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28 मई को 10 हजार महिलाओं के लिये ‘पैडमैन’ बनेगी उत्तराखंड सरकार, जानें क्यों…?

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राज्यमंत्री रेखा आर्य ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता कर बताया कि 28 मई को ‘मेनस्ट्रूअल हाइजीन डे’ (मासिक धर्म स्वच्छता दिवस) है। इस दिन कार्यक्रमों के  माध्यम से महिलाओं और किशोरियों में सेनेटरी नैपकिन के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी। जिलों में बालिका इंटर कॉलेज में कार्यक्रम कराने की कोशिश रहेगी। अगर स्कूल बंद रहेंगे तो सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम कराए जाएंगे। सेनेट्री नेपकीन के साथ एक छाता भी महिलाओं और बेटियों को दिया जाएगा, और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का संदेश भी दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें : पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने मोदी को लिखी पाती, कहा :  आपदा से निपटने को भारत, नेपाल, भूटान व तिब्बत बनाएं प्राकृतिक मोर्चा

चंडी प्रसाद भट्ट

नैनीताल। गांधी शांति पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध पर्यावरणविद पद्मभूषण पुरस्कार प्राप्त चंडी प्रसाद भट्ट ने उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को आपदा के प्रति अधिक संवेदनशील बताते हुए इस चुनौती से कारगर तरीके से निपटने के लिए भारत, नेपाल, भूटान, तिब्बत का प्राकृतिक मोर्चा बनाने की आवश्यकता जताई। खुलासा किया कि वह इस हेतु प्रधानमंत्री को भी पत्र के माध्यम से सुझाव भेज चुके हैं।
उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में सोमवार को ‘आपदा में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि बाजार के बढ़ते दबाव की वजह से हिमालय पर खतरा बढ़ गया है। कहा कि बाजार ही है, जिसके कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ में लोग जोर से बोलने में भी संकोच करते थे, वहां हेलीकॉप्टरों के जरिये यात्रियों को ले जाया जा रहा है। यह क्षेत्रीय पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि हिमालय के जल, जंगल, जमीन को बचाने की जरूरत है। नदियों के किनारे अतिक्रमण तथा अन्य प्राकृतिक बदलावों की वजह से आपदा की संवेदनशीलता और अधिक बढ़ गई है। एक दुःखद पक्ष यह भी है कि आपदा की यह संवेदनशीलता देश व राज्य के सीमावर्ती जिलों में अधिक है। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी ने अपनी केदारनाथ आपदा पर लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए आपदा की घटनाओं की रिपोर्टिंग के दौरान के अनुभवों व खासकर इस दौरान देखे जाने योग्य तथ्यों को रेखांकित किया। अकादमी के निदेशक अवनेंद्र सिंह नयाल ने भी विचार रखे। कार्यशाला में विभिन्न जिलों के आपदा प्रबंधन अधिकारी, व मीडियाकर्मी शामिल रहे।

‘एक देश’ की ‘सिस्टर कंसर्न’ बन गया अपना उत्तराखंड

  • व्यापार, शिक्षा व संस्कृति का विनिमय भी होगा
  • बाली का सिस्टर सिटी बनेगा अपना उत्तराखंड 
  • आरटीआई की तर्ज पर बने जन शिकायत निस्तारण अधिनियम
  • आज उत्तराखंड इंडोनेशिया के विश्व प्रसिद्ध हिंदू बहुल बाली द्वीप के साथ सिस्टर सिटीज समझौता 
  • बाली के गर्वनर आज से दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर, जॉलीग्रांट में सतपाल महाराज करेंगे अगवानी

देहरादून। उत्तराखंड आज बाली का सिस्टर सिटी बन गया है। 23 अप्रैल 2018 को उत्तराखंड और इंडोनेशिया के विश्व प्रसिद्ध हिंदू बहुल बाली द्वीप के साथ सिस्टर सिटीज समझौता हो गया है, जिसके तहत दोनों को सिस्टर सिटीज घोषित किया गया है। यह समझौता बाली के गर्वनर आईएमएम पास्तिका के उत्तराखंड दौरे के दौरान हुआ। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान पास्तिका ने प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मुलाकात की और हरिद्वार और ऋषिकेश का दौरा भी किया।

बाली के गवर्नर ने उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की उपस्थिति में देहरादून में प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ सिस्टर सिटीज समझौते पर दस्तखत किये। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि इस समझौते से भारत और इंडोनेशिया दोनो को फायदा होगा। समझौता ज्ञापन में हस्ताक्षर से दोनो देशों के पर्यटकों का पर्यटन में आसानी होगी। योग व आध्यात्मिकता की खोज में आने वाले पर्यटकों को उत्तराखंड में सम्मान से सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि इस समझौते से केवल पर्यटन गतिविधियां ही नहीं बढ़ेंगी बल्कि दोनो राज्यों के बीच अनौपचारिक रिश्ते भी बनेंगे। इससे एक ओर जहां पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी वहीं व्यापार, शिक्षा व संस्कृति का विनिमय भी होगा। अपनी यात्रा के दौरान गवर्नर हरिद्वार में हर की पौड़ी में गंगा आरती में भी शामिल होंगे। 24 अप्रैल की सुबह को हरिद्वार व ऋषिकेश के अन्य दर्शनीय स्थलों पर भी जाएंगे। बता दें कि बाली इंडोनेशिया का एक राज्य है। बाली की 90 फीसद आबादी हिंदू मतावलंबी है। बाली करीब 10 हज़ार सुंदर मंदिरों, कला, नृत्य और संगीत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। बाली और भारत की संस्कृति में काफी समानताएं हैं। 

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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