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झील के साथ ही खूबसूरत झरने भी बन सकते हैं नैनीताल की पहचान

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नवीन जोशी, नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान केवल नगर के भीतर के नैनी सरोवर व अन्य आकर्षणों की वजह से नहीं, इसके बाहरी क्षेत्रों की खूबसूरती के समग्र से भी है। और यह खूबसूरती भी सैलानियों को सर्वाधिक आकर्षित करने वाले ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के दौरान की ही नहीं, वरन वर्ष भर और कमोबेस हर मौसम में अलग-अलग रूपों में कुदरत द्वारा उदारता से बरती जाने वाली नेमतों की वजह से भी है। मौजूदा वर्षा काल की ही बात करें तो इस मौसम में जहां पहाड़ की कमजोर प्रकृति की वजह से होने वाले खतरों की वजह से कम संख्या में सैलानी यहां आने का रुख कर पाते हैं, परंतु यही समय है जब यहां प्रकृति सुंदरी को उसकी वास्तविक सुंदरता को मानो नहा-धो कर साफ-स्वच्छ हुई स्थिति में देखा जा सकता है।

सरोवरनगरी नैनीताल पहुंचने के लिए यदि सैलानी हल्द्वानी-काठगोदाम की राह चुनते हैं, तो इस मार्ग पर पहाड़ों की शुरुआत होते ही प्रकृति अपनी खूबसूरती के नए-नए स्वरूप दिखाना प्रारंभ कर देती है। काठगोदाम से थोड़ा आगे ही सदानीरा गार्गी (गौला) नदी का सुंदर नजारा प्रस्तुत होता है। रानीबाग से आगे पर्वतीय क्षेत्र हरीतिमा युक्त वनों से मन मोह लेता है, वहीं तीन किमी आगे भुजियाघाट से पहले दो गधेरे सुंदर झरनों की कल-कल के साथ ही दिलकश दृश्यों से सैलानियों को रुकने को मजबूर कर देते हैं। आगे डोलमार के पास ऊंचे पहाड़ों सैकड़ों फीट ऊंची चट्टान से गिरते एक अन्य झरने के दृश्य भी रोमांचित कर देते हैं। इसी तरह दोगांव से आगे पुनः दो गधेरों में दो सुंदर झरने मन को आह्लादित कर देते हैं। आगे भी आमपड़ाव, ज्योलीकोट व नैना गांव के पास भी पहाड़ी गधेरों की जल राशियां सरोवरनगरी में नैनी सरोवर की अप्रतिम सुंदरता से पहले ही जल के करीब सहज रूप से खिंचे चले आने वाले मानव को रससिक्त करने में कोई कसर नहीं छोड़तीं। इनके अलावा भी भवाली रोड पर पाइंस के पास, उधर भीमताल रोड पर सलड़ी तथा इधर कालाढुंगी व किलवरी रोड पर भी अनेक झरने सैलानियों को आकर्षित करने और बरसात के मौसम में सैलानियों के लिए नए आकर्षण तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का केंद्र बनने की क्षमता रखते हैं।
 
पर्यटन के साथ ही स्थानीय लोगों के रोजगार का बन सकते हैं जरिया
नैनीताल। सरोवरनगरी नैनीताल आने वाले देशी-विदेशी सैलानी हल्द्वानी-काठगोदाम से ऊपर पहाड़ों की ओर चढ़ने के दौरान जगह-जगह विश्राम करना चाहते हैं। शासन-प्रशासन चाहे तो झरनों के ऐसे दिलकश नजारों युक्त स्थानों को चिन्हित करके तथा वहां पर साइनेज आदि लगाकर सैलानियों के रुकने और वहां पर मार्गीय सुविधाओं, शौचालय तथा नास्ते आदि की व्यवस्था की जा सकती है। इससे इन स्थानों पर क्षेत्रीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं।
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नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड