का विरोध बढ़ता देख चौकी प्रभारी सभी को देख लेने की बात कहकर मौके से चले आए। इसके बाद पीड़ित परिवार सहित मौहल्ले के लोग एसपी के सम्मुख जा पहुंचे और मामले से अवगत कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग करने लगे।फिलहाल मामला दो साम्प्रदायों का होने की वजह से गांव में तनाव तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

मामला दो सम्प्रदाय का होने पर भी लीपापोती में लगी रही पुलिस

परिजनों का आरोप है कि मामला दो सम्प्रदाय का होने के बावजूद भी कोतवाली पुलिस आरोपियों पर कार्यवाही करने के बजाए दिनभर मामले की लीपापोती में लगी रही।लेकिन सोमवार को जब चौकी प्रभारी द्वारा पीड़ित परिवार को धमकाने का प्रयास किया गया तो वे लोग आक्रोशित हो उठे और पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी करने लगे।रोषित परिजन एसपी शिव हरी मीणा के सम्मुख जा पहुंचे और पुलिस कर्मियों पर बयान वापस लेने और धमकाने का आरोप लगाया।

रविवार की शाम मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी इसलिए सोमवार को किशोरी का बयान दर्ज होना था। जिसपर चौकी प्रभारी पीड़ित परिवार को अवगत कराने उनके घर गए थे और किशोरी का बयान दर्ज करवाने की बात कही थी। -नरेंद्र प्रताप सिंह थानाध्यक्ष बिलासपुर

यह भी पढ़ें : ‘यूपी वासियों’ ने ‘नैना देवी’ से लगायी उत्तराखंड में शामिल करने की गुहार

1नैनीताल, 6 नवंबर 2017। जी हाँ, यूपी के रामपुर जनपद के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रवासियों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ ही उत्तराखंड की राज्य देवी कही जाने वाली ‘नैना (नयना) देवी’ से स्वयं को उत्तराखंड में शामिल करने की गुहार लगाईं है। इन लोगों ने उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिला मुख्यालय में जुलूस निकाला। जुलूस के दौरान वे हाथों में जो बैनर लिए हुए थे, उसमें लिखा था, “नैना देवी दर वापस दो, हमें हमारा घर वापस दो।”
उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिला मुख्यालय-रुद्रपुर के निकट यूपी के रामपुर जनपद के अंतर्गत आने वाली 7 कॉलोनियों-शारदा, पद्मा, आरके पुरम, अलखनंदा, सेठी, परती एवं गोपाल विहार कॉलोनी के इन निवासियों का कहना है कि इन कोलोनियों का करीब 70 एकड़ क्षेत्र और करीब 70 फीसद इलाका तीन दिशाओं से उत्तराखंड एवं शेष एनएच-74 से घिरा है, बावजूद उत्तराखंड राज्य गठन के दौरान मामूली लिपिकीय गलती से उन्हें यूपी में डाल दिया गया, लिहाजा उन्होंने डीएम व सीएम के साथ नैना देवी से भी घर वापसी की गुहार लगते हुए उनके यूपी के भूखंड को उत्तराखण्ड में शामिल करने की मांग की है। इस बारे में सैकड़ो क्षेत्रवासियों ने ऊधमसिंह नगर के सीडीओ के मार्फत सीएम से गुहार लगाई है। ‘प्रसंग’ संघर्ष समिति के बैनर तले एक सूत्रीय मांग को पूरा कराने के लिए घनध्याम कांडपाल, जेपी चंद्रा, ओमप्रकाश चौधरी, दीपचंद पाठक, विपिन पंत, चेतन भट्ट, देंवेंद्र सिंह, पीयूष माधव, धर्मेंद्र, पंकज चंदोला कुसुम, सुंदेश्वरी, राजवती, मंजू देवी, भगवान दास,  गिरीश बधानी, हेमा, कविता जोशी, रेनू चौबे, रवि भट्ट, हरीश चंदोला, हरीश भाकुनी, तारावती कांडपाल, प्रिया कांडपाल, रमेश मेलकानी, ललिता पाठक, मालती देवी पांडे, हेमा पांडे, सविता भाकुनी आदि स्थानीय निवासी आज (6 अक्टूबर 2017 को ) रुद्रपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे।
उनका कहना है, “भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पूरी तरह उत्तराखंड पर आश्रित होने के बावजूद रामपुर में शामिल इस सीमान्त क्षेत्र के निवासी उत्तराखंड राज्य गठन के दौरान त्रुटिपूर्ण विभाजन के कारण मौलिक सुविधाओं से पूर्णतः विरत हैं। स्थानीय निवासियों ने एक संघर्ष समिति के माध्यम से आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापित पत्र ऊधमसिंह नगर जिले के मुख्य विकास अधिकारी यानी सीडीओ को सौंपा। इस दौरान सीडीओ ने भी माना कि तकनीकी एवं प्राकृतिक तथ्यों की अनदेखी के कारण राज्य गठन के दौरान सीमांकन में कई चूकें हुई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनावश्यकताओं के अनुरूप इन त्रुटियों में अवश्य सुधार किया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि एक दशक से अपनी नितांत आवश्यक मांगों की पूर्ति के लिए स्थानीय निवासियों ने क्षेत्र प्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाई किन्तु आश्वासन के अतिरिक्त कुछ भी प्राप्त नहीं हो सका। दिनों-दिन बदहाल होती स्थिति से लाचार स्थानीय निवासियों ने अपनी एक सूत्रीय मांग की पूर्ति के लिए समयसीमा और प्रारूप सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से “प्रसंग” संघर्ष समिति का गठन किया है। “प्रसंग” के माध्यम से हमारा अनुरोध है कि उक्त छह कॉलोनियों को शीघ्र-अतिशीघ्र उत्तराखंड में शामिल कराना सुनिश्चित कराएं अन्यथा हम लोग संघर्ष एवं आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अफजलगढ़-कालागढ़ क्षेत्र के लोगों की भी है उत्तराखंड में आने की चाहत
 
नैनीताल। आजादी के संघर्ष के बाद तत्कालीन यूपी सरकार ने उत्तराखंड के कुमाऊं एवं गढ़वाल के अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को यूपी के बिजनौर जिले के कालागढ़-अफजलगढ़ क्षेत्र के में बसाया था। ऐसे ही तुरतपुर सहित कई गांवों के लोग भी उत्तराखंड की पृष्ठभूमि के होने के कारण यूपी में रहते हुए असुविधाजनक स्थिति में रहते हैं। लिहाजा क्षेत्र के कालागढ़ बांध की तरह यूपी की जगह उत्तराखंड के स्वामित्व में आना चाहते हैं। यूपी के सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे कई अन्य गांव भी इसी तरह उत्तराखं डमें आने को लालायित हैं।
ज्ञातव्य है कि तीन तरफ से उत्तराखंड एवं शेष एनएच-74 से घिरे इस क्षेत्र के लोग राज्य गठन के बाद से ही इस 70 एकड़ इलाके को उत्तरांखड में शामिल किए जाने की गुहार लगाते रहे हैं, जबकि तमाम जनप्रतिनिधियों ने सिर्फ आश्वासन देकर मामले को टाले रखा। विडंबना देखिए कि एक दौर में परिसीमन के दौरान हुई मामूली सी कार्यालयी चूक आज सुधार के लिए व्यवस्थापिका के दृष्टिगत होने का, उसकी तत्परता का और इच्छाशक्ति का इंतजार कर रही है। वहीं विगत करीब दो दशकों से हजारों लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रोत्साहन, स्थापना, सुरक्षा और सहायता जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। भौगोलिक दृष्टि से एक राज्य, जिससे इस क्षेत्र की सीमाएं छूती भी नहीं, वह कागजों पर इसे अपना भूभाग बताता है। जबकि जिस राज्य से यह क्षेत्र तीन दिशाओं और करीब 70 फीसद इलाके से घिरा है, वह यहाँ के नागरिकों को मात्र एक ग्राहक की दृष्टि से देखता है। परिणामस्वरूप इस इलाके के सैकड़ों गरीब बच्चे राज्य द्वारा संचालित योजनाओं से विरत हैं। व्यवहारिक सत्य यह है कि किसी अप्रिय घटना के होने पर निवासियों को 20 किमी दूर स्थित थाने की कृपा पर आश्रित होना पड़ता है और स्थानीय निकटतम चौकी के कर्मी चोरी के के 99 फीसद मामलों में मुकदमा कायम होने ही नहीं देते। नतीजतन यह क्षेत्र आसपास के चोर-उचक्कों का स्वर्ग बनता जा रहा है।
धरातल पर यही सच्छाई लगभग सभी विभागों और सेवाओं की है, जिसे इंगित किए जाने पर कई पन्ने भर जाएंगे। हालांकि हमें आशा है कि नए भारत को आकार देने की केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के समक्ष यह मामला एक सजीव उदाहरण की भांति देखा जाएगा। मामूली सी गड़बड़ी से यदि व्यापक स्तर पर लोग प्रभावित हो रहे हैं, तो सरकार, उसके मंत्री और जनप्रतिनिधि वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर जनकल्याण में इस सुधार को अमलीजामा पहनाएंगे। हम् पूर्णतः आश्वस्त हैं कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रति दृढ़संकल्प है। यह मर्यादा परस्पर है और निष्ठावान, कृतज्ञ व साकारात्मक नागरिकों का संकल्प यथावत रखने हेतु राज्य भी अपने दायित्वों के निर्वाहन में किसी प्रकार के पूर्वाग्रह एवं व्यवधान की अनदेखी कर देश और समाज के समक्ष नए मूल्यों की स्थापना करेगा।
हमें मालूम है कि इस प्रकार के मामले पर सुनवाई शुरू होते ही बहुत से अन्य लोग और इलाके भी ऐसी ही मांग करेंगे। उनके अपने तर्क और तथ्य होंगे किन्तु यह सर्वविदित है कि हमारे 70 एकड़ इलाके का मामला विशेषतम में भी विशेष है क्योंकि इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का लाभ न होकर व्यापक जनसमुदाय का कल्याण हैं। यह मुद्दा अतिरिक्त लाभ, सुविधा या सहायता पाने से संबंधित न होकर मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति एवं भौगोलोक न्याय से संबंधित है।”
प्रस्तुति : अनिल मिश्र 
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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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