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ऐसा क्या हुआ कि भारतीय सेना के साथ युद्धाभ्यास के बाद ‘शांति’ की बात करने लगे अमेरिकी जनरल ?

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अमेरिकी जनरल ने जताई भारतीय सेना के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करने की चाह

रानीखेत, 29 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास-2018 का शनिवार को एक भव्य समारोह के साथ चौबटिया (उत्तराखंड) में समापन हो गया। इस मौके पर अमेरिकी जनरल ने कहा कि वह पिछले दो सप्ताह से चल रहे प्रक्षिक्षण से काफी संतुष्ट व प्रसन्न हैं। यकीनन भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है और युद्ध अभ्यास 2018 पूरी तरह से सफल सिद्ध हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अमेरिकी सेना भारतीय सेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करना चाहेगी। वहीं सैन्य अभ्यास में शामिल गरुड़ डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल कविंद्र सिंह ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास अति लाभप्रद सिद्ध हुआ है जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में एक साथ काम करने की काबिलियत में सक्षमता हासिल की है।
समापन अवसर पर दोनों देशों की सैन्य दलों ने शानदार परेड की, जिसकी सलामी अमेरिकी सेना के मेजर जनरल विलियम ग्राहम, डिप्टी कमांडिंग जनरल 1 कोर तथा भारतीय सेना से गरुड़ डिवीजन कमांडर मेजर जनरल कविन्द्र सिंह ने संयुक रुप से ली। समुद्र तल से तकरीबन सात हजार फीट की ऊँचाई पर घने जंगलों में पिछले दो सप्ताह से दोनों पक्षों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों जैसे कि रेड, कॉर्डन और खोज-बचाव आदि के लिए अभ्यास किया गया। आतंकवादियों की निगरानी, ट्रैकिंग और पहचान, लड़ाई के लिए विशेषज्ञ हथियार का उपयोग, आईईडी तटस्थ करने और प्रभावी संचार स्थापित करने के लिए कला उपकरणों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। भारतीय व अमेरिकी सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परेड को देखा।
गौरतलब है कि भारतीय सेना की 15 गढ़वाल राइफल्स व अमेरिका से 1-23 इन्फैंट्री रेजीमेंट ने फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास तथा कमांड पोस्ट अभ्यास में भारतीय सेना की गरूड डिवीजन तथा अमेरिकी सेना की सातवीं इन्फैंट्री डिवीजन ने भाग लिया, तथा 14 डोगरा व 13 सिख ने भी दिया।

नैनीताल की खूबसूरती देख लड़ना भूल बैठी अमेरिकी सेना !

नैनीताल, 23 सितंबर 2018। चौबटिया-रानीखेत में भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभयास-2008 के लिए आई अमेरिकी सेना प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की प्राकृतिक खूबसूरती के आकर्षण में ऐसी खोई कि युद्ध और युद्धाभ्यास भूल बैठी। दो वर्ष पूर्व भी नैनीताल आये अमेरिकी सेना के कुछ सैनिकों के दिलो-दिमाग पर शायद नैनीताल की खूबसूरती का ऐसा असर था कि वे पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले रानीखेत और डिलीसियस सेब की नगरी चौबटिया छोड़ रविवार का समय निकालकर नैनीता आ गये और यहां इस दौरान हो रही भारी बारिश के बावजूद अमेरिकी सैनिकों व सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी जनरल विलियम ग्राहम की अगुवाई में नगर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नगर की शान माल रोड के साथ ही नैनी झील, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर और मल्लीताल स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा सहित अनेक अन्य स्थानों पर यहां की खूबसूरत वादियों का लुप्त उठाया और यहां की संस्कृति की झलक भी देखी, तथा इसकी काफी प्रशंसा की। भ्रमण के दौरान भारतीय सेना की ओर से चौबटिया 99 ब्रिगेड के कर्नल हर्ष मिश्रा व अन्य लोग भी उनके साथ रहे। विदित हो रानीखेत चौबटिया में भारत-अमेरिका का 14वां संयुक्त युद्धाभ्यास पिछली 16 सितंबर से चल रहा है जो 29 सितंबर तक चलेगा। संयुक्त युद्धाभ्यास कार्यक्रम में अमेरिकी सेना के 350 सैनिक व सैन्य अधिकारीयो का दल प्रतिभाग कर रहा है। रविवार को वे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने के लिए नैनीताल पहुंचे थे।

यह भी पढ़ें : मोदी की कूटनीति का असर: भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास इस तरह हुआ शुरू

चौबटिया, रानीखेत 16 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2018 का शुरूआती समारोह आज उत्तराखंड के चौबटिया में आयोजित किया गया । इस समारोह की शुरूआत राष्ट्रगान – ‘जन गण मन ….’ एवं ‘द स्टार स्पैन्गल्ड बैनर’ के साथ हुई। इस अवसर पर दोनों देशों के झंडे फहराये गये। भारतीय एवं अमेरिकी सैनिक एक दूसरे के साथ खड़े रहे तथा समारोह के दौरान दोनों देशों के दो वरिष्ठ सैन्यधिकारियों को रस्मी सैल्यूट दिये

इस संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की ओर से प्रथम इंफैन्ट्री बटालियन, 23 इंफैन्ट्री रेजिमेन्ट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 7 इंफैन्ट्री डिविजन ने प्रतिनिधित्व किया जबकि भारतीय सेना की ओर से कांगो ब्रिगेड, गरूड़ डिविजन, सूर्या कमान ने प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर गरूड़ डिविजन के जनरल ऑफीसर कमांडिंग ने अमेरिकी सैनिकों का स्वागत किया तथा उन्होंने अपने उद्घाटन भाशण में भारत और अमेरिका की इस प्रकार की साझेदारी को प्रजातंत्र, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय को दोनों देशों के लिए मूल्यवान बताया।

इस दो सप्ताह तक चलनेवाले सैन्य युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना तथा भारतीय सेना के सूर्या कमान की ओर से बराबर संख्या में सैन्य टुकड़ियॉं हिस्सा ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास के दौरान जवाबी एवं आतंकवाद विरोधी कार्रवाईयों से निपटने की उनकी कार्यकुशलता तथा तकनीकी कौशल देखने को मिलेगा। इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं की ओर से निगरानी तथा ट्रेकिंग, उपकरण, आतंकवादियों से निपटने के लिए विशेष हथियारों, विस्फोटक और आईईडी डिटेक्टर्स अथवा नवीनतम संचार उपकरणों का प्रयोग किया जायेगा। दोनों देश संयुक्त रूप से किसी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए एक सुविकसित कुशल ड्लि को अमल में लाकर योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेगें जिसे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए आयोजित ऑपरेशनों में प्रयोग किया जा सके। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ पारस्परिक लाभ हेतु विविध विषयों पर एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने के लिए विचार-विमर्श भी करेगें।

यह भी पढ़ें : भारत-अमेरिका की सेनाएं उत्तराखंड के चौबटिया में करेंगी युद्धाभ्यास, ‘टू प्लस टू’ वार्ता में हुआ रक्षा करार

नई दिल्ली, 8 सितम्बर 2018। भारत और अमेरिका की सेनाएं आपस में सहयोग बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 16-29 सितंबर के दौरान उत्तराखंड के चौबटिया में वार्षिक ‘युद्धाभ्यास’ करेंगी। अधिकारियों के अनुसार यह अभ्यास आतंकवाद निरोधक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित होगा।

इस साल के अभ्यास की परिसीमा और सघनता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में वृद्धि के आलोक में ज्यादा व्यापक होगी। उन्होंने कहा कि हर पक्ष से करीब 400 सैनिकों के हिस्सा लेने की संभावना है।  अमेरिका और भारत के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग में पिछले दो-चार सालों में नयी रफ्तार नजर आई है।

गुरुवार को दोनों देशों के बीच हुआ था अहम रक्षा करार 
गुरुवार को भारत और अमेरिका के बीच पहली ‘टू प्लस टू’ वार्ता के बाद यहां दोनों के बीच एक रक्षा करार पर हस्ताक्षर हुए जिसके तहत भारतीय सेना को अमेरिका से महत्वपूर्ण और एन्क्रिप्टिड (कूट रूप से सुरक्षित) रक्षा प्रौद्योगिकियां मिलेंगी। ‘टू प्लस टू’ वार्ता में दोनों देशों ने सीमापार आतंकवाद, एनएसजी की सदस्यता के भारत के प्रयास और विवादित एच1बी वीजा के मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पिओ तथा रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस से वार्ता में दोनों देशों ने उनके बीच हॉटलाइन भी स्थापित करने का फैसला किया। स्वराज ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रथम वार्ता के एजेंडे पर संतोष जताया और इसमें हुई बातचीत का ब्योरा रखा।

पोम्पिओ ने ‘संचार, संगतता, सुरक्षा समझौता’ (कॉमकोसा) को संबंधों में ‘मील का पत्थर’ करार दिया, वहीं सीतारमण ने कहा कि करार भारत की रक्षा क्षमता और तैयारियों को बढ़ाएगा। कॉमकोसा करार होने के बाद भारत अमेरिका से महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियां हासिल कर सकेगा और अमेरिका तथा भारतीय सशस्त्र बलों के बीच अंतर सक्रियता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क तक भारत की पहुंच होगी। यह करार अमेरिका से मंगाए गए रक्षा प्लेटफॉर्मों पर उच्च सुरक्षा वाले अमेरिकी संचार उपकरणों को लगाने की भी इजाजत देगा।

स्वराज ने कहा कि यह वार्ता दोनों देशों के नेतृत्व की रक्षा और सुरक्षा मुद्दों पर द्विपक्षीय सामरिक संचार को और अधिक बढ़ाने की आकांक्षा झलकाती है।

लखनऊ, 10 सितंबर 2018। सेना के मध्य कमान मुख्यालय के तत्वावधान में भारत-अमेरिका के बीच आपसी रक्षा समन्वय के तहत संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2018 आगामी 16 से 29 सितंबर 2018 तक उत्तराखंड के चौबटिया में किया जायेगा। दोनों देशों के बीच आयोजित होनेवाला यह 14वॉं संयुक्त युद्धाभ्यास होगा। इस युद्धाभ्यास के दौरान अमेरिकी एवं भारतीय सेनाएॅं एक साथ मिलकर पर्वतीय जटिल परिस्थितियों में काउन्टर इंसर्जेंसी एवं काउन्टर आतंकवाद के साथ लड़ने का अभ्यास करेगें। दो सप्ताह तक चलनेवाले इस संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की लगभग 350 सैन्यकर्मियों की एक टुकड़ी और इतनी सैन्यकर्मियों की एक टुकड़ी भारतीय सेना के गरूड़ डिविजन की ओर से भाग लेगी। इस युद्धाभ्यास को इस तरह से योजनाबद्ध किया गया है जिसके तहत दोनों देशों की सैन्यटुकड़ियॉं एक दूसरे की संगठनात्मक, हथियारों एवं सैन्य उपकरणों से आसानी से जुड़कर कार्य कर सकें। संयुक्त युद्धाभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियॉं रणनीतिक, तकनीकि, कार्रवाई एवं ऑपरेशनल अनुभवों को एक दूसरे से साझा करेगें। यह संयुक्त युद्धाभ्यास का समापन दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियों द्वारा आतंकवाद के विरूद्ध संयुक्त ऑपरेशन के प्रदर्शन के साथ होगा।

दोनों देशों ने इस संयुक्त युद्धाभ्यास के क्षेत्र एवं क्रिया-कलापों को बढ़ाने का निर्णय वर्शों पहले से लिया है। इस युद्धाभ्यास के तहत डिवीजन मुख्यालय स्तरीय कमान पोस्ट अभ्यास, एक इन्फैन्ट्री बटालियन द्वारा फील्ड टेªनिंग अभ्यास के साथ-साथ दोनों के सैन्य विशेषज्ञों द्वारा आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जायेगी। दोनों देशों की सेनाऐं काउंटर इंसर्जेंसी एवं काउंटर आतंकवाद ऑपरेशनों में विशद् अनुभवी हैं और विपरित परिस्थितियों में वे रणनीतिक एवं ड्लि में एक दूसरे की रणनीति को समझते हैं। दो गणतांत्रिक देशों की सेनाओं के बीच युद्धाभ्यास के लिए उठाया गया यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के कुशल सैन्य अनुभवों को साझा कर सकेंगी।

यह भी पढ़ें : पर्वत शिखर गंगोत्री-III के लिए सेना का पर्वतारोहण अभियान

नैनीताल, 8 सितम्बर 2018। पर्वत शिखर गंगोत्री-III के लिए भारतीय सेना के पर्वतारोहण अभियान दल ने 08 सितंबर 2018 को पर्यनुकुलन का प्रथम चरण पूरा कर लिया है। 20 सदस्यीय यह पर्वतारोहण दल अब दूसरे चरण की ओर चल पड़ा है जो चार दिनों में पूरा कर पर्वत शिखर गंगोत्री-III को फतह हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। गत 28 अगस्त 2018 को भारतीय सेना का पर्वतारोहण अभियान दल पर्वत शिखर गंगोत्री-प्प्प् के लिए रवाना किया गया था।
पर्वत शिखर गंगोत्री-III उत्तराखंड के गंगोत्री क्षेत्र में है जो पश्चिमी गढ़वाल हिमालय में स्थित है। यह पर्वत चोटी गंगोत्री की तीसरी सबसे ऊॅंची पर्वत चोटी है। पर्वत शिखर गंगोत्री-I की ऊॅंचाई 6620 मीटर है वहीं पर्वत शिखर गंगोत्री-II की ऊॅंचाई 6590 मीटर और पर्वत शिखर गंगोत्री-III की ऊॅंचाई 6577 मीटर है।
पर्वतारोहण के लिए उच्च तकनीकी कौशल, विशद अनुभव, उत्साह, शारीरिक एवं मानसिक फिटनेस के साथ-साथ अनुकूल मौसमी परिस्थितियों की जरूरत होती है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए पर्वतारोही दल के सदस्यों की सभी प्रकार के सुरक्षा उपायों को अपनाया जा रहा है और इसकी प्रगति पर नजर रखी जा रही है।

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