हाईकोर्ट ने निजीकरण के लिए केंद्र सरकार को दिया बड़ा झटका

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 दिसंबर 2019। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामनगर के पास मोहान में स्थापित केंद्र सरकार की मिनी रत्न कम्पनी आईएमपीसीएल यानी इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड के निजीकरण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इसकी विनिवेश प्रकिया को बड़ा झटका दिया है। रामनगर निवासी एडवोकेट नीरज तिवारी की जनहित याचिका में कहा गया है कि रामनगर के पास मोहान (अल्मोड़ा) में केंद्र सरकार की आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा निर्माता कंपनी आईएमपीसीएल है। दवा कंपनी हर साल शत-प्रतिशत शुद्ध लाभ देती आई है और भारत सरकार की चंद कंपनियों में शामिल है, जो कि आज भी शुद्ध लाभ दे रही है।

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आईएमपीसीएल में केंद्र सरकार की 98.11 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि शेष 1.89 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तराखंड सरकार के कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड के पास है। सरकार ने आईएमपीसीएल में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिये प्रस्तावित रणनीतिक विनिवेश के तहत ‘‘वैश्विक स्तर’’ पर रुचि पत्र आमंत्रित किये हैं। इस तरह केद्र सरकार शत प्रतिशत शुद्ध लाभ दे रही आईएमपीसीएल कंपनी को केंद्रीय वित्त मंत्रालय निजी हाथों में देने जा रहा है। जबकि यह कम्पनी लगभग 500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और इस पिछड़े क्षेत्र के जड़ी बूटी उगाने और कम्पनी को आपूर्ति करने वाले वाले लगभग 5000 किसानों को अप्रत्यक्ष रोजगार देती है। इसके उत्पादन की उत्कृष्ट दवाइयां देश भर के सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में सस्ती दरों पर उपलब्ध कराईं जाती हैं। निजीकरण से ये दवाएं भी महंगी हो जाएंगी जो कि स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन होगा। स्वयं मुख्यमंत्री उत्तराखंड, केंद्रीय आयुष मंत्रालय तथा सांसदों और विधायकों ने लिखित में इस कम्पनी के विनिवेश का विरोध किया है फिर भी कम्पनी का निजीकरण किया जा रहा है।

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