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आठ वर्षों में सर्वोच्च स्तर पर पहुंची नैनी झील !

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नैनीताल, 23 सितंबर 2018। मानसूनी वर्षा का दौर एक बार रुकने के बाद फिर से शुरू चक्रवात के कारण हुई बारिश से एक बार फिर नैनी झील का जल स्तर गिरने के बाद चढ़ गया है और पिछले आठ वर्षों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। रविवार सुबह तक झील का जल स्तर 11 फिट साढ़े पांच इंच था जो शाम तक 11 फिट 10.5 इंच तक पहुंच गया है। सिचाई विभाग द्वारा संचालित झील नियंत्रण कक्ष के कर्मी रमेश गैड़ा ने दावा किया कि इससे पूर्व वर्ष 2010 में झील का जल स्तर 12 फिट 2.5 इंच के स्तर पर पहुंचा था, और नैनी झील की मछलियां तल्लीताल में माल रोड के स्तर तक आ गयी थीं। वहीं इस वर्ष झील का जल स्तर पिछले दिनों बरसात में 11 फिट 6.5 इंच तक बढ़ने के बाद बीती 7 सितंबर को तीन वर्ष के बाद झील के गेट पांच घंटों के लिए आधे इंच खोले गये थे। झील के पानी के ‘रिफ्रेश’ यानी ‘पानी-बदल’ होने के लिए रुके पानी की नैनी झील के गेटों का हर वर्ष खोला जाना जरूरी माना जाता है। इसके लिए अंग्रेजी दौर से ही तय मानक भी हैं। सितंबर माह में 12 फिट के स्तर पर झील के गेट खोले जाने के प्राविधान हैं। रविवार को पूरे दिन बारिश होने के बाद अपराह्न में बारिश रुक गयी है। बावजूद बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि आगे बारिश जारी रहती है तो झील के गेट खोले जाने और झील का ‘पानी-बदल’ होने की उम्मीद की जा सकती है। बताया गया है कि रविवार सुबह साढ़े आठ बजे तक के बीते 24 घंटों में 33.4 मिमी और इस वर्ष जनवरी से अब तक 1909.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 600 मिमी कम है। बारिश के साथ नगर में ठंड भी महसूस की जा रही है।

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-पिछले वर्ष भी नहीं खुल पाये थे झील के गेट, अभी भी 0.35 फिट कम है नैनी झील का जलस्तर

सितम्बर 2017 के आखिरी सप्ताह में 11.65 फिट के स्तर पर भरा नैनीताल

नवीन जोशी नैनीताल (29 सितंबर 2018।)। किसी भी जल राशि के लिए ‘पानी बदल’ कर ‘रिफ्रेश’ यानी तरोताजा होना जरूरी होता है। मूलतः पूरी तरह बारिश पर निर्भर और वर्ष भर ठहरे रहने वाले पानी वाली नैनी झील को तरोताजा होने का मौका वर्ष में केवल वर्षा काल में मिलता है। इस वर्ष चार्तुमास के सावन-भादौ के बाद आश्विन माह भी बीतने को है, और झील का जल स्तर गत दिवस आखिरी झटके में हुई 300 मिमी से अधिक और इस वर्ष अब तक कुल 3083.98 मिमी बारिश होने की बदौलत पिछले एक दशक में सर्वोच्च स्तर 11.65 फिट पर पहुंच गया है। बावजूद झील को ‘पानी बदल’ करने या ‘रिफ्रेश’ होने के लिये अभी भी 0.35 फिट जल स्तर की जरूरत है। ऐसे में चिंता जताई जाने लगी है कि इस वर्ष झील के गेट नहीं खोले जा सकेंगे। परिणामस्वरूप झील ‘रिफ्रेश’ नहीं हो पायेगी।

नैनी झील के जल स्तर के रिकॉर्ड

भू वैज्ञानिक प्रो. सीसी पंत व भूगोलविद् डा. जीएल साह के अनुसार नैनी झील का निर्माण करीब 40 हजार वर्ष पूर्व तब की एक नदी के बीचों-बीच फाल्ट उभरने के कारण वर्तमान शेर का डांडा पहाड़ी के अयारपाटा की ओर की पहाड़ी के सापेक्ष ऊपर उठ जाने से तल्लीताल डांठ की जगह पर नदी का प्रवाह रुक जाने से हुआ था। इस प्रकार नैनी झील हमेशा से बारिश के दौरान भरती और इसी दौरान एक निर्धारित से अधिक जल स्तर होने पर अतिरिक्त पानी के बाहर बलियानाला में निकलने से साफ व तरोताजा होती है। वहीं नैनी झील पर शोधरत कुमाऊं विवि के प्रो. पीके गुप्ता भी झील से पानी निकाले जाने को महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार झील के गेट खुलते हैं तो इससे झील की एक तरह से ‘फ्लशिंग’ हो जाती है। झील से काफी मात्रा में प्रदूषण के कारक ‘न्यूट्रिएंट्स’ निकल जाते हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2016 में भी झील के गेट पर्याप्त जल स्तर न होने के कारण नहीं खोले जा सके थे।

गर्मियों में ऐसे भी रहे नैनी झील के हालात :
15-16 अगस्त 2014 को तल्लीताल में नैनी झील का जल स्तर चढ़ने पर नाव से सीधे माल रोड पर उतरते सैलानी.

2015 में गेट एक बार अगस्त माह में कुछ घंटों के लिये खोले गये थे, लेकिन तब जलस्तर कम था। वैसे भी राज्य बनने के बाद केवल दो-तीन बार ही नैनी झील का पानी तल्लीताल सिरे पर माल रोड तक यानी 12 फिट के स्तर पर आ पाया है, जबकि पिछले एक दशक में ऐसी स्थिति केवल एक बार ही 16 अगस्त 2011 को पानी के माल रोड तक आने की स्थिति बनी थी। 2011 में 29 जुलाई को ही जल स्तर के 8.7 फीट पहुंचने के कारण गेट खोलने पड़े थे। इसके बाद 16 सितंबर तक कमोबेश लगातार गेट अधिकतम 15 इंच तक भी (15 अगस्त को) खोले गये। वहीं पिछले वर्ष 2016 में झील 9.9 फिट के अधिकतम स्तर तक ही भर पायी थी।

माहवार इस स्तर पर खोले जाते हैं झील के गेट
नैनी झील से जल निकासी व जल स्तर के नियम

नैनीताल। अंग्रेजी दौर में तल्लीताल में झील के शिरे पर गेट लगाकर झील के पानी को नियंत्रित करने का प्रबंध है, जिसे स्थानीय तौर पर डांठ कहा जाता है। गेट कब खोले जाऐंगे, इसका बकायदा कलेंडर बना हुआ है, जिसका आज भी पालन किया जाता है। इसके अनुसार जून में 7.5, जुलाई में 8.5, सितंबर में 11 तथा 15 अक्टूबर तक 12 फीट जल स्तर होने पर ही गेट खोले जाते हैं।

सूखाताल झील भरने के बाद सूखी

नैनीताल। ईईआरसी, इंदिरा गांधी इंस्टिटयूट फार डेवलपमेंटल रिसर्च मुंबई की 2002 की रिपोर्ट के अनुसार नगर की सूखाताल झील नैनी झील को प्रति वर्ष 19.86 लाख यानी करीब 42.8 फीसद पानी उपलब्ध कराती है। वर्ष 2014 में यह झील लबालब भरी थी, किंतु इसके बाद से यह झील नहीं भर रही है। इस वर्ष भी सूखाताल झील के पास नैना पीक सहित अन्य पहाड़ियों पर जल श्रोत नहीं फूट पाये। नगर में घरों में पिछली बार की तरह सीलन भी इस वर्ष नहीं है। बहरहाल, सूखाताल झील का सूखना आगे वर्ष भर नैनी झील के प्रति चिंताजनक संकेत दे रहा है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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