कैग रिपोर्ट में कर्मकार कल्याण बोर्ड में 607.09 करोड़ रुपये के बड़े ‘साइकिल-टूल किट’ घोटाले का खुलासा ! बिना बजट स्वीकृति के खर्च कर डाले रुपये…

श्रमिकों के कल्याण की योजनाओं से क्या जा रहा था स्वयं का ‘कल्याण’, भारी अनियमितता आई सामने
नवीन समाचार, देहरादून, 21 फरवरी 2025 (CAG Report Reveals 607 Crores Cycle-ToolKit Scam)। जिस भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन निर्माण से जुड़े श्रमिकों के कल्याण के लिए किया गया था, वह स्वयं के ‘कल्याण’ में लगा हुआ है। वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 के बीच बोर्ड ने अपने व्यय और प्राप्तियों को दर्शाते हुए बजट तैयार नहीं किया, जिसके चलते सरकार से स्वीकृति भी नहीं ली गई और 607.09 करोड़ रुपये खर्च कर डाले।
बोर्ड को निर्माण योजनाओं एवं कार्यों की लागत के अनुसार उपकर प्राप्त होता है, जिसे श्रमिकों के कल्याण में खर्च करने का प्रावधान है। लेकिन, बोर्ड ने न तो उपकर के आकलन के लिए कोई तंत्र विकसित किया और न ही योजनाओं के भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किए। श्रमिकों के पंजीकरण से लेकर उनके कल्याण की योजनाओं में खर्च तक हर स्तर पर मनमानी तरीके से बजट ठिकाने लगाया गया।
कैग रिपोर्ट में उजागर हुई गड़बड़ियां-31,645 साइकिलें गायब
कर्मकार कल्याण बोर्ड में बरती गई गंभीर अनियमितताओं को भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में उजागर किया गया है। यह रिपोर्ट 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष और इससे पहले के वर्षों की प्रगति पर आधारित है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में बोर्ड के कार्यों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी पकड़ी हैं।
चार वर्षों के दौरान बोर्ड ने श्रमिकों के लिए 32.78 करोड़ रुपये से 83,560 साइकिलें खरीदी थीं, जिनमें से 10.82 करोड़ रुपये की 31,645 साइकिलों का कोई पता नहीं चल पाया। देहरादून जिले के लिए खरीदी गई 37,665 साइकिलों में से उप श्रम आयुक्त ने केवल 6,020 साइकिलों को प्राप्त करना दर्शाया है। शेष साइकिलों का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। इसके अलावा जिन साइकिलों को बांटा जाना दर्शाया गया, उनमें से किसी भी श्रमिक से उनकी प्राप्ति की पुष्टि नहीं करवाई गई, जिससे वितरण संदिग्ध हो गया।
उपकरण खरीद में भी हेराफेरी
बोर्ड में की गई खरीद में अनियमितता का यह अकेला मामला नहीं है। बोर्ड ने 33.23 करोड़ रुपये की लागत से 22,426 टूलकिट भी खरीदीं। लेकिन 22,255 टूलकिटों का कोई हिसाब नहीं मिला। देहरादून के उप श्रम आयुक्त ने मात्र 171 टूलकिट की प्राप्ति और वितरण को स्वीकार किया।
ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा
साइकिल और टूलकिट दोनों मामलों में वितरण आवेदन के आधार पर किया जाना था, लेकिन बोर्ड ने इसके लिए आवेदन लेने की जरूरत ही नहीं समझी। इसके अलावा, लगभग 63 करोड़ रुपये की राशन किट की खरीद और वितरण भी दर्शाया गया। लेकिन इसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी।
कैग ने पाया कि राशन किट वितरण के लिए पात्र श्रमिकों की सूची तैयार ही नहीं की गई और न ही यह सत्यापित किया गया कि राशन वास्तव में श्रमिकों तक पहुंचा या नहीं।
बोर्ड के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग (CAG Report Reveals 607 Crores Cycle-ToolKit Scam)
कैग रिपोर्ट में सामने आए इन घोटालों के बाद बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। श्रमिक संगठनों ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि बोर्ड ने न तो वित्तीय अनुशासन का पालन किया और न ही पारदर्शिता सुनिश्चित की। अब देखना यह होगा कि सरकार इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए क्या कार्रवाई करती है और क्या इस घोटाले में संलिप्त अधिकारियों को दंडित किया जाएगा या नहीं। (CAG Report Reveals 607 Crores Cycle-ToolKit Scam)
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