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तो दो सप्ताह के लिए लटका हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण हटाने का मामला

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Railway administration notice to 1581 encroachers in Haldwani 15 days time  given for removal of encroachment - हल्‍द्वानी में 1581 अतिक्रमणकारियों को  रेलवे प्रशासन का नोटिस, अतिक्रमण हटाने ...डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मई 2022। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रभावित लोग दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष समस्त कागजात के साथ न्यायालय में पेश कर सकते है।

इस संबंध में न्यायालय ने उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को आदेश दिए है कि दो प्रचलित समाचार पत्रों में एक सार्वजनिक सूचना शीघ्र प्रकाशित करें। इसके साथ न्यायालय ने मामले सुनवाई के लिए दो सप्ताह के बाद की तिथि नियत कर दी है। माना जा रहा है कि इसके बाद हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण हटाने का मामला कम से कम अगले दो सप्ताह के लिए लटक गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उच्च न्यायालय में 27 अप्रैल को मदरसा गुसाईं गरीब नवाज रहमतुल्लाह के संरक्षक मोहम्मद इदरीश अंसारी ने विशेष अपील दायर कर कहा है कि उनको रेलवे बिना नोटिस जारी किए हटा रहा है। उनको कहीं अन्य जगह नहीं बसाया जा रहा है, जब तक उन्हें कहीं अन्य जगह नहीं बसाया जाता, तब तक उन्हें नहीं हटाया जाए। पूर्व में एकलपीठ ने उनकी याचिका को यह कहकर निरस्त कर दिया था कि इस मामले में पहले से ही आदेश हुए है। यह भी कहा कि इस मामले में रवि शंकर जोशी की जनहित याचिका में दूसरी पीठ ने सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रखा है। इसके अलावा एक अन्य याचिका में कहा गया कि रेलवे ने अभी तक भूमि का सीमांकन नहीं किया है। बिना सीमाकन के उन्हें हटाया जा रहा है।

इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता सीएस रावत व रेलवे के अधिवक्ता गोपाल के वर्मा ने न्यायालय को बताया कि रेलवे ने न्यायालय के आदेश के बाद सीमांकन कर लिया है, और अतिक्रमण को हटाने के लिए 30 दिन की योजना न्यायालय में पेश कर दी है। इस पर न्यायालय ने कहा कि रविशंकर जोशी की याचिका पर दूसरी पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा है। फैसला आने के बाद 15 जून को सुनवाई की जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 16 मई 2022। जिला मुख्यालय में गत 5 मई को घोडा स्टेंड़ पर की गई अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद प्रशासन पर्दाधारा व मेट्रोपोल होटल कंपाउंड क्षेत्र में कार्रवाई की तैयारी करता बताया जा रहा है। इससे आशंकित अतिक्रमणकारियों को उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने टिप्पणी की है कि अतिक्रमणकारियों को कार्रवाई से पहले नोटिस दिया जाना जरूरी नहीं है।

इस मामले में याची मोहम्मद अब्दुल ने कहा कि वह अपने दादा के जमाने से नैनीताल में रह रहे हैं और 20 सालों से घोड़ा स्टेंड के पास चाय की दुकान चला रहे हैं। प्रशासन ने कमिश्नर के दौरे के बाद बिना कोई नोटिस दिए और उनको बिना सुने यहां अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर दी गई। याचिका में अधिवक्ता नितिन कार्की का पत्र दिखाते हुए कहा गया कि उनको रोहिंग्या और बांग्लादेशी भी कहा जा रहा है। एकलपीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसे मामलों में नोटिस देने की जरुरत नहीं है और प्रशासन की कार्रवाही उचित है। हालांकि इस मामले के याची के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा है कि एकलपीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी जायेगी।

इसके अलावा उच्च न्यायालय में शत्रु संपत्ति मेट्रोपोल क्षेत्र से बेदखल न किए जाने की याचना करते हुए भी मोहम्मद फारुख की ओर से एक याचिका दायर हुई है। इस पर अगले एक-दो दिन में सुनवाई हो सकती है। याचिका में कहा गया है कि उनको बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहा जा रहा है। याचिका में कहा गया है की उन पर अगर कोई कार्रवाई की जाती है तो उसमें कानूनी प्रक्रिया का पूरा पालन किया जाए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 मई 2022। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई की, लेकिन याचियों को फिलवक्त कोई राहत नहीं दी।

कहा कि इन मामलों में पहले से दूसरी पीठ में चल रही रविशंकर जोशी की मुख्य जनहित याचिका पर निर्णय आने के बाद 15 जून को सुनवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि बीते माह 27 अप्रैल को भी इस मामले में दो याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी और न्यायालय ने तब भी याचियों को कोई राहत नहीं दी। अलबत्ता आज मामले की सुनवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों के न्यायालय आने की संभावना से भारी संख्या में पुलिस बल भी न्यायालय में मुस्तैद रहा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अवैध निर्माण कर्ताओं पर मंडलायुक्त हुए सख्त, 10 अवैध निर्माणों को सील, ध्वस्त व चालान करने के आदेश

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 अप्रैल 2022। कुमाऊ मंडल के आयुक्त दीपक रावत ने जिला विकास प्राधिकरण के अंतर्गत मंगलवार को जनपद के रामगढ़, मुक्तेश्वर व शीतलाखेत में निर्मित व निर्माणाधीन लगभग 30 कार्यों का निरीक्षण किया। इसमें से मौके पर 10 संरचनाओं पर अवैध रूप से निर्माण कार्य किया जाना पाया गया। इन 10 संरचनाओं के नक्शे को प्राधिकरण से पारित नहीं कराया गया था। इस सम्बन्ध में आयुक्त ने जिला विकास प्राधिकरण के सचिव को अवैध रूप से बन रहे निर्माण कार्यों पर नियमानुसार सील करने, चालान व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अमल में लाये जाने के निर्देश दिए।

आयुक्त ने निर्देश दिए कि इन 10 संरचनाओं के अतिरिक्त भी जिस किसी व्यक्ति द्वारा नियम विरुद्ध प्राधिकरण के अंतर्गत बिना नक्शे पारित किए व अवैध रूप से निर्माण कार्य किया जा रहा है, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि बाहरी लोगों के द्वारा जो भूमि का क्रय किया उनमे अनुमति ली जा रही है या नहीं।

इसके साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि जिस भी व्यक्ति या समूह द्वारा पहाड़ कटान का कार्य किया जा रहा है, उनसे रॉयल्टी जमा कराई जाये। साथ ही बिना अनुमति के सड़क कटान कर रहे सम्बन्धितों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाय। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एक कदम और आगे बढ़ी हल्द्वानी में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कवायद, डीएम ने दिए आवश्यक निर्देश

-रेलवे के अधिकारियों से तिथि बताने को कहा, ताकि प्रशासन आवश्यक व्यवस्थाएं करे
नवीन समाचार, हल्द्वानी, 13 अप्रैल 2022। हल्द्वानी में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने की कवायद बुधवार को एक और कदम आगे बढ़ी। इस दौरान डीएम धीराज गर्ब्याल ने रेलवे से अतिक्रमण हटाने की तिथि बताने को कहा है, ताकि इससे पूर्व जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने में लगने वाले कार्मिकों के लिए आवास, शौचालय, पेयजल विद्युत आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कर सके।

इस हेतु बुधवार को जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में बैठक लेते हुए डीएम ने कहा कि प्रशासन इस दौरान शांति व्यवस्था बनाये रखने का प्रयास व अतिक्रमण हटाने से पूर्व क्षेत्र मे प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को सूचित करेगा ताकि अतिक्रमण शांतिपूर्वक हट सके।

बैठक मे एसएसपी पंकज भट्ट, अपर जिलाधिकारी अशोक जोशी, मुख्य नगर अधिकारी पंकज उपाध्याय, रेलवे के प्रतिनिधि वीके सिह, एएससी आरपीएफ प्रमोद कुमार, सिटी मजिस्टेट ऋचा सिह, उपजिलाधिकारी मनीष कुमार सिह, राहुल साह, अधिशासी अभियंता पीएमजीएसवाई केएस बिष्ट, जल संस्थान के एसके श्रीवास्तव व लोनिवि के अशोक कुमार आदि अधिकारी उपस्थित रहे। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-अतिक्रमणकारियों की हस्तक्षेप याचिका को उच्च न्यायालय ने सुनने से इंकार कर निर्णय सुरक्षित रखा
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2022। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने अतिक्रमणकारियों की हस्तेक्षप याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार के पास अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त सुरक्षाबल उपलब्ध है।

इस दौरान रेलवे ने हल्द्वानी की गफूर बस्ती से 30 दिन में अतिक्रमण हटाने का एक्शन प्लान जिला प्रशासन को सौंप दिया। साथ ही प्लान की कापी हाई कोर्ट में भी दाखिल की। इसमें रेलवे ने कहा है कि अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पर्याप्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेट उपलब्ध कराना होगा। अदालत ने रेलवे के प्लान को रिकार्ड पर ले लिया है। कोर्ट ने मौखिक तौर पर पैरामिलट्री फोर्स मुहैया कराने की बात भी कही है।

उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी के गौलापार निवासी रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय 9 नवम्बर 2016 को ही 10 सप्ताह के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दे चुका है। अलबत्ता न्यायालय ने कहा था कि रेलवे पीपीएक्ट के तहत अतिक्रमणकारियों को नोटिस देकर जनसुनवाई करें।

इस पर रेलवे 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण करने वाले 4365 लोगों को पीपीएक्ट में नोटिस देकर सुनवाई पूरी कर चुका है। इस दौरान किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध कागजात नहीं पाए गए। इसके बाद रेलवे अतिक्रमण हटाने के लिए जिलाधिकारी नैनीताल से दो बार सुरक्षा दिलाए जाने हेतु पत्र दे चुका है।

मामला सर्वोच्च न्यायालय भी गया जहां उच्च न्यायालय ने 10 सप्ताह के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने दिसम्बर 2021 में कहा था कि जितने भी अतिक्रमणकारी है , उनको रेलवे पीपीएक्ट के तहत नोटिस देकर जनसुनवाई करें। यह दिशा निर्देश भी दिए थे कि यदि इन लोगो के पास वैध प्रपत्र पाए जाए है तो राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इनको आवास मुहैया कराएं। लेकिन यहां अतिक्रमणकारी कोई वैध प्रपत्र प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। रेलवे की तरफ से कहा गया था कि हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, करीब 4365 लोग हैं। हाई कोर्ट के आदेश पर इन लोगो को पीपीएक्ट में नोटिस दिया गया। जिनकी रेलवे ने पूरी सुनवाई कर ली है। किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध कागजात नहीं पाए गए।

 इन स्थितियों में अतिक्रमण की जद में आए सराफत खान, मुनव्वर अली, मो. आरिफ, इरशाद हुसैन, जेबू निशा, इकराम अहमद अंसारी, केशर जहां, तसव्वुर जहां, असरफ अली, जमील अहमद, हबीबुर्रहमान आदि 11 लोगों की ओर से उच्च न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : आज की रात 50 हजार लोगों की नींद पर संकट, कल हो सकता है उनके अतिक्रमण पर निर्णायक फैसला, जानें पूरा मामला

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अप्रैल, 2022। हल्द्वानी में दशकों से बल्कि करीब आधी शताब्दी से हर स्तर पर, यानी जिसका जितना बस चला, सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण पर यूपी की तर्ज पर बुल्डोजर चलने का वक्त शायद आ गया है। देर से जागे रेलवे प्रशासन ने सोमवार की आखिरी समयसीमा पर अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का इरादा जाहिर किया है। रेलवे चार दिन पहले ड्रोन से मैपिंग कर अतिक्रमण की गई जमीन का सीमांकन भी कर चुकी है।

इस भूमि पर अनेक धार्मिक स्थल-मंदिर, मस्जिद, विद्यालय, पानी के टेंक सहित करोड़ों रुपए की लागत से बने करीब साढ़े चार हजार निर्माण बुल्डोजर के निशाने पर हैं। उधर, इसी क्षेत्र के वोट बैंक से एकतरफा जीते स्थानीय विधायक दिखाने को नां-नां कहते हुए भी अतिक्रमण के समर्थन में नजर आ रहे हैं। उन्हें अतिक्रमण विरोधी अभियान की अगुवाई कर रहे गत विधानसभा चुनाव में चुनौती देने वाले मेयर से कड़ा जवाब मिल रहा है। अतिक्रमणकारी अभी भी राजनेताओं के साथ नौकरशाही को किसी तरह दबाव में लेने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं, परंतु आज की रात इस भूमि पर बसे करीब 50 हजार लोगों की आंखों से नींद गायब होनी तय है।

बताया जाता है कि हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर 1975 से यानी करीब आधी शताब्दी से अतिक्रमण का खेल चल रहा है। अतिक्रमणकारियों को वोट बैंक के लिए नेताओं की भी पूरी शह मिलने के दावे किये जाते हैं। पूर्व में कई बार शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के अभियान भी चले। लेकिन जब अभियान नेताओं की दहलीज तक पहुंचा तो डीएम तक को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। इस कारण दूसरे डीएम भी कभी हिम्मत नहीं कर सके। लेकिन अब गौलापार निवासी रविशंकर जोशी की याचिका पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्णायक कड़े रुख के बाद रेलवे के अधिकारियों को 11 अप्रैल यानी कल तक जिला अधिकारी को अतिक्रमण हटाए जाने की रिपोर्ट सोंपी जानी है। इज्जतनगर मंडल रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि अतिक्रमण हटाने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। 11 अप्रैल को इसे डीएम नैनीताल को सौंप दिया जाएगा।

बताया गया है कि शहर की गफूर बस्ती, आजाद नगर, लाइन नंबर 17 जैसे इलाके रेलवे के अनुसार अतिक्रमण की जद में आते हैं। जिला अधिकारी के अनुसार इस भूमि पर लगभग 4500 घर, इंदिरानगर व गफूरबस्ती में पांच सरकारी स्कूल-प्राथमिक विद्यालय लाइन नंबर 17-18, राजकीय इंटर कालेज इंदिरानगर, जूनियर हाईस्कूल लाइन नंबर 17, ललित आर्य महिला इंटर कालेज चोरगलिया रोड व प्राथमिक विद्यालय इंद्रानगर तथा चार मदरसे-नैनीताल पब्लिक स्कूल मदरसा, निषाद मेमोरियल मदरसा, हयात-ऊलूम मदरसा मदरसा गरीब नवाज के साथ ही गोपाल मंदिर, शिव मंदिर सहित पांच मंदिर तथा 20 मस्जिदें भी हैं। साथ ही इंदिरानगर व गफूरबस्ती में अतिक्रमण की जद में आए 4365 वादों में शामिल लगभग सभी धर्मों के लगभग 50 हजार लोग निवासरत हैं। उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालयों के आदेशों पर रेलवे का प्राधिकरण इनके मालों का निस्तारण कर चुका है। प्राधिकरण में अतिक्रमणकारी कब्जे को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं दिखा पाए। इसके अलावा दो पेयजल टैंक भी इंदिरानगर व गफूरबस्ती में रेलवे की जमीन पर बने हुए हैं।

विदित हो कि यहां रेलवे की बेशकीमती भूमि पर अतिक्रमण रवि शंकर जोशी की याचिका के बाद नैनीताल उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद 2016 में आरपीएफ यानी रेलवे सुरक्षा बल ने अतिक्रमण का पहला मुकदमा दर्ज किया। लेकिन तब तक करीब 50 हजार लोग रेलवे की जमीन पर आबाद हो चुके थे। नैनीताल हाई कोर्ट ने नवंबर 2016 में रेलवे को 10 सप्ताह में अतिक्रमण हटाने के सख्त आदेश दिए थे। इसके बाद भी रेलवे, आरपीएफ और प्रशासन हल्द्वानी व प्रदेश की राजनीति व राजनेताओं के आगे घुटने टेक नरमी दिखाते रहे। इससे अतिक्रमणकारियों को सुप्रीम कोर्ट जाने का मौका मिल गया।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिक्रमणकारियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी करने और रेलवे को उनकी आपत्तियों को तीन माह में निस्तारित करने का आदेश दिया। नैनीताल हाई कोर्ट ने भी रेलवे को 31 मार्च 2020 तक उनके समक्ष दायर वादों को निस्तारित करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार अगर रेलवे की इस भूमि से अतिक्रमण हट जाए तो हल्द्वानी विश्वस्तरीय स्टेशन का दर्जा हासिल कर सकता है। हल्द्वानी स्टेशन को विकसित करने के लिए कई प्रयास हुए। 14 वर्ष पहले करीब 29 एकड़ की भूमि पर वाशिंग लाइन, मेंटीनेंस लाइन बनाने का प्रस्ताव तैयार हुआ था। लेकिन अतिक्रमण की वजह से पूरी योजना खटाई में पड़ गई। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण हटाने को 11 तक होगा एक्शन प्लान तैयार

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मार्च 2022। जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने गुरुवार को मुख्यालय स्थित अपने कैंप कार्यालय में हल्द्वानी स्थित रेलवे भूमि में अतिक्रमण के संबंध में संबंधित रेल अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक की। बैठक ने श्री गर्ब्याल ने रेलवे के डीआरएम राजीव अग्रवाल को 11 अप्रैल तक अतिक्रमण के संबंध में एक्शन प्लान तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा।

बैठक में एडीएम अशोक जोशी, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय, रेेल विभाग के एडीआरएम विवेक गुप्ता, सिटी मजिस्ट्रेट रिचा सिंह, एसडीएम मनीष कुमार, एसपी सिटी हरवंश सिंह, भूपेंद्र धर्मशक्तू, केएन पांडे, एलआईयू शांति शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : लाखों रुपए खर्च कर बने पार्क फड़ वालों के हवाले

नगर के महर्षि वाल्मीकि पार्क के बाहर रेलिंग में सजी दुकानें।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2021। नगर पालिका द्वारा नगर में लाखों रुपए खर्च कर महर्षि वाल्मीकि पार्क व चिल्ड्रन पार्क विकसित किए गए हैं, लेकिन बनने के बाद से ही इन पार्कों के बाहर ताले डाले गए हैं।

जिससे इनका लाभ बच्चों एवं सैलानियों को खेलने या आराम करने के लिए नहीं मिल पा रहा है, जबकि इन पार्कों की रेलिंग पर फड़ वाले अवैध तरीके से दुकानें सजाए रहते हैं। यानी यह पार्क अघोषित तरीके से फड़ वालों के हवाले कर दिए गए हैं, और वह इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : चाट पार्क में दिखा खुले में रेस्टोरेंट जैसा नजारा

चाट पार्क क्षेत्र में रेस्टोरेंटों द्वारा लगाई गई कुर्सियों पर पसरे ग्राहक।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 नवंबर 2021। नैनीताल, एसएनबी। नगर में सैलानियों की भीड़भाड़ बढ़ने के साथ नगर के चाट पार्क में शनिवार को कुछ अलग ही नजारा रहा।

एक दिन पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ धाम के कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के लिए मंगवाई गई कुर्सियां टेंट हाउस के कर्मी वहीं छोड़ गए तो उन पर सैलानी बैठकर पास के रेस्टोरेंटों से लेकर भोजन करने लगे। इस पर यहां रेस्टोरेंटों से बाहर रेस्टोरेंट जैसा नजारा दिखाई दिया।

इससे यहां मंदिर आने वाले और घूमने आने वाले सैलानियों को तो असुविधा हुई ही, स्थानीय लोगों ने भी इस पर आपत्ति जताई। आपत्ति जताने वालों में नगर पालिका के स्थानीय सभासद मनोज साह जगाती भी रहे, जिन्होंने इसे अतिक्रमण का प्रयास बताते हुए तंज कसा कि यहां नया रेस्टोरेंट खुल गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पुलिस ने अवरोध रहित सुगम आवागमन को चलाया अभियान

सड़क घेरकर खड़े दोपहिया वाहनों पर लॉक लगाते पुलिस कर्मी।

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्टूबर 2021। मल्लीताल कोतवाली पुलिस ने नगर के संकरे व व्यस्ततम मोहन-को चौराहे के पास अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया। डीआईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे के अवरोध रहित सुगम यातायात अभियान के के तहत सीओ प्रमोद साह के निर्देशन में नगर कोतवाल प्रीतम सिंह की अगुवाई में चलाए गए अभियान में सड़क की ओर फैलाकर लगाई गई दुकानों तथा सड़क पर खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

कई दोपहिया वाहनों के पहिए लॉक कर दिए गए, कई को क्रेेन से उठवाया गया एवं उनका चालान किया गया। साथ ही आगे से नियमित अभियान चलाने की बात कह अतिक्रमणकारियों को भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी गई। लोगों से दोपहिया वाहनों को सफेद पट्टी के भीतर खड़ा करने को कहा गया। नगर पालिका से कूड़ेदान हटवाने व विद्युत विभाग से सड़क के बीच खड़े पोलों को हटवाने को कहा गया। कार्रवाई में एसएसआई प्रेम विश्वकर्मा भी शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : डीएम ने हाईकोर्ट में माना पंतनगर, नगला में राष्ट्रीय राजमार्ग और पंतनगर विश्वविद्यालय की जमीन पर 700 से अधिक अतिक्रमण

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जुलाई 2021। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने पंतनगर, नगला में राष्ट्रीय राजमार्ग और पंतनगर विश्वविद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण करने के खिलाफ दायर जनहित पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान ऊधमसिंह नगर के जिला अधिकारी ने पूर्व के आदेश के क्रम में शपथ पत्र पेश किया और कोरोना काल और कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए अतिक्रमण हटाने हेतु एक माह का समय मांगा।

उन्होंने अपने शपथपत्र में माना है कि इन जगहों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है। पंतनगर विश्वविद्यालय की भूमि पर 193, राष्ट्रीय राजमार्ग पर 490 के साथ ही वन भूमि पर भी अतिक्रमण होने की बात मानी है। बताया है कि वन भूमि पर अभी चिन्हित नही किया गया है। इस पर न्यायालय ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से वन विभाग को पक्षकार बनाने को कहा है साथ मे न्यायालय ने जिलाधिकारी व राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशासी अभियंता को 4 अगस्त को न्यायालय में पेश होने को भी कहा है।

मामले के अनुसार पंतनगर निवासी अजय कुमार ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि जिला ऊधमसिंह नगर के पंतनगर, नगला, राष्ट्रीय राजमार्ग और पंतनगर विश्वविद्यालय की सरकारी भूमि पर पिछले कई सालों से अतिक्रमण कर अवैध रूप से निर्माण कर लिया है। जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क संकरी हो गई है, और सड़क दुर्घटनाओं की सम्भावना बनी हुई है।याचिकाकर्ता का यह भी कहना है राष्ट्रीय राजमार्ग और पंतनगर विश्वविद्यालय की भूमि में अतिक्रमणकारियो के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए और उन्हें हटाया जाए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : मॉल रोड पर जिला, मंडल व प्रदेश के उच्चाधिकारियों की नाक के नीचे अतिक्रमण कर किया जा रहा अवैधधंधा

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 मार्च 2021। पर्यटन नगरी में मॉल रोड पर भी अब भी अतिक्रमण होने लगा है। यहां माल रोड के बड़े हिस्से पर व्यवसायियों द्वारा लंबे समय से साइकिलें खड़ी कर अपना कारोबार किया जा रहा है, बल्कि अब तो सड़क पर ही स्थायी तौर पर बोर्ड लगाकर पूरी दुकान ही सजा दी गई है। नगर में मोटे पहियों वाली साइकिलों का चाव भी ऐसा बढ़ गया है कि इन्हें चलाने का किराया तो करीब 150 रुपए घंटे है ही इन पर क्षण भर बैठकर अपने मोबाइल से एक फोटो खींचने के भी 20 रुपए तक लिए जा रहे हैं। उल्लेखनीय बात यह भी है कि माल रोड जिले व मंडल के साथ प्रदेश के उच्चाधिकारियों का आम तौर पर आना-जाना लगा रहता है, किंतु लगता है कि इस अवैधधंधे पर किसी की नजर नहीं पड़ी है।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में 1581 घरों को तोड़ने के लिए 15 दिन में खाली करने के नोटिस चस्पा किए जाने से हड़कंप

नवीन समाचार, हल्द्वानी 10 जनवरी 2020। हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण हटाने का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है। भारतीय रेलवे ने 1581 घरों को तोड़ने का नोटिस जारी कर दिया है। इस हेतु 15 दिन के भीतर घरों को खाली करने के आदेश दे दिए हैं। इस हेतु रेलवे के अधिकारियों ने पुलिस और आरपीएफ की भारी सुरक्षा बलों के साथ गफूर बस्ती से 1581 घरों को चयनित कर 15 दिन के भीतर खाली करने का नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे ने नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि 15 दिन के अंदर घर खाली न करने पर अतिक्रमण को बलपूर्वक हटाया जाएगा। इससे क्षेत्र में एक बार पुनः हड़कंप मच गया है, और अतिक्रमण की जद में आ रहे लोग इस स्थिति से बचने के लिए पुनः जुगत लगाने में जुट गए हैं। इससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति भी है।

इन लोगों ने रेलवे की इस कार्रवाई को मनमानी कार्रवाई बताया है। मौके पर जनप्रतिनिधियों का भी जमवाड़ा लगना शुरू हो गया है। पुलिस प्रशासन से भी वार्ता हो रही है। उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण है जिसको लेकर कई बार रेलवे सीमांकन भी कर चुका है। रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार हल्द्वानी से लेकर गौजाजाली तक 38.89 हेक्टेयर जमीन पर लोंगो के कब्जा कर रखा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर वर्ष 2007 और फिर 2019 में रेलवे ने अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी थी। इस पर स्थानीय लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने रेलवे न्यायालय से लोंगो की आपत्तियों पर सुनवाई कर निस्तारित करने के लिए कहा। रेलवे न्यायालय ने नोटिस देकर लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया, लेकिन अधिकांश लोग नहीं आये, जो लोग आए भी तो वह जमीन के मालिकाना हक के संबंधित दस्तावेज नहीं दिखा पाए। 4363 लोगों ने रेलवे बोर्ड में अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इसके बाद रेलवे के राज्य संपदा विभाग ने 1581 लोंगो के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है।

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-नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी है करोड़ों रुपए मूल्य की है जमीन
नवीन जोशी, नैनीताल। सूचना का अधिकार अधिनियम पुराने दबे इतिहास की परतें भी खोल रहा है। नैनीताल के सूचना अधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता पुनीत टंडन द्वारा मांगी गयी सूचनाओं से लोक निर्माण विभाग को करीब एक शताब्दी के बाद अपनी करीब 5 एकड़ जमीन के नक्शे प्राप्त हुए हैं। हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी स्प्रिंगडेज इस्टेट की यह जमीन करोड़ों रुपए मूल्य की बतायी जा रही है। जमीन की तस्दीक में इस इस पर एक बाहरी व्यक्ति द्वारा भवन निर्माण भी किया गया है, जिसे नोटिस दिया गया है। मामले का एक अन्य पहले यह भी है कि पिछले करीब 10 माह से मामले में सूचना अधिकार कार्यकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी जा रही जानकारियों एवं मामले के समाधान पोर्टल के जरिये मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई अपेक्षित तेजी से नहीं हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सूचना अधिकार कार्यकर्ता पुनीत टंडन करीब नवंबर 2018 से यह मामला उठा रहे हैं। आगे मामला समाधान पोर्टल एवं डीएम नैनीताल के स्तर से मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया। शुरू से इस बेशकीमती जमीन का स्वामी लोक निर्माण विभाग का प्रांतीय खंड अपने पास नक्शे ही न होने की बात करता रहा। बाद में नगर पालिका से 1918 व 1929 के स्प्रिंगडेल इस्टेट के नक्शों में तत्कालीन सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं जूनियर हाईस्कूल की करीब 5 एकड़ भूमि प्रदर्शित की गयी है। यह भूमि वर्तमान जीआईसी को धर्मशाला की ओर से जाने वाले मार्ग से नीचे की ओर हल्द्वानी रोड तक बतायी गयी है। इधर जनवरी 2018 में टंडन द्वारा मांगी गयी जानकारी पर एसडीएम नैनीताल अभिषेक रुहेला ने लोनिवि, राजस्व एवं नगर पालिका के अधिकारियों की टीम बनाकर उन्हें जमीन की धरातल पर तस्दीक करने को कहा था। फरवरी 2018 में टंडन ने मामले की शिकायत समाधान पोर्टल के जरिये मुख्यमंत्री से भी की, और इस जमीन की धरातल पर तस्दीक कर जमीन की दाखिल-खारिज लोनिवि के प्रांतीय खंड के नाम करने को कहा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में 20 फरवरी 2018 को सचिव शहरी विकास को भेजकर शिकायत के अनुरूप कार्रवाई करने को कहा। इधर संयुक्त जांच टीम ने भूमि पर एक बाहरी व्यक्ति द्वारा किये गये निर्माण को चिन्हित किया है। इधर एक सप्ताह पूर्व भवन स्वामियों को लोनिवि की ओर से उनका पक्ष जानने के लिए नोटिस भी दे दिया गया है। लेकिन करीब 10 माह से मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने, अब तक जमीन के बारे में ठीक-ठीक चिन्हीकरण ही न हो पाने पर सूचना अधिकार कार्यकर्ता ने सवाल उठाये हैं। उन्होंने बताया कि कई बिल्डरों की भी इस बेशकीमती जमीन पर नजर है। वहीं एसडीएम अभिषेक रुहेला ने बताया कि मामला नगर पालिका के स्तर से लंबित है। सरकारी विभागों की जमीनों के नक्शे नगर पालिका के पास हैं। इधर नगर पालिका ने जो नक्शा उपलब्ध कराया है वह बंदोबस्ती तरह का नहीं है। इसलिए इसकी धरातल पर तस्दीक करने में दिक्कत आ रही है।

प्राधिकरण से नक्शा है पास, लोनिवि ने दी है अनापत्ति

नैनीताल। स्प्रिंगडेल इस्टेट की जिस भूमि की बात हो रही है, उस पर हाल ही में एक भवन निर्मित हुआ है। बताया जा रहा है कि यह मामला इस भवन के निर्माण के बाद ही भवन के मालिक एवं निर्माणकर्ता ठेकेदार के बीच हुए विवाद के बाद आगे बढ़ा। बताया गया है कि भवन निर्माण के लिए तत्कालीन बृहत्तर झील परिक्षेत्र विकास प्राधिकरण से भवन का नक्शा पास है, तथा इसके लिए लोनिवि ने भी अनापत्ति दी है। वहीं यह भी बताया जा रहा है कि वर्ष 2011 में इस जमीन से लगे जीजीआईसी की सड़क से ऊपर की ओर स्थित फेयरीहॉल विला क्षेत्र के कुछ निवासियों ने आपसी सहमति से घर बंटवारा करते हुए घर के सदस्यों को लोनिवि की यह जमीन दे दी थी।

पूर्व समाचार : नैनीताल में 5 एकड़ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का बड़ा मामला खुला

    • लोनिवि की है जमीन, पर विभाग को पता ही नहीं, नक्शे भी लोनिवि नहीं नगर पालिका के पास हैं
  • पुष्टि हुई तो अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचना तय

नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी में 5 एकड़ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने का नया मामला प्रकाश में आया है। सूचना के अधिकार के तहत इस मामले का खुलाशा हुआ है। नगर के अधिवक्ता पुनीत टंडन को सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के तल्लीताल धर्मशाला के पास के स्प्रिंगफील्ड कंपाउंड क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग की करीब 5 एकड़ भूमि पर लोगों का अवैध कब्जा है, तथा कई आवासीय भवन भी बने हैं। खास बात यह भी है कि लोक निर्माण विभाग को अपनी इस भूमि के बारे में कुछ भी खास जानकारी यहां तक कि इसके नक्शे भी उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस भूमि पर अंग्रेजी दौर में तत्कालीन सार्वजनिक निर्माण विभाग के गोदाम होते थे।

सूचना के अधिकार के तहत जानकारी दिये जाते समय यह मामला संज्ञान में आया है। इस पर एसडीएम के नेतृत्व में लोनिवि, राजस्व व नगर पालिका की टीम ने संबंक्षित क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण किया है। टीम में लोनिवि की ओर से अधिशासी अभियंता सीएस नेगी, नगर पालिका की ओर से अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा व राजस्व विभाग की ओर से तहसीलदार शामिल रहे। लोनिवि के अधिशासी अभियंता सीएस नेगी ने इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि नेगी ने बताया कि नगर पालिका से इस भूमि के मूल रंगीन नक्शे लेने के लिए आवेदन किया गया है, साथ ही विभाग के संबंधित सहायक अभियंता से मामले की जांच तथा नक्शे के आधार पर लोनिवि की जमीन का चिन्हीकरण करने और इस पर अतिक्रमण होने की स्थिति में अतिक्रमणकारियों को नोटिस देने को कहा गया है। बताया गया है कि कुछ अतिक्रमणकारियों को नोटिस दे भी दिये गये हैं। आगे इस मामले में अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचना तय है।

नवीन समाचार
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4 Replies to “तो दो सप्ताह के लिए लटका हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण हटाने का मामला

  1. नमस्कार नवीन जोशी जी

    🙏 सादर प्रणाम

    मेरा नाम विश्व प्रताप गर्ग है और मेरे सहकर्मी देवेन्द्र परमार भगवान शिव के महायोगी स्वरूप भगवान गुरू गोरखनाथ के अनुयायी हैं और आपके पाठक वर्ग हैं।

    बात तो सही है नैनीताल एक पर्यटन नगरी है और इस प्रकार का अतिक्रमण नैनीताल की नैसर्गिक सुंदरता को कमतर तो करता ही है दुर्घटनाओं का अंदेशा और साइकिल माफिया का राज भी बेखौफ चलता है। पर्यटकों से बदतमीजी अलग से।

    आपका संदर्भ निस्संदेह प्रसंशनीय है जो आम जनता को सचेत किया हमेशा की तरह। और सोए हुए प्रशासन को जगाकर उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया।

    बहरहाल अगर आप ऐसा लिखें ” उच्च अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा अतिक्रमण का अवैध धंधा” उचित वाक्य है “गोरख-धंधा” शब्द अनुचित है।

    भगवान शिव महायोगी स्वरूप में भगवान “गुरू गोरखनाथ” होते हैं।भगवान “गुरू गोरखनाथ” जैसे पवित्र कल्यणकारी नाम को किसी घटिया धंधे से जोड़ने से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है और शिव तो सदैव कल्याण ही करते हैं कोई धंधा नहीं।” गोरख-धंधा” शब्द अनुचित है और एक निम्न श्रेणी की उपहासात्मक अपमानजनक गरिमाहीन अभद्र संज्ञा है जो प्रयोग में नहीं होनी चाहिए कृप्या इस पहलू का भी संज्ञान लें ।

    अधिक जानकारी के लिए आप इन लिंक पर विजिट भी कर सकते हैं https://hindi.oneindia.com/news/india/an-introduction-on-lord-guru-gorakshnath-427761.html

    कुछ शब्द हैं जो आप प्रचुरता से प्रयोग कर सकते हैं जैसे अवैध धंधा /अनैतिक धंधा /भ्रष्टाचार /ठगधंधा /घपला /घोटाला /गडबडघोटाला /धांधली /मकड़जाल इत्यादि।

    एक पाठक के रूप में यही सुझाव है अगर इस शब्द को ठीक कर लें और आप अपनी रिपोर्टिंग टीम को भी इस संवेदनशील पहलू की ओर आगाह करें और एक विज्ञप्ति जारी कर भविष्य में भी प्रयोग से बचें तो आपकी ज्वलंत पत्रकारिता उम्दा ही प्रतीत होगी और पाठकगण भी एक जुडाव महसूस कर पाएंगे
    🙏

    अलख निरंजन!!

      1. हैलो सर अगर आप vellege के राशन कार्ड मैं भी आर टी आई लगा के बी पी एल के बारे मैं जानकारी लेते तो उसमे भी बहुत धोखाधड़ी हुई हैं वो भी सामने आ जाती l
        एक पाठकगण!

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