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अल्मोड़ा की इस ‘लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड’ उपलब्धि को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

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नवीन समाचार, नैनीताल, 22 फरवरी 2019। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा नेशनल वाटर अवार्ड-2018 के लिये जनपद अल्मोड़ा के कोसी पुर्नजनन अभियान को प्रथम स्थान के लिये चुना गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की महत्वाकांक्षी योजनाओं में एक कोसी पुर्नजनन अभियान को नदियों के संरक्षण/संवर्धन के लिए किये गए प्रयासों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ जिला (उत्तर जोन) हेतु प्रथम स्थान के लिये चुना गया है। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी द्वारा नई दिल्ली में नेशनल वाटर अवार्ड- 2018 दिया गया जिसमें आयुक्त कुमाऊॅ मण्डल राजीव रौतेला, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, पूर्व मुख्य विकास अधिकारी मयूर दीक्षित एवं एनआरडीएमएस के निदेशक प्रो. जेएस रावत, वन क्षेत्राधिकारी संचिता वर्मा इस कार्यक्रम प्रतिभाग किया। गौरतलब है कि माह जुलाई 2018 कोसी पुर्नजनन अभियान के अन्तर्गत कोसी कैंचमेंट एरिया से जुडे स्थानो पर एक घण्टे के भीतर 1 लाख 67 हजार 755 पौधों का रोपण मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नेतृृत्व में किया गया था, जिसे लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया।

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यह भी पढ़ें : अल्मोड़ा में स्थापित होगी टैगोर पीठ, होंगे सुमित्रानंदन पंत पर शोध

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-कुमाऊं विवि ने यूजीसी को भेजा प्रस्ताव
नवीन जोशी, नैनीताल। यूजीसी की एक योजना के तहत कुमाऊं विवि ने अपने अल्मोड़ा परिसर में नोबल पुरस्कार विजता रवींद्र नाथ टैगोर के नाम पर एक पीठ की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पीठ में मुख्यतः अल्मो़डा के ही निवासी हिंदी के प्रख्यात छायावादी सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत के समग्र साहित्य पर शोध एवं गहन अध्ययन किया जाएगा।
कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने बताया कि यूजीसी की 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत देश के विश्वविद्यालयों में देश के महान नोबल पुरस्कार विजता साहित्यकारों व विद्वानों के नाम पर पीठ स्थापित किए जाने की योजना है। रवींद्र नाथ टैगोर का अल्मोड़ा तथा अल्मोड़ा जिले के कौसानी में जन्मे सुमित्रानंदन पंत से गहरा नाता रहा है। इसे स्वयं पंत जी ने ‘श्री रवींद्रनाथ के संस्मरण’ नामक अपनी कृति में लिखा है कि कैसे कवींद्र रवींद्र से उनका सर्वप्रथम 1918 में बनारस के जयनारायण हाईस्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान पहला और 1933 की गर्मियों में रवींद्र के स्वास्थ्य लाभ के लिए अल्मोड़ा आगमन पर वहां के कैंटोनमेंट स्थित भव्य बंगले में प्रवास के दौरान दूसरी बार मिलन हुआ था। रवींद्र ने यहां पंत के किसी मित्र की पहाड़ी कविताएं सुनी थीं, और पंत से कहा था कि पर्वतीय तथा बंगाली भाषाएं आपस में काफी मिलती हैं। पंत यहां से टैगोर के साथ रानीखेत भी गए थे। रानीखेत की जनता ने टैगोर के स्वागत के लिए भव्य कार्यक्रम आयोजित किया था, और इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पंत ने की थी। पंत 1933 में ही शांति निकेतन भी गए थे, और उनकी टैगोर से शांति निकेतन में तीन-चार बार भेंट हुई थी। पंत रवींद्र से काफी प्रभावित थे, और इसलिए उन्होंने रवींद्र पर पांच लेख-कवींद्र रवींद्र, रवींद्रनाथ का कृवित्व, रवींद्रनाथ और छायावाद, श्री रवींद्रनाथ के संस्मरण और रवींद्र के प्रति भावांजलि लिखे थे। इन्हीं संदर्भों के आधार पर रवींद्र के नाम से अल्मोड़ा स्थित कुमाऊं विवि के एसएसजे परिसर में रवींद्र नाथ टैगोर पीठ स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार कर यूजीसी के महानिदेशक का भेजा जा रहा है। प्रो. धामी ने उम्मीद जताई कि अल्मोड़ा में हिंदी के शोधार्थी उसी माहौल में बैठक अधिक बेहतर तरीके से समझ पाएंगे कि कैसे यहां पंत ने अपनी कालजयी रचनाएं लिखीं, और वह भी वैसा ही कुछ मौलिक चिंतन करते हुए लिखने के लिए भी प्रेरित हो पाएंगे।

नवीन जोशी

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