नैनीताल जनपद में 113 जंगली फल व सब्जियां भोजन योग्य, इम्यूनिटी बढ़ाने में भी कारगर

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-कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के गृह विज्ञान विभाग द्वारा ‘हेल्थ एंड न्यूट्रियन्ट कंटेंट ऑफ एडोलेसेंस एंड यंग वूमन’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
नवीन समाचार, नैनीताल, 12 सितंबर 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. ललित तिवारी ने बताया कि नैनीताल जिले में करौदा, पांगरी, तेजपत्ता, लिंगुड़ा, खोणिया, वन पिनालु, करी पत्ता, आंवला, घिघांरू, मेहल, भिलमौड़ा, तिमूर एवं बेर जैैसे 113 जंगली फल तथा सब्जियां भोजन में प्रयोग की जा सकती हैं। इनमें फाइबर, सुगर, ट्रैनिन, पोटैशियम, फास्फोरस, नाइट्रोजन, मैग्नेशियम, कैल्शियम, सोडियम, क्रोमियम, मैग्नीज, आयरन, कोबाल्ट, निकिल, कॉपर, जिंक, सेलिनियम, मोलीब्डेनम जैसे पोषक तत्व मौजूद हैं। इनमें से खासकर बेर में पोटैशियम, मैग्नेशियम, कैल्शियम एवं मैग्नीज सहित सर्वाधिक एंटी आक्सीडेंट, करी पत्ता में फ्लेवनॉइड व आंवला में फिनालिक के गुण उपलब्ध हैं, लिहाजा यह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कारगर है।
प्रो. तिवारी ने यह बात कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के गृह विज्ञान विभाग द्वारा शनिवार को ‘हेल्थ एंड न्यूट्रियन्ट कंटेंट ऑफ एडोलेसेंस एंड यंग वूमन’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही। संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. एनके जोशी ने करते हुए कहा कि हर किशोरी को पोषक तत्वों से युक्त भोजन तथा सभी को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला भोजन लेना चाहिए। जनपद की अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रश्मि पंत ने मुख्य वक्ता के रूप में किशोरियों की विभिन्न समस्याओं व उनके निदान के साथ ही सरकारी योजनाओ की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि लौह तत्व की कमी से एनीमिया रोग हो सकता है। इसकी दवाइयॉ अस्पताल से ले सकते है। विभागाध्यक्ष प्रो. लता पांडे ने वेबीनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन तथा धन्यवाद डा. छवि आर्या ने किया। गढ़वाल विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा नैथानी, पंतनगर विश्वविद्यालय की संयुक्त निदेशक शोध एवं प्रसार प्रो. दत्ता ने भी विषय पर जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रो. कमल पाण्डे, डा. गीता तिवारी, तुलिका, अनुलेखा बिष्ट, डा. रितेष शाह, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनी शेरवानी हिल टॉप की फूलों की बगिया

नैनीताल। नगर के सर्वश्रेष्ठ होटलों में गिने जाने वाले और अपनी हर मौसम में खिलने वाले फूलों की बगिया के लिए प्रसिद्ध शेरवानी हिल टॉप इन में इन दिनों फूलों की महक व खूबसूरती सैलानियों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी हुई है।

यहां बगिया के साथ ही हर ओर पिटोनिया, एंट्रीनाम, सीटविलम, डॉग फ्लावर, कैरेंडोला, लैक्स पियर, फ्लॉक्स, डेन्थास, फासेलर, केली, कैनफ्लावर, ग्लाइडोला, डहेलिया, केरीहेप्स, टाइगर लिली, पॉपी, कैरोपॉपी, पेपरफ्लावर, पी क्रीपर, जिरेनियम, फियूशिया, डेजी, ऑर्कापेंथास, क्रीपर रोज व क्रीपर आदि देशी-विदेशी फूलों की ऐसी खूबसूरती बिखरी हुई है कि सैलानी इनके आकर्षण में खिंचे चले आ रहे हैं। गर्मियों के मौसम में फूलों की ऐसी बगिया के खिलने में प्रबंधक कमलेश सिंह, दिनेश पालीवाल, बची सिंह रावत, शिवानंद व मदन आदि लोगों की खासी मेहनत साफ नजर आ रही हैं।

पहाड़ों में छाई रसबेरी-हिसालू की बहार

-कुमाउनी के साथ ही हिंदी के भी आदि कवि माने जाने वाले गुमानी ने भी लिखी थीं इस पहाड़ी फल पर कविता
नैनीताल। पहाड़ों पर मई यानी गर्मियों का महीना शुरू होते ही रसबेरी कहे जाने वाले जंगली फल हिसालू की बहार छाने लगी है। यह फल हिसालू कैसा होता हैं, इस बारे में कुमाउनी के साथ ही हिंदी के भी आदि कवि कहे जाने वाले लोक रत्न पन्त ‘गुमानी’ (जन्म 1791-मृत्यु 1846) जी की कविता बताती है – ‘हिसालू की जात बड़ी रिसालू , जाँ जाँ जाँछे उधेड़ि खाँछे, यो बात को क्वे गटो नी माननो, दुद्याल की लात सौणी पड़ंछ’ यानी हिसालू की नस्ल बड़ी नाराजगी भरी है, जहां-जहां जाता है, बुरी तरह खरोंच देता है, तो भी कोई इस बात का बुरा नहीं मानता, क्योंकि दूध देने वाली गाय की लातें खानी ही पड़ती हैं।

1815 में ही हिंदी के पितामह कहे जाने वाले भारतेदु हरिश्चंद्र के जन्म से कई दशक पूर्व हिंदी खड़ी बोली में हिंदी काव्य की रचना करने वाले गुमानी हिसालू पर आगे कहते हैं – ‘छनाई छन मेवा रत्न सगला पर्वतन में, हिसालू का तोपा छन बहुत तोफा जनन में, पहर चौथा ठंडा बखत जनरौ स्वाद लिंड़ में, अहो में समझछुं, अमृत लग वास्तु क्या हुनलो ?’ यानी पर्वतों में तरह-तरह के अनेक रत्न हैं, हिसालू के बूंदों से फल भी ऐसे ही तोहफे हैं, दिन के चौथे प्रहर में इनका स्वाद लेना चाहिए, वाह मैं समझता हूँ इसके सामने अमृत का स्वाद भी क्या होगा। बेहद सीमित मात्रा में मिलने वाले हिसालू के छोटे से फल अभी मुख्यालय में बाजारों में तो नहीं आये हैं, परंतु हल्द्वानी रोड सहित कई स्थानों पर इसके फल पकते दिखाई दे रहे है।

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