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किसी भी तरह की कानूनी सहायता चाहिए तो जरूर पढ़ें यह समाचार, मिलेगा बड़ा फायदा

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-राष्ट्रीय लोक अदालत 14 मई  को, 14 तक भी पंजीकृत करा सकते हैं मामले
-4 मई तक राज्य भर में करीब 20 हजार वाद हुए संदर्भित

उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव एवं विशेष कार्याधिकारी सैयद गुफरान

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मई 2022। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशों एवं उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के तत्वावधान में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, नैनीताल एवं समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय सहित समस्त जनपद न्यायालयों एवं तहसीलों के स्तर के बाह्य न्यायालयों, श्रम न्यायालयों एवं उपभोक्ता आयोगों में आगामी 14 मई को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।

यह बात शनिवार को उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव एवं विशेष कार्याधिकारी सैयद गुफरान ने पत्रकार वार्ता में कही। बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित हो सकने योग्य फौजदारी के शमनीय मामले, धारा 38 एनआईएक्ट से संबंधित मामले, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, पारिवारिक, फौजदारी के शामनीय, वैवाहिक/कुटुम्ब न्यायालयों के मामले,  श्रम संबंधी, भूमि अर्जन, दीवानी वाद, राजस्व संबंधी वाद, विद्युत एवं जलकर बिलों, वेतन भत्तों एव सेवानिवृत्त से संबंधित व धन वसूली आदि विभिन्न प्रकार के मामलों का निस्तारण किया जायेगा।

इस हेतु 14 मई तक भी लंबित एवं न्यायालय में अब तक न आए मामलों को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित करने के लिए संबंधित न्यायालय में स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से प्रार्थना-पत्र देकर अपने मामलों को नियत किया जा सकता है।

बताया कि 4 मई तक करीब 20 हजार लंबित एवं प्री-लीटीगेशन यानी न्यायालयों में न आये वाद पंजीकृत हो चुके हैं तथा यह संख्या आगामी 14 मई तक बढ़ सकती है। यह भी बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में वादों की सुनवाई के लिए कोई कोर्ट फीस यानी शुल्क नहीं लगता है, तथा पूर्व में न्यायालय में जमा हो चुका शुल्क भी वापस हो जाता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटे तीन हजार से अधिक वाद, हुए 33 करोड़ के समझौते

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 दिसंबर 2018। शनिवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत प्रदेश भर में करीब 33 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि के समझौते करते हुए तीन हजार से अधिक वाद सुलह समझौते के आधार पर निपटाए गये। इस दौरान उत्तराखंड उच्च न्यायालय उत्तराखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में नियत 291 वादों में से 61 वाद निस्तारित किये गये और इन वादों में 2.78 करोड़ रुपये से अधिक के समझौते किये गये।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने भी इस दौरान चल रहे वादों की सुनवाई का जायजा लिया। प्राधिकरण के सचिव प्रशांत जोशी ने बताया कि पूरे प्रदेश में दोनों पक्षों की सहमति से बिना किसी शुल्क के सुलह-समझौते के आधार पर प्रदेश में कुल 2448 वादों का निपटारा किया गया, तथा आठ करोड़ 55 लाख 61 हजार 354 रुपये की धनराशि के समझौते किये गये। इसके अलावा राज्य भर में प्रीलिटीगेशन यानी न्यायालयों में न गये 706 वादों को निस्तारित कर 24.48 करोड़ रुपये की समझौता राशि भी तय की गयी।

वहीं जिले वार बात करें तो अल्मोड़ा जिले में 45 वादों का निस्तारण कर 18.93 लाख, बागेश्वर में 7 वादों में 20.5 लाख, चमोली में 4 वादों में 5.01 लाख, चंपावत में 50 वादों में 5.95 लाख, देहरादून में 895 वादों में 1.52 करोड़, हरिद्वार जिले में सर्वाधिक 924 वादों में 96.59 लाख, नैनीताल में 160 वादों में 51.23 लाख, पौड़ी गढ़वाल में 53 वादों में 39.95 लाख, पिथौरागढ़ में 31 वादों में 39.37 लाख, रुद्रप्रयाग जिले में 10 वादों में 2.68 लाख, टिहरी गढ़वाल में 6 वादों में 17.31 लाख, ऊधमसिंह नगर में 159 वादों में 80.3 लाख एवं उत्तरकाशी में 43 वादों में 47.46 लाख के समझौते किये गये। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

पूर्व समाचार : तीन लाख रुपए तक वार्षिक आय वालों को मिलेगी निःशुल्क कानूनी सहायता

नैनीताल। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रशांत जोशी ने बताया कि अब राज्य में व्यक्तिगत तौर पर समस्त स्रोतों से तीन लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले लोगों को भी निःशुल्क कानूनी सहायता मिल सकेगी। बताया कि इससे पूर्व यह सीमा एक लाख रुपये वार्षिक की थी। साफ किया कि आय पूरे परिवार की नहीं, बल्कि न्याय प्राप्त करने वाले व्यक्ति की है। इसके अलावा महिलाओं, पूर्व सैनिकों सहित अनेक वर्गों को पहले से ही यह सुविधा निःशुल्क अनुमन्य है। यानी अब तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय सीमा वाले विधिक सेवा प्राधिकरण से अपने मामले की पैरवी के लिए अधिवक्ता की निःशुल्क सेवाएं ले सकते हैं। यह भी प्राविधान किया गया है कि यह सुविधा निःशुल्क होने के साथ ही समर्थ अधिवक्ताओं के माध्यम से दी जाएगी।

स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्ष अब सेवानिवृत्त डीजे या एडीजे होंगे

नैनीताल। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रशांत जोशी ने यह जानकारी भी दी कि राज्य में सभी तरह की जनोपयोगी सेवाओं के लिए हल्द्वानी, रुद्रपुर, हरिद्वार व देहरादून में कार्यरत स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्ष अब सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश या सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश होंगे। अब तक कार्यरत जिला न्यायाधीश या अपर जिला न्यायाधीश स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष होते हैं। सेवानिवृत्तों के अध्यक्ष बनने के लिए विज्ञप्ति जारी हो गयी है। इसके बाद अध्यक्ष स्थायी लोक अदालतों को पूरा समय दे सकेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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