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देश एवं दुनिया की बड़ी दूरबीनों पर हुई चर्चा…

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नवीन समाचार, नैनीताल, 08 अप्रैल 2021। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर सोमवार से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला बृहस्पतिवार को चौथे दिन भी जारी रही। इस दौरान एनसीआरए के प्रो जयराम चेंगलुर ने भारत की सबसे बड़ी दूरबीन जीएमआरटी पर बोलते हुए कहा कि इस अंतराष्ट्रीय सुविधा की भविष्य में एस्ट्रोफिजिकल जेटस के अध्ययन में उपयोगिता और अधिका बढ़ने वाली है। एरीज के संस्थापक निदेशक प्रो रामसागर ने देश की सबसे बड़ी दृश्य प्रकाश में कार्य करने वाली एरीज की 36 मी देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप-डॉट के निकट भविष्य में अवरक्त तंरगदैर्घ्य पर कार्यकरने की वैज्ञानिक क्षमता पर बात की। आईआईए के डा डी के साहू ने लेह स्थित विश्व की सबसे ऊंचाई में स्थित 2 मीटर व्यास की हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप-एचसीटी के बारे में, एरीज के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष एवं एस्ट्रोसेट के प्रमुख अन्वेषक प्रो पीसी अग्रवाल ने भारत के अंतरिक्ष स्थित बहुतरंगदैर्घ्यी प्रेक्षण सुविधा एस्ट्रोसेट के एक्स-रे पर कार्य क्षमताओं, वरिष्ठ अभियंत्रण विशेषज्ञ डा एसएन टंडन ने एस्ट्रोसेट के परावैगनी तरंगदैर्घ्य पर प्रेक्षण क्षमताओं और इससे प्राप्त महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध परिणामों की चर्चा की।
वहीं इसरो के डा वी गिरीश के संचालन में आयोजन दूसरे सत्र में भाभा परमाणु केंद्र के के डा केके सिंह ने गामा-किरणों के विकिरण के अनुपूरक चेरेनकोव टेलीस्कोप पर, टीआईएफआर की डा वर्षा चिटनिस ने हेगर टेलीस्कोप एवं अन्य गामा किरणों पर काम करने वाली सुविधाओं, एनसीआरए के प्रो भाल चंद्र जोशी ने भारत और अंतराष्ट्रीय पल्सार टाईमिंग अरेय से गुरुत्व तरंगों के अनुसंधान में जीएमआरटी के योगदान, अयुका के आरसी आनंद ने 8 से 10 मीटर वर्ग की दूरबीनों द्वारा विज्ञान के संदर्भ में और डा देवेंद्र ओझा ने भी संबंधित विषय पर चर्चा की। आयोजक समिति के डा शशिभूषण पांडेय ने बताया कि 9 अप्रैल को ‘भविष्य की खगोलीय प्रेक्षण सुविधाओं और रणनीति‘ पर चर्चा होगी।

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-‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का तीसरा दिन
नवीन समाचार, नैनीताल, 07 अप्रैल 2021। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर सोमवार से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान टीआईएफआर के प्रो. सुदीप भट्टाचार्या की अध्यक्षता में आयोजित तीसरे दिन के पहले सत्र की शुरुआत करते हुए अयुका पुणे के प्रो. रंजीव मिश्रा ने अपने एक्स-रे बाइनरी-माइक्रो क्वाजार विषय पर व्याख्यान के माध्यम से बताया कि वर्तमान में भारत में इस विषय पर शोध और प्रेक्षण सुविधायें अत्यंत उन्नत अवस्था में है। आगे कोलकाता से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. संदीप चक्रवर्ती ने पिछले 3 दशकों में इस विषय पर हुए शोधों और ज्ञात चुनौतियों, आईआईटी हैदराबाद के मयूख पहाड़ी ने एक्स-रे और रेडियो तरंग दैर्घ्य पर हो रहे शोध कार्यों, आईसर मोहाली के डा. अरुण बेरी ने भारतीय अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसेट द्वारा एक्स-रे तरंगदैर्घ्य में प्राप्त परिणामों, एरीज के डा. इंद्रनील ने एक्स-रे बाइनरी के आसपास जेट्स की उपस्थिति, एरीज की शोध छात्रा शिल्पा सरकार तथा डा. दीपक देबनाथ और कौशिक चटर्जी कोलकाता ने एक्स-रे बाइनरी के द्वारा उत्पादित कृष्ण छिद्रों यानी ब्लेक होल्स पर चर्चा की।
वहीं पीआरएल अहमदाबाद के डा. सचिन नायक की अध्यक्षता में आयेाजित द्वितीय सत्र में आईआईटी गुवाहाटी के डा. संतब्रतादास ने एक्स-रे बाइनरी से उत्पादित कृष्ण छिद्रों के विभिन्न आयामों, आईआईटी कानपुर के प्रो. जेएस यादव ने भारतीय अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसेट द्वार ालिए गए माइक्रो क्वाजार के प्रेक्षणों और परिणामों के साथ ही तेजपुर विश्वविद्यालय की कविता डेका, क्राइस्ट विश्वविद्यालय बैंगलुरु की डा. स्नेहा मुदाम्बी, उस्मानिया विश्वविद्यालय की डा.मालुएवंडा श्रीराम और आईआईटी इंदौर की डा. इन्दु ने भी संबंधित विषय पर अपने शोध कार्यों को प्रस्तुत किया। आयोजक समिति के सदस्य डा. शशिभूषण पांडेय ने बताया की अब बृहस्पतिवार को भारत में वर्तमान में उपलब्ध खगोलीय प्रेक्षण सुविधायों के बारे में विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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-‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का दूसरा
नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अप्रैल 2021। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर सोमवार से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान दूसरे दिन के पहले सत्र का औपचारिक शुभारंभ करते हुए अयुका पुणे के वैज्ञानिक प्रो. दीपांकर भट्टाचार्या ने गामा किरणों के महाविस्फोटों (जीआरबी), सुपरनोवा और उनके आपसी सम्भावित संबंधों पर जानकारी दी। उन्होंने संभावना जताई कि कुछ जीआरबी हाल में खोजे गए गुरुत्व तरंगो को उत्सर्जित करने वाले खगोलीय पिण्डांे से संबंधित भी हो सकते हैं। वहीं टीआईएफआर के हर्ष तेंदुलकर ने तेज रेडियो महाविस्फोट (एफआरबी) का जिक्र करते हुये उनके जीआरबी से संबंधो पर प्रकाश डाला। डा. पूनम चंद्रा द्वारा संचालित इस सत्र में अयुका की डा. शबनम ने जीआरबी के बहुत शुरुआती चरणों पर चर्चा की। एरीज की डा. कुंतल मिश्रा ने जीआरबी के आफ्टर ग्लो यानी उत्तर दीप्ति के चरणों की व्याख्या की। चेन्नई के डॉ. केजी अरुण ने एक विशेष प्रकार के जीआरबी का गुरुत्व तरंग स्रोतांे के साथ सम्बंधों पर चर्चा की। एरीज के शोध छात्र राहुल गुप्ता, अमित कुमार और अंकुर घोष ने भी अपने शोध कार्यो को इस सत्र में प्रस्तुत किया।

वहीं रमन शोध संस्थान की डा. नयन तारा गुप्ता के संचालन में आयोजित द्वितीय सत्र में आईआईटी मुम्बई के डा. वरुण भालेराव ने जीआरबी और सुपरनोवा से गुरुत्व तरंगो के सम्भावित उत्सर्जन पर, एनसीआरए टीआईएफआर के शोध छात्र डा. ए जेनयना और सुरजीत मंडल तथा एरीज के डिम्पल, अमर आर्यन एवं डा. अंजशा आदि छात्र-छात्राओं ने अपने शोध कार्यो को प्रस्तुत किया। अंत में डा. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि सात अप्रैलको एक्स बाइनरी-माइक्रो क्वासार विषय पर चर्चा होगी।

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-‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला हुई प्रारंभ
नवीन समाचार, नैनीताल, 05 अप्रैल 2021। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में सोमवार से देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारंभ हुई। कार्यशाला में देश के लगभग 100 से अधिक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभागिता की। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का औपचारिक उद्घाटन करते हुए एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बताया कि यह कार्यशाला खगोल शास्त्र के वैज्ञानिकों द्वारा ‘स्वतंत्रता के 75 वर्ष: आजादी का अमृत महोत्सव‘‘ की श्रृंखला में आयोजित किया जा रहा है। आयोजक समिति के सदस्य डा. शशिभूषण पांडेय ने प्रतिभागियों को कार्यशाला के स्वरुप व पृष्ठभूमि के बारे में बताया। आगे एरीज के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. पीसी अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में इस बात पर बल दिया कि भारत अपनी विभिन्न सुविधाओं के माध्यम से वर्तमान में बहुत अच्छी स्थिति में है और आने वाले समय में युवा पीढ़ी को इस दिशा में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रुप से एस्ट्रोसेट, जीएमआटी और 3.6 मी डॉट यानी नैनीताल जनपद स्थित देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप जैसी बहुतरंगदैर्घ्यीय परियोजनाओं के और अधिक दोहन पर बल दिया। वहीं वरिष्ठ खगोलशास्त्री प्रो. अजित केम्भावी ने आने वाले समय में डीप लर्निंग, मशीन लर्निंग एवं आर्टीफिसीयल इंटेलीजेंस के महत्व को बताते हुए कहा कि आने वाले समय में इस प्रकार की उन्नत तकनीकों से खगोल शास्त्र में कई नये प्रकार के खोजें संभव है।
वहीं प्रथम औपचारिक सत्र में प्रो. केपी सिंह ने एम82 और एम87 नामक मंदाकिनियांे का उदाहरण देते हुए बहुतरंगदैर्घ्यीय भारतीय सुविधाओं जैसे कि एस्ट्रोसेट द्वारा लिए गए प्रेक्षण और उसके परिणामों का भी वर्णन किया। आगे आईआईटी इंदौर के प्रो. अमित शुक्ला ने ब्लेजार जेट्स और उनके परिणामों पर चर्चा की। एरीज के वैज्ञानिक डा. सुवेंदु रक्षित ने प्रथम सत्र का संचालन किया। आगे आईएफआर के प्रो. गोपा कुमार टी द्वारा संचालित द्वितीय सत्र में डा. पंकज कुशवाहा, एरीज की वैदेही एस पलिया, विनीत ओझा, जामिया मिलिया इस्लामिया के मैनपाल, तेजपुर विवि के प्राणजुप्रिया, सुवेंदु रक्षित व एनसीआरए की सुमोना नंदी ने भी व्याख्यान दिए। समापन सत्र में विभिन्न प्रतिभागियों ने एजीएन व ब्लेजार के विषयों पर व्याख्यान दिए और शोध छात्रों द्वारा किये गये शोध कार्यो पर चर्चा की गई।

यह भी पढ़ें : अब आप का नाम भी जा सकता नासा के जरिये मंगल ग्रह पर, आवेदन करने का तरीका जारी..

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2021। गत 19 फरवरी, 2021 को नासा का अंतरिक्ष यान मंगल की सतह पर उतरा है। नासा द्वारा भेजा गया रोवर लाल ग्रह पर मानव अभियान से पहले वहां प्राचीन समय में मौजूद सूक्ष्मजीवों के संसार और ग्रह के मौसम व भूगर्भ का पता लगाने के लिए भेजा गया है। खास बात यह भी है कि नासा का अंतरिक्ष यान दुनियाभर के अंतरिक्ष प्रेमियों के नाम भी अपने साथ मंगल ग्रह पर ले गया है। ऐसे खुशकिस्मत लोगों में नैनीताल जनपद के हल्द्वानी की रहने वाली दो ‘साइंस सिस्टर्स’ शिवानी व हिमानी मिश्रा भी शामिल हैं, जिनके नाम भी मंगल ग्रह पर पहुंचे हैं।
यह जानकर यदि आप भी खुद न सही, अपना नाम मंगलग्रह पर भेजने की सोच रहे हैं तो नासा आपको यह मौका दे रहा है। आप https://mars.nasa.gov/participate/send-your-name/future वेबसाइट से अपना नाम भी नासा के जुलाई 2026 में केप कार्निवाल एयर फोर्स स्टेशन फ्लोरिडा से मंगल ग्रह के ‘जेजरो क्रेटर’ पर जाने वाले अंतरिक्ष यान के साथ भेज सकते हैं। आप को बता दें कि इन शब्दों के लेखक ने भी नासा के अगले मार्स मिशन के लिए ‘बोर्डिंग पास’ प्राप्त कर लिया है। (https://mars.nasa.gov/participate/send-your-name/future/certificate/684015807396)
इस बारे में ‘साइंस सिस्टर्स’ शिवानी हिमानी ने लोगों को मंगल ग्रह पर अपने नाम भेजने की प्रक्रिया का बेहतरीन वीडियो तैयार कर यूट्यूब पर अपलोड किया है, जिसमें बहुत ही आसान तरीके से पूरी प्रक्रिया को समझाया गया है।

हिंदी माध्यम का लिंक है : https://youtu.be/yLK9e_YEQsE

अंग्रेजी माध्यम लिंक है : https://youtu.be/apAbAlDZCXU

उल्लेखनीय है कि शिवानी मिश्र हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज से भौतिक विज्ञान में शोध कर रही हैं तथा हिमानी मिश्र महिला महाविद्यालय से भौतिक विज्ञान में एमएससी कर रही हैं। साइंस सिस्टर्स शिवानी, हिमानी को विश्वास है कि भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो जल्द ही मानवयुक्त यान मंगल पर भेजने में कामयाब होगी। दुनिया हमें ज्ञान गुरु के रूप में तो जानती ही है, परन्तु अब हम भारतीयों को विज्ञान गुरु बनने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें : दर्शनीय रहा बृहस्पति और शनि का मिलना..

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 दिसम्बर 2020। मैदानी इलाकों में छाये घने कोहरे से इतर पहाड़ों पर खिले नीले आकाश में शाम ढलने के बाद दक्षिण-पश्चिम आकाश में क्षितिज के पास बृहस्पति और शनि ग्रह बेहद करीब नजर आए। दोनों को इस तरह साथ देखना जहां आम लोगों के लिए आकर्षक व दर्शनीय रहा, वहीं स्थानीय एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में इस दौरान वैज्ञानिकों एवं शोध विद्यार्थियों ने 1.04 व 3.6 मीटर की दूरबीनों से कई सीसीडी कैमरों का उपयोग करते हुए इन पर नजर बनाए रखी तथा दोनों के बीच दूरी, चमक, सापेक्ष वेग आदि के अंतर का मापन किया।

1.4 मीटर और 3.6 मीटर व्यास की दूरबीनों से लिये गए बृहस्पति व शनि ग्रहों के चित्र।

एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे ने बताया कि बृहस्पति ओर शनि की युति प्रत्येक 20 वर्षों में होती है। इससे पूर्व ऐसी लोकप्रिय खगोलीय घटना वर्ष 2000 में हुई थी। उन्होंने बताया कि बृहस्पति और शनि दोनों ही 20 दिसंबर की शाम को चंद्रमा के व्यास से अधिक करीब थे, और 21 दिसंबर की शाम सात बजे मैक्सिमा के समय उनके बीच की कोणीय दूरी इससे भी कम, लगभग 6 मिनट की रह गई। उन्होंने बताया कि दूरबीनों व कैमरों की मदद से इस दौरान के प्राप्त आंकड़ों का और विश्लेषण जारी है।

यह भी पढ़ें : कल आकाश में दिखेगा ऐसा नजारा, जो इससे पहले मुगल काल में देखा गया…

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसम्बर 2020। आगामी 21 दिसंबर 2020 का दिन अनंत ब्रह्मांड एवं अंतरिक्ष का रहस्य जानने के इच्छुक लोगों के लिए बेहद खास होने जा रहा है। इस दिन 397 साल बाद बृहस्पति और शनि ग्रह एक दूसरे के बेहद नजदीक नजर आने वाले हैं। इस दिन इन दोनों ग्रहों को धरती से खुली आंखों से भी देखा जा सकेगा। बताया जा रहा है कि सितंबर माह से ही दोनों ग्रह एक दूसरे के नजदीक बढ़ रहे हैं। ग्रहों का यह अद्भुत मिलन इन दिनों गत 16 दिसंबर से ही एक संयुक्त तारे की तरह चमकता दिखाई दे रहा है और आगामी 21 दिसंबर को दोनों ग्रहों की बीच की दूरी 75 करोड़ किलोमीटर होगी।
Saturn and Jupiterउल्लेखनीय है कि साल 2020 में इंसान बहुत सी खगोलीय घटनाओं का प्रत्यक्ष गवाह रहा है। इस पूरे साल दर्जन भर ऐस्टेरायड यानी क्षुद्र ग्रह धरती के पास से गुजर चुके हैं। वहीं पिछले दिनों उल्का पिंडों की बेहद सुंदर बरसात के भी लोगों को दीदार हुए। अब 397 साल बाद यानी मुगल काल के बाद दूसरी बार बृहस्पति और शनि ग्रह इतना नजदीक देखेंगे, कि एक चमकीले संयुक्त तारे की तरह नजर आयेंगे। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट उपग्रह केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले दो-तीन माह से आकाश में क्षितिज के कुछ अंश ऊपर दो चमकीले पिंड दिखाई दे रहे हैं। आगे-आगे बृहस्पति और उसके पीछे शनि चल रहा है। 21 दिसंबर की रात इन दोनों का अनूठा मिलन दिखाई देगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों बड़े ग्रहों का एक दूसरे के इतना नजदीक आना ग्रेट कंजंक्शन कहलाता है। इस तरह की घटनाएं हर 20 साल बाद होती हैं। लेकिन 21 दिसंबर को दिखने वाला नजारा ग्रेट कंजंक्शन है। इसमें ग्रह आभासीय रूप से एक दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं। बृहस्पति, शनि और धरती के एक सीध में रहने से भी हमें ये नजदीक दिखाई देंगे। इसे खुली आंखों से या साधारण दूरबीन से भी देखा जा सकता है।

यह भी पढ़ें : बड़ी गौरवपूर्ण उपलब्धि : 11 किलोमीटर पैदल चलकर आये उत्तराखंड के 17 बच्चों ने अंतरिक्षयात्री से की ‘सीधी बात’

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की डबरालस्यूं पट्टी में पड़ने वाले तिमली स्थित श्री तिमली विद्यापीठ में निकटवर्ती पांच स्कूलों-राजकीय इन्टर कॉलेज देवीखेत, राजकीय इन्टर कॉलेज चेलुसैंण, सरस्वती शिशु मंदिर, विद्या मन्दिर, आदर्श बाल भारती चेलुसैंण तथा श्री तिमली विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं  को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) में मौजूद रिकी अर्नाल्ड से करीब 10 मिनट तक लाइव बातचीत करने का अभूतपूर्व मौक़ा मिला। ख़ास बात यह भी रही कि अंतरिक्षयात्री से सीधे बात करने का सौभाग्य हासिल करने वाले उत्तराखंड के सुदूर गांवों के इनमें से कई बच्चे 11 किलोमीटर पैदल चलकर भी विद्यालय पहुंचे थे। उनमें अंतरिक्ष को लेकर अपने हर सवाल का जवाब पाने की बेचैनी व खासा कौतूहल था। बच्चों ने अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद आर्नाल्ड से करीब 10 मिनट तक लाइव बातचीत की, और हर वह सवाल पूछा, जिसका उन्हें जवाब चाहिए था। मसलन बच्चों ने पहले से अंग्रेजी में तैयार प्रश्नों के जरिये अंतरिक्ष के अनुभव, स्पेसवॉक, ब्लैकहोल, एलियन को देखने जैसे सवाल पूछे।

उदाहरण के लिए देवीखेत गांव के प्रियांशु ने पूछा, ‘क्या आप अपने परिवार से बात कर पाते हैं ?’, वहीं  अनुज बलूनी ने स्पेस जंक व अमित ने ब्लैकहोल के बारे में सवाल किया। देवीखेत की ही अमृता ने पूछा- do we use all 5 sense in space ? जबकि चेलुसेंण गांव की सृष्टि ने पूछा, क्या ISS से धरती पर होने वाली आतिशबाजी दिखाई देती है ?
अंतरिक्ष यात्री रिकी आर्नोल्ड

इन सवालों के जवाब देते हुए अर्नाल्ड ने बच्चों को बताया कि अंतरिक्ष में जीवन रफ्तार भरा है, काम के बीच यहां पर समय बहुत जल्दी बीत जाता है। अंतरिक्ष का कूड़ा कहां जाता है ? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में कूड़ा न फैले, इस बात का खास ख्याल रखा जाता है। बच्चों को दूसरे ग्रह पर मौजूद एलियन को लेकर भी उत्सुकता थी और उन्होंने अंतरिक्ष में मौजूद अर्नाल्ड से पूछा कि क्या उन्हें वहां एलियन या उनका यान नजर आया। इस पर अर्नाल्ड ने कहा कि अभी तक उन्होंने किसी भी एलियन या उनके यान को नहीं देखा है, अगर वह देखते हैं तो उन्हें जरूर बताएंगे। स्पेस में हम अपनी पांचों ज्ञानेंद्रियों का प्रयोग करते हैं और अपने परिवार से बातचीत भी कर सकते हैं। अर्नाल्ड ने बताया कि अंतरिक्ष से पूरी दुनिया बहुत खूबसूरत दिखती है। श्री तिमली विद्यापीठ के आशीष डबराल के अनुसार, यह बच्चों के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष संचार को जानने समझने के लिए दुर्लभ अवसर था। बच्चे अपने सवालों से जवाब सीधे अंतरिक्षयात्री से पाकर काफी खुश थे।

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कई मायनों में ख़ास है श्री तिमली विद्यापीठ

अंतरिक्ष यात्री रिकी आर्नोल्ड से बात करने के दौरान उत्तराखंड के बच्चे

गौरतलब है कि गांव के बच्चों का अंतरिक्षयात्रियों से संवाद करना कई मायने में खास है। यह उस दौर में हो रहा है जब उत्तराखंड के गांव लगातार वीरान हो रहे हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा, जीवनयापन के लिए लोग पहाड़ों से पलायन कर रहे हैं। ऐसे में तिमली विद्यापीठ सफलता की नई कहानियां लिख रहा है। वैदिक पद्धति से पढ़ाई होने के बावजूद यहां के बच्चे न केवल अंग्रेजी में अच्छा संवाद करते हैं, बल्कि उनके रुचि के विषय अंतरिक्ष और रोबोटिक्स हैं। तिमली विद्यापीठ रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और माइंडफुलनेस प्रोग्राम शुरू करने वाला ग्रामीण उत्तराखंड का पहला विद्यालय है। यही नहीं यहां के बच्चे वर्ल्ड रोबोटिक्स ओलंपियाड में भी हिस्सा ले चुके है

यूरोप में लाइव सुना गया कार्यक्रम

इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विज्ञान वीथिका संस्था के विवेक गौड़ ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के पब्लिक आउटरीचिंग प्रोग्राम के अंतर्गत ‘एमैच्योर रेडियो ऑन द इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ (एरिस) के स्कूलों से संपर्क कार्यक्रम के तहत बच्चों को अंतरिक्षयात्रियों से बात करने का अवसर देने के लिए गत दिनों आवेदन आमंत्रित किये गये थे। फलस्वरूप दुनियाभर के कुल 40 विद्यालयों में भारत से उत्तराखंड के श्री तिमली विद्यापीठ को यह गौरवपूर्व अवसर मिला। इस आयोजन में एरिस संस्था और नासा के  साथ ही, उत्तराखंड टेक्नोलॉजी क्लब, विज्ञान वीथिका, ट्रेकबग संस्था व एचएएल स्काउट्स ग्रुप एमेच्योर रेडियो क्लब लखनऊ आदि संस्थाओं का भी सहयोग रहा। कार्यक्रम को बेल्जियम स्थित स्टेशन ओएन4आईएसएस के टेलीब्रिज की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.संदीप बरुआ ने किया।  यूरोप के कई हिस्सों में (आईएसएस की अंतरिक्ष मे स्थिति अनुसार) इस वार्तालाप को एफएम में 145.800 मेगाहर्ट्ज पर सुना गया।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रही महाशक्ति है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2022 तक भारत अपने दम पर अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेज देगा। न जाने कितनी बच्चों की आंखों में अंतरिक्ष में उड़ने, उसे जानने-समझने का सपना होता है। कुछ ऐसे ही बच्चों के सपनों को इस कार्यक्रम के जरिये पंख फैलाने का मौका मिला।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के बारे में यह रोचक बातें भी जानें :

  • अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से 20 नवंबर 1998 को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) लांच किया गया।
  • 239 फीट लंबा और 365 फीट चौड़ा आईएसएस 28 हजार किमी प्रति घंटे यानी आठ किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है।
  • पृथ्वी के 24 घंटे अंतरिक्ष के 92.49 मिनट के बराबर होते हैं। यानी आइएसएस दिन-रात के समय को 92.49 मिनट में ही तय कर लेता है।
  • 66 फीट ऊंचे आईएसएस के अंतरिक्ष यात्री हर दिन 16 सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को मुख्य तौर पर अमेरिका और रूस की स्पेस एजेंसियां मिलकर चलाती हैं। हालांकि इसमें जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश भी साझीदार हैं। यहां रहने वाले अंतरिक्ष यात्री अक्सर अंतरिक्ष में बाहर निकलकर स्पेसवॉक करते हैं। वो कई बार दूरबीनों, सोलर पैनल या अंतरिक्ष की दूसरी मशीनों में आई गड़बड़ी को ठीक करते है।

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