April 21, 2024

कौन हैं वंदना चौहान , जिनकी नैनीताल के डीएम के रूप में पूरे देश में हो रही चर्चा, किन हालातों में की पढ़ाई…

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IAS Vandana Singh Chauhan

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डॉ.नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 फरवरी 2024 (IAS Vandana Singh Chauhan)। उत्तराखंड में नैनीताल जनपद की डीएम वंदना सिंह चौहान (IAS Vandana Singh Chauhan) इस समय देश भर में चर्चा में आ गई हैं। हल्द्वानी में भड़की हिंसा के बाद जिस तरह उन्होंने प्रशासनिक कुशलता दिखाई है। खासकर इस घटना के बाद उनकी पहली पत्रकार वार्ता का पूरे देश की मीडिया में पूरा सीधा प्रसारण हुआ। इस आलेख में हम डीएम वंदना के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि काफी रोचक व संघर्षों से भरी हुई है। देखें उनकी इस पत्रकार वार्ता की झलक-कैसे उन्होंने खोल दिया था दंगाइयों का काला चिट्ठा  :

Update on Holiday, DM Nainital, Avaidh Nirman, IAS Vandana Singh Chauhan,डीएम वंदना सिंह चौहान (IAS Vandana Singh Chauhan) उत्तराखंड कैडर की 2012 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म हरियाणा के नसरुल्लागढ़ गांव में एक संयुक्त परिवार में हुआ था। हरियाणा में लड़कियों की शिक्षा को लेकर जिस प्रकार का माहौल था, उसका सामना वंदना को भी करना पड़ा।

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उनके गांव में कोई स्कूल नहीं था। हालांकि उनके पिता महिपाल सिंह चौहान शिक्षा को लेकर जागरूक थे। उन्होंने उनके भाई को पढ़ने के लिए भेज दिया था, लेकिन वंदना को नहीं भेज पाये। कारण-समाज था और यह भी था कि वंदना एक लड़की थीं। लेकिन इन स्थितियों से वंदना कमजोर नहीं पड़ीं, बल्कि उनका पढ़ने का संकल्प और मजबूत हुआ।

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पिता महिपाल सिंह चौहान के अनुसार (IAS Vandana Singh Chauhan)

वंदना (IAS Vandana Singh Chauhan) के पिता महिपाल सिंह चौहान ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके गांव में कोई अच्छा स्कूल नहीं था, ऐसे में बेटे को पढ़ाई के लिए बाहर भेज दिया था, लेकिन वंदना को नहीं भेज पाए। ऐसे में एक दिन वंदना ने उनसे कहा कि वह बेटी हैं और इसीलिए उनके पिता उन्हें बाहर नहीं भेज रहे हैं। इसके बाद उन्होंने वंदना का प्रवेश मुरादाबाद के एक गुरुकुल में करवा दिया।

इस पर उनके दादा, ताऊ, चाचा व परिवार के अन्य सदस्य महिपाल सिंह के खिलाफ हो गए थे, लेकिन विरोध के बावजूद वंदना ने पढ़ाई जारी रखी। उनके पारिवारिक सदस्यों के अनुसार वंदना ने 12वीं के बाद ही आईएएस अधिकारी बनने की ठान ली थी और आईएएस बनने के लिये परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।

इसके लिये वह हर दिन 12 से 14 घंटे पढ़ाई में बिताती थीं। उन्होंने कन्या गुरुकुल भिवानी से संस्कृत (ऑनर्स) में स्नातक किया और फिर एलएलबी की पढ़ाई के लिये डॉ.बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में प्रवेश लिया, लेकिन परिवार व समाज का सहयोग न मिलने पर उन्हें घर में ही रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ी। इस दौरान उनके भाई ने उनका काफी साथ दिया।

वंदना की मां के अनुसार (IAS Vandana Singh Chauhan)

वंदना की मां ने एक साक्षात्कार में बताया था कि पढ़ाई के दौरान नींद अधिक न आए इसलिए वंदना ने अपने कमरे में कूलर लगाने से भी मना कर दिया था। अपनी इस मेहनत के बल पर पर वंदना देश की सबसे प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा सेवा आयोग की सिविल सेवा की परीक्षा हिंदी माध्यम से देकर केवल 24 वर्ष की उम्र में पहले प्रयास में ही 8वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण कर आईएएस अधिकारी बन गईं।

नैनीताल जनपद में किए 4 बड़े काम (IAS Vandana Singh Chauhan)

नैनीताल जिले की जिलाधिकारी के रूप में वंदना सिंह (IAS Vandana Singh Chauhan) सामान्यतया कभी भी अन्य अधिकारियों की तरह अपने अंदाज या अन्य किसी कारण से चर्चा में नहीं रहती है। लेकिन उन की छवि चुपचाप बड़े कार्य करने वाली सभ्य, सुशील व काम के लिहाज से कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की बनी है। नैनीताल जिला मुख्यालय में मेट्रोपोल कंपाउंड व बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के चार्टन लॉज के क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ नगर के आधार बलियानाला में आधारभूत सुदृढ़ीकरण के कार्य शुरू कराना उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।

इसके अलावा हल्द्वानी में ‘मलिक का बगीचा’ उनके कार्यकाल में ही अतिक्रमण मुक्त होकर पुलिस चौकी खुलने के बाद ‘पुलिस का बगीचा’ जैसी कोई नई पहचान बनने की ओर है। यह वह काम हैं, जिन्हें उनके पूर्ववर्ती कई तेज-तर्रार अधिकारी भी नहीं कर पाये थे।

5वें काम की उम्मीद (IAS Vandana Singh Chauhan)

जो काम करता है, उसी से आगे भी बड़ी उम्मीदें बनती हैं। ऐसे में उनसे ही पर्यटन नगरी नैनीताल में पर्यटकों-वाहनों को रोके बिना हल्द्वानी-कालाढुंगी मार्गों पर वन-वे जैसी व्यवस्था, पार्किंग व रानीबाग-हनुमानगढ़ी रोपवे के निर्माण के साथ नैनीताल को जाममुक्त करने की उम्मीद भी की जा रही है। नैनीताल आने वाले हल्द्वानी व कालाढुंगी मार्गों में से किसी एक को पर्यटकों की अधिक आवक के दौरान नैनीताल आने और दूसरे को वापस जाने का मार्ग घोषित करने से बिना किसी अतिरिक्त खर्च या मेहनत के नैनीताल को जाममुक्त और नगर हेतु सुगम यातायात किया जा सकता है। (IAS Vandana Singh Chauhan)

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