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हल्द्वानी गौलापार से आईएसबीटी को अन्यत्र शिफ्ट करने पर हाई कोर्ट फिर राज्य सरकार पर सख्त…

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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जनवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने करीब 11 माह बाद एक बार फिर हल्द्वानी गौलापार से आईएसबीटी को कहीं अन्य जगह बनाये जाने के सम्बन्ध में राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ में सुनवाई के दौरन यह तथ्य सामने आया कि निर्माणाधीन आईएसबीटी को सरकार कहीं अन्य जगह शिफ्ट कर रही है जबकि इस जगह पर 11 करोड़ रूपये खर्च व विभिन्न प्रजातियों के 2625 हरे पेड़ कट चुके हैं, और वन विभाग ने आठ हेक्टेयर भूमि आईएसबीटी बनाने के लिए दे चुकी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिए है कि आईएसबीटी के निर्माण के लिए अब बिना केंद्र सरकार व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के पेड़ न काटे जाएं।

पूर्व समाचार : गौलापार से आईएसबीटी हटाने पर सरकार से हाईकोर्ट ने किया जवाब तलब

  • हाईकोर्ट ने सरकार से माँगा अब तक के खर्च का हिसाब व पूछा क्यों हटाया गौलापार से आईएसबीटी
  • तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 फरवरी 2018। हल्द्वानी के गौलापार में आईएसबीटी के निर्माण में हाथ खींचना कांग्रेस के विरोध के बाद उच्च न्यायालय पहुंचकर सरकार के लिए परेशानी का कारण बन गया लगता है। उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ और न्यायमूर्ति शरद शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई कर सरकार से 3 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। पूछा है कि आईएसबीटी पर अब तक कितना धन खर्च हुआ है, और क्यों बेवजह इसे यहां से हटाया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मामले में गौलापार निवासी रविशंकर जोशी ने नैनीताल उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल दाखिल कर कहा है कि गौलापार में ही बस अड्डा बनाया जाना चाहिये, क्योंकि वर्ष 2008-09 में आईएसबीटी बनाये जाने की अनुमति मिलने के बाद से 2015 में भूमि को वन विभाग ने परिवहन विभाग को हस्तांतरित हुई। 2015 के बाद बमुश्किल इस स्थान पर 27 सौ हरे पेड़ों का कटान हुआ, और 8 हैक्टेयर भूमि से अन्य पौधों को भी हटाकर निर्माण शुरु किया गया। जमीन के प्रस्ताव पास होने के दौरान डीएम, डीएफओ व आरटीओ ने भी प्रमाणित रिपोर्ट दी कि हल्द्वानी में कहीं भी बस अड्डे के लिये भूमि उपलब्ध नहीं है। इसीलिये इस भूमि को बस स्टेशन के लिये हस्तांतरित किया गया, और इस पर अब तक 3 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च हो चुके हैं। बावजूद अब कहा जा रहा है कि आईएसबीटी को यहां से शिफ्ट किया जायेगा, जिसका कोई आधार व कारण भी नहीं बताया गया है। बुधवार को की खण्डपीठ में हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार से पूरे मामले पर निर्देश मांगे है कियाचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने बताया कि न्यायालय ने सुनवाई के दौरान इसे जनहित से जुड़ा मुद्दा माना और कहा कि गौलापार में बस अड्डा बनने से सरकार का ही पैंसा बचेगा।

पृष्ठभूमि :

उल्लेखनीय है कि ग्रेटर हल्द्वानी (गौलापार) में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 14 अक्तूबर 2016 आठ हेक्टेयर भूमि पर 76 करोड़ रुपए की लागत से आईएसबीटी के निर्माण का शिलान्यास किया था। मार्च 2017 तक सत्ता में रही कांग्रेस यहां हल्द्वानी विधायक व तत्कालीन काबीना मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर कुछ भी खास काम प्रारंभ नहीं करा पाई। जबकि भाजपा सरकार ने आने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके पीछे जाहिर तौर यहां निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में कुछ कंकाल मिलने को कारण बताया गया, लेकिन पीछे से आ रही खबरों के अनुसार कांग्रेस सरकार के दौर में अपने लोगों को दिये ठेके व घूसखोरी के साथ हल्द्वानी शहर से आईएसबीटी के लिए ‘पहुंच मार्ग में दिक्कत’ बताई गयी है। इस तरह यह मामला राजनीति की भेंट चढ़ता भी नज़र आया है।

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