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रणजीत की वजह से रण छोड़ा… दो बेटियों का टिकट काट खुद के साथ अपनी बेटी को टिकट दिया

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-महिलाओं के सम्मान में-एक बेटी मैदान में

भाजपा की नीतियों से जनता परेशान “2022 में होगा प्रदेश में परिवर्तन, बनेगी  कांग्रेस की सरकार” संध्या डालाकोटी - UK LIVE 24 NEWS NETWORKनवीन समाचार, हल्द्वानी, 27 जनवरी 2022। नामांकन के लिए केवल शुक्र व शनिवार के दो दिन शेष रहते राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंचने जा रही हैं। खासकर अपने पुराने सिपहसालार रणजीत सिंह रावत की वजह से रामनगर का ‘रणछोड़’ कर हरीश रावत के आने से हॉट शीट में तब्दील हुई लालकुआं सीट पर राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।

बताया जा रहा है कि हरीश रावत के आने से पहले बगावती तेवर दिखा रहे हरेंद्र बोरा गुट आत्मसमर्पण करने यानी हरीश रावत के समर्थन में आने जा रहा है, वहीं हरीश दुर्गापाल मनाए जाने के बावजूद अभी भी बागी रुख अपनाए हुए हैं, जबकि कांग्रेस की घोषित प्रत्याशी संध्या डालाकोटी ने अब बगावती रुख अपना लिया है।

संध्या अपने चुनाव में ‘महिलाओं के सम्मान’ का मुद्दा उठाने जा रही हैं। उनका कहना है कि टिकट घोषित होने के बाद उनके साथ ही बरखा रानी सहित दो महिलाओं के टिकट काट दिए गए, जबकि हरीश रावत खुद के साथ अपनी बेटी के लिए भी टिकट ले आए। यानी अपनी बेटी बेटी, और दूसरे की बेटी-दूसरे की। दूसरे यह भी है कि लालकुआं विधानसभा सीट पर 2012 में अस्तित्व में आने के बाद से अब तक कभी भी कांग्रेस ने जीत दर्ज नहीं की है। एक बार पीडीएफ की ओर से निर्दलीय के तौर पर हरीश दुर्गापाल और दूसरी बार भाजपा के नवीन दुम्का प्रदेश में दूसरे नंबर के सर्वाधिक वोटों से जीते। इन दोनों में यह भी साम्य है कि दोनों ब्राह्मण हैं, जबकि इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों से क्षत्रिय उम्मीदवार हो गए हैं।

कांग्रेस ने पूरे कुमाऊं मंडल में केवल एक महिला रुद्रपुर में मीना शर्मा को छोड़कर किसी महिला को टिकट नहीं दिया है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य इसी उपेक्षा के कारण कांग्रेस छोड़ भाजपा में जा चुकी हैं। लिहाजा महिलाओं को टिकट की अनदेखी का मुद्दा भी संध्या निर्दलीय चुनाव में कूदते हुए उठा सकती हैं। उन्होंने नारा दिया है, ‘महिलाओं के सम्मान में, संध्या मैदान में’। इसके अलावा वह ब्राह्मण प्रत्याशी के रूप में भी लाभ ले सकती हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन समाचार, रामनगर, 26 जनवरी 2022। कांग्रेस पार्टी द्वारा हरीश रावत को आवंटित रामनगर सीट पर सोशल मीडिया से शुरू हुई चर्चाओं से सियासी तूफान आ गया है। यहां आम कांग्रेसी नेताओं में चर्चा है कि हरीश रावत की जगह रामनगर से डॉ. महेंद्र पाल चुनाव लड़ेंगे। मूलतः भीमताल विधानसभा से टिकट के लिए आवेदन करने वाले डॉ. महेंद्र पाल को अब तक कालाढुंगी सीट से टिकट दिया गया था। कालाढुंगी से अब महेश शर्मा को टिकट दिया जाएगा, जबकि हरीश रावत रामनगर की जगह लालकुआं से चुनाव लड़ेंगे। जबकि रामनगर में हरीश रावत का विरोध कर रहे रणजीत रावत डॉ. महेंद्र पाल के रामनगर आने के बाद सल्ट से चुनाव लड़ने को तैयार हो गये हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद हरीश रावत को रामनगर से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित करने वाले प्रमुख कांग्रेस नेता पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी ने सोशल मीडिया पर ‘अलविदा कांग्रेस’ लिख दिया। हालांकि बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया है। इस बीच कांग्रेसी नेताओं के सोशल मीडिया खातों पर एक-दूसरे के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की जा रही हैं। इन्हें देखकर पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

इधर, डॉ. महेंद्र पाल के एक करीबी नेता पूर्व दायित्वधारी रईश भाई ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि वह शनिवार सुबह नामांकन कराने के लिए रामनगर जा रहे हैं। उधर हरीश रावत के सोशल मीडिया पर अभी भी उनके द्वारा 28 जनवरी को रामनगर से नामांकन करने की, जबकि संजय नेगी के खाते पर 27 जनवरी की सुबह 11 बजे गर्जिया देवी मंदिर में आर्शीवाद लेकर रामनगर में चुनाव प्रचार का शुभारंभ करने की बात लिखी गई है। आगे देखने वाली बात होगी कि अगले कुछ घंटों में रामनगर में कांग्रेस का सियासी ऊंट किस करवट बैठता है। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन समाचार, लालकुआं, 25 जनवरी 2022। लालकुआं से कांग्रेस की घोषित प्रत्याशी संध्या डालाकोटी ने टिकट मिलने पर अपने चुनाव अभियान की शुरुआत पूर्व मंत्री हरीश दुर्गापाल का उनके हल्दूचौड़ का आर्शीवाद लेकर आगे बढ़ने से करके विरोधियों को भी चौंका दिया। इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। अलबत्ता, वहां भी जो नजारा देखने को मिला, वह भी कम चौंकाना वाला नहीं निकला।

पहला, उन्हें दुर्गापाल समर्थकों ने उनके लिए द्वार बंद कर उन्हें भीतर प्रवेश नहीं करने दिया। दूसरे दुर्गापाल के आवास पर उनके धुर विरोधी व दो बार उनके विरुद्ध चुनाव लड़ चुके हरेंद्र बोरा भी साथ दिखे। बाद में दुर्गापाल के पुत्र ने संध्या डालाकोटी को फिलहाल कार्यकर्ताओं के आक्रोश को देखते हुए वापस लौटने को कहा। इस दौरान ‘लालकुआं के दो ही लाल-हरेंद्र बोरा-दुर्गापाल’ के नारे भी सुनाई दिए। संध्या डालाकोटी उनके आवास के बाहर जमीन पर धरने पर बैठ गई।

अलबत्ता, इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर चल रही प्रतिक्रियाओं को देखें तो संध्या डालाकोटी ने हरीश दुर्गापाल के घर जाकर राजनीतिक लाभ ले लिया है। साथ ही दुर्गापाल समर्थकों द्वारा एक महिला को दरवाजे से लौटाए जाने पर भी सोशल मीडिया पर भी उन्हें समर्थन मिल रहा है। भाजपा के कार्यकर्ता भी इस पूरे ऐपिसोड पर आनंद ले रहे हैं।

इस पूरे ऐपिसोड का अंत हरीश दुर्गापाल के घर से कांग्रेस का झंडा उतारने और दुर्गापाल द्वारा समर्थकों के द्वारा कांग्रेस छोड़ने का ऐलान करने के साथ हुई। इसके बाद संध्या डालाकोटी उनके घर से लौटी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी, 2021। कांग्रेस ने जहां असंतोष टालने को प्रत्याशियों की सूची जारी करने में देरी कर जितने प्रयास किए हों, लेकिन पार्टी में कई सीटों पर असंतोष का तूफान उठना तय माना जा रहा है। खासकर किच्छा सीट पर जहां पार्टी ने रुद्रपुर सीट से दो बार चुनाव हारे कार्यकारी अध्यक्ष तिलक राज बेहड़ को टिकट दिया है। यहां किसान नेता गणेश उपाध्याय सहित कई स्थानीय कांग्रेस नेता पहले ही बाहरी प्रत्याशी का विरोध करने का खुला ऐलान कर चुके हैं।

इसी तरह बाजपुर सीट पर भी कांग्रेस में सुनीता टम्टा बाजवा द्वारा यशपाल आर्य को टिकट मिलने से बगावत का ऐलान किया जाना तय माना जा रहा है। बाजवा समर्थक पहले ही यशपाल का भाजपा से कांग्रेस में आने के दिन से विरोध कर रहे हैं।

इधर, हल्द्वानी सीट पर कांग्रेस ने खुद ही दीपक बल्यूटिया को उचकाकर उनसे काफी मेहनत करवाई और आखिर सुमित हृदयेश को टिकट दे दिया। यहां राज्य आंदोलनकारी ललित जोशी से लेकर व्यापारी नेता हुकुम सिंह कुंवर भी प्रबल प्रत्याशी के रूप में दावेदारी कर रहे थे और वंशवाद के नाम पर सुमित के टिकट का विरोध कर रहे थे।

अल्मोड़ा सीट पर भी कांग्रेस ने इसी तरह मनोज तिवारी का टिकट तय होने के बावजूद बिट्टू कर्नाटक को टिकट के लिए उचकाया और आखिर टिकट देने के नाम पर टरका दिया है। गंगोलीहाट सीट पर भी अल्मोड़ा की तरह हरीश रावत अपने समर्थक, हल्द्वानी से गंगोलीहाट की राजनीति करने वाले खजान गुड्डू को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। इससे यहां के पूर्व विधायक नारायण राम आर्य के समर्थकों में कॅरियर खत्म होने की चिंता होनी तय है।

इसी तरह गढ़वाल में कर्णप्रयाग सीट पर राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े हरिकृष्ण भट्ट व सहसपुर में आर्येंद्र के खिलाफ आठ स्थानीय आठ नेता खुले आम विद्रोह की चेतावनी दे चुके हैं। रायपुर सीट पर प्रभुलाल बहुगुणा पिछले काफी समय से तैयारी कर रहे थे। हाल में शामिल महेंद्र गुरू जी के समर्थकों को टिकट की उम्मीदें थी। कैंट और रायपुर सीट पर भी घमासान के हालात हैं। यमकेश्वर में ब्लॉक प्रमुख महेंद्र राणा प्रबल दावेदार थे, वह भी विरोध के स्वर बुलंद कर सकते हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एक मंच पर आए भाजपा के चार दावेदार, पार्टी के निर्णय पर जताया विरोध…

पत्रकार वार्ता करते भाजपा के दावेदार।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जनवरी, 2021। नैनीताल विधानसभा सीट पर भाजपा से सरिता आर्य को प्रत्याशी घोषित करने के एक दिन के बाद भाजपा के चार प्रत्याशी-दिनेश आर्य, प्रकाश आर्य, कमला आर्य व सागर आर्य शुक्रवार को एक मंच पर आए। उन्होंने पत्रकार वार्ता कर कहा कि उनका पार्टी नेतृत्व के निर्णय पर विरोध है। एक-दो दिन में पुनः बैठकर आगे के लिए कोई निर्णय लेंगे। अन्य प्रत्याशी मोहन पाल को भी उन्होंने साथ बताया। उधर अन्य प्रत्याशी हेम आर्य का मोबाइल प्रत्याशी की घोषणा के बाद से स्विच ऑफ हो गया है।
इस मौके पर पार्टी के प्रबल प्रत्याशी रहे दिनेश आर्य ने कहा कि भाजपा अब तक ‘दलबदलू’ के मुद्दे को लेकर चुनाव में आगे बढ़ रही थी। अब भाजपा के द्वारा भी दलबदलू को टिकट दे दिए जाने के बाद दोनों पार्टियों से दलबदलू प्रत्याशी हो गए हैं, लिहाजा यह मुद्दा पार्टी के हाथ से चला गया है। नैनीताल बड़ी व दुर्गम विधानसभा है। सरिता आर्य पूरे विधानसभा तक न पिछली बार पहुंच पाई थीं न इस बार पहुंच पाएंगी। उन्हें टिकट दिए जाने का आर्थिक कारण भी नहीं है। ऐसे में कैसे जीत की उम्मीद की जा सकती है।

भाजपा प्रत्याशी व भाजपा के दावेदार सहित चार लोगों ने लिए नामांकन पत्र
नैनीताल। शुक्रवार को विधानसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ संभावित प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र लिए। नामांकन पत्र लेने वालों में भाजपा प्रत्याशी सरिता आर्य के साथ ही भाजपा से प्रबल दावेदार रहे दिनेश आर्य, उनके ही हमनाम अधिवक्ता दिनेश चंद्र व उत्तराखंड क्रांति दल के प्रत्याशी ओम प्रकाश उर्फ सुभाष कुमार ने नामांकन पत्र लिए। आगे शनिवार व रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को नामांकन पत्र लेने एवं जमा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। नामांकन की प्रक्रिया में एसडीएम-रिटर्निंग ऑफीसर प्रतीक जैन, तहसीलदार-सहायक रिटर्निंग ऑफीसर नवाजिश खलीक, लता पांडे, प्रकाश पांडे, जफर आलम आदि कर्मी जुटे रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सरिता आर्य का भाजपा में आगमन पर हुआ स्वागत

भाजपा में शामिल होने पर सरिता आर्य का स्वागत करते पार्टी कार्यकर्ता।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी 2022। भाजपा नगर मंडल के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को पार्टी में हाल ही में शामिल हुई पूर्व विधायक सरिता आर्य का स्वागत अभिनंदन किया। साथ ही इस दौरान पूर्व में पार्टी में शामिल हुए हेम आर्य एवं कांग्रेस की महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश महासचिव रेखा बोरा गुप्ता का भी फूल माला पहनाकर स्वागत-अभिनंदन किया गया।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को पार्टी के कृष्णापुर, तल्लीताल बाजार, सूखाताल, नैनीताल क्लब व स्नो व्यू शक्ति केंद्रों के बूथ अध्यक्षों की बैठक आयोजित हुईं। इस दौरान नैनीताल क्लब शक्ति केंद्र की बैठक के दौरान सरिता आर्य, रेखा बोरा गुप्ता व हेम आर्य का स्वागत किया गया। इस दौरान सरिता आर्य ने कहा कि वह बिना शर्त भाजपा में आई हैं। पार्टी जो भी जिम्मेदारी उन्हें देगी उसका निर्वहन करेंगी। उन्होंने कहा कि महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष होते हुए न खुद टिकट प्राप्त कर पा रही थीं, न पार्टी की महिलाओं को टिकट दिला पा रही थीं, इसलिए कांग्रेस पार्टी में रहने का कोई अर्थ नहीं था।

इस मौके पर भाजपा के विधानसभा प्रभारी देवेंद्र ढैला, संघ के विधानसभा पूर्णकालिक आलोक तिवारी, विधानसभा प्रभारी प्रगति जैन, नैनीताल मंडल के अध्यक्ष आनंद बिष्ट, भवाली मंडल अध्यक्ष की महिला मोर्चा की अध्यक्ष आशा आर्या, अरविंद पडियार, कुंदन बिष्ट, अशोक तिवारी, तारा राणा, लता दफौटी, तारा बोरा, गजाला कमाल, मधु बिष्ट सहित अन्य पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : हरक की भाजपा से बर्खास्तगी से बिगड़े कोटद्वार से लेकर नैनीताल-भीमताल तक कई सीटों के चुनाव समीकरण

Bihar Election 2020 Result: People of Delhi will keep an eye on the Bihar  assembly election resultsडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जनवरी 2022। उत्तराखंड की राजनीति में अचानक, फिलवक्त ‘न घर के-न घाट के’ दिख रहे, कांग्रेस में वापसी के प्रयास करने पर भाजपा द्वारा निकाले गए, परंतु कांग्रेस द्वारा दो दिनों के बाद भी स्वीकार न किए गए कद्दावर नेता हरक सिंह रावत की वजह से कोटद्वार से लेकर नैनीताल व भीमताल तक कई सीटों के चुनाव समीकरण बदलने की उम्मीद है।

2017 में जीतने के बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कोटद्वार सीट पर हरक को भाजपा से टिकट पक्का माना जा रहा था, जबकि कांग्रेस से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी मजबूत दावेदार हैं। चूँकि हरक कोटद्वार की जगह केदारनाथ, लैंसडॉन व डोईवाला आदि सीटों पर टिकट चाह रहे थे, इसलिए इन सभी सीटों से अब टिकट के गणित भी बदलने की उम्मीद है। पहले तो भाजपा को कोटद्वार से कोई दमदार प्रत्याशी तलाशना है। माना जा रहा है कि भाजपा यहां अपना कोई पुराना चेहरा उतार सकती है।

वहीं लैंसडॉन व डोईवाला में भाजपा के गोपाल रावत व त्रिवेंद्र रावत की राह निष्कंटक हो गई है, जबकि केदारनाथ से कांग्रेस के विधायक मनोज रातव की चिंता बढ़ गई हैं। इधर नैनीताल जनपद के इधर नैनीताल सीट की पूर्व विधायक सरिता आर्य का भाजपा में आना भी हरक फैक्टर का ही परिणाम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि हरक की ओर से अपनी बर्खास्तगी के बाद ‘आंसू टपकाते’ हुए जो बेचारगी की तस्वीर मीडिया में पेश की जा रही थी, उससे ध्यान हटाने के लिए ही अचानक भाजपा की ओर से सरिता आर्य को पार्टी में शामिल कराने की पटकथा लिखी गई। उनके पार्टी में आने के बाद से नैनीताल सीट पर भी चुनाव व भाजपा के टिकट के समीकरण बदल गए हैं। कहा जा रहा है कि सरिता अघोषित तौर पर टिकट की गारंटी मिलने पर ही भाजपा में आई हैं।

उल्लेखनीय है कि सरिता नैनीताल नगर पालिका की पहली महिला पालिकाध्यक्ष और पहली महिला विधायक रह चुकी हैं। शहर में उनकी छवि अच्छी है। साथ ही महिला होने के नाते भी वह यहां वोटों का गणित एक हद तक गड़बड़ाने की क्षमता रखती हैं। अलबत्ता, ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी कमजोरी और पार्टी संगठन द्वारा उन्हें स्वीकार किए जाने पर अभी प्रश्न चिन्ह बने हुए हैं।

इसी तरह, भीमताल सीट पर 2017 में निर्दलीय जीते व अब भाजपा में आए विधायक राम सिंह कैड़ा चूंकि हरक के कांग्रेस में रहने के दौर से बेहद करीबी माने जाते हैं। उन्हें इस बार भाजपा से टिकट दिलाने में भी हरक की बड़ी भूमिका हो सकती थी, किंतु वह अपने हितों के लिए कोर कमेटी की टिकटों के पैनल बनाने हेतु आहूत बैठक से ही नदारद रहे, ऐसे में कैड़ा को टिकट का समीकरण भी गड़बड़ा गया है। यहां पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह बिष्ट भी टिकट की उम्मीद में हैं, जबकि मनोज साह ने तो चुनाव कार्यालय भी खोल दिया है।

सरिता ने ग्वेल देवता से लिया भाजपा की जीत का आशीर्वाद
नैनीताल। मंगलवार को भाजपा में शामिल होने के बाद नैनीताल लौटीं सरिता आर्य ने घोड़ाखाल मंदिर में दर्शन किए और इसके बाद कहा कि ग्वेल देवता से भाजपा की जीत का आशीर्वाद लिया है। जिसे भी टिकट मिलेगा, उसे जिताएंगे और भाजपा की सरकार बनाएंगे। अभी टिकट पर कुछ भी फाइनल नहीं है।

‘दल नहीं दिल बदल’: सरिता
नैनीताल। भाजपा में शामिल होने के बाद अपने गृह क्षेत्र पहुंचीं सरिता आर्य ने खुद का दल बदल नहीं ‘दिल बदल’ होने की बात कही और यशपाल आर्य पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते पर नैनीताल में उनका और बाजपुर में सुनीता बाजवा टम्टा का टिकट कटवाने का बड़ा आरोप लगाया। साथ ही कहा कि हरीश रावत ने उन्हें टिकट के लिए दो टूक मना कर महिलाओं का अपमान किया। उन्होंने बताया जल्द कांग्रेस के बहुत सारे लोग भाजपा में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, शीघ्र भाजपा के सभी प्रत्याशियांे से मुलाकात करेंगे और जिसे भी टिकट मिलेगा, उसकी जीत के लिए कार्य करेंगे।

इधर नगर में भाजपा की ओर से सरिता आर्य के स्वागत की तैयारी शुरू हो गई है। भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष आनंद बिष्ट ने बताया कि बुधवार को मल्लीताल चीना बाबा मंदिर के पास शक्ति केंद्र की बैठक के दौरान सरिता आर्य का पार्टी में अभिनंदन किया जाएगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : पिछले हफ्ते उत्तराखंड की राजनीति गर्माने वाले दो रावत होटल में मिले ! फिर उत्तराखंड की राजनीति गर्माने की चर्चाएं

नवीन समाचार, देहरादून, 28 दिसंबर 2021। तीन दिन पहले इस्तीफे की धमकी देकर और इससे दो दिन पहले राजनीति में मगरमच्छों की बात कह उत्तराखंड की राजनीति को राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में लाने वाले दो रावतों के बीती रात्रि एक साथ एक होटल में साथ दिखने से उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गर्म होती नजर आ रही है। राज्य की अभिसूचना इकाइयां भी इस मुलाकात की टोह ले रही हैं। हालांकि हरक ने हरीश के साथ एक ही वक्त एक ही होटल परिसर में होने की बात तो स्वीकार की है लेकिन हरीश से मुलाकात की बात को खारिज किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात्रि करीब 9.30 बजे हरक सुभाष रोड स्थित एक होटल में अपने गनर के साथ पहुंचे और लॉबी में बैठ गए। इसी बीच हरीश रावत के सहयोगी जसबीर सिंह रावत व संजय चौधरी भी वहां आ गए और हरक को वहां मौजूद देख उनके साथ बैठ गए। थोड़ी देर बाद हरक दूसरे तल स्थित अपने कमरे में चले गए। करीब 20 मिनट बाद कांग्रेस भवन में चुनाव समितियों की बैठक से लौटते हुए हरीश भी वहां आए और वो भी उसी तल पर स्थित अपने दूसरे कमरे में चले गए।

करीब आधा घंटे बाद हरीश वहां से अपनी टीम के साथ अपने घर लौट गए। इस पर सोशल मीडिया पर दोनों रावतों की मुलाकात की चर्चा चली तो भाजपा भी कुछ समय को असहज हो गई। सूत्रों के अनुसार खुफिया विभाग कर्मियों ने भी होटल जाकर दोनों रावतों की मुलाकात की जानकारी ली। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : किस ओर ‘फरकेंगे’ हरक ? महाकवि ‘घाघ’ कर गए हैं इशारा….

Harak Singh Rawat | उत्तराखंड में BJP को बड़ा झटका, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह  रावत ने दिया इस्तीफा, Uttarakhand Cabinet Minister Harak Singh Rawat  resigns setback BJP before Election

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 दिसंबर 2021। महाकवि घाघ की मौसम को लेकर एक मशहूर उक्ति है-‘शुक्रवार की बादरी रहे शनीचर छाय, घाघ कहे सुन घाघनी बिन बरसे नहीं जाए।’ यानी शुक्रवार के बादल यदि शनिवार को भी छाये रहें तो वे बिन बरसे नही जाते’। उत्तराखंड की सियासत में भी शुक्रवार को उमड़े बादल शनिवार को भी कमोबेश छाये रहे। महाकवि घाघ की मानें तो यह बादल बिन बरसे नहीं जाएंगे। वहीं उत्तराखंड की लोकभाषाओं गढ़वाली और कुमाउनी में एक शब्द है ‘फरकना’ यानी पलट जाना। सवाल यह है कि बार-बार फरक जाने वाले हरक क्या फिर फरक सकते हैं। यह दोनों बातें आगे उत्तराखड की राजनीति में बहुत प्रासंगिक होने वाली हैं।

उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार देर रात धामी सरकार की कैबिनेट बैठक से उठी सियासी चिंगारी के बाद शनिवार को जो राजनीतिक गतिविधियां हुईं उनका विश्लेषण करने पर यह बात साफ हो जाती है। एक ओर जहां सत्तापक्ष की ओर से इस चिंगारी को आग बनने से रोकने के लिए सत्ता पक्ष बयानों के ठंडे पानी की बौछार करता रहा। जबकि हरीश रावत ने दोहराया, 2016 के लोकतंत्र के अपराधी यदि माफी मांगते हैं तो वह डंडा पकड़े नहीं खड़े हैं। यह भी बोले, पार्टी में किसी को शामिल करना-न करना उनका नहीं पार्टी अध्यक्ष का काम है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा, हरक और काऊ उनके संपर्क में नहीं हैं। प्रीतम सिंह भी हरक से संपर्क से इंकार करते रहे।

गौरतलब है कि राजनीति में जो कहा जाता है, वही नहीं होता, बल्कि कई बार इसका उल्टा होता है। ऐसे में दो बातें साफ हैं। एक-हरक कांग्रेस के संपर्क में हो सकते हैं। माना जा रहा है कि प्रीतम सिंह की ओर से हरीश रावत के विरुद्ध मोर्चा बनाने के लिए हरक को कांग्रेस में शामिल करने की कोशिश चल रही है, और हरीश अभी भी इसमें स्वाभाविक तौर पर बाधा बने हुए हैं। दूसरे-हरीश गुट भी चाहता है कि उन्हें कांग्रेस में लेकर भाजपा पर मनोवैज्ञानिक बढ़त ली जाए, जैसा उन्होंने यशपाल आर्य को पार्टी में शामिल करके किया है। इसलिए हरीश गुट की ओर से कोशिश है कि हरक से माफी मंगवाकर उन्हें मनोवैज्ञानिक तौर पर दबा लिया जाए।

दूसरी ओर भले सियासी ड्रामे पर परदा डालने के लिए सत्ता पक्ष कोटद्वार मेडिकल कॉलेज की आड़ ले रहा हो मगर शुक्रवार रात से लगभग शनिवार रात तक हरक सिंह का किसी बड़े भाजपा नेता के संपर्क में न रहना और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का दिनभर उनका इंतजार करते रहना, हरक सिंह रावत की मीडिया से दूरी और देर रात तक सीएम आवास में सीएम, हरक सिंह, धन सिंह रावत, उमेश शर्मा काऊ और भाजपा के संगठन महामंत्री अजेय कुमार की बैठक किसी और ही कहानी का इशारा कर रही है।

सवाल यह भी है कि क्या रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आने से पहले भाजपा प्रदेश स्तर पर ही चिंगारी को शोला न बनने देने और किसी सियासी फजीहत से निपटने के लिए मसले का का निपटारा कर लेना चाहती है। दरअसल हरक सिंह रावत भले किसी पार्टी में रहे हों मगर वह किसी हद को नहीं मानते और आस-पास खींची हुई हदों को तोड़ते रहे हैं, नतीजतन संभवतः वह प्रदेश के अकेले ऐसे नेता हैं जो भाजपा-कांग्रेस और बसपा समेत उत्तराखंड के सभी बड़े राजनीतिक दलों के घाट का पानी पी चुके हैं। भाजपा छोड़ने के बाद एक बार तो उन्होंने अपना राजनीतिक दल भी बनाया था।

सियासी पैंतरेबाजी में निपुण हरक सिंह रावत जिस भी सरकार में रहे विवादों से उनका नाता तो रहा ही वह सीधे तब के मुख्यमंत्रियों को भी चुनौती पेश कर अपने स्वतंत्र वजूद का अहसास कराते रहे हैं। तिवारी सरकार से लेकर पुष्कर सरकार तक वह अपने तेवर दिखाते रहे हैं । हरीश रावत के समय बगावत में उनकी नेतृत्वकारी भूमिका थी। उन्हें नाथना हर सीएम के लिए बहुत दुष्कर रहा है। हरीश रावत इसी वजह से उन्हें ‘उज्याड़ू बल्द’ कहते और उन पर काबू रखने के लिए त्रिवेंद्र रावत की प्रशंसा करते रहे हैं। माना जाता है कि त्रिवेंद्र सरकार को रुखसत करने में उनका बड़ा योगदान रहा।(प्रेरणा-अरविंद शेखर, देहरादून) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : देखें हरक सिंह रावत का राजनीतिक इतिहास और समझें आगे क्या करेंगे हरक

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 दिसंबर 2021। उत्तराखंड की भाजपा सरकार में कबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत बीती रात्रि राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान अपने साथी स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से कोटद्वार मेडिकल कॉलेज के मुद्दे पर हुई तनातनी के बाद इस्तीफा देने की धमकी देकर निकल गए। इसके बाद देश भर की मीडिया की सुर्खियों में रहे हरक ने भले आज दूसरे दिन इस्तीफा न दिया हो लेकिन उनका राजनीतिक इतिहास जानने वालों की मानें तो हरक का रूठना-मनाना सब कुछ अस्थायी है। उनका राजनीतिक इतिहास जानकारी यह बात साफ हो जाती है, साथ ही यह अंदाजा भी लग जाता है कि वह आगे क्या करने वाले हैं।

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मूलरूप से श्रीकोट स्थित गंगनाली गांव में 15 दिसंबर 1960 को पैदा हुए हरक ने 80 के दशक में श्रीनगर गढ़वाल विवि की छात्र सियासत से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उत्तर प्रदेश के समय 1984 में भाजपा से पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन हार नहीं मानी। वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर दुबारा पौड़ी से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की, और भाजपा की तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार में पर्यटन मंत्री के रूप में सबसे कम उम्र में मंत्री बने। वर्ष 1993 में एक बार फिर हरक भाजपा के टिकट पर पौड़ी से ही चुनाव लड़े और दोबारा विधायक बने। लेकिन तीसरी बार टिकट नहीं मिलने पर बिना कोई मुरौबत किये भाजपा छोड़ दी और बसपा का दामन थाम लिया। बसपा भी उन्हें अधिक दिन रास नहीं आई और वह बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।

अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद हरक लगातार सत्ता से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में हरक कांग्रेस के टिकट पर लैंसडाउन सीट से विधायक चुने गए और राज्य की पहली नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में बनी निर्वाचित सरकार में मंत्री बने, लेकिन सरकार के एक साल बीतते ही वह विवादों में आ गए और जैनी प्रकरण में फंस गए। इस मामले में हरक को मंत्री पद से भी इस्तीफा देना पड़ा। मामले की सीबीआई जांच तक हुई। हालांकि बाद में हरक इस मामले से पाक साफ बाहर निकल आए।

2007 में भी हरक लैंसडाउन से दोबारा कांग्रेस से ही चुनाव लड़े और जीते। इस बार कांग्रेस सत्ता में नहीं आई लेकिन हरक नेता प्रतिपक्ष बन गए। इस बीच उत्तराखंड में आयोजित एक जनसभा में उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने कह दिया था कि उन्हें संसद में दिया गया राहुल गांधी का भाषण पसंद नहीं आया।

2012 के विधानसभा चुनाव में हरक ने रुद्रप्रयाग से अपने रिश्तेदार भाजपा नेता मातबर सिंह कंडारी के खिलाफ चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। 2013 में सरकार बनने के एक साल बाद ही हरक फिर विवादों में आ गए। इस बार उनके विवाद का कारण मंत्री पद के साथ बीज एवं तराई विकास निगम के अध्यक्ष पद पर भी आसीन होना था। इस पर भाजपा ने उन पर नियमों के विरुद्ध दोहरे लाभ के पद पर आसीन होने का आरोप लगाया। इस पर उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि बाद में इस संबंध में उच्च न्यायालय में दायर हुई याचिका पर हरक को राहत मिल गई थी। हरक जब लाभ के पद के विवाद को लेकर विपक्ष के हमलों से जूझ ही रहे थे, इसी बीच 2014 में मेरठ की युवती ने उन पर दिल्ली के सफदरगंज थाने में दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवा दिया।

इस बहुचर्चित मामले में राजनीति खूब गर्म रही, लेकिन कुछ ही समय बाद यह मामला धुंधला होता चला गया। बताया गया कि युवती ने अपने आरोपो को वापस ले लिया था। इस विधानसभा में 2016 का साल कांग्रेस सरकार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व को हरक अपने बगावती तेवरों से परेशान किए रहे। चुनाव के लिए एक साल से कम का वक्त बचा तो हरक ने हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया और विजय बहुगुणा और अन्य सात विधायकों के साथ मिलकर पार्टी तोड़ दी। इसके साथ ही हरक सिंह रावत ने भाजपा का भी दामन थाम लिया था।

इस बीच हरीश रावत का एक स्टिंग सामने आया। इस स्टिंग में हरक फोन पर हरीश रावत से बात करते हुए भी दिखाए गए थे। यही नहीं, एक अन्य स्टिंग में हरक कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट के साथ भी बैठकर बात करते नजर आए। उनकी बगावत का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। उन्हें विधानसभा की सदस्यता गवानीं पड़ी, और वह भाजपा में शामिल हो गए।

2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में आई भाजपा सरकार में हरक फिर मंत्री बने। इस दौरान उनकी त्रिवेंद्र से टकराव की खबरें लगातार सतह पर आती रहीं। कर्मकार बोर्ड में नियुक्तियों और कामकाज की शैली को लेकर त्रिवेंद्र सिंह रावत से हरक सिंह रावत की खूब ठनी। त्रिवेंद्र ने उन पर अंकुश लगाने के लिए पूरा कर्मकार बोर्ड, अध्यक्ष के रूप में हरक, उनका दफ्तर और उनकी बहुचर्चित सचिव को बदल दिया।

इसी बीच अपने शासन काल के चौथे साल खत्म होते-होते त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुख्यमंत्री पद से विदाई हो गई। इस पर हरक सीएम बनने का ख्वाब देखने लगे। त्रिवेंद्र के बाद तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद जब पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया तो हरक नाराज हो गए। इस पर सीएम धामी को उन्हें मनाने के लिए शपथ ग्रहण के तत्काल बाद उनके घर तक जाना पड़ा। इसके बाद हरक भाजपा के दिल्ली दरबार की दौड़ लगाने लगे और विधानसभा का समय कम होने के साथ उनके भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं के कयास बढ़ते जाने लगे। इस पर हरीश रावत ने अक्टूबर में यह तक कह दिया था कि बिन माफी मांगे किसी नेता को कांग्रेस में जगह नहीं दी जाएगी। इसके बाद हरक ने दो बातें कही थीं। एक-वह 2022 में चुनाव लड़ना नहीं चाहते और दूसरी कि जो उन्होंने कांग्रेस और उसके नेतृत्व के बारे में बोला था वो गलत है।

ऐसे में समझा जा सकता है कि हरक प्रकरण कितना ठंडा हो चुका है, अथवा गरम रहेगा। सूत्रों के मानें तो उनकी कांग्रेस आलाकमान से बातचीत पूरी हो चुकी है। अगले कुछ दिनों, 5 जनवरी तक वह फिर उत्तराखंड की राजनीति को गर्म कर सकते हैं। उनके साथ कम से कम दो और नेताओं की भी कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग: मुख्यमंत्री रावत ने की पत्रकार वार्ता, इस्तीफे पर कुछ भी नहीं कहा…

नवीन समाचार, देहरादून, 02 जुलाई 2021। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अभी-अभी देहरादून में पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उन्होंने अपनी 114 दिन की सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। बताया कि इस दौरान राज्य की जनता को कोविड-19 से हुई आर्थिक स्थिति से राहत के लिए दो हजार करोड़ रुपए की राहत दिलाई गई। आगे उन्होंने 22340 पदों पर नियुक्तियां देने की बात कही। 11 व 12वीं कक्षा के बच्चों को कम्प्यूटर देने की बात कही, लेकिन अपने इस्तीफे को लेकर ना ही पत्रकार वार्ता और ना ही पत्रकार वार्ता से लौटते हुए पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर ही कोई टिप्पणी की। इसके साथ आज रात्रि में इस्तीफा देने की संभावना भी कम ही नजर आ रही है।

वहीं एक महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि भाजपा विधायक दल की बैठक शनिवार की अपराह्न तीन बजे बुला ली गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक के लिए पार्टी के सभी विधायकों को देहरादून बुला लिया गया है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इस बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में मौजूद रहेंगे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : चिंतन शिविर के तत्काल बाद सीएम रावत दिल्ली बुलाए गए, नेतृत्व परिवर्तन तक पहुंची चर्चाएं

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जून 2021। उत्तराखंड भाजपा में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चले तीन दिन लंबे मंथन के तत्काल बाद अचानक प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भाजपा हाईकमान ने दिल्ली बुला लिया है। इसके बाद मुख्यमंत्री के पहले से तय आज के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री को आज ही दिल्ली रवाना होना है। उन्हें दिल्ली से बुलावे की कोई वजह अभी तक सामने नहीं आ सकी है। हालांकि चर्चाएं मुख्यमंत्री को बदले जाने तक की चल पड़ी हैं। हालांकि माना जा रहा है सीएम को पार्टी हाईकमान ने उपचुनाव को लेकर रणनीति पर विचार करने के लिए बुलाया है। भाजपा के तीन दिवसीय चिंतन शिविर से लौटते ही सीएम को दिल्ली का यह बुलावा मिला। उपचुनाव के बारे में चिंतन शिविर में भी पार्टी कोर ग्रुप के कुछ प्रमुख नेताओं के बीच चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री को दिल्ली बुलाकर केंद्रीय नेतृत्व उनसे इस विषय पर विस्तार से चर्चा कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि रामनगर में हुए चिंतन शिविर से छन कर खबरें आईं कि इस दौरान भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री के उपचुनाव को लेकर नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा कीं। पार्टी ने आगामी 6 माह के कार्यक्रम भी तय किए पर उप चुनाव को लेकर कुछ नहीं कहा। लेकिन राज्य की जनता इस शिविर से मुख्यमंत्री के साथ राज्य के राजनीतिक भविष्य को जानने को लेकर अधिक उत्सुक थी। ऐसे में राज्य मंे हो रही हर राजनीतिक गतिविधि के अर्थ निकाले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को दिल्ली बुलाने पर भी इसी कारण कयास लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव होना है। बताया जा रहा है सीएम तीरथ सिंह रावत गंगोत्री सीट से उपचुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि फिलहाल चुनाव आयोग की उपचुनाव पर लगी रोक है। नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री को 10 सितंबर से पहले चुनकर आना है। ऐसा न होने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने या जल्दी चुनाव होने के भी कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन जिस तरह पार्टी ने अगले 6 माह के कार्यक्रम तय किए हैं, उससे इस कयास को बल नहीं मिलता है। ऐसे में माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व और सीएम तीरथ के बीच इन विषयों पर चर्चा हो सकती है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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