Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस मंत्र से प्रशासन चलाएंगे नए डीएम सुमन

Spread the love
कार्यभार ग्रहण करते डीएम विनोद कुमार सुमन

-‘सबका साथ-सबका विकास’ के मूल मंत्र पर कार्य करेंगे नए डीएम सुमन
-बोले सामान्य बनकर और सबकी सुनकर ही बेहतर तरीके से चलाया जा सकता है प्रशासन
नैनीताल,25 मार्च 2018। नैनीताल जनपद के नवागत डीएम विनोद कुमार सुमन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मूल मंत्र पर प्रशासन चलाएंगे। उन्होंने कहा कि हर स्थिति में शासन, न्यायालय तथा सभी संबंधित प्रभावित पक्षों से समन्वय बनाकर और सबको साथ लेकर ही बेहतर प्रशासन चलाया जा सकता है। कहा कि सामान्य बनकर और सबकी सुनकर ही बेहतर तरीके से प्रशासन चलाया जा सकताा है। अल्मोड़ा और चमोली जिलों के डीएम रहते जिले की हर तहसील के एक स्कूल में जाकर शासन की विभिन्न प्रमाण पत्र बनाने जैसी समस्त सुविधाएं लेकर पहुंचने जैसे बेहतर रहे प्रयोगों को यहां भी लागू करने की कोशिश करेंगे।
रविवार देर रात्रि कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत सोमवार दोपहर पत्रकार वार्ता में डीएम श्री सुमन ने कहा कि पर्यटन से संबंधित मुख्यालय व जनपद होने के नाते पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं व अनुभव प्रदान करने, नैनी झील के जल को संरक्षित करने के कार्य प्राथमिकता में होंगे, जबकि आसन्न नगर निकाय चुनाव कराना पहली चुनौती होगी। बोले, सकारात्मक कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे। नगर के लिए जल्द ही बेहतर यातायात योजना बनाई जाएगी। बताया कि ‘सबका साथ-सबका विकास’ की अवधारणा के तहत हर खास व आम व्यक्ति का फोन सुनते हैं, और नहीं सुनने पर कॉल बैक भी करते हैं। उन्होंने सरकार की ई-ऑक्शन के जरिये हो रही खनन पट्टों की नीलामी, पहली बार प्रदेश में 400 चिकित्सकों की तैनाती व टेलीमेडिसिन की सुविधा जैसी योजनाओं की प्रशंसा भी की। इस मौके पर अपर निदेशक सूचना योगेश मिश्रा, जिला सूचना अधिकारी गोविंद बिष्ट आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : विनोद कुमार सुमन ने नैनीताल डीएम के रूप में संभाला कार्यभार

नैनीताल, 25 मार्च 2018। 1997 बैच के पीसीएस व 2008 बैच के आईएएस अधिकारी विनोद कुमार सुमन ने रविवार देर रात्रि नैनीताल के उत्तराखंड बनने के बाद 16वें, और 1893 में नैनीताल जनपद के अस्तित्व में आने के बाद से 79वें डीएम के रूप में देर शाम कार्यभार ग्रहण कर लिया। देर रात्रि कार्यभार ग्रहण करने का कारण रविवार को नवरात्र का आखिरी दिन व रामनवमी होना बताया जा रहा है। इससे पूर्व श्री सुमन के शाम छह बजे कार्यभार ग्रहण करने की सूचना प्राप्त हुई, लेकिन उनके पहुंचने में काफी विलंब हुआ। इधर जिला कलक्ट्रेट में एडीएम हरबीर सिंह, प्रभारी अधिकारी अशोक जोशी, एसडीएम प्रमोद कुमार, उप निदेशक सूचना योगेश मिश्रा, जिला सूचना अधिकारी गोविंद सिंह बिष्ट एवं डीएम के वैयक्तिक अधिकारी कवींद्र पांडे एवं कोषागार के अधिकारी-कर्मचारी डीएम की अगवानी के लिए मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल जनपद के जिलाधिकारी दीपेंद्र कुमार चौधरी का 24 मार्च 2018 को शासन में तबादला कर दिया गया था। उनकी जगह शासन से अपर सचिव विनोद कुमार सुमन को नैनीताल का जिलाधिकारी बनाकर भेजा गया है। शनिवार को अपर सचिव कार्मिक भूपाल सिंह मनराल की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया था। आदेश के अनुसार श्री चौधरी को शासन में अब तक सुमन द्वारा देखे जा रहे शहरी विकास विभाग में अपर सचिव व निदेशक पदों की जिम्मेदारी दी गयी है।

अल्मोड़ा व चमोली के जिलाधिकारी रह चुके व अब नैनीताल के डीएम बनाने जा रहे व यहाँ कुमाऊँ मंडल विकास निगम के जीएम के पद पर भी रह चुके 1997 बैच के पीसीएस व 2008 बैच के आईएएस अधिकारी विनोद कुमार सुमन नैनीताल के उत्तराखंड बनने के बाद 16वें, और 1893 में नैनीताल जनपद के अस्तित्व में आने के बाद से 79वें डीएम बने हैं। 

नैनीताल जिले के अब तक के डीएम :

चौधरी इसलिए लौट रहे शासन 

यह इत्तफ़ाक ही कहा जा रहा है कि डीएम चौधरी का तबादला एक दिन पूर्व नगर में यातायात सुधार हेतु मॉल रोड को अपराह्न 4 से 8 बजे तक बंद करने सहित कई निर्णय लेने और कुछ ही घंटे बाद इस निर्णय को वापस लेने की पृष्ठभूमि में हुआ है। हालाँकि यह भी बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले ही मुख्यमंत्री से मिलकर ‘फील्ड’ में न रहने की दरखास्त की थी। इसका कारण उनकी वृद्ध माता का स्वास्थ्य खराब होना बताया गया है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल की माल रोड पर शाम चार बजे से लौटेगा ‘अंग्रेजी’ दौर !

यह भी पढ़ें : मजदूरी करके पूरी की थी पढ़ाई नवनियुक्त डीएम सुमन ने 

अगर इंसान जिंदगी में कुछ हासिल करने की ठान ले तो बड़ी से बड़ी कठिनाई उसकी राह नहीं रोक सकती, बस इसके लिए इरादा पक्का और हौसले बुलंद होने चाहिए।

सुमन की सफलता की कहानी आज के युवाओं को प्रेरणा दे सकती है। उत्तर प्रदेश के भदोही के पास जखांऊ गांव के रहने वाले विनोद कुमार सुमन ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई विभूति नारायण राजकीय इंटर कालेज ज्ञानपुर (भदोही) से की। इंटरमीडिएट करने के बाद अपने ही दम पर मंजिल पाने के जुनून में भदोही से अपने माता-पिता को छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल निकल आए थे और वहां कई महीने मजदूरी करके गुजारा किया। आगे उन्होंने श्रीनगर में कठिन संघर्ष करके ग्रेजुएशन किया और आखिरकार पीसीएस की परीक्षा में सफल हुए। 

स्नातक में परिजनों ने इलाहाबाद में प्रवेश दिलाया लेकिन उनका मन नहीं लगा। वह सोचते थे कि वहां रहकर प्रशासनिक सेवा में सफल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने पढ़ाई के लिए बाहर जाने की इच्छा जताई लेकिन घर के लोग राजी नहीं हुए। इस पर उन्होंने अपने ही दम पर कुछ करने की ठान ली।

वे बताते हैं कि वह कुछ बनने के लिए घर से निकले थे। उन्होंने इंटरमीडिएट करने के बाद ही तय कर लिया था कि एक न एक दिन प्रशासनिक सेवा में सफल होकर दिखाएंगे।

पारिवारिक पृष्ठभूमि को वे इन शब्दों में बयां करते हैं ‘पिता खेती के साथ ही कालीन बुनते हैं। पांच भाई और दो बहनों में मैं सबसे बड़ा था। जाहिर है परिवार की जिम्मेदारी में पिता का हाथ बंटाना मेरा फर्ज भी था।’ 1987 में विभूति नारायण राजकीय इंटर कालेज ज्ञानपुर से इंटर पास करने के बाद समस्या आई आगे की पढ़ाई की। बहुत मुश्किल हालात में स्नातक के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। विवि में प्रवेश के बाद उनके सामने पैसों की दिक्कत खड़ी हो गई। घर से कभी मनीआर्डर आता था कभी नहीं। ऐसे में उन्होंने खुद के दम पर कुछ करने की ठानी। वे किसी को बिना बताए पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर शहर आ गए और घर पत्र भेज बता दिया कि उन्हें तलाशने की कोशिश न करें।

सुमन 1989 के उन दिनों को याद कर बताते हैं कि श्रीनगर पहुंचे तो जेब के पैसे खत्म हो चुके थे। वह एक मंदिर में पहुंचे और पुजारी से शरण मांगी। अगले दिन वह काम की तलाश में निकले। उन दिनों श्रीनगर में एक सुलभ शौचालय का निर्माण चल रहा था। ठेकेदार से मिन्नत के बाद वह वहां मजूदरी करने लगे। मजदूरी के तौर पर उन्हें 25 रुपये रोज मिलते थे। 

संघर्ष के दिनों को याद करते हुए सुमन बतातें हैं “करीब एक माह तक वे एक चादर और बोरे के सहारे मंदिर के बरामदे में रातें बिताई। इस दौरान मजदूरी से मिले पैसों से कुछ भी खा लेते थे।”

इस बीच उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय में बीए में प्रवेश भी ले लिया, और गणित, सांख्यिकी और इतिहास विषय लिए। किसी तरह दोनों काम साथ चलते रहे। उनकी गणित अच्छी थी। इसलिए उन्होंने रात में ट्यूशन पढ़ाने का निश्चय किया। पूरे दिन मजदूरी करते और रात को ट्यूशन पढ़ाते। धीरे-धीरे उनकी आर्थिक हालात कुछ ठीक हुए तो उन्होंने घर पर पैसे भेजने शुरू कर दिए। वर्ष 1992 में प्रथम श्रेणी में बीए करने के बाद सुमन ने पिता की सलाह पर इलाहाबाद लौटने का निश्चय किया और यहां इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास में एमए किया। इसके बाद 1995 में उन्होंने लोक प्रशासन में डिप्लोमा किया, और प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गये। इसी बीच उनकी महालेखाकार कार्यालय में लेखाकार के पद पर नौकरी लग गई। नौकरी लगने के बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखा और 1997 में उनका पीसीएस में चयन हुआ और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

तमाम महत्वपूर्ण पदों पर सेवा देने के बाद 2008 में सुमन को आइएएस कैडर मिल गया। नवंबर 2015 में चमोली का जिलाधिकारी बनते ही सुमन ने देखा कि दूर-दराज के छात्र मूल निवास और जाति प्रमाण पत्र के लिए जिला मुख्यालय गोपेश्वर में भटक रहे हैं। उन्होंने आदेश दिया कि दूर दराज के स्कूलों में प्रमाण पत्र वहीं वितरित किए जाएं। अब बच्चों को गोपेश्वर नहीं आना पड़ता। वह देहरादून में एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के अलावा कई जिलों में एडीएम गन्ना आयुक्त, निदेशक समाज कल्याण सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

सुमन का मानना है, “अगर दृढ़ निश्चय हो तो कोई भी कठिनाई इंसान को नहीं डिगा सकती।” अपने लक्ष्य को लेकर सुमन दृढ़-संकल्प होकर डटे रहे और अंत में सफलता का स्वाद चखा। उनकी सफलता से हमें यही प्रेरणा मिलती है कि जिंदगी की राह में हमें अनगिनत बाधाओं का सामना करना पड़ेगा, हमें उसका डटकर मुकाबला करने की जरुरत है न कि हार मान लेने का।

Loading...

नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

Leave a Reply