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एफटी हाउस ने जीती शेरवुड कॉलेज की प्रतिष्ठित कॉक हाउस ट्रॉफी

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-अभिनय व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के कैंडल कप सहित सभी पुरस्कार अपूर्व गौरव विक्रम शाह ने जीते
-साथ ही शेरवुड कॉलेज ने किया अपनी प्रतिभाओं का सम्मान

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जून 2019। देश ही नहीं दुनिया भर में श्रेष्ठ विद्यालयों में गिने जाने वाले सरोवरनगरी के अत्यंत गौरवशाली अतीत वाले सुप्रसिद्ध शेरवुड कॉलेज के 150वें वार्षिकोत्सव के चार दिवसीय कार्यक्रमों के तहत बृहस्पतिवार को अपनी प्रतिभाओं को सम्मानित किया। वहीं विद्यालय की प्रतिष्ठित कॉक हाउस ट्रॉफी एफटी यानी फ्रायर टक हाउस ने जीती। जबकि अभिनय व वाद-विवाद प्रतियोगिता के कैंडल कप सहित सभी पुरस्कार अमिताभ बच्चन के साथ मंच साझा कर चुके एवं उनसे प्रशंसा प्राप्त कर चुके अपूर्व गौरव विक्रम शाह ने जीते। साथ ही विद्यालय में वार्षिकोत्सव कार्यक्रमों के दौरान पूरे चार दिन रुके रहे 1969 बैच के छात्र रहे व 50 वर्ष बाद विद्यालय में लौटे भारतीय फिल्मोद्योग के जाने-पहचाने नाम दिलीप ताहिल, सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल सुमित मुखर्जी, मेजर जनरल हरकीरत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल दिलीप भारद्वाज, एसआईटी लखनऊ के डीजीपी आरपी सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस आलोक शील, हॉलीवुड प्रोड्यूसर अलेंक्जेंडर सौड़ी आदि को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान पूर्व छात्र बच्चों से बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन करने एवं अपने विद्यालय में बिताये दिनों का याद करते दिखे, वहीं दिलीप ताहिल सहित सभी ने प्रधानाचार्य अमनदीप संधू का इस गौरवमय आयोजन में आने का मौका देने के लिए आभार ज्ञापित किया।
इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं व आयोजनों के विजेताओं के साथ ही कक्षा सात के अचिंत्य प्रताप सिंह, अनमोल गुप्ता, अरिंदम मिश्रा, आरना लाम्बा, अगम अरोड़ा, देवांश अग्रवाल, पार्थ अग्रवाल, सिद्धार्थ चौधरी व अमित विक्रम त्रिपाठी, आठ के आकिब वारिस, मो. शारिक, सक्षम, सौरभ, विराट गुलाटी, युवा वीरेंद्र, इंद्रजोत अरोड़ा, सुजल शाह, तेजप्रताप गिल, पार्थ गोयल, प्रत्यूष रॉय, अभिनव जायसवाल, आयुष डेविड, परमिंदर खरबंदा, यशवर्धन सिंह, श्रुति शाह, फातिमा जैरा इमाम, व्याख्या मजवार, यश भारद्वाज, क्रिशिभ बेरीवाल, निशांत विश्नोई, रेमंजीत सिंह व मिहिर लक्ष्यमानी, कक्षा नौ के अभिजीत सिंह, वेदांत अग्रवाल, आर्यन अग्रवाल, रौनक जायसवाल, वसुमन वर्मा, सोमिल कपूर व आदित्य गुप्ता, कक्षा 10 के पीयूष मंगलम बजाज, विस्मय गुप्ता, आयुष अग्रवाल, शोभित वर्मा, सुशांत मित्तल व सुमेश कुर्मी तथा कक्षा 11 के मो. समीर, धीरज ओली, ओजस टिंकरी, गगनदीप सिंह थांडी को अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही प्रधानाचार्य अमनदीप संधू पूरे आयोजन के लिए सभी का आभार जताया। आयोजन में आराधना संधू, हेम पांडे, बासु साह, मुकुंद कुमैया, गोपाल पाल आदि ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

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-बॉलीवुड अभिनेता दिलीप ताहिल ने भी सुनाये ‘ये नयन डरे डरे’ सहित तीन गीत
-150वें वार्षिकोत्सव में शेरवुड कॉलेज में जूनियर कक्षाओं के बच्चों ने नाटक पेश कर किया दर्शकों को प्रभावित

शेरवुड कॉलेज के 150वें वार्षिकोत्सव में अभिनेता दिलीप ताहिल से मिलती राज्यपाल बेबी रानी मौर्य।

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जून 2019। देश ही नहीं दुनिया भर में श्रेष्ठ विद्यालयों में गिने जाने वाले सरोवरनगरी के अत्यंत गौरवशाली अतीत वाले सुप्रसिद्ध शेरवुड कॉलेज के 150वें वार्षिकोत्सव के चार दिवसीय कार्यक्रमों के तहत बुधवार को जूनियर कक्षाओं के बच्चों ने नाटक प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य भी विद्यालय के वार्षिकोत्सव में पहुंचीं। इस मौके पर श्रीमती मौर्य ने कहा कि स्कूलों की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। देश का भविष्य शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर है। भारत की शिक्षा में परम्पराओं, संस्कारों व संस्कृति को महत्व दिया गया है। सिर्फ किताबी ज्ञान या प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। बच्चे देश के अच्छे नागरिक बनें, अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझें और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। बच्चों केा आधुनिक गैजेट्स के युग में पुस्तकों के महत्त्व को नहीं भूलना चाहिये। बच्चों को महापुरुषों के जीवन पर लिखी गई प्रेरणादायक पुस्तकें अवश्य पढ़नी चाहिए।
इससे पूर्व सुबह सुबह ‘क्वायर सिंगिग’ यानी समूह गायन में बॉलीवुड अभिनेता दिलीप ताहिल ने भी पुराने दौर के दो अंग्रेजी शास्त्रीय गीत एवं हेमंत कुमार का सुप्रसिद्ध गीत ‘ये नयन डरे डरे’ सुनया। आगे सीनियर स्कूल के बच्चों ने कॉमेडी नाटक ‘द गेम ऑफ लव एंड चांस’ प्रस्तुति किया, जबकि अपराह्न में मिडिल स्कूल के बच्चों ने डांस प्रोडक्शन के तहत नृत्यों एवं गीतों की प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज तिवारी, भारतीय फिल्मोद्योग के जाने-पहचाने नाम दिलीप ताहिल, सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल सुमित मुखर्जी, मेजर जनरल हरकीरत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल दिलीप भारद्वाज, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, एसआईटी लखनऊ के डीजीपी आरपी सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस आलोक शील, हॉलीवुड प्रोड्यूसर अलेंक्जेंडर सौड़ी, जिला जज नैनीताल नरेन्द्र दत्त एवं प्रधानाचार्य अमनदीप संधू आदि उपस्थित रहे। आयोजन में आराधना संधू, हेम पांडे, बासु साह, मुकुंद कुमैया, गोपाल पाल आदि ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

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-150वें वार्षिकोत्सव में शेरवुड कॉलेज में धमाल, 50 वर्ष बाद अमेरिका, आष्ट्रेलिया, कनाडा व जमैका आदि देशों से पहुंचे सिने अभिनेता दिलीप ताहिल सहित 1969 बैच के 25 छात्र

-50 वर्ष पुराने पूर्व छात्र-सैन्य अधिकारियों ने कहा बच्चों की प्रस्तुतियां देखकर उन्हें पक्का विश्वास हो गया है कि शेरवुड द्वारा दी जा रही शिक्षा से बच्चे उनके जैसा ही बन पाएंगे
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जून 2019। देश ही नहीं दुनिया भर में श्रेष्ठ विद्यालयों में गिने जाने वाले सरोवरनगरी के अत्यंत गौरवशाली अतीत वाले सुप्रसिद्ध शेरवुड कॉलेज के 150वें वार्षिकोत्सव के चार दिवसीय कार्यक्रमों के तहत मंगलवार को दूसरे दिन नाटक ‘वंडरलेंड’ सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं रात्रि में विद्यार्थियों ने मशालों की रोशनियों के साथ गजब का प्रदर्शन करते हुए विद्यालय के लोगो व 150 वर्ष पूरे होने को प्रस्तुत कर कार्यक्रम को गौरवपूर्ण बना दिया।
इस दौरान बच्चों ने प्रार्थना के दौरान मिलकर ‘क्वायर सिंगिंग’ यानी सामूहिक गायन किया। आगे अनेक फेयरी टेल्स यानी परियों की कहानियों को जोड़कर अंग्रेजी नाटक बंडरलैंड की सुन्दर प्रस्तुति दी गई। नाटक में पार्वती नौटियाल, उत्कर्ष साह, किरन मिश्रा, सुचिता साह, स्टैजिन, लक्ष्मी चौहान, रुहानिका गुलाटी, अनुष्का सिंह, हरजीन बग्गा व श्रवण महरा आदि ने सैकड़ों लोगों की भीड़ के समक्ष जिस विश्वास के साथ बिना अटके हुए संवाद अदायदी करते हुए सजीव अभिनय किया, उससे दिलीप ताहिल जैसे बॉलीवुड में 150 से अधिक फिल्में कर चुके अभिनेता खड़े होकर ‘वाह-वाह’ बोल उठे और तालियां बजाईं।
वहीं पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि बच्चों में उन्हें अपना अक्श दिखाई दिया है। बच्चों की प्रस्तुतियां देखकर उन्हें पक्का विश्वास हो गया है कि शेरवुड कॉलेज द्वारा उन्हें दी जा रही शिक्षा बच्चों को उनके जैसा ही बनाएगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया। आगे रात्रि में जलती मशालों के साथ ‘नाइट पीटी’ हमेशा की तरह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व पहले दिन बच्चों ने रोबोटों सहित मॉडलों व प्रोजेक्टों, तथा आग के गोलों के बीच से स्केटिंग व जिम्नास्टिक का प्रदर्शन करते एवं तरणताल में लयबद्ध तैराकी के अनेक हैरतअंगेज प्रदर्शन कर आगंतुकों को अपनी प्रतिभा का प्रशंसक बना लिया था। प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने सभी अतिथियों का स्वागत कर उनका आभार प्रकट किया।
उल्लेखनीय है कि आयोजन में 1969 बैच के छात्र रही हॉलीवुड, बॉलीवुड एवं भारतीय सेना सहित अनेकानेक क्षेत्रों की करीब 25 हस्तियां भारत के साथ ही अमेरिका, आष्ट्रेलिया, कनाडा व जमैका आदि देशों से विद्यालय पहुंची हैं। इनमें फ्रांस से पहुंचे हॉलीवुड की मैट्रिक्स व एक्समैन आदि फिल्मों में अपने स्पेशल इफेक्ट्स का जौहर दिखा चुके हॉलीवुड प्रोड्यूसर अलेंक्जेंडर सौड़ी, भारतीय फिल्मोद्योग के जाने-पहचाने नाम दिलीप ताहिल, सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल सुमित मुखर्जी, मेजर जनरल हरकीरत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल दिलीप भारद्वाज, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, एसआईटी लखनऊ के डीजीपी आरपी सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस आलोक शाल सहित आगंतुकों की लंबी श्रृंखला हैं। आयोजन में आराधना संधू, हेम पांडे, बासु साह, मुकुंद कुमैया, गोपाल पाल का योगदान उल्लेखनीय रहा है।

देखें तस्वीरें : रात्रि में शेरवुड कॉलेज के वार्षिकोत्सव में कैसा हुआ रोशनियों का धमाल

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-पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा पर गये थे, किंतु स्वास्थ्य खराब हो जाने से अल्मोड़ा से वापस लौटना पड़ा, और एक्टिंग में आये और पहले ही नाटक से जीता अमिताभ की तरह ही कैंडल कप

अपने सहपाठियों के साथ अभिनेता दिलीप ताहिल।

नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जून 2019। यह अब करीब सर्वविदित हो चुका है कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने ‘कला की नगरी’ कही जाने वाली सरोवरनगरी के शेरवुड कॉलेज से अभिनय का ककहरा सीखा था। यहीं उन्होंने 1956 में अपने जीवन का पहला नाटक ‘द गर्वर्नमेंट इंस्पेक्टर’ किया था और विद्यालय का अभिनय के लिये दिया जाने वाला ‘कैंडल कप’ जीता था। हालांकि कबीर बेदी, एक्टर राम कपूर सहित कई अन्य कलाकार भी शेरवुड से पैदा हुए लेकिन अमिताभ जैसी ही कुछ कहानी एक अन्य बॉलीवुड कलाकार दिलीप ताहिल की भी है। पिछले करीब 45 वर्षों से फिल्मी दुनिया में तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद जमे और करीब 150 फिल्में कर चुके और आगे भी फिल्में कर रहे दिलीप एवं उनके सहपाठी मित्रों ने उनके कलाकार बनने के राज को मंगलवार को शेरवुड कॉलेज आकर साझा किया।

एक्सीडेंटली एक्टर बने

शेरवुड कॉलेज में अपनी 5बी के कक्षा कक्ष में अभिनेता दिलीप ताहिल।

कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन एक्टिंग की दुनिया में आना नहीं चाहते थे, बल्कि कोई नौकरी करना चाहते थे। लेकिन शेरवुड में मिले पहले मौके से अभिनेता बन गये। कुछ ऐसा ही शेरवुड में दिलीप ताहिल के साथ ही हुआ। दिलीप ने बताया कि वे 1962 में शेरवुड कॉलेज में पांचवी कक्षा में आये थे। आज वे अपनी 5बी की उसी कक्षा में जाकर भी बेहद रोमांचित हुए। बेहद भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि 1962 में उनकी माता शेरवुड कॉलेज के हॉर्समैन विंग में छोड़कर चली गयी थीं, और 1969 में आईएससी (10वीं) करके वे यहां से लौटे। इसलिए शेरवुड और नैनीताल से उनकी जड़ें जुड़ी हुई हैं। इस बीच यहां मिलमैन हॉल में कई बार क्वायर यानी सामुहिक गीत गाये। बताया कि उन दिनों शेरवुड कॉलेज में जेफ्री कैंडल (अभिनेता शशि कपूर के बाद में ससुर बने), जेनिफर कैंडल व मार्कुस मर्च की ‘शेक्सपियराना’ नाम की थियेटर कंपनी यहां आती थी। उन दिनों शेरवुड के छात्र हर वर्ष पर्वतारोहण पर जाते थे, और लौटने पर उनका नायकों की तरह स्वागत होता था। बकौल दिलीप हीरो बनने की कोशिश में वे भी 1968 में पिंडारी ग्लेशियर के एक्सपडिशन पर गये थे, किंतु रास्ते में स्वास्थ्य खराब हो जाने पर उन्हें अल्मोड़ा से वापस लौटा दिया गया। लौटने पर वे दो दिन कॉलेज के अस्पताल में रहे। इस दौरान सभीबच्चे अनेक कार्यक्रमों में भाग ले रहे थे। इस पर उन्हें मायूस देखकर अंग्रेजी के शिक्षक मिस्टर लूथर ने उन्हें नाटक में जाने की सलाह दी। इत्तफाक से उन्हें नाटक ‘माई थ्री एंजेल्स’ में मुख्य किरदार मिल गया और इस नाटक ने वही कैंडल कप भी जीता, जिसे अमिताभ बच्चन 1958 में जीत चुके थे। इस प्रकार दिलीप कहते हैं कि वह ‘एक्सीडेंटली एक्टर’ बने थे, और शेरवुड से मिले कभी हार न मानने के जज्बे के कारण ही पिछले 45 वर्षों से फिल्म जगत में हैं। वहीं उनके दोस्तों दीपक खन्ना, दीपक सिन्हा, दीपक सूता, विजय मेंहदीरत्ता आदि ने बताया कि इसके अगले वर्ष 1969 में जब शेरवुड कॉलेज अपनी स्थापना के 100 वर्ष का समारोह मना रहा था, उस वर्ष दिलीप शेरवुड कॉलेज के कैप्टन थे और इस वर्ष भी उन्होंने शैक्सपियर के नाटक ‘मैकबेथ’ के लिए कैंडल कप जीता था।

जो कुछ हूं, शेरवुड की वजह से हूं: दिलीप ताहिल

नैनीताल। दिलीप ताहिल ने कहा, बहुत से लोग उनसे और वे स्वयं से पूछते हैं कि वे कैसे पिछले 40-45 वर्षों से फिल्मी दुनिया में हैं। इस पर उनका जवाब होता है, शेरवुड। वे कहते हैं शेरवुड उनमें और उनकी सोच में है। यह सोच है, कभी हार न मानने का जज्बा। साथ ही व्यक्तिगत तथा समग्र तौर पर एक टीम के रूप में कार्य करना। इस सोच और जज्बे के कारण ही शेरवुड ने देश को पहले सेनानायब सैम मानेकशॉ, देश के पहले परमवीर चक्र विजेता सोमनाथ शर्मा, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन तथा देश को सर्वाधिक सैन्य अधिकारी जैसी हस्तियां दी हैं। अकेले 1966 बैच के 19 छात्र सेना में शीर्ष अधिकारी रहे हैं। शेरवुड में मिले ज्ञान और सिद्धांतों ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है। उनके साथियों, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, आलोक शील, कर्नल डीके पठानिया, डेविड हरीश माया दास लखनऊ एसआईटी के डीजीपी आरपी सिंह, आष्ट्रेलिया से आये हॉलीवुड की सुप्रसिद्ध फिल्म मैट्रिक्स व एक्स मैन में स्पेशल इफेक्ट्स देने वाले एलेक्जेंडर सौड़ी ने कहा कि शेरवुड जिन बच्चों में काबिलियत नहीं होती, उनके हुनर को पहचानकर उनमें भी काबीलियत पैदा करता है।

150वें वार्षिकोत्सव में शेरवुड कॉलेज में धमाल, पहुंचे सिने अभिनेता दिलीप ताहिल

1969 बैच के करीब 25 छात्र 50 वर्षों के अंतराल के बाद भारत के साथ ही अमेरिका, आष्ट्रेलिया, कनाडा व जमैका आदि देशों से पहुंचे

शेरवुड कॉलेज के 150वें वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का फीता काटकर औपचारिक शुभारंभ करते कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला व सिने अभिनेता दिलीप ताहिल आदि।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। देश ही नहीं दुनिया भर में श्रेष्ठ विद्यालयों में गिने जाने वाले सरोवरनगरी के अत्यंत गौरवशाली अतीत वाले सुप्रसिद्ध शेरवुड कॉलेज के 150वें वार्षिकोत्सव के तीन दिवसीय कार्यक्रम सोमवार को प्रारंभ हो गये हैं। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने व्यक्तिगत एवं एक टीम के स्तर आपसी सामंजस्यपूर्वक बेहद रोमांचित कार्यक्रम प्रस्तुत किये। खासकर आग के घेरों के बीच बच्चों द्वारा की गयी स्केटिंग देखने योग्य थी। वहीं प्रदर्शनी में रोबोटों का प्रदर्शन एवं स्विमिंग में छात्र-छात्राओं द्वारा जिस तरह एक साथ एक-दूसरे से बराबरी की प्रतिस्पर्धा करते हुए प्रदर्शन किया, उसकी विद्यालय में आये 1969 बैच के 50 वर्ष बाद विद्यालय में लौटे सुप्रसिद्ध सिने अभिनेता दिलीप तालिल सहित अन्य पूर्व छात्रों ने भी मुक्त कंठ से सराहना की। विद्यार्थियों ने विज्ञान के साथ ही कला वर्ग के विभिन्न विषयों पर तैयार किये गये अपने प्रोजेक्टों के जरिये भी अपनी प्रतिभा एवं मेहनत का लोहा मनवाया।
इससे पूर्व वार्षिकोत्सव कार्यक्रमों को औपचारिक शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव राजीव रौतेला ने विशिष्ट अतिथि बॉलीवुड अभिनेता दिलीप ताहिल एवं अन्य के साथ किया। इस मौके के लिए 1969 बैच के छात्र रही हॉलीवुड, बॉलीवुड एवं भारतीय सेना सहित अनेकानेक क्षेत्रों की करीब 25 हस्तियां भारत के साथ ही अमेरिका, आष्ट्रेलिया, कनाडा व जमैका आदि देशों से विद्यालय पहुंचीं। इनमें फ्रांस से पहुंचे हॉलीवुड की मैट्रिक्स व एक्समैन आदि फिल्मों में अपने स्पेशल इफेक्ट्स का जौहर दिखा चुके हॉलीवुड प्रोड्यूसर अलेंक्जेंडर सौड़ी, भारतीय फिल्मोद्योग के जाने-पहचाने नाम दिलीप ताहिल, सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल सुमित मुखर्जी, मेजर जनरल हरकीरत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल दिलीप भारद्वाज, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, एसआईटी लखनऊ के डीजीपी आरपी सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस आलोक शाल सहित आगंतुकों की लंबी श्रृंखला है, जो शेरवुड कॉलेज के ही पूर्व छात्र रहे हैं। वहीं सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के भी कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना है, अलबत्ता उनके कार्यक्रम पर अभी संशय बना हुआ है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जून 2019। देश ही नहीं दुनिया भर में सुप्रसिद्ध सरोवरनगरी के अत्यंत गौरवशाली अतीत वाले 150वें वार्षिकोत्सव के गौरवपूर्ण पलों के अब कुछ भी क्षण शेष हैं, और इससे पूर्व ही देश ही नहीं विदेशों से भी हॉलीवुड, बॉलीवुड एवं भारतीय सेना सहित अनेकानेक क्षेत्रों की अनेक हस्तियां नगर में पहुंच चुकी हैं। इनमें फ्रांस से पहुंचे हॉलीवुड की कई फिल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखा चुके अलेंक्जेंडर सौड़ी, भारतीय फिल्मोद्योग के जाने-पहचाने नाम दिलीप ताहिल, एयर वाइस मार्शल सुमित मुखर्जी, मेजर जनरल हरकीरत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल दिलीप भारद्वाज, लेफ्टिनेंट जनरल अता हसनैन, एसआईटी लखनऊ के डीजीपी आरपी सिंह सहित आगंतुकों की लंबी श्रृंखला है, जो शेरवुड कॉलेज के ही पूर्व छात्र रहे हैं। वहीं सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी कार्यक्रम में पहुंचने की हामी भरी है, अलबत्ता उनके कार्यक्रम पर अभी संशय बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि शेरवुड कालेज को नगर के सबसे पुराने प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल के रूप में जाना जाता है। 1859 में यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में इस विद्यालय की स्थापना हुई थी। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, देश के पहले थल सेनाध्यक्ष जनरल सैम मानेकशॉ सहित कई जानी मानी हस्तियों को शिक्षा व अनुशासन के साथ चर्तुर्दिक ज्ञान की दीक्षा देने वाले इस विद्यालय का अपना डेढ़ शताब्दी लंबा गौरवशाली इतिहास रहा है। इस वर्ष यह विद्यालय अपनी 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के पड़ाव को बड़े आयोजन के साथ मनाने जा रहा है। एटकिंसन लिखित प्रतिष्ठित ‘हिमालयन गजेटियर’ में भी इस विद्यालय का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी प्रतिष्ठा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप दिनों दिन अत्याधुनिकता से कदमताल करता हुआ विद्यालय पठन-पाठन के साथ विद्यार्थियों के चतुर्दिक विकास के महायज्ञ में जुटा हुआ है। इस प्रगति का श्रेय निस्संदेह विद्यालय के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू की नेतृत्व क्षमता और अनुशासन प्रियता को जाता है, जिन्होंने ‘ब्रांड’ बन चुके ‘शेरवुडियन्स’ में पुरानी बेहतरीन छवि के साथ जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का नयां जज्बा और जोश भरा है। विगत वर्ष विद्यालय में पत्नी जया, पुत्र अभिषेक, बहु ऐश्वर्या के साथ पधारे महानायक अमिताभ बच्चन के साथ ही इस वर्ष उनके भाई अजिताभ बच्चन, बॉलीवुड-हॉलीवुड कलाकार कबीर बेदी से भी श्री संधू को इन्हीं गुणों के लिए दिल खोलकर मिली प्रशंशा से इसकी पुष्टि हो गई। इस वर्ष भी श्री बच्चन सहित अनेक हस्तियों के यहां पहुंचने की पूरी संभावना है।

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-कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्राथमिक व माध्यमिक पाठ्यक्रम होंगे शुरू

नैनीताल, 30 अक्तूबर 2018। देश-प्रदेश का प्रतिष्ठित, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के प्रतिष्ठित स्कूल शेरवुड कॉलेज के ताज में दुनिया की श्रेष्ठतम कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का ताज जुड़ गया है। शेरवुड कॉलेज को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के सीएआईई यानी कैंब्रिज एसेसमेंट इंटरनेशनल एजुकेशन से विश्वस्तरी आईजीसीएसई यानी इंटरनेशनल जनरल सर्टिफिकेट सेकेंडरी एजुकेशन के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर अपनी स्थापना के 150वें वर्ष में आगामी मार्च-अप्रैल माह से शुरू होने वाले नये सत्र से ‘ओ लेवल’ यानी 10वीं, ‘एएस लेवल’ यानी 11वीं और ‘ए लेवल’ यानी 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी मिल गयी है। इन पाठ्यक्रमों को पढ़ने के बाद शेरवुड के छात्रों को आगे विश्वविद्याय स्तरीय पढ़ाई अमेरिका, इंग्लेंड, आस्ट्रेलिया, कनाडा व जर्मनी सहित अन्य विकसित देशों से करने के लिए अतिरिक्त ‘क्रेडिट प्वॉइंट’ मिल जाएंगे। फलस्वरूप उन्हें वहां प्रवेश के लिए के अतिरिक्त कोर्स नहीं करने पड़ेंगे।

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मंगलवार को शेरवुड कॉलेज में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह बताते हुए उन्हें अत्यंत हर्ष एवं गर्व का अनुभव हो रहा है। कैंब्रिज के अंतराष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम विश्व’के 160 देशों के 10 हजार विद्यालयों में लागू हैं। यह पाठ्यक्रम 5 से 11 वर्ष के बच्चों को अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व अंतराष्ट्रीय जानकारी में छात्रों के कौशल एवं ज्ञान व अभिरुचि को बढ़ाकर छात्रों को जिज्ञासु, उत्सुक व स्वतंत्र चिंतन के लिए प्रेरित करता है। इस मौके पर सीएआईई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल ओ सुलेवान ने शेरवुड कॉलेज द्वारा उनके पाठ्यक्रम को स्वीकार करने पर खुशी जतायी। बताया कि विद्यालय के मौजूदा एवं आगे प्रवेश लेने वाले छात्र पुरानी फीस पर ही इस पाठ्यक्रम के तहत पढ़ने का विकल्प ले सकते हैं। साथ ही पुराना आईएससी व आईसीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रमों का विकल्प भी जारी रहेगा। इस मौके पर विद्यालय के बर्सर वासु साह सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।

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नैनीताल, 11 सितंबर 2018। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का 76वां जन्मदिन बृहस्पतिवार को मुख्यालय स्थित उनके शेरवुड कॉलेज में हर्षोंल्लास से मनाया गया। इस मौके पर विद्यालय में प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने विद्यालय के हेड ब्वॉय अपूर्व गौरव शाह व हेड गर्ल सरीना औलख के साथ अमिताभ बच्चन का नाम ‘बिग बी’ लिखा केक काटा। साथ ही चर्च में स्पेशल चैपल सर्विस आयोजित हुई। इस मौके पर विद्यालय के हेम चंद्र पांडे, अजय शर्मा, एसडी पाठक, पूनम स्वामी व बासु साह सहित समस्त अध्यापक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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दिल्ली सहित देश के सभी संस्करणों में प्रकाशित आलेख : अनूठा है शशि, अमिताभ व नैनीताल का त्रिकोण
दिल्ली,लखनऊ, पटना, देहरादून, कानपुर, गोरखपुर व वाराणसी सहित देश के सभी संस्करणों में प्रकाशित आलेख : अनूठा है शशि, अमिताभ व नैनीताल का त्रिकोण

जी हां, नैनीताल सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के बीच प्रेम का अनूठा त्रिकोण है, और इस त्रिकोण का अमिताभ और शशि कपूर के अलावा शायद ही किसी को भी पता हो। नैनीताल, अमिताभ और शशि कपूर के इस त्रिकोण की कहानी अमिताभ के एक छात्र के रूप में नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई के दौरान अभिनय की दुनिया में उतरकर जीवन का पहला पुरस्कार ग्रहण करने से शुरू होती है, और इसी कहानी के अगले भाग में अपने शुरुआती दिनों में एक फिल्म में ‘एक्स्ट्रा’ के रूप में कार्य कर रहे अमिताभ को शशि कपूर का साथ मिलता है, और फिर वे जल्दी ही शशि के साथ ‘दीवार’ फिल्म में ‘मेरे पास मां है…’ वाला सीन करते हैं। यह दोस्ती रोटी कपड़ा और मकान, कभी कभी, त्रिशूल, नमक हलाल और सिलसिला सहित अनेक फिल्मों से आगे बढ़ती हुई इतनी गहराती जाती है कि शशि जब अपने प्रोडक्शन में पहली फिल्म ‘अजूबा’ बनाते हैं तो उसमें अमिताभ ही प्रमुख भूमिका में होते हैं। यही नहीं अमिताभ की बेटी श्वेता की शादी शशि के ही परिवार में, उनके बड़े भाई राज कपूर के पोते से होती है। इस बीच नैनीताल जरूर इस कहानी से दूर होता है, किंतु इन दोनों की पहली फिल्म ‘दीवार‘ का वही ‘मेरे पास मां है…’ वाला सीन नैनीताल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की जागरूकता के लिए लगाया जाता है, और प्रधानमंत्री मोदी के ट्विटर हैंडल तक पहुंचता हुआ नैनीताल पूरी दुनिया में छा जाता है।

नैनीताल में लगा फिल्म दीवार पर आधारित पोस्टर, जिसकी प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रशंशा की थी।

इस त्रिकोण को समझने के लिए फिर शुरू में वापस लौटते हैं। अमिताभ ने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही अभिनय की दुनिया में पहला कदम ‘ज्योफ्री कैंडल’ के थियेटर ग्रुप ‘शेक्सपियराना’ के जरिए रखा था। उन्होंने शेरवुड में अभिनय के लिए ‘केंडल कप’ रखा था। इस ग्रुप में ज्योफ्री की बड़ी बेटी जेनिफर केंडल भी शामिल थीं, जिनके साथ काम करते हुए बाद में शशि कपूर ने विवाह कर लिया था। यानी ज्योफ्री कैंडल बाद में शशि कपूर के श्वसुर बने। ज्योफ्री कैंडल के साथ काम करते हुए ही अमिताभ को शेरवुड कॉलेज में अपने दूसरे वर्ष में महान रूसी नाटककार निकोलाई गोगोल के नाटक ‘इंस्पेक्टर जनरल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ‘केंडल कप’ मिला था।

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नैनीताल-कुमाऊं में फिल्माई गई फिल्में

आगे जब अमिताभ मुंबई में संघर्ष रहे थे, उन्होंने केवल 500 रुपयों के लिए ‘सात हिंदुस्तानी’ फिल्म में ‘एक्स्ट्रा’ कलाकार के रूप में ऐसा सीन किया था, जिसे फिल्म में दिखाया ही नहीं गया। उस वक्त मोबाइल फोन होते नहीं थे और अमिताभ को ये पता था कि शशि रविवार को शूतिंह नहीं करते हैं, और अपने बच्चों के साथ उस दिन नए बने ‘सन एंड सेंड’ होटल में स्विमिंग करने जाया करते हैं। ऐसे में अमिताभ होटल के करीब जाकर खड़े हो जाते थे, ताकि शशि का ध्यान खींचने की कोशिश कर सकें।उस वक्त शशि को इस्माइल मर्चेंट ने किसी अंग्रेजी फिल्म के लिए साइन किया था, उस फिल्म में किसी छोटे से रोल के लिए बच्चन ने शशि से एप्रोच लगाई। एक दिन प्रोडयूसर इस्माइल ने उन्हें बुलाया और एक छोटे से सीन के लिए पांच सौ रुपए में अमिताभ को साइन कर लिया। बाद में वो सीन भी फिल्म से काटना पड़ गया, लेकिन अमिताभ अपने पांच सौ के मेहनताने से खुश थे। उन्हें बाद में फिर से बुलाया गया। वह शशि कपूर के जनाजे का दृश्य था। बच्चन को शवयात्रा में उनकी अर्थी को कांधा देना था और उस भीड़ में शामिल रहना था। सीन शूट भी हो गया, लेकिन जब बाद में शशि कपूर ने देखा तो उसे प्रोडयूसर से हटाने को कहा, और बच्चन से कहा, ‘यू आर मेड फॉर बैटर थिंग्स’ यानी वे ‘एक्स्ट्रा’ कलाकार नहीं कुछ बड़ा करने के लिए बने हैं। और एक दिन वो आया जब दोनों एक साथ ‘दीवार’ में काम कर रहे थे और शशि कपूर डायलॉग बोल रहे थे, ‘मेरे पास मां है’। 

https://twitter.com/sahucar/status/851445984076865540

स्वयं अमिताभ ने अपने एक ब्लॉग में इन घटनाओं के सिलसिले को शशि कपूर के साथ फिल्म दीवार के एक पुल के नीचे फिल्माए गए ‘मेरे पास मां है..’ वाले बहुचर्चित सीन के साथ जोड़ते हुए बताया कि इस दौरान शशि ने उन्हें अहसास नहीं होने दिया कि उनकी फिल्म का एक ‘एक्स्ट्रा’ कलाकार आज उनके साथ मुख्य भूमिका में है।

अमिताभ, शशि और नैनीताल स शुरू हुई यह कहानी वापस नैनीताल पिछले वर्ष ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत नैनीताल नगर पालिका द्वारा लगाए गए पोस्टर से पहुंची, जिसमें फिल्म के संवादों को बदलते हुए अमिताभ व शशि की मां बनी निरूपा रॉय कहती हैं, वह उस बेटे के घर जाएंगी जिसके घर शौचालय होगा। यह पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मुंबई में रहने वाले एक लेखक, गायक व संगीतकार आशुतोष साहू ने इस पोस्टर को ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए डाल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देखा तो प्रसन्न हुए और इस प्रयोग की प्रशंशा की।

बहरहाल, शशि कपूर और नैनीताल का संबंध एक अन्य कोण पर उनके द्वारा यहां फिल्माई गई कालजयी फिल्म ‘वक्त’ (1965) से भी रहा, जिसकी शूटिंग के लिए वे लंबे समय तक यहां रहे।

इस फिल्म में शशि एवं शर्मिला टैगोर पर नैनी झील में रंग-बिरंगी पाल नौकाओं पर ‘दिन हैं बहार के, तेरे मेरे इकरार के…’ गीत बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया था। इसके अलावा पत्रकारिता के विषय पर बनी फिल्म द दिल्ली टाइम्स’ की शूटिंग भी 1985 में नैनीताल में बोट हॉउस क्लब और रोप-वे ट्रोली में हुई थी। इस फिल्म में रोप-वे ट्रोली में एक हत्या होने का दृश्य फिल्माया गया था। शशि भी इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थे, और शूटिंग के लिए नैनीताल आये थे, और यहाँ मेट्रोपोल होटल में रुके थे। शशि को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। आज उनके निधन पर कला की नगरी कही जाने वाली सरोवरनगरी में भी गहरे दुःख के भाव हैं,और मानो शशि जी के साथ बहार भी कहीं खो गयी है।

💐💐😢😢💐💐(दिवंगत दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त महान अभिनेता शशि कपूर जी को हार्दिक-विनम्र श्रद्धांजलि के साथ)💐💐😢😢💐💐

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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