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उत्तराखंड आए महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया पुस्तक का विमोचन

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 फरवरी 2021। उत्तराखंड के दौरे पर आए महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने लाल बहादुर शास्त्री आईएएस अकादमी मसूरी में डॉ हरीश चंद्र अंडोला एवं डॉ विजय कांत पुरोहित द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर श्री कोश्यारी ने कहा कि गवर्नर मानव स्वास्थ्य एवं वनस्पतियां एक दूसरे की पूरक हैं। मानव स्वास्थ्य में वनस्पतियों का बड़ा योगदान है। दोनों का पृथ्वी पर अस्तित्व कायम रखने के लिए वनस्पतियांे का संरक्षण आवश्यक है।
जानकारी देते हुए डॉ. अंडोला ने बताया कि उनकी पुस्तक वनस्पतियांे एवं मानव स्वास्थ्य के लिए उनके उपयोग व संरक्षण विषय पर लिखी गई है। पुस्तक के विमोचन के अवसर पर सुप्रसिद्ध लेखक एवं पत्रकार सूर्य चंद्र सिंह चौहान, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं रूसा के सलाहकार प्रो. एमएसएम रावत, प्रो. हरीश पुरोहित, सहायक कुलसचिव नरेंद्र लाल, प्रशांत मेहता, सुरेश अंडोला व ध्रुव अंडोला आदि लोग उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : पीसीएस अधिकारी ने मातृभाषा को राष्ट्रभाषा में पिरोकर पिता को दी साहित्यिक श्रद्धांजलि..

-प्रशासनिक अधिकारी व साहित्यकार ललित मोहन रयाल की दूसरी पुस्तक ‘काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि’ प्रकाशित,
-पिता-पुत्र के रिश्तों की यह किताब साहित्य के हर पहलू को छूती है, भोजन की तरह स्वाद देती है यह पुस्तक: जगूड़ी
नवीन समाचार, नैनीताल, 07 फरवरी 2021। साहित्यकार व पीसीएस अधिकारी ललित मोहन रयाल ने अपने दिवंगत पिता मुकुंद राम रयाल को उनकी पहली पुण्यतिथि 22 फरवरी पर साहित्यिक श्रद्धांजलि देने जा रहे है। उन्होंने ‘काऽरी तु कब्बि ना हाऽरि’ नाम से लिखी अपनी किताब में पिता पुत्र के बीच के संबंधों तथा शिक्षक पिता की समाज सेवा व शिक्षण के प्रति समर्पण, बौद्धिक क्षमता, ज्ञान, जीवन में पिता की महत्ता को खूबसूरती से उकेरा है। प्रसिद्ध साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी ने रयाल द्वारा इस किताब में प्रयुक्त गढ़वाली मिश्रित हिंदी भाषा की तारीफ करते हुए अपनी रोचक टिप्पणी दी है, कि उनकी भाषा भोजन की तरह स्वाद देती है। इससे पूर्व अपनी मिट्टी से जुड़े रयाल ‘खड़कबासी की स्मृतियों से’ नामक पुस्तक लिख चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि श्री रयाल के पिता का पिछले साल निधन हो गया था। पिता के क्रियाकर्म के दौरान ही उन्होंने किताब लिखना शुरू कर दिया था। अतीत के स्मरण को लिपिबद्ध किया। किताब में पिता के साथ बिताए पलों का मार्मिक ढंग से उल्लेख किया है। उन्होंने पिता को श्रद्धांजलि के बहाने गढ़वाल के लोकजीवन में आये बदलाव, बढ़ते शहरीकरण, पलायन, ग्रामीण जीवन का बेहतरीन वर्णन किया है। ज्योतिषी व कर्मकांड की महत्ता भी बताई है तथा गांव व रयाल जाति के उद्भव का इतिहास भी पढ़ाया है। प्रसिद्ध साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी के शब्दों में, चाहे अनचाहे एक सुलभ रहने वाला व्यक्ति है पिता। वह उपदेशक, सुधारक और दंड पुरस्कार समझाने वाला, प्यार और एकता व भय पैदा करने वाला व्यक्ति है। दुनियां में ढूंढने निकलेंगे तो पिता की सबसे ज्यादा छवियां और भंगिमाएं बिखरी मिलेंगी। माता के साथ पिता के अलग दायित्व दिखने लगते हैं। माता के बिना पिता की भूमिका कई तरह से बदल जाती है। रयाल ने अपने पिता को कर्मयोगी कहते हुए लिखा है कि यह साधारण शिक्षक की जीवनी है। गृहस्थी के पचड़ों में फंसा मास्टर आदमी। उन्होंने ताउम्र ग्रामीण जीवन जिया। नियम कायदों का हमेशा पालन किया। पिता पुत्र के बिछुड़ने का गम, उनके निधन पर परिवार की आपबीती का दिल की गहराइयों से निकले शब्दों से उकेरा है। उन्होंने किताब में विद्यार्थी जीवन के उन पहलुओं का भी उल्लेख किया है, जो हर किसी के जीवन के अनमोल पल होते हैं। साहित्यकार जगूड़ी लिखते हैं, पहाड़ी जीवन भी कुछ कुछ वैदिक सा, कुछ-कुछ ऋषि मुनियों जैसी झलक दिखलाता रहता है। पशुओं के बीच कामकाज के अलावा कुछ अन्य संवाद भी चलते रहते हैं। रयाल के लेखन में अलग किस्म का, ना दलदली किस्म का, न सूखे तालाब जैसा गद्य है। किताब में मनचाहा घालमेल किया है, चाहते तो पारंपरिक प्रस्तुति दे सकते थे। रयाल ने 21 अध्याय की किताब में लोकजीवन के उन किस्से कहानियों का भी उल्लेख किया है, जो आज की शहरीकरण की जिंदगी में गुम हो गए हैं। मगर एक पीढ़ी में इसको संरक्षण करने की छटपटाहट है। कुल मिलाकर पिता-पुत्र के रिश्तों की यह किताब साहित्य के हर पहलू को छूती है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल की ‘चलती-फिरती पाठशाला’ स्वर्गीय प्रसाद जी की पुस्तक ‘प्रसाद’ का हुआ विमोचन

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 नवम्बर 2020। नैनीताल नगर पालिका के म्युनिसिपल कमिश्नर (वर्तमान पद नाम सभासद), नगर की सबसे पुरानी धार्मिक-सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा के अध्यक्ष, नैनीताल जिला क्रीड़ा संघ के महासचिव नैनीताल जिला महिला संघ के अध्यक्ष रहे रंगकर्मी, खिलाड़ी, ऐपण कलाकार, चिंतक, विचारक, नैनीताल के जीवंत इन्साइक्लोपीडिया स्वर्गीय गंगा प्रसाद साह के लेखों की पुस्तक ‘प्रसाद’ का सोमवार को विमोचन किया गया। पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल व सरिता आर्या की मौजूदगी में स्वर्गीय साह के प्रपौत्र, प्रपौत्री एवं अन्य परिजनों व गणमान्य जनों ने श्रीराम सेवक सभा के सभागार में पुस्तक का विमोचन किया।
इस मौके पर स्वर्गीय साह के करीबी व अनुयायी रहे पूर्व सभासद जगदीश बवाड़ी ने स्वर्गीय साह को ‘चलती-फिरती पाठशाला’ बताया तो रंगकर्मी मिथिलेश पांडे ने रामलीला में उनके द्वारा राम से लेकर रावण और नारद तक के विभिन्न चरित्रों को निभाने की यादों को ताजा किया। पूर्व दायित्वधारी शांति मेहरा, डा. जंतवाल, सरिता आर्य, पुस्तक के लेखक स्वर्गीय साह के पुत्र अतुल साह व बहु भारती साह सहित संचालन कर रहे हेमंत बिष्ट आदि ने भी विचार रखते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से जुड़े अनुभव सुनाए। बताया गया कि पुस्तक में 9 दिसंबर 2017 को दिवंगत हुए स्वर्गीय साह के नैनीताल तथा यहां की माल रोड, शरदोत्सव, सिनेमा हॉल, ड्रेनेज व्यवस्था, विद्युत व पेयजल व्यवस्था आदि के इतिहास को अलग-अलग लेखों में क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस मौके पर सुरेश लाल साह, सुरेंद्र बिष्ट, मनोज साह, आलोक चौधरी, देवेंद्र लाल साह, गणेश कांडपाल, किशन नेगी, प्रीति डंगवाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : स्नातक के छात्र की पुस्तक ‘मेरे खयाल’ प्रकाशित, कुमाऊं की परंपरागत उपचार विधियों व औषधियों पर भी पुस्तक प्रकाशित

अपनी पुस्तक ‘मेरे खयाल’ के साथ आशीष तिवारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जुलाई 2020। जनपद के हल्द्वानी निवासी आशीष तिवारी ‘आरव’ की हिंदी कविताओं की पुस्तक ‘मेरे ख्याल’ प्रकाशित हुई है। नित्या प्रकाशन नई दिल्ली से प्रकाशित पुस्तक अमेजॉन पर भी ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। 11 फरवरी 2001 को नैनीताल जिले के हल्द्वानी में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे 19 वर्षीय आशीष वर्तमान में हल्द्वानी से ही विज्ञान विषय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह उन्हें बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक रहा है। ‘मेरे खयाल’ उनकी लिखी हुई पहली पुस्तक है। इसके अलावा वह दिल्ली के ‘द सोशल हाउस क्लब’ में भी अपनी कविताओं की प्रस्तुति दे चुके हैं। आशीष कहना है कि इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने हर एक व्यक्ति तक अपने खयाल सरल भाषा में पहुंचाने एवं कुछ अनछुए खयालों को छूने का प्रयास किया है। यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए है, जिन्हें साधारण हिंदी भाषा का ज्ञान है। आशीष कहते हैं, उनकी पुस्तक बहुत सारे रंगों से मिलकर बनी है। पुस्तक में कहीं गुलाबी इश्क तो कहीं रक्तवर्ण लाल तो कहीं काली सच्चाई भी है। उनकी पुस्तक अपनी प्रतिभा को मुकाम पहुंचाने की कोशिश कर रहे युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी हो सकती है।

पुस्तक अमेजॉन पर इस लिंक से मंगाई जा सकती है :

कुमाऊं की परंपरागत उपचार विधियों व दुर्लभ औषधीय पौधों पर पुस्तक का कुलपति का किया विमोचन

पुस्तक का विमोचन करते कुलपति प्रो. एनके जोशी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जुलाई 2020। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने मंगलवार को अपने कार्यालय में ‘ट्रेडीसनल सिस्टम एंड थ्रेटेंड मेडीसनल प्लान्ट्स ऑफ कुमाऊं वेस्टर्न हिमालया, इंडिया’ नाम की पुस्तक का विमोचन किया। डा. दीपिका भट्ट, डा. गिरीश जोशी, प्रो. ललित तिवारी एवं नवीन चंद्र पांडे के द्वारा लिखी गई 1995 रुपए मूल्य की 126 पृष्ठों की वानस्पतिक वर्गीकरण शास्त्री स्वर्गीय प्रो. यशपाल पांगती को समर्पित की गई इस पुस्तक में कुमाऊं क्षेत्र की विरासत की उपचार विधियों तथा क्षेत्र के 256 दुर्लभ औषधीय पौधों का वर्णन है। पुस्तक का आमुख संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो. प्रदीप कुमार जोशी तथा दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कर्नाटक द्वारा लिखा गया है।
पुस्तक का विमोचन करते हुए कुलपति प्रो. जोशी ने पुस्तक को बेहद उपयोगी बताया। इस अवसर पर प्रो. ललित तिवारी, डा. सुचेतन साह, डा. विजय कुमार, डा. सोहेल जावेद, विधान चौधरी व मदन बर्गली आदि लोग मौजूद रहे।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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