News

राजभवन के बाहर केक काटकर मनायी गयी राजभवन के 121 वर्ष के होने की खुशी, साथ ही राजभवन गोल्फ प्रतियोगिता में आज यह जीते…

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2019। इंग्लेंड के बकिंघम पैलेस की प्रतिकृति स्वरूप अंग्रेजी के ई आकार में 27 अप्रैल 1897 को बनना शुरू हुए विश्व प्रसिद्ध नैनीताल राजभवन के 121 वर्ष पूर्ण होने की खुशी केक काटकर मनायी गयी। राजभवन परिसर से दूर फांसी गधेरा के पास सेंट जोसफ कॉलेज बोट हाउस क्लब के पास आयोजित कार्यक्रम में पहले से रैली निकाल रहे एनसीसी के कैडेटों को इतिहासकार डा. अजय रावत ने नैनीताल राजभवन के इतिहास की जानकारी दी। बताया कि आज के दि नही 1897 में लेफ्टिनेंट गवर्नर एवं अवध प्रांत के चीफ कमिश्नर सर एंटोनी पैट्रिक मैकडॉनल ने इसकी आधारशिला रखी थी। इससे पहले नगर मंे राजभवन चार स्थानों पर अस्थाई तौर पर स्थापित हुआ था, परंतु उन स्थानों की कमजोर प्रकृति, वहां भूस्खलन होने जैसे कारणों से अन्ततः वर्तमान स्थान पर इसकी स्थापना की गयी थी। बताया गया कि प्रदेश की राज्यपाल को भी इस कार्यक्रम के लिए निमंत्रित किया गया था एवं राजभवन के भीतर आयोजित करने की अपेक्षा की गयी थी, किंतु कार्यक्रम चंद लोगों के बीच एवं चंद मिनटों में ही आयोजित किया गया। इस मौके पर एनसीसी के कमांडिंग ऑफीसर, समाजसेवी गीता साह, सेंट फ्रांसिस चर्च के पादरी फादर जेरम, आयोजक दीपक बिष्ट व अवतार सिंह आदि लोग मौजूद रहे।

राजभवन गोल्फ कोर्स में पटिंग प्रतियोगिता में ऋतिक व साहिला जीते

<

p style=”text-align: justify;”>-18 अंतरविद्यालयी गोल्फ प्रतियोगिता रविवार को होगी
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2019। राजभवन गोल्फ कोर्स में शनिवार को एक होल की पटिंग गोल्फ प्रतियोगिता आयोजित हुई। प्रतियोगिता में कम से कम शॉट में होल में गैंद डालने के आधार पर छात्रों के वर्ग में अम्तुल्स पब्लिक स्कूल के ऋतिक मिश्रा विजेता व सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के अविनाश कुमार उपविजेता वहीं छात्राओं के वर्ग में मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर की साहिला अब्दुल्ला विजेता व अम्तुल्स की सोनिया उपविजेता चुनी गयी।
राजभवन गोल्फ कोर्स के कैप्टन कर्नल एचसी साह ने बताया कि आगे रविवार को 18 होल्स की अंतरविद्यालयी गोल्फ प्रतियोगिता खेली जाएगी, जिसमें भी आज हुई प्रतियोगिता की तरह बालकों के चार व बालिकाओं के तीन यानी कुल सात स्कूलों के चार-चार यानी कुल 28 प्रतिभागी प्रतिभाग करेंगे। प्रतियोगिता में सबसे कम शॉटों में 18 होलों में गैंद डालने के आधार पर टीम चैंपियनशिप के साथ ही व्यक्तिगत आधार पर भी 12 से कम, 12 से 14 एवं 15 से 17 की आयु वर्ग में सर्वश्रेष्ठ बालक व बालिका गोल्फरों को भी पुरस्कृत किया जाएगा। प्रतियोगिता में पंकज पालीवाल, अनिल कुमार, आनंद आर्या व प्रतिभागी स्कूलों के शिक्षकों ने भी योगदान दिया।

यह भी पढ़ें:

तीसरी कोशिश में बन पाया था बकिंघम पैलेस जैसा नैनीताल राजभवन

Governor House, Nainitalनवीन जोशी, नैनीताल। लंदन के बकिंघम पैलेस की प्रतिकृति के रूप में 1899 में गौथिक शैली में बने नैनीताल राजभवन का नाम अपने अद्भुद शिल्प के लिये न केवल नगर की प्रसिद्ध इमारतों में सबसे ऊपर आता है, वरन इसकी गिनती देश ही नहीं दुनिया की सबसे सुंदर और बेजोड़ इमारतों में की जाती है, अपने कुल करीब 220 एकड़ क्षेत्रफल में से आठ एकड़ क्षेत्रफल में बने इसके मुख्य भवन के साथ 50 एकड़ क्षेत्रफल में फैला विश्व का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित 18 होल का गोल्फ मैदान और गोल्फ क्लब तथा शेष 160 एकड़ भूमि पर घना खूबसूरत जंगल भी है। इसका निर्माण गहन भूगर्भीय जांचों के उपरांत बड़ी मजबूती के साथ किया गया, क्योंकि इससे पूर्व नैनीताल में दो और राजभवन बनाए गए थे, जिनमें नगर और उनके स्थानों की कमजोर भूगर्भीय स्थितियों की वजह से की बहुत कम समय में ही दरारें आने लगीं। लिहाजा यह तीसरी कोशिश में बन पाया।

नैनीताल स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व तत्कालीन संयुक्त प्रान्त की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। उस दौर में सबसे पहले वर्ष 1854 में उस समय के गवर्नर के ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिये शेर का डांडा में अस्थायी रूप से गर्वनर हाउस किराये पर लिया गया। बाद में वर्ष 1865 में गर्वनर ई ड्रमेड ने राजभवन के लिए ‘माल्डन इस्टेट’ नाम के भवन का निर्माण किया और बाद में उसके स्थान की कमजोर भूगर्भीय स्थिति को देखते हुए जल्द ही इसे बेच दिया। कुछ समय पश्चात नए गवर्नर जॉर्ज कूपर ने नया गर्वनर हाउस सेंट लू गौर्ज के नजदीक बनवाया पर वर्ष 1880 में आये भूस्खलन में इस भवन के टूट जाने के बाद उन्होंने फिर से शेर का डांडा में ही गर्वनर हाउस का निर्माण किया। इस गर्वनर हाउस में उस समय के दो गर्वनर एल्फोर्ड तथा चार्ल्स क्रासवेट रहे थे। कुछ समय पश्चात इस गर्वनर हाउस में भी दरारें आने लगी थी और कभी भी इसके क्षतिग्रस्त हो जाने के संदेह के चलते गर्वनर एन्टोनी मैक्डोनल ने इस इमारत को तुड़वा दिया और नये गर्वनर हाउस के लिये जमीन की तलाश की जाने लगी। इस बार इमारत बनवाने से पहले सभी भौगोलिक स्थितियों की अच्छे से जांच की गई जिसके चलते वर्तमान गर्वनर हाउस अस्तित्व में आया, और फलस्वरूप आज भी अपनी पूरी शानो-शौकत के साथ नैनीताल का गौरव बढ़ा रहा है।

1893. Old Government House.  (Peter Smith©)
1893. Old Government House. (Peter Smith©)

नैनीताल राजभवन (तत्कालीन गवर्नमेंट हाउस) इमारत का निर्माण आठ एकड़ क्षेत्रफल में करीब साढ़े सात लाख रुपए खर्च कर मुख्य अभियंता एचडी वाइल्डबल्ड की देखरेख में रूपरेखाकार आर्किटेक्ट स्टीवंेस और अधिशासी एफओडब्लू ऑरटेर द्वारा तैयार किए गए अंग्रेजी के ‘ई’ (E) आकार के डिजाइन के आधार पर किया गया। निर्माण में स्थानीय स्तर पर ही जुटाए गए विभिन्न प्रजातियों की लकड़ी, मुख्यतः बर्मा टीक और स्थानीय पत्थरों तथा इंग्लेंड से लाए गए शीशे और टाइलों का इस्तेमाल करके ‘एशलर फिनिंसिंग’ के साथ परिसज्जित किया गया है। निर्माण कार्य 27 अप्रैल 1897 को शुरू हुए और भवन मार्च 1900 में बनकर तैयार हुआ। ब्रिटिश गर्वनर सर एंटोनी मैक्डोनाल्ड यहां रहने वाले पहले गवर्नर थे। उनके बाद सर जेम्स, सर जान मिस्टन व सर हरबर्ट बटलर आदि गवर्नर भी यहां रहे, जबकि यूपी की प्रथम राज्यपाल सरोजनी नायडू यहां रहने वाली पहली भारतीय गर्वनर थीं। 115 कमरों के दोमंजिले राजभवन में स्वीमिंग पूल, टेनिस ग्राउंड, अपनी प्रेस, फूलों के बगीचे आदि भी इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं। यह वर्तमान में 10वीं व 20वीं सदी के हथियार, हाथी दांत, एन्टीक फर्नीचर, ट्रॉफियां व मेडल्स का दर्शनीय संग्रहालय भी है। पास में झंडीधार (जहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बांके लाल कंसल ने गुलामी के दौर में राष्ट्रध्वज फहरा दिया था), मोदी हाइट्स और मुंशी हाइट्स भी दर्शनीय हैं। यहां दो अप्रैल 2013 को करीब 10.6 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे राजभवन के जीर्णोद्धार कार्यों के दौरान प्रेसीडेनसिअल ब्लाक के शूइट नं. चार की छत पर  और पूर्व में वर्ष 1970 में डायनिंग हॉल में अग्निकांड भी हुए, जिससे इसे मामूली नुकसान हुआ।

नैनीताल का गोल्फ मैदान

Golf groundवर्ष 1926 में राजभवन के पास ही समुद्र सतह से 6475 फीट की ऊँचाई पर यूनाइटेड प्रोविसेंस के तत्कालीन गर्वनर जनरल मैलकम हैली के प्रयासों से ब्रिटिश आर्मी के इंजीनियरों द्वारा तैयार डिजाइन पर बेहद सुंदर और अद्भुद गोल्फ मैदान निर्मित कर गोल्फ खेल की शुरुआत की गई। गोल्फ कोर्स में 18 ‘होल’ या 18 ‘टी’ (T) पर ब्रिटिश काल में सर्वाधिक 24 अंक हासिल करने का रिकार्ड 1927 में ब्रिटिश अधिकारी एच एलीना के नाम बना। देश की आजादी से पूर्व यह गोल्फ मैदान सप्ताह में केवल मंगल, बृहस्पति और रविवार को ही खुलता था। वर्ष 1994 में तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल बोरा ने इसे सभी लागों के लिये खुलवा दिया। यह देश के प्राचीनतम गोल्फ कोर्स में शामिल है तथा भारतीय गोल्फ यूनियन (आईजीयू) से सम्बद्ध है। इ समें पर्यटक मामूली शुल्क (ग्रीन फीस) का भुगतान करके गोल्फ खेलने का आनन्द उठा सकते हैं।

यह भी पढ़ें: नैनीताल राजभवन की ‘तीसरी ठौर’ भी खतरे में

नैनीताल राजभवन में आग, फिर मंगल को सामने आया अमंगल

Leave a Reply

loading...