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केंद्रीय विदेश मंत्रालय से हुआ खुलासा-उत्तराखंड का युवक मलेशिया की जेल में बंद, पर क्यों ? छुड़वाने को उच्च न्यायालय में गुहार….

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-हिमांचल प्रदेश के कबूतरबाजों ने मर्चेंट नेवी में नौकरी के नाम पर मलेशिया भिजवाकर घरेलू नौकर बनाकर किया उत्पीड़न
नवीन समाचार, नैनीताल, 22 अगस्त 2019। लगता है प्रदेश व खासकर राजधानी में कबूतरबाजों का कोई ऐसा गिरोह काम कर रहा है, जो प्रदेश के भोले-भाले युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपए ऐंठ रहा है। ताजा मामला बागेश्वर जनपद के ग्राम भाखुलखोला, बैजनाथ निवासी वीरेंद्र कुमार का है, जो भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए देहरादून गया था। वहां से वह सेना में भर्ती नहीं हो पाया, लेकिन आशंका है कि यहीं से किसी तरह उसके मोबाइल नंबर व अन्य निजी डाटा कबूतरबाजों के पास चले गये। जिन्होंने इसके बाद से उसे संपर्क कर मर्चेंट नेवी में भर्ती कराने व विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर झांसे में लेना प्रारंभ किया।
आखिर वह हिमांचल प्रदेश के कुछ लोगों के चंगुल में आ गया, जिन्होंने उसे मलेशिया में अच्छी नौकरी देने का झांसा देकर बैंक खाते से 55, 35 व 25 हजार यानी कुल एक लाख 15 हजार रुपए एवं इसके अलावा भी करीब साढ़े तीन लाख रुपए ठग लिये और इस वर्ष 25 जनवरी के आसपास किसी शिपिंग कंपनी में नौकरी के नाम पर मलेशिया भेज दिया। लेकिन इसके करीब दो माह तक उसका अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ। करीब दो माह बाद किसी भारतीय सिख व्यक्ति के सहयोग से उसने अपने पिता को फोन किया कि उसे मलेशिया में कोई नौकरी नहीं मिली है। बल्कि उससे वहां घरेलू नौकर के रूप में मजदूरी करवाकर उत्पीड़न किया जा रहा है। साथ ही संभवतया उसे नौकरी की जगह टूरिस्ट वीजा पर मलेशिया भेजा गया था। इसके बाद संभवतया वह किसी तरह उत्पीड़न करने वालों के चंगुल से निकलकर इमीग्रेशन के जरिये वापस आने का प्रयास करने लगा। इस पर उसे मलेशिया भेजने वाले हिमांचल प्रदेश के लोगों ने पुनः उसके पिता से इमीग्रेशन के नाम पर 35 हजार रुपए लिये। वीरेंद्र के पहले भुवनेश्वर उड़ीसा व फिर दिल्ली आने की बात कही। पिता दिल्ली पहुंचे तो उसकी जगह किसी अन्य युवक से उसके कुछ कागजात वापस दिये गये। इस पर उसके पिता अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा से मिले। टम्टा के कहने पर बागेश्वर पुलिस ने केवल वीरेंद्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की पर ढूंढने को कुछ नहीं किया। इधर अधिवक्ता केके जोशी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वीरेंद्र को ढूंढकर न्यायालय के समक्ष पेश करने को ‘हैबियस कॉर्पस’ याचिका दायर की तो उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से कृत कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी। राज्य सरकार ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय के जरिये पता लगाकर बताया कि वीरेंद्र को मलेशिया पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया है, और वह मलेशिया में सारागोई नाम के स्थान पर जेल में बंद है। किंतु किस आरोप में, यह नहीं बताया गया है। अब उच्च न्यायालय ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय से बताने को कहा है किस अपराध में बंद है। परिजनों ने किसी भी तरह उसे मलेशिया से भारत वापस लाने की गुहार लगाई है।

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