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नैनीताल : सब्जियों को नहीं मिल रहे खरीददार, राशन की दुकानों-बैंकों में भी भीड नहीं

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अप्रैल 2020। नगर में शुक्रवार को सब्जियां काफी सस्ते दामों पर बिकी। हालात यह है कि लॉकडाउन से पूर्व तक जहां लोगों की भीड़ को 10 बजे तक आढ़त से हटाना पड़ता था। वहीं इन दिनों सब्जियों के लिए लाइनें बिल्कुल भी नहीं लग रही हैं और आखिर में भी आढ़तियों को सब्जियां वापस ले जानी पड़ रही हैं। अलबत्ता सब्जियों के दाम स्थिर बने हुुए हैं। हरी सब्जियां कम मिल पा रही हैं। जबकि फल महंगे हैं। केले 50 रुपए दर्जन से नीचे नहीं मिल रहे हैं। अलबत्ता आलू 20 रुपया किलो, प्याज 25 रुपया किलो तथा 10 से 20 रुपया किलो टमाटर, 20 रुपया किलो बीन, 20 रुपया किलो कद्दू, 20 रुपया किलो लौकी आदि बिक रही हैं। वहीं बाजारों में सब्जियों की दुकानों में डीएसए मैदान से डेढ़ से दो गुने तक दाम बने हुए हैं। वहीं राशन की दुकानों में भी कोई भीड़ नजर नहीं आ रही है। यहां तक कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में भी खास भीड़ नहीं है। लोग सामाजिक दूरी बनाते हुए खरीददारी कर रहे हैं। नैनीताल क्लब के पास की दुकान पर जरूर अधिक राशन कार्ड जुड़ने से लाइन लग रही है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि लोग पहले ही इकट्ठे सब्जियों की खरीददारी कर चुके हैं। इधर शुक्रवार को प्रधानमंत्री जनधन योजना के खातों में सरकार से धनराशि जमा होने के बाद भीड़ होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसी उल्लेखनीय भीड़ नगर के बैंकों में नजर नहीं आई। अलबत्ता, सुबह एक बजे तक मिली छूट के दौरान कुछ लोग सामाजिक दूरी बरतने में जरूर लापरवाह नजर आ रहे हैं।

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-सोमवार को राशन व पशु चारा भी बेचने का प्रबंध कर सकता है प्रशासन

डीएसए मैदान में प्रशासन द्वारा लगाई गई दुकान में बिना लाइन सामाजिक दूरी बनाते हुए खरीददारी करते लोग।

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 मार्च 2020। कोरोना (कोविड -19) महामारी से लड़ने के लिये लॉक डाउन लगने के बाद से सरोवरनगरी में सब्जियां लेने को लेकर मची मारामारी समाप्त हो गई है। यहां सब्जियां के लिए अचानक लोगों की भीड़ लगने पर सब्जी मंडी को पहले डीएसए मैदान में स्थानांतरित करना पड़ा था। डीएसए मैदान में भी शुरुआती दो दिन सब्जियां लेने के लिए अफरातफरी का माहौल रहा, और लोगों को लंबी लाइनों में लगकर सब्जियां खरीदनी पड़ीं। लेकिन शनिवार को लाइनों में आई कमी के बाद रविवार को लाइन लगनी बंद हो गई। ऐसे में यहां लोगों ने आराम से सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी बनाते हुए खरीददारी की। इस कार्य में एसडीएम विनोद कुमार, तहसीलदार भगवान सिंह चौहान, नगर कोतवाल अशोक कुमार, नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी तथा पुलिस एवं नगर पालिका के कर्मी उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। आगे प्रशासन की ओर से राशन एवं पशु चारा भी मंगवाकर बेचने की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कि डीएसए मैदान में सब्जी आढ़तियों के साथ ही पुलिस-प्रशासन ने भी अपने खर्च पर सब्जियां खरीदकर खरीद की दरों पर ही सस्ती सब्जियां बेचने के लिए स्टॉल लगाया हुआ है। यहां आलू 130 एवं प्याज 150 रुपए का पांच किलो तथा मटर 35 रुपए प्रति किग्रा के भाव से बेची गई। सब्जियां बेचने में भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, भाजयुमो नगर अध्यक्ष विकास जोशी, पूर्व अध्यक्ष मोहित साह आदि स्वयं सेवी योगदान दे रहे हैं। इससे अन्य दुकानों में भी सब्जियां कमोबेश ऐसी ही सस्ती दरों पर उपलब्ध हुईं। अलबत्ता नगर में कुछ लोगों के द्वारा मटर 80 रुपए प्रति किग्रा के भाव तक बेचे जाने की भी चर्चा हो रही है।

राशन बेचने पर व्यापार मंडल में दो फाड़ ! चालान के बाद भी प्रशासन का दे रहे साथ

नैनीताल। नगर में सब्जियां की व्यवस्था तो सुधर गई है, किंतु राशन के मामले में ऐसा नहीं है। मल्लीताल व्यापार मंडल के गत दिनों पुलिस प्रशासन से नाराजगी के बाद बाजार बंद कराने के बाद बाजार में राशन जैसे आवश्यकीय सेवाओं की केवल प्रभु दयाल हरबंश लाल, गर्ग एंड कंपनी व श्याम संुदर पंसारी की दुकानें ही खुल रही थीं। इस पर प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल को भी हस्तक्षेप कर दुकानें खोलने को कहना पड़ा है। इसके बाद प्रभु दयाल हरबंश लाल, गर्ग एंड कंपनी व श्याम संुदर पंसारी के साथ ही गिरीश लाल साह, भुवन चंद्र जोशी, वाहिद, खालिक, सुरेश बवाड़ी एंड कंपनी व पतंजलि स्टोर आदि की दुकानें भी खुलने लगी हैं। लेकिन शेष बाजार बंद ही रह रही है। प्रभु दयाल हरबंश लाल फर्म के सुमित खन्ना ने बताया कि प्रशासन ने गत दिवस गलतफहमी में उनकी दुकानों का चालान भी कर दिया था, बावजूद वे इस नाजुक समय में प्रशासन के साथ हैं, और व्यापार मंडल के रुख से अलग होकर न केवल दुकान खोलकर सामान न्यूनतम दरों में बेच रहे हैं, वरन गरीबों एवं जरूरतमंदों की भरपूर मदद भी कर रहे हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 27 मार्च 2020। महंगी सब्जी बेचने के आरोप में तल्लीताल थाना पुलिस ने तल्लीताल बाजार के सब्जी विक्रेता आदित्य साह के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत अभियोग पंजीकृत कर दिया है। तल्लीताल थाना प्रभारी विजय मेहता ने बताया कि जिला पूर्ति निरीक्षक राहुल डांगी की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। श्री डांगी ने पुलिस को सूचना दी थी कि सब्जी विक्रेता आदित्य साह के द्वारा तल्लीताल बाजार में फल व सब्जियों को बाजार भाव से अत्यधिक ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है, जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 26 मार्च 2020। बृहस्पतिवार सुबह पुलिस व व्यवसायियों के बीच हुए तनाव से प्रशासन द्वारा नगर के बड़े डीएसए फ्लैट्स मैदान में सब्जी बेचने के लिए की गई व्यवस्था पर पलीता लग गया। यहां सब्जियों की गाड़ियां आई भीं, लेकिन व्यवसायियों-आढ़तियों ने इन्हें खरीदकर बेचने से इंकार कर दिया। इस पर अजीबो-गरीब स्थितियां उत्पन्न हो गईं। लंबी लाइनों में खड़े लोग भी इस पर आक्रोशित हो गए। उन्होंने व्यापार मंडल अध्यक्ष से भी बात की, लेकिन वे बिना समाधान किए चले गए। इसके बाद पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों ने स्वयं पैंसे मिलाकर गाड़ियों में रखी सब्जियां खरीदीं और नगर के स्वयं सेवी युवाओं के माध्यम से आम जनता को उपलब्ध कराईं। इस दौरान केवल आलू, प्याज, मटर व हरी धनिया ही उपलब्ध कराई जा सकीं। सब्जियों की कम उपलब्धता के कारण लोगों के लिए लाइन में दूर खड़े होने के लिए बनाई गई व्यवस्था ध्वस्त हो गई, और लोग एक दूसरे से सटकर खरीददारी करते देखे गए। फिर भी सुबह नौ बजे तक ही सारी सब्जियां बिक गईं, कई मौजूद लोगों को सब्जियां नहीं मिल पाईं। ऐसे में अनेक लोगों को बिना सब्जियां लिए लौटना पड़ा। ऐसे में कई लोग मल्लीताल बाजार स्थित सब्जी की दुकानों पर आ गये। यहां भी सब्जियां खरीदने के लिए भारी जमावड़ा दिखा। वहीं राशन आदि की बेहद सीमित दुकानें ही खुलीं, और उन्होंने बाहर से खाद्यान्न न आने की बात कह सामान समाप्त होने की बात कही।
खाद्यान्न-सब्जियां लाने वाले वाहनों पर कोई रोक नहीं, आगे होम डिलीवरी की तैयारी
नैनीताल। इधर एसडीएम विनोद कुमार ने साफ किया कि खाद्यान्न एवं सब्जियां लाने वाले वाहनों पर कभी भी रोक नहीं है। एसडीएम विनोद कुमार ने सब्जी आढ़तियों, स्वयं सेवियों से कई बैठकें कीं और शुक्रवार से व्यवस्थाएं बेहतर होने का विश्वास जताया। कहा कि सब्जियों की दरें भी सार्वजनिक की जाएंगी। वहीं मल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष किशन सिंह नेगी ने मल्लीताल कोतवाल अशोक कुमार सिंह पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बीती रात्रि बेवजह एक आढ़ती को उसके घर के पास पीटा। वे बाजार में अन्य लोगों से भी बेवजह बदतमीजी कर रहे हैं। इसलिए उनके द्वारा माफी मांगने की मांग रखी गई है। वहीं यह पूछने पर कि व्यापारी ऐसे नाजुक समय में अपनी दुकानें बंद कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि बाहर से आपूर्ति में समस्या है। अलबत्ता उन्होंने कहा कि शुक्रवार को सात नंबर एवं शनिवार को सूखाताल में वाहनों से सब्जियांे की आपूर्ति की जाएगी। इसी तरह आगे अन्य इलाकों में भी सब्जियां पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

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-डीएसए मैदान में लगेगी सब्जी मंडी, आदेश जारी

Cricket Match in Flats Nainital -1899

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 मार्च 2020। कोरोना विषाणु के संक्रमण को देखते हुए मुख्यालय में सब्जी मंडी का संचालन अगले आदेशों तक मल्लीताल सब्जी मंडी वर्तमान रामलीला मैदान के स्थान पर नगर के ऐतिहासिक डीएसए-फ्लैट्स मैदान में लगेगी। एसडीएम विनोद कुमार ने बुधवार को नोवल कोरोना विषाणु के संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु आढ़तियों एवं उपभोक्ताओं की भीड़भाड़ को देखते डीएसए मैदान का अधिग्रहण कर आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही तल्लीताल की मंडी तल्लीताल डांठ पर लगेगी। उल्लेखनीय है कि कोरोना के संक्रमण बढ़ने के बाद मौजूदा मंडी स्थल में उपभोक्तओं एवं विक्रेताओं की भीढ़ बढ़ने के कारण ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ के प्रयास निष्प्रभावी हो रहे थे। इसी कारण मंडी का स्थल बदला गया है। एसडीएम विनोद कुमार ने कहा कि आगे सब्जियों की नगर में आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही भीड़भाड़ रोकने के दृष्टिकोण से प्रमुख खाद्यान्नों की बिक्री का प्रबंध भी डीएसए मैदान में करने पर भी विचार किया जा रहा है।

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सिर्फ तीन घंटे की छूट पड़ सकती है कोरोना पर भारी, भीड़ में लोग नहीं रख पा रहे सोशल डिस्टेंसिंग का खयाल
नवीन समाचार, नैनीताल, 25 मार्च 2020। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देश 21 दिन के ‘लॉक डाउन’ पर है। संकल्प मजबूत है-कोरोना को हराना है, किसी भी हाल में रोड पर नहीं जाना है। लेकिन प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी से इस अभियान की सफलता पर पूरा विश्वास नहीं हो रहा। लॉक डाउन के दूसरे दिन ही, सुबह के एक घंटे में ही जिला-मंडल मुख्यालय नैनीताल की मंडी से सब्जी गायब हो गयी है। नौ बजे तो पूरी मंडी ही उठ चुकी थी। बताया गया कि प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद अति सक्रिय हुई पुलिस की सख्ती की वजह से आज केवल हल्द्वानी व गांवों से एक-एक पिकप सब्जी ही आई और कुछ ही देर में बिक गई।
इसके अलावा भी बाजार में चीनी नहीं है। 45-60 रुपए से सस्ता चावल उपलब्ध नहीं है। आटा भी खत्म होने को है। साथ ही दुकानों में पहले से मौजूद अन्य खाद्य सामग्री भी खत्म हो रही है, और दुकानदार कह रहे हैं आगे कोई सामान आने की उम्मीद भी नहीं है। पुलिस का खौफ सुबह 7 से 10 बजे की अनुमन्य समय सीमा के दौरान भी दुकानदारों पर दिख रहा है। आवश्यक सामग्री के दुकानदार भी दुकानें नहीं खोल रहे या दुकान का छोटा हिस्सा की खोलकर सामान दे रहे हैं। इससे राशन ही नहीं दवाइयों की दुकानों पर भी भारी भीड़ इकट्ठा हो रही है, और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के आह्वान तथा कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ को पलीता लगा रही है। इस बारे में पूछे जाने पर जिला पूर्ति अधिकारी मनोज वर्मन ने कहा कि अप्रैल माह में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की यानी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में खाद्यान्न की आपूर्ति सुचारू की जा रही है। इसके साथ ही बाजारों की दुकानों में भी आपूर्ति सुचारू करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपूर्ति में व्यवधान पहुंचाने एवं आगे सामग्री न आने की अफवाह फैलाने वाले दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में सुबह सात से 10 बजे तक ही खुलेंगी आवश्यक वस्तुओं की दुकानें…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 मार्च 2020। नैनीताल शहर में मेडिकल स्टोर दिन में पूरे 24 घंटे जबकि आवश्यक वस्तुओं यानी राशन आदि की दुकानें एवं मल्लीताल स्थित सब्जी मंडी सुबह सात बजे से सुबह 10 बजे तक खुलेगी। इनके अलावा कोई भी दुकानें, रेस्टोरेंट आदि किसी भी स्थिति में नहीं खोले जाएंगे। सोमवार को पुलिस-प्रशासन एवं नगर के व्यापार मंडल अध्यक्षों के बीच हुई वार्ता के बाद यह निर्णय लिया गया है। 
यह भी तय किया गया कि दूध अधिकृत विक्रेताओं के द्वारा ही बेचा जाएगा। सभी दुकानदारों को मास्क एवं सैनिटाइजर का अनिवार्य रूप से प्रयोग करना होगा तथ आवश्यक वस्तुएं, खाद्यान्न एवं सब्जी आदि निर्धारित मूल्य पर हीे बेचेंगे। निर्धारित से अधिक मूल्य पर बिक्री करने पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति आवश्यक वस्तुओं के नाम पर अन्य वस्तुओं की बिक्री नहीं करेंगे। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में एसडीएम विनोद कुमार, एएसपी राजीव मोहन, सीओ विजय थापा, तल्लीताल थानाध्यक्ष विजय मेहता, मल्लीताल व्यापार मंडल किशन नेगी व तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन लाल साह मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : बाजारों में 25 तक स्वैच्छिक बंदी का ऐलान, सब्जी व राशन की दुकानों तथा मेडिकल स्टोरों को बंद से छूट

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 मार्च 2020। नगर के मल्लीताल व्यापार मंडल ने रविवार 22 मार्च से 25 तक नगर की बाजारों को स्वैच्छिक रूप से बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस बारे में शनिवार दोपहर से बाजारों में मुनादी भी करवा दी गई है। व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष कमलेश ढोंढियाल ने बताया कि 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर सभी प्रतिष्ठान ‘जनता कर्फ्यू’ के तहत बंद रहेंगे, जबकि 23 से 25 तक आवश्यक वस्तुओं के अंतर्गत सब्जी व राशन की दुकानों तथा मेडिकल स्टोरों को बंद से छूट देने की बात कही गयी है। वहीं अध्यक्ष किशन नेगी ने कहा कि बंदी स्वैच्छिक आधार पर रहेगी। दुकानें बंद करने के लिए किसी तरह की जबर्दस्ती नहीं की जाएगी। वहीं तल्लीताल व्यापार मंडल के अंतर्गत दुकानों को 22 मार्च को पूर्णतया बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

यह भी पढ़ें : सेनिटाइजर को लेकर ग्राहक की बदजुबानी पर बेमियादी बंद हुई तल्लीताल बाजार, हंगामा..

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2020। नगर के तल्लीताल बाजार में एक प्रतिष्ठान में शुक्रवार शाम एक ग्राहक द्वारा की गई बदजुबानी पर नगर के व्यापारियों में उबाल आ गया। व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। रात्रि में काफी देर तक हंगामा चला। व्यापारियों ने आगे ग्राहक के मांफी मांगने तक बाजार बंद रखने, और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व रजिस्ट्रार जनरल से शिकायत करने की बात कही है।
नगर के तल्लीताल क्रांति चौक स्थित आयुष्मान नाम के प्रतिष्ठान के स्वामी ने बताया कि शुक्रवार देर शाम एक बच्चा उनके प्रतिष्ठान पर आकर 348 रुपए में सेनिटाइजर ले गया और बाद में पसंद नहीं आया कहकर उसे वापस कर गया। उसे खुले न होने के कारण 350 रुपए लौटाए गए। इसके कुछ देर बाद ही एक व्यक्ति प्रतिष्ठान में आए और आते ही गाली-गलौज करने लगे। उनका कहना था कि इसी सेनिटाइजर की ऑनलाइन कीमत कम है। उन्होंने बिल दिखाने को कहा और बिल देखने से पहले ही उन्होंने पुलिस को फोन कर दिया कि इन्हें गिरफ्तार करो। लेकिन जब उन्हें बिल दिखाया गया तो वे चले गए। जीएसटी युक्त बिल में सेनिटाइजर की एमआरपी 348 रुपए ही अंकित थी। उनके जाने के बाद पुलिस आ गई और उधर तल्लीताल व्यापार मंडल के सारे व्यापारी भी बाजार बंद कर एकत्र हो गए। पुलिस के अधिकारियों को भी वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया। व्यापारियों ने कहा कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति जब तक अपने आरोप वापस नहीं लेंगे और अपनी बदजुबानी पर मांफी नहीं मांगेंगे, तब तक वे बाजार बंद रखेंगे। इस पर पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष मारुति नंदन साह ने कहा कि इस मुद्दे पर नगर के तल्लीताल व मल्लीताल व्यापार मंडल तथा नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन एक साथ हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व रजिस्ट्रार जनरल से शिकायत की जाएगी।

यह भी पढ़ें : नाव-घोड़े, चाट पार्क, तिब्बती-भोटिया मार्केट, नयना देवी मंदिर भी बंद…

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2020। नगर पालिका नैनीताल ने शुक्रवार को नगर में पर्यटन से जुड़े घोड़ों व नावों का संचालन बंद कर दिया है। इसके साथ ही चार्ट पार्क व भोटिया मार्केट बंद करने की मुनादी भी करवा दी गई है। वहीं नगर के तिब्बती शरणार्थी समुदाय के लोगों ने स्वयं ही अपनी संकरी व नगर की खरीददारी के लिए प्रसिद्ध तिब्बती मार्केट को बंद कर दिया है। नगर पालिका की कर अधीक्षक लता आर्य ने अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा के हवाले से बताया कि नगर के कोरोना संक्रमण के विभिन्न संभावित क्षेत्रों-तल्लीताल, मल्लीताल बाजार व बारापत्थर घोड़ा स्टेंड एवं शौचालयों में संक्रमण रोधी दवा का छिड़काव कर दिया गया है। पूछे जाने पर बताया कि समस्त पर्यावरण मित्रों को सेनिटाइजर, ग्लब्स व मास्क भी दे दिये गए हैं।
इधर शुक्रवार को डीएम सविन बंसल ने कोरोना के दृष्टिगत जनपद के सभी मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारों व चर्च आदि के धर्मगुरूओं से शुक्रवार सुबह अपील की थी कि कोरोना विषाणु के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भीड़-भाड़ या किसी भी जमावड़े को टालें या सम्भव हो सके तो स्थगित करें। इसका कुछ असर भी हुआ। बताया गया कि नगर की मुख्य जामा मस्जिद में अन्य दिनों के मुकाबले काफी कम लोग जुमे की नमाज अदा करने पहुंचे और उनमें से कई से मास्क भी लगाए हुए थे। इधर नगर की आराध्य देवी माता नयना के प्रसिद्ध मंदिर को लोगों को कोरोना से बचाने के उद्देश्य से शनिवार सुबह से बंद करने की घोषणा कर दी गई है। मंदिर के मुख्य ट्रस्टी राजीव लोचन साह ने बताया कि आज कार्यकारिणी की बैठक में इस बारे में निर्णय लिया जा जा रहा है।

‘पैनिक खरीददारी’ के दृष्टिगत प्रशासन ने की बाजारों में छापेमारी

नैनीताल। नगर के बाजारों व सब्जी मंडी में कोरोना विषाणु के भय के दृष्टिगत लोगों द्वारा बड़ी मात्रा में की जा रही ‘पैनिक खरीददारी’ की सूचना पर एसडीएम विनोद कुमार व सीओ विजय थापा ने डीएसओ मनोज वर्धन के साथ मिलकर मल्लीताल बाजार में छापेमारी की। इस दौरान उन्होंने दुकानदारों एवं व्यापार मंडल से अधिक खरीददारी कर रहे लोगों को अधिक सामान न देने तथा किसी तरह की कालाबाजारी न करने की हिदायत दी। इस हेतु दुकानों के बाहर सामान की दरें प्रदर्शित करने को भी कहा। मंडी के लिए व्यवस्था दी कि यहां केवल नगर के पुराने सब्जी विक्रेता ही सब्जी बेचंेगे। बाहरी सब्जी विक्रेताओं को सब्जी बेचने की इजाजत नहीं होगी। दुकानों में कोरोना विषाणु का संक्रमण रोकने के दृष्टिगत मास्क एवं हैंड सेनिटाइजर का प्रयोग करने की हिदायत भी दी गई।

यह भी पढ़ें :कोरोना पर बाजार बंद की अफवाह से खाली हो गया बाजार से राशन

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 मार्च 2020। कोरोना के दृष्टिगत बृहस्पतिवार को सरोवरनगरी के बाजारों-खासकर मल्लीताल बाजार में बृहस्पतिवार को कल से बाजार बंद होने की अफवाह फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग नगर के बाजारों में उमड़ आए और आवश्यकता से अधिक ‘पैनिक खरीददारी’ की। फलस्वरूप बाजार में आटा, चीनी जैसे उत्पाद पूरी तरह से बिक गए और बाजार इन उत्पादों से खाली हो गए। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के पूर्व जिला उपाध्यक्ष जगदीश बवाड़ी ने बताया कि लोग एक मुश्त तीन माह तक का राशन ले गए हैं। जिन्हें सामान नहीं मिला वे अपनी पहले से तय दुकानों पर अगले तीन माह के राशन की एकमुश्त बुकिंग कर गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि डरने की कोई वजह नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बाजारों के बंद न होने पर बात साफ की है। आगे भी बाजारों में सामान पर्याप्त मात्रा में मिलता रहेगा।

यह भी पढ़ें : व्यापार मंडल के चुनाव में सही साबित हुई ‘नवीन समाचार’ की आशंका

-मल्लीताल व्यापार मंडल ने किया जिला उद्योग व्यापार मंडल द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम का बहिस्तार
-अपना स्वयं पंजीकरण कराकर चुनाव कराने का किया ऐलान

मल्लीताल व्यापार मंडल की बैठक में मौजूद पदाधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मार्च 2020। नगर के मल्लीताल व्यापार मंडल ने प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल की जिला इकाई द्वारा मंगलवार को घोषित चुनाव कार्यक्रम का बहिस्कार करने तथा अपनी स्वतंत्र इकाई का अलग से पंजीकरण कराकर चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। आरोप लगाया कि प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल नगर के व्यापारियांे के दुःख-दर्द में शामिल नहीं होता है, तथा उसने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा बिना विश्वास में लिये की है। यहां तक कि चुनाव कराने के लिए घोषित मुख्य चुनाव अधिकारी अमित साह और बनाई गई चुनाव संचालन समिति में रखे गए पदाधिकारियों से तक सहमति नहीं ली गई। दिलचस्प बात यह भी रही कि व्यापारियों ने सर्वसम्मति से प्रांतीय व्यापार मंडल द्वारा घोषित मुख्य चुनाव अधिकारी अमित साह को ही अपनी संस्था के पंजीकरण, आम सभा बुलाने, सदस्यता अभियान चलाने एवं चुनाव कराने की जिम्मेदारी दे दी।
बुधवार को मल्लीताल व्यापार मंडल की आर्य समाज मंदिर में अध्यक्ष किशन सिंह नेगी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में सर्वानुमति से प्रांतीय उद्योग व्यापार द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम का बहिस्कार करने एवं अपनी स्वतंत्र इकाई का पंजीकरण, सदस्यता अभियान चलाने व चुनाव कराने की जिम्मेदारी अमित साह को सोंपी गई। बैठक में व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष कमलेश ढोंढियाल, देवेंद्र मेहरा पारस, संजय बिष्ट, नरेंद्र लाल साह, राजेश वर्मा, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल द्वारा घोषित चुनाव संचालन समिति में शामिल गए रुचिर साह, पुनीत टंडन, त्रिभुवन फर्त्याल, विवेक साह, आनंद खम्पा, पप्पू कर्नाटक व धीरेंद्र बिष्ट सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : मल्लीताल व्यापार मंडल के चुनावों की घोषणा, बड़ा सवाल-चुनाव हो पाएंगे ?

नवीन समाचार, देहरादून, 3 मार्च 2020। प्रांतीय उद्योग व्यपार मंडल की जिला इकाई ने एक बार पुनः नगर के मल्लीताल व्यापार मंडल के चुनावों की घोषणा कर दी है। लेकिन इसके बावजूद सवाल उठ रहा है, सवाल हो पाएंगे क्या ? ऐसा इसलिए कि मल्लीताल व्यापार मंडल में पिछले 12 वर्षों में कई बार चुनावों की घोषणा हो चुकी है, किंतु चुनाव हो नहीं पाए हैं।
बहरहाल, इधर मंगलवार को प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला महामंत्री हर्षवर्धन पांडे ने बताया कि चुनाव के लिए चार से 12 मार्च तक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 13 से 17 मार्च तक सदस्यता पर आपत्तियों का निवारण, नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और चुनाव चिन्ह आवंटन तथा 18 मार्च को मतदान एवं इसी दिन शाम को चुनाव परिणाम की घोषणा की जाएगी। चुनाव के लिए जिलाध्यक्ष विपिन गुप्ता ने कार्यकारी जिलाध्यक्ष रामपाल गंगोला, जीत सिंह आनंद, रवैल सिंह, मारुति नंदन साह, रईस खान, अमित गुप्ता के नेतृत्व में चुनाव संचालन समिति की घोषणा कर दी है। अमित साह को मुख्य चुनाव अधिकारी व सैयद नदीम मून को कानूनी सलाहकार मनोनीत किया गया है। चुनाव संचालन समिति में महेश नैनवाल, गुरविंदर सिंह, पवन शर्मा, पुनीत टंडन, देव कंसल, हिमांशु जोशी, बांगदी, रुचिर साह, विकास जायसवाल व हारून खान पम्मी को शामिल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि जिला इकाई पूर्व वर्षों में भी चुनाव की घोषणा करती आई है लेकिन एक दशक से अधिक लंबे समय से मल्लीताल व्यापार मंडल के चुनाव नहीं हो पाए हैं।

यह भी पढ़ें : बिजनेस समाचार : जीएसटी पर बड़ा झटका देने की तैयारी में है सरकार !

-टैक्स की दरों से लेकर स्लैब तक जीएसटी में बड़े बदलाव की तैयारी, लग सकता है झटका
नवीन समाचार, नई दिल्ली, 7 दिसंबर 2019। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए ढाई वर्ष के करीब हो रहे हैं। इस बीच जीएसटी काउंसिल ने टैक्स ढांचे से लेकर, टैक्स रेट तक कई बदलाव किए और अब कहा जा रहा है कि यह 5 फीसद के मौजूदा बेस टैक्स स्लैब को बढ़ाकर 9 से 10 फीसद तक करने पर विचार कर सकती है। टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने को प्रयासरत जीएसटी काउंसिल मौजूदा 12ः का टैक्स स्लैब खत्म करते हुए इसके दायरे में आने वाले सभी 243 प्रॉडक्ट्स को 18ः के टैक्स स्लैब में धकेलने पर भी मंथन कर सकती है।
अगर ये अनुमान सही होते हैं और इसी अनुसार जीएसटी स्ट्रक्चर में बदलाव किया गया तो ग्राहकों की जेबें तो ढीली होंगी, लेकिन सरकार के खजाने में 1 लाख करोड़ रुपये ज्यादा आने लगेंगे। अनुमान है कि टैक्स दरों में प्रस्तावित बदलाव के अलावा अब उन वस्तुओं पर भी टैक्स लगाया जा सकता है जो अभी टैक्स फ्री हैं। अभी श्महंगेश् निजी अस्पतालों में इलाज से लेकर होटलो में प्रति रात 1 हजार रुपये तक के किराए वाले कमरों में रहने पर बिल के भुगतान के वक्त टैक्स नहीं देना पड़ता है। शीर्ष सूत्रों की मानें तो ये सभी कर मुक्त वस्तुएं एवं सेवाएं जीएसटी के दायरे में आ सकती हैं। कहा जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल के पास कार जैसे उत्पादों पर लेवी बढ़ाने की गुंजाइश नहीं के बराबर है। 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद से सैकड़ों वस्तुओं पर टैक्स रेट में कटौती हुई जिससे प्रभावी टैक्स रेट 14.4ः से घटकर 11.6ः पर पहुंच चुका है। इससे टैक्स से प्राप्त रकम में सालाना करीब दो लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। अगर पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश के मुताबिक, 15.3ः की रेवेन्यू न्यूट्रल टैक्स रेट पर विचार किया जाए तो यह घाटा बढ़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। देश में गहरा रही आर्थिक सुस्ती ने टैक्स रेवेन्यू में गिरावट की समस्या बढ़ा दी है। चूंकि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने के पहले चार वर्षों तक राज्यों के कर संग्रह में 14ः से कम वृद्धि होने की सूरत में अपने खाते से भरपाई करने का वादा किया है, इसलिए कम कर संग्रह के कारण अब उसे हर महीने करीब 13,750 करोड़ रुपये राज्यों को बतौर मुआवजा देना पड़ रहा है। एक आधिकारिक आकलन के मुताबिक, अगले वर्ष तक यह रकम बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें कोई संदेह नहीं कि दरों में परिवर्तन से कीमतें बढ़ेंगी। ऐसे में पिछले कुछ वर्षों से महंगाई पर लगी लगाम ढीली पड़ सकती है। इसी के मद्देनजर कहा जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल संभवतः टैक्स फ्री वस्तुओं के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी, बल्कि न्यूनतम टैक्स स्लैब बदलकर ही ज्यादा-से-ज्यादा भरपाई करने की कोशिश होगी। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि केंद्र सरकार अगले हफ्ते जीएसटी में प्रस्तावित बदलाव पर महामंथन करेगी। अगर प्रस्ताव स्वीकार किए जाते हैं तो टैक्स रेवेन्यू में वृद्धि तो होगी ही, जीएसटी तीन दरों तक सिमट भी जाएगी।

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-मनोनीत-कालाढूंगी व्यापार मंडल की दूसरी कार्यकारिणी का गठन
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अप्रैल 2019। जनपद के कालाढुंगी के व्यापार मंडल में दोफाड़ की स्थिति बन गयी है। गत दिवस सिने कलाकार मयंक मेहरा को कालाढुंगी व्यापार मंडल का निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया था। जबकि इधर देवभूमि व्यापार मंडल उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत सिंह चड्ढ़ा व प्रदेश महामंत्री नरेंद्र अरोरा ने आपसी सहमति से कालाढूंगी नगर इकाई का गठन करते हुवे राजेश कुमार गोयल को अध्यक्ष व शाकिर हुसैन को महासचिव मनोनीत किया। उन्होंने दोनों मनोनीत पदाधिकारियों से व्यापारी हित मे कार्य करने की आशा व्यक्त करते हुए संगठन को मजबूती प्रदान करने तथा शीघ्र नगर की पूरी टीम का गठन किए जाने को कहा। उन्होंने मनोनीत पदाधिकारियों को संगठन की मांन-मर्यादा को बरकरार रखते हुए व्यापारी हित मे कार्य करने की भी सलाह दी। इस मौके पर संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष दलजीत सिंह ‘दल्ली’, जिला अध्यक्ष पंकज कपूर व पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ व्यापारी नेता फारूक सिद्दीकी आदि मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि नैनीताल मुख्यालय सहित कुछ और व्यापार मंडलों में भी जल्द ही ऐसी ही दोफाड़ की स्थिति आ सकती है।

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सुंदर प्रकाश बड़कोटी @ नवीन समाचार, 7 दिसंबर 2018। सामान्य करदाताओं (जीएसटीआर-9) और कंपोजीशन योजना के तहत आनेवाले करदाताओं (जीएसटीआर-9ए) के लिये सालाना रिटर्न फार्म भरने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2018 है। इसलिए आज हमारे विशेषज्ञ हमारे व्यवसायी पाठकों के लिए जीएसटी के सालाना रिटर्न फार्म भरने  उपयोगी जानकारी दे रहे हैं। यदि इसके बाद भी आपके कोई प्रश्न हों तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें। हम आपके प्रश्नों के उत्तर देने के प्रयास करेंगे। 
जीएसटीआर-9| GSTR-9
यह आपका वार्षिक रिटर्न (Annual Return) फॉर्म होता है। इसमें आपने कारोबारी साल में जो हर महीने यानी 12 बार फॉर्म GSTR-3B जमा किया है, उनका Details इसमें देना होता है। जो टैक्स आपने साल भर में जमा किया है, जो भी Export या Import किया है, उसका भी Detail देना होता है। उदाहरण के लिए आप जो भी कारोबार वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान करेंगे, उसका Return अगले वित्तीय वर्ष में 31 दिसंबर तक जमा कर देना होगा। कारोबार वाले Financial Year के बाद अगले वित्तीय वर्ष में 31 दिसंबर तक इसे जमा करना होता है।
GSTR-9A| जीएसटीआर 9 ए
Composition स्कीम के तहत रजिस्टर्ड लोगों के लिए यह सालाना रिटर्न (Annual Return) होता है। इसमे साल भर के दौरान भरे गए चारों तिमाही रिटर्न (Quarterly Returns) का ब्योरा देना होता है। कारोबार वाले Financial Year के बाद अगले वाले Financial Year में 31 दिसंबर तक इसे जमा करना अनिवार्य होता है।
जीएसटीआर-10| GSTR-10
जो व्यक्ति अपना जीएसटी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करता हे या जिसका Registration कैंसल हो जाता है उसे Form GSTR-10 के रूप में फाइनल रिटर्न भरकर जमा करना होता है। Registration सरेंडर या कैंसल होने के तीन महीने के भीतर इसे जमा करना होता है। उसे अपना Input tax credit और capital goods का ब्योरा देना होता है। साथ ही साथ कुल टैक्स देनदारी और कुल जमा किए गए टैक्स का भी ब्योरा भरना पडता है।
जीएसटी में ऑडिट)( GSTR-9C)
प्रत्येक पंजीकृत व्यक्ति जिसका वित्तीय वर्ष के दौरान जीएसटी ऑडिट टर्नओवर सीमा (2 करोड़ रुपये) पार कर चुकी है, का (CMA) कॉस्ट एकाउंटेंट या (CA) चार्टर्ड अकाउंटेंट  द्वारा जीएसटी लेखा-जोखा ऑडिट रिपोर्ट और सर्टिफिकेट के साथ GSTR-9C भरना है
GST Expert and Practicing Cost Accountnat, GST Solutions Ranikhet and SPB & Co.New Delhi  के प्रबंधकीय भागीदार CMA Sunder P. Budkoti ने कहा ‘वार्षिक कर रिटर्न एक प्रकार से किसी कारोबारी द्वारा भरे जाने वाले मासिक रिटर्न का ही एकीकृत रूप है और इससे राजस्व विभाग के समक्ष आपका पूरा लेनदेन सामने आ जाता है। इस फार्म में अतिरिक्त इनपुट क्रेडिट का दावा करने की कोई गुंजाइश नहीं है।’
उन्होंने कहा कि विभाग के पास व्यापार और उद्योग के काफी आंकड़े उपलब्ध होंगे और विभाग के लिये इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट दावा में विसंगतियों का पता लगाना और अंतिम कर भुगतान का पता लगाना काफी आसान होगा। 

प्रधानमंत्री मोदी जी को वोट देने वाले एक मतदाता का खुला ख़त

प्रधानमंत्री जी,
मैं आपसे अपनी कोई भी बात कहूँ या सवाल करूँ, उससे पहले स्पष्ट करना चाहता हूँ कि संभवतः इस देश के सबसे आखिरी नागरिकों में शुमार होने के कारण मैं आपसे कुछ भी कहने या पूछने का अधिकारी हूँ ही नहीं। मैं हाथ जोड़कर यह भी साफ कर देना चाहता हूँ कि मेरी मंशा सिर्फ अपनी फिक्र को आप तक पहुँचाने की है। क्योंकि मेरे वचन प्रतिकूल होते ही आपकी सरकार, पार्टी और समर्थन में खड़े लोग राष्ट्र के प्रति मेरी आस्था पर सवाल खड़े करने में बिल्कुल देर नहीं करेंगे। यह भी बता दूँ कि मैं किसी अफजल गैंग, सेक्युलर जमात या तुष्टिकरण मंडली का न कभी सदस्य रहा हूँ न ही समर्थक। बल्कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आपके संबोधन-वचन से प्रभावित होकर मैंने आपको ही अपना वोट दिया था। जी हाँ ! मैंने भाजपा को नहीं, आपको अपना वोट दिया था। यह सोचकर कि दशकों से तमाम परेशानियों और साजिशों के बावजूद किसी प्रकार घिसड़ रहे देश को यदि आपका साहसिक मार्गदर्शन मिला तो स्थितियां निश्चित ही सुधर जाएँगी। हालांकि सच कहूँ तो पहले की अपेक्षा आज स्थितियां और अधिक बिगड़ी हुई मालूम हो रही हैं। संभव है कि मैं गलत हूँ पर मेरी आशंकाओं और अवसाद को तृप्ति नहीं मिल पाने के कारण ही आपसे शंकाओं का निवारण चाहता हूँ।
 
विपत्ति तब और भयावह हो जाती है, जब उसके आसन्न होने का कारण स्पष्ट न हो। क्योंकि, सही-सही कारण पता चले बिना विपत्ति से निदान प्राप्त करना असंभव है। विपत्ति की छोटी सी चिंगारी पर लगातार बह रही आशंकाओं की हवा अवसाद को दावानल बना रही है। यह मेरी निजी राय नहीं है बल्कि लगातार मंदी की चपेट में आता बाजार इसकी गवाही दे रहा है। मुझे बताइए कि क्या यह मंदी किसी साजिश का परिणाम है ? यह षड्यंत्र कौन रच रहा है ? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसकी नजर में देश का बहुसंख्यक व्यापारी वर्ग बेईमान है या इतने बड़े देश की अर्थव्यवस्था को मंदी के दलदल में धकेलने की ताकत मुट्ठी भर बेईमान कारोबारियों ने जुटा रखी है।
 
चूंकि मैं एक गैर राजनीतिक व्यक्ति हूँ तो सीधे-सीधे अपनी आशंका के कारणों पर प्रकाश डालता हूँ। ऐसे भी आपके पास ऐसी फिजूल बातों के लिए वक्त नहीं है और होना भी नहीं चाहिए। आप मेरी बातों से ज्यादा चिंतित न हों क्योंकि सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट तक लगभग 90 फीसद भारतीय इतने लंबे लेख को पढ़ने की जहमत नहीं उठाएंगे। इस लेख में संतृप्त मसाला है न तो आधुनिक रैप। इसमें गोमूत्र का समर्थन-विरोध है न अफजल-कसाब का।
 
प्रधानमंत्री जी! सोशल मीडिया पर आपके विरोधी कभी टेंट हाउस पर टैक्स का विरोध रट रहे हैं तो कभी रेस्टोरेंट और होटल पर। कोई बिस्कुट पर टैक्स की दरों का रोना रोता है तो कहीं कफन के कपड़े पर टैक्स के लिए सीना पीटा जा रहा है। हालांकि मैं जानता हूँ कि यह समस्त विलाप फर्जी हैं। टेंट हाउस, टैक्सी कैब जैसी सेवाएं 2004 में तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम द्वारा सेवाकर लगाए जाने के समय से ही कर योग्य हैं। पहले सेवाकर का दायरा चार लाख के कारोबार पर था, जिसे आपने 10 और 20 लाख तक करके व्यापारियों को राहत ही दी है।
मेरा दर्द कुछ और है, जिसे आपके अन्धविरोधी (जिन्हें मैं आपका एजेंट मानता हूँ) कभी उजागर नहीं करेंगे। मुझे उपभोक्ता वस्तुओं के विक्रय पर 20 लाख रुपए के कारोबार के कारण व्यापारी को GST के दायरे में लाए जाने की वजह समझ नहीं आ रही है। सभी जानते हैं कि जनरल स्टोर के कारोबार में अधिकतम 10-12 फीसद का लाभ शामिल होता है। औसतन यह लाभ 9-10 प्रतिशत से अधिक कभी नहीं होता। इसका अर्थ हुआ कि साल में 25 लाख रुपए का माल बेचने वाले व्यापारी की सालाना सकल आय लगभग ₹ 2.5 लाख होती है। इसमें दुकान का किराया, बिजली, माल भाड़ा आदि खर्च घटाने के बाद शुद्ध लाभ अधिकतम ₹ 1.7 लाख होता है। मतलब मासिक आय ₹ 13 हजार से भी कम बैठती है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में GST का दायरा ₹ 10 लाख है। अतः कुल ₹ 6500 प्रतिमाह कमाने वाले को भी रिटर्न भरना होगा। आप ही बताइए कि यह कितना तार्किक और न्यायसम्मत है? मैं मानता हूँ कि ऊपर के स्तर पर चोरी रोकने के लिए आपने नीचे से टैक्स की व्यवस्था दी है। मगर, क्या आप जानते हैं कि एक अशिक्षित, गरीब और पिछड़े समाज के व्यक्ति के लिए बिलिंग और रिटर्न कितना सरल या कठिन शब्द है? क्या आपको मालूम है कि टैक्स वकील और सीए आज जीएसटी रिटर्न भरने के लिए प्रति तिमाही ₹ 5000 मांग रहे हैं। मतलब मासिक ₹ 6500 कमाने वाला व्यक्ति ₹ 1667 सिर्फ इसलिए खर्चे, क्योंकि सरकार बड़े चोरों को पकड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
नहीं! आपने ऐसा कतई नहीं सोचा होगा। आप इतने मामूली से काम के लिए छोटे व्यापारियों को कभी परेशान नहीं कर सकते।
 
वजह कुछ और ही होगी। क्योंकि आपने जीएसटी की नई व्यवस्था में एक और विकल्प दिया है, एक प्रतिशत पर सकल सेटलमेंट का विकल्प। प्रथमतः तो यह बहुत सहज लगता है। मुझे भी लगा। मगर, जब मुझे मालूम चला कि एफएमसीजी क्षेत्र की सभी कंपनियां बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के दैनिक उपभोग से संबंधित माल के विक्रेताओं को उत्पाद नहीं देने के लिए विवश हैं, तो मेरा माथा ठनका। मुझे ₹ 75 लाख पर एक फीसद समायोजन की याद आई। सामान्य समझ वाला व्यक्ति भी यह जनता है कि लाख-दो लाख रुपए सकल पूंजी वाला व्यापारी इसके बारे में सोचेगा भी नहीं। यह पूंजी से मजबूत व्यक्ति का साधन है। या उस व्यक्ति का, जिसका माल उच्च टैक्स स्लैब (18, 28) में हो। व्यवहार में होगा यह कि सबल वर्ग अपने परिवार के 4-6 सदस्यों के नाम पर एक फीसद समायोजन में रजिस्ट्रेशन कराएगा। दूसरी तरफ एजेंसी से माल मिलना बंद होने पर छोटे-मंझोले किराना व्यापारी इन एक फीसद समायोजन वाले कारोबारियों से माल खरीदने के लिए मजबूर हो जाएंगे क्योंकि इन्हें एजेंसी/डिस्ट्रीब्यूटर से माल मिलेगा ही नहीं। वहीं रिटेलर खोने से परेशान थोक विक्रेता भी एक प्रतिशत समायोजन वाले को खुशी-खुशी माल बेच देगा। मतलब यह हुआ कि थोक और फुटकर विक्रेता के बीच एक बिचौलिया आ गया। यह बिचौलिया नकद छूट के साथ ही कंपनी से आने वाले सभी प्रकार के विक्रय वृद्धि संबंधी स्कीम तो गटकेगा ही, मार्जिन से भी कर के रूप में एक-दो प्रतिशत लाभ भी पचा लेगा। नतीजतन, फुटकर विक्रेता के लिए कीमतें इतनी कसी हुई होंगी कि वह अपने ग्राहक को छूट का लाभ देने में पूर्णतः असमर्थ हो जाएगा। मगर, इससे आपका क्या लेना-देना है? मैने भी शुरुआत में यही सोचा था।
फिर मुझे लगा कि आपकी सरकार तो बाजार से बिचौलिए हटाकर कीमतें दुरुस्त करने के वादे पर आई थी। आपकी सूक्ष्म दृष्टि को भी मैं खूब पहचानता हूँ। मुझे याद है, देश के सोशल मीडिया वीरों को विकलांग और दिव्यांग की बहस में उलझाकर आपने कैसे देश भर के बैंकों में सीढ़ी के साथ रैम्प बनवाए थे। जबकि उन रैम्प का इस्तेमाल नोटबंदी के वक़्त होना था, जिसकी किसी को भनक तक नहीं थी। कहीं ऐसा ही कोई खेल इस नई कर प्रणाली में भी तो नहीं छिपा है?
मैं यह नहीं कह रहा कि आपने या आपकी सरकार ने बिग बाजार सरीखे मल्टी ब्रांड स्टोर से सुपारी लेकर देश भर की गलियों-मोहल्लों में जारी छोटे-छोटे रिटेल स्टोर को बंद कराने की योजना बनाई है। लेकिन मैं उस वक्त भयभीत हो गया, जब मुझे मालूम हुआ कि मुकेश अम्बानी जी रिलायंस जियो के माध्यम से देश का सबसे बड़ा रिटेल चैनल खोलने की तैयारी कर रहे हैं। पहले चरण में ही 11000 आउटलेट खोले जाने हैं, जो इस वर्ष दिसंबर तक संचालित भी होने लगेंगे। ठीक उसी समय जीएसटी अपने पूरे शबाब पर आएगा और छोटे-छोटे दुकानदार बिचौलिए से महंगा माल खरीदने को मजबूर हो चुके होंगे। ऐसे में रिलायंस जियो का सस्ता और ब्रांडेड स्टोर कुछ अलग ही चमक बिखेर रहा होगा।
मुझे देशभर में रिलायंस जियो का रिटेल स्टोर खुलने से कोई परेशानी नहीं है। प्रतियोगिता बढ़ेगी तो ग्राहक का लाभ स्वाभाविक है। इससे अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। मगर, खेल के नियम सभी खिलाड़ियों के लिए एक समान होने चाहिए। देश को चलाने में यदि प्रशासन और न्यायालय ही सक्षम होते तो नगर पालिका और प्रधानी से लेकर केंद्र तक में सरकार की क्या आवश्यकता थी? मुझे लगता है कि सरकार की उपयोगिता समाज में उपस्थित व्यवहारिक समस्याओं का निदान ढूंढने से ही है। कमजोर को संबल देना और मजबूत से अधिकतम कर प्राप्ति भी इसी का उदाहरण है। लेकिन यहाँ तो खेल के नियम ही पलटे जा रहे हैं। कहीं यह सब किसी सुनियोजित अनिष्ट की दस्तक तो नहीं है? कहीं अच्छे दिन की आस लगाए बैठे देशभर के छोटे-छोटे दुकानदार कल को किसी मल्टीब्रांड स्टोर के नौकर बनने के लिए मजबूर तो नहीं हो जाएंगे? फिलहाल तो आप मुझे बस इतना ही बता दीजिए कि ₹ 10 लाख का सालाना कारोबार करने वाले अनपढ़-अधकचरा जागरूकताविहीन, गरीब और पिछड़े व्यापारी को शामिल करने का क्या औचित्य है? क्या उत्पाद के आखिरी दस फीसद मूल्य पर 5, 12 या 18 फीसद टैक्स की वसूली सीधा थोक विक्रेता से नहीं की जा सकती थी? 90 प्रतिशत रकम पर टैक्स चुकाकर माल खरीदने वाला खुदरा व्यापारी महज एक फीसद की चोरी करके किस प्रकार का और कितनी मात्रा में कालाधन उत्सर्जित कर सकेगा???
#अनिल ‘क़ामिल’

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