News

भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ रहा है नैनीताल की सड़कों से उखड़ता डामरीकरण: आप

0 0

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Read Time:142 Minute, 12 Second

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 नवम्बर 2020। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप दुम्का ने नैनीताल को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाले मुख्य मार्गो पर हो रहे डामरीकरण में निम्न गुणवत्ता को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। बुधवार को प्रेस को जारी बयान में दुम्का ने कहा कि चार-पांच माह पहले भवाली, बाजार व भवाली-खुटानी मार्ग पर किया गया डामरीकरण कुछ ही दिनों बाद उखड़ने लगा है। इससे बने गड्ढों को भरने का असफल प्रयास किया गया है। यह गड्ढेे दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इसी तरह इन दिनों भवाली-नैनीताल मुख्य मोटर मार्ग पर किया जा रहा डामरीकरण भी उखडकर भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ रहा है। यही स्थिति हल्द्वानी रोड पर भी बेलुवाखान के आसपास नजर आ रही है।
उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि इस निम्न गुणवत्ता वाले कार्य को रोककर जनता के टैक्स के पैसे को बर्बाद होने से बचा लें। इस मुद्दे पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार का बोल बाला है इसलिये सड़कों पर होने वाले डामरीकरण में भी घोटाले की बू आ रही है। उन्होंने कहा 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनते ही निम्न स्तर के कार्यों पर जाँच बैठाकर घोटालेबाजो को सबक सिखाया जायेगा।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में किसने कहा-2022 में बीजेपी व आप में होगा चुनावी घमासान, कांग्रेस मुकाबले में भी नहीं होगी

-कहा, कांग्रेस डूबता जहाज, कांग्रेसी ही जुटे हैं कांग्रेस के जहाज को डुबोने में
नवीन समाचार, नैनीताल, 21 नवम्बर 2020। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप दुम्का ने कांग्रेस को डूबता जहाज बताते हुए कहा कि कांग्रेस के लोग ही कांग्रेस के जहाज को डुबोने में लगे हैं। कहा कि खुद को आगामी चुनावों में विकल्प बताने वाली कांग्रेस का जहाज 2022 तक पूरी तरह डूब जाएगा। वहीं आम आदमी पार्टी के बढ़ते जनाधार से यह तय हो गया है कि 2022 में विधानसभा का चुनावी घमासान भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच होने वाला है। कांग्रेस मुकाबले में भी नहीं होगी। जनता कांग्रेस को नकार चुकी है और रही सही कसर वरिष्ठ नेता आपसी गुटबाजी, नूराकुश्ती और कलह से पार्टी को रसातल में पहुंचाकर पूरी कर रहे हैं। कांग्रेसी नेताओं के पास आपस की लड़ाई के अलावा कोई विकल्प और मुद्दा नहीं बचा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच पिछले चुनावी हार को लेकर जो बयानबाजी हो रही है वह अपने आप में हास्यास्पद है।
श्री दुम्का कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के थराली उपचुनाव में कांग्रेस की हार का ठीकरा हरीश रावत के सर फोड़ने और हरीश रावत सभी 60 विधानसभा सीटों पर हार की जिम्मेदारी तंज के साथ अपने सिर लेने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी के 2022 में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद से ही कांग्रेस सकते में है। इसलिए उनकी हताशा इस तरह बाहर आ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह गुटों मेँ बटी हुई है और उसके शीर्ष नेताओं सहित कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में आपसी मतभेद के साथ मनभेद भी हैं।

यह भी पढ़ें : आम आदमी पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी, युवा व बुद्धिजीवी प्रकोष्ठों का हुआ गठन

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 नवम्बर 2020। 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए संगठन विस्तार में जुटी आम आदमी पार्टी ने गत दिनों अपनी प्रदेश सहित अन्य इकाइयों को भंग करने के बाद बृहस्पतिवार को प्रदेश कार्यकारिणी का गठन कर दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया और प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने आम आदमी पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। साथ ही युवा मोर्चा एवं बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ व युवा मोर्चा का गठन भी कर दिया है। कार्यकारिणी में मेजर जनरल सेवा निवृत्त चंद्र किशोर जखमोला, एडवोकेट बसंत कुमार, शिशुपाल सिंह रावत, रजिया बेग व अमित जोशी को प्रदेश उपाध्यक्ष, धर्मेंद्र बंसल को प्रदेश कोषाध्यक्ष, अमित रावत को प्रदेश मीडिया प्रभारी, दिग्मोहन नेगी को प्रदेश युवा मोर्चा अध्यक्ष, डॉ. चंद्रशेखर भट्ट को बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष व श्रीकांत खंडेलवाल को प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव एवं विशाल चौधरी, उमा सिसोदिया, नवीन प्रशाली, संजय भट्ट, महक सिंह नेगी, समित टिक्कू, अवतार सिंह राणा, संगीता शर्मा, प्रदीप दुम्का, सुशील खत्री, आशुतोष नेगी, अरविंद वर्मा, प्यार सिंह नेगी, राधा बल्लभ कन्याल, मयंक शर्मा, राकेश काला, डीएस कोटलिया व रविंद्र आनंद को प्रदेश प्रवक्ता मनोनीत किया है।

यह भी पढ़ें : आप के पूर्व अध्यक्ष ने मंदिर ट्रस्ट को भेंट किया एक ऑक्सीमीटर

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 सितंबर 2020। आम आदमी पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष देवेंद्र लाल ने सोमवार को नगर की आराध्य देवी नयना देवी मंदिर ट्रस्ट को एक पल्स ऑक्सीमीटर भेंट किया। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल की प्रेरणा से पार्टी एवं अपनी ओर से यह भेंट दी गई, ताकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के ऑक्सीजन स्तर की जांच की जा सके। बताया गया है कि इन दिनों पार्टी कार्यकर्ता केंद्रीय हाइकमान से मिले 14 ऑक्सीमीटरों की मदद से नगर में घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रहे हैं। इस दौरान दो दिन पूर्व नयना देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से पार्टी कार्यकर्ताओं से एक ऑक्सीमीटर की अपेक्षा की गई थी। इस दौरान पार्टी के युवा मोर्चा के विधान सभा सचिव सूरज कुमार, सचिन, दीपक, भाष्कर चंद्र, मनोज आर्या, गिरीश चंद्र व भानु रावत आदि लोग मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : कई लोगों ने ग्रहण की आम आदमी पार्टी की सदस्यता

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 सितंबर 2020। राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान करने के बाद पार्टी कार्यकर्ता अधिकाधिक लोगांे को पार्टी में जोड़ने के अभियान में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में रविवार को कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके मो. बुरहान उर्फ शान अख्तर ने साहिल व अन्य साथियों के साथ मिलकर अपने क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को पार्टी के केंद्रीय कुमाऊँ प्रभारी जीतेन्द्र फुलारा, संगठन मंत्री अमित जोशी व नैनीताल जोनल प्रभारी सुरेंद्र सिंह हल्सी के हाथों फूल माला पहनाकर आम आदमी पार्टी की सदस्यता दिलाई।
सदस्यता ग्रहण करने वालों में सुमन आर्या, शशि सागर, बसंती देवी, हंसी देवी, रीना देवी, आनंदी साह, जानकी देवी, गंगा देवी, शोभा देवी, प्रशांत, अमन, पवन, साहिल, देवेंद्र, भूप आर्या, गोपाल राम आर्या, अक्षय सेलवाल, बसंत राम, पीयूष चंद्र आदि प्रमुख रहे। इस दौरान पार्टी नेताओं ने कहा कि राज्य बने 20 साल होने के बावजूद राज्य आंदोलनकारियो का सपना आज तक पूरा नहीं हुआ है। दोनों राष्ट्रीय पार्टियों ने एक-एक करके उत्तराखंड की मासूम जनता का शोषण किया है, सिर्फ आम आदमी ही आम आदमी के हितों की रक्षक है। देवेंद्र आर्य, महेश आर्या, नवीन उप्रेती, बब्लू, सूरज कुमार, राजेंद्र, विनोद कुमार व शान अख्तर, प्रदीप दुम्का ने भी विचार रखे। संचालन विनोद कुमार ने किया। इस मौके पर नगर अध्यक्ष शाकिर अली, भवाली नगर अध्यक्ष मुकेश कुमार, मो. खुर्शीद हुसैन, विजय साह आदि लोग भी उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : कई ने थामा आम आदमी पार्टी का ‘झाड़ू’

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2020। उत्तराखंड में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने के ऐलान के साथ सक्रिय हुई आम आदमी पार्टी में लगातार लोग जुड़ रहे हैं। शनिवार को ज्योलीकोट में मोनिका आर्या, पुष्पा देवी, हेमा आर्या, शांति देवी, नीलम आर्या, गंगा देवी, धर्मपाल व जीवन लाल आदि लोग ज्योलीकोट में आम आदमी पार्टी में शामिल हुये। इस दौरान पार्टीी की ज्योलीकोट नगर कार्यकारिणी का विस्तार करते हुये विधानसभा प्रभारी प्रदीप दुम्का ने अध्यक्ष पद पर रूबल ठाकुर, उपाध्यक्ष गौरव कुमार, महामंत्री मृदुल आर्या, कोषाध्यक्ष अंकित कुमार, नगर मंत्री आरुष सिंह तथा कार्यकारिणी में कैलाश चंद्र, भानु कुमार, रोहन टम्टा, रितेश कुमार, पंकज कुमार, पवन चंद्र, उमेश चंद्र, मनीष चंद्र को मनोनीत किया। साथ ही अभी हाल में कांग्रेस छोड़कर आप में पार्टी में जुड़े तल्लीताल निवासी मो. बुरहान उर्फ शान अख्तर के नेतृत्व में नगर के हरिनगर, कृष्णापुर, वीर भट्टी क्षेत्रों की शशि सागर, बसंती देवी, हंसी देवी, रीना देवी, आनंदी साह, जानकी देवी, गंगा देवी, शोभा देवी, प्रशांत, अमन, पवन, साहिल, देवेंद्र, भूप आर्या, गोपाल राम आर्या, अक्षय सेलवाल, बसंत राम, पीयूष चंद्र, मेहबूब सिद्दीकी ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके नगर अध्यक्ष शाकिर अली, भवाली नगर अध्यक्ष मुकेश कुमार, जेसी कांडपाल, देवेंद्र आर्य, महेश आर्या, नवीन उप्रेती, बब्लू, सूरज पांडे, विनोद कुमार व शान अख्तर आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : आप के प्रदेश अध्यक्ष सहित 60 कार्यकर्ताओं पर दर्ज हुआ मुकदमा, सड़क पर उतरने की चेतावनी

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अगस्त 2020। विधायक प्रकरण में विधायक की गिरफ्तारी व डीएनए टेस्ट कराने की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर के नेतृत्व में आप कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्यमंत्री आवास कूच करने को लेकर राज्य सरकार ने प्रदेश अध्यक्ष समेत 60 कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज कर लिया है। आम आदमी पार्टी के जिला प्रवक्ता प्रदीप दुम्का ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा की है। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों पर बुरी नजर रखने वाले विधायक की गिरफ्तारी की मांग पर विरोध प्रदर्शन अपराध नहीं है। यदि बीजेपी विधायक पाक-साफ हैं तो डीएनए टेस्ट कराने में उन्हें संकोच क्यों है। उन्होंने कहा कि यदि आप कार्यकर्ताओं से मामले वापस नहीं लिये जाते तो आम आदमी पार्टी के समस्त कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे। उन्होंने विधायक पर मुकदमा दर्ज करने व उनकी गिरफ्तारी की मांग भी दोहराई।

हरीश रावत नकलची बंदर…
नैनीताल। कांग्रेस नेता हरीश रावत के उत्तराखंड में जीत के बाद बिजली, पानी फ्री करने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुये दुम्का ने कहा कि रावत जब उत्तराखंड में मुख्यमंत्री थे तब वे सत्ता के नशे में चूर रहे, तब उन्हें आम आदमी के लिये बिजली-पानी, चिकित्सा-स्वास्थ्य के मुद्दे नहीं दिखे। अब जब आम आदमी पार्टी मूलभूत सुविधाओं की बात कर रही है तो वे एक नकलची बंदर की तरह उछल रहे हैं। 2022 में आप की सरकार जाएगी और वे उछलते ही रह जाएंगें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी आम आदमी पार्टी, इसी सप्ताह कर सकती है ऐलान..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 20 अगस्त 2020। दिल्ली, पंजाब और गोवा के बाद अब आम आदमी उत्तराखंड में विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। पार्टी इसी सप्ताह बिना किसी पार्टी से गठबंधन किये उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकती है। बताया गया है कि पार्टी डेढ़ माह पहले राज्य में कराए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों से उत्साहित है, और इसके बाद ही पार्टी ने उत्तराखंड को कर्मभूमि बनाने का मन बनाया है। पार्टी का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को ‘एंटी एंकमबेंसी’ का नुकसान होगा, जबकि विपक्षी कांग्रेस आपस में ही बंटी हुई व कमजोर है। इसका लाभ आम आदमी पार्टी को हो सकता है। राज्य के सत्ताविरोधी वोटों का उसके पक्ष में ध्रुवीकरण हो सकता है।
आप के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल हालांकि मानते हैं कि वर्तमान में आप का बड़ा संगठन या नेटवर्क उत्तराखंड में नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि चुनाव जनता की उम्मीद से लड़े जाते हैं, संगठन से नहीं। जनता की आशाएं साथ हों और नेताओं की नीयत ठीक हो, तो संगठन बनने में देर नहीं लगती। उनका कहना है, दिल्ली में भी आप के पास संगठन नहीं था, लेकिन पार्टी बनने के दो साल के भीतर ही आप ने कांग्रेस जैसी सवा सौ साल पुरानी और भाजपा जैसी 40 साल पुरानी पार्टी को घुटनों पर बैठा दिया। केजरीवाल के अनुसार दिल्ली में आप को उत्तराखंडी आबादी से भरपूर समर्थन मिलता रहा है। उन्होंने देश की राजधानी में स्कूलों और अस्पतालों का कायाकल्प होते देखा है। कोरोना काल में बहुत से उत्तराखंडी वापस उत्तराखंड चले गए। उन लोगों ने ही इच्छा जाहिर की कि आप उत्तराखंड से चुनाव लड़े। इसी फीडबैक के आधार पर आप ने डेढ़ माह पहले प्रदेश में एक व्यापक सर्वे कराया, जिसमें केजरीवाल के अनुसार 62 प्रतिशत लोगों ने इच्छा जताई कि आप को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेना चाहिए।
लेकिन क्या कांग्रेस और भाजपा के जनाधार में सेंध लगाना आसान होगा? इस सवाल के जवाब में दिल्ली के मुख्यमंत्री का कहना है कि बाकी देश की तरह उत्तराखंड में भी कांग्रेस खत्म हो चुकी है। कर्नाटक, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में लोगों ने देखा कि कांग्रेस को वोट देना बेकार है क्योंकि वे बाद में भाजपा से मिल जाते हैं। भाजपा खुश है कि विपक्ष खत्म हो चुका है इसलिए उसकी काम में रूचि नहीं रही। राज्य में भाजपा ने एक भी उल्लेखनीय काम नहीं किया है। उनका यह भी मानना है कि उत्तराखंड में दलबदल का भी इतिहास रहा है। भयानक नेतृत्वहीनता के इस दौर में उत्तराखंड की जनता इन दोनों पार्टियों से खिन्न है और बेहतर विकल्प चाहती है। इसलिए जनाधार बनने में देर नहीं लगेगी। दूसरे दलों से खिन्न लोग आप में आएंगे। केजरीवाल के अनुसार रोजगार की कमी से पैदा हुआ पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और सरकारी स्कूल-कॉलेजों में अच्छी शिक्षा का अभाव, ये तीन मुद्दे उत्तराखंड में आप के सबसे बड़े मुद्दे होंगे। इन्हीं तीन मुद्दों पर दिल्ली में आप पार्टी ने फोकस कर जनता का विश्वास हासिल किया। उत्तराखंड में भी वही प्रयोग दोहराया जाएगा। प्रदेश के हर गांव की पहुंच में एक मोहल्ला क्लिनिक बनाया जाएगा। शहरों की सुविधाओं को गांव तक पहुंचा कर पलायन रोका जाएगा। स्थानीय संसाधनों से जोड़कर स्वरोजगार और छोटे कारोबार को बढ़ावा देकर बेरोजगारी की समस्या दूर की जाएगी। देवभूमि के लिए आपदा प्रबंधन की विशेष रणनीति बनेगी। हर स्तर पर प्रकृति संरक्षण की व्यवस्था होगी। साथ ही पूरी दुनिया को धर्म सिखाने वाले इस प्रदेश में चारधाम समेत सभी आस्था केंद्रों की रक्षा और प्रोत्साहन का काम आगे बढ़ाया जाएगा। पार्टी यहां आस्था और विकास का मॉडल बनाने की बात भी कर सकती है।

यह भी पढ़ें : भाजपा-कांग्रेस से जुड़े कई लोगों ने थामा आम आदमी पार्टी का झाड़ू, आप ने भाजपा सरकार को बताया श्रमिक विरोधी

नवीन समाचार, नैनीताल, 09 अगस्त 2020। रविवार को नगर के कई लोगों ने प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर के समक्ष आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सदस्यता ग्रहण करने वालों में भाजपा कार्यकर्ता सतनाम सिंह तथा कांग्रेस पार्टी के मो. बुरहान तथा तनवीर कुरैशी, सुनील कुमार, सैफू खान, आरिश खान, योगेश मठपाल, चंद्र प्रकाश, साहिल खान, जतिन रावत, प्रदीप चौहान, मो आसिफ, इमरान व अमन आदि शामिल रहे। पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाले कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल की नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी में आये हैं। पार्टी के अध्यक्ष एसएस कलेर ने उनका स्वागत करते हुये कहा कि पार्टी में कोई नया पुराना, छोटा-बड़ा कार्यकर्ता नहीं है। सब आम कार्यकर्ता हैं। यही आम आदमी पार्टी कि नीति है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी को यदि राजनीति में आकर धन कमाना हो तो वह भाजपा-कांग्रेस में जाये, लेकिन यदि समाज सेवा करनी है तो ही आम आदमी पार्टी में आयें।
इस मौके पर पार्टी के प्रदीप दुम्का, डीएस नेगी, मो. खुर्शीद हुसैन, शाकिर अली, आरसी पंत, देवेंद्र आर्य, महेश आर्य, नईम अहमद निम्मो, विजय साह, बलबीर वाल्मीकि व गोधन जलाल आदि कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

रविवार को प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर के समक्ष आम आदमी पार्टी में शामिल हुए लोग।

आप ने उद्योग कानून में परिवर्तन को लेकर राज्य सरकार को घेरा, पूरे प्रदेश में प्रदर्शन
नैनीताल। आम आदमी पार्टी ने कोरोना के नाम पर श्रमिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। रविवार को मल्लीताल में पत्रकार वार्ता आयोजित कर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने कहा कि केंद्र सरकार के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने कारखाना अधिनियम और औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत 300 से ज्यादा कर्मचारी होने पर उद्योगों को अगले 1000 दिनों तक श्रमिकों को हटाने जैसी मनमानी करने का अधिकार दे दिया गया हैं। आम आदमी पार्टी किसी भी सूरत में श्रमिकों के खिलाफ यह अन्याय स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पहले कंेद्र सरकार और फिर यूपी व मध्य प्रदेश आदि भाजपा की सरकारों ने इसे लागू किया, जबकि दिल्ली की आप सरकार ने इसे लागू करने से इंकार कर दिया। अब उत्तराखंड सरकार ने कैबिनेट में इस कानून के 5ए व 36ए में परिवर्तन कर इस अधिनियम को पास करके अनुमोदन के लिए राज्यपाल के पास भेज दिया है। उन्होंने कहा कि अब श्रमिक नए कानून के तहत बिना श्रम आयुक्त की मंजूरी के बिना उद्योगों के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं कर सकेंगे। यही नहीं नए कानून के तहत अब 6 महीने से पुराना केस भी उद्योगों पर दर्ज नहीं हो सकता, इनके खिलाफ भी आप मुखर होकर श्रमिकों के हक को सरकार द्वारा मारने नहीं देगी। विधानसभा प्रभारी प्रदीप दुम्का ने कहा कि इस मामले में पहले भी केंद्र सरकार द्वारा कानूनों में परिवर्तन करने पर आम आदमी पार्टी ने विरोध प्रदर्शन किये थे। उन्होंने बताया कि आज रविवार को भी इस मामले में पूरे प्रदेश में दोपहर एक बजे विरोध-प्रदर्शन किये गये हैं।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस के पुराने नेताजी ने कहा-आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा-आप में होगा मुकाबला, कांग्रेस मुकाबले में भी नहीं होगी

-पहली बार मुख्यालय पहुंचे आम आदमी पार्टी के कुमाऊं प्रभारी एवं सह संगठन मंत्री अमित जोशी
नवीन समाचार, नैनीताल, 04 अगस्त 2020। कांग्रेस पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी मंे शामिल होकर कुमाऊं प्रभारी एवं सह संगठन मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे अमित जोशी ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का सीधा मुकाबला भाजपा से होगा, कांग्रेस कहीं पर भी खड़ी नहीं नजर आएगी।
मंगलवार को मुख्यालय में पहली बार आगमन पर जोशी ने पार्टी की नगर इकाई के पदाधिकारियों के साथ बैठक की एवं पार्टी की सक्रियता एवं मजबूती पर उनके सुझाव लिये एवं दिये। इस मौके पर श्री जोशी ने कहा कि आगामी 2022 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पूरी तैयारी के साथ उतरेगी और चुनाव जीतने पर राज्य की जनता को दिल्ली की तर्ज पर पानी, बिजली, शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधा प्रदेश की जनता को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ ही बरसात में भी पेयजल व्यवस्था पूरी तरीके से चरमराई हुई है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने प्रदेश में 10 हजार बूथों में से 6500 बूथों में पार्टी के सदस्य बना लिए हैं। शेष बूथों पर भी दो माह के अंदर सदस्य बना लिए जाएंगे। इन दिनों आम आदमी पार्टी ऐप के माध्यम से पूरे कुमाऊं में सदस्य बनाए जा रहे हैं। जिसमें अभी एक लाख से ऊपर सदस्य बना दिए गए हैं। जिनमें से 35 हजार सदस्य पार्टी पदों में बैठकर काम कर रहे हैं। 2022 में विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाएगी और प्रदेश की जनता को दिल्ली के तर्ज पर समस्त सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।इस दौरान नगर अध्यक्ष शाकिर अली और पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र लाल ने पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर नगर अध्यक्ष शाकिर अली, महेश आर्य, गंगा सिंह बिष्ट, नवीन उप्रेती, देवेंद्र आर्य, विजय साह, प्रदीप दुम्का व देवेंद्र लाल आदि पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

आम आदमी पार्टी ने कोरोना से बचाव के लिए जागनाथ मंदिर में की ऑनलाइन पूजा-हवन
नैनीताल। आम आदमी पार्टी की नगर इकाई के द्वारा पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष देवेंद्र लाल के तत्वावधान में मंगलवार को विश्वव्यापी कोरोना की महामारी की रोकथाम एवं नगर वासियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भगवान शिव के धाम जागेश्वर में ऑनलाइन पूजा-अर्चना व हवन-यज्ञ किया गया। हवन-यज्ञ जागेश्वर मंदिर के पुजारी शुभम भट्ट द्वारा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से किया गया। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया गया। हवन यज्ञ में श्री लाल के साथ ही उनकी धर्मपत्नी व पार्टी नेता श्रीकांत घिल्डियाल भी ऑनलाइन शामिल हुए। श्री लाल ने कहा कि यह आयोजन के जरिये कोरोना का प्रभाव कम करने के साथ ही नगर तथा देश-प्रदेश की जनता एवं मुख्यालय में कोरोना की महामारी के बावजूद अपने कार्य में लगे चिकित्सकों, मीडिया कर्मियों, बैंक कर्मियों व पुलिस-प्रशासन को उनकी मेहनत का प्रतिफल मिलने की भी कामना की गई।
आयोजन पर नैनीताल विधानसभा प्रभारी प्रदीप दुम्का, सह प्रभारी डीएस नेगी, विधानसभा मीडिया प्रभारी मो. खुर्शीद हुसैन, नगर अध्यक्ष शाकिर अली, नगर उपाध्यक्ष आरसी पंत, महामंत्री महेश आर्या, गंगा सिंह, केडी गुरुरानी, एलएम पंत, उमेश तिवारी, राजेंद्र आर्या, विजय साह, प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष युवा मोर्चा देवेंद्र आर्य, आईडी पालीवाल, प्रताप पडियार, पीसी जोशी, अमित रस्तोगी, नईम अहमद, रियाजुद्दीन, सूरज कुमार, अजीज, राजेंद्र प्रसाद, ललित पंत, देवेंद्र आर्य, नईम खान, विजय साह, दीपक कुमार, अभिषेक मुल्तानिया, गोधन सिंह आदि कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस पार्टी के सात ‘रावतों’ ने ली आम आदमी पार्टी की सदस्यता

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जुलाई 2020। पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री एवं दोनों सरकारों में ‘रावत’ जाति नाम उत्तराखंड की राजनीति में छाया हुआ है। अब लगता है कि रावत आम आदमी पार्टी में भी प्रभावी भूमिका में आने जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया, प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर व आप नेता शिशुपाल रावत पहली बार साथ रामनगर पीरूमदारा पहुंचे। इस दौरान उनका भव्य स्वागत किया गया, साथ ही इस दौरान कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई-एनएसयूआई के प्रदेश सचिव गौरव रावत के साथ ही मुकेश रावत, अरुण रावत, संदीप रावत, विकास रावत, कुलदीप रावत, तेजपाल रावत, अर्जुन पाल, दिनेश चौधरी, प्रशांत नेगी, जतिन नेगी, करण पाल, देवेश जोशी, सौरव बिष्ट व प्रवीण सिंह सहित अन्य कई युवाओं ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सोंपते आम आदमी पार्टी के नगर अध्यक्ष व विधानसभा प्रभारी।

बढ़े हुए पानी के बिलों पर आप ने दी जनांदोलन की धमकी
नैनीताल। आम आदमी पार्टी की नैनीताल इकाई ने बृहस्पतिवार को पेयजल के बढ़े हुए आये बिलों को लेकर जल संस्थान कार्यालय जाकर अधिशासी अधिकारी के समक्ष नाराजगी व्यक्त की एवं उन्हें ज्ञापन सोंपकर बढ़े हुए बिल वापस न होने पर जन आंदोलन करने की चेतावनी दी।
इस दौरान नगर अध्यक्ष शाकिर अली व विधानसभा प्रभारी प्रदीप कुमार दुम्का ने बढ़े हुए बिलों को नगर की आम जनता एवं होटलियर्स के साथ अन्याय बताया जो पहले ही लॉक डाउन की मार झेल रहे हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में नगर महामंत्री महेश आर्य, पूर्व नगर अध्यक्ष देवेंद्र कुमार, नवीन उप्रेती, विजय साह, केडी गुरुरानी, एलएम पंत, राजेंद्र लाल साह, खुर्शीद अहमद, देवेंद्र आर्य, बब्बू कनौजिया, युवा नेता मदन सिंह, नईम अहमद आदि शामिल रहे।

शहीद देव बहादुर एवं टांगा मुनियाल में मरे लोगों के प्रति शोक जताया
नैनीताल। आम आदमी पार्टी के नगर के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को मल्लीताल पंत पार्क में शोक सभा कर मुनस्यारी ब्लाक के आपदा प्रभावित गांव टांगा मुनियाल में दैवीय आपदा में मृतक आत्माओं तथा पश्चिमी लद्दाख में बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हुए किच्छा गौरीकला निवासी देव बहादुर थापा के प्रति दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही दैवीय आपदा के प्रभावित परिवारों को दस-दस लाख का मुआवजा एवं लद्दाख में शहीद हुए जवान के परिवार जनों को दिल्ली सरकार के भांति एक करोड़ रुपए देने की मांग प्रदेश सरकार से की।

यह भी पढ़ें : आप ने नैनीताल के स्कूलों-होटलों पर लगाया कर्मचारियों के उत्पीड़न का आरोप

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जुलाई 2020। नगर के आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष शाकिर अली के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवारको प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपर आयुक्त कुमाऊं मंडल संजय कुमार खेतवाल के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में नगर के पब्लिक स्कूलों एवं बड़े होटलों पर वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया।
इस मौके पर श्री अली ने कहा कि एक और केंद्र सरकार स्पष्ट निर्देश दे रही है कि किसी भी कर्मचारी का कोरोना काल में उत्पीड़न नहीं किया जायेगा, वहीं दूसरी और नैनीताल में इन निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है, जिसका आम आदमी पार्टी पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश सरकार से कर्मचारियों के उत्पीड़न को तत्काल रोकने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में विधान सभा प्रभारी प्रदीप दुम्का, नगर महामंत्री महेश आर्य, उपाध्यक्ष राम पंत, उमेश तिवारी, नवीन उप्रेती, नईम अहमद, गंगा सिंह बिष्ट, खुर्शीद अहमद, विनोद तिवारी, गणेश कांडपाल, प्रताप पडियार व अमन कुमार आदि शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : आम आदमी पार्टी में शामिल हुए पूर्व सीएम रावत के पुराने करीबी प्रदेश कांग्रेस सचिव रावत

नवीन समाचार, हल्द्वानी 18 जुलाई 2020। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी, प्रदेश प्रवक्ता सहित विभिन्न पदों पर रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता एसपीएस रावत ने आप यानी आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। आप के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने शनिवार को रावत को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर रावत ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के दिल्ली में किये गये कार्यो से उन्हें आम आदमी पार्टी में शामिल होने की प्रेरणा मिली। खासकर दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित होकर, उत्तराखंड में भी इसी प्रकार की शिक्षा क्रांति का लक्ष्य लेकर वह आप में शामिल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जनता भाजपा और कांग्रेस से दुखी हो गयी है। इसलिए जनता 2022 में दिल्ली का इतिहास उत्तराखण्ड में दोहराएगी। उन्होंने कहा कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है। इसलिए उत्तराखण्ड के नवनिर्माण के लिए आगे आना जरूरी हो गया था। अब उन्होंने आम आदमी पार्टी को उत्तराखण्ड में जीत दिलाने की जिम्मेदारी ली है। बताया गया है कि रावत 2014 से 20220 कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव, 2016 में हरिद्वार जिला प्रभारी, 2017 में सल्ट के विधानसभा प्रभारी, 2017 में रामनगर के विधानसभा पर्यवेक्षक के साथ ही कुमाऊं गढ़वाल विकास समिति के अध्यक्ष एवं पब्लिक स्कूल एसोसिएशन उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे हैं।

यह भी पढ़ें : तराई क्रांति संगठन के महामंत्री व कर्मचारी नेता ने ग्रहण की ‘आप’ की सदस्यता

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जुलाई 2020। तराई क्रांति संगठन के महामंत्री रुद्रपुर निवासी सरदार हरपिंदर सिंह ने बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर और संगठन मंत्री डीएस कोटलिया की मौजूदगी में आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष कलेर ने कहा कि होटल, पर्यटन व निजी उद्योगों आदि के बंद होने से लोग बेरोजगार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामलें में जिस प्रकार का दोहरा रवैया केंद्र और राज्य की सरकार दिखा रही है यह बेहद ही शर्मनाक है। इस विपत्ति काल में प्रदेश वासियों को तुरंत जीवन यापन करने के लिए राहत देने के बजाय सरकार और सरकारी तंत्र निद्रा की अवस्था में पड़ा हुआ है। आम आदमी पार्टी इस संकट की घड़ी में बेरोजगारों और पीड़ित वर्ग के पूर्ण रूप से साथ है, और उनकी इस लड़ाई को लेकर संघर्ष करेगी। वहीं बीएसएनएल के कर्मचारी नेता एमसी उपाध्याय ने भी बृहस्पतिवार को जिला प्रभारी प्रदीप दुम्का की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।

यह भी पढ़ें : आम आदमी पार्टी की नगर कार्यकारिणी का हुआ गठन

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2020। आगामी विधान सभा चुनाव को देखते हुये अपने संगठन का लगातार विस्तार कर रही आम आदमी पार्टी के नगर अध्यक्ष शाकिर अली ने बृहस्पतिवार को अपनी कार्यकारिणी के गठन की घोषणा की। उन्होंने आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य श्रीकांत घिल्डियाल को संरक्षक, कुमाऊँ विवि के कर्मचारी नेता श्रीराम पंत व उमेश तिवारी को उपाध्यक्ष, उत्तराखंड प्रशासन अकादमी में प्रशासनिक अधिकारी रहे महेश चंद्र आर्य को महासचिव, नईम अहमद (निम्मो ) व विजय साह को मंत्री कुंदन सुयाल को संगठन मंत्री तथा गंगा सिंह बिष्ट को कोषाध्यक्ष एवं केशव दत्त गुरूरानी, एलएम पंत व संजय कुमार को कार्यकारिणी में शामिल किया है। बैठक की अध्यक्षता देवेंद्र लाल ने व संचालन नगर अध्यक्ष शाकिर अली ने किया। बैठक में नवनियुक्त पदाधिकारियों को विधानसभा प्रभारी प्रदीप दुम्का व विधानसभा सह प्रभारी डीएस नेगी, जनहित संस्था के सुरेंद्र चौधरी, जगमोहन बिष्ट आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस पार्टी का एक और बड़ा ‘हाथ’, आया आम आदमी के ‘साथ’

-भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे कांग्रेस पार्टी के नेता सुरेश आर्य व रिपब्लिकन पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सहित कई लोग आम आदमी पार्टी में शामिल
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जुलाई 2020। एक दौर में कांग्रेस पार्टी का स्लोगन था-‘कांग्रेस पार्टी का हाथ, आम आदमी के साथ’। यह स्लोगन अब कुछ अलग अर्थों में फिर प्रासंगिक होता नजर आ रहा है। मंगलवार को पूर्व में भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सुरेश चंद्र आर्य कांग्रेस पार्टी को छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गऐ हैं। आर्य एक दौर में पहाड़ तक फैली खटीमा विधानसभा से विधायक रहे हैं, लिहाजा उनका उस दौर में पहाड़ से लेकर मैदान तक प्रभाव रहा है। वे उत्तराखंड की पहली नित्यानंद स्वामी की अंतरिम सरकार में खाद्य एवं रसद मंत्री एवं उनके बाद महाराष्ट्र के मौजूदा राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सरकार में 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन के उपाध्यक्ष रहे। उनकी पत्नी बीना आर्य भाजपा के टिकट पर नैनीताल जिला पंचायत की पहली अध्यक्ष रहीं तथा अभी भी भाजपा में हैं, जबकि सुरेश पिछले विधानसभा चुनाव के दौर में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गये थे, लेकिन वहां तरजीह नहीं मिलने के कारण आम आदमी पार्टी में चले गए हैं। उन्हें आज आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया ने प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर के साथ सातताल स्थित एक होटल में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
उनके साथ ही आज जमरानी क्षेत्र से आने वाले रिपब्लिकन पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष
राम ंिसह भी आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। बताया गया है कि राम ंिसंह ने नैनीताल लोक सभा से 2014 में चुनाव लड़ा था। उनके साथ ही प्रेम चंद, भवाली से भाजपा के पुराने कार्यकर्ता कमल दुर्गापाल भवाली, हल्द्वानी से गुरचरण सिंह तथा बसपा के ओखलकांडा ब्लॉक अध्यक्ष संतोष राम आर्या एवं गोपाल राम टम्टा, बबलू आदि अन्य कार्यकर्ताओं ने भी आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर पार्टी प्रदेश संगठन मंत्री अमित जोशी, प्रदीप दुम्का, मो. खुर्शीद अहमद, देवेंद्र कोटलिया व रोहित सिंह आदि कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी का दावा-आगामी विधानसभा चुनावों में सशक्त पार्टी बनकर उभरेगी आप

-कहा, आम आदमी पार्टी प्रदेश के नागरिकों को दिलाएगी उनका अधिकार
-पूर्व नगर अध्यक्ष सहित कई पुराने कार्यकर्ताओं की हुई घर वापसी, कई नये लोग भी पार्टी से जुड़े

पूर्व नगर अध्यक्ष देवेंद्र लाल की पार्टी में घर वापसी कराते प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया, साथ में प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर एवं अन्य।

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 जुलाई 2020। प्रदेश में विकल्प के रूप में उभरने का प्रयास कर रही आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया बृहस्पतिवार को पहली बार कुमाऊं मंडल में पहुंचे। इस मौके पर सातताल स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने नव-नियुक्त विधानसभा प्रभारियों के साथ बूथ स्तरीय संगठन निर्माण की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्य-योजना पर चर्चा की। इस मौके पर श्री मोहनिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में एक सशक्त पार्टी बनकर उभरेगी और प्रदेश के नागरिकों को उनका अधिकार दिलाएगी।
इस दौरान कांग्रेस पार्टी में जा कर लौटे पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष देवेंद्र लाल, महेश आर्य, श्रीकांत घिल्डियाल, आरसी पंत, विपिन सैनी, बीपी लोहनी आदि की पार्टी में घर वापसी हुई वहीं उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव विनोद तिवारी, जीसी कांडपाल, महेश भट्ट, सुनील उपाध्याय व आसिफ अली तथा सुरेश पंत, राकेश शर्मा, छात्र नेता संजय कुमार, गौरव कुमार, पत्रकार धीरेंद्र साह, ट्रेवल एजेंसी संचालक बब्लू कुमार, शुभम कुमार, मेहरागांव के नवीन पडालनी, पांडे गांव के दिनेश पांडे, महेंद्र सिंह, भीमताल के कृष्ण चंद्र उनियाल व भूमियाधार के संजय कुमार सहित कई अधिवक्ताओं व छात्र नेताओं कोे पार्टी की सदयस्ता दिलाई गयी। इस दौरान श्री मोहनिया ने विधानसभा प्रभारियों का आह्वान किया कि प्रत्येक कार्यकर्ता प्रदेश के अंतिम आम आदमी तक पहुंचकर उन तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नीतियों को पहुंचाए और लोगों का भरोसा पार्टी के प्रति बढ़ाए। अधिक से अधिक लोगों को पार्टी की विचारधारा से जोड़ना है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में पूर्ण बहुमत से विजय हासिल करे।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर, मंडल अध्यक्ष अमित जोशी, केंद्रीय समन्वयक जितेंद्र फुलारा, भीमताल विधानसभा प्रभारी संदीप भटनागर, नैनीताल विधानसभा सह-प्रभारी, डीएस नेगी, नैनीताल नगर अध्यक्ष शाकिर अली, नैनीताल विधानसभा मीडिया प्रभारी मो. खुर्शीद हुसैन, भवाली नगर अध्यक्ष व सभासद मुकेश कुमार, बेतालघाट अध्यक्ष गोधन सिंह, देवेंद्र आर्या, प्रकाश चंद्र पांडे, देवेंद्र लाल, उमेश तिवारी, गिरीश आर्य, प्रताप पडियार, आरसी पंत, जीसी कांडपाल, संजय कुमार, गौरव कुमार, नवीन, महेंद्र, किशन भट्ट, जीतेंद्र भट्ट, विजय साह, नईम भाई निम्मो व डीएस कोटलिया सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : ‘हाथ’ छोड़ ‘झाड़ू’ थामा, जोशी को मिली बड़ी जिम्मेदारी…

आप प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर के साथ नव नियुक्त प्रदेश संगठन मंत्री अमित जोशी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जून 2020। गत दिवस कांग्रेस पार्टी को छोड़कर आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाले अमित जोशी को आम आदमी पार्टी ने प्रदेश संगठन मंत्री के पद से नवाजा है और उन्हें कुमाऊँ मंडल में विधान सभावार संगठन का विस्तार करने की जिम्मेदारी सोंप दी है। आप के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने बताया कि जोशी को प्रदेश कार्यसमिति में महत्वपूर्ण भूमिका देने के साथ साथ ही उनकी संगठनात्मक क्षमता का उपयोग कुमाऊं मंडल में विभिन्न मौर्चों व घटक संगठनों के निर्माण में भी किया जाना है।

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी आगामी विधान सभा चुनाव के दृष्टिगत लगातार व तेजी से संगठन विस्तार कर रही है। इसी कड़ी में हाल ही में पार्टी ने 70 विधानसभा प्रभारियों की भी घोषणा की थी। माना जा रहा है कि जोशी को कुमाऊँ में संगठन का प्रभार देना पार्टी की एक सोची समझी रणनीति है। यहां जोशी का खासा राजनैतिक प्रभाव है। प्रोफेशनल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहते जोशी संगठन निर्माण में अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं। यह जिम्मेदारी मिलने पर अमित जोशी ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के साथ प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया का आभार व्यक्त किया है। साथ ही कहा की उत्तराखण्ड में लोगों को मजबूत तीसरा विकल्प देने का वक्त आगया है। इसमें उत्तराखण्ड के हर वर्ग की भागीदारी होगी। वहीं प्रदेश अध्यक्ष कलेर ने कहा कि पार्टी अब राज्य में हर बूथ पर 10 नहीं, बल्कि 100 यूथ के लक्ष्य के साथ संगठन निर्माण करेगी।

यह भी पढ़ें : ‘आप’ ने युवा राज्य आंदोलकारी को बनाया नगर अध्यक्ष, एक तीर से साधे कई निशाने

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 जून 2020। आम आदमी पार्टी ने इन दिनों किये जा रहे अपने संगठन के विस्तार की कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता व उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शाकिर अली को नैनीताल नगर के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौप दी है। माना जा रहा है कि शाकिर की नियुक्ति आम आदमी पार्टी ने कई निशाने एक साथ साधने की कोशिश की है।

आप के नये नगर अध्यक्ष शाकिर अली।

एक ओर पार्टी को जहां उनकी नियुक्ति से मुख्यालय में उत्तराखंड क्राति दल तथा राज्य की अवधारणा से जुड़े मतदाता वर्ग को साधने की उम्मीद होगी वहीं अल्पसंख्यक वर्ग से होने से वह मुख्य विपक्षी कांग्रेस से जुड़े और कुल मिलाकर हर तरह के मोदी विरोधी विरोधी मतदाताओं को आम आदमी पार्टी की ओर मोड़ सकते हैं। साथ ही पार्टी का जनाधार बढ़ा तो वे युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते भी नजर आ सकते हैं। हालांकि इस तरह वे सत्ताधारी भाजपा से अधिक विपक्षी पार्टियों-कांग्रेस व उक्रांद के लिए अधिक नुकसानदेह नजर आ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि शाकिर अली 1988 से सक्रिय राजनीति व उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े रहे हैं, तथा पूर्व में उत्तराखंड क्राति दल व बाद में भारतीय जनता पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में रहे हैं। साथ ही उनका व्यापार मंडल सहित कई सामाजिक संगठनों में भी जुड़ाव रहता है और उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि भी है। उनकी नियुक्ति पर पार्टी के प्रदेश प्रभारी व दिल्ली के विधायक दिनेश मोहनिया, प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर, प्रदेश सचिव डीएस कोटलिया, नैनीताल विधानसभा प्रभारी प्रदीप दुम्का, डीएस नेगी, संदीप भटनागर, मुकेश कुमार, खुर्शीद हुसैन, विनोद तिवारी, आईडी पालीवाल, प्रताप पडियार, पीसी जोशी, अमित रस्तोगी, नईम अहमद, रियाजुद्दीन, सूरज कुमार, अजीज, राजेंद्र प्रसाद, ललित पंत, देवेंद्र आर्य, नईम खान, विजय साह, दीपक कुमार, अभिषेक मुल्तानिया, मौनी भाई व गोधन सिंह सहित कई कार्यकर्ताओं ने बधाई दी है। वहीं शाकिर अली ने विश्वास दिलाया है कि वे अपनी जिम्मेदारी का पूरी कर्तव्यनिष्ठा से निर्वाह करेंगे।
ःःइनसेटःः
नैनीताल। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने उत्तराखंड परिवहन निगम द्वारा 25 जून से प्रदेश में देहरादून, नैनीताल व टनकपुर मंडल के 84 मार्गों पर, बसों के संचालन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के आम आदमी को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि जनता के विरोध के बाद प्रदेश सरकार को पूर्व में बसों का किराया दोगुना करने के बयान के इतर केवल 67 प्रतिशत किराया बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कम से कम कोरोना काल में सरकार ने बसों का किराया नहीं बढ़ाना चाहिए था। वहीं जिला प्रवक्ता प्रदीप दुम्का ने भी जहां एक ओर बसें चलाने के निर्णय का स्वागत किया, वहीं सरकार को किराया न बढ़ाने की चेतावनी दी।

यह भी पढ़ें : अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में ‘आप’ ने सबसे पहले कांग्रेस का एक विकेट गिराया..

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 जून 2020। ‘आप’ यानी आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने का स्वप्न देख रही है। इस कोशिश में राज्य में संगठन विस्तार पर पूरी ताकत झोंक रही आप ने राज्य में कमजोर विपक्ष को देखते हुए पार्टी ने सबसे पहले विपक्षी कांग्रेस पार्टी का एक विकेट गिराकर सत्ता की सीढ़ी चढ़ने का इरादा जता दिया है। रविवार को हल्द्वानी के कालाढूंगी रोड स्थित पार्टी कार्यालय में पार्टी ने कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता व प्रोफेशनल कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमित जोशी को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है।
इस मौके पर बताया गया कि जोशी ने ही उत्तराखण्ड कांग्रेस के लिए बुद्धिजीवी व पेशेवर वर्ग का बड़ा संगठन तैयार किया था। पंतनगर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियर जोशी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता व पीसीसी सदस्य भी रहे हैं। लिहाजा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया ने इस मौके पर वीडियो कांफ्रेंस से जुड़ते हुए भी यह विश्वास जताया है कि जोशी के आम आदमी पार्टी में शामिल होने से आप को अन्य राजनीतिक व गैरराजनीतिक लोगों को पार्टी से जोड़ने और मिशन 2022 में मजबूती मिलेगी। इस मौके पर जोशी जी के साथ राजनीतिक विशेषज्ञ रोहित सिंह, बागेश्वर से सुरेश दीवान, खुशबू कपिल सहित अन्य लोगों ने भी आप केा 2022 में उत्तराखंड में विजयी बनाने का संकल्प लिया। इस दौरान जोशी ने कहा की वे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की समाज के प्रति समर्पण की कार्यशैली, विचारधारा से प्रभावित होकर आप में शामिल हुए हैं। वहीं आप के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने कहा की अमित जोशी के आने से आम आदमी पार्टी की ताकत उत्तराखंड प्रदेश में कई गुना बढ़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वक्त में पूरे उत्तराखण्ड और खासकर कुमाऊं मंडल में संगठन विस्तार में अमित जोशी की बड़ी भूमिका रहने वाली है। इस मौके पर प्रदेश संगठन मंत्री डीएस कोटलिया, प्रदीप दुम्का, श्रीकांत खंडेलवाल व तृलोचन जोशी आदि कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
चित्र परिचयः हल्द्वानी में आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता अमित जोशी।

यह भी पढ़ें : हवाई जहाज से अधिक बसों का किराये करने पर आप ने सरकार को चेताया

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जून 2020। आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने उत्तरासंड की भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश में बसों का किराया दुगुना करने के आदेश की तीव्र आलोचना की है, और प्रदेश सरकार के इस कदम को खुली लूट की संज्ञा दी है।
प्रेस को जारी बयान में कलेर ने कहा है कि प्रदेश में बस संचालन शुरु करने से पहले सरकार ने जिस तरह से किराया दुगुना करने की घोषणा की है, वह पिछले तीन महीनों में कोरोना की महामारी के कारण बुरी आर्थिक स्थिति झेल रही प्रदेश की गरीब जनता, छात्र, मजदूर, महिलओ व पूरे प्रदेश की जनता के मुह पर करारा तमाचा है। उन्होने कहा कि देहरादून से पंतनगर या हल्द्वानी आने पर लगभग तीन हजार से भी ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा जो कि जहाज के किराये से भी कहीं ज्यादा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस घोषणा को अविलंब वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि अन्यथा सरकार को इसका खामियाजा 2022 में भुगतना पड़ेगा। कहा कि आप इसके विरोध में जो भी करना पड़ेगा करेगी। जिला प्रवक्ता प्रदीप दुम्का ने भी प्रदेश सरकार के इस कदम को जनता की जेब में डाका डालने की कवायद करार दिया है।

यह भी पढ़ें : आम आदमी पार्टी ने किया नैनीताल विधानसभा के युवा मोर्चा का गठन, भवाली नगर एवं बेतालघाट के ब्लॅाक अध्यक्ष भी किये मनोनीत

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जून 2020। आम आदमी पार्टी नैनीताल विधानसभा में लगातार संगठन का विस्तार करने के लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देती जा रही है। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को पार्टी के विधानसभा प्रभारी व जिला प्रवक्ता प्रदीप दुम्का ने प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर से सलाह-मशविरा कर युवा मोर्चा का गठन करते हुए राजेंद्र आर्य को अध्यक्ष, सूरज कुमार को महासचिव, ललित पंत व अभिषेक मुल्तानिया को उपाध्यक्ष, दीपक को सचिव, देंव्रद को कोषाध्यक्ष, जोगेंद्र प्रसाद व अमित पिटसानी को कार्यकारिणी सदस्य, मनोज को मीडिया प्रभारी व एजाज लईक को सह मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सोंपी है। इसके अलावा भवाली नगर पालिका के सभासद व व्यवसायी मुकेश कुमार को भवाली नगर का अध्यक्ष एवं गोधन सिंह जलाल को बेतालघाट विकास खंड का अध्यक्ष मनोनीत किया है। इन सभी मनोनयनों पर शाकिर अली, विजय साह, डीएस नेगी, आरपी पंत, एलएम पंत, गंगा सिंह, नवीन उप्रेती, नईम व प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर आदि ने बधाई देते हुए हर्ष जताया है।

यह भी पढ़ें : अधिवक्ता खुर्शीद हुसैन आम आदमी पार्टी के विधानसभा मीडिया प्रभारी नियुक्त

मो. खुर्शीद हुसैन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जून 2020। आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत स्वयं को राज्य में तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए प्रयासरत आम आदमी इन दिनों प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर की अगुवाई में संगठन के विस्तार में जुटी हुई है। इसी कड़ी में मंगलवार को पार्टी के विधानसभा संयोजक प्रदीप दुम्का ने मुख्यालय स्थित जिला न्यायालय में युवा अधिवक्ता एवं नगर की समस्याओं के प्रति जागरूक ‘आजाद मंच’ के संस्थापक मो. खुर्शीद हुसैन को पार्टी से जोड़ने के साथ ही नैनीताल विधानसभा के मीडिया प्रभारी पद का दायित्व भी सोंप दिया है। उनकी नियुक्ति पर पार्टी शाकिर अली, नईम, विजय साह, डीएस नेगी, गंगा सिंह, पीसी जोशी, एलएम पंत, राजेंद्र, दीपक, सूरज, मुकेश, उमेश तिवारी, इस्लाम, विनोद तिवारी, प्रताप पडियार, आईडी पालीवाल, दीपा आर्या आदि ने हर्ष जताया है।
वहीं नवनियुक्त मीडिया प्रभारी खुर्शीद ने कर्तव्यनिष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता से पार्टी हित में कार्य करने का संकल्प जताया है। साथ ही यह बड़ी जिम्मेदारी मिलने के लिए पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल, प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर, विधानसभा प्रभारी प्रदीप दुम्का, संदीप भटनागर व शाकिर अली सहित अन्य कार्यकर्ताओं का आभार जताया है।

यह भी पढ़ें : आम आदमी पार्टी ने प्रदेश की सभी विधानसभाओं के लिये दो-दो प्रभारियों की घोषणा, देखें सूची

-प्रभारियों को दिया बूथ स्तर तक संगठन विस्तार का दायित्व
नवीन समाचार, नैनीताल, 09 जून 2020। आम आदमी पार्टी भी आगामी विधानसभा चुनावों के लिये तैयारी करती नजर आ रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को पार्टी के प्रदेश प्रभारी व दिल्ली के विधायक दिनेश मोहनिया तथा प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने प्रदेश में संगठन का विस्तार करते हुए समस्त विधानसभाओं के लिए दो-दो प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। कलेर ने बताया कि प्रभारियांे पर अपनी विधानसभा में बूथ स्तर तक संगठन के विस्तार का दायित्व होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित होने के लिये प्रयासरत है, ताकि प्रदेश की जनता को कांग्रेस और भाजपा के कुशासन से मुक्ति दिलायी जा सके। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी की नजर आगामी विधानसभा चुनावों पर है।
पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री डीएस कोटलिया ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस मित्र विपक्ष की भूमिका में है, जो कि राज्य के लिए अनिष्टकारी संकेत है, इसलिए जनता के पास स्वयं आगे आकर विकल्प बनने का ही विकल्प है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप दुम्का ने कहा कि कोरोना काल में भी राज्य सरकार की अदूरदर्शिता का खामियाजा प्रदेश की जनता भुगतने को मजबूर है।

नैनीताल : अल्पसंख्यकों का हो रहा कांग्रेस पार्टी से मोहभंग ? आज एक और पदाधिकारी ने पद के साथ ही छोड़ दी पार्टी

यह भी पढ़ें : जमरानी में खनन व विरोध पर दर्ज मुकदमों के मुद्दे पर आई हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

-आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने क्षेत्र का दौरा करने के बाद कही बात
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मई 2020। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को प्रदेश संयोजक एसएस कलेर की अगुवाई में जनपद के विधानसभा भीमताल के अंतर्गत जमरानी क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के विरोध में स्थानीय किसानों व नागरिकों द्वारा किए जा रहे विरोध का जायजा लेने के लिए जमरानी अमिया आदि ग्रामों का भ्रमण किया और स्थानीय किसानों व जनप्रतिनिधियों से मिलकर समस्या की जानकारी ली। इस मौके पर कलेर ने ग्रामीणों द्वारा किये जा रहे विरोध का समर्थन किया।
उन्होंने दावा किया कि खनन पट्टा अमिया क्षेत्र का है और चुगान जमरानी क्षेत्र में हो रहा है। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि बाहरी प्रदेशों के लोगों द्वारा बिना मास्क एवं शारीरिक दूरी बनाये लॉक डाउन में किये जा रहे विरोध प्रदर्शन पर प्रशासन ने उल्टे 35 महिलाओं सहित ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमे लगा दिए। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच किसी सक्षम अधिकारी से करवाने व अवैध खनन से हुए पर्यावरण, राजस्व आदि की हानि का आकलन किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाने का सरकार से आग्रह भी किया। कहा कि पार्टी इस मामले में अपने कानूनी सेल की सहायता लेकर नैनीताल हाईकोर्ट के द्वार खटखटाने पर भी विचार करेगी। इस मौके पर पार्टी के संगठन मंत्री देवेंद्र कोटलिया, नैनीताल जिला प्रवक्ता प्रदीप दुम्का आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : श्रमिकों एवं किसानों के मुद्दों पर सामूहिक अवकाश पर बैठे आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता

श्रमिकों एवं किसानों के मुद्दों पर सामूहिक अवकाश पर बैठे आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता।

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मई 2020। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को प्रदेश संयोजक एसएस कलेर की अगुवाई में केंद्र एवं राज्य सरकारों की श्रमिक एवं किसान विरोधी नीतियों के विरोध में प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में सामूहिक उपवास रखा। श्री कलेर ने बताया कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी व दिल्ली के विधायक दिनेश मोहनिया के निर्देशों एवं उनके द्वारा पूर्व में तय कार्यक्रम के तहत लॉक डाउन के दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उपस्थित व प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश संयोजक कलेर ने कहा की देश में कई राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में लागू श्रमिक कानूनों में फेरबदल किया है, जोकि प्रथम दृष्टि में श्रमिक विरोधी कानून है।
उन्होंने कहा कि लॉक डाउन के दौरान सबसे ज्यादा परेशान श्रमिक ही है, जोकि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसी तरह प्रदेश के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्र के किसानों की भी दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। लगातार वर्षा एवं ओलावृष्टि के चलते किसानों की आर्थिक स्थिति भी लगातार खराब होती जा रही है। आम आदमी पार्टी लगातार किसानों की ऋण माफी बिजली व पानी के बिलों में माफी व किसानों को मुफ्त में खाद, बीज की व्यवस्था, गन्ना किसानों को पिछला भुगतान आदि मांगो के लिए बराबर आवाज उठाती रही है, लेकिन उत्तराखंड सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि किसान एवं श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में आज पूरे प्रदेश में कार्यकर्ताओं द्वारा उपवास रखा गया जिसमें सभी जगहों पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं द्वारा भाग लिया। भविष्य में भी श्रमिकों एवं किसानों हेतु और भी कार्यक्रम किए जाएंगे और सोती हुई सरकार को जगाने का प्रयास लगातार जारी रहेगा। इस मौके पर पूर्व जिला संयोजक प्रदीप दुम्का सहित कई अन्य पार्टी नेता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : दिल्ली में प्रचंड जीत के बाद उत्तराखंड पर आप की नजरें…

नवीन समाचार, देहरादून, 12 फरवरी 2020। दिल्ली चुनाव में आप की प्रचंड जीत के बाद उत्तराखंड में पार्टी की जोर आजमाइश को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। कहने वालों की कमी नहीं है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में आप मैदान में उतरकर खम ठोकेगी और जनता के सामने तीसरा विकल्प रखेगी। हालांकि इसी तरह की मिलती जुलती स्थितियों में 2014 में लोकसभा चुनाव की पांचों सीटों पर चुनाव लड़ने का बुरा अनुभव आप के जेहन में अब भी ताजा है। पांच में से तीन सीटों पर चर्चित और जानेे पहचाने चेहरे उतारने के बावजूद पार्टी का बुरा हश्र हुआ था।

2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीतकर आप ने पूरे देश को चौंका दिया था। कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनी तो फिर पार्टी के रणनीतिकारों ने आस पास के राज्यों में पांव पसारने शुरू कर दिए। पंजाब में कामयाबी मिली लेकिन उत्तराखंड में पार्टी पिट गई। लोकसभा चुनाव 2014 में उत्तराखंड की पांचों सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आप के लिए किसी सीट पर जीतना तो दूर की बात, वह कहीं भी दूसरे नंबर पर भी न आ सकी। हरिद्वार सीट पर पार्टी ने देश की पहली महिला डीजीपी रही कंचन चौधरी भट्टाचार्य को उम्मीदवार बनाया था। वह भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा केंद्रीय मंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं, लेकिन चौथे नंबर पर रहीं।

आप ने नैनीताल सीट पर जनकवि और उत्तराखंड आंदोलन में सक्रिय बल्ली सिंह चीमा को उम्मीदवार बनाया था। चीमा वह शख्सियत हैं, जिनके लोकगीतों की उत्तराखंड आंदोलन में धूम मची थी, मगर उनका भी चुनावी प्रदर्शन खराब रहा। टिहरी सीट पर पार्टी अनूप नौटियाल को सामने लेकर आई थी। उत्तराखंड में आपातकालीन चिकित्सा सेवा 108 के सफल संचालन में सीईओ रहते हुए अनूप नौटियाल का उल्लेखनीय योगदान रहा था। हालांकि वह भी बुरी तरह से चुनाव हारे। पौड़ी गढ़वाल सीट पर राकेश सिंह और अल्मोड़ा मेें हरीश चंद्र अपेक्षाकृृत बडे़ नाम नहीं थे। उन्हें भी करारी पराजय मिली।

2014 के बाद उत्तराखंड के छोटे बडे़ किसी चुनाव में आप ने भागीदारी नहीं की है। इस बीच, एक समय आप से जुडे़ प्रख्यात कवि कुमार विश्वास की उत्तराखंड में सक्रियता को उनकी यहां चुनावी सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा था। संकेत देने में वह खुद पीछे नहीं रहे थे। कुमार विश्वास ने बकायदा बयान दिया था कि उनका हरिद्वार में घर है और वह यहीं के निवासी हैं। इसके बावजूद वह चुनावी मैदान से दूर ही रहे।

उत्तराखंड में आप के संगठन विस्तार के लिए बातें तो बहुत हुईं लेकिन काम नहीं हो पाया। आधे अधूरे संगठन की स्थिति के बीच आप के नेताओं में सिर फुटव्वल की खबरें ज्यादा आईं। आज की स्थिति में आप का उत्तराखंड में संगठन कहीं नहीं दिखता। भाजपा गांव गांव, गली गली में है। बुरी स्थिति से गुजर रही कांग्रेस का भी कैडर वोट हर जगह मौजूद है। हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में बसपा भी चुनाव नतीजों को प्रभावित करती है। ऐसी स्थिति के बीच में आप को अपने लिए रास्ता तलाशना है। आज की स्थिति में आप के लिए उत्तराखंड की डगर बहुत आसान नहीं दिख रही है।

यह भी पढ़ें : दिल्ली के चुनावी समर में केजरीवाल ने जारी किया उत्तराखंडी चुनाव गीत, आ रहीं ऐसी प्रतिक्रियाएं

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 13 जनवरी 2020। देश की राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी पार्टियां अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही हैं। इसी कड़ी में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंडी मतदाताओं को लुभाने के लिए उत्तराखंडी-गढ़वाली भाषा में चुनाव गीत जारी किया है। गीत तो अच्छा बना है, परंतु आम के इस चुनावी हथकंडे को लेकर जिस तरह सकारात्मक कम-नकारात्मक प्रतिक्रियाएं अधिक मिल रही हैं, उसके बाद पार्टी का अगला कदम क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी।
देखें केजरीवाल का ट्वीट व गीत तथा इस पर प्रतिक्रियाएं :

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में 8 फरवरी को सभी 70 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे, और 11 फरवरी को चुनाव नतीजों का ऐलान होगा। यहां सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का मुकाबला एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस से है। गढ़वाली भाषा के गीत में केजरीवाल सरकार की उपलब्धियों को गिनाया गया है, साथ ही जमकर तारीफ की गई है। केजरीवाल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि, “गढ़वाली भाषा में आम आदमी पार्टी का चुनावी गीत। इतना शानदार गीत गाने के लिए सुनील थापलियाल जी का शुक्रिया। इस गाने को जरूर सुनिए। गढ़वाली नहीं समझ आती, तब भी सुनिए, मजा आएगा। और खूब शेयर कीजिए।
केजरीवाल के इस ट्वीट पर खासकर उत्तराखंडी समाज की ओर से नकारात्मक प्रतिक्रियाएं अधिक आ रही हैं। किसी ने लिखा है, गीत तो अच्दा है पर गढ़वाली गाने से दिल्ली मे वोट नही मिलेंगे।

यह भी पढ़ें : यदि ‘आप’ ‘ईमानदार’ हैं तो ‘यह’ पार्टी देगी निकाय चुनाव का टिकट, करें ट्राय..

नैनीताल। पहले से ही ‘ईमानदार’ राजनीति का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी ने आगामी निकाय चुनाव के लिए फिर रोचक ऐलान किया है। पार्टी के नैनीताल जिला (पर्वतीय) अध्यक्ष प्रदीप दुम्का ने पार्टी के उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी व दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के विशेष सलाहकार राकेश सिन्हा के हवाले से कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के ऐसे लोग जो उत्तराखंड की सेवा करना चाहते हैं, और ईमानदार हैं, वे आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे लोगों को पार्टी टिकट देगी। साथ ही जो ईमानदार व्यक्ति निर्दलीय भी चुनाव लड़ेंगे, आम आदमी पार्टी उन्हें अपना समर्थन देगी। पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक में श्री दुम्का ने कहा कि आम आदमी पार्टी का अंतिम लक्ष्य उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त ईमानदार व स्वच्छ शासन-प्रशासन की स्थापना करना है। इस हेतु पार्टी आगामी स्थानीय निकाय चुुनावों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने और एक स्वच्छ व ईमानदार प्रशासन के लिए आम आदमी पार्टी से जुड़ने की अपील व आह्वान करती है। कहा कि भाजपा-कांग्रेस दोनों ने प्रदेश की जनता को बारी-बारी से लूटा है, अब प्रदेश की जनता आम आदमी पार्टी के ईमानदार प्रत्याशियों को जिताकर इन दोनों पार्टियों को सबक सिखाएगी।

यह भी पढ़ें : आप की पंजाब इकाई भंग होने की कगार पर…यह हश्र तो होना ही था…

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के बारे में कोई अच्छी खबर विज्ञापनों के अलावा कभी आयी हो, याद नहीं। इधर पार्टी के मुताल्लिक आई विज्ञापन विवाद का शोर थमा भी नहीं कि अब बकौल पार्टी के संस्थापक नेता कुमार विश्वास, ‘थूक कर चाटने’ (अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से लिखित माफी मांगने) के बाद से पार्टी में शुरू हुआ घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की इस हरकत पर आप के पंजाब प्रभारी और सांसद भगवंत मान के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद पार्टी उपाध्यक्ष अमन अरोड़ा ने भी पद छोड़ दिया है। पंजाब चुनाव के दौरान आप के साथ गठबंधन में शामिल लोक इंसाफ पार्टी ने भी अब कड़े तेवर अपनाते हुए उसके दोनों विधायकों (बैंस बंधुओं) ने विरोध का ऐलान करते हुए खुद को गठबंधन से अलग कर लिया है। ऐसे में आप की पंजाब इकाई भंग होने की कगार पर है…यह हश्र तो शायद पहले से तय था…

आप में विज्ञापन के लिए बवाल, केजरीवाल के सामने विधायक ने मुख्य सचिव को जड़ा थप्पड़ !

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी की ओर से कोई अच्छी खबर विज्ञापनों के अलावा कभी आयी हो, सुना नहीं। इधर पार्टी के मुताल्लिक आई सबसे ताजा खबर, जिसमें पार्टी के सबसे विवादित व केजरीवाल के मुंहचड़े विधायक अमानतुल्लाह ने आईएएस असोसिएशन और आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा के आरोपों के अनुसार एक खास विज्ञापन छपवाने की जिद न मानने पर दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को केजरीवाल के घर पर, उनकी मौजूदगी में थप्पड़ मार दिया, और मामला मीडिया में आया तो तुरत-फुरत मुख्य सचिव पर दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर के इशारे पर कार्य करने का आरोप लगा दिया। आगे जल्द पीएम नरेंद्र मोदी पर भी मामले में निशाना साधा जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। आप की यही नियति है… यह हम इस पार्टी के गठन से कहते आये हैं…

विज्ञापन और मुख्य सचिव थप्पड़ विवाद :

आरोप है कि आप सरकार एक विज्ञापन छपवाना चाहती थी, पर सरकार की विजिलेंस टीम ने विज्ञापन को तथ्यों पर आधारित नहीं पाया और इसे प्रचार करने से रोक दिया। इसीलिये केजरीवाल ने “रात बारह बजे” मुख्य सचिव के साथ अपने घर बैठक रखी थी। विपक्ष को भी मौक़ा मिल गया है, यहाँ से सरकार को हटा कर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांगें भी उठने लगी हैं। उधर मंगलवार सुबह दिल्ली सचिवालय में मंत्री इमरान हुसैन के आते ही दिल्ली सचिवालय के कर्मचारी भड़क गए, जिस पर मंत्री को सचिवालय से भागना पड़ा। इस पूरी घटना को लेकर आईएएस असोसिएशन ने दिल्ली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। असोसिएशन के पदाधिकारी इस मुद्दे पर दिल्ली के उपराज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं. तथा शाम तक केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह सचिव से भी मिलने वाले हैं।

चाहें तो यह भी पढ़ लें : अब केजरीवाल ने बतायी अपनी जाति, कहा मैं बनिया हूं, इसलिए..

अरविंद केजरीवाल और आप :  इस ‘झाड़ू’ ने तो गंदगी ही अधिक फैला दी….

इससे पहले भी आप आदमी पार्टी में वही होता रहा, जिसका डर था। आम आदमी पार्टी और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल से मुत्तालिक शायद यही होना-सुनना बाकी था। शायद अपने कर्मों से अपनी नियति में ही ‘बिछड़े सभी बारी-बारी’ लिखा चुके केजरीवाल पर अब उनके प्रमुख सहयोगी कुमार विश्वास ने भी ‘अविश्वास ‘ जता दिया है। यह तब हुआ है जब केजरीवाल ने कभी कांग्रेस में रहते उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले और ‘अपनी गुप्ता बिरादरी’ के लोगों को बिना किसी ‘आन्दोलन  के इतिहास ‘ के राज्य सभा भेजने के लिए विश्वास पर तरजीह दे कर ‘विश्वास’ जताया है। अपनी कही बात सही ठहराई है, ‘हाँ मैं बनिया हूँ, धंधा समझता हूँ ‘.. जता दिया राजनीति में वे क्यों हैं , और लालू-मुलायम-मायावती के साथ वे क्यों खड़े होते हैं …।

वहीं इससे पूर्व ऐसी ही स्थिति तब आई थी जब केजरीवाल के पूर्व सहयोगी व मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने उन पर दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगा दिए थे। यह आरोप भले साबित हों या नहीं भी, किन्तु इतना तय है कि इस आरोप के बाद केजरीवाल का चेहरा कभी भी पूर्ववत न जुड़ सकने योग्य स्थिति तक खंडित हो चुका है….।

केजरीवाल का राजनीतिक चेहरा बनने से कहीं अधिक बार और अनवरत टूटता रहा है। यह सिलसिला उनकी पार्टी बनने और इसके उत्थान से ही जारी है। पहली जीत के बाद वे दिल्ली विधानसभा में सरकार बनाना ही नहीं चाहते थे। बहुत मजबूरी-जनदबाव में बनानी पड़ी तो बना ली। और आगे हर कदम, एक कदम सत्ता सुख (बंगला-गाड़ी) बटोरते और फिर मानो याद आते ही ठुकराते चले। क्योंकि नजरें तो दिल्ली की बड़ी कुरसी पर लगी थीं। जन लोकपाल बिल शर्तिया गिर जाएगा, पता था। बिल पास ना होगा तो इस्तीफा दे देंगे, की घोषणा कर चुके थे। बिल विधानसभा के पटल पर रख भी दिया। फिर ठिठके, बिल रखे जाने पर सहमति-असहमति की वोटिंग करवाने को राजी हो गए। इस्तीफा दिया, और चलते बने। किसी ने कहा-पहले ही कहा था, “झाड़ू दो-तीन महीने से अधिक नहीं चलती। सफाई भी तब करती है, जब सफाई करने वाले हाथ अनुभवी हों, उन हाथों में सफाई करने की दृढ़ इच्छा शक्ति हो, नीयत हो। और ना हो, तो यही होता है, सफाई कम होती है-गंदगी अधिक फैल जाती है।” केजरीवाल सरकार ने 49 दिनों में क्या खोया-क्या पाया, इस पर बिना दिमाग खपाए भी विश्लेषण किया जाए तो हर कोई यही कहेगा-“इस झाड़ू ने तो गंदगी ही अधिक फैला दी।”

मैंने पूछा, साहब – आदमी या जनता से पहले “आम” शब्द क्यों लगाते हैं ? जैसे- आम जनता, आम आदमी…
तो वे हँस पड़े,
बोले, “ताकि उसे चूसा जा सके…
और काम निकल जाने पर गुठली की तरह फेंका भी जा सके।”
केजरीवाल ने पहले सभी सरकारी सुख-सुविधाएँ न लेने का वादा किया था, लेकिन पहले बड़े डुप्लेक्स, फिर गाड़ियों पर ललचा गए। गाडी पर बच्चे की क्रिकेट बॉल से हमला बता दिया। कानून मंत्री खुद ही पुलिस बन कानून तोड़ने लगे। दो पुलिस वालों को हटवाने के लिए धरना दिया, फिर भी उन्हें नहीं हटा पाए। पानी-बिजली के बिल घटाए भी तो सब्सिडी से और आधे किए तो सिर्फ ‘अपनों’ के (वह भी सरकार जाने के बाद पता नहीं होंगे भी या नहीं)। वादे के अनुरूप शीला के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। यानी कुल मिलाकर अपनी साख ही गिराई। जनता को उम्मीद बंधाकर उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सरकार बनाते समय तो जनता की राय ली थी, गिराते वक्त राय नहीं ली। मौका था, लेकिन जरूरत ही नहीं समझी। इसका अंदाजा राजनीति के जानने वालों को पहले से ही था।
ऐसे में यह सवाल भी तभी से उठने लगे कि जो सीएम पद की कुर्सी पर 50 दिन पूरे नहीं कर पाये, क्या पीएम पद की कुर्सी पर 5 साल बैठने का ख्वाब देखने योग्य भी हें। उल्टे कहीं ‘आधी छोड़ सारी को धाये, आधी मिले न पूरी पावे’ कि उक्ति चरितार्थ हो जाये।

…क्या अरविन्द ही इकलौते ‘आम आदमी’ हैं ?

दिल्ली को मध्यावधि चुनावों की और धकेलने का फैसला अरविन्द केजरीवाल का था या कि उनके ‘कथित और पंजीकृत आम आदमी’ का ? क्या दिल्ली का ‘पंजीकृत आम आदमी’ वाकई यही चाहता था ? या केवल ‘आम आदमी’ के नाम पर ‘आम आदमी’ को ही ‘बेवकूफ’ बना रहे ‘आम आदमी पार्टी’ के सर्वेसर्वा-अरविन्द अपने दम्भ में यह चाहते थे ?
नहीं तो ‘आप’ भाजपा को जन लोकपाल व अन्य मुद्दों पर सशर्त समर्थन देने की बात कर रहे प्रशांत और पूर्व सहयोगी रही किरण बेदी की तो सुनते…, क्या वह ‘आम आदमी’ नहीं थे, या कि अरविन्द ही इकलौते ‘आम आदमी’ हैं ? कांग्रेस ने चुनाव के तत्काल बाद उन्हें बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया था, उसे भी आप ने नहीं माना। या कि अरविन्द चुनाव पूर्व किसी भी अन्य राजनीतिक दल की तरह, अपने ही किये असम्भव से ‘चुनावी वादों’ को पूरा करने से डर गए थे ? वैसे भी अपने राजनीतिक गुरु अन्ना हजारे से लेकर किरन बेदी व स्वामी अग्निवेश आदि को एक-एक कर खो चुके अति ऊर्जावान अरविंद केजरीवाल की शख्सियत और उनका इतिहास आश्वस्त नहीं करता कि वह सबको साथ लेकर चल सकते हैं।

आम आदमी की नहीं ‘अकेले’ की (‘अ’ से अरविंद, ‘के’ से केजरीवा‘ले’ के दिमाग की उपज) है आप

आम आदमी ने नहीं अरविंद के दिमाग ने जिताया है ‘आप’ को..
जी हां, भले विश्वास न हो, पर यही सही है। केवल एक सवाल का जवाब इस बात को स्वतः साबित कर सकता है। आम आदमी के प्रतीक-जरूरतें क्या होती हैं, जी हां, रोटी, कपड़ा और मकान। यह प्रतीक व जरूरतें भले आज के दौर में गाड़ी, बंगला भी हो गए हों तो भी झाड़ू तो कभी भी ना होंगे। केजरीवाल ने दिल्ली वालों के बिजली के कटे कनेक्शन जोड़कर और पानी के बड़े बिलों की बात से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी, सो बिजली के कोई उपकरण यानी पानी के नल जैसे चुनाव चिन्ह भी उनके हो सकते थे, लेकिन ऐसा भी न हुआ। जितने लोग बीते दिनों दिल्ली की गलियों में झाड़ू हाथों में लहराते दिखे, उनमें से महिलाओं को छोड़कर कोई मुश्किल से ही अपने घर में भी झाड़ू लगाकर सफाई करते होंगे।
लेकिन यही झाड़ू है, जिसने एक खास जाति वर्ग के लोगों को इस चुनाव चिन्ह की बदौलत ही ‘आप’ से जोड़ दिया। क्या यह सही नहीं है। और यह इत्तफाक है या कि सोची समझी रणनीति ? खुद सोच लें। यानी ‘आप’ की राजनीति जातिगत राजनीति से बाहर नहीं निकली है।
अब धर्म-पंथ की राजनीति की बात….
मौजूदा कांग्रेस-भाजपा की राजनीति से बात शुरू करते हैं। हिंदुओं और धारा 370 की बात करने वाली तथा बाबरी विध्वंस व गोधरा की आरोपी भाजपा दूसरे धर्म विशेष की घोषित रूप से दुश्मन नंबर एक है। सो इस धर्म विशेष के लोग उस पार्टी को वोट देते हैं, जिसमें भाजपा को हराने की क्षमता दिखती है, और इस कसौटी पर आम तौर पर लोक सभा चुनावों में कांग्रेस तो यूपी जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों में सपा और बसपा जैसी पार्टियों पर उनकी नेमत बरस पड़ती है। इधर दिल्ली के विस चुनावों में कांग्रेस की डूबती नैया को देखते हुए इस धर्म के मतदाताओं के पास एक ही विकल्प बचा-आप। यह है आप की जीत का दूसरा कारण। और साफ हो गया कि आप ने राजनीति को जाति व धर्म की राजनीति से बाहर नहीं निकाला।
लेकिन इसके साथ ही अब तक देश में कांग्रेस के कुशासन के विकल्प के रूप में मोदी को देख रहे नवमतदाताओं के मन में दिल्ली विस चुनावों के दौरान आप निःसंदेह एक विकल्प के उभरी। अन्ना के आंदोलन और निर्भया मामले में दिल्ली की सड़कों पर उतरे दक्षिणपंथी व राष्ट्रवादी विचारों की राजनीति के इन नवांकुरों को भी लगा कि विस चुनावों में आप को आजमा लिया जाए, और यह फैक्टर भी आप की जीत का एक कारण बना।
एक अन्य कोण पर दिल्ली में उपभोक्तावाद, पश्चिमीकरण आदि प्रतिमानों के साथ बामपंथी विचारधारा के लोगों के समक्ष अब तक किसी अन्य विकल्प के अभाव में कांग्रेस को ही वोट डालने की मजबूरी रहती थी। इस वर्ग को इस बार के चुनावों में आप अपने अधिक करीब नजर आई। उनके समक्ष अपने प्रभाव क्षेत्रों में खिसकती जमीन को उर्वर और उन्नत बताने की मजबूरी भी थी, सो उन्होंने  भी आप को वोट दिए, और हो गया इस राजनीतिक कॉकटेल से आप का पहले चुनावों में करिश्माई प्रदर्शन।
भविष्य की चिंताएं…
अब यह भी देख लें कि दिल्ली की जनता से प्रति परिवार प्रतिदिन 700 लीटर पीने का पानी और मौजूदा से आधी दर पर बिजली देने का वादा करने के बाद किसी तरह उसे पूरा करने का जोखिम लेने से बच रही आप का भविष्य क्या हो सकता है।
देश के लोकतांत्रिक राजनीतिक इतिहास में यह 70 के दशक से ही देखा जा रहा है कि जिस दल या उसके नेता ने देश या किसी राज्य को अपनी हठधर्मिता के कारण मध्यावधि चुनाव की आग में धकेला उसका हश्र क्या हुआ। फरवरी-2005 के बिहार विधानसभा के चुनाव में आप की ही तरह राजद से अलग होकर बंगला चुनाव चिन्ह के साथ रामविलास पासवान अपनी लोक जन शक्ति पार्टी-लोजपा को 29 विधायक जिता लाए थे, लेकिन उन्होंने नितीश कुमार को समर्थन नहीं दिया, फलस्वरूप बिहार में राष्ट्रपति शासन लग गया, जिसके बाद अक्टूबर-2005 में हुए मध्यावधि चुनाव में लोजपा 10 सीटों पर और आगे 2010 के चुनाव में महज 4 सीटों पर सिमट गई, बाद में उनमें से भी तीन विधायक जदयू में शामिल हो गए। देश को मध्यावधि चुनावों की ओर धकेलने वाली मोरारजी देसाई सरकार के साथ भी यही कुछ हुआ था।
आप की तरह आंध्र में 1983 में ‘तेलुगु देशम’ और 1985 में असम में तब महज छात्र संघ रहे प्रफुल्ल कुमार महंत की अगुवाई वाले ‘असम गंण परिषद’ ने अनुपात की दृष्टि से आप से भी अधिक सीटें हासिल की थीं, लेकिन बाद में वह भी मुख्य धारा की राजनीति में ही बिला गईं।
आप वर्तमान दौर में एक-दूसरे के कार्बन कॉपी कहे जाने वाले कांग्रेस-भाजपा जैसे मौजूदा राजनीतिक दलों के बीच जनता में उपजी राजनीतिक थकान के बीच नई ऊर्जा का संचार करती हुई उम्मीद तो जगाती है, लेकिन अपने मुखिया और ना कहते हुए भी ‘एकोऽहम् द्वितियो नास्ति’ के पुरोधा नजर आ रहे अरविंद केजरीवाल के दंभ से डरा भी रही है, कि वह अपने पहले कदम से ही मौजूदा अन्य राजनीतिक दलों जैसा ही व्यवहार कर रही है। चुनाव परिणामों के बाद भाजपा की ही तरह उसने भी आम जनता की भावनाओं नहीं वरन राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर सरकार बनाने से तौबा कर ली है। चुनाव के दौरान उसने कांग्रेस को निसाने पर लिया, और भाजपा के खिलाफ मुंह नहीं खोला, क्योंकि यहां उसे कांग्रेस को सत्ता से च्युत करना था और इस लड़ाई में उसके साथ मोदी को प्रधानमंत्री देखने वाले युवा भी थे। और परिणाम आने से हौंसले बुलंद होने के बाद भाजपा को नंबर वन दुश्मन करार दे दिया है, क्योंकि यहां से उन्हें लगता है कि आज के दौर के बड़े दुश्मन को वह हरा चुके हैं, और इस ताकत से वह अपने बड़े दुश्मन से भी पार पा लेंगे, नहीं भी तो इस लोक सभा चुनाव में अपनी राष्ट्रीय पहचान तो बना ही लेंगे।
और आखिर में केवला इतना कि एक राजनीतिक दल के रूप में ‘आप’ जो कर रही है, उससे किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि उसे एक राजनीतिक दल के रूप में राजनीतिक नफे-नुकसान का हिसाब लगाकर हर निर्णय लेने की स्वतंत्रता और पूर्ण अधिकार है। बस अगर वह ‘आम आदमी’ का नाम लेकर ढोंग करेगी तो शायद जनता उसे दूसरा मौका नहीं देगी।

कैसे बना अरविंद केजरीवाल , जानिए पूरी कहानी!

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली एनजीओ गिरोह ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ ने घोर सांप्रदायिक ‘सांप्रदायिक और लक्ष्य केंद्रित हिंसा निवारण अधिनियम’ का ड्राफ्ट तैयार किया है। एनएसी की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एनजीओ से जुड़ गए। अरविंद लंबे अरसे तक राजस्व विभाग से छुटटी लेकर भी सरकारी तनख्वाह ले रहे थे और एनजीओ से भी वेतन उठा रहे थे, जो ‘श्रीमान ईमानदार’ को कानूनन भ्रष्टाचारी की श्रेणी में रखता है। वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था, जिसे उभरते हुए नेतृत्व का प्रतीक माना जा सके। इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।
अरविंद को समझने से पहले ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ को समझ लीजिए!
अमेरिकी नीतियों को पूरी दुनिया में लागू कराने के लिए अमेरिकी खुफिया ब्यूरो ‘सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए)’ अमेरिका की मशहूर कार निर्माता कंपनी ‘फोर्ड’ द्वारा संचालित ‘फोर्ड फाउंडेशन’ एवं कई अन्य फंडिंग एजेंसी के साथ मिलकर काम करती रही है। 1953 में फिलिपिंस की पूरी राजनीति व चुनाव को सीआईए ने अपने कब्जे में ले लिया था। भारतीय अरविंद केजरीवाल की ही तरह सीआईए ने उस वक्त फिलिपिंस में ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ को खड़ा किया था और उन्हें फिलिपिंस का राष्ट्रपति बनवा दिया था। अरविंद केजरीवाल की ही तरह ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ का भी पूर्व का कोई राजनैतिक इतिहास नहीं था। ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ के जरिए फिलिपिंस की राजनीति को पूरी तरह से अपने कब्जे में करने के लिए अमेरिका ने उस जमाने में प्रचार के जरिए उनका राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ‘छवि निर्माण’ से लेकर उन्हें ‘नॉसियोनालिस्टा पार्टी’ का उम्मीदवार बनाने और चुनाव जिताने के लिए करीब 5 मिलियन डॉलर खर्च किया था। तत्कालीन सीआईए प्रमुख एलन डॉउल्स की निगरानी में इस पूरी योजना को उस समय के सीआईए अधिकारी ‘एडवर्ड लैंडस्ले’ ने अंजाम दिया था। इसकी पुष्टि 1972 में एडवर्ड लैंडस्ले द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार में हुई।
ठीक अरविंद केजरीवाल की ही तरह रेमॉन मेग्सेसाय की ईमानदार छवि को गढ़ा गया और ‘डर्टी ट्रिक्स’ के जरिए विरोधी नेता और फिलिपिंस के तत्कालीन राष्ट्रपति ‘क्वायरिनो’ की छवि धूमिल की गई। यह प्रचारित किया गया कि क्वायरिनो भाषण देने से पहले अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ड्रग का उपयोग करते हैं। रेमॉन मेग्सेसाय की ‘गढ़ी गई ईमानदार छवि’ और क्वायरिनो की ‘कुप्रचारित पतित छवि’ ने रेमॉन मेग्सेसाय को दो तिहाई बहुमत से जीत दिला दी और अमेरिका अपने मकसद में कामयाब रहा था। भारत में इस समय अरविंद केजरीवाल बनाम अन्य राजनीतिज्ञों की बीच अंतर दर्शाने के लिए छवि गढ़ने का जो प्रचारित खेल चल रहा है वह अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए द्वारा अपनाए गए तरीके और प्रचार से बहुत कुछ मेल खाता है।
उन्हीं ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ के नाम पर एशिया में अमेरिकी नीतियों के पक्ष में माहौल बनाने वालों, वॉलेंटियर तैयार करने वालों, अपने देश की नीतियों को अमेरिकी हित में प्रभावित करने वालों, भ्रष्टायचार के नाम पर देश की चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने वालों को ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ मिलकर अप्रैल 1957 से ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ अवार्ड प्रदान कर रही है। ‘आम आदमी पार्टी’ के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके साथी व ‘आम आदमी पार्टी’ के विधायक मनीष सिसोदिया को भी वही ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार मिला है और सीआईए के लिए फंडिंग करने वाली उसी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ के फंड से उनका एनजीओ ‘कबीर’ और ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ मूवमेंट खड़ा हुआ है।
भारत में राजनैतिक अस्थिरता के लिए एनजीओ और मीडिया में विदेशी फंडिंग!
‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली। अमेरिका के साथ मिलकर नीदरलैंड भी अपने दूतावासों के जरिए दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिकी-यूरोपीय हस्तक्षेप बढ़ाने के लिए वहां की गैर सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ को जबरदस्त फंडिंग करती है।
अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है। इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है। ‘हिवोस’ को फोर्ड फाउंडेशन भी फंडिंग करती है।
डच एनजीओ ‘हिवोस’ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में केवल उन्हीं एनजीओ को फंडिंग करती है,जो अपने देश व वहां के राज्यों में अमेरिका व यूरोप के हित में राजनैतिक अस्थिरता पैदा करने की क्षमता को साबित करते हैं। इसके लिए मीडिया हाउस को भी जबरदस्त फंडिंग की जाती है। एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। दक्षिण एशिया में इस समय ‘पनोस’ के करीब आधा दर्जन कार्यालय काम कर रहे हैं। ‘पनोस’ में भी फोर्ड फाउंडेशन का पैसा आता है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है। ‘सीएनएन-आईबीएन’ व ‘आईबीएन-7’ चैनल के प्रधान संपादक राजदीप सरदेसाई ‘पॉपुलेशन काउंसिल’ नामक संस्था के सदस्य हैं, जिसकी फंडिंग अमेरिका की वही ‘रॉकफेलर ब्रदर्स’ करती है जो ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार के लिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ के साथ मिलकर फंडिंग करती है।
माना जा रहा है कि ‘पनोस’ और ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ की फंडिंग का ही यह कमाल है कि राजदीप सरदेसाई का अंग्रेजी चैनल ‘सीएनएन-आईबीएन’ व हिंदी चैनल ‘आईबीएन-7’ न केवल अरविंद केजरीवाल को ‘गढ़ने’ में सबसे आगे रहे हैं, बल्कि 21 दिसंबर 2013 को ‘इंडियन ऑफ द ईयर’ का पुरस्कार भी उसे प्रदान किया है। ‘इंडियन ऑफ द ईयर’ के पुरस्कार की प्रयोजक कंपनी ‘जीएमआर’ भ्रष्टािचार में में घिरी है।
‘जीएमआर’ के स्वामित्व वाली ‘डायल’ कंपनी ने देश की राजधानी दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा विकसित करने के लिए यूपीए सरकार से महज 100 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन हासिल किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ‘सीएजी’ ने 17 अगस्त 2012 को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जीएमआर को सस्ते दर पर दी गई जमीन के कारण सरकारी खजाने को 1 लाख 63 हजार करोड़ रुपए का चूना लगा है। इतना ही नहीं, रिश्वत देकर अवैध तरीके से ठेका हासिल करने के कारण ही मालदीव सरकार ने अपने देश में निर्मित हो रहे माले हवाई अड्डा का ठेका जीएमआर से छीन लिया था। सिंगापुर की अदालत ने जीएमआर कंपनी को भ्रष्टााचार में शामिल होने का दोषी करार दिया था। तात्पर्य यह है कि अमेरिकी-यूरोपीय फंड, भारतीय मीडिया और यहां यूपीए सरकार के साथ घोटाले में साझीदार कारपोरेट कंपनियों ने मिलकर अरविंद केजरीवाल को ‘गढ़ा’ है, जिसका मकसद आगे पढ़ने पर आपको पता चलेगा।
‘जनलोकपाल आंदोलन’ से ‘आम आदमी पार्टी’ तक का शातिर सफर!
आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची। इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझ गए थे। स्वामी रामदेव के मना करने पर उनके मंच का उपयोग करते हुए महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्टानचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया। अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे। जनलोकपाल आंदोलन के दौरान जो मीडिया अन्ना-अन्ना की गाथा गा रही थी, ‘आम आदमी पार्टी’ के गठन के बाद वही मीडिया अन्ना को असफल साबित करने और अरविंद केजरीवाल के महिमा मंडन में जुट गई।
विदेशी फंडिंग तो अंदरूनी जानकारी है, लेकिन उस दौर से लेकर आज तक अरविंद केजरीवाल को प्रमोट करने वाली हर मीडिया संस्थान और पत्रकारों के चेहरे को गौर से देखिए। इनमें से अधिकांश वो हैं, जो कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के द्वारा अंजाम दिए गए 1 लाख 76 हजार करोड़ के 2जी स्पेक्ट्रम, 1 लाख 86 हजार करोड़ के कोल ब्लॉक आवंटन, 70 हजार करोड़ के कॉमनवेल्थ गेम्स और ‘कैश फॉर वोट’ घोटाले में समान रूप से भागीदार हैं।
आगे बढ़ते हैं…! अन्ना जब अरविंद और मनीष सिसोदिया के पीछे की विदेशी फंडिंग और उनकी छुपी हुई मंशा से परिचित हुए तो वह अलग हो गए, लेकिन इसी अन्ना के कंधे पर पैर रखकर अरविंद अपनी ‘आम आदमी पार्टी’ खड़ा करने में सफल रहे। जनलोकपाल आंदोलन के पीछे ‘फोर्ड फाउंडेशन’ के फंड को लेकर जब सवाल उठने लगा तो अरविंद-मनीष के आग्रह व न्यूयॉर्क स्थित अपने मुख्यालय के आदेश पर फोर्ड फाउंडेशन ने अपनी वेबसाइट से ‘कबीर’ व उसकी फंडिंग का पूरा ब्यौरा ही हटा दिया। लेकिन उससे पहले अन्ना आंदोलन के दौरान 31 अगस्त 2011 में ही फोर्ड के प्रतिनिधि स्टीवेन सॉलनिक ने ‘बिजनस स्टैंडर’ अखबार में एक साक्षात्कार दिया था, जिसमें यह कबूल किया था कि फोर्ड फाउंडेशन ने ‘कबीर’ को दो बार में 3 लाख 69 हजार डॉलर की फंडिंग की है। स्टीवेन सॉलनिक के इस साक्षात्कार के कारण यह मामला पूरी तरह से दबने से बच गया और अरविंद का चेहरा कम संख्या में ही सही, लेकिन लोगों के सामने आ गया।
सूचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। सीरिया, इजिप्ट, लीबिया आदि देश में सरकार को अस्थिर करने के लिए अमेरिका की इसी ‘आवाज’ संस्था ने वहां के एनजीओ, ट्रस्ट व बुद्धिजीवियों को जमकर फंडिंग की थी। इससे इस विवाद को बल मिलता है कि अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है, जो केंद्र सरकार को संदेह के दायरे में खड़ा करता है। वकील एम.एल.शर्मा कहते हैं कि ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट-2010’ के मुताबिक विदेशी धन पाने के लिए भारत सरकार की अनुमति लेना आवश्यक है। यही नहीं, उस राशि को खर्च करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना भी जरूरी है। कोई भी विदेशी देश चुनावी चंदे या फंड के जरिए भारत की संप्रभुता व राजनैतिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं कर सके, इसलिए यह कानूनी प्रावधान किया गया था, लेकिन अरविंद केजरीवाल व उनकी टीम ने इसका पूरी तरह से उल्लंघन किया है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
अमेरिकी ‘कल्चरल कोल्ड वार’ के हथियार हैं अरविंद केजरीवाल!
फंडिंग के जरिए पूरी दुनिया में राजनैतिक अस्थिरता पैदा करने की अमेरिका व उसकी खुफिया एजेंसी ‘सीआईए’ की नीति को ‘कल्चरल कोल्ड वार’ का नाम दिया गया है। इसमें किसी देश की राजनीति, संस्कृति व उसके लोकतंत्र को अपने वित्त व पुरस्कार पोषित समूह, एनजीओ, ट्रस्ट, सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि, मीडिया और वामपंथी बुद्धिजीवियों के जरिए पूरी तरह से प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। अरविंद केजरीवाल ने ‘सेक्यूलरिज्म’ के नाम पर इसकी पहली झलक अन्ना के मंच से ‘भारत माता’ की तस्वीर को हटाकर दे दिया था। चूंकि इस देश में भारत माता के अपमान को ‘सेक्यूलरिज्म का फैशनेबल बुर्का’ समझा जाता है, इसलिए वामपंथी बुद्धिजीवी व मीडिया बिरादरी इसे अरविंद केजरीवाल की धर्मनिरपेक्षता साबित करने में सफल रही।
एक बार जो धर्मनिरपेक्षता का गंदा खेल शुरू हुआ तो फिर चल निकला और ‘आम आदमी पार्टी’ के नेता प्रशांत भूषण ने तत्काल कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का सुझाव दे दिया। प्रशांत भूषण यहीं नहीं रुके, उन्होंने संसद हमले के मुख्य दोषी अफजल गुरु की फांसी का विरोध करते हुए यह तक कह दिया कि इससे भारत का असली चेहरा उजागर हो गया है। जैसे वह खुद भारत नहीं, बल्कि किसी दूसरे देश के नागरिक हों?
प्रशांत भूषण लगातार भारत विरोधी बयान देते चले गए और मीडिया व वामपंथी बुद्धिजीवी उनकी आम आदमी पार्टी को ‘क्रांतिकारी सेक्यूलर दल’ के रूप में प्रचारित करने लगी। प्रशांत भूषण को हौसला मिला और उन्होंने केंद्र सरकार से कश्मीर में लागू एएफएसपीए कानून को हटाने की मांग करते हुए कह दिया कि सेना ने कश्मीरियों को इस कानून के जरिए दबा रखा है। इसके उलट हमारी सेना यह कह चुकी है कि यदि इस कानून को हटाया जाता है तो अलगाववादी कश्मीर में हावी हो जाएंगे।
अमेरिका का हित इसमें है कि कश्मीर अस्थिर रहे या पूरी तरह से पाकिस्तान के पाले में चला जाए ताकि अमेरिका यहां अपना सैन्य व निगरानी केंद्र स्थापित कर सके। यहां से दक्षिण-पश्चिम व दक्षिण-पूर्वी एशिया व चीन पर नजर रखने में उसे आसानी होगी। आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण अपनी झूठी मानवाधिकारवादी छवि व वकालत के जरिए इसकी कोशिश पहले से ही करते रहे हैं और अब जब उनकी ‘अपनी राजनैतिक पार्टी’ हो गई है तो वह इसे राजनैतिक रूप से अंजाम देने में जुटे हैं। यह एक तरह से ‘लिटमस टेस्ट’ था, जिसके जरिए आम आदमी पार्टी ‘ईमानदारी’ और ‘छद्म धर्मनिरपेक्षता’ का ‘कॉकटेल’ तैयार कर रही थी।
8 दिसंबर 2013 को दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीतने के बाद अपनी सरकार बनाने के लिए अरविंद केजरीवाल व उनकी पार्टी द्वारा आम जनता को अधिकार देने के नाम पर जनमत संग्रह का जो नाटक खेला गया, वह काफी हद तक इस ‘कॉकटेल’ का ही परीक्षण है। सवाल उठने लगा है कि यदि देश में आम आदमी पार्टी की सरकार बन जाए और वह कश्मीर में जनमत संग्रह कराते हुए उसे पाकिस्तान के पक्ष में बता दे तो फिर क्या होगा?
आखिर जनमत संग्रह के नाम पर उनके ‘एसएमएस कैंपेन’ की पारदर्शिता ही कितनी है? अन्ना हजारे भी एसएमएस कार्ड के नाम पर अरविंद केजरीवाल व उनकी पार्टी द्वारा की गई धोखाधड़ी का मामला उठा चुके हैं। दिल्ली के पटियाला हाउस अदालत में अन्ना व अरविंद को पक्षकार बनाते हुए एसएमएस कार्ड के नाम पर 100 करोड़ के घोटाले का एक मुकदमा दर्ज है। इस पर अन्ना ने कहा, ‘‘मैं इससे दुखी हूं, क्योंकि मेरे नाम पर अरविंद के द्वारा किए गए इस कार्य का कुछ भी पता नहीं है और मुझे अदालत में घसीट दिया गया है, जो मेरे लिए बेहद शर्म की बात है।’’
प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और उनके ‘पंजीकृत आम आदमी’ ने जब देखा कि ‘भारत माता’ के अपमान व कश्मीर को भारत से अलग करने जैसे वक्तव्य पर ‘मीडिया-बुद्धिजीवी समर्थन का खेल’ शुरू हो चुका है तो उन्होंने अपनी ईमानदारी की चासनी में कांग्रेस के छद्म सेक्यूलरवाद को मिला लिया। उनके बयान देखिए, प्रशांत भूषण ने कहा, ‘इस देश में हिंदू आतंकवाद चरम पर है’, तो प्रशांत के सुर में सुर मिलाते हुए अरविंद ने कहा कि ‘बाटला हाउस एनकाउंटर फर्जी था और उसमें मारे गए मुस्लिम युवा निर्दोष थे।’ इससे दो कदम आगे बढ़ते हुए अरविंद केजरीवाल उत्तरप्रदेश के बरेली में दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार हो चुके तौकीर रजा और जामा मस्जिद के मौलाना इमाम बुखारी से मिलकर समर्थन देने की मांग की।
याद रखिए, यही इमाम बुखरी हैं, जो खुले आम दिल्ली पुलिस को चुनौती देते हुए कह चुके हैं कि ‘हां, मैं पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट हूं, यदि हिम्मत है तो मुझे गिरफ्तार करके दिखाओ।’ उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा है लेकिन दिल्ली पुलिस की इतनी हिम्मत नहीं है कि वह जामा मस्जिद जाकर उन्हें गिरफ्तार कर सके। वहीं तौकीर रजा का पुराना सांप्रदायिक इतिहास है। वह समय-समय पर कांग्रेस और मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी के पक्ष में मुसलमानों के लिए फतवा जारी करते रहे हैं। इतना ही नहीं, वह मशहूर बंग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की हत्या करने वालों को ईनाम देने जैसा घोर अमानवीय फतवा भी जारी कर चुके हैं।
नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए फेंका गया ‘आखिरी पत्ता’ हैं अरविंद!
दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में। मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्टामचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।
दिल्ली में भ्रष्टाीचार और कुशासन में फंसी कांग्रेस की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की 15 वर्षीय सत्ता के विरोध में उत्पन्न लहर को भाजपा के पास सीधे जाने से रोककर और फिर उसी कांग्रेस पार्टी के सहयोग से ‘आम आदमी पार्टी’ की सरकार बनाने का ड्रामा रचकर अरविंद केजरीवाल ने भाजपा को रोकने की अपनी क्षमता को दर्शा दिया है। अरविंद केजरीवाल द्वारा सरकार बनाने की हामी भरते ही केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘भाजपा के पास 32 सीटें थी, लेकिन वो बहुमत के लिए 4 सीटों का जुगाड़ नहीं कर पाई। हमारे पास केवल 8 सीटें थीं, लेकिन हमने 28 सीटों का जुगाड़ कर लिया और सरकार भी बना ली।’’
कपिल सिब्बल का यह बयान भाजपा को रोकने के लिए अरविंद केजरीवाल और उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ को खड़ा करने में कांग्रेस की छुपी हुई भूमिका को उजागर कर देता है। वैसे भी अरविंद केजरीवाल और शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित एनजीओ के लिए साथ काम कर चुके हैं। तभी तो दिसंबर-2011 में अन्ना आंदोलन को समाप्त कराने की जिम्मेवारी यूपीए सरकार ने संदीप दीक्षित को सौंपी थी। ‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है। शुरू-शुरू में अरविंद केजरीवाल को कुछ मीडिया हाउस ने शीला-संदीप का ‘ब्रेन चाइल्ड’ बताया भी था, लेकिन यूपीए सरकार का इशारा पाते ही इस पूरे मामले पर खामोशी अख्तियार कर ली गई।
‘आम आदमी पार्टी’ व उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ‘मेल टुडे’ से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यूपीए सरकार के एक मंत्री के फोन पर ‘टुडे ग्रुप’ ने भी इसे झूठ कहने में समय नहीं लगाया, लेकिन तब तक इस लेख के जरिए नरेंद्र मोदी को रोकने लिए ‘कांग्रेस-केजरी’ गठबंधन की समूची साजिश का पर्दाफाश हो गया। यह अलग बात है कि कम प्रसार संख्या और अंग्रेजी में होने के कारण ‘मेल टुडे’ के लेख से बड़ी संख्या में देश की जनता अवगत नहीं हो सकी, इसलिए उस लेख के प्रमुख हिस्से को मैं यहां जस का तस रख रहा हूं, जिसमें नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए गठित ‘आम आदमी पार्टी’ की असलियत का पूरा ब्यौरा है।
शांति भूषण ने इंडिया टुडे समूह के अंग्रेजी अखबार ‘मेल टुडे’ में लिखा था, ‘‘अरविंद केजरीवाल ने बड़ी ही चतुराई से भ्रष्टामचार के मुद्दे पर भाजपा को भी निशाने पर ले लिया और उसे कांग्रेस के समान बता डाला। वहीं खुद वह सेक्यूलरिज्म के नाम पर मुस्लिम नेताओं से मिले ताकि उन मुसलमानों को अपने पक्ष में कर सकें जो बीजेपी का विरोध तो करते हैं, लेकिन कांग्रेस से उकता गए हैं। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी उस अन्ना हजारे के आंदोलन की देन हैं जो कांग्रेस के करप्शन और मनमोहन सरकार की कारगुजारियों के खिलाफ शुरू हुआ था। लेकिन बाद में अरविंद केजरीवाल की मदद से इस पूरे आंदोलन ने अपना रुख मोड़कर बीजेपी की तरफ कर दिया, जिससे जनता कंफ्यूज हो गई और आंदोलन की धार कुंद पड़ गई।’’
‘‘आंदोलन के फ्लॉप होने के बाद भी केजरीवाल ने हार नहीं मानी। जिस राजनीति का वह कड़ा विरोध करते रहे थे, उन्होंने उसी राजनीति में आने का फैसला लिया। अन्ना इससे सहमत नहीं हुए । अन्ना की असहमति केजरीवाल की महत्वाकांक्षाओं की राह में रोड़ा बन गई थी। इसलिए केजरीवाल ने अन्ना को दरकिनार करते हुए ‘आम आदमी पार्टी’ के नाम से पार्टी बना ली और इसे दोनों बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों के खिलाफ खड़ा कर दिया। केजरीवाल ने जानबूझ कर शरारतपूर्ण ढंग से नितिन गडकरी के भ्रष्टािचार की बात उठाई और उन्हें कांग्रेस के भ्रष्टा नेताओं की कतार में खड़ा कर दिया ताकि खुद को ईमानदार व सेक्यूलर दिखा सकें। एक खास वर्ग को तुष्ट करने के लिए बीजेपी का नाम खराब किया गया। वर्ना बीजेपी तो सत्ता के आसपास भी नहीं थी, ऐसे में उसके भ्रष्टा चार का सवाल कहां पैदा होता है?’’
‘‘बीजेपी ‘आम आदमी पार्टी’ को नजरअंदाज करती रही और इसका केजरीवाल ने खूब फायदा उठाया। भले ही बाहर से वह कांग्रेस के खिलाफ थे, लेकिन अंदर से चुपचाप भाजपा के खिलाफ जुटे हुए थे। केजरीवाल ने लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल करते हुए इसका पूरा फायदा दिल्ली की चुनाव में उठाया और भ्रष्टावचार का आरोप बड़ी ही चालाकी से कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा पर भी मढ़ दिया। ऐसा उन्होंने अल्पसंख्यक वोट बटोरने के लिए किया।’’
‘‘दिल्ली की कामयाबी के बाद अब अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति में आने जा रहे हैं। वह सिर्फ भ्रष्टाीचार की बात कर रहे हैं, लेकिन गवर्नेंस का मतलब सिर्फ भ्रष्टाेचार का खात्मा करना ही नहीं होता। कांग्रेस की कारगुजारियों की वजह से भ्रष्टालचार के अलावा भी कई सारी समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं। खराब अर्थव्यवस्था, बढ़ती कीमतें, पड़ोसी देशों से रिश्ते और अंदरूनी लॉ एंड ऑर्डर समेत कई चुनौतियां हैं। इन सभी चुनौतियों को बिना वक्त गंवाए निबटाना होगा।’’

‘‘मनमोहन सरकार की नाकामी देश के लिए मुश्किल बन गई है। नरेंद्र मोदी इसलिए लोगों की आवाज बन रहे हैं, क्योंकि उन्होंने इन समस्याओं से जूझने और देश का सम्मान वापस लाने का विश्वास लोगों में जगाया है। मगर केजरीवाल गवर्नेंस के व्यापक अर्थ से अनभिज्ञ हैं। केजरीवाल की प्राथमिकता देश की राजनीति को अस्थिर करना और नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकना है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर मोदी एक बार सत्ता में आ गए तो कांग्रेस की दुकान हमेशा के लिए बंद हो जाएगी।’’
साभार: Shashi Kant Kansal

About Post Author

नवीन समाचार

‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
https://navinsamachar.com

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

loading...