अभिनेता वरुण धवन ने किया ट्वीट, नैनीताल की ‘कर्तव्य-कर्म’शील महिलाओं को अपनी सी लगेगी ‘सुई-धागा’ की कहानी

-सिने अभिनेता कलाकार वरुण धवन ने ट्वीट कर उम्मीद जताई ‘हमारी फिल्म आपकी वास्तविक कहानी से जुड़ेगी’
नवीन जोशी, नैनीताल। इरादे यदि नेक हों तो राह और प्रशंसा स्वतः ही मिलती जाती हैं। ऐसा ही कुछ हो रहा है नैनीताल के ज्योलीकोट-गेठिया की महिलाओं की संस्था ‘कर्तव्य-कर्म’ के साथ। अब तक अपने घरों में पुराने फटे कपड़ों पर ‘पाबंद’ लगाने व बटन टांगने तक सीमित पहाड़ की इन महिलाओं ने जब ‘सुई-धागा’ ‘फिरंगी बैग’ व कपड़े की ज्वेलरी बनाने पर चलाये तो उनके काम की गूंज कुछ ही महीनों में सात समुद्र पार कनाडा और देश के सबसे बड़े उद्योगपति समूह अंबानी और भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तक तो पहुंची ही है, सिने अभिनेता वरुण धवन ने भी उम्मीद जताई है कि संस्था की महिलाओं को ‘मौजी’ और ‘ममता’ (सुई धागा फिल्म के किरदारों) की कहानी अपनी सी लगेगी। उल्लेखनीय है कि वरुण धवन और अनुष्का शर्मा अभिनीत बॉलीवुड फिल्म ‘सुई धागा- मेड इन इंडिया’ आगामी 2 अक्टूबर 2018 को गांधी जयंती के दिन सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इससे पहले कर्तव्य कर्म की ओर से वरुण एवं अनुष्का को टैग करके कहा था कि संस्था की कहानी सुई-धागा जैसी है, और संस्था की 45 ‘मौजी’ (जैसी) महिलाएं इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। और सभी एक साथ इस फिल्म का पहला शो देखने जाएंगी।

देखें वरुण धवन का ट्वीट : 

फिरंगी बैग
फिरंगी बैग

अब बात करते हैं ‘कर्तव्य-कर्म’ की। ‘कर्तव्य-कर्म’ कहने को मार्च 2013 में पंजीकृत किसी आम एनजीओ की तरह ही है। किंतु इधर कुछ महीनों में संस्था ने स्वयं को उत्तराखंड की महिलाओं के वास्तविक सशक्तीकरण और यहां की जड़ी-बूटियों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित किया है कि उसकी पहचान लगातार बढ़ती जा रही है। इसके तल्ला गेठिया स्थित केंद्र पर करीब दो दर्जन महिलाओं द्वारा तैयार किये जा रहे कपड़े के झोले कभी छोटी बिलायत कहे जाने वाले नैनीताल के ‘फिरंगी’ वाशिंदों के नाम से खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। गुजरात स्थित ‘धीरूभाई अंबानी इंस्टिट्यूट ऑफ कम्यूनिकेशन एंड टेक्नोलॉजी’ ने बकायदा अपने 18 छात्रों की तीन सप्ताह की ‘इंटर्नशिप’ के लिए उनसे 6 दिसंबर 2018 से समय आरक्षित करा लिया है। वहीं कनाडा की एक संस्था ने इन महिलाओं से बिच्छू घास के रेशों से बने कपड़ों पर यही कार्य करवाने और अंगूरा ऊन से स्वेटर आदि बुनने का ऑर्डर दिया है। इसके अलावा संस्था को पुणे, मुंबई, फरीदाबाद, ऋषिकेश व दिल्ली की संस्थाओं से भी ‘फिरंगी बैग्स’ के ऑर्डर मिले हैं।
संस्था के प्रमुख गौरव अग्रवाल एवं पुष्कर जोशी ने बताया कि संस्था के तीन केंद्र चल रहे हैं। गेठिया केंद्र में महिलाएं हाथों से फिरंगी बैग व कुशन कवर बनाते हैं, वहीं ज्योलीकोट केंद्र पर हाथ से कूटे व धूप से सूखे मसाले एवं हर्बल चाय व शहद आदि तैयार करते हैं। वहीं रानीखेत के चिलियानौला स्थित केंद्र पर महिलाएं हाथ से बुनाई कर स्वेटर, कार्डिगन आदि तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि इधर उन्होंने सुई-धागा फिल्म की टीम को अपनी संस्था की महिलाओं द्वारा किये जा रहे कार्य की जानकारी दी थी, इस पर फिल्म के अभिनेता वरुण धवन ने ट्वीट करके कहा है कि उनकी फिल्म की कहानी जरूर कर्तव्य-कर्म संस्था की महिलाओं को उनकी वास्तविक कहानी से जुड़ी हुई लगेगी। उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य पहाड़ की महिलाओं को घर पर उनके हुनर का रोजगार उपलब्ध कराने तथा पहाड़ की संस्कृति को ‘पहाड़ी हाट’ ब्रांड नाम से आगे बढ़ाने का है। वर्तमान में संस्था से सीधे तौर पर करीब 50 एवं परोक्ष तौर पर 250 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इस पहल को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भी सराहा है, और उनके उत्पादों को अपनी वेबसाइट ‘ई-हाट’ में भी स्थान उपलब्ध कराया है। आगे उन्होंने तय किया है कि संस्थान की करीब 45 ‘’ममता’ व  मौजी’ महिलाएं सुई धागा फिल्म का पहला शो साथ देखने जाएंगी।

इसलिये बैगों का नाम रखा गया ‘फिरंगी’

नैनीताल। कर्तव्य कर्म संस्था के पुष्कर जोशी ने बताया कि बैगों के निर्माण के बाद इनके लिए ब्रांड नाम सोचा जा रहा था। कभी नैनीताल, ज्योलीकोट, गेठिया बैग्स जैसे नामों पर विचार हुआ, किंतु तभी अंग्रेजों का समूह पास से गुजरा, इस पर रंग-बिरंगे बैगों का नाम फिरंगी रख दिया गया। वैसे भी नैनीताल को पूर्व में ‘छोटी बिलायत’ यहां रहने वाले तत्कालीन अंग्रेज वाशिंदों को फिरंगी कहा जाता था।

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