नैनीताल रेड, ऊधमसिंह नगर ग्रीन, दून सहित अन्य सभी जिले ऑरेंज, जानें क्या रहेंगी पाबंदियां…

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2020। नैनीताल जनपद को पिछले दिनों एक दिन में सर्वाधिक मामले आने के कारण रेड जोन में डाल दिया गया है। वहीं ऊधमसिंह नगर को ग्रीन जोन में रखा गया है। वहीं देहरादून सहित अन्य जनपद ऑरेंज जोन में रखे गये हैं। रेड जोन में आने के बाद जनपद में … Read more

खुशखबरी : उत्तराखंड में खुली पर्यटन-धार्मिक पर्यटन शुरू होने की राह

नवीन समाचार, देहरादून, 31 मई 2020। अब तक लॉक डाउन झेल रहे देश-प्रदेश में एक जून से कोरोना के खिलाफ जंग में ‘अनलॉक’ का दौर शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने लॉकडाउन 4.0 के समाप्त होने के साथ राज्यों को बड़ी राहत प्रदान कर दी है। आय का प्रमुख स्रोत होने के कारण … Read more

नए कुमाऊँ आयुक्त ने कहा-कोरोना के साथ बढ़ीं चुनौतियां, साथ मिले नये अवसर भी

-घर लौटे प्रवासियों को यहीं जीविकोपार्जन के लिए रोकने का है मौका -पर्वतीय क्षेत्रो के आईवीआरआई मुक्तेश्वर एवं विवेकानंद संस्थान अल्मोड़ा में कोरोना की जांच की सुविधा विकसित करने पर चल रहा विचार नवीन समाचार, नैनीताल, 27 मई 2020। नैनीताल पहुंचने वाले सबसे पहले अंग्रेज एवं जनपद के हल्द्वानी शहर को बसाने वाले जीडब्ल्यू ट्रेल … Read more

मौसम के बदले मिजाज के पीछे कोरोना के साथ सूर्य की ‘खराब सेहत’, आगे 10 दिन में 10 डिग्री बढ़ सकता है पारा !

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-इस वर्ष पर्यावरण साफ होने के साथ सौर सक्रियता ‘सोलर मिनिमम’ में अपने सबसे निचले स्तर पर
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मई 2020। इस वर्ष गर्मियों के मई माह तक शीतकाल से चला आ रहा बारिश व ओलावृष्टि का क्रम जारी है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तो अब भी बर्फबारी हो रही है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षित गर्मी नहीं है। मौसम का यह बदला मिजाज चर्चा में है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला कोरोना विषाणु की महामारी के कारण दुनिया भर में लागू लॉक डाउन की वजह से फैक्टरियों एवं वाहनों के काफी कम चलने से ग्रीन हाउस गैसों के कम उत्सर्जन से पर्यावरण में प्रदूषण का घटना एवं धरती के ऊपर ओजोन परत में सुधार आना, और दूसरे धरती पर ऊष्मा व ऊर्जा देने वाले सूर्य पर उसके 11 वर्षीय सोलर साइकिल यानी सौर चक्र के ‘सोलर मिनिमम’ यानी अपने निचले स्तर पर होना। उल्लेखनीय है कि सोलर मिनिमम को सूर्य की सेहत खराब होने के रूप में भी देखा जाता है, क्योंकि इससे सूर्य पर सौर भभूकाएं उठने की तीव्रता कम हो जाती है।
स्थानीय एरीज यानी आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वरिष्ठ सौर वैज्ञानिक डा. वहाब उद्दीन के अनुसार मौसम को अनेक घटक प्रभावित करते हैं। इनमें प्राकृतिक कारणों के साथ ही मानवजनित कारण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस वर्ष लॉक डाउन की वजह से मानव जनित कारणों में काफी कमी आई है। इस कारण क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोना ऑक्साइड व ओजोन आदि ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन काफी कम होने से धरतीवासियों की सबसे बड़ी चिता का कारण बनी ओजोन परत में सुधार आया है। वहीं दूसरी ओर सूर्य 2007 के आसपास अपनी सक्रियता के 11 वर्षीय सौर चक्र में शीर्ष पर रहने के बाद इधर अपने सबसे कम सक्रियता की स्थिति में है। मौसम में दिख रहे बदलाव का यह भी बड़ा कारण हो सकता है।

अगले 10 दिनों में 10 डिग्री सेल्सियस तक अधिक तापमान झेलेंगे मैदानी क्षेत्र

Pr.BS Kotliya
प्रो. बहादुर सिंह कोटलिया

नैनीताल। बदले मौसम पर दीर्घकालीन मौसम पर शोधरत कुमाऊं विश्वविद्यालय में यूजीसी के प्रोफेसर बहादुर सिंह कोटलिया का भी मानना है कि मानव जनित कारण मौसम का काफी प्रभावित करते हैं। बावजूद उनका मानना है कि वर्तमान मौसमी बदलाव के पीछे मानवजनित कारणों से अधिक प्राकृतिक कारण हैं। उन्होंने कहा कि मई के पहले पखवाड़े तक सक्रिय रहा पश्चिमी विक्षोभ अब समाप्त हो गया है। इसके बाद अगले दो-तीन दिनों में ही गर्मी बढ़ने वाली है और मैदानी क्षेत्रों में अगले 10 दिनों में तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ा हुआ तापतान दक्षिण पश्चिमी मानसून के आने तक बना रह सकता है। अलबत्ता, पर्वतीय क्षेत्रों में हाल में हुई बारिश की वजह से मौजूद नमी तापमान को अधिक बढ़ने नहीं देगी। लिहाजा पहाड़ों पर मौसम खुशगवार रह सकता है।

यह भी पढ़ें : ‘आर्द्रा नक्षत्र’ में हो सकता है महाविस्फोट ! क्या 26 ही रह जायेंगे नक्षत्र ?

-पिछले पांच वर्ष से तारे की चमक में कमी आने से वैज्ञानिक जता रहे सुपरनोवा विस्फोट की आशंका, जिसके बाद कुछ समय के लिए खत्म होने से पहले सूर्य व चंद्रमा जैसा तीसरा सबसे चमकदार तारा जैसा नजर जाएगा आर्द्रा नक्षत्र
Ardra nakshtraनवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2020। पृथ्वी से 700 प्रकाश वर्ष दूर एक आकाशगंगा में स्थित सूर्य से करीब 19 गुना भारी व नौ सौ गुना बड़े विशाल आकार वाले लाल रंग के तारे ‘बेटेल्गयूज’ (भारतीय नाम आर्द्रा नक्षत्र) पर दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिकों की नजरें लगी हुई हैं। अभी यह सबसे अधिक चमक के मामले में आकाश गंगा का 11वां तारा है। लेकिन इधर पिछले पांच माह में इसकी चमक में 25 फीसद कमी आ गई है। वैज्ञानिकों का इस आधार पर ही मानना है कि जल्द ही सूपरनोवा विस्फोट के जरिये इसका अंत हो जाएगा। वहीं धार्मिक आधार पर देखें तो माता नंदा देवी के मेले का धार्मिक पक्ष निभाने वाले पंडित एवं शिक्षक भगवती प्रसाद जोशी कहते हैं कि धार्मिक तौर पर किसी नक्षत्र के समाप्त होने की परिकल्पना नहीं की गई है।

जानिये आर्द्रा नक्षत्र के बारे में:

आर्द्रा का अर्थ होता है नमी। आकाश मंडल में आर्द्रा छठवां नक्षत्र है। यह राहु का नक्षत्र है व मिथुन राशि में आता है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। यह आकाश में मणि के समान दिखता है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र के रूप में भी समझा जा सकता है। कई विद्वान इसे चमकता हीरा तो कई इसे आंसू या पसीने की बूंद समझते हैं। आर्द्रा नक्षत्र मिथुन राशि में 6 अंश 40 कला से 20 अंश तक रहता है। जून माह के तीसरे सप्ताह में प्रातः काल में आर्द्रा नक्षत्र का उदय होता है। फरवरी माह में रात्रि 9 बजे से 11 बजे के बीच यह नक्षत्र शिरोबिंदु पर होता है। निरायन सूर्य 21 जून को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है। इसे पृथ्वी पर नमी की मात्रा बढ़ने के रूप में भी देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में 0 डिग्री से लेकर 360 डिग्री तक सारे नक्षत्रों का नामकरण इस प्रकार किया गया है-अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती। 28वां नक्षत्र अभिजीत है। राहु को आर्द्रा नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है। आर्द्रा नक्षत्र के चारों चरण मिथुन राशि में स्थित होते हैं जिसके कारण इस नक्षत्र पर मिथुन राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह बुध का प्रभाव भी रहता है।

इधर, स्थानीय एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. बृजेश कुमार के अनुसार सुपरनोवा विस्फोट के दौरान विशाल ऊर्जा के विकिरण से इसकी चमक कुछ समय के लिए काफी अधिक बढ़ जाएगी। इसके बाद यह यात्रि में कुछ समय के लिए आसमान में सूर्य व चंद्रमा के बाद तीसरे सबसे अधिक चमकते हुए तारे के रूप में नजर आयेगा। यह अवधि एक-दो माह से चार माह तक की हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार बेटेल्गयूज मृग तारा समूह का 10 मिलियन वर्ष से कम पुराना तारा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके आकार के फैलने का सिलसिला लगभग 40 हजार साल पहले शुरू हो चुका था, जो अब विशाल आकार ले चुका है। इस तारे के बारे में वैज्ञानिकों को 1836 में पता चला था। तभी से इस तारे में वैज्ञानिक नजर रखे हुए हैं। यूरोपियन सदर्न आब्जर्वेटरी की वेरी लार्ज टेलीस्कोप इस पर नजर रखी जा रही है। इसके विस्फोट को लेकर निश्चित समय का आंकलन अभी नहीं किया जा सकता है।
बताया गया है कि किसी विशाल तारे में इस तरह का महाविस्फोट इससे पूर्व वर्ष 1006, 1054 व 1572 ईसवी सन मंे एवं आखिरी विस्फोट 1604 ईसवी सन में हुआ था। इसलिए सैकड़ों वर्षों में होने वाली इस दुर्लभ खगोलीय घटना को लेकर वैज्ञानिक काफी रोमांचित हैं। बेटेल्गयूज के विस्फोट से वैज्ञानिकों को पता चल सकेगा कि विस्फोट से पूर्व तारे की स्थिति क्या होती है। जिससे इस तरह के तारों के अंत समय की स्थिति के साथ आगे के अध्ययन में आसानी हो जाएगी।

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-14 जनवरी 2019 को हुए विशाल गामा किरणों के विष्फोट का देश के 20 देशों के वैज्ञानिकों के साथ किया स्पेन और पुणे की दूरबीनों से सफल प्रेक्षण
नवीन समाचार, नैनीताल, 20 नवंबर 2019। एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के दो वैज्ञानिकों डा. शशिभूषण पांडे एवं डा. कुंतल मिश्रा का शोध पत्र एक बार पुनः दुनिया की शीर्ष विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ पत्रिका के नवंबर माह के अंक में प्रकाशित हुआ है। दोनों वैज्ञानिकों का यह शोध पत्र ब्रह्मांड के सबसे बड़े-गामा किरणों के विष्फोट से संबंधित है, जिसका उन्होंने भारत के आईआईएसटी त्रिवेंद्रम की डा. एल रेसमी व उनके साथियों के साथ स्पेन और पुणे की दूरबीनों से गत 14 जनवरी 2019 को सफल प्रेक्षण किया।
बुधवार अपराह्न स्थानीय एरीज में आयोजित पत्रकार वार्ता में निदेशक डा. वहाब उद्दीन एवं डा. शशि भूषण पांडे व डा. कुंतल मिश्रा ने पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। बताया कि 14 जनवरी को 22 सेकेंड के लिए गामा किरणों का विस्फोट जीआरबी 190114सी हुआ था। दुनिया के 20 देशों के वैज्ञानिक भी इसका प्रेक्षण कर रहे थे। बताया कि जीआरबी विस्फोट ब्रह्मांड के सर्वाधिक बड़े व भयावह विस्फोट होते हैं। गामा किरणों सबसे शक्तिशाली तरंगे होती हैं जो कि किसी लोहे के 26 इंच मोटे से मोटे कोलम से भी पार हो जाती हैं। इनकी तरंगदैर्ध्य परमाधु के आकार से भी छोटी होती है। लिहाजा ये इतनी घातक होती हैं कि परमाणु को भी अपनी ताकत से खत्म कर सकती हैं। यदि इनका रुख कभी किसी कारण पृथ्वी की ओर हो जाए तो इससे होने वाले नुकसान की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए वैज्ञानिक इनके अध्ययन में जुटे हुए हैं। हालांकि 14 जनवरी को रिकार्ड हुआ गामा किरणों का विस्फोट ब्रह्मांड में पृथ्वी से 4.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर हुआ था। इससे पूर्व भी डा. पांडे व डा. मिश्रा का इससे अपेक्षाकृत छोटा जीआरबी 160625बी के विस्फोट का शोध भी नेचर पत्रिका में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने बताया कि ऐसे विस्फोट ब्रह्मांड में हर रोज करीब एक होते रहते हैं।

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-धनतेरस की पिछली शाम वाशिंगटन से हुई है न्यूट्रॉन स्टार्स के टकराने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलने की पहली बार घोषणा, एरीज के वैज्ञानिकों की भूमिका भी रही है इस खोज में
-इस खोज में एरीज के वैज्ञानिक डा. शशि भूषण पांडे और डा. कुंतल मिश्रा भी रहे हैं शामिल
-इसी माह ब्लेक होल्स के आपस में टकराने से संबंधित एक अन्य खोज पर मिला है इस वर्ष का नोबल पुरस्कार
नैनीताल। महान वैज्ञानिक आंइस्टीन ने अपने जीवन काल में पृथ्वी से करीब 13 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर अंतरिक्ष में होने वाली एक ‘बड़ी दीपावली’ की ओर सैद्धांतिक तौर पर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि दो ‘न्यूट्रॉन स्टार्स’ के आपस में टकराने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलती हैं, जोकि ‘स्पेस टाइम’ यानी अंतरिक्ष के समय की गणना को प्रभावित करती हैं। पहली बार वैज्ञानिकों ने आइंस्टीन की इस मान्यता की उपकरणों की मदद से पुष्टि कर दी है। बीती 16 अक्टूबर यानी धनतेरस की पिछली शाम अमेरिका के वाशिंगटन डीसी से इसकी घोषणा की गयी। गर्व करने वाली बात है कि इस सफलता में भारत और नैनीताल के एरीज के वैज्ञानिकों की भी भूमिका रही है। एरीज के दो वैज्ञानिक डा. शशि भूषण पांडे और डा. कुंतल मिश्रा भी इस परियोजना के अंतर्गत एक खास तरह की गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज में शामिल रहे हैं। खास बात यह भी है कि ऐसी ही एक अन्य खोज, जिसमें इसी तरह दो ‘ब्लेक होल्स’ के आपस में टकराने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलने की पुष्टि हुई है, पर इसी माह इस वर्ष यानी 2017 का विज्ञान का दुनिया का सबसे बड़ा नोबल पुरस्कार दिया गया है। आगे एरीज में स्थापित एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की ‘देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप’ यानी ‘डॉट’ में भी इस सफलता की मुख्य सूत्रधार उपकरण ‘लाइगो’ के लगने की संभावना है, जिसके बाद एरीज इस दिशा में और अधिक बेहतर परिणाम दे सकता है।
इस संबंध में मंगलवार को एरीज के निदेशक डा. अनिल कुमार पांडेय ने पत्रकार वार्ता कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। बताया कि न्यूट्रॉन स्टार्स तारों के जीवन पूरा होने के बाद शेष बचे अत्यधिक घनत्व वाले करीब 20 किमी व्यास के पिंड होते हैं। ये इतने भारी होते हैं कि इनकी एक चम्मच भर सामग्री माउंट एवरेस्ट से अधिक भारी होती है। इनके टकराने के बारे में अध्ययन लेजर तकनीक आधारित ‘अमेरिकी लेजर इंटरफेरमीटर गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला’ यानी लाइगो डिटेक्टर कहे जाने वाले उपकरणों से ही संभव होता है। यह लाइगो डिटेक्टर भारत में पुणे स्थित जॉइंट मीटर वेभ रेडियो टेलीस्कोप और लद्दाख स्थित हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप में लगे हैं। इनकी मदद से ही एरीज के दोनों वैज्ञानिकों ने इस खोज को करने में अपना योगदान दिया है। इनके अवलोकन में वैज्ञानिक सूर्य के द्रव्यमान के 1.1 से 1.6 गुना तक भारी इन खगोलीय पिंडों को 100 सेकेंड तक न्यूट्रॉन स्टार्स के रूप में चिन्हित कर सके। इनके टकराने से गामा किरणों का फ्लैश यानी एक तीव्र प्रकाश उत्पन्न हुआ जो पृथ्वी की कक्षाओं के उपग्रहों के द्वारा गुरुत्वाकर्षण तरंगों के आगमन के सापेक्ष दो सेकेंड तक देखा गया। यह इस बात का पहला निर्णायक प्रमाण है कि अक्सर उपग्रहों से नजर आने वाला अल्प अवधि का गामा विकीरण विस्फोट वास्तव में न्यूट्रॉन स्टार्स के टकराने से उत्पन्न होता है। इसका अनुमान एक शताब्दी पूर्व आइंस्टीन से लगाया था। इससे इस बात के संकेत भी मिले हैं कि गामा विकीरण के शक्तिशाली विस्फोटों से प्राप्त विलयनों में लोहे से ज्यादा घनत्व वाले सोना और सीसा जैसे तत्वों की 50 फीसद से अधिक मात्रा होती है। लिहाजा इस खोज से एरीज के वैज्ञानिकों में हर्ष की लहर है, और इसे मील का पत्थर और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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जर्मनी में कल की रात चांद ने यूं दिखाया रंग
जर्मनी में कल की रात चांद ने यूं दिखाया रंग

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2019। मंगलवार 19 फरवरी को भारतीय परंपरा के अनुसार माघ पूर्णिमा की रात आसमान में चांद कुछ खास स्वरूप में नजर आया। स्थानीय एरीज के खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार आज का चांद आम दिनों के मुकाबले 14 फीसद बड़ा और 30 फीसद अधिक चमकीला नजर आया। वैज्ञानिकों के मुताबिक पूर्णिमा के दिन चांद के के अपनी कक्षा में पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए पृथ्वी के अपेक्षाकृत सबसे करीब आ जाने के कारण इसका आकार और रोशनी आम पूर्णिमा के चांद के मुकाबले काफी अधिक हो जाती है और इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘सुपर स्नो मून’ कहा जा रहा है। सरोवरनगरी में बादलों की लुका-छिपी के बीच इसे खुली आंखों से देखा गया। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह खास मौका रहा। बताया गया कि आगे ऐसा नजारा 2555 दिनों यानी करीब सात साल बाद 2026 में दिखाई देगा।
वैज्ञानिकों ने नासा के हवाले से बताया कि रात्रि 9 बजकर 23 मिनट पर चांद अपने सबसे बड़े व चमकीले बिहंगम स्वरूप में नजर आया, जब सूर्य चांद के ठीक 180 डिग्री यानी उल्टी दिशा में रहा होगा। बताया गया है कि फरवरी के माह में ऐसे बड़े व चमकीले दिखने वाले चांद को कई संस्कृतियों में सुपरमून तो दुनिया के कुछ देशों में इस खगोलीय घटना को स्ट्रॉम मून, हंगर मून व बोन मून भी कहा जाता है। इस दौरान समुद्री क्षेत्रों में आने वाले कुछ दिनों में ज्वार की स्थिति आने और ज्यादा ऊंची लहरें उठने की भी आशंका जताई जा रही है।

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वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मार्स इनसाइट लैंडर यान सफलतापूर्वक मंगल की सतह पर उतारा गया। भारतीय समयानुसार सोमवार-मंगलवार की रात करीब 1:24 बजे इसे मंगल पर लैंड कराया गया। इनसाइट लैंडर यान को मंगल की रहस्यमयी दुनिया के बारे में जानकारी के लिए बनाया गया।वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मंगल ग्रह के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में मददगार होगा। इससे पृथ्वी से जुड़े नए तथ्य पता लगने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

inside lander

जानकारी के मुताबिक, इनसाइट के लिए मंगल पर लैंडिंग में लगने वाला छह से सात मिनट का समय बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान इसका पीछा कर रहे दोनों सैटेलाइट्स के जरिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजर इनसाइट लैंडर पर रहीं। इन दोनों सैटेलाइट्स का नाम डिज्नी के किरदानों पर रखा गया है- ‘वॉल ई’ और ‘ईव’। दोनों सैटेलाइट्स ने आठ मिनट में इनसाइट के मंगल पर उतरने की जानकारी धरती तक पहुंचा दी। नासा ने इस पूरे मिशन का लाइव कवरेज किया। इनसाइट से पहले 2012 में नासा के क्यूरियोसिटी यान ने मंगल पर लैंडिंग की थी।

मार्स इनसाइट लैंडर यान कैसे काम करेगा 
नासा का यह यान सिस्मोमीटर की मदद से मंगल की आंतरिक परिस्थितियों का अध्ययन करेगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि मंगल ग्रह पृथ्वी से इतना अलग क्यों है।

इनसाइट लैंडर की खासियत

  • इनसाइट का पूरा नाम ‘इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस’
  • मार्स इनसाइट लैंडर का वजन 358 किलो
  • सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाला यान
  • 26 महीने तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया
  • कुल 7000 करोड़ का मिशन
  • इस मिशन में यूएस, जर्मनी, फ्रांस और यूरोप समेत 10 से ज्यादा देशों के वैज्ञानिक शामिल
  • इसका मुख्य उपकरण सिस्मोमीटर (भूकंपमापी) है, जिसे फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी ने बनाया है। लैंडिंग के बाद ‘रोबोटिक आर्म’ सतह पर सेस्मोमीटर लगाएगा।
  • दूसरा मुख्य टूल ‘सेल्फ हैमरिंग’ है, जो ग्रह की सतह में ऊष्मा के प्रवाह को दर्ज करेगा।
  • इनसाइट की मंगल के वातावरण में प्रवेश के दौरान अनुमानित गति 12 हजार 300 मील प्रति घंटा रही।
  • इनसाइट प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रूस बैनर्ट का कहना है कि यह एक टाइम मशीन है, जो यह पता लगाएगी कि 4.5 अरब साल पहले मंगल, धरती और चंद्रमा जैसे पथरीले ग्रह कैसे बने।

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-सूर्य पर धरती की ओर उभरा 8 लाख किमी चौड़ा ‘कोरोनल होल’ से खतरे की आशंका
-एरीज के सौर वैज्ञानिक के अनुसार सूर्य पर फिलहाल कोई सौर ज्वालाएं नहीं हैं
नवीन जोशी, नैनीताल। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूर्य के धरती की ओर की सतह पर बुधवार को आठ लाख किमी चौड़ा ‘कोरोनल होल’ यानी एक तरह का गड्ढा उभरने का दावा किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इससे 2 विशाल जी-1 श्रेणी की सौर ज्वालाएं रिकॉर्ड की गयी हैं। नासा ने आशंका जताई है कि इन विशाल सौर ज्वालाओं की वजह से उठा ‘सौर तूफान’ धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकरा सकता है। इसके नतीजे काफी बुरे हो सकते हैं। इसके धरती के वायुमंडल से टकराने की वजह से उपग्रह अव्यवस्थित हो सकते हैं। इसकी वजह से व्यवसायिक उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं, और जीपीएस सिस्टम भी अव्यवस्थित हो सकता है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि इसकी वजह से दुनिया के अनेक हिस्सों में बिजली भी गुल हो सकती है।
अलबत्ता, एरीज के वरिष्ठ सौर वैज्ञानिक डा. वहाबउद्दीन का ‘कोरोनल होल’ के उभरने की बात को स्वीकार करते हुए इससे इतर कहना है कि इन दिनों सूर्य अपने 11 वर्ष के सौर सक्रियता चक्र में शांत स्थिति में है, और सौर सक्रियता अपने न्यूनतम स्तर पर है। उनका कहना है कि कोरोनल होल की वजह से काफी सौर हवाएं आ सकती हैं। हो सकता है कि इसकी तीव्रता अधिक हो, किंतु सूर्य पर काफी समय से कोई बड़ी सौर ज्वाला और कोई सौर धब्बा नजर नहीं दिखी है।

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अखबारों की पीडीएफ कॉपी बनाना व सोशल मीडिया पर फैलाना अवैध, हो सकती है कार्रवाई : आईएनएस

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2020। लॉकडाउन के दौर में समाचार पत्र लोगों के घरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। समाचार पत्रों के कोरोना संक्रमण पर भी पाठकों में संशयपूर्ण स्थिति बनी है। ऐसे में अनेक समाचार पत्रों ने पहले स्वयं ही अपने ह्वाट्सएप वर्जन-पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किये और अपने संवाददाताओं एवं … Read more

कब खत्म होगा कोरोना, ‘लाइफ साइकिल कर्व्स’ से किया जा रहा है दावा

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2020। पिछले एक माह से भी अधिक समय से लॉक डाउन में घरों पर सिमटे देश-विश्व वासियों को एक ही यक्ष प्रश्न कुरेद रहा है कि कोरोना की यह महामारी कब खत्म होगी। ऐसे में एक वेबसाइट सामने आई है जो ‘लाइफ साइकिल कर्व्स’ के आधार पर शिक्षा एवं शोध … Read more

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नैनीताल: भारी बारिश के बीच कार पर गिरा मलबा, कार कबाड़ में तब्दील…April 1, 2023 हजारों श्रद्धालुओं ने कैंची धाम में दर्शनों से की नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत, बिना पर्व उमड़े 15 हजार श्रद्धालु..April 1, 2023 उत्तराखंड : बहुचर्चित प्रश्न पत्र लीक मामले में 50 हजार रुपए का ईनामी पूर्व भाजपा नेता गिरफ्तारApril 1, … Read more

नैनीताल के हरदा बाबा-अमेरिका के बाबा हरिदास

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अप्रैल 2023। (Harda Baba of Nainital – Baba Haridas of America) सरोवरनगरी नैनीताल का साधु-संतों से सदियों से, वस्तुतः अपनी स्थापना से ही अटूट रिस्ता रहा है। इस नगर का पौराणिक नाम ‘त्रिऋषि सरोवर’ ही इसलिये है, क्योंकि इसकी स्थापना सप्तऋषियों में गिने जाने वाले तीन ऋषियों … Read more

नैनीताल : जिन्हें संदिग्ध समझकर दौड़ा पुलिस-प्रशासन, निकले अपने ही मजदूर

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2020। सरोवरनगरी में सुबह तड़के कुछ संदिग्ध देखे जाने से हड़कंप मच गया। इनमें से करीब सात लोग सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो गए। बताया गया कि यह लोग नगर की अपेक्षाकृत कम आवाजाही वाली ठंडी सड़क के रास्ते तल्लीताल से मल्लीताल आये और नैना देवी मंदिर के पास … Read more

केंद्रीय मंत्री ने जल संरक्षण पर दृष्टिकोण बदलने का दिया मंत्र..

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न्यू मीडिया (इंटरनेट, सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग आदि) : इतिहास और वर्तमान

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

न्यू मीडिया-New Media डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल। आज का दौर ‘न्यू मीडिया’ का है। वह दौर गया जब समाचारों को जल्दी में लिखा गया इतिहास कहने के साथ ही ‘News Today-History Tomorrow’ कहा जाता था, अब तो ‘News This Moment-History Next Moment’ का दौर है। बिलों को जमा करने, नौकरी-परीक्षा के फॉर्म … Read more

उत्तराखंड : अपनों के ही लाये ‘विशेषाधिकार प्रस्ताव’ से सदन में मंत्री जी

नवीन समाचार, देहरादून, 6 दिसंबर 2019। गलत सूचना देकर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सल्ट (अल्मोड़ा) से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ले आए। जीना के इस प्रस्ताव से सत्ता पक्ष असहज हो गया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने … Read more

11 साल के बच्चे ने गुब्बारे उड़ाकर बना दी ऐसी बाइक, जो हवा से चलकर करती है हवा से बातें..

नवीन समाचार, देहरादून, 6 दिसंबर 2019। जी हां, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सेंट कबीर अकादमी में कक्षा छह में पढ़ने वाले 11 साल के बच्चे अद्वैत ने एक ऐसी ‘अद्वैत-ओटू’ नाम की बाइक को बृहस्पतिवार को प्रेस के सामने प्रदर्शित किया, जो किसी ईधन की जगह हवा से चलती है। राजधानी के हर्रावाला निवासी … Read more

नैनीताल समाचार : नगर पालिका के एक पर्यावरण मित्र कर्मी की संदेहास्पद मृत्यु

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अक्तूबर 2019। बुधवार रात्रि नगर में नगर पालिका के एक पर्यावरण मित्र कर्मी की संदेहास्पद तरीके से मृत्यु हो गई। मल्लीताल कोतवाली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 40 वर्षीय बिजेंद्र पुत्र स्वर्गीय सुंदर लाल अपने घर में सोया था। सोते हुए ही वह अचेत हो गया। इस पर परिजन उसे … Read more

उत्तराखंड की पहाड़ियों में 3 अक्तूबर से होगा भारत-कजाकिस्तान की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास

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American armyनवीन समाचार, नैनीताल, 27 सितंबर 2019। भारत तथा कज़ाकिस्तान की सेनाओं के संयुक्त सेैन्य अभ्यास ‘काज़िंद-2019’ का आयोजन 3 अक्टूबर 2019 से 15 अक्टूबर 2019 के बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में किया जायेगा। दोनों देषों के 100 सैनिकों की टुकड़ी इस संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगी। इस दौरान वे विभिन्न सैन्य ऑपरेशनों एवं आतंकवाद विरोधी जवाबी कार्रवाई के अनुभवों को एक दूसरे से साझा करेगें। शुक्रवार को प्रेस को जारी विज्ञप्ति के जरिये सेना की प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास काज़िंद-2019 एक वार्षिक कार्यक्रम है जो दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। कज़ाकिस्तान के साथ आयोजित होने वाले इस सैन्य अभ्यास को वैश्विक आतंकवाद के बदलते परिदृष्य में एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास बताया गया है। कंपनी स्तर पर आयोजित होनेवाले इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रांे में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों को अंजाम देना है। सैन्य अभ्यास के दौरान वैश्विक आतंकवाद और हाइब्रिड युद्ध के उभरते रूझानों के विभिन्न पहलुओं को वर्तमान समय के साथ-साथ वैश्विक परिदृष्यों में समकालीन प्रभावों के कारण भी शामिल किया गया है। साथ ही उम्मीद जताई गई है कि यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा सहयोग को बढ़ाने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ बनाने में मददगार सिद्ध होगा।

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-अमेरिकी जनरल ने जताई भारतीय सेना के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करने की चाह

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, रानीखेत, 29 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास-2018 का शनिवार को एक भव्य समारोह के साथ चौबटिया (उत्तराखंड) में समापन हो गया। इस मौके पर अमेरिकी जनरल ने कहा कि वह पिछले दो सप्ताह से चल रहे प्रक्षिक्षण से काफी संतुष्ट व प्रसन्न हैं। यकीनन भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है और युद्ध अभ्यास 2018 पूरी तरह से सफल सिद्ध हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अमेरिकी सेना भारतीय सेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करना चाहेगी। वहीं सैन्य अभ्यास में शामिल गरुड़ डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल कविंद्र सिंह ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास अति लाभप्रद सिद्ध हुआ है जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में एक साथ काम करने की काबिलियत में सक्षमता हासिल की है।
समापन अवसर पर दोनों देशों की सैन्य दलों ने शानदार परेड की, जिसकी सलामी अमेरिकी सेना के मेजर जनरल विलियम ग्राहम, डिप्टी कमांडिंग जनरल 1 कोर तथा भारतीय सेना से गरुड़ डिवीजन कमांडर मेजर जनरल कविन्द्र सिंह ने संयुक रुप से ली। समुद्र तल से तकरीबन सात हजार फीट की ऊँचाई पर घने जंगलों में पिछले दो सप्ताह से दोनों पक्षों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों जैसे कि रेड, कॉर्डन और खोज-बचाव आदि के लिए अभ्यास किया गया। आतंकवादियों की निगरानी, ट्रैकिंग और पहचान, लड़ाई के लिए विशेषज्ञ हथियार का उपयोग, आईईडी तटस्थ करने और प्रभावी संचार स्थापित करने के लिए कला उपकरणों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। भारतीय व अमेरिकी सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परेड को देखा।
गौरतलब है कि भारतीय सेना की 15 गढ़वाल राइफल्स व अमेरिका से 1-23 इन्फैंट्री रेजीमेंट ने फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास तथा कमांड पोस्ट अभ्यास में भारतीय सेना की गरूड डिवीजन तथा अमेरिकी सेना की सातवीं इन्फैंट्री डिवीजन ने भाग लिया, तथा 14 डोगरा व 13 सिख ने भी दिया।

नैनीताल की खूबसूरती देख लड़ना भूल बैठी अमेरिकी सेना !

नैनीताल, 23 सितंबर 2018। चौबटिया-रानीखेत में भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभयास-2008 के लिए आई अमेरिकी सेना प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की प्राकृतिक खूबसूरती के आकर्षण में ऐसी खोई कि युद्ध और युद्धाभ्यास भूल बैठी। दो वर्ष पूर्व भी नैनीताल आये अमेरिकी सेना के कुछ सैनिकों के दिलो-दिमाग पर शायद नैनीताल की खूबसूरती का ऐसा असर था कि वे पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले रानीखेत और डिलीसियस सेब की नगरी चौबटिया छोड़ रविवार का समय निकालकर नैनीता आ गये और यहां इस दौरान हो रही भारी बारिश के बावजूद अमेरिकी सैनिकों व सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी जनरल विलियम ग्राहम की अगुवाई में नगर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नगर की शान माल रोड के साथ ही नैनी झील, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर और मल्लीताल स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा सहित अनेक अन्य स्थानों पर यहां की खूबसूरत वादियों का लुप्त उठाया और यहां की संस्कृति की झलक भी देखी, तथा इसकी काफी प्रशंसा की। भ्रमण के दौरान भारतीय सेना की ओर से चौबटिया 99 ब्रिगेड के कर्नल हर्ष मिश्रा व अन्य लोग भी उनके साथ रहे। विदित हो रानीखेत चौबटिया में भारत-अमेरिका का 14वां संयुक्त युद्धाभ्यास पिछली 16 सितंबर से चल रहा है जो 29 सितंबर तक चलेगा। संयुक्त युद्धाभ्यास कार्यक्रम में अमेरिकी सेना के 350 सैनिक व सैन्य अधिकारीयो का दल प्रतिभाग कर रहा है। रविवार को वे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने के लिए नैनीताल पहुंचे थे।

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नवीन समाचार, चौबटिया, रानीखेत 16 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2018 का शुरूआती समारोह आज उत्तराखंड के चौबटिया में आयोजित किया गया । इस समारोह की शुरूआत राष्ट्रगान – ‘जन गण मन ….’ एवं ‘द स्टार स्पैन्गल्ड बैनर’ के साथ हुई। इस अवसर पर दोनों देशों के झंडे फहराये गये। भारतीय एवं अमेरिकी सैनिक एक दूसरे के साथ खड़े रहे तथा समारोह के दौरान दोनों देशों के दो वरिष्ठ सैन्यधिकारियों को रस्मी सैल्यूट दिये

Indo American Yuddhabhyas1इस संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की ओर से प्रथम इंफैन्ट्री बटालियन, 23 इंफैन्ट्री रेजिमेन्ट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 7 इंफैन्ट्री डिविजन ने प्रतिनिधित्व किया जबकि भारतीय सेना की ओर से कांगो ब्रिगेड, गरूड़ डिविजन, सूर्या कमान ने प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर गरूड़ डिविजन के जनरल ऑफीसर कमांडिंग ने अमेरिकी सैनिकों का स्वागत किया तथा उन्होंने अपने उद्घाटन भाशण में भारत और अमेरिका की इस प्रकार की साझेदारी को प्रजातंत्र, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय को दोनों देशों के लिए मूल्यवान बताया।

इस दो सप्ताह तक चलनेवाले सैन्य युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना तथा भारतीय सेना के सूर्या कमान की ओर से बराबर संख्या में सैन्य टुकड़ियॉं हिस्सा ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास के दौरान जवाबी एवं आतंकवाद विरोधी कार्रवाईयों से निपटने की उनकी कार्यकुशलता तथा तकनीकी कौशल देखने को मिलेगा। इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं की ओर से निगरानी तथा ट्रेकिंग, उपकरण, आतंकवादियों से निपटने के लिए विशेष हथियारों, विस्फोटक और आईईडी डिटेक्टर्स अथवा नवीनतम संचार उपकरणों का प्रयोग किया जायेगा। दोनों देश संयुक्त रूप से किसी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए एक सुविकसित कुशल ड्लि को अमल में लाकर योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेगें जिसे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए आयोजित ऑपरेशनों में प्रयोग किया जा सके। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ पारस्परिक लाभ हेतु विविध विषयों पर एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने के लिए विचार-विमर्श भी करेगें।

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