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नैनीताल के मनु महारानी को मिला उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ लग्जरी होटल का सम्मान

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प्रदेश के पर्यटन मंत्री से हिमालयन पर्यटन सम्मान-2018 प्राप्त करते मनु महारानी होटल के महाप्रबंधक।

नैनीताल, 1 अक्टूबर 2018। सरोवरनगरी एवं उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ होटल ‘द मनु महारानी’ को सर्वश्रेष्ठ लग्जरी होटलों के वर्ग में हिमालयन टूरिज्म सम्मान-2018 प्राप्त हुआ है। गत दिवस विश्व पर्यटन दिवस पर पहली बार देहरादून में आयोजित हुई एक कार्यक्रम में उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने सबसे पहले मनु महारानी के महाप्रबंधक नरेश गुप्ता को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। खास बात यह भी है कि इस सम्मान के लिए राज्य के 90 होटलों ने अपनी प्रविष्टियां भेजी थीं, और मनु महारानी को यह सम्मान एफएचआरएआई के अध्यक्ष गिरीश ओबेरॉय, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के पूर्व सचिव विनोद जुत्शी, टाइम्स फाउंडेशन के राजीव डोवाल, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीसी कांडपाल, यूएनडीपी की राज्य प्रभारी रश्मि बजाज तथा एडवंेचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कैप्टन स्वदेश कुमार जैसे निर्णायक मंडल द्वारा चयनित करके दिया गया है। उल्लेखनीय है कि मनु महारानी होटल को इससे पूर्व वर्ष 2016 में ट्रिप एडवाइजर के द्वारा पारिवारिक होटलों के वर्ग में देश के शीर्ष 25 होटलों में से 20वें स्थान पर रखा गया था।

कई ‘पर्यावरण मित्र’ शुरुआतें करने जा रहा है मनु महारानी

नैनताल। सोमवार को हिमालयन पर्यटन सम्मान-2018 मिलने पर पत्रकार वार्ता करते हुए मनु महारानी होटल के महाप्रबंधक नरेश गुप्ता ने बताया कि होटल ने कई ‘पर्यावरण मित्र’ पहलें कर रहा है, एवं आगे इन्हें और भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इसमें होटल में अपना एसटीपी यानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने, होटल के गंदे पानी का बागवानी में प्रयोग, पानी बचाने के लिए होटल में रहने वाले अतिथियों को तौलिया-चादर आदि साफ रहने की दशा में उन्हें धोने के लिए न देने के निवेदन करने के साथ बिजली-ऊर्जा बचाने, प्लास्टिक का उपयोग न करने, यथासंभव स्थानीय लोगों को ही कार्य पर रखने एवं स्थानीय उत्पादों, लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास प्रमुख हैं।

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-सात समुंदर पार से आई हल्द्वानी की सिम्पी की बारात

विश्व गुरु बनने को उद्यत भारतीय संस्कृति वैश्विक विमर्श के साथ ही आकर्षण का केंद्र भी बनी
नवीन जोशी, नैनीताल, 13 मार्च 2018 । अंग्रेजी दौर की ‘छोटी बिलायत’ में जो न जाने कितनी बार हुआ हो, वही इतिहास एक नए रूप में मंगलवार को यहाँ फिर लिखा गया। बताया जाता है कि कुमाऊँ के दूसरे कमिश्नर जीडब्लू ट्रेल ने भी यहीं, रानीखेत की युवती से विवाह किया था। कुछ इसी तर्ज पर मंगलवार को यहां एक ‘इंग्लिश बाबू’ न्यू यॉर्क निवासी जे माइकल स्टेहेन पुत्र चार्ल्स स्टेहेनऔर ‘देशी मेम’ हल्द्वानी निवासी सिम्पी वर्मा पुत्री सेंचुरी पेपर मिल लालकुआ के सेवानिवृत्त कर्मी एसके वर्मा भारतीय विवाह पद्धति के जरिये एक-दूसरे के साथ ‘सात फेरे’ लेकर एक-दूजे के हो गये। यहां देशी मेम यानी सिम्पी की मेंहदी की रस्म हुई और वह बेहद सुरुचिपूर्ण तरीके से सजे मंडप में घाघरा-चोली में शरमाती-शकुचाती अपने दूल्हे का इंतजार करती रही। उधर इंग्लिश बाबू माइकल बाकायदा घोड़ी पर चढ़े। उनके करीब तीन दर्जन परिजनों-दोस्तों ने पगड़ियां पहनकर भारतीय नृत्य किये। दोनों का ‘जयमाल’ हुआ, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे का फूल माला पहनकर वरण किया और हिंदू रीति रिवाज के तहत पूरे विधि-विधान के साथ यह विवाह संपन्न हुआ।

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मौका था सोमवार को नगर के मनु महारानी होटल में हुए विवाह समारोह का। इस विवाह के लिए अमेरिका से दूल्हे माइकल के परिजनों सहित करीब तीन-दर्जन विदेशी मेहमान यहां दो दिन पहले ही पहुंच गये थे। रविवार को दोनों की मेंहदी की रस्म हुई, जबकि सोमवार को दोनों परिणय सूत्र में बंध गये। यूं यह भी था कि माइकल भारत से अमेरिका जाकर वहीं प्रसिद्ध वार्नर ब्रदर्स फिल्म कम्पनी में कार्य करने वाली सिम्पी से पहले ही पिछले फरवरी माह में न्यूयॉर्क में कोर्ट मैरिज कर चुके थे। लेकिन जब उन्हें सिम्पी से भारतीय समृद्ध संस्कृति और परंपराओं व खासकर विवाह पद्धति के बारे में पता चला तो उन्होंने एक बार फिर भारत आकर भारतीय विवाह पद्धति से विवाह करने का निर्णय लिया। विवाह के बाद सभी बाराती नैनीताल के पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कर रहे हैं। आगे उनका मंगलवार को जिम कार्बेट पार्क रामनगर की सैर करने और बुधवार को वहां से वापस लौटने का कार्यक्रम है। मनुमहारानी होटल के उप महाप्रबंधक प्रमोद बिष्ट ने कहा कि इस तरह भारतीय संस्कृति का प्रसार तो हो ही रहा है, नैनीताल जैसे छोटे भारतीय शहर भी विदेशी दूल्हों के लिए शादी करने के पसंदीदा स्थल यानी ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में खासे पसंद किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कि उत्तराखंड के हरिद्वार में इस तरह के कई विवाह अक्सर होते रहते हैं, जबकि नैनीताल में यह अपनी तरह का पहला आयोजन है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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