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उक्रांद ने किया बड़ा चुनावी वादा, आप को पीछे छोड़ा, एक काबीना मंत्री को लेकर भी किया इशारा….

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 4 अक्टूबर 2021। उक्रांद यानी उत्तराखंड क्रांति दल भी आधुनिक दौर की ‘दाने डालकर वोट लेने’ की राजनीति की ओर चलती नजर आ रही है। दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष भुवन जोशी ने सोमवार को बयान जारी करके कहा है कि उक्रांद सत्ता में आने पर बेरोजगारों को 10 हजार रुपए प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देगी। इसके अलावा उन्होंने राज्य में सत्ता में आने पर खनन की विस्तृत जांच कराने की बात भी कही है।

अब कैसे हो गई सांसद निधि आबंटित: जोशी - पर्वत प्रेरणा (Parvat Prerna)इसके अलावा श्री जोशी ने भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के काबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को प्यारे बच्चे की तरह डांटने वाले बयान पर भी एतराज जताते हुए एक नया राजनीतिक इशारा किया है। उन्होंने कहा, ‘सभी बच्चे प्यारे होते हैं और मन के सच्चे होते हैं। हरक सिंह जी ने जो कहा सत्य ही कहा है और यह उनकी अंतरात्मा की आवाज है। उक्रांद यही बात कई वर्षों से कहती आ रही है। हरक सिंह जी को अपनी अंतरात्मा की आवाज निर्भीकता से और डांट के डर के बिना रखते रहनी चाहिए। बच्चे को डांट का डर दिखाकर धमकाने की कोशिश का यूकेडी विरोध करती है।’ यह भी कहा, ‘हरक सिंह रावत जी के सकारात्मक कार्यों और उत्तराखंड के हित में यूकेडी उनके साथ हमेशा खड़ी रहेगी।’

उन्होंने आम आदमी पार्टी पर पांच हजार रुपए महीना बेरोजगारी भत्ता देने के चुनावी वादे को हास्यापद और यूकेडी का मुद्दा चुराने का आरोप लगाया। कहा कि उक्रांद बेरोजगारों को 10 हजार प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने की मांग लगातार उठाती रही है। यह भी कहा कि 2022 में उक्रांद ही सरकार बनाएगी और शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाएगी। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-नैनीताल के सुदृढ़ीकरण के लिए मांगा 100 करोड़ रुपए का पैकेज

मुख्यमंत्री को ज्ञापन सोंपते हुए वार्ता करते उक्रांद नेता।

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 9 सितंबर 2021। पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल के नेतृत्व में उत्तराखंड क्रांति दल के एक शिष्टमंडल ने बुधवार देर रात्रि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वार्ता की और प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। शिष्टमंडल ने पंतनगर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने के राज्य मंत्रिमंडल के गत 27 अगस्त को लिए गए निर्णय को उत्तराखंड की जनभावनाओं के विपरीत और राज्य के युवाओं, कृषकों, आरक्षित वर्ग के लोगों के भविष्य के साथ कुठाराघात बताते हुए इस निर्णय को अविलम्ब वापिस लेने का अनुरोध किया।

डॉ. जंतवाल ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद राज्य के छात्रों को इसमें प्रवेश मिलना मुश्किल हो जायेगा जबकि वर्तमान में उत्तराखंड के स्थायी निवासी छात्रों को 75 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियाँ भी अखिल भारतीय स्तर पर ही होंगी। इससे उत्तराखंड के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को अनुमन्य आरक्षण के लाभ से भी वंचित होना पड़ेगा। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने की सोच को गैर उत्तराखंडवादी करार विश्वविद्यालयों को राजनैतिक प्रयोगशालाओं के रूप में इस्तेमाल न करने, वरन उन्हें स्वायत्तशासी संस्थाओं के रूप में समाज में अपना अमूल्य योगदान देने कि स्वत्रंतता प्रदान करने का अनुरोध भी किया।

साथ ही नैनीताल नगर कि दुर्दशा पर भी एक ज्ञापन देते हुए नगर की सुरक्षा हेतु दीर्घकालिक रणनीति बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने यह सुझाव भी रखा कि राज्य भूगर्भीय दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील होने के चलते पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास हेतु पृथक नीति निर्धारण के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाये, जो पहाड़ के मर्म को केंद्र में रखकर दूरगामी परिणाम वाली एक वृहद कार्ययोजना प्रस्तुत करे। उन्होंने नैनीताल नगर की भूगर्भीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए तत्काल 100 करोड़ रुपए की धनराशि अवमुक्त करते हुए समस्त संवेदनशील क्षेत्रों को नवीनतम तकनीक से बांधने, सुदृढ़ करने का कार्य एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किये जाने का अनुरोध भी किया। शिष्टमंडल में प्रकाश पांडे, अम्बा दत्त बवाड़ी, खीमराज सिंह, कुलदीप सिंह, डा. अंसारी, चंद्रप्रकाश साह, भगवत महरा, मदन बग्डवाल, नीरज डालाकोटी, धीरेंद्र बिष्ट आदि शामिल रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : पंतनगर कृषि विवि को केंद्रीय किए जाने के विरोध में अब उतरा राज्य का एक और दल

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 6 सितंबर 2021। लंबे समय तक सुप्तावस्था में रहा उत्तराखंड क्रांति दल भी नए प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में विधानसभा चुनाव करीब आते सक्रिय हो गया है। भूकानून के बाद अब दल ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की मुख्यमंत्री द्वारा की गई सिफारिश का विरोध करने का ऐलान किया है।

सोमवार को पार्टी के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. नारायण सिंह जंतवाल की अगुवाई में नैनीताल क्लब में आयोजित हुई पत्रकार वार्ता में कहा गया कि पंतनगर विश्वविद्यालय देश का पहला, हरित क्रांति का प्रणेता कृषि विश्वविद्यालय है। कहा कि इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाना ना तो प्रदेश की जनता के हित में है, और ना ही कृषकों के लिए। कहा कि इस संबंध में यदि सरकार द्वारा निर्णय वापस नहीं लिया गया तो पार्टी कार्यकर्ता कृषकों और युवाओं के साथ मिलकर सड़कों पर उतर कर उग्र आंदोलन करेंगे।

डॉ. जंतवाल ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का भी गौरव रहा है। जब देश के दूसरे राष्ट्रपति राधाकृष्णन शिक्षा मंत्री थे तो उन्होंने देश में कृषि विश्वविद्यालय बनाए जाने की संकल्पना की थी। जिस पर इंडो अमेरिकन टीम ने सर्वे कर पंतनगर क्षेत्र की भूमि का चयन किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत के प्रयासों से 1960 में पंतनगर में भूमि अनुदान विश्वविद्यालय की नींव रखी गई। शुरुआती दौर में विश्वविद्यालय के पास करीब 16000 एकड़ भूमि थी। इसमें से पहले बड़ी मात्रा में भूमि का आवंटन सिडकुल को कर दिया गया। अब विश्वविद्यालय के पास केवल 12500 एकड़ भूमि ही बची है।

विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए 75 फीसदी सीटें प्रदेश के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। साथ ही यहां शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति में भी प्रदेशवासियों को वरीयता दी जाती है। यदि विश्वविद्यालय को केंद्रीय हाथों में सौंप दिया गया तो प्रदेश की जनता को यह लाभ नहीं मिल पाएगा। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण, प्रकाश पांडे, वीरेंद्र जोशी, भगवत मेहरा, खीमराज बिष्ट, नीरज बिष्ट, अंबा दत्त बवाड़ी, पूरन भट्ट आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : उक्रांद के ‘थिंक टैंक’ विपिन त्रिपाठी को पुण्यतिथि पर किया याद

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2021। उत्तराखंड क्रांति दल की नगर इकाई ने सोमवार को दल के ‘थिंक टैंक’ व पूर्व विधायक विपिन त्रिपाठी को उनकी 17वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। नगर के राज्य अतिथि गृह में उत्तराखंड क्रांति विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा की स्वर्गीय त्रिपाठी उत्तराखंड के जन आंदोलनों के प्रतीक थे व राज्य के सवालों के प्रति समर्पित थे। उन्होंने राज्य विधानसभा में राज्य वासियों के हक हकूक के मुद्दों को इमानदारी व बेबाक ढंग से उठाया। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि राज्य की नीतियां जनता को केंद्र में रखकर बनें।

स्वर्गीय विपिन त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देते उक्रांद कार्यकर्ता।

श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए पूर्व पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण ने कहा कि त्रिपाठी जी सदैव अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे व राज्य के जल, जंगल, जमीन के मुद्दों को दृढ़ता से उठाया। श्रद्धांजलि सभा में अंबा दत्त बवाड़ी, कुलदीप सिंह, रंगकर्मी महेश जोशी, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय के प्रधानाचार्य बिशन मेहता, डॉ. महेंद्र राणा, भगवत मेहरा, खीमराज बिष्ट, विजय पंत व विष्णु सिंह बिष्ट आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश पांडे जी ने किया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : विधानसभा चुनाव के लिए उक्रांद ने भी कसी कमर, अनेक युवाओं ने ग्रहण की सदस्यता, युवा उक्रांद का हुआ गठन

-भगवत को युवा उक्रांद की विधानसभा, नीरज को नगर व मदन को खुर्पाताल की जिम्मेदारी

सदस्यता ग्रहण करने एवं पद दिए जाने पर युवा कार्यकर्ताओं का अभिनंदन कते पार्टी के वरिष्ठ नेता।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अगस्त 2021। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य निर्माण के समय से संघर्षशील रहा उत्तराखंड क्रांति दल फिर से सक्रिय हो गया है। शनिवार को करीब 40 युवाओं ने दल की सदस्यता ग्रहण की और दल के नेतृत्व में आम जन व शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प जताया।

नैनीताल क्लब में पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबा दत्त बवाड़ी की अध्यक्षता में आयोजित हुए ‘यूथ कार्यक्रम’ में नवयुवकों को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि इतनी संख्या में युवाओं का दल में शामिल होना दर्शाता है कि दल के प्रति युवाओं में जोश बरकरार है। उन्होंने कहा कि दल वर्तमान में भी सशक्त भूकानून के निर्माण, लोगों को बुनियादी सुविधाएं दिलाने, पलायन के दंश को रोकने व रोजगार के अवसर पैदा करने तथा जनोन्मुखी लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्षरत है। आयोजन की सफलता में युवा नेता खीमराज बिष्ट व भगवत मेहरा ने विशेष भूमिका निभाई।

दल की सदस्यता ग्रहण करने वालों में चिकित्सक डॉ. अफरोज अंसारी, जगदीश जोशी भी शामिल रहे। इस दौरान भगवत मेहरा को युवा उक्रांद का विधानसभा अध्यक्ष, नीरज बिष्ट को युवा उक्रांद व आईटी प्रकोष्ठ का नगर अध्यक्ष तथा मदन बगडवाल को न्याय पंचायत खुर्पाताल का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। नवनियुक्त पदाधिकारियों से शीघ्र अपनी इकाइयों का गठन करने को भी कहा गया। साथ ही आगामी 12 अगस्त को मुख्यालय में सशक्त भूकानून व रोजगार के सवालों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय भी लिया गया। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश पांडे, केएल आर्य, कुलदीप सिंह व कमलेश पांडे आदि भी मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : उक्रांद में फिर हुआ एका, अनुभवी ऐरी को कमान, सवाल कितना स्थायी रहेगा एका..

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जुलाई 2021। 25 जुलाई 1979 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. डीडी पंत, उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बड़ौनी व विपिन त्रिपाठी सरीखे नेताओं के द्वारा स्थापित उक्रांद यानी उत्तराखंड क्रांति दल ने अपने 42वें स्थापना दिवस पर एक बार फिर एका का प्रयास किया है। 2022 के आसन्न विधान सभा चुनाव की दहलीज पर पहुंचते पार्टी के 20वें द्विवार्षिक अधिवेशन में 1993-95 और 2013-15 तक पार्टी के अध्यक्ष और 1985, 1989, 1993 व 2002 में विधायक रहे काशी सिंह ऐरी को एक बार फिर दल ने भरोसा जताते हुए सर्वसम्मति से केंद्रीय अध्यक्ष चुना है।

साथ ही इस दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने, राज के मूल निवासियों के लिए 70 फीसद आरक्षण लागू करने, राज्य आंदोलनकारियों को 10 फीसद क्षैतिज आरक्षण देने, सख्त भू-कानून लागू करने, पर्यटन और तीर्थाटन को उद्योग का दर्जा देने, समूह ग की भर्ती को लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर करने एवं पुलिसकर्मियों के लिए ग्रेड पे की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने सहित कुल 18 प्रस्ताव भी सर्वानुमति से पारित हुए।

कितने स्थायी रहेंगे एका के प्रयास
उक्रांद में हुए एका के प्रयासों के साथ ही यह सवाल सबसे पहले उठने लगा है कि यह प्रयास कितने स्थायी रहेंगे। कारण, उक्रांद का इतिहास है। राज्य बनने से पूर्व प्रभावी भूमिका में रहे उक्रांद के प्रमुख चेहरा रहे काशी सिंह ऐरी उत्तर प्रदेश विधानसभा में 1985, 1989 व 1993 में यानी लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधायक रहे। लेकिन 1994 के राज्य आंदोलन के चरम के दौर में 1996 का लोक सभा चुनाव का बहिस्कार करने का बड़ा दाग भी उक्रांद पर लगा। यानी एक राजनीतिक दल होते हुए भी उक्रांद राज्य बनने की दहलीज पर चुनाव लड़ने के अपने कर्तव्य से पीछे हट गया। कारण, इससे ठीक पहले 1995 में यह दल पहली बार दो हिस्सों में बंट गया था। उसके विघटन का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा बल्कि आगे भी जारी रहा। उक्रांद में वर्तमान राजनीति के लिहाज से राजनीतिक चातुर्य या तिकड़मों की कमी मानें या कुछ और पर सच्चाई यह है कि वह अपने गठन से ही गलतियों पर गलतियां करता जा रहा है, और इन्हीं गलतियों का ही परिणाम कहा जाएगा कि वह दशकों तक प्रदेश का एकमात्र क्षेत्रीय दल होने के बावजूद अब राज्य विधानसभा में शून्य पर पहुंच गया है।

राज्य गठन के पूर्व उक्रांद के नेता सपा से सांठ-गांठ करते दिखे और अलग राज्य का विरोध कर रहे कांग्रेस-भाजपा जैसी राज्य विरोधी ताकतों को संघर्ष समिति की कमान सोंपकर हावी होने का मौका दिया। और राज्य बनने के बाद भी 2007 में उसने भाजपा सरकार को समर्थन दिया और फिर समर्थन वापस लेकर तथा और 2012 में कांग्रेस सरकार को कमोबेश बिन मांगे समर्थन देकर अपनी राजनीतिक अनुभवहीनता का ही परिचय दिया। इस कवायद में दल दो टुकड़े भी हो गया। शायद यही कारण रहे कि राज्य बनने के बाद वह लगातार अपनी शक्ति खोता रहा।

राज्य बनने के बाद पहली निर्वाचित विधान सभा में उक्रांद के चार विधायक-ऐरी, जंतवाल, विपिन त्रिपाठी, और उनकी मृत्यु होने के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र पुष्पेश त्रिपाठी और त्रिवेंद्र पवार विधायक बने। त्रिवेंद्र पंवार ने बाद में अलग गुट बना लिया। 2007 के चुनाव में उक्रांद तीन विधायक-पुष्पेश, दिवाकर भट्ट और ओमगोपाल चुनाव जीते। आगे दिवाकर और ओमगोपाल 2012 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर और 2017 में निर्दलीय चुनाव लड़ें। इस तरह 2012 में उक्रांद के केवल एक विधायक प्रीतम सिंह पवार मंत्री बने और कांग्रेस सरकार में मंत्री रहेे। इस तरह लगातार उसकी विधायक संख्या एक-एक कर विधानसभा में घटती चली गयी। गौरतलब है कि 2017 की निर्वाचित विधानसभा में उक्रांद के केवल एक सदस्य धनौल्टी सीट से निर्दलीय जीते। यह भी रहा कि तीन में से दो बार दल ने वैचारिक भिन्नता के बावजूद कमोबेश बिना समर्थन मांगे भी सत्तारूढ़ दलों से हाथ मिलाया, और उसके निर्वाचित विधायक अपने नेतृत्व के प्रति कमोबेश बेलगाम हुए, और पार्टी से अलग चलते रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : उक्रांद ने साफ किया भूकानून-धारा 371 पर अपना एजेंडा

-साथ ही पूछा-क्यों 6 वर्ष से राज्यपाल के पास पड़ा है राज्य आंदोलनकारियों संबंधी विधानसभा में पारित प्रस्ताव

-पार्टी के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, डॉ. जंतवाल व पुष्पेश ने कहा भूकानून में अब सरकार की अनुमति का प्राविधान भी मंजूर नहीं

पत्रकार वार्ता करते उक्रांद नेता ऐरी, जंतवाल, त्रिपाठी व अन्य।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जुलाई 2021। राज्य प्राप्ति के पूर्व से ही जल, जंगल व जमीन के मुद्दों पर संघर्ष करने वाली राज्य के मूल राजनीतिक दल उत्तराखंड क्रांति दल ने राज्य में इन दिनों जन-मुद्दा बने भूकानून पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। पार्टी के शीर्ष नेता-पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी व डा. नारायण सिंह जंतवाल के साथ ही पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि उक्रांद न केवल राज्य स्थापना से इस मुद्दे पर मुखर है, बल्कि राज्य बनने के बाद उनके दबाव में ही तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार बाहरी लोगों को 500 वर्ग मीटर भूमि खरीदने की अनुमति वाला बेहद लचर भूकानून लाई और बाद में उक्रांद के सरकार में शामिल रहते खंडूड़ी सरकार ने इस सीमा को 250 वर्ग मीटर करते हुए अपेक्षाकृत कड़ा बनाया।

उन्होंने राज्य की पिछली त्रिवेंद्र सरकार पर भूकानून को पूरी तरह से भोथरा कर देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में उक्रांद ने सरकार की अनुमति पर बाहरी लोगों को राज्य में भूमि खरीदने का प्रस्ताव दिया था, किंतु अब उक्रांद अपने इस प्राविधान को भी नहीं चाहती है, बल्कि पार्टी की मांग है कि ऐसा भूकानून बने, जिसमें सरकार भी किसी बाहरी व्यक्ति को भूमि खरीदने की अनुमति न दे पाए। उन्होंने धारा 371 में संशोधन करते हुए 1980 के पूर्व से राज्य में रहने वाले लोगों को ही राज्य के मूल निवासी के रूप में मूल निवास प्रमाण पत्र दिलाने और उनके अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति को राज्य में भूमि न खरीद पाने का प्राविधान करने की मांग भी की।

रविवार को नैनीताल क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में उक्रांद नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की मांग के पीछे उत्तराखंड का पूर्ववर्ती राज्य उत्तर प्रदेश से भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक विभेद मूल कारण था। भौगोलिग विभेद में जल, जंगल व जमीन आते हैं। जल व जंगल केंद्र के विषय हैं, जबकि जमीन राज्य का। इसलिए उक्रांद शुरू से भूकानून की मांग करता है, ताकि बाहरी भूमाफिया राज्य में जमीनें न खरीद पाएं। उन्होंने राज्य की भाजपा व कांग्रेस सरकारों पर भूमाफिया तथा खनन माफिया का दबाव होने का आरोप भी लगाते हुए कहा कि इस कारण ही राज्य में पूर्व में बने भूकानून कभी भी प्रभावी नहीं हो पाए। पत्रकार वार्ता में पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चंद्रशेखर कापड़ी, प्रकाश पांडे, अंबा दत्त बवाड़ी, खीम राज सिंह, पान सिंह सिजवाली, कुलदीप सिंह व हरीश वारियाल आदि पार्टीजन भी मौजूद रहे।

पूछा-क्यों 6 वर्ष से राज्यपाल के पास पड़ा है राज्य आंदोलनकारियों संबंधी विधानसभा में पारित प्रस्ताव
नैनीताल। पत्रकार वार्ता में उक्रांद नेताओं ने सरकार को राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी से निकालने व पेंशन बंद करने के मुद्दे पर कहा कि इन मुद्दों से छेडछाड़ बिल्कुल भी बर्दास्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सरकार पर इन मुद्दों पर उच्च न्यायालय में ठीक से पैरवी न करने का आरोप लगाया, साथ ही राज्य आंदोलनकारियों को सरकार की नौकरियों में 10 फीसद आरक्षण देने के पिछले कांग्रेस सरकार के दौरान विधानसभा में पारित प्रस्ताव को पिछले करीब 6 वर्षों से राज्यपाल के पास लंबित पड़े रहने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार यदि मुद्दों को छेड़ती है तो जबर्दस्त राज्यव्यापी विरोध के लिए तैयार रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : चुनाव करीब आते उक्रांद भी जागी, कई लोगों ने ग्रहण की सदस्यता..

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 फरवरी 2021। अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनावों से पहले शांत पड़ा उत्तराखंड क्रांति दल भी सक्रिय होता नजर आ रहा है। सोमवार को पार्टी की रीति-नीति से प्रभावित होकर कई लोगों ने पार्टी के पूर्व विधायक एवं पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष डा. नारायण सिंह जंतवाल के समक्ष पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सदस्यता ग्रहण करने वालों में डा. भुवन चंद्र आर्य, महरोड़ा के उप प्रधान भगवत मेहरा, ओखलकांडा के सामाजिक कार्यकर्ता भुवन चंद्र, लीलाधर आर्य, पूर्व छात्र नेता चंदन बिष्ट, बेलुवाखान के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हरेंद्र बिष्ट व सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश बिष्ट प्रमुख रहे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डा. जंतवाल ने कहा कि राज्य में सत्ता राजनीतिक दलों के आमोद-प्रमोद का माध्यम बन गई है। राज्य में पिछले 20 वर्षों से केंद्र से संचालित सरकारें काबिज हैं। इस कारण राज्य का विकास पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे उलट उक्रांद सत्ता को लोगों के जीवन के कष्टों के निवारण का साधन मानती है। इस मौके पर प्रकाश पांडे, खीम सिंह, कमलेश पांडे, दल के उपाध्यक्ष भुवन जोशी, केएन जोशी, केसी उपाध्याय, भूपाल करायत, कुलदीप सिंह, वीरेंद्र जोशी, मनोज साह, पान सिंह सिजवाली, एलडी फुलारा, हरीश अधिकारी, प्रदीप राय, सज्जन साह, धीरेंद्र बिष्ट, नवीन जोशी, प्रताप सिंह, एनडी तिवारी, दिनेश सिंह व संजय साह आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : पुलिस चौकी प्रभारी से मारपीट करने वाले उक्रांद के जिला उपाध्यक्ष को नहीं मिली जमानत

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 सितंबर 2020। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने खुद को उत्तराखंड क्रांति दल का जिला उपाध्यक्ष बताने वाले हल्द्वानी के पीली कोठी इकोटाउन के सामने रहने वाले देवेश आर्या पुत्र रमेश आर्या की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मंगलवार को जेल में बंद आरोपित के जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि आरोपित ने गत 17 सितंबर की रात्रि शराब के नशे में हीरानगर पुलिस चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राजवीर नेगी से हाथापाई की थी। आरोपित ने उनके स्टार व कंधे के बैच उखाड़ फैंके। घटना तब हुई जब नेगी ने रात्रि करीब 12 बजे हल्द्वानी के सरगम सिनेमा के गेट की पार्किंग में रात्रि में बैठे शराब के नशे में धुत चार युवकों को टोका तो देवेश ने उनके साथ मारपीट की, जबकि अन्य लोग भाग गए थे। आरोपित के शराब के नशे में होने की भी पुष्टि हुई, जबकि चौकी प्रभारी के शरीर में दो गुम चोटें पाई गईं। इन तथ्यों पर अदालत ने आरोपित की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।

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यह भी पढ़ें : नैनीताल में अपने-अपने उक्रांद !

-एक धड़े ने महंगाई पर केंद्र सरकार के खिलाफ दिया धरना-दूसरा शामिल नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2020। नगर के उक्रांद कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने मंगलवार को तल्लीताल गांधी मूर्ति के पास केंद्र सरकार के खिलाफ महंगाई को लेकर प्रदर्शन किया। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोक सभा क्षेत्र से पिछले चुनाव में उक्रांद के चिन्ह चुनाव लड़े केएल आर्य के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ता हाथों में बढ़ते हुए घरेलू रसोई गैस के दामों में वृद्धि वापस लेने, अच्छे दिनों के छलावा होने जैसे नारे लिखे पोस्टर हाथों में लिये हुए थे और केंद्र सरकार के खिलाफ महंगाई व अन्य विषयों को लेकर तथा केंद्र सरकार पर गरीब विरोधी होने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी कर रहे थे। बाद में डीएम के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि वापस लेने और सिलेंडर का दाम 500 रुपए नियत करने की मांग की गई। प्रदर्शन में राज्य आंदोलनकारी लीला बोरा, राजेश कुमार, मोहन लाल, सुधीर कुमार, पवन कुमार, कौशिक कुमार, दीपक बिष्ट, हरीश पांडे, नजर अली, सुंदर बिष्ट, वीरेंद्र आर्य, जानकी देवी व एलडी पालीवाल आदि लोग मौजूद रहे।

उक्रांद के नगर के मूल कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल नहीं

नैनीताल। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोक सभा क्षेत्र से पिछले चुनाव में उक्रांद के चिन्ह चुनाव लड़े केएल आर्य के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में नगर के उक्रांद कार्यकर्ता मौजूद नहीं दिखे। इस बारे में जब उक्रांद के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष डा. नारायण सिंह जंतवाल से बात की गई तो उन्होंने व्यस्तता बताकर बाद में बात करने की बात कही। वहीं अन्य कार्यकर्ता भी कुछ कहने से बचते दिखे। दबी जुबान कहा, यहां सबका अपना-अपना उक्रांद है।

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-नैनीताल-ऊधमसिंह नगर से घोषित प्रत्याशी नहीं करा पाये नामांकन
-अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ से घोषित व नामांकन कराने वाले नैनीताल निवासी प्रत्याशी उक्रांद के कार्यकर्ता ही नहीं
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 मार्च 2019। राज्य का सबसे पुराना व राज्य निर्माण की अवधारणा से जुड़ा क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल यानी उक्रांद लगातार जमीन खोता जा रहा है। दल ने इधर लोक सभा चुनाव से पूर्व अपने चुनाव चिन्ह कुर्सी को प्राप्त करने से मिली मनोवैज्ञानिक बढ़त को भी खासकर कुमाऊं मंडल में जानबूझकर खो दिया है। पहले नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट से पार्टी के वरिष्ठ व संस्थापक नेता काशी सिंह ऐरी को प्रत्याशी बनाने की बात कही गयी थी, लेकिन घोषणा नैनीताल निवासी विजय पाल सिंह चौधरी के नाम की हुई, और वे भी देर से पहुंचने के कारण नामांकन ही नहीं करा पाये। जबकि अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ से पार्टी ने नैनीताल निवासी केएल आर्य को टिकट दिया है, जो कि कभी भी उक्रांद के कार्यकर्ता नहीं रहे, बल्कि कांग्रेस के करीब रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आर्य ने कांग्रेस से टिकट मांगा था, लेकिन बाद में निर्दलीय चुनाव लड़े थे।

उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में नैनीताल सीट से उक्रांद के घोषित उम्मीदवार तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण भी नामांकन पत्र खरीदने के बाद भी नामांकन नहीं कर पाये, बावजूद केएल आर्य उक्रांद से चुनाव लड़ने के बजाय निर्दलीय चुनाव लड़े थे। खास बात यह भी है कि अल्मोड़ा में जिन अन्य 6 प्रत्याशियों से उनका मुकाबला है उनमें उक्रांद-डी गुट की प्रत्याशी भी अभी मैदान में हैं।

गलतियों से भरा है उक्रांद का राजनीतिक इतिहास

नैनीताल। 25 जुलाई 1979 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. डीडी पंत, उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बड़ौनी व विपिन त्रिपाठी सरीखे नेताओं के द्वारा उक्रांद की स्थापना की गयी थी। राज्य बनने से पूर्व प्रभावी भूमिका में रहे दल के प्रमुख चेहरे काशी सिंह ऐरी उत्तर प्रदेश विधानसभा में 1985, 1989 व 1993 में यानी लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधायक रहे। लेकिन 1994 के राज्य आंदोलन के चरम के दौर में 1996 का लोक सभा चुनाव का बहिस्कार करने का बड़ा दाग भी उक्रांद पर लगा। इस बीच 1995 में यह दल पहली बार दो हिस्सों में भी बंटा और विघटन का सिलसिला आगे भी जारी रहा। उक्रांद में वर्तमान राजनीति के लिहाज से राजनीतिक चातुर्य या तिकड़मों की कमी मानें या कुछ और पर सच्चाई यह है कि वह अपने गठन से ही गलतियों पर गलतियां करता जा रहा है, और इन्हीं गलतियों का ही परिणाम कहा जाऐगा कि वह दशकों तक प्रदेश का एकमात्र क्षेत्रीय दल होने के बावजूद अब राज्य विधानसभा में शून्य पर पहुंच गया है। राज्य गठन के पूर्व उक्रांद के नेता सपा से सांठ-गांठ करते दिखे और अलग राज्य का विरोध कर रहे कांग्रेस-भाजपा जैसी राज्य विरोधी ताकतों को संघर्ष समिति की कमान सोंपकर हावी होने का मौका दिया। और राज्य बनने के बाद भी 2007 में उसने भाजपा सरकार को समर्थन दिया और फिर समर्थन वापस लेकर तथा और 2012 में कांग्रेस सरकार को कमोबेश बिन मांगे समर्थन देकर अपनी राजनीतिक अनुभवहीनता का ही परिचय दिया। इस कवायद में दल दो टुकड़े भी हो गया। शायद यही कारण रहे कि राज्य बनने के बाद वह लगातार अपनी शक्ति खोता रहा।
राज्य बनने के बाद पहली निर्वाचित विधान सभा में उक्रांद के चार विधायक-ऐरी, जंतवाल, विपिन त्रिपाठी (उनकी मृत्यु के बाद उपचुनाव में पुत्र पुष्पेश त्रिपाठी) और त्रिवेंद्र पवार (बाद में अलग गुट बना लिया), 2007 में तीन विधायक-पुष्पेश, दिवाकर भट्ट और ओमगोपाल (दिवाकर और ओमगोपाल 2012 के चुनाव में भाजपा से और 2017 का चुनाव निर्दलीय लड़ें) और 2012 में केवल एक विधायक प्रीतम सिंह पवार (कांग्रेस सरकार में मंत्री रहेे) जीते, यानी लगातार उसकी विधायक संख्या एक-एक कर विधानसभा में भी घटती चली गयी। यह भी रहा कि तीन में से दो बार दल ने वैचारिक भिन्नता के बावजूद कमोबेश बिना समर्थन मांगे भी सत्तारूढ़ दलों से हाथ मिलाया, और उसके निर्वाचित विधायक अपने नेतृत्व के प्रति कमोबेश बेलगाम हुए, और पार्टी से अलग चलते रहे।
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उत्तराखंड क्रांति दल से चुनाव चिन्ह व प्रत्याशियों पर बड़ी खबर, नैनीताल से दो प्रत्याशी घोषित…

नवीन समाचार, देहरादून, 25 मार्च 2019। उत्तराखंड क्रांति दल ने प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। वहीं पार्टी को उनका चुनाव चिह्न कुर्सी भी वापस मिल गया है। घोषित प्रत्याशियों में शांति भट्ट ने पौड़ी सीट से नामांकन कर लिया है। जबकि चार सीटों पर उसके प्रत्याशी सोमवार को नामांकन करेंगे। पार्टी ने नैनीताल से पूर्व में घोषित काशी सिंह ऐरी की जगह पहले भी पार्टी से चुनाव लड़े नैनीताल निवासी चौधरी विजय पाल को, जबकि अल्मोड़ा से नैनीताल निवासी व पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट मांग रहे व न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़े उत्तराखंड देवभूमि क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष केएल आर्य को टिकट दिया है। आर्य ने गत दिवस अल्मोड़ा से टिकट न मिलने पर नैनीताल से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।

पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। इसमें पौड़ी से शांति भट्ट, टिहरी से डीडी शर्मा, हरिद्वार से सुरेंद्र कुमार, अल्मोड़ा से केएल आर्य, नैनीताल से चौधरी विजय पाल को चुनाव मैदान में उतारा है। पार्टी के संरक्षक काशी सिंह एरी, पुष्पेश त्रिपाठी, दिवाकर भट्ट, बीडी रतूड़ी, त्रिवेंद्र पंवार को पार्टी ने स्टार प्रचारक बनाया है। भट्ट ने कहा कि जिस मकसद से राज्य गठन की लड़ाई लड़ी गई थी, वह पूरे नहीं हुए हैं।

यह भी पढ़ें : अब भाजपा-कांग्रेस की राह पर मंदिर-मस्जिद की ओर चला उत्तराखंड का यह क्षेत्रीय दल

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 फरवरी 2019। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद अपनी स्थापना का लक्ष्य प्राप्त कर अपनी आगे की राजनीति के लिए रीति-नीति खो चुका उत्तराखंड का सबसे पुराना राजनीतिक दल अब उन भाजपा-कांग्रेस की राह पर आ गया लगता है, जिनके विरोध का वह दंभ भरता है। सत्ता के लिए बिन मांगे भी इन दोनों ही दलों की गोद में बैठ चुके उक्रांद कार्यकर्ता शनिवार को चाहे-अनचाहे अपने प्रदेश नेतृत्व के तय कार्यक्रम पर मंदिर-मस्जिद की दौड़ लगाते दिखे।

भाजपा सरकार पर राज्य में उद्योगों के बहाने पहाड़ की बेशकीमती जमीनों को औने-पौने दाम पर लुटाने तथा राज्य की नौकरियों में आवेदन के लिए रोजगार कार्यालय में पंजीकरण की अनिवार्यता को समाप्त करने के फैसले के विरोध में उक्रांद संभवतया अपनी स्थापना के बाद के इतिहास में पहली बार देवी-देवताओं ही नहीं दरगाह भी पहुंच गया। शनिवार को पूरे प्रदेश में धार्मिक केंद्रों के पास उक्रांद कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम के जरिये विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान नैनीताल मुख्यालय में जिले भर से आये कार्यकर्ताओं मल्लीताल स्थिर नगर की आराध्य नयना देवी के मंदिर के बाहर पूर्व केंद्रीय जिलाध्यक्ष व पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। डा. जंतवाल ने इस मौके पर कहा कि भाजपा सरकार को इन स्थितियों पर सद्बुद्धि आये, इस उद्देश्य से यह प्रदर्शन पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, डा. सुरेश डालाकोटी, प्रकाश पांडे, मोहन चमियाल, विनोद कुमार, प्रेम कुल्याल, इंद्र नेगी, हरेन्द्र बिष्ट, रघुबीर जंतवाल, दीवान सिंह खनी, पान सिंह खनी व अम्बा दत्त बवाड़ी व लीला बोरा सहित बड़ी संख्या में उक्रांद कार्यकर्ता मौजूद रहे। वहीं पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डीके पाल ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसी कार्यक्रम के तहत शनिवार को पिरान कलियर शरीफ में साबरी साहब की दरगाह पर एक दिवसीय उपवास का आयोजन किया और चादर चढ़ाकर उत्तराखंड की भाजपा सरकार की बुद्धि-शुद्धि की दुवा मांगी। कहा कि राज्य की भाजपा सरकार दिल्ली के नेताओं की सुनने के स्थान पर उत्तराखंड की जनता के लिए कार्य करे और उत्तराखंड की जनता को नशा नहीं रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य की स्थानीय स्तर पर व्यवस्था करे।

पूर्व आलेख : हमेशा गलतियों का इतिहास दोहराता रहा है उक्रांद

पार्टी के बिन मांगे कांग्रेस को समर्थन देने से आश्चर्यचकित नहीं राज्य आंदोलनकारी, भाजपा-कांग्रेस की तरह ही कुर्सी प्रेमी साबित हुई उक्रांद

नवीन जोशी, नैनीताल, 14 मार्च 2012। कहते हैं इतिहास स्वयं को दोराता है, साथ ही यह ही एक सच्चाई है कि इतिहास से मिले सबकों से कोई सबक नहीं सीखता। राज्य के एकमात्र क्षेत्रीय दल बताये जाने वाले उत्तराखंड क्रांति दल यानी उक्रांद ने इतिहास को इसी रूप में सही साबित करते हुऐ अपनी गलती का इतिहास दोहरा दिया है। ऐसे में ऐसी कल्पना तक की जाने लगी है कि पिछली बार की तरह सरकार को समर्थन देने वाला उक्रांद इस बार भी एक दिन सरकार से समर्थन वापस लेगा और सत्ता सुख भोग रहे उसके एकमात्र विधायक पिछली सरकार के दो विधायकों की तरह इस फैसले को अस्वीकार करते  हुऐ अलग उक्रांद बना लेंगे और फिर अगले चुनावों में कांग्रेस के चुनाव पर टिकट ल़कर इस बार पार्टी का अस्तित्व ही शून्य कर देंगे। (उल्लखनीय है कि यह आशंकाएं बाद में शब्दशः सही भी साबित हुईं )

यह आशंकाऐं उक्रांद के कांग्रेस सरकार को बिना मांगे और बिना अपनी शर्तें बताऐ समर्थन देने के बाद उठ खड़ी हुई हैं। और बसपा के भी सरकार को समर्थन की घोषणा करने  के बाद तो सरकार बनने से पले ही उक्रांद की स्थिति सरकार को समर्थन दे रहे निर्दल विधायकों से भी बदतर होने की चर्चाऐं होने लगी हैं। ऐसा लगने लगा है कि अपने हालिया राजनीतिक निर्णयों से उक्रांद ने न केवल राज्य की जनता वरन राज्य की आंदोलनकारी शक्तियों का विश्वास भी खो दिया है। राज्य आंदोलन से गहरे जु़ड़े वरिष्ठ रंगकर्मी जहूर आलम कहते हैं, उन्हें उक्रांद के हालिया कदमों से कोई आश्चर्य नहीं हुआ है। इस पार्टी ने राज्य बनने से पूर्व ही प्रदेश की सबसे बड़ी दुश्मन बताई जाने वाली सपा से सांठ-गांठ कर अपने कुर्सी से जु़ड़े रहने के मंसूबे जाहिर कर दिये थे। यही उसके दो विधायकों ने पिछली भाजपा सरकार को और अब जनता से और भी बुरी तरह ठुकराये जाने के बाद एकमात्र विधायक के भरोसे कांग्रेस सरकार को अपनी अस्मिता को भुलाते हुऐ समर्थन देकर प्रदर्शित किया है। उक्रांद को यदि समर्थन देना ही था तो राज्य की अवधारणा से जु़ड़े मुद्दों को शर्तों में आगे रखना चाहिऐ था। उन्होंने कहा कि वास्तव में अब उक्रांद किसी राजनीतिक विचारधारा वाला दल नहीं वरन कुछ सत्ता लोलुप लोगों का जेबी संगठन बनकर रह गया है। राज्य आंदोलनकारी एवं गत विस चुनावों में उक्रांद क¢ स्टार प्रचारक घोषित किये गये वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक समालोचक राजीव लोचन साह की राय भी इससे जुदा नहीं है। उनका कहना है बसपा के समर्थन देने से पूर्व उक्रांद के पास एकमात्र विधायक होने के बावजूद अपनी मांगें रखने का बेहतरीन मौका था। उक्रांद के कदम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि जो पिछली बार दिवाकर भट्ट या तत्कालीन अध्यक्ष ने जो किया था, वही इस बार त्रिवेंद्र पंवार ने कर दिया। पूरी आशंका है कि इतिहास स्वयं को दोहराये और उक्राद अपनी शक्ति तीन विधायकों से एक करने के बाद आगे शून्य न हो जाऐ। इससे बेतहर होता कि वह आगामी पंचायत तथा अन्य चुनावों के साथ अपने संगठन और शक्ति का विस्तार करता। पद्मश्री शेखर पाठक ने भी उक्रांद  के हालिया कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुऐ कहा कि उक्रांद ने अपने इन कदमों से स्वयं के साथ ही उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी व उत्तराखंड रक्षा मोर्चा जैसे से जैसे अन्य क्षेत्रीय दलों की भी जनता के बीच विश्वसनीयता क्षींण कर दी है। उन्होंने कहा कि पहले दिवाकर भट्ट ने उत्तराखंड की जनता से दगा किया, और अब फिर यही दोहराया गया है। बेहतर होता कि वह अगले पांच वर्ष मेहनत कर भाजपा-कांग्रेस से स्वयं को बेहतर विकल्प बनाने की शक्ति हासिल करते।

राज्य के राजनीतिक दल की मान्यता खो देगा उक्रांद

नैनीताल। भारत निर्वाचन आयोग के नये प्राविधानों के अनुसार किसी पार्टी के लिये किसी राज्य की राज्य स्तरीय राजनीतिक पार्टी होने के लिये हर 3 सीटों में से एक सीट जीतनी आवश्यक है तथा प्रदेश में पड़े कुल वैध मतों का छः फीसद हिस्सा भी उसे हासिल होना चाहिऐ। इस आधार पर 70 विस सीटों वाले उत्तराखंड में किसी राजनीतिक दल को राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिये दो से अधिक यानी तीन विधायक जीतने चाहिऐ। जो उक्रांद नहीं कर पाया है। इस आधार पर उससे राज्य की राजनीतिक पार्टी का तमगा छिनना कमोबेश तय है।

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