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बिना सूचना राजभवन रोड पर दोपहिया वाहनों के लिए वन-वे व्यवस्था लागू कर माल रोड पर स्वयं दबाव बढ़वा रही नैनीताल पुलिस, नाराजगी…

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पुलिस के समक्ष विरोध जताते दोपहिया वाहन चालक

नैनीताल, 27 अगस्त 2018। नैनीताल पुलिस ने सोमवार सुबह 8 बजे से राजभवन-कलक्ट्रेट रोड पर दोपहिया वाहनों के लिए भी वन-वे यातायात व्यवस्थाा लागू करा दी। गौरतलब है कि इसकी कोई भी ‘विशिष्ट सूचना’ न ही जनपद के एसएसपी द्वारा सोशल मीडिया में वायरल मैसेज में की गयी है, न एएसपी द्वारा एक दिन पूर्व प्रेस को जारी विज्ञप्ति में। इस नयी व्यवस्था के तहत चाहे फांसी गधेरा से 25 मीटर दूर लंघम छात्रावास की ओर जाना हो, अथवा राजभवन तिराहे से किसी व्यक्ति को 100 मीटर दूर डीएसबी परिसर के पास आना हो, उन्हें माल रोड-राजभवन रोड का करीब 6 किमी का चक्कर लगाकर यह दूरी तय करनी होगी। इस प्रकार न केवल वह अपना व देश का अमूल्य पेट्रोल व समय खर्च करना होगा, वरन उस माल रोड पर अपने वाहन का बोझ भी बढ़ाना होगा, जिस पर दबाव कम करने की बात स्वयं एसएसपी के द्वारा अपने संदेश में कही जा रही है, तथा दबाव के कारण ही लोवर माल रोड पहले 18 अगस्त और फिर 25 अगस्त को दो बार ढह कर नैनी झील में समा गयी है।
इस नयी व्यवस्था को सोमवार को लागू करते ही जनता की नाराजगी सामने आयी। राजभवन के निकट ऑल सेंट्स तिराहे पर रोके जाने पर डीएसबी परिसर के निवासी मल्लीताल व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष कमलेश ढोंडियाल की अगुवाई में जाम लगाने का प्रयास किया गया, एवं विरोध जताया गया। नयी व्यवस्था पर स्वयं पुलिस कर्मी भी परेशान दिखे। सूचना मिलने पर तल्लीताल थाने के एसआई मनोज नयाल स्वयं माल रोड से मल्लीताल होते हुए काफी देर से मौके पर पहुंच पाये। बाद में तय हुआ कि इस बारे में अपनी ड्यूटी निभा रहे पुलिस कर्मियों से उलझने के बजाय उच्चाधिकारियों से मिलकर बात रखी जाएगी।

यह भी पढ़ें : नैनीताल की माल रोड पर शाम चार बजे से ‘अंग्रेजी’ दौर लौटाने का हुआ एलान, बदलना पड़ा फैसला

-वाहनों का आवागमन किया गया प्रतिबंधित
-हाईकोर्ट-लोवर कोर्ड, कलक्ट्रेट के पास वाहनों की पार्किंग भी प्रतिबंधित

तस्वीर गवाह है:::
आजादी से पूर्व अंग्रेजी दौर में 1945 में माल रोड पर कुछ आज की तरह ही पुलिस कर्मियों से घिरकर चलते अंग्रेज और नीचे लोअर माल रोड पर चलते भारतीय..

नैनीताल, 23 मार्च 2018। नैनीताल शहर की प्रसिद्ध अंग्रेजी दौर की माल रोड पर 24 मार्च यानी शनिवार से मानो ‘अंग्रेजी’ दौर लौटाने की तैयारी थी। कहते हैं कि आजादी से पूर्व गुलामी के दौर में माल रोड पर केवल विशिष्ट भारतीय (वास्तव में अंग्रेज, लेकिन चूंकि वे शासन व्यवस्था में थे तो तब विशिष्ट भारतीय ही थे) ही चल सकते थे, और आम भारतीयों का चलना प्रतिबंधित था। लेकिन इधर बीते एक दशक से भी यहां वर्ष भर ‘बिना किसी लिखित आदेश के’ शाम छह से आठ बजे व ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के दिनों में नौ बजे तक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। जबकि कहा तो यह भी जाता है कि वाहनों के लिए यह मनाही कुछ ‘विशिष्ट भारतीय माननीयों’ की शाम की सैर-टहल के लिए है, और उन माननीयों के आस-पास आम भारतीयों का चलना भी अंग्रेजी दौर की तरह ही ‘प्रतिबंधित’ सरीखा ही है। यहां आज भी माननीयों के सहचर पुलिस कर्मियों द्वारा आम लोगों को मानो ‘छूते ही फट सकने वाले मानव बमों’ की तरह दूर हटा दिया जाता है। लेकिन अब यह प्रतिबंध शाम छह की जगह अपराह्न चार बजे से ही शुरू करने की तैयारी थी। दिन में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि माल रोड पर अपरान्ह 4 से 8 बजे तक यातायात पूर्णतया बंद रहेगा। हालांकि इस सम्बंध में इंटरनेट पर “यह पोस्ट” वायरल हो जाने के बाद प्रशासन को रात्रि 9.43 बजे यह फैसला निरस्त करना पड़ा है।

आख़िरकार रात्रि 10.43 बजे आया संशोधन

नैनीताल की मॉल रोड पर अंग्रेजों, हाथ रिक्शा व बैलगाड़ी चलने की कुछ अन्य दुर्लभ तस्वीरें : 

शुक्रवार 23 मार्च 2018 को डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी की अध्यक्षता में नगर की यातायात व्यवस्था पर हुई बैठक में विस्तृत चर्चा के उपरांत यह निर्णय लिये गये। इसके अलावा लिये गये निर्णयों के अनुसार मनु महारानी होटल से हाईकोर्ट के गेट नंबर 1 एवं राजभवन रोड पर फांसी गधेरे से राजभवन तक सड़क पर पार्किंग पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगी। हाईकोर्ट के पास खड़े होने वाले अधिवक्ताआंे व अन्य के वाहन मैट्रोपोल पार्किंग में तथा जिला न्यायालय के अधिवक्ता व अन्य अपने वाहनों को फांसी गधेरे में पार्क करेंगे। इसके अलावा बीडी पांडे से मोहन-को से नैनीताल क्लब का मार्ग दोपहिया वाहनों के लिए भी एक तरफा बंद रहेगा। इस पर दोपहिया वाहन भी ऊपर की ओर प्रवेश व पार्किंग प्रतिबंधित रहेगी। इसी तरह मल्लीताल के बाजारों मंे वाहन ले जाना व पार्क करना पूर्णतरह प्रतिबन्धित रहेगा। बाजार के व्यापारी अपने वाहनों को अशोक टाकीज पार्किंग स्थल पर पार्क करेंगे। गाड़ी पड़ाव से शंकर स्टोर से ऊपर बाजार को जाने वाली सड़क में माल उतारने वाले वाहन प्रातः 10 से शाम 8 बजे तक नहीं जा पायेंगे। साथ ही बड़ा बाजार में दुकानदारों को दुकान से बाहर सामान नहीं लगाना होगा।
इसके अलावा पर्यटन सीजन में रूसी बाइपास व सरिताताल के साथ ही नारायण नगर, रानीबाग व कालाढूंगी में वाहनों को रोककर वहीं पार्क कराने तथा वहां से पर्यटकों को नैनीताल तक लाने-ले जाने के लिये शटल सेवा लगाने का भी निर्णय लिया गया। डीएस ने इस हेतु नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को कालाढूंगी मेे पार्किंग हेतु चयनित भूमि का जीपीएस नक्शा शीघ्र बनाकर वनभूमि हस्तान्तरण कार्यवाही करने के निर्देश दिये। इसके अलावा बैठक में डीएम चौधरी ने संबंधित अधिकारियों को नगर में चल रहे केबिल बिछाने के कार्य के उपरान्त सड़कों की मरम्मत कार्य 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने की चेतावनी दी। कार्य को उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप दिन में सुबह आठ से शाम पांच बजे तक न करने की भी उन्होंने ताकीद की। बैठक में एसएसपी जन्मेजय खंडूड़ी, एडीएम हरबीर सिंह, एएसपी हरीश चन्द्र सती, सीओ विजय थापा, आरटीओ राजीव मेहरा, लोनिवि के ईई सीएस नेगी, एबी कांडपाल, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के पीसी जोशी, ईओ रोहिताश शर्मा व रोडवेज की एएसआई इन्द्रा भट्ट आदि अधिकारी मौजूद रहे।

दबाव से धंस रही लोवर माल रोड पर तो वाहन अपर माल रोड पर प्रतिबंधित करने की क्या तुक ?

कहा जा रहा है कि अपर माल रोड पर शाम चार से आठ बजे तक वाहनों का आवागमन रोकने का निर्णय वाहनों के दबाव को कम करने के लिए है। लेकिन इस बात का जवाब नहीं दिया जाता है कि वाहनों का दबाव अपर माल रोड की बजाय लोवर माल रोड पर अधिक है, और लोवर माल रोड ही नैनी झील की ओर है, और वास्तव में लोवर माल रोड पर अपर माल रोड का दबाव भी है, और यह ग्रांड होटल के पास लगातार झील की ओर धंस भी रही है। बावजूद वाहनों का आवागमन अपर माल रोड पर प्रतिबंधित किया गया है। यही नहीं नगर में तल्लीताल की ओर से प्रवेश करने वाले समस्त वाहनों को फांसी गधेरा की जगह भी लोवर माल के रास्ते भेजा जाता है। फांसी गधेरा की ओर से वन-वे के नाम पर वाहनों का प्रवेश अनेक बार प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इस तथ्य को भी नजरअंदाज किया जाता है कि तल्लीताल डांठ से फांसी गधेरा की रोड बांयी ओर जाती है, और लोवर माल रोड की दांयी ओर, और सामान्यतया वाहनों को बांयी ओर चलने के देश में नियम हैं। ऐसा क्या इसलिए नहीं कि वाहनों से अधिकाधिक लेकब्रिज चुंगी वसूली जा सके। वह भी तब जब ‘लेक ब्रिज’ जैसी कोई चीज आजादी के बाद से ही अस्तित्व में नहीं है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि ‘वन-वे’ व्यवस्था के तहत राजभवन रोड पर वाहन मल्लीताल की ओर से प्रवेश करने की बजाय फांसी गधेरा की ओर से प्रवेश कराये जाएं।
एक अन्य विकल्प यह भी है कि लोवर माल रोड पर प्रतिबंधित समय में वाहन प्रतिबंधित किये जाएं, और अपर माल पर वाहन चलने दिये जाएं। इससे लोवर माल रोड पर वाहनों का दबाव कम हो सकता है। शायद नहीं, क्योंकि इससे व्यवसायिक हित प्रभावित होते हैं।

दो दशक से केवल सीजन व एक दशक पूर्व से पूरे वर्ष 6 बजे से बंद होती है माल रोड

नैनीताल। कहा जाता है कि अंग्रेजी दौर में माल रोड पर केवल अंग्रेज ही चल पाते थे। यूपी के दौर में करीब दो दशक पूर्व ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में 15 मई से 30 जून तक शाम छह से आठ बजे तक माल रोड पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया, जिसे करीब एक दशक पूर्व बिना किसी लिखित आदेश के पूरे वर्ष के लिए लागू कर दिया गया। जबकि अब 24 मार्च से अनिश्चितकाल के लिए माल रोड पर वाहनों का प्रवेश अपराह्न चार बजे से ही बंद करने का फरमान जारी हुआ है।

बिना जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिया गया निर्णय, पुर्नविचार हो: पालिकाध्यक्ष

नैनीताल। नगर की माल रोड को शाम चार से आठ बजे तक बंद करने के डीएम के स्तर से लिये गये निर्णय का विरोध होना शुरू हो गया है। इस बारे में नगर पालिका के अध्यक्ष श्याम नारायण का कहना है कि इस तरह का प्रस्ताव नगर पालिका बोर्ड के समक्ष आना चाहिए थे। निर्णय अव्यवहारिक है, और इस पर पुर्नविचार की आवश्यकता है। वहीं पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी ने भी कुछ इसी तर्ज पर कहा कि बिना स्थानीय सरकार यानी नगर पालिका व विधायक आदि जन प्रतिनिधियों को विश्वास में लिये गये लिया गया यह निर्णय नगर वासियों के साथ ही सैलानियों के लिए भी समस्याएं बढ़ाने वाला है। इसे वापस लिये जाने की जरूरत है। इस बारे में स्थानीय विधायक व सांसद से संपर्क नहीं हो पाया, परंतु सत्तारूढ़ भाजपा के नगर अध्यक्ष मनोज जोशी ने भी जिला प्रशासन के इस निर्णय को जनता के साथ अन्याय करार दिया, व इसे जनहित में न होने की बात कही। उनका कहना था कि प्रशासन को अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए, न कि वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित।

1.73 करोड़ में गया पार्किंग व 1.8 करोड़ में लेक ब्रिज चुंगी का ठेका

नैनीताल। नगर पालिका की आय के बड़े स्रोत डीएसए मैदान की कार पार्किग व माल रोड की लेक ब्रिज चुंगी के वित्तीय वर्ष 2018-19 के ठेके तय हो गए हैं। लेक ब्रिज का ठेका बीते वर्ष भी यह चुंगी चला रहे एमपी इंटरप्राइजेज-ममता भट्ट को 1,80,11,111 रुपए में गया, जबकि बीते वर्ष यह 1.65 लाख में गया था। वहीं पार्किंग का ठेका दीवान सिंह फर्त्याल को 1,73,51,000 रुपए में गया है, जबकि बीते वर्ष यह 1.62 लाख में गया था। इस प्रकार नगर पालिका की आय में 8 से 10 फीसद की बढ़ोत्तरी हो गई है।

यह भी पढ़ें : नगर पालिका के दो स्थानों पर लेक ब्रिज चुंगी लगाने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर पालिका नैनीताल के दो स्थानों पर नये सिरे से लेक ब्रिज चुंगी शुरू करने पर मंगलवार (20 मार्च 2018) को रोक लगा दी है। वहीं नगर के मल्लीताल बाजार सहित अन्य अतिक्रमण के मामले में ढिलाई को लेकर प्रशासन को फटकार लगाई है। इस दौरान याची के अधिवक्ता ने नगर में अवैध निर्माण का मामला रखा। इसमें प्राधिकरण के कर्मचारियों की मिलीभगत की शिकायत की। कहा कि सूखाताल और अन्य स्थानों पर खुलेआम अवैध निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। इस पर कोर्ट ने याची के अधिवक्ता से सूखाताल सहित नगर में अवैध निर्माण की सूची भी तलब की।

मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।मालूम हो कि हाईकोर्ट ने 25 सितंबर 2014 को सुनवाई के बाद नगर पालिका की बारापत्थर यानी कालाढूंगी मार्ग और कलेक्ट्रेट रोड फांसी गधेरा पर चुंगी को बंद करने के आदेश दिए थे। इधर पालिका ने इस बार फिर से इस बाबत गज़ट नोटिफिकेशन जारी कर इन चुंगियों को स्थापित करने के लिए बाकायदा टेंडर भी आमंत्रित कर दिए थे। इसकी जानकारी मिलने पर अदालत ने इस प्रक्रिया पर फिर से रोक लगा दी है। इसके अलावा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर सीडी बहुगुणा ने मल्लीताल बड़ा बाजार में कई स्थानों पर अतिक्रमण का मामला रखा। उन्होंने कहा कि यहां दुकानों के बाहर सामान बाहर फैला रहता है। इससे आम जनता को आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही जाम की समस्या भी बनती है। अदालत ने सुनवाई के दौरान मौजूद डीएम नैनीताल दीपेंद्र चौधरी से अतिक्रमण को लेकर नाराजगी जताई। कहा कि पहले दिए निर्देशों के पालन में धीमी गति से कार्रवाई की जा रही है, जो कि उचित नहीं है। कोर्ट ने नगर के सड़कों पर बिछाई जा रही केबल के बारे में भी नाराजगी जताई। कहा कि 31 मार्च तक इस कार्य को पूरा करवा लिया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि नगर की सड़कों में सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक केबल बिछाने का कार्य नहीं होगा। इस समय बच्चे स्कूल और कर्मचारी ऑफिस जाते हैं और आम लोगों को असुविधा होती है। मामले की अगली सुनवाई दो अप्रैल तय की है।

यह भी पढ़ें : अब नैनीताल आने वाले हर किसी को देना होगा यह शुल्क

  • नगर के फांसी गधेरा तल्लीताल (रॉक हाउस के समीप) तथा कालाढुंगी मोटर मार्ग पर सरिताताल के पास से वसूली जाएगी लेकब्रिज चुंगी 
  • अगले वित्तीय वर्ष के लिए करीब दो करोड़ लाभ के बजट को अनुमोदन

नैनीताल, 5 मार्च 2018। नैनीताल नगर में अब तक केवल माल रोड से ही गुजरने पर चुंगी के रूप में 50 से 100 रुपए तक शुल्क देना पड़ता है, जबकि फांसी गधेरा की ओर से जिला कलक्ट्रेट-राजभवन की ओर निकलने वाले तथा कालाढुंगी की ओर से उत्तराखंड उच्च न्यायालय की ओर आने वाले लोगों को नगर में आने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब कोई नगर में कहीं से भी प्रवेश करे, उसे शुल्क देना ही होगा। अलबत्ता, स्थानीय वाहनों के लिए एकमुस्त निर्धारित शुल्क चुकाकर पास की व्यवस्था बनी रह सकती है।

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सोमवार 5 मार्च 2018 को नगर पालिका बोर्ड की आकस्मिक-विशेष तौर पर बुलाई गई कमोबेश अंतिम दूसरी बैठक में इस बाबत प्रस्ताव पारित कर दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार नगर के फांसी गधेरा तल्लीताल (रॉक हाउस के समीप) तथा कालाढुंगी मोटर मार्ग पर सरिताताल के पास लेकब्रिज प्रवेश शुल्क वसूली की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा एकमात्र अन्य प्रस्ताव के अनुसार बोर्ड ने आगामी वित्तीय वर्ष 2017-18 जो कि वास्तव में नयी आने वाली पालिका बोर्ड के कार्यकाल के अधीन होगा, 8.2 करोड़ के प्रारंभिक वास्तविक अवशेष, वर्ष 2017-18 में 35.76 करोड़ की अनुमानित आय व करीब 33.61 करोड़ के अनुमानित व्यय के साथ करीब 10.36 करोड़ के अनुमानित अवशेष यानी करीब 2.16 करोड़ के लाभ के बजट को भी अनुमोदित कर दिया।

क्या है लेकब्रिज चुंगी
नैनीताल। नैनीताल नगर में वाहनों का आवागमन 1915 में शुरू हुआ। इसके बाद 1848 में नैनीझील के किनारे बनी नगर की प्रसिद्ध माल रोड पर भी वाहन चलने लगे। माल रोड की झील के किनारे होने की वजह से कमजोरी को देखते हुए इस पर वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित किये जाने के उद्देश्य से लेक ब्रिज चुंगी लिये जाने का प्राविधान 1938 में किया गया था। इसके अलावा यूपी के दौर में सभी नगरपालिकाओं के द्वारा अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से नगर में आने वाले वाहनों से चुंगी लिये जाने का प्राविधान भी था। इस प्राविधान के तहत नगर में भवाली रोड से आगमन पर कैलाखान, हल्द्वानी रोड से आने पर बल्दियाखान, ताकुला व जीआईसी के पास तथा कालाढुंगी रोड की ओर से आने पर सरिताताल (तत्कालीन सड़ियाताल) के पास वाहनों में आने वाली सवारियों से चुंगी लिये जाने का प्राविधान था। लेकिन इसे 1980 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में बंद कर दी गयी थी। लेकिन तल्लीताल में माल रोड में वर्तमान दर्शन घर पार्क और बाद में फांसी गधेरा रॉक हाउस व बारापत्थर में लेक ब्रिज के नाम पर सवारियों की जगह वाहनों से चुंगी वसूली जाती रही। अलबत्ता नगर पालिका के उपनियमों में रॉक हाउस व बारापत्थर से लेक ब्रिज चुंगी लिये जाने का प्राविधान नहीं था, इसलिए उच्च न्यायालय के आदेशों पर विगत वर्ष में इन दोनों स्थानों से चुंगी की वसूली बंद करवा दी गयी। इसके बाद नगर पालिका एक बार फिर अपनी आय बढ़ाने के लिए इन स्थानों से चुंगी लेने के प्राविधान अपने उपनियमों में करने जा रही है। इसके लिए गजट नोटिफिकेशन जारी करने की कड़ी में आज पालिका बोर्ड ने प्रस्ताव पारित कर दिया है।

यह भी पढ़ें : जब माल रोड पर गवर्नर का चालन हुआ था…

कहते हैं कि धन की कमी से नैनीताल आने के लिए रोप वे की योजना भी परवान न चढ़ सकी तब आंखिरी विकल्प के रूप में सड़क बनायी गयी। 14 फरवरी 1917 को नगर पालिका ने पहली बार नगर में वाहनों के परिचालन के लिए उपनियम (बाई-लाज) जारी कर दिए गए, जिनके अनुसार देश व राज्य के विशिष्ट जनों के अलावा किसी को भी माल रोड पर बिना पालिका अध्यक्ष की अनुमति के पशुओं या मोटर से खींचे जाने वाले भवन नहीं चलाये जा सकते थे। माल रोड पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित करने के लिए जीप-कार को 10 व बसों-ट्रकों को 20 रुपये चुंगी पड़ती थी, 1 अप्रेल से 15 नवम्बर तक सीजन होता था, जिस दौरान शाम 4 से 9 बजे तक चुंगी दोगुनी हो जाती थी। नियमों के उल्लंघन पर तब 500 रुपये के दंड का प्राविधान था। नियम तोड़ने की किसी को इजातात न थी, और पालिका अध्यक्षों का बड़ा प्रभाव होता था । बताते हैं कि एक बार गवर्नर के वाहन में लेडी गवर्नर बिना इजाजत के (टैक्स दिए बिना) मॉल रोड से गुजर गईं, इस पर तत्कालीन पालिकाध्यक्ष जसौत सिंह बिष्ट ने लेडी गवर्नर का 10 रुपये का चालान कर दिया था। 1925 में प्रकाशित नगर के डिस्ट्रिक्ट गजट आफ आगरा एंड अवध के अनुसार तब तक तल्लीताल डांठ पर 88 गाड़ियों की नैनीताल मोटर ट्रांसपोर्ट कंपनी स्थापित हो गयी थी, जिसकी लारियों में काठगोदाम से ब्रवेरी का किराया 1.8 व नैनीताल का 3 रूपया था। किराए की टैक्सियाँ भी चलने लगीं थीं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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