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बोट हाउस क्लब चुनाव: नयी बोतल में पुरानी शराब ! शर्मा फिर सचिव, खान फिर उपाध्यक्ष

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बोट हाउस क्लब के नवनिर्वाचित कार्यकारिणी सदस्य।

नैनीताल। मुख्यालय के प्रतिष्ठित 1890 में स्थापित देश के प्राचीनतम क्लबों में शुमार बोट हाउस क्लब की नयी नौ सदस्यीय  प्रबंध कार्यकारिणी पूरी तरह से नयी बोतल में पुरानी शराब की तरह कमोबेश पूरी तरह से पुरानी ही होगी। डीके शर्मा को फिर से प्रबंध कार्यकारिणी का सचिव एवं नसीम ए खान को फिर से उपाध्यक्ष तथा विजय साह को संयुक्त सचिव चुना गया है। शर्मा हाईकोर्ट बार एसोएिशन व उत्तराखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष तथा राज्य के अपर महाधिवक्ता भी रह चुके हैं, जबकि खान पूर्व में बरेली नगर निगम के मेयर रहे हैं, तथा पिछले 35 वर्षों से बोट हाउस की प्रबंध कार्यकारिणी में एवं 12 वर्षों से उपाध्यक्ष हैं। वहीं नयी कार्यकारिणी में नौ के नौ यानी सभी सदस्य नसीम खान, डीके शर्मा, विजय शाह, जेएस सरना, आरके कर्नाटक, दीप साह, मोहन चंद्र पांडे, राखी विर्क, पंकज जायसवाल वर्तमान में भी कार्यकारिणी में हैं। मालूम हो कि कुमाऊं मंडलायुक्त क्लब के अध्यक्ष एवं डीएम उपाध्यक्ष होते हैं। जबकि कार्यकारिणी में आने की कोशिश कर रहे तीन अन्य दावेदार डा. टीएस रौतेला, डा. गणेश मिश्रा व पूजा बांगा को हार का मुंह देखना पड़ा है। उल्लेखनीय है कि एक अन्य दावेदार पीएल बांगा ने नामांकन कराने के बाद अपना नाम वापस ले लिया था।
इससे पूर्व रविवार को हुई मतगणना में निर्वाचित हुए शीर्ष नौ सदस्यों-नसीम ए खान को सर्वाधिक 348, डीके शर्मा को 344, जेएस सरना को 324, विजय साह को 300, लगाार दूसरे वर्ष निर्वाचि हुई एकमात्र महिला सदस्य राखी विर्क को 295, दीप साह को 284, आरके कर्नाटक को 280, मोहन चंद्र पांडे को 267, पंकज जायसवाल को 259 तथा हार चुके डा. रौतेला को 231, पूजा बांगा को 175 व डा. गणेश मिश्रा को 65 वोट मिले। उल्लेखनीय है कि शनिवार को हुए चुनाव में कुल करीब 3500 मतदाता सदस्यों में से केवल 493 यानी करीब 14 फीसद ही मतदान हुआ था। इनमें से भी 27 मत अवैध पाये गये। चुनाव संपन्न कराने में मुख्य चुनाव अधिकारी हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश चंद्र कांडपाल व सहायक चुनाव अधिकारी ललित शर्मा आदि ने योगदान दिया।

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पुरानी पाल नौकाएं
पुरानी पाल नौकाएं

-विश्व का सबसे ऊंचाई पर स्थित याट क्लब भी है नैनीताल

अक्टूबर 2014 में आयीं नई पाल नौकाएं
अक्टूबर 2014 में आयीं नई पाल नौकाएं

नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी नैनीताल को यूं ही विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी का दर्जा नहीं मिला हुआ है। यहां ऐसी अनेक खाशियतें हैं, जो दुनिया में अन्यत्र नहीं मिलतीं। नगर की पहचान कही जाने वाली रंग-बिरंगी तितलियों सरीखी पाल नौकाओं की बात करें तो ऐसी नौकाएं दुनिया में केवल इंग्लेंड के शहर ससेक्स की झील में ही मिलती हैं। वहां इनका संचालन नॉरफॉक्स ब्रॉड याट क्लब ससेक्स इंग्लेंड के द्वारा किया जाता है। इसलिए यदि आप नैनीताल में पाल नौकायन का आनंद न ले पाए, तो फिर ऐसा आनंद लेने के लिए आपको इंग्लेंड के शहर ससेक्स ही जाना पड़ेगा।

पश्चिमी ससेक्स के एक गाँव में चलती नैनीताल जैसी रंग-बिरंगी पाल नौकाएं

उल्लखनीय है नैनीताल के याट क्लब को विश्व के सबसे ऊंचे याट क्लब का गौरव भी प्राप्त है। नैनीताल की पहचान पाल वाली नौकाओं यानी याट का इतिहास उस दौर का है, जब दुनिया में ऐसी नौकाओं को विकसित करने की प्रक्रिया ही चल रही थी। सर्वप्रथम नैनी झील में 1880 में मेरठ के तत्कालीन कमिश्नर आईसीएस अधिकारी फ्लीटवुड विलियम्स ने आज के दौर की ‘लिंटन होप हाफ रेटर’ प्रकार की नौकाओं से मिलती जुलती विशाल आकार की ‘स्कूनर’ प्रकार की नाव को क्रेन की मदद से सेंट असेफ्स (St. Asaphs) के पास से नैनी झील में उतारने की बात कही जाती है। आगे एक सैन्य अधिकारी कर्नल हेनरी ने ‘कैटेमेरन’ (Catamaran) प्रकार की दोहरे ढांचे (Double Hulled) युक्त ‘जैमिनी’ नाम की नाव का निर्माण किया। इसी दौर में खेलों के सामान बनाने वाली एक कंपनी ‘मरे एंड कम्पनी’ के द्वारा तीन ‘बेलफ़ास्ट लाफ’ (Belfast Laugh) प्रकार की ‘कोया’ (Coya), ‘डूडल्स’ (Doodles) और ‘डोरोथी’ (Dorothy) नाम की नावें किराये पर लेकर नैनी झील में चलाने की बात भी कही जाती है। लेकिन इसी वर्ष 18 नवम्बर 1880 को आये बड़े महाविनाशकारी भूस्खलन की वजह से यह प्रयास कमजोर पड़ गए।

नैनी झील में शुरुवात में चलने वाली क़टर टाइप पाल नौकाएं
नैनी झील में शुरुवात में चलने वाली क़टर टाइप पाल नौकाएं

इसके आगे 1890 में सफेद रंग की ‘कटर टाइप’ पाल नौकाएं औपचारिक तौर पर चलनी शुरू हुई। यह नौकाएं नैनी झील में पल-पल में दिशा बदलने वाली हवाओं के प्रभाव में अक्सर पलट जाया करती थीं, इसलिए लगातार इनकी इस कमी को दूर करने के प्रयास चलते रहे। इसी दौर में 1897 में नगर में ‘नैनीताल सेलिंग क्लब’ की स्थापना हुई। कहते हैं की इस क्लब के पास मशहूर ‘Wave Dee’ सहित ‘skimming Dish’ व ‘Soceres’ सहित अलग-अलग प्रकारों की करीब आधा दर्जन नावें थीं। आगे 1910 में सेना से सम्बंधित दो उद्यमी भाइयों-मेजर सी.डब्लू. कैरे व कैप्टन एफ. कैरे नैनी झील के लिए (One Design) प्रकार की नावों का विचार लेकर आये। उनकी पहल पर पहली तीन इंग्लैंड के कारीगरों के द्वारा ‘लिंटन होप’ प्रकार की नौकाओं का निर्माण हुआ। इस बात के रिकॉर्ड मौजूद हैं कि यह तीनों नावें पहले ही दिन तेज पश्चिमी ‘चीना’ हवाओं की वजह से क्षतिग्रस्त हो गयीं। इसके बाद भी अनेक सुधार होते रहे, और आखिर आज के दौर की ‘लिंटन होप हाफ रेटर’ प्रकार की नावें बन पायीं। कैरे भाइयों की पहल पर ही 1910 में नैनीताल याट क्लब (एनटीवाईसी) की स्थापना हुई। इसी वर्ष बनारस चेलेंज कप पाल नौका दौड़ प्रतियोगिता भी हुई, जो सबसे पुरानी है। तब एनटीवाईसी में मई से अक्टूबर तक सेलिंग यानी पाल नौकायन होता रहता था। जून माह में फेंसी ड्रेस डांस तथा अक्टूबर में सेलर्स डिनर आयोजित होता था। यह जानना भी दिलचस्प होगा कि तब भी यह नौकाएं रंग-बिरंगी नहीं थीं, वरन 1937 में सर्वप्रथम रंग-बिरंगी तितलियों सी नजर आने वाले आज के दौर की पाल नौकाएं झील में आईं।

देश आजाद होने पर कोचीन जाने से इस तरह बची पाल नौकाएं

नैनीताल। अंग्रेजों के दौर में एनटीवाईसी की सदस्यता केवल अंग्रेजों को ही मिल पाती थी। नगर के मौजूदा बोट हाहस क्लब के 1947 में स्थापित होने की कहानी भी कम दिलचस्प नीं है। इसकी स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाने वाले साहनपुर स्टेट (जिला बिजनौर) के राजकुमार गिरिराज सिंह को अंग्रेजों ने नैनीताल याट क्लब की सदस्यता का फार्म देने में ही आनाकानी की थी। तब गिने चुने भारतीय ही इस क्लब के सदस्य होते थे। लेकिन सिंह ने 1945 में किसी तरह सदस्यता हासिल कर ली। बोट हाउस क्लब पर कॉफी टेबल बुक लिखने वाले कमोडोर वीर श्रीवास्तव और राजकुमार सिंह के पुत्र शशि राज सिंह के अनुसार 1947 में देश के आजाद होने के समय नैनीताल याट क्लब की समस्त संपत्ति का सौदा कोचीन के बोट हाउस क्लब से हो गया था, लेकिन राजकुमार गिरिराज सिंह ने क्लब की समस्त संपत्ति खुद खरीद ली, और अंग्रेजों के जाने के बाद इसे क्लब को वापस बिना कोई धनराशि लिए दान कर दिया। साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवार लाल नेहरू से संपर्क कर क्लब को नगर पालिका से जमीन लीज पर दिलवा कर इस पह वर्तमान बोट हाहस क्लब स्थापित किया गया़।

इस बार आएंगी नई पाल, अक्टूबर में होगी राष्ट्रीय स्पर्धा, आम लोग भी कर पाएंगे पाल नौकायन

नैनीताल। अगले एक माह के भीतर नैनी झील में नए रंग-बिरंगे पाल के साथ नई नौकाएं आने जा रही हैं। क्लब के कमोडोर वीर श्रीवास्तव ने बताया कि इन नौकाओं पर अक्टूबर माह में अखिल भारतीय स्तर की सेलिंग रिगाटा यानी पाल नौका दौड़ का आयोजन किया जाएगा। इस स्पर्धा के दौरान देश के नामचीन पेंटर-दिवंगत एमएफ हुसैन के पुत्र शमशाद हुसैन व सुदीप रॉय सहित अन्य अनेक पेंटर नैनी झील व पाल नौकाओं के चित्र बनाएंगे, जिनकी नीलामी से प्राप्त होने वाले धन को उत्तराखंड के गत वर्ष के दैवीय आपदा पी़ितों की मदद के लिए सरकार को दिया जाएगा। साथ ही आम लोग भी पाल नौकाओं की सवारी कर पाएंगे, इस हेतु गर्वर्नर्स बोट हाउस क्लब के पास की भूमि पर पर्यटकों के लिए नई जेटी यानी नौका स्टेंड स्थापित किया जाएगा। क्लब आम बच्चों को पाल नौकायन सिखाने के लिए मुफ्त में सिखाने की शुरुआत भी करने जा रहा है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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