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छप्पर फाड़ जीत से गद्गद भाजपा ने तय किया 2022 के विस चुनाव फतह करने को यह रास्ता…

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-अभिनंदन करते हुए।-लगाये तमाम आरोप, आगे शालीनता के साथ ही सड़क पर संघर्ष करने का किया ऐलान

भाजपा के नगर मंडल एवं महिला मोर्चा कार्यकर्ता जबर्दस्त जीत पर विधायक संजीव आर्य का अभिनंदन करते हुए।

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 मई 2019। भारतीय जनता पार्टी लोक सभा चुनाव में ‘छप्पर फाड़ जीत’ से गदगद है। ऐसे में पार्टी ने मंगलवार को विधायक संजीव आर्य के मुख्यालय आगमन पर उनका अभिनंदन किया तथा दूसरी बार आपस में मिष्ठान्न वितरण किया। वहीं विधायक ने इस मौके पर नगर पालिका परिषद नैनीताल की कार्य प्रणाली पर अनेक आरोप लगाते हुए अब शालीनता के साथ ही सड़क पर संघर्ष करने का ऐलान किया। माना जा रहा है कि भाजपा की यह आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव जीतने की रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है, जिसके जरिये पार्टी जिला व मंडल मुख्यालय में अपनी हमेशा की कमजोरी को मजबूती में बदल सकती है।
अभिनंदन कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विधायक संजीव आर्य ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में पिछले पांच वर्षों से 5 लाख से अधिक का कोई कार्य एकमुस्त नहीं हुआ है। कहा कि पालिका में 60-70 हजार के या बड़े कार्यों को दो लाख से नीचे 1.99 लाख का बनाकर बिना निविदा प्रक्रिया के करने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, जिसे बदलना जरूरी हो गया है। उनके विधायक के कार्यकाल में जहां अन्य जगह 90 फीसद कार्य पूरे हो चुके हैं, वहीं नैनीताल पालिका से धनराशि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को स्थानांतरित करनी पड़ी है। पूर्व में स्वीकृत कैपिटॉल सिनेमा के पास के चिल्ड्रन पार्क में 28 लाख के सहित बाल्मीकि पार्क के कार्य शुरू भी नहीं हुए हैं। वहीं सवा करोड़ रुपये की कूड़ा गाड़ियां भी गलत तरीके से खरीदी गयी हैं। कहा कि भाजपा ने नई पालिका बोर्ड को अपने वादे के 6 माह से कहीं अधिक पर्याप्त समय दे दिया है। अब भाजपा इसके खिलाफ पार्टी संघर्ष शुरू करेगी। इस दौरान विधायक ने वर्ष 2016-17 के लिए डीएसबी परिसर के नामित छात्र संघ अध्यक्ष मोहित रौतेला का भी अभिनंदन किया। इस मौके पर नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, शांति मेहरा, नितिन कार्की, जीवंती भट्ट, भानु पंत, कुंदन बिष्ट, रीना मेहरा, तुलसी कठायत, बिमला अधिकारी, पार्वती दोषाद, संगीता पंत, संतोष साह, निखिल बिष्ट, विकास जोशी, हरीश राणा, टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष नीरज जोशी व अशोक तिवाड़ी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।

नैनीताल शहर से 800 वोटों से जीती भाजपा पर अल्पसंख्यकों ने अब भी नहीं दिया वोट

नैनीताल। भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट को लोक सभा चुनाव में नैनीताल नगर मंडल से इस बार कांग्रेस प्रत्याशी से 800 वोट अधिक मिले हैं, जो कि ऐतिहासिक तौर पर सर्वाधिक है। इससे पहले राम लहर में भी भाजपा नगर से पीछे रही थी, अलबत्ता 2014 के लोक सभा चुनाव में कोश्यारी नैनीताल नगर से करीब ढाई हजार वोटों से आगे रहे थे, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर संजीव आर्य करीब 250 वोटों से नगर में पीछे रहे थे और इधर 2018 में हुए नगर पालिका के चुनाव में नैनीताल नगर से पालिकाध्यक्ष प्रत्याशी अरविंद पडियार करीब 800 वोटों से हारे थे। इस लिहाज से नैनीताल से इस बार भाजपा प्रत्याशी भट्ट का 800 वोटों से आगे रहना महत्वपूर्ण है, किंतु भाजपा विधायक संजीव इससे संतुष्ट नहीं हैं। बताया कि नैनीताल विस से इस बार भाजपा को उनके 31000 के मुकाबले 34000 हजार जबकि कांग्रेस को 5000 वोट लाने वाले एक निर्दलीय के भी कांग्रेस में जाने के बावजूद 24 हजार की जगह 22 हजार वोट मिले हैं। खासकर इस बात से कि नगर के मेट्रोपोल व हरिनगर सहित अल्पसंख्यक मुस्लिमों एवं इसाइयों के क्षेत्रों में भाजपा बुरी तरह से पीछे रही है। इस पर विधायक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यकों के बारे में जिस तरह के नये संकेत दिये हैं, उसके बाद स्थानीय स्तर पर भी अल्पसंख्यकों को भाजपा से जोड़ने के प्रयास किये जाएंगे।

वैकल्पिक व्यवस्था के बिना किसी को उजाड़ना, उच्च न्यायालय के नाम पर उत्पीड़न स्वीकार नहीं

नैनीताल। विधायक संजीव आर्य ने अपनी ही सरकार की अंग नगर की प्रशासनिक व्यवस्था पर उच्च न्यायालय का नाम लेकर विभिन्न वर्गों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है। उनका इशारा सोमवार को भाजपा नगर अध्यक्ष द्वारा एक फल वाले को एएसपी रचिता जुयाल के आदेश पर हटाने को लेकर सड़क पर लेटने को लेकर था। इसे तथा स्वयं अपने हरिनगर के भूस्खलन प्रभावितों के समर्थन में प्रदर्शन को जायज ठहराते हुए संजीव ने कहा कि भाजपा किसी नये अतिक्रमण के बिल्कुल खिलाफ है, किंतु वर्षों से संघर्ष कर रहे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के नहीं उजाड़ा जाना चाहिए। प्रपत्र दिखाते हुए बताया कि फल वाले के पास न्यायालय एवं नगर पालिका के स्थान आवंटन के वैध प्रपत्र हैं। बावजूद उसे हटाना किसी तरह उचित नहीं है।

यह भी पढ़ें : विपक्ष की भूमिका में आई नैनीताल भाजपा, प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना पर जड़े ताले

-केंद्र में अव्यवस्थाओं-दवाओं की अनुपलब्धता के लगाये आरोप, एक माह में व्यवस्थाएं सुधारने के आरोपों पर माने

-विपक्ष को विरोध के लिए नहीं मिलते स्थानीय मुद्दे, केंद्र-प्रान्त से मिलने वाले मुद्दों पर विरोध की खानापूरी करने तक सीमित रहता है विपक्ष

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में ताले जड़ते भाजपाई।

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जनवरी 2019। सत्तारूढ़ भाजपा ही नजर में विपक्ष की भूमिका में नजर आयी। नगर भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज जोशी के नेतृत्व में भाजपाइयों ने सोमवार को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय परिसर में स्थापित जन औषधि केंद्र में तालाबंदी कर दी, और प्रदर्शन किया। जन औषधि केंद्र के संचालक जिला रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावत के एक माह के भीतर केंद्र की व्यवस्थाओं को सुधारने का आश्वासन देने के बाद ताले खोले गये। इस दौरान करीब ढाई घंटे जन औषधि केंद्र से दवाइयों का वितरण नहीं हो सका। उल्लेखनीय है कि ‘नवीन समाचार’ एवं ‘आजाद मंच’ ने भी ‘प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में दवाइयां न मिलने की समस्या’ को प्रमुखता सेे उठाया था।
घटनाक्रम के अनुसार सुबह 9 बजे ही आक्रोशित भाजपाई जन औषधि केंद्र पहुंचे और केंद्र में अव्यवस्थाओं, खासकर दवाइयों की अनुपलब्धता का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करते हुए तालाबंदी कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां लंबे समय से रक्तचाप, मधुमेह व हृदय सहित अधिकांश दवाइयां नहीं हैं। परिवार नियोजन की दवाइयां भी नहीं हैं। अध्यक्ष जोशी ने इन स्थितियों की जांच एवं ऑडिट किए जाने की मांग की। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर जिला रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष रावत व महासचिव आरएन प्रजापति मौके पर पहुंचे। उन्होंने एक माह में सभी दवाएं केंद्र में उपलब्ध करवाने तथा दवाइयों का ऑडिट कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब पौने 12 बजे केंद्र का ताला खोला गया। प्रदर्शन में मोहित साह, मोहित रौतेला, विकास जोशी, हरीश राणा व भूपाल कार्की आदि भाजपाई शामिल रहे।

यह भी पढ़ें : ‘डिजिटल इंडिया’ के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क से उखाड़ दिये पेड़, आक्रोश…

नैनीताल, 20 जुलाई 2018। नैनीताल के मल्लीताल स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में ‘डिजिटल इंडिया’ के लिए टावर लगाने की अनुमति पर संबंधित कंपनी पर बांज एवं चिनार के पेड़ उखाड़ने का आरोप लगा है। इस पार्क में कुछ वर्ष पूर्व इन पेड़ों तथा उनकी सुरक्षा के लिए टी-गार्ड भी लगाने वाली जन कल्याण समिति तथा भाजपा से जुड़े लोगों ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए शुक्रवार को पहले एसडीएम अभिषेक रुहेला, फिर एडीएम हरबीर सिंह, डीएम विनोद कुमार सुमन तथा कमिश्नर राजीव रौतेला के पास जाकर नाराजगी व शिकायत की। इस पर प्रशासन की ओर से कंपनी से कार्य रोक देने को कह दिया गया है। बताया गया है कि इंडस कंपनी को नगर में चार स्थानों पर इंटरनेट सेवा के टावर लगाने की अनुमति दी गयी थी, लेकिन कंपनी के कारिंदों के द्वारा कम से कम दो बांज तथा चार चिनार के पेड़ उखाड़ दिये गये। इस पर जन कल्याण समिति से जुड़े भाजपा नेता गोपाल रावत व पूरन तिवाड़ी सहित अनेक लोगों ने नाराजगी व्यक्त की।

यह भी पढ़ें : आशा नाम के निरोध पर विरोध, भड़की आशा कार्यकत्रियां, बांटने से किया इंकार

नैनीताल, 11 जुलाई 2018। समाज में कई बार ऐसे मसले खड़े हो जाते हैं  कि नाम के चक्कर में बदनामी हो जाती है। दबंग फिल्म का आइटम सोंग ‘मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिये’ जब आया तब मुन्नी नाम की लड़कियों को घर से बाहर निकलते ही छींटाकशियों का सामना करना पड़ा। वहीं  ‘शीला की जवानी’ गीत के दौरान शीला नाम वाली महिलायें शोहदों के निशाने पर रहीं। इसी तरह नोटबंदी के दौरान ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’ लिखा नोट आने के बाद इस नाम की लड़कियों-महिलाओं के लिए परेशानियां आयीं। लेकिन अब ऐसा ही नाम पर ऐतराज वाला एक पुराना मामला फिर से उठ खडा हुआ है।

इधर उत्तराखंड सरकार ने 11 से 24 जुलाई तक चलने वाले जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े के दौरान बांटने के लिए ‘आशा’ नाम के निरोध भिजवाए हैं। और इन निरोध को आशा कार्यकत्रियों से बांटने को कहा गया है। यह जानकारी देतु हुए आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि आशा नाम के निरोध बांटने से आशा कार्यकत्रियों को भारी आघात पहुंचा है। यह आशाओं का अपमान है। पिछले वर्ष भी इसी नाम के निरोध आये थे, तब भी विरोध किया गया था। बावजूद इस वर्ष भी इसी नाम के निरोध आये हैं। कहा कि ऐसे में आशाओं ने आशा निरोध का विरोध करने और इन्हें न बांटने तथा जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े का भी विरोध करने का निर्णय लिया गया है। कहा कि यदि आशा निरोध को तुरंत वापस नहीं लिया जाता है तो इसका उग्र विरोध भी किया जाएगा। इस निर्णय से सीएमओ को भी अवगत करा दिया गया है। साथ ही कहा कि यदि शीघ्र उनकी प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाती है तो आयुष्मान भारत योजना का भी विरोध करेंगी। ज्ञापन में सुमन बिष्ट, कुसुमलता सनवाल, राधा राणा, माधवी दर्मवाल, हेमा आर्या, सरिता कुरिया, पंकज शर्मा, दीपा टम्टा व दीपा अधिकारी आदि के भी हस्ताक्षर हैं।

आशा निरोध में आशा नाम बना आशा वर्कर्स की परेशानी

सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में परिवार नियोजन के लिये वितरित किये जाने वाले कंडोम पहले ‘डीलक्स निरोध’ के नाम से दिए जाते थे, अब उनका नाम बदलकर ‘आशा निरोध’ रख दिया गया है। उस पर बुरी बात ये कि इनका वितरण भी आशा वर्करों द्वारा किया जाता है जो कि महिलाएं ही हैं। इस पर आशा वर्करों का कहना है कि कंडोम का नाम आशा निरोध होने से उनके साथ छीटाकशी की जाती है। ‘एक आशा देना’ कहकर उनका मजाक उड़ाते हैं। यह सब बहुत ही असभ्य और भद्दे तरीके से होता है जिससे उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। इतना ही नहीं सरकारी हिदायतें हैं कि निरोध जिसे भी दी जाये उससे एक रूपया भी कीमत के रूप में लिया जाये लेकिन शर्म के मारे वह यह भी नहीं ले पाती और इसका भुगतान अपनी जेब से करना पड़ता है।

उत्तराखंड में लग चुका है आशा निरोध पर प्रतिबंध

बताया गया है कि उत्तराखंड में पिछले वर्ष आशा कार्यकर्ताओं के विरोध व इनके वितरण से साफ मना करने के बाद इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। यहां तक कि आशा वर्कर्स की नेताओं ने कह दिया था कि स्वास्थ्य मंत्री यदि निरोध को स्वास्थ्य मंत्री निरोध नाम से जारी करें तो उनके परिजनों को कैसा लगेगा। आशा वर्कर्स के विरोध को देखते हुए राज्य सरकार को सारा स्टॉक केंद्र को वापस भेज दिया गया था। पंजाब व हरियाणा में भी निरोध के इस नाम पर विरोध हुआ है।

महिला विरोधी नज़रिया

निरोध का नाम आशा निरोध रखने से एक ओर जहां आशा वर्कस विरोध कर रही हैं वहीं इन्हें महिला विरोधी नज़रिये के तौर पर भी देखा जा रहा है। निशाना सीधा केंद्र सरकार की ओर है। कुछ महिला संगठनों का कहना है कि इससे केंद्र की बीजेपी सरकार का महिला विरोधी नज़रिया साफ झलकता है।

आशा वर्कर्स नहीं कुंठित सोच वाले हों शर्मसार

इस मामले में एक चीज़ तो साफ है कि लोगों के दिमाग में गंदगी अभी भी भरी पड़ी है। सामाजिक सोच का स्तर अभी तक निम्न है। निरोध के पैकेट से आशा नाम हो सकता है हटा भी लिया जाये लेकिन भद्दा मज़ाक करने वालों पर क्या इससे रोक लग जायेगी ? क्या उनके दिमागों की गंदगी दूर हो जायेगी ? क्या उनकी कुंठाएं शांत हो जायेंगी ? या फिर कुछ और रास्ते निकाल लिये जायेंगें। बेहतर हो कि इस मसले पर लोगों को सामाजिक रूप से जागरूक किया जाये। आशा वर्कर्स भी इसी समाज का हिस्सा हैं। निरोध का इस्तेमाल यौन शिक्षा का ही भाग है। लेकिन जहां महिलाओं की माहवारी पर अभी खुलकर बात नहीं होती वहां पर यौन संबंधों पर बात करना तो अश्लील ही माना जायेगा। और अगर कोई इस पर बात करना चाहेगा तो उसे या तो चरित्रहीन समझा जायेगा या फिर उसके साथ भद्दे मज़ाक किये जायेंगें।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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