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निकाय चुनावों के जरिये हुई है इस प्रदेश नेत्री का राजनीतिक कॅरियर चौपट करने की साजिश !

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-हेम आर्य को कांग्रेस में शामिल करने से शुरू हुई थी जिले की दो कांग्रेस नेत्रियों में अदावत
-महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य को हरीश रावत गुट से होने का मिल रहा खामियाजा, और रावत भी नहीं दे रहे साथ
-सरिता एक भी महिला कांग्रेस की पदाधिकारी तथा अपने क्षेत्र के भवाली व नैनीताल में नहीं दिला पायीं अपने करीबियों को टिकट, इस तरह उनके आधार पर की गयी है चोट

नामांकन कराते कांग्रेस प्रत्याशी सचिन नेगी और उनके बगल में साथ खड़ी सरिता आर्य व हेम आर्य।

नवीन जोशी नैनीताल, 23 अक्तूबर 2018। ‘कहीं पर निगाहें-कहीं पर निशाना’ राजनीति का अहम हिस्सा है। यहां दो सामने दिखता है, अक्सर वह नहीं होता। और जो होता है, उसकी जड़ें कहीं और होती हैं। राज्य के पिछले विस चुनावों में विजय हासिल करने के बाद नैनीताल की विधायक बनीं सरिता आर्या सबसे पहले हल्द्वानी में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री डा. इंदिरा हृदयेश के आवास पर गयी थीं। किंतु कांग्रेस की सरकार बनने और विजय बहुगुणा की सीएम के पद पर ताजपोशी के वक्त से ही हरीश रावत के खेमे की मानी जाने लगीं, और बाद में हरीश रावत के सीएम बनने के बाद काफी मजबूत हुईं। उन्हें महिला कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष जैसा बड़ा पद मिला और वह पहला विस चुनाव जीतते ही राज्य की शीर्ष महिला नेत्रियों में शुमार हो गयी थीं। लेकिन इधर मौजूदा निकाय चुनावों में उन्हें राजनीतिक तौर पर समाप्त करने की बड़ी साजिश साफ दिखाई दे रही है। वे महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष होते महिला कांग्रेस की सिटिंग पालिकाध्यक्ष व जीतने की संभावना वाली एक जिलाध्यक्ष के साथ ही अपने क्षेत्र की नैनीताल व भवाली सीटों पर अपने बेहद करीबियों को उनकी जीत की प्रबल संभावनाओं के बावजूद टिकट नहीं दिला पायी हैं। इस तरह उनका राजनीतिक आधार समाप्त करने और हर ओर उनके लिये अपनों को भी दुश्मन बनाने का प्रयास किया गया है। खास बात यह भी है कि उन्हें ऐसे वक्त में हरीश रावत का साथ भी नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि इस अदावत की शुरुआत पिछले दिनों सरिता के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़े हेम आर्या को कांग्रेस में शामिल करने के प्रयासों से शुरू हुई। सरिता से नाराज नैनीताल विस के ही कुछ नेताओं ने सरिता को नीचा दिखाने के लिए जिले-प्रदेश की बड़ी महिला नेत्री-नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश से संपर्क साधा। इंदिरा ने हेम को पार्टी में शामिल करने का प्रयास किया तो सरिता ने तीन बार उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया। यहां तक कि वे पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर हेम के पार्टी में शामिल होने पर अपना विरोध दर्ज करा आयीं। लेकिन इंदिरा राहुल से ही हेम को पार्टी में शामिल करने की इजाजत ले आयीं। इस पर हेम का पार्टी में शामिल होना तय हुआ तो सरिता से महिला प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का इशारा कर दिया। इस पर जिले से प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए सरिता की एक करीबी सहित दो महिला नेत्रियों को तैयार कर सरिता से धमकी की जगह इस्तीफा दे देने को कह दिया गया। कथित तौर पर यहां तक कह दिया गया कि वे एक गृहणी से राजनीति में आयी हैं, उन्हें वापस गृहणी ही बनाकर छोड़ दिया जाएगा। इधर निकाय चुनाव में उन्हें बुरी तरह से शक्तिहीन साबित करना इसी कड़ी में माना जा रहा है। लेकिन ऐसे बुरे वक्त में राजनीतिक आका हरीश रावत का साथ न मिलने पर हतप्रभ सी सरिता का कहना है कि न जाने क्यों रावत ने निकाय चुनावों से स्वयं को अलग कर लिया है। ऐसे में इंदिरा हृदयेश को खुला मैदान मिलना स्वाभाविक है, और वे अपने पुत्र सहित अपने लोगों को टिकट दिलाने में सफल रहीं। और आज सरिता के समक्ष ऐसी स्थिति आ गयीं जब वे पार्टी प्रत्याशी सचिन नेगी के नामांकन के दौरान हेम आर्य के बिल्कुल बगल में खड़ी नजर आयीं।

एक दिन पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम की राहुल गांधी से शिकायत करने की बात कह रही सरिता ने अब जताया प्रदेश अध्यक्ष का आभार

नैनीताल। एक दिन पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की शिकायत राहुल गांधी से करने की बात कह रही महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने अब सिंह का आभार जताया है। मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट में उन्होंने कहा कि वे युवा नेतृत्व पर विश्वास जताने के लिए शीर्ष नेतृत्व का आभार जताती हैं। ‘नवीन समाचार’ द्वारा पूछे जाने पर कि वे केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व की बात कर रही हैं, अथवा राज्य शीर्ष नेतृत्व का, उन्होंने साफ किया कि राज्य नेतृत्व यानी सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व यानी राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप नैनीताल में युवा प्रत्याशी पर भरोसा जताया है, जिसका वह स्वागत करती हैं। यह पूछे जाने पर कि नाराज नगर अध्यक्ष मारुति साह को टिकट मिलने पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होती, उन्होंने कहा कि मारुति भी युवा हैं, उनका नाम पैनल में सबसे ऊपर था। मारुति को टिकट मिलने पर भी वह खुश होतीं।

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नैनीताल, 22 अक्टूबर 2018। निकाय चुनाव में टिकट वितरण से राजनीतिक दलों में उपजा असंतोष नेताओं के पालाबदल, राजनीतिक निष्ठाओं को धता बताने का माध्यम बन गया है। इससे नेताओं की पद लोलुपता की कलई भी खुल रही है कि वे अपनी पार्टी से सिर्फ खुद की सुविधओं-टिकट के लिए चिपके हुए हैं। टिकट कटा नहीं कि उनके पास बगावत करने के सौ बहाने हैं। किसी एक स्थान नहीं पूरे राज्य में इन दिनों जैसे नेताओं के पालाबदल का मौसम आ गया है।
आज की बात करें तो रुद्रपुर में टिकट कटने से नाराज कांग्रेस महानगर कमेटी के महामंत्री चंद्रसेन कोली ने 20 कार्यकर्ताओं के साथ सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों में प्रदेश संगठन सचिव कोमिल राम कोली भी शामिल हैं। चंद्रसेन ने समर्थकों के साथ महानगर अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने एक स्थानीय नेता पर बाहरी व्यक्ति को टिकट करोड़ों में बेचने का आरोप लगाया है। हालांकि उस नेता का नाम उजागर नहीं किया है। वहीं उक्रांद के पूर्व महानगर अध्यक्ष वीरेंद्र बिष्ट आज कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इधर, बागेश्वर में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा। यहां पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता प्रमोद मेहता (डब्बू) ने बगावत कर दी है। नगर पालिका परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद के लिये उन्होंने दावेदारी ठोकी है। प्रमोद मेहता सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा विभाग में इंजीनियर के पद पर थे। उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उधर, ऋषिकेश में भी भाजपा में बगावत के सुर तेज हो रहे हैं। यहां भाजपा मुनिकीरेती मंडल अध्यक्ष राकेश सिंह सेंगर ने कहा कि हमारा ये उद्देश्य था कि हमारे मूल कार्यकर्ताओं से किसी को टिकट दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूर्व में विधानसभा के चुनावों में भी ऐसा ही किया गया। उस वक्त हमने पार्टी के इस फैसले का स्वागत किया था। लेकिन इस बार भी हमें उपेक्षा का मुंह देखना पड़ा। अब मुनिकीरेली और डालवा मंडल के कार्यकर्ताओं ने फैसला किया है कि यहां पर हम पार्टी के खिलाफ नए उम्मीदवार को खड़ा करें।

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देहरादून, 19 अक्तूबर 2018। एक ओर ‘सूत न कपास,जुलाहों में लट्ठम-लट्ठा’ की स्थिति में दोफाड़ होने की स्थिति में आई आम आदमी पार्टी को निकाय चुनावों के समय देहरादून में संजीवनी मिलती नज़र आ रही है। देहरादून से दो बार मेयर का निर्दलीय चुनाव लड़ चुकी व पूर्व में कांग्रेस नेत्री रहीं किन्नर रजनी रावत आज औपचारिक तौर पर ‘आप’ का ‘झाडू’ थाम सकती हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के केंद्रीय हाईकमान ने रजनी रावत के पार्टी में शामिल होने पर मुहर लगा दी है। वे आज सुबह 11 बजे आप के उत्तराखंड प्रभारी की मौजूदगी में सदस्यता ले सकती हैं। सूत्रों के अनुसार रजनी रावत आप की देहरादून नगर निगम से मेयर पद की प्रत्याशी होंगी। उल्लेखनीय है कि रजनी 2008 और 2013 में भी देहरादून नगर निगम के मेयर पद का चुनाव लड़ चुकी हैं। वे पूर्व में कांग्रेस पार्टी में भी शामिल हो चुकी हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि उनका आप से साथ कितना लंबा रह पाता है।

यह भी पढ़ें : 2 बार नगर पालिका अध्यक्ष व विधायक रहे पौड़ी के कांग्रेस नेता भाजपा में हुए शामिल

देहरादून, 18 अक्तूबर 2018। निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच राजनेताओं का पालाबदल-उठापटक का दौर शुरू हो गया है। पौड़ी से 2007 से 2012 तक कांग्रेस से टिकट न मिलने पर विधायक व दो बार नगर पालिका अध्यक्ष तथा कांग्रेस नेता रहे यशपाल बेनाम ने भाजपा का दामन थाम लिया है। भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने उन्हें देहरादून में भाजपा की सदस्यता दिलाई। उनका पौड़ी में काफी दबदबा बताया जाता है। यशपाल बेनाम का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

बेनाम को पौड़ी से नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिये भाजपा से टिकट मिलना भी तय है। वहीं पौड़ी भाजपा में उनके शामिल होने के बाद बगावत जैसी स्थिति भी हो सकती है।

लग चुके हैं रेप और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप

उल्लेखनीय है कि यशपाल बेनाम पूर्व में एक महिला से छेड़खानी के आरोप में जेल में रह चुके हैं। साथ ही पालिका अध्यक्ष रहते हुए उन पर वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लग चुका है और वो हाल ही में कोर्ट से बरी हुए हैं।

अजय भट्ट ने दी क्लीन चिट

यशपाल के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने बयान जारी करते हुए कहा कि यशपाल बेनाम को षडयंत्र के तहत फंसाया गया था और अब न्यायालय ने छेड़छाड़ मामले पर बेनाम को आरोप मुक्त किया है। साथ ही अजय भट्ट ने यशपाल बेनाम पर लगे आरोप को लेकर क्लीन चिट दी। इस दौरान धन सिंह रावत, अजय भट्ट, पौड़ी एमएलए मुकेश कोली सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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