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ऐसे भी हालात : एक माह की दुधमुंही बच्ची को एक पर्ची लिखकर छोड़कर बेबस मां…

A Mother's Open Letter to Her New Baby Girlनवीन समाचार, देहरादून, 21 दिसंबर 2022। एक माह की दुधमुंही बेटी का पालन-पोषण करने में असमर्थ एक लाचार मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को नहर किनारे लावारिस हालत में छोड़ दिया। बच्ची एक पिता और बेटी को कंबल में लिपटी मिली। पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद बच्ची को बाल शिशु कल्याण केंद्र, केदारपुरम, देहरादून भेज दिया। अब उसके माता-पिता की तलाश की जा रही है। यह भी पढ़ें : अंकिता हत्याकांड: शराब के नशे में गले लगाने वाले ग्राहक ने खोली पुलकित व वनंतरा रिजॉर्ट की

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार अनूप सिंह निवासी छोटूवाला और उनकी बेटी नीलम को अंबाड़ी नहर के किनारे कंबल में लिपटी करीब एक माह की बच्ची दिखाई दी। उन्होंने आसपास पता किया लेकिन परिजनों का पता नहीं चला। इस पर दोनों बच्ची को लेकर थाने पहुंचे। यह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमणकारियों को एक सप्ताह में नोटिस देकर 

पुलिस ने तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची के स्वास्थ्य की जांच कराई। पूरी तरह स्वस्थ होने पर पुलिस ने बाल कल्याण समिति देहरादून को सूचना देकर बच्ची को शिशु कल्याण केंद्र भिजवा दिया। विकासनगर कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि बच्ची के पास ही कपड़ों की एक पोटली भी मिली। इसमें साबुन आदि रखे थे। मौके से एक पर्ची भी मिली। इसमें लिखा है कि उसकी और भी बेटियां हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते वह इस बच्ची की अच्छी देखभाल नहीं कर सकती। यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार: उत्तराखंड उच्च न्यायालय से प्लास्टिक कूड़े और राज्य के सैकड़ों उद्योगों को बंद किए

कोतवाल ने बताया कि इस संबंध में सभी पुलिस थानों और चौकियों को सूचित कर दिया गया है। बच्ची के माता-पिता का पता लगाया जा रहा है। जिस जगह वह मिली, वहां आसपास रहने वाले लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।  (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : ठंड से निराश्रितों को बचाने के लिए डीएम ने स्वीकृत किए 5 लाख रुपए

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 दिसंबर 2022। डीएम धीराज गर्ब्याल ने जनपद में शीतलहर के दौरान निराश्रित एवं असहाय तथा गृहविहिन व्यक्तियों को ठंड के प्रकोप से बचाने हेतु राज्य आपदा मोचन निधि से 5 लाख की रुपये की धनराशि आवंटित की है। यह भी पढ़ें : ब्रेकिंग: प्राधिकरण ने नैनीताल में शुरू किया विरोध के बीच ध्वस्तीकरण अभियान….

श्री गर्ब्याल ने जनपद के सभी उपजिलाधिकारियों व तहसीलदारों को निर्देश दिये है कि निराश्रितों को सम्भावित शीतलहर के प्रकोप से बचाने हेतु अधिक से अधिक निर्धन एवं असहायों तथा खुले आसमान के नीचे निवास करने वाले लोगों के पास धर्मशालाओं, रेनबसेरों, मुसाफिरखानों, पड़ाव सराय, चौराहा, रेल एवं बस स्टेशन पर अलाव की व्यवस्था के साथ ही निःशुल्क कम्बल बाटने के निर्देश दिए। यह भी पढ़ें : चर्चा में हल्द्वानी का ‘इंजीनियर चायवाला’, दिलचस्प है कहानी…

एडीएम अशोक कुमार जोशी ने बताया कि जनपद की सभी 9 तहसीलों को 5 लाख रुपए की धनराशि व्यय किये जाने की अनुमति प्रदान की गई है। इसमें से तहसील नैनीताल को 80 हजार, हल्द्वानी को 90 हजार, रामनगर को 65 हजार, धारी को 32 हजार 500, खनस्यूं को 32 हजार 500 तथा लालकुआं, कालाढूंगी, कोश्याकुटौली व बेतालघाट को 50-50 हजार रुपये की धनराशि दी गई है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सीएम एवं अधिकारी ध्यान दें : पलायन व किडनी बेचने को मजबूर होने के बाद युवक ने दी तहसील में आत्महत्या करने की धमकी…

-अतिक्रमण ध्वस्त करने के बावजूद लगा 7.7 लाख रुपए का जुर्माना, रुला देगी युवक की पूरी दास्तान
नवीन समाचार, नैनीताल, 3 दिसंबर 2022। सरकार पलायन को रोकने की बात करती है, लेकिन नैनीताल जनपद में एक युवा कैसे न केवल पलायन करने को बल्कि घर के जेवरों के बाद अपनी किडनी बेचने की पेशकश करने के साथ आत्महत्या की धमकी देने को मजबूर हुआ है, उसकी कहानी सामने आई है। युवक ने मुख्यमंत्री सीएम पोर्टल पर गुहार लगाने के साथ सोशल मीडिया पर अपना दुःख साझा करते हुए धारी तहसील में आत्महत्या करने की धमकी दी है। देखें विडियो :

युवक पर 100 वर्ग फिट भूमि पर कब्जे को ध्वस्त करने के बावजूद 7.7 लाख रुपए जुर्माना लगाया है, उसका कहना है वह किडनी बेचकर ही यह जुर्माना चुका सकता है, लेकिन इसके लिए प्रशासन सड़क से अन्य अवैध कब्जे भी ध्वस्त करे। यह भी पढ़ें : अपडेटेड समाचार : बारात की कार के खाई में गिरने से दूल्हे के पिता, दीदी, भाभी व भतीजे की मौत, 3 अन्य गंभीर घायल….

नैनीताल जनपद के ओखलकांडा विकासखंड के ग्राम अधौड़ा निवासी भगवान सिंह मेहरा ने बताया कि काठगोदाम से रीठासाहिब जाने वाले अधौड़ा-मीडार मोटर मार्ग पर उन्होंने वर्ष 2009 में अधौड़ा के पास वन पंचायत की 10 गुणा 10 यानी कुल 100 वर्ग फिट भूमि पर एक खोमचा बनाकर उसमें चाय व परचून की दुकान खोल ली थी। उनका दावा है कि यहां केवल उन्होंने ही नहीं वरन करीब 250 परिवारों की बसासत वाले अधौड़ा ग्राम सभा के शत-प्रतिशत लोगों ने वन पंचायत व नाप खेत से लगी सिविल भूमि पर कब्जा किया हुआ है। यह भी पढ़ें : नैनीताल के छात्र आयुष का आईआईटी मद्रास में हुआ चयन

राजस्व उप निरीक्षक ने 2009 में ही उनके निर्माण का चालान कर दिया। खास बात यह भी रही कि उनके निर्माण के साथ ही बाहर खाली आंगन को उनके पिता खीम सिंह मेहरा का भी बताकर दोनों पिता-पुत्र का चालान किया गया। यह मामला एसडीएम धारी की अदालत में चला। इस दौरान उनसे कहा गया कि पिता खीम सिंह मेहरा के चालान के ऐवज में 75 हजार रुपए जमा कराएं, तो ध्वस्तीकरण नहीं होगा। अन्यथा पिता को जेल जाना पड़ेगा। इस पर उन्होंने रुपए उधार लेकर और जेवर भी बेचकर किस्तों में 75 हजार रुपए जमा किया। इसके बावजूद अगस्त 2022 में उनके साथ केवल 8-10 अतिक्रमणकारिणों के निर्माणों के ध्वस्तीकरण के आदेश हो गए। जबकि अवैध निर्माण व अतिक्रमण करीब 250 हैं। यह भी पढ़ें : होटल व्यवसायी की आत्महत्या के मामले में आया आईपीएस अधिकारी का नाम, विभाग में हड़कंप..

इनमें से केवल उन्होंने और डुंगरी गांव के रमेश कांडपाल ने स्वयं अपना निर्माण ध्वस्त भी कर दिया, और दुकान ध्वस्त हो जाने से कोई रोजगार न रहने के कारण भगवान सिंह गांव से पलायन कर हल्द्वानी आ गए और वहां किराये पर रहकर गाड़ी चलाने लगे। लेकिन अतिक्रमण ध्वस्त करने के बाद भी उन पर न्यायालय में मामला चलने के 11 वर्षों का प्रति वर्ष 70 हजार रुपए के हिसाब से 7 लाख 70 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। इस पर एसडीएम के समक्ष रो भी दिये लेकिन अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। यह भी पढ़ें : पति की जगह किसी और के साथ साढ़े चार लाख के हनीमून पैकेज पर विदेश घूम आई पत्नी, सोशल मीडिया से खुला राज तो पति ने कराया मामला दर्ज..

इस दौरान उन्होंने एसडीएम से स्थानीय राजस्व उप निरीक्षक द्वारा अन्य लोगों से रुपए लेकर उनके चालान न करने के सबूत सहित आरोप लगाए तो आरोप है कि और अधिक गुस्से में आ गए कि वह विभागीय कर्मचारी पर आरोप लगा रहे हैं। इस पर उन्हें जेल भेजने की धमकी दी गई। बताया कि उनके निर्माण से सटकर बने निर्माणों के खिलाफ और वहां अवैध निर्माणों में कई अवैध धंधे होने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बताया कि वह यह जुर्माना भरने के लिए पत्नी सहित अपनी किडनी बेचने भी गए थे, लेकिन सुगर होने के कारण किडनी निकालने से इंकार कर दिया गया। यह भी पढ़ें : युवती ने हनीट्रैप में फंसाकर किया युवक का अपहरण, परिवार से मांगी छह लाख रुपए की रंगदारी, नहीं मिली 6 माह बाद भी जमानत

इधर करीब 20 दिन पूर्व उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर पूरे मामले की शिकायत की, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने राजस्व उप निरीक्षक के हवाले से झूठा कह दिया कि उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इससे डरकर वह गत 1 दिसंबर को सुनवाई पर भी नहीं गए और इधर शुक्रवार को उन्होंने पुनः सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है, और सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर न्याय न मिलने पर धारी तहसील में आत्महत्या करने की धमकी दी है। साथ ही कहा है कि यदि धारी प्रशासन रानीबाग से धारी तहसील के बगल में हुए अतिक्रमण को ध्वस्त करता है तो वह अपनी किडनी बेचकर भी 7.7 लाख रुपए का जुर्माना भुगतने को तैयार हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : मानवता शर्मसार ! बेरोजगार हुए फैक्ट्री कर्मी तो अपनों ने भी छोड़ा, लावारिश के तौर पर हुई मौत, अंतिम संस्कार को भी नहीं आ रहे परिजन

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 15 सितंबर 2022। दो बेटियों का भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद पूर्व में अच्छी नौकरी के बाद बेरोजगार हुए एक व्यक्ति की हल्द्वानी के सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय में गुरुवार सुबह सात बजे एक लावारिश के तौर पर उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। अमानवीयता की हद देखिए कि उनके बेटे-बेटी उनकी मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं आ रहे हैं।

समाजसेवी हेमंत गौनिया ने बताया कि मृतक भास्कर दत्त पूर्व में मैग्नेटाइट फैक्ट्री पर कार्य करते थे। फैक्ट्री बंद होने के बाद वह बेरोजगार हो गए और दर-दर की ठोकरें खाने लगे। उनकी दो बेटियां हैं। गौनिया ने बताया कि वह हल्द्वानी बेस अस्पताल में लावारिस हालत में में पड़े हुए थे। उन्हें गौनिया ने प्रेम रतन आश्रम लामाचौड़ में भी रखा। उनका स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें पुनः अस्पताल पर भर्ती कराया। इस बीच उनकी पुत्रियों व दामाद से भी संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की और न ही उन्हें यहां देखने आए।

गौनिया ने उन्हें अस्पताल में सांस लेने वाली मशीन, कपड़े व नगद राशि लोगों से सहयोग से उपलब्ध कराई। आज उनका निधन होने की सूचना देने के लिए उनकी पुत्री पल्लवी का नंबर मिलाया, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया और स्विच ऑफ कर दिया। जीते जी तो छोड़ा ही, मरने के बाद दाह संस्कार के लिए नहीं आ रहे हैं। यदि यह बात सच है तो यह मानवता को शर्मसार करने वाली है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कोरोना ने ऐसा मजबूर किया कि पिता के इलाज हेतु 40 हजार रुपयों के लिए जिस्म बेचने को तैयार हो गईं बेटियां…

-पिता के उपचार के लिए लाखों रुपए हो चुके खर्च, पड़ोसी ने दिया रुपयों के लिए जिस्म फरोशी करने का सुझाव
नवीन समाचार, देहरादून, 27 मई 2021। यह समाचार वाकई दिल को दहलाने वाला है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की दो बेटियां अपने कोरोना से पीड़ित पिता के इलाज के लिए तत्काल जरूरी 40 हजार रुपयों के लिए अपना जिम्स बेचने के लिए तैयार हो गईं। जबकि सरकार बड़े चिकित्सालयों में भी कोरोना रोगियों का निःशुल्क इलाज करा रही है। फिर क्यों जरूरतमंदों तक यह जानकारी नहीं पहुंच रही है, और क्यों समाज के कमजोर वर्ग के लोग कोरोना के उपचार के लिए निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जिनके लिए उपचार से पहले पैंसा अहम है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार देहरादून के एक थाने की पुलिस ने बीती रात दो युवतियों को सेक्स स्कैंडल के शक में पकड़ा। लेकिन पुलिस थाने में पूछताछ में उनकी जो कहानी सामने आई उसे सुनकर पुलिस भी हिल व पिघल गई। बताया गया है कि युवतियों ने पुलिस को बताया कि वे दोनों सगी बहनें हैं। उनके पिता शहर के एक निजी चिकित्सालय में कोरोना से मौत से जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। पिता की बीमारी पर अब तक उनके जीवन भर की कमाई के लाखों रूपये खर्च हो चुके हैं। कल शाम ही उन्हें अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उन्हें आज सुबह तक 40 हजार रुपये जमा कराने होंगे। उनके पास और रुपये नहीं थे।

इसलिए उन्होंने अपने एक परिचित से मदद मांगी तो उसने देह व्यापार के बदले में रुपये देने का वादा किया। पिता को बचाने के लिए युवतियों ने इस रास्ते पर चलने की मन बना लिया लेकिन संयोग से ऐन वक्त पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि पुलिस कर्मियों ने अपनी ओर से उन्हें कुछ आर्थिक मदद देकर घर भेज दिया और उन्हें जिस्मफरोशी की राय देने वाले उनके पड़ोसी की अच्छी खबर ली। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही नैनीताल में एक अर्द्ध विक्षिप्त व्यक्ति द्वारा कोविड कर्फ्यू के दौरान भूख बर्दास्त न कर पाने के कारण एक दुकान के बाहर रखे बड़े फ्रिज से चिप्स व बिस्किट चुराकर खाने का मामला प्रकाश में आया था। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : कोविड कर्फ्यू में अब सहन नहीं हो पा रही भूख, दुकान से चोरी हुए चिप्स-बिस्किट पर खुलासा

डॉ.नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 मई 2021। पिछले दो सप्ताह से लगा कोविड कर्फ्यू समाज के कमजोर वर्ग पर बहुत भारी पड़ रहा है। बहुत से लोगों के लिए अब भोजन न मिलने के कारण भूख पर काबू रख पाना मुश्किल हो गया है। मुख्यालय में ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है।

यहां बीती रात्रि नगर के मल्लीताल गोवर्धन हॉल सेवा समिति के नीचे भोटिया माला बाजार में स्थित एक जरनल स्टोर में चोरी की घटना का पता चला। बुधवार सुबह जब दुकान स्वामी अरविंद बर्गली अपनी दुकान का निरीक्षण करने दुकान पर पहुंचे तो उनको दुकान के बाहर रखे बड़े फ्रिज का ताला टूटा हुआ मिला। फ्रिज से चिप्स व बिस्किट जैसा सामान गायब था। साथ ही दुकान स्वामी के अनुसार दुकान के शटर का ताला भी तोड़ने का प्रयास किया गया था।

सूचना मिलने पर पुलिस ने पड़ताल की तो वहीं घूमने वाले एक अर्धविक्षिप्त व्यक्ति ने कबूल कर लिया कि भूख सहन न कर पाने के कारण उसने ही फ्रिज का ताला तोड़कर बिस्किट व चिप्स आदि खा लिये। उसका चोरी करने का कोई इरादा नहीं था, पर भूख सहन न करने के कारण उसने ऐसा कर दिया। पुलिस कोतवाली के एसएसआई कश्मीर सिंह ने बताया कि अर्द्ध विक्षिप्त को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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