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नैनीताल जनपद के सर्वाधिक आपदाग्रस्त थलाड़ी गांव से आठ किलोमीटर पैदल चलकर ‘नवीन समाचार’ की ग्राउंड रिपोर्ट, पहली बार मीडिया पहुंचा थलाड़ी…

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-ओखलकांडा के पूरा थलाड़ी गांव खतरे की जद में
-कई घरों को पहुंचा है खतरा, पांच दिन से चल रहा है रेस्क्यू, यहां एक ही परिवार के छह शव दबे हैं पर अभी दो शवो को ही निकालने में मिली है सफलता
दानसिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, नैनीताल, 22 अक्टूबर 2021। नैनीताल जनपद के ओखलकांडा के थलाड़ी गांव में गत दिवस आई दैवीय आपदा का सबसे बड़ा ऐसा कहर टूटा है, जिसकी किसी ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। यहां एक ही परिवार के छह लोग घर के मुखिया की आंखों के सामने मलबे में जिंदा दफ्न हो गए। अब एनडीआरएफ का 20 सदस्यीय दल बीते तीन दिनों से दिन-रात चल रही कोशिशों से घटना के पांच दिन बीतने के बाद शुक्रवार को सभी छह शवों को बरामद कर पाई है। अलबत्ता, गांव में बिजली, पानी, सड़क व स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी खराब है, और आपदा से पूरा गांव खतरे की जद में आ गया है। यहां व्यवस्थाओं को पूर्व की तरह दुरुस्त करने में सालों लगने की सम्भावना है। देखें ग्राउंड ज़ीरो से पहली विडियो रिपोर्ट :

शुक्रवार को ‘नवीन समाचार’ की टीम पहाड़पानी से तल्ली दीनी होते हुए आठ किलोमीटर पैदल चलकर जीरो पॉइंट पर पहुंची और वहां का जायजा लिया। वहां लोगों से बातें करते हुए उनकी कहानी सुन कर मन सिंहर उठा। लोगों ने बताया कि बीती 18 अक्टूबर की देर रात्रि करीब नौ बजे गृह स्वामी हरेंद्र सिंह का परिवार जब सोया ही था कि उस पर कुदरत का कहर बरप पड़ा और परिवार के 6 लोग जिंदा दफन हो गए। हरेंद्र शायद उस दौरान घर के बाहर था। उसे पानी के थपेड़ों ने न जाने कैसे उस ओर पटक दिया, जहां अधिक पानी नहीं था। इसलिए वह बच गया। अब जबकि एनडीआरएफ ने यहां शवों की तलाश पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हवाई सर्वेक्षण कर गए हैं। क्षेत्रीय विधायक राम सिंह कैड़ा दो दिन यहां जुटे रहे, फिर भी यहां हालात बेहतर नहीं हैं।

गौरतलब है कि थलाडी गांव में जिस मकान में आपदा का कहर बरपा है। वह मकान तिमंजिला था। उस मकान में बांयी ओर के खंड में हरेंद्र सिंह और अन्य खंडों में उनके 4 अन्य भाइयों के परिवार रहते थे। घटना में एक वृद्ध महिला सरस्वती देवी एक अन्य व्यक्ति भीम सिंह भी घटना में घायल हुए है। पास के एक अन्य घर में रहने वाली 21 वर्षीय राधा नाम की युवती भी मलबे की आवाज सुन ऊंचाई से कूदने के कारण घायल हुई है। उसका पांव फ्रैक्चर हो गया है। उसे शुक्रवार को ग्रामीण युवाओ की मदद से 10 किमी तक कुर्सी की डोली बनाकर तल्ली दीनी होते हुए पहाड़पानी सड़क तक पहुंचाया गया है। बताया गया है कि 23 नवम्बर को उसकी भीमताल से शादी होनी है। गांव में बिजली नहीं होने के कारण शवों के भारी बोल्डरों के नीचे से ढूंढ निकालने में मैन्युअली विशाल बोल्डरों को तोड़ने व हटाने में इतना समय लग लगा है। ऐसे में ग्रामीणों ने तात्कालिक तौर पर जल्द गांव के लिए बिजली, पानी, सड़क व संचार की सुविधाएं बहाल करने की मांग की है, और आगे उन्हें अन्यत्र विस्थापित करने की मांग की है।

तिमंजिला मकान में रहते थे पांच परिवार
धानाचूली। थलाडी गांव में जिस मकान में आपदा का कहर बरपा है। वह मकान तिमंजिला था। उस मकान में बांयी ओर के खंड में हरेंद्र सिंह पुत्र दीवान सिंह एवं अन्य खंडों में उनके 4 अन्य भाइयों के परिवार रहते थे। बताया गया है कि घटना के समय हरेंद्र घर के बाहर फोन कर रहे थे, जबकि घर के अन्य सदस्य सो गए थे। तभी अचानक पहाड़ की ओर से मलबा आ गया और मकान के हरेंद्र सिंह की ओर से हिस्से के साथ उसका पूरा परिवार मलबे की चपेट में आ गया। घर के ही दूसरे हिस्से में रहने वाली प्रह्लाद सिंह की वृद्ध माता सरस्वती देवी घायल हुई है। उनका इलाज चल रहा है। आज उसे उपचार के लिए ले जाया गया है। वहीं हरेंद्र के भाई रुद्रपुर में नौकरी करने वाले भाई राजेंद्र सिंह, घर के दूसरे हिस्से में रहने वाले अन्य भाई किशन सिंह व बच्ची सिंह के परिवार के छह सदस्य तथा भीम सिंह के परिवार के चार सदस्य भी सुरक्षित है। अलबत्ता भीम सिंह घटना में घायल है। पास के एक अन्य घर में रहने वाली 21 वर्षीय राधा पुत्री पान सिंह मलबे की आवाज सुन ऊंचाई से कूद गई। इस कारण उसका पांव फ्रैक्चर हो गया। शुक्रवार को ग्रामीण युवाओ की मदद से उसे 10 किमी तक कुर्सी की डोली बनाकर तल्ली दीनी होते हुए पहाड़पानी सड़क तक पहुंचाया गया। बताया गया है कि 23 नवम्बर को उसकी भीमताल से शादी होनी है।

जीवन में कभी नहीं देखी ऐसी बारिश
धानाचूली। थलाड़ी गांव के बड़े बुजुर्गों ने बताया कि ऐसी भयानक बारिश कभी उनकी जिंदगी में नहीं हुई। जहाँ से मलवा व बोल्डर आये, उसके पास के खेत सारे बंजर थे। वहीं एक खेत में बच्चे क्रिकेट खेलते थे। उनका कहना है कि बादल फटने से यह घटना घटी। घटना से घबराए ग्रामीण घटना के 5 दिन बीत जाने के बाद भी सहमे हुए हैं। बता नहीं पा रहे हैं कि कि कैसे उन्होंने उस नाले और बोल्डरों का रौद्र रूप देखा और कुछ नहीं कर पाए।

पुनर्वास करें सरकार
धानाचूली। थलाड़ी के ग्राम प्रधान गणेश सिंह ठठोला ने बताया पूरा गांव तहस-नहस हो गया है। इस घटना से गांव में 60 फीसदी से भी अधिक मकानों को खतरा पैदा हो गया है। लिहाजा उन्होंने सरकार से तत्काल सर्वे करा कर उन्हें पुनर्वासित व विस्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, स्थानीय विधायक, और एसडीम को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि ऐसे मंजर में यहां रहना मुश्किल हो गया है। वही गांव के प्रताप सिंह ने बताया कि इस घटना से वह अंदर से टूट गए है। उन्होंने कहा जैसी घटना हरेंद्र के परिवार के साथ घटी है, वैसी किसी दुश्मन के साथ भी ना हो। गांव के चंदन सिंह ने कहा कि पूरे गांव का सर्वे करा कर तत्काल शासन और प्रशासन इस पर कार्रवाई करें। बताया कि 6 दिन से यहां बिजली, पानी, सड़क व स्वास्थ्य आदि सभी सुविधाओं का अभाव चल रहा है। इसे दुरुस्त करने की आवश्यकता है।

उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में चला बचाव अभियान
धानाचूली। उप जिलाधिकारी धारी योगेश सिंह मेहरा के नेतृत्व में थलाड़ी गांव में बचाव अभियान को अंजाम दिया गया। पिछले 18 अक्टूबर से श्री मेहरा एसडीआरएफ की टीम के साथ लगातार मौके पर ही डटे रहे। वह सुबह से ही जवानों को गाइड करते हुए नजर आए। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा जो भी मानकों के अनुरूप पीड़ित परिवार की मदद की जानी है उसे जल्दी ही पूरा किया जाएगा। उन्होंने पीड़ित परिवार के मुखिया हरेंद्र सिंह को ढांढस बंधाते हुए कहा कि जो भी उनके स्तर से बन पड़ेगा उसके लिए वह हमेशा तैयार रहेंगे। ‘नवीन समाचार’ से बात करते हुए श्री मेहरा ने बताया कि एनडीआरएफ की पूरी टीम दिन-रात एक कर के रेस्क्यू का कार्य किया है। गांव में ही शवों का चिकित्सकों से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। विस्थापन को लेकर उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी को इस मामले में पत्र लिखा जाएगा।

टीम में यह लोग भी रहे मौजूद
धानाचूली। थलाड़ी गांव में उप जिलाधिकारी योगेश सिंह मेहरा, तहसीलदार तान्या रजवार, कानूनगो नरेश वर्मा, उपनिरीक्षक हेम चंद्र जोशी, प्रकाश सैनी, महिला उपनिरीक्षक चंदा नाथ ने पिछले 4 दिन से थलाड़ी गांव में डेरा डाला है। वहीं खाद्य रसद के लिए तहसील प्रशासन लगातार कार्यरत है। जिससे वहां रह रहे एनडीआरएफ और राजस्व विभाग को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यहाँ पर स्थानीय युवा भी हर तरह से सहयोग में जुटे हुए है।

बड़े बोल्डरों से आई रेस्क्यू अभियान में दिक्कत
धानाचूली। थलाड़ी में भारी भरकम बोल्डरों के गिरने से बचाव कार्य में बाधा आई। गांव में बिजली नहीं है, इसलिए इन विशाल बोल्डरों को घन, छेनी, सबल से जवानों द्वारा तोड़ा जा रहा था। इस कारण बचाव कार्यों में अधिक समय नष्ट हुआ। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जनपद में आज सात और शव बरामद, पर मौतों की संख्या पर स्थिति साफ नहीं

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 अक्टूबर 2021। जनपद में बृहस्पतिवार को गत दिनों आई दैवीय आपदा के चार दिन बाद सात और शव बरामद किए गए हैं। इनमें दो शव रामगढ़ के सकुना में दो बिहार मूल के मजदूरों के हैं, जबकि एक शव रामनगर में हनुमान मंदिर के पीछे कोसी नदी से क्षत-विक्षत अवस्था में बरामद किया गया है। इसके अलावा थलाड़ी में चारों शव भी देर शाम बरामद कर लिए गए हैं।

पुलिस की ओर से बताया गया है कि रामनगर में मिले शव की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह शव गत दिवस की आपदा से ही संबंधित है, और कहीं से बह कर आया है। इस बारे में अभी सही जानकारी नहीं लगी है। इस कारण अभी आपदा प्रबंधन विभाग ने इस मौत के साथ जनपद में मौतों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं की है।

आपदा प्रबंधन अधिकारी शैलेष कुमार ने थलाड़ी में चार और सकुना में दो शवो की जानकारी देने के साथ बताया कि रामनगर में मिले शव की शिनाख्त के प्रयासों के साथ जांच की जा रही है कि यह मौत पहले गायब की श्रेणी में जोड़ी तो नहीं गई है, क्योंकि पूर्व में गायब वालों की भी मौत के रूप में गिनती की जा चुकी है।

थलाड़ी में मिले चार और सकुना में मिले दो शवों को पहले ही मौतों की संख्या में जोड़ा जा चुका है। लिहाजा, अब तक जनपद में आपदा से मौतों की संख्या 34 ही बताई जा रही है। गौरतलब है कि सकुना में अब तक नौ में से 7 शव बरामद किए जा चुके हैं। यहां दो और शवों के मिलने की उम्मीद है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड : अक्टूबर में अभूतपूर्व आपदा, सरकार कितनी साथ ? क्या लेंगे सबक ?

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 अक्टूबर 2021। उत्तराखंड में अक्टूबर माह में ऐसी आपदा आई है, जिसकी मिसाल मिलनी मुश्किल है। इस समय किसी को भी ऐसी जल प्रलय की उम्मीद नहीं थी। यह मौसम पहाड़ों पर सैलानियों के घूमने का व स्थानीय लोगों के लिए बरसात की नमी मिटाकर मौसम की बेफिक्री से काम निपटाने का होता है। दशहरे, सप्ताहांत व ईद मिलादुन्नबी के साथ लंबे अवकाश भी थे। सो हजारों की संख्या में सैलानी बेफिक्री से पहाड़ों पर आकर प्रकृति व हिमालय के सौंदर्य का आनंद ले रहे थे। सैकड़ों तो हिमालय के पास तक भी पहुंच गए थे। नैनीताल तो पर्यटकों से पैक था। यहां आने से सैलानियों को रोकना पड़ा था। ऐसे में अचानक मौसम विभाग ने रेड अलर्ट घोषित भी कर दिया तो किसी ने उस पर कान नहीं धरे। लेकिन कुदरत तो अक्टूबर माह के इतिहास को रौद्रतम रूप में बदलने पर आमादा थी। 17 अक्टूबर की अल सुबह से बारिश ने किसी को अपनी जगह से हिलने, बचने का प्रयास करने का मौका भी नहीं दिया। इसके बाद 50 घंटे से भी अधिक समय तक प्रकृति ने लगातार बारिश के रूप में ऐसा कहर बरसाया कि नैनीताल जनपद सहित पूरे राज्य में 2013 और 1992 की आपदाएं भी पीछे छूट गईं। देखें नैनीताल-रामनगर में बारिश के कहर सहित हल्द्वानी में गौला पुल के टूटने का लाइव वीडियो : 

00नैनीताल और ज्योलीकोट-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग इसका गवाह है, जिस पर खैरना-गरमपानी से आगे घटना के चार-पांच दिन बाद तक भी स्थानीय लोग व पत्रकार भी ठीक से आंकलन करने को भी नहीं जा पाया है, और वहां की तस्वीरें भी ठीक से नहीं आ पाई हैं। क्योंकि इससे पहले ही सड़कों पर सैकड़ों स्थानों पर मलबा आया। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के नाम पर 90 डिग्री के कोण पर खड़े काटे गए भौर्या बैंड के पहाड़ पर राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब 100 मीटर और लोहाली के पास 2013 व 1992 से अधिक करीब 700 मीटर हिस्सा कोसी नदी में समा गया है। नैनीताल जनपद के ही 49 मार्ग 21 अक्टूबर की शाम तक बंद हैं, जबकि सैकड़ों स्थानों पर दर्जनों जेसीबी ने लगकर मार्गों को खोल भी दिया है और हजारों की संख्या में सैलानियों को सेना की मदद लेकर भी सुरक्षित उनके गंतव्यों को भेज दिया गया है। अब फंसे सैलानियों के बारे में सूचनाएं नहीं ही आ रही है। नैनीताल में इतिहास पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में झील का पानी सभी गेट पूरे खोलने के बावजूद ओवरफ्लो होकर इस हद तक सड़कों पर निकला कि लोगों को बचाने के लिए सेना को बुलाना पड़ गया।

देखें आपदा में नैनीताल के हाल :

इस हादसे में जरूर नैनीताल जिले में 34 यानी आधे से अधिक और पूरे प्रदेश में करीब 60 लोगों का अनमोल जीवन छीना है, लेकिन गनीमत रही है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गए ट्रैकरों के साथ हुई घटनाओं को छोड़ दें तो पहाड़ों पर फंसे एक भी आम सैलानी की जान नहीं गई। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि मौके पर प्रदेश सरकार पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ व भारतीय सेना की मदद लेकर भी जनता के बीच रही है। सरकार की पहली कोशिश लोगों की जान बचाने की रही। लोगों को सबसे पहले जहां के तहां रोका गया। फिर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया और बारिश रुकने पर उफनते नालों से भी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस ने सैलानियों के वाहनों में पेट्रोल भराकर, उन्हें होटलों में निःशुल्क ठहराकर व भोजन उपलब्ध कराकर भी मदद की। नैनीताल जनपद से ही महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ के सैलानियों के बड़े दल सुरक्षित लौटे।

देखें कैसे नैनीताल में नैनी झील के उफ़नते पानी से लोगों को बचाने के लिए सेना को संभालनी पड़ी कमान : 

मुख्यमंत्री ने भी खुद आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मोर्चा संभाला। तत्काल हैलीकॉप्टर से आए तो फिर सड़क मार्ग से आगे बढ़े। उनकी फ्लीट की एक कार भी बाढ़ में बह गई तो ट्रैक्टर से भी आपदाग्रस्त लोगों के पास पहुंचे। भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा की तरह अन्य विधायक भी खुद मौके पर जाकर आपदा में हाथ बंटाते दिखे। देश के गृह मंत्री अमित शाह भी राज्य में आकर जायजा ले गए। प्रधानमंत्री ने भी ढांढस बधाया और हरियाणा-यूपी सरकारों ने मदद देने की पहल भी कर दी। देखें विडियो :

लेकिन सवाल यह भी है कि ऐसी घटनाओं से हम क्या सबक लेंगे। सड़कों को नदियों के किनारे से गुजारने, पहाड़ की ओर 90 डिग्री के कोण पर काटने व गांवों के ऊपर गोल-गोल घुमाकर गुजारने तथा घरों को नालों के पास बनाने से क्या परहेज करेंगे। राज्य में नदियों के अनियंत्रित दोहन, अनियंत्रित तरीके से जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण, अनियंत्रित विकास से युवा पहाड़ों का सीना चीरने, अनियंत्रित तरीके से वाहनों की बढ़ती संख्या बढ़ाकर युवा पहाड़ों पर दनदनाने जैसी हरकतों पर क्या थोड़ा सा भी नियंत्रण करेंगे, या सिर्फ इस या उस सरकार को कोसेंगे और मुआवजे की बड़ी से बड़ी राशि की मांग कर और मुआवजा प्राप्त कर अपनी अमूल्य जान की कीमत आंकते व प्राप्त कर संतुष्ट होते रहेंगे ? या आपदा को भी अवसर और मलबे को भी हलवा बनाकर अपने हित साधने के कुत्सित प्रयासों में लगे रहेंगे ? यह सोचने के विषय हैं…..। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : सकुना में 5 सहित कुल 6 शव मिले, नैनीताल जनपद में आपदा से मौतों की संख्या पर स्थिति साफ

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अक्टूबर 2021। बीते तीन दिनों में आई जल प्रलय जैसी दैवीय आपदा के दौरान नैनीताल जनपद में 34 लोगों की मौत की नैनीताल जिला प्रशासन ने पुष्टि कर दी है। इनमें सबसे बड़ी घटना रामगढ़ के सकुना गांव में 9 लोगों की, जबकि ओखलकांडा के थलाड़ी गांव में एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत के रूप में सामने आई है।

इधर बृहस्पतिवार को आपदा के तीसरे दिन सेना की 4 डोगरा रेजीमेंट व एनडीआरएफ की टीम ने सकुना में 5 शव बरामद किए हैं। यह सभी बिहार निवासी मजदूरों के हैं, जो यहां सड़क के डामरीकरण के काम करने के बाद एक घर में सोये थे। यह घर 18 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजे ढह गया। नेपाल के चितवन जनपद निवासी एक 28 वर्षीय मजदूर राजन साह ही किसी तरह इस घटना में बच पाया। उसी ने इस घटना की जानकारी दी। हालांकि इस घटना पर विवाद भी रहा। पुलिस की ओर से उसी दिन शवों को बरामद कर अंतिम संस्कार करने की सूचना से इस मामले में असमंजस की स्थिति भी रही। जबकि आज तीसरे दिन तक भी इस घटना में छह शव ही बरामद किए जा सके हैं।

उधर थलाड़ी में हरेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति का पूरा परिवार भी इसी दिन भूस्खलन की जद में आ गया। इस घटना में परिवार के छह लोग मलबे में दब गए, जबकि तीन लोग घायल हुए। इस घटना में मलबे में दबे 6 लोगों में से बुधवार को एक महिला और आज एक बेटी का शव बरामद किया जा सका है। अभी भी चार शवों को बरामद किया जाना बाकी है।

आज सकुना की घटना में संयोग से बचे 28 वर्षीय नेपाल के चितवन जनपद निवासी राजन साह का बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. संजीव खर्कवाल ने मौके पर ही चिकित्सकीय परीक्षण किया व उसे अपेक्षित उपचार दिया। उसे काफी आंतरिक चोटें बताई गई हैं।

बताया गया है कि यहां आज मिले शवों की शिनाख्त 40 वर्षीय घोड़ा यादव पुत्र गोपी यादव निवासी सूरजपुर थाना श्रीनगर कुजहा जिला बेतिया बिहार, 35 वर्षीय धामु मुखिया पुत्र राधा मुखिया निवासी ग्राम सतबरिया बसंतपुर थाना चनपटिया बेटिया, 35 वर्षीय शर्मा चौधरी पुत्र रमाकांत चौधरी निवासी सिरसिया बाजार थाना श्रीनजर कुजहा जिला बेतिया बिहार व संदीप चौधरी पुत्र शिवालक चौधरी निवासी मलाई टोला थाना बेतिया वार्ड नंबर 4 जिला बेतिया बिहार के रूप में हुई। उल्लेखनीय है कि यहां 9 लोगों के घर के मलबे में दबने की सूचना है। यहां बुधवार को भी एक शव बरामद किया गया था। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : कुमाऊं में आज आज 14 शव बरामद, 48 मौतों की पुष्टि, समाचार माध्यम 54 की मौत बता रहे

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अक्टूबर 2021। मानसून के लौटने के बाद पिछले तीन दिन में हुई बारिश में कुमाऊं मंडल में मौतों की संख्या अपुष्ट समाचार माध्यमों के अनुसार 54 पहुंच गई है। अलबत्ता प्रशासन की ओर से 35 जबकि अन्य माध्यमों से 48 मौतों की ही पुष्टि की गई है।

सर्वाधिक प्रभावित नैनीताल जनपद के आपदा नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोषापानी मुक्तेश्वर में 5, चौखुटा में 6, सकुना रामगढ़ में 9, कैंची में 2, बोहराकोट में 2, क्वारब में 2 तथा रामगढ़ व ताकुला में 1-1 यानी 28 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। वहीं आपदा प्रबंधन अधिकारी शैलेष कुमार ने बताया कि आज कैंची में 2, बोहराकोट में 2 तथा सकुना में 5 यानी 9 तथा कुल मिलाकर 28 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा ज्योलीकोट चौकी पुलिस ने चोपड़ा निवासी एक 25 वर्षीय होटल कर्मी का शव मंगलवार सुबह बरामद किया था। उसकी मौत इस सूची में शामिल नहीं की गई है। जनपद के थलाड़ी में भी करीब आधा दर्जन मौतों की सूचना आ रही है। एनडीआरएफ का 20 सदस्यीय दल यहां पहुंचने के लिए हैलीकॉप्टर से शशबनी में उतारा गया है। यहां से टीम 7 किलोमीटर सड़क व सात किलोमीटर पैदल चलकर थलाड़ी पहुंचने के मार्ग पर है।

उल्लेखनीय है कि इसके अलावा चंपावत जिले में भी आज चार लोगों की शव बरामद हुए हैं। इससे पहले यहां 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। इस प्रकार कुमाऊं मंडल में प्रशासन की ओर से 48 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य समाचार माध्यम इस आपदा में मरने वालों की संख्या 54 बता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इसके अलावा चंपावत जिले में भी आज चार लोगों की शव बरामद हुए हैं। इससे पहले यहां 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा अल्मोड़ा में 6 तथा पिथौरागढ़, बागेश्वर व चंपावत जिलों में भी एक-एक सहित कुमाऊं मंडल में प्रशासन की ओर से 42 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य समाचार माध्यम इस आपदा में मरने वालों की संख्या 54 बता रहे हैं।

गौरतलब है कि आज नैनीताल जनपद में नैनीताल पुलिस व एनडीआरएफ की टीम ने कैंची धाम के पास घर में दबे हुए 21 वर्षीय रिचा एवं 18 वर्षीय अभिषेक तथा बोहरा कोट रामगढ़ में 70 वर्षीय शंभू दत्त डालाकोटी व 59 वर्षीय बसंत डालाकोटी के शवों को मलबे से बरामद किया है। इसके अलावा सकुना में भी पांच नेपाली मूल के मजदूरों के शवों के एसटीएच हल्द्वानी ले जाने की जानकारी मिली है। वहीं चंपावत जिले में नेपाल सीमा से लगे सुल्ला गांव के एक ही परिवार के चार लोगों-कैलाश सिंह (32) पुत्र कुंवर सिंह, चंचला देवी (28) पत्नी कैलाश सिंह, रोहित सिंह (12) और भुवन सिंह (8) पुत्र कैलाश सिंह के शव भी आज बरामद किए गए हैं।

थलाड़ी में एक शव बरामद, परिवार के पांच अन्य सदस्यों की तलाश जारी
नैनीताल। जनपद के भीमताल विधानसभा के दूरस्थ क्षेत्र थलाड़ी में बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्थानीय विधायक राम सिंह कैड़ा की पहल पर हैलीकॉप्टर से एनडीआरएफ की टीम पहुंची और मलबे से शांति देवी पत्नी दीवान सिंह का शव बरामद किया। बताया गया है कि यहां एक ही परिवार के छह लोग मलबे में दबे हुए हैं। इनमें मीना देवी पत्नी हरेंद्र सिंह, चांदनी बिष्ट, डिम्पल बिष्ट, तनूजा बिष्ट पुत्री हरेंद्र सिंह, पारस बिष्ट पुत्र हरेंद्र सिंह शामिल हैं। एनडीआरएफ उनकी तलाश में जुटी हुई है।

इससे पहले सभी मार्ग बंद होने से प्रशासनिक बचाव टीमें यहां नहीं पहुंच पा रही थी। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम शशबनी में हैलीकॉप्टर से उतरने के बाद सात किलोमीटर सड़क व सात किलोमीटर पैदल चलकर यहां पहुंची है। विधायक राम सिंह कैड़ा ने एनडीआरएफ की टीम को थलाड़ी व रामगढ़ भेजने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व भारत सरकार का धन्यवाद अदा किया है। साथ ही ग्रामीणों को आपदा से हुऐ नुकसान का मुवावजा देने की मांग की है। इस दौरान विधायक के साथ धारी के एसडीएम योगेश महरा सहित कई सामजिक सगठनों के लोग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मौके पर मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल: आपदा में 27 लोगों की मौत, पूरे दिन कोई नहीं पहुंचा 9 शवों को निकालने, 3 एनएच सहित 15 सड़कें बंद, गौला पुल-रेल की पटरी ध्वस्त, आपदा में आनंद लेते रहे लोग

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अक्टूबर 2021। पहाड़ों पर बारिश के रूप में असमय बरसी आसमानी आफत ने जनपद में 26 लोगों की जिंदगी लील ली है। जिला मुख्यालय सहित जनपद के अनेक पर्वतीय क्षेत्रों का शेष दुनिया से न केवल सड़क, वरन इंटरनेट एवं मोबाइल सिग्नल के माध्यम से भी संपर्क कट गया है। जिला व मंडल मुख्यालय सहित पूरा पर्वतीय क्षेत्र पूरे दिन बिजली एवं पानी से भी वंचित रहा। कुछ क्षेत्रों में जनरेटर से पेयजल की आपूर्ति किए जाने की बात कही जा रही है। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले तीनों मार्गों सहित तीन राष्ट्रीय राजमार्ग, 4 राज्य मार्ग, एक प्रमुख जिला मार्ग एवं पीएमजीएसवाई ज्योलीकोट के अधीन के 7 मार्ग बंद हो गए हैं। हल्द्वानी में गौला पुल का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया। काठगोदाम के पुल को भी खतरा नजर आया। काठगोदाम के पास रेल की पटरी भी क्षतिग्रस्त हो गई। रामनगर में कोसी नदी का पानी गर्जिया माता के मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच गया। जिला व मंडल मुख्यालय नैनीताल में नैनी झील का पानी मॉल रोड व डॉंठ पर उफनकर हल्द्वानी व भवाली रोड में इतने तीव्र वेग से बहा और दुकानों में घुसने लगा कि भारतीय सेना, पुलिस व एसडीआरएफ को लोगों को बचाने के लिए मोर्चे पर जुटना पड़ा। नैनीताल सहित जनपद का पूरा पर्वतीय क्षेत्र पूरे दिन बिजली एवं पानी से भी वंचित रहा। रात्रि 12 बजे विद्युत विभाग के अभियंताओं की पूरे दिन की कड़ी मशक्कत के बाद बिजली की आपूर्ति सुचारू हो पाई। इसके लिए विभागीय टीम को अधिशासी अभियंता हारून रशीद व एसडीओ पर्यंक पांडे आदि की अगुवाई में नैनीताल से मेहरागांव तक पैदल 33 हजार केवीए की लाइन की पैदल खाक छाननी पड़ी।

इधर प्रशासनिक जानकारी के अनुसार इस दैवीय आपदा से जनपद में 27 लोगों की असमय मौत होने की बात कही जा रही है, परंतु आपदा नियंत्रण कक्ष की शाम चार बजे की रिपोर्ट में दोषापानी-मुक्तेश्वर में 5, चौखुटा-क्वारब में 6, सकुना-रामगढ़ में 9, कैंची भवाली में 2, बोहराकोट रामगढ़ में 2 व रामगढ़ में 1 यानी कुल 25 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। इनके अलावा ओखलकांडा के थलाड़ी गांव में 6 लोगों एवं ज्योलीकोट के निकट चोपड़ा गांव निवासी सोमवार शाम गायब हुए 25 वर्षीय होटल कर्मी मनोज कुमार आर्या पुत्र सुंदर लाल का शव मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया।

सकुना में सुबह 4 बजे 9 लोगों के दबने के बावजूद पूरे दिन नहीं पहुंचा कोई प्रशासनिक कर्मी, ऑक्सीजन न मिलने से हुई बुजुर्ग की मौत
सकुना गांव में हुए हादसे में एकमात्र बचे राजेंद्र साहनी पुत्र प्रभु साहनी ग्राम माणीतितो जिला चितवन नेपाल ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे आपदा की चपेट में आए घर मेंउसके साथी 9 लोग दबे हुए हैं। यह सभी लोग सड़क पर डामरीकरण का काम करने यहां आए थे। राजेंद्र के सिर में भी चोट है। उसने गांव के कृष्णानंद शास्त्री के घर में शरण ली हुई है। क्षेत्रीय निवासी पीतांबर जोशी ने बताया कि सुबह हुई घटना के बावजूद शव पूरे दिन वहीं पड़े हैं। एक शव के नीचे दिखाई भी दे रहा है। ग्रामीणों ने चार किलोमीटर दूर ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व एएनएम सेंटर होने एवं पहले से रेड अलर्ट की चेतावनी होने के बावजूद ऐसी प्रशासनिक निष्क्रियता पर रोष जताया है। अलबत्ता उनका यह भी कहना था कि सड़कें बंद होने के कारण गांव में पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। इसी कारण निकटवर्ती पोखराधारा हली रामगढ़ निवासी 75 वर्षीय भवानी दत्त का दाह संस्कार भी नहीं हो पाया। भवानी दत्त पहले से बीमार थे। उनकाघर पर ऑक्सीजन की मदद से उपचार चल रहा था, पर आपदा की वजह से ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से सोमवार शाम उनकी मौत हुई है।

नैनीताल में 24 घंटों में 445 मिमी वर्षा, 15 मार्ग बंद
इधर आपदा नियंत्रण कक्ष की शाम चार बजे की रिपोर्ट के अनुसार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटों में 445 मिमी, हल्द्वानी में 348 मिमी, कोश्याकुटौली में 223 मिमी, धारी में 165 मिमी, बेतालघाट में 268.2 मिमी, रामनगर में 65 मिमी व कालाढुंगी में 248 मिमी बारिश हुई। गौला बैराज में 60 हजार, कोसी बैराज में 76 हजार 900 तथा नंधौर नदी में 35 हजार 75 क्यूसेक पानी रिकार्ड किया गया। नैनीताल जिला-मंडल मुख्यालय को जोड़ने वाले तीनों-हल्द्वानी, कालाढुंगी व भवाली मार्ग बंद हैं, इसके अलावा ज्योलीकोट-क्वारब राष्ट्रीय राजमार्ग, भीतमाल-हल्द्वानी, रामनगर-गर्जिया-बेतालघाट व खुटानी-चांफी-धानाचूली राज्य मार्ग एवं भवाली-रामगढ़-मुक्तेश्वर का प्रमुख जिला मार्ग भी बंद हैं। इनके अलावा पीएमजीएसवाई ज्योलीकोट के अधीन सात मार्ग नलेना-चोपड़ा, कैंची-हरतपा, लामजाला, फतेहपुर-बेल, भौर्सा-पिनरों, भुजियाघाट-सूर्यागांव व घोड़ाखाल-धुलई ग्रामीण मार्ग बंद हैं। इसके अलावा जनपद में 12 भवनों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।

नैनीताल में लोगों ने आपदा का लिया आनंद, नयना देवी मंदिर के प्रांगण में तैरे, तल्लीताल में झील के पानी में घूमे

तल्लीताल में आपदा में मजा लेते लोग

नैनीताल। इधर मुख्यालय में दैवीय आपदा के बाद दैव योग से कोई बहुत दुःखद घटना नहीं हुई। केपी छात्रावास भी यथावत बना हुआ है। अलबत्ता नगर में अधिकांश लोगों के घरों में बारिश का पानी घुसने, बोट हाउस क्‍लब में भी पहली बार झील का पानी घुसने. रास्तों में सीवर व नालों का पानी बहने, नैनी झील के निकट के स्थानों, नौकाओं में पानी भरने व छिटपुट भूस्खलन के समाचार आम हैं। ऐसे में लोग नैनी झील में हुए जल भराव का आनंद लेते भी देखे गए। नैनी झील में मंदिर के एक पुजारी का मंदिर के प्रांगण में तैरने का वीडियो वायरल हुआ, जबकि तल्लीताल में लोग सेना के पंप हाउस तक लोवर मॉल रोड पर भर आए और बोट स्टेंड के पास घुटनों तक भरे पानी में घूमने का आनंद लेते रहे। इस पर पुलिस को लोगों से इस तरह बाहर न निकलने और ऐसा करने पर कार्रवाई करने की मुनादी करनी पड़ी।

यह भी पढ़ें : भारतीय सेना का दल आया बर्फीले तूफान की चपेट में, 5 सैनिकों सहित 6 लोग लापता

नवीन समाचार, चमोली, 1 अक्टूबर 2021। चमोली जनपद की सीमा पर कुमांऊ के बागेश्वर जनपद में स्थित त्रिशूल चोटी पर आरोहण के लिए निकला भारतीय नौसेना का दल व पोर्टर एवलांच यानी बर्फीले तूफान की चपेट में आ गए हैं। शुरू में 10 पर्वतारोहियों के बर्फीले तूफान की चपेट में आने का समाचार था, लेकिन ताजा जानकारी के अनुसार अब दल में शामिल नौसेना के पांच जवान व एक पोर्टर ही लापता हैं। इन्हें खोजने के लिए उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतरोहण संस्थान से रेस्क्यू टीम प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट के नेतृत्व में खोज एवं बचाव दल हेलीकाप्टर से त्रिशूल चोटी के लिए रवाना हो गया है।

बताया गया है कि त्रिशूल चोटी के आरोहण के लिए चमोली जनपद के जोशीमठ और घाट के लिए पर्वतारोही टीमें जाती हैं। नौसेना के पर्वतारोहियों का 20 सदस्यीय दल करीब 15 दिन पहले 7,120 मीटर ऊंची त्रिशूल चोटी के आरोहण के लिए गया था। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे जब दल चोटी का आरोहण करने के लिए आगे बढ़ा। इसी दौरान हिमस्खलन हो गया।

इस संबंध में कर्नल अमित बिष्ट ने बताया कि उन्हें नेवी की एडवेंचर विंग से यह सूचना शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे मिली, जिसमें उन्होंने निम की सर्च एडं रेस्क्यू टीम से मदद मांगी। सूचना के बाद उत्तरकाशी से हेलीकाप्टर के जरिये निम की सर्च एंड रेस्क्यू टीम रवाना हुई। नेहरू पर्वतरोहण संस्थान (निम) के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट ने बताया यह घटना शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे हुई है, जिसमें नौसेना का पर्वतारोही दल हिमस्खलन की चपेट में आ गया। यह सभी अभी लापता बताए जा रहे हैं। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल में नया भूस्खलन, बौद्ध मंदिर को नुकसान, बड़े खतरे का भी अंदेशा

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 14 सितंबर 2021। भूगर्भीय दृष्टिकोण से कमजोर नैनीताल नगर में एक बार फिर नया भूस्खलन प्रारंभ हो गया है। मध्य रात्रि के करीब नगर के सुख निवास स्थित बौद्ध मठ के पीछे बड़ा भूस्खलन हुआ है। देखें वीडियो:

तिब्बती शरणार्थी फाउंडेशन के अध्यक्ष पेमा गेकिल शिथर ने बताया कि इससे नगर के ऐतिहासिक बौद्ध मठ को भी नुकसान पहुंचा है, और मठ तथा यहां रहने वाले तिब्बती शरणार्थी परिवारों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने रात्रि में ही डीएम एवं एसडीएम को इसकी सूचना ह्वाट्सएप के माध्यम से दी है, लेकिन अभी कोई बचाव कार्य प्रारंभ नहीं हुए हैं। उन्होंने यहां तत्काल बचाव कार्य शुरू किए जाने की आवश्यकता जताई है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल के गांव खैराड़ में भूस्खलन, गांव के 30 में से 23 परिवार विस्थापित

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 13 सितंबर 2021। नैनीताल जनपद के दूरस्थ अमगढ़ी गांव के तोक खैराड़ में रविवार शाम मूसलाधार बारिश के बाद बड़ा भूस्खलन हो गया। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। भयावह तरीके से हो रहे भूस्खलन में तीन मकानों के मलबे में दबने, एक महिला का पैर टूटने और ग्रामीणों की फसल बर्बाद होने की सूचना है। गांव में लगातार हो रहे भूस्खलन से गांव के 30 में से 23 परिवारों को गांव से पांच किलोमीटर दूर राजकीय इंटर कॉलेज में शरण लेनी पड़ी है। नैनीताल के एसडीएम प्रतीक जैन के निर्देश पर प्रशासनिक टीम को मौके पर नुकसान का जायजा लेने हेतु भेज दिया गया है। विस्थापित परिवारों को लगातार राहत किट पहुंचाई जा रही है। भूस्खलन के कारण गांव वाले दहशत में हैं। उन्होंने प्रशासन से ग्रामीणों के भवन का निर्माण कराने के साथ ही सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन की मांग उठाई है। देखें वीडियो:

अमगढ़ी की ग्राम प्रधान गंगा नैनवाल व प्रधान प्रतिनिधि गणेश नैनवाल ने बताया कि गांव में करीब 30 परिवार रहते हैं। यहां पहले से भूस्खलन हो रहा है। इस कारण गांव के 20 परिवार पहले ही विस्थापित होकर गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में रह रहे हैं। रविवार शाम गांव में जोरदार बारिश के बार शाम करीब साढ़े पांच बजे खैराड़ तोक के ऊपर की पहाड़ी पर बड़ा भूस्खलन हो गया। भूस्खलन का मलबा गांव की ओर आया और तीन लोगों जीवानी राम, चंदन राम व नीमा देवी के मकान मलबे में दब गए। जबकि नीमा देवी नाम की महिला का पैर टूट गया। उसे उपचार के लिए रामनगर के चिकित्सालय भेजा गया है। बचाव कार्य में जगत प्रकाश, चनी राम, प्रेम राम, आनंद दानी, मोहन दानी पूरन मेहता आदि ने योगदान दिया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : ज्योलीकोट में बादल फटने जैसा अहसास, नाले में तब्दील नैनीताल-हल्द्वानी हाईवे, दुकान में एक लाख से अधिक का नुकसान

डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 12 सितंबर 2021। निकटवर्ती ज्योलीकोट में आज रविवार को अपराह्न दो बजे बाद हुई मूसलाधार वर्षा में मुख्य बाजार में स्थित एक दुकान में बारिश का पानी घुसने से करीब एक लाख रुपए का नुकसान हो गया। यहां विनोद जेम्स की इलेक्ट्रिकल्स की दुकान में पीछे पहाड़ी से आये मलबे और पानी ने दुकान की पक्की दीवार को तोड़ दिया। पानी के तेज बहाव के साथ दुकान का अधिकांश सामान बह गया और पूरी दुकान मलबे से भर गई।

गनीमत थी कि दुकानदार इस दौरान दोपहर का भोजन करने के लिए घर गया था। उसने दुकान में एक लाख रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान जताया है। वही मुख्य बाजार के समानांतर लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को जाने वाले मोटर मार्ग में बंद नालियों और कलवर्ट से पानी की निकासी न होने से ज्योलीकोट मुख्य बाजार में हाइवे नाले में तब्दील हो गया। इस पानी ने भुवन कुमारी के ‘कॉटेज’ परिसर के मार्ग व आंगन को काफी नुकसान पहुँचाया। एक घंटे से अधिक समय तक हुई तेज वर्षा में यहां लोगों को बादल फटने जैसा एहसास होने लगा। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : अब उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में मुख्यमंत्री के गृह जनपद में बादल फटने की घटना

नवीन समाचार, पिथौरागढ़, 30 अगस्त 2021। अब तक उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल बादल फटने की घटनाएं हो रही थीं, लेकिन रविवार रात्रि कुमाऊं मंडल में मुख्यमंत्री के गृह जनपद पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील के ग्राम जुम्मा में बादल फटने की घटना हुई है। जिला पिथौरागढ़ से प्राप्त प्रारंभिक सूचना अनुसार इस घटना में गांव के जामुनी तोक में लगभग 5 तथा सिरौउड़यार तोक में 2 आवासीय मकान क्षतिग्रस्त होने तथा लगभग 9 लोगों के लापता होने की प्रारंभिक सूचना है। बचाव अभियान में अब तक तीन बच्‍चों समेत चार शव बरामद कर लिए गए हैं। सूचना के तत्काल बाद घटना क्षेत्र में राजस्व, एसएसबी, पुलिस, एसडीआरएफ तथा रेस्क्यू टीम रवाना हो गई है। एनडीआरएफ की टीम भी क्षेत्र में भेजी जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर संज्ञान लेते हुए पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान से फोन पर बात कर प्रभावित गांवों में भारी वर्षा से हुए नुकसान की जानकारी ली, और प्रभावितों को तत्काल हर सम्भव सहायता उपलब्ध कराने तथा खोज एवं बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ चलाने और घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

jagranइधर, पिथौरागढ़ में डीएम डॉ आशीष चौहान ने जिला आपदा परिचालन केंद्र में आईआरएस के अधिकारियों के साथ बैठक कर तत्काल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य कराने के साथ ही क्षेत्र में राहत सामग्री भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डीएम एवं एसपी घटना स्थल को रवाना हो गए हैं। जौलजीबी मुनस्यारी मार्ग और टनकपुर तवाघाट मार्ग सहित सीमांत के सभी मार्ग बंद है। डीएम चौहान ने बताया कि क्षेत्र में सड़क मार्ग अवरुद्ध होने के कारण रेस्क्यू कार्य हैलीकॉप्टर से कराए जाने हेतु क्षेत्र में हैलीपैड तैयार किया जा रहा है।

Cloudburst In Uttarakhand : उत्‍तराखंड में बादल फटने से तबाही, पांच लोग लापता, महिला घायल, कई मकान जमींदोजप्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील और नेपाल के गांव में एक साथ बादल फटने से रविवार रात भारी तबाही मच गई। धारचूला तहसील से 12 किमी दूर कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग से लगे जुम्मा गांव का संपर्क शेष दुनिया से कट गया है। इस गांव के नौ लोग लापता बताए जा रहे हैं। जबकि कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ग्रामीणों ने रात में ही गांव से भागकर सुरक्षित जगह पर पनाह ली है। जुम्मा गांव के चामी तोक में कई मकान ध्वस्त हो गए हैं। बताया गया है कि बादल फटने से काली नदी, कूलागाड़ और एलागाड़ ने रौद्र रूप ले लिया है। काली, गोरी, धौली, रामगंगा, सेरा, मंदाकिनी सहित सभी नदी नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। काली नदी धारचूला में अभी भी चेतावनी लेवल के करीब बह रही है।

jagranइसके अलावा बताया जा रहा है कि नेपाल के सिरबगड़ में बादल फटने से आए मलबे से काली नदी का प्रवाह रोक दिया। जिसके चलते 280 मेगावाट की धौलीगंगा जल विद्युत परियोजना के प्रशासनिक कार्यालय और कॉलोनी तक काली नदी का पानी जमा हो गया। कॉलोनी में रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों ने दहशत के साए में तीन मंजिला भवन की छत पर रात गुजारी। धारचूला में अंतरराष्ट्रीय झूला पुल तक पानी पहुंच गया। रात को एसडीएम और पुलिस ने नदी किनारे स्थित मकानों में रहने वाले लोगों को सजग किया। जुम्मा के खातपोली में दो महिलाएं और जामुनी तोक में 6 से 7 लोग तक लापता बताए जा रहे हैं। उधर मुनस्यारी के मालूपाती गांव में फिर भूस्खलन हुआ है। दो परिवार शिफ्ट कर दिए हैं। आठ परिवार खतरे में आ गए हैं। बंगापानी तहसील के खरतोली गाव में भूस्खलन से छह परिवार खतरे में हैं।

उधर नेपाल के निकटवर्ती नजयांग नाले में भी बादल फटने से नाला उफान पर आया तो काली नदी तक मलबा आने के कारण पानी का प्रवाह थम गया। नेपाल में लोहे का पुल और हिकिला में दो लोग बह गए। सैकड़ों नाली भूमि भी बहने की सूचना है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में भयावह तरीके से हो रही मानसूनी बारिश, मां-बेटी सहित तीन की मौत, चार की तलाश जारी

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जुलाई 2021। उत्तराखंड में रविवार रात्रि से लगातार मानसूनी वर्षा हो रही हैं। इससे नदी, नाले, गाड़-गधेरे उफन आए हैं, और ये मानव जीवन के लिए जानलेवा भी साबित भी हो रहे हैं। बीते कुछ घंटों में ऐसी सबसे बड़ी घटना उत्तरकाशी जिले में सामने आई है। यहां रविवार देर रात बादल फटने के बाद मांडो गांव में मां-बेटी सहित तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक परिवार के तीन लोगों सहित चार लोग लापता हैं। तीन घायलों को बचाकर चिकित्सालय ले जाया गया है। रात्रि में भी उनकी तलाश की गई, लेकिन अब तक किसी का कुछ भी पता नहीं चला है।

इधर, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में भी देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और पौड़ी जैसे जिलों में अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई है। राज्य के बाकी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश के आसार है। मौसम विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग की चेतावनी को सही साबित करते हुए कमोबेश पूरे प्रदेश में बीती शाम से ही लगातार बारिश हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां अचानक भागीरथी नदी समेत गाड़-गधेरे उफान पर आ गए। बादल फटने से मांडो, निराकोट, पनवाड़ी और कंकराड़ी गांवों के आवासीय घरों में पानी घुस गया। इससे दो मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गए और 6 लोग मलबे में फंस गए। इनमें से मांडो गांव में तीन लोगों-42 वर्षीया माधुरी पत्नी देवानंद, 38 वर्षीया रितु पत्नी दीपक व 6 वर्षीय ईशू पुत्री दीपक की मौत हो गई। एसडीआरएफ व आपदा प्रबंधन विभाग की टीम ने गणेश बहादुर पुत्र काली बहादुर, रविंद्र पुत्र गणेश बहादुर, रामबालक यादव पुत्र मकुर यादव को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया। घायलों का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार तीनों खतरे से बाहर हैं। इसके अलावा ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में एक ही परिवार के तीन लोग मलबे में दबे हुए हैं। एसडीएम भटवाड़ी देवेंद्र नेगी ने बताया कि मांडो गांव में गदेरे के उफान पर आने से दो मकान ध्वस्त हुए हैं। एक ही परिवार के तीन लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। सर्च ऑपरेशन जारी है। कई जगहों पर वाहनों के बहने की भी सूचना है। घटना की सूचना मिलने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने डीएम को राहत और बचाव कार्य शीर्ष प्राथमिकता पर कराने के निर्देश दिए हैं।आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : बागेश्वर जिले में हुई अतिवृष्टि, 50 नाली से अधिक कृषि भूमि, पुल, घराट, रास्ते बहे

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जुलाई 2021। ढाई वर्ष पूर्व एक बारात में 200 से अधिक लोगों के फूड प्वाइजनिंग की घटना के लिए चर्चा में रहे बास्ती गांव में बीती रात्रि अतिवृष्टि होने की घटना सामने आई है। इस घटना में आधा दर्जन से अधिक ग्रामीणों की लगभग 50 नाली कृषि भूमि और घराट के साथ नहर व रास्ते बह गए और गांव में दहशत का माहौल बन गया। नहर व रास्ते के साथ एक मोटर पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया हैं। सूचना मिलने के बाद प्रशासन तहसील प्रशासन गांव की ओर बचाव कार्यों के लिए रवाना हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात्रि लगभग दो बजे कांडा तहसील के दूरस्थ, प्रसिद्ध शिखर मंदिर की तलहटी में बसे बास्ती गांव में अतिवृष्टि होने से शिखर की ओर का गधेरा गांव की ओर भयावह तरीके से किनारे खड़े पेड़ों व बोल्डरों को लेकर उफन पड़ा। इसने गांव में भी तबाही मचाते हुए गांव के दान सिंह, मोहन सिंह, पान सिंह, जोगा सिंह, हीरा सिंह, रमेश सिंह व बबलू मेहरा आदि के खेतों की करीब 50 नाली कृषि भूमि को तबाह कर दिया। इसका गड़गड़ाता शोर सुन ग्रामीण रात्रि में ही जाग गए और अपनी जान बचाने की जुगत करते रहे। गनीमत रही कि उफना हुआ गधेरा आबादी से कुछ दूर था, इससे कोई जनहानि होने से बच गई। ग्राम प्रधान केदार सिंह महर ने घटना की सूचना कांडा तहसील प्रशासन को दी है। उपजिलाधिकारी राकेश चंद्र तिवारी की ओर से बताया गया है कि राजस्व विभाग की टीम गांव की ओर रवाना हो गई है। गांव में जन और पशुहानि की सूचना नहीं है। एक मोटर पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि एक सामूहिक घराट बह गया है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

यह भी पढ़ें : भारी बारिश से नैनीताल में दो घरों पर गिरे विशाल बोल्डर, अल्मोड़ा एनएच सहित नैनीताल जनपद की करीब दो दर्जन सड़कें बंद…

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जून 2021। डॉ. नवीन जोशी / नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जून 2021। जिला व मंडल मुख्यालय सहित समस्त पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले करीब 40 घंटों से मानसून के आने की औपचारिक घोषणा से पहले से कमोबेश लगातार तेज बरसाती बारिश काफी नुकसानदेह साबित हुई है। बारिश की वजह से मुख्यालय में तल्लीताल डीएम आवास से करीब 50-100 मीटर की दूरी पर जॉय विला रोड पर स्थित हैजवार्टन कंपाउंड के दो घरों में लांग व्यू पब्लिक स्कूल के नीचे से विशालकाय बोल्डर गिरे। इनमें से एक बोल्डर तल्लीताल बाजार के चश्मा व्यवसायी परिचय त्रिवेदी के घर की टिन की छत पर गिरा और छत को तोड़ता हुआ नीचे दीवार व दरवाजा तथा रेलिंग आदि तोड़कर घर का एक हिस्सा खुला कर दिया है। इसके अलावा एक अन्य विशाल बोल्डर हाल में दिवंगत हुए मल्लीताल स्थित ताज होटल वाले हाजी सैयद के घर के लिंटर पर गिरा और लिंटर में विशाल छेद कर दिया। इसके अलावा भी अगल-बगल के घरों में इससे छोटे बोल्डर गिरे हैं, और इन घरों में रहने वाले राइंका के प्रवक्ता रमेश जोशी के सहित करीब आधा दर्जन परिवारों के लिए सुरक्षित रहने के लिए अन्यत्र स्थान तलाशने की नौबत आ गई है।

उधर, बारिश की वजह से अल्मोड़ा एनएच नैनी पुल, काकड़ीघाट, दोपाखी व भौर्याबैंड सहित अनेक स्थानों पर भारी मात्रा में मलबा आने के कारण वाहनों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इसके बाद वाहनों को भवाली व खुटानी से क्वारब के लिए डाइवर्ट करके भेजा गया। उल्लेखनीय है कि यह मार्ग पूर्व में चौड़ीकरण के लिए खैरना से काकड़ीघाट के बीच कई जगह पर 90 डिग्री के कोण पर काटकर खतरनाक बना दिया गया है, वहीं अब काकड़ीघाट से आगे क्वारब तक चौड़ा करने के लिए इसी तरह से काटा जा रहा है। गौरतलब है कि चौड़ीकरण से पहले कभी इस तरह एक-दो दिन की बारिश में यह मार्ग बंद नहीं हुआ था। इसके अलावा नैनीताल जनपद में आवागमन की बात करें तो 17 सड़कें बारिश की वजह से भूस्खलन होने के कारण बंद हो गई हैं।

जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय की रूसी बाइपास और एरीज मोड़ से एरीज को जाने वाले मार्ग मलबा आने से बंद हो गए हैं। इसी तरह खुटानी-भवाली, भुजान-बेतालघाट, रातीघाट-बेतालघाट, मल्ला रामगढ़ की डाकबंगले को जाने वाली सड़क, गढ़खेत मोटरमार्ग, अंबेडकरगांव-रिखौली, कसियालेख-सूपी, भवाली सेनिटोरियम-सिरोड़ी, काठगोदाम-हैड़ाखान, पंगूट-तल्ला बगड़, कैंची-हरतपा, भौंरसा-पिनरौ, गर्जिया-बेतालघाट, रामनगर-तल्ली सेठी-बेतालघाट आदि सड़कें बंद होने की सूचना है। इधर मुख्यालय में मल्लीताल मेट्रोपोल कंपाउंड क्षेत्र में घरों से सटकर लगा एक बांज का पुराना पेड़ नाले की ओर गिर गया। गनीमत रही कि पेड़ नाले की ओर गिरा अन्यथा इसके घरों पर गिरने से जान-माल की क्षति भी हो सकती थी।

इधर, नैनीताल जिला मुख्यालय में पिछले 24 घंटों में 115 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बारिश की वजह से गाड़-गधेरों व नदियों का जल स्तर बढ़ गया है। काठगोदाम बैराज में गौला नदी का जल स्तर 16 हजार क्यूसेक व रामनगर में कोसी नदी का जल स्तर 12,400 क्यूसेक पर पहुंच गया है। इधर नैनी झील का जल स्तर भी पिछले 24 घंटे में 13 इंच बढ़कर 4 फिट 3 इंच हो गया है। वहीं भूस्खलन एवं पेड़ों की शाखाओं के टूटने व उखड़ने की घटनाओं से विद्युत आपूर्ति भी पूरे दिन बाधित रही है। लोग घरों के भीतर कैद रहने को मजबूर हैं, और जनजीवन काफी हद तक प्रभावित हो रहा है।

कैंची धाम में भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग 87 पर पानी आने से रुका वाहनों का आवागमन।

कैंची धाम में एक माह बाद भी कलमठ न खोलने से सड़क पर फिर आया गधेरा
नैनीताल। बाबा नीब करौरी के कैंची धाम क्षेत्र में गधेरे का पानी एक बार फिर सांई मंदिर के पास भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग 87 पर आ गया, और इस कारण सड़क पर वाहनों का आवागमन बाधित हो गया। साथ ही सड़क से पानी सड़क के नीचे स्थित प्रेम सिंह कनवाल के खेत में जाकर काफी नुकसान कर गया। बताया गया है कि यहां गत 12 मई हुई भीषण बारिश के बाद अवरुद्ध हुई सड़क को कामचलाऊ तौर पर तो खोल दिया गया, लेकिन इस स्थान पर सड़क के नीचे का कलमठ नहीं खोला। इस कारण ही आज यहां फिर से सड़क पर पानी आ गया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मई 2021। बृहस्पतिवार को पूरे दिन बिना एक भी पल रुके लगातार हुई बारिश के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 87 सुबह करीब 10 बजे ज्योलीकोट व भवाली के बीच बीरभट्टी नाम के स्थान पर स्थित वैली ब्रिज अस्थायी पुल के पास मलबा आने से बंद हो गया। बताया गया कि यहां बीरभट्टी से आगे वैली ब्रिज के दूसरी ओर पुल के मुहाने पर भारी मात्रा में पूर्व में काटे गए पहाड़ का मलबा आ गया। काफी देर बाद मलबा हटाने के लिए एक जेसीबी तैनात की गई, किंतु बारिश के लगातार जारी रहने से कार्य प्रभावित रहा। मलबा हटाने पर पहाड़ से और मलबा गिरने की आशंका भी बनी रही। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार भी लग गई। लेकिन मलबा काफी अधिक होने और इसे जल्द हटाए जाने की कोई संभावना न दिखने पर वाहन खुद भी नैनीताल व भीमताल के रास्तों से मुड़कर अपने गंतव्य को रवाना हुए। सूचना मिलने पर ज्योलीकोट, काठगोदाम, तल्लीताल व भवाली पुलिस ने भी वाहनों को इस मार्ग से जाने से रोका।

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-मुख्यमंत्री ने दिया एनडीआरएफ को हर संभव मदद का आश्वासन
-एनडीआरएफ के कमांडेंट सुदेश कुमार दराल ने कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से की मुलाकात
नवीन समाचार, देहरादून, 16 मई 2021। भारत सरकार द्वारा उत्तराखंड राज्य में बढ़ती आपदाओं को देखते हुए एनडीआरएफ की एक बटालियन को तैनात किया है, जिसका अभी प्रशिक्षण चल रहा है। इसी कड़ी में 15वीं बटालियन एनडीआरएफ के कमांडेंट सुदेश कुमार दराल द्वारा कार्यभार संभालने के उपरांत प्रदेश का दौरा किया तथा देहरादून में मुख्यमंत्री कार्यालय में तीरथ सिंह रावत से मुलाकात की। कमांडेंट ने मुख्यमंत्री को उत्तराखंड के संभावित आपदाओं के संवेदनशील तथा अति संवेदनशील इलाकों के बारे में अवगत कराया। एनडीआरएफ बटालियन की तैनाती बटालियन मुख्यालय के लिए हल्दवानी, रानीबाग स्थित एचएमटी पुरानी फैक्टरी, गदरपुर, आरआरसी यानी रीजनल रिस्पांस सेंटर उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली व देहरादून में जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया। इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा आश्वासन दिया गया कि एनडीआरएफ की नई बटालियन के लिए तथा आरआरसी के लिए यथा संभव शीघ्र जमीन उपलब्ध कराई जाएगी एवं जो भी प्रशासनिक मदद की आवश्यकता होगी वह तुरंत की जाएगी। इस अवसर पर कमांडेंट दराल ने बताया कि जैसे ही जमीन की उपलब्धता हो जाएगी तो प्रदेश के सभी आपदाओं के दृष्टिकोण से संवेदनशील तथा अति संवेदनशील स्थानों पर टीमों को तैनात किया जाएगा ताकि आने वाली आपदाओं में तुरंत राहत एवं बचाव का कार्य किया जा सके एवं लोगों को जागरूक कर उत्तराखंड को आपदा मुक्त करने के लिए एनडीआरएफ हमेशा प्रयासरत रहेगी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मई 2021। बुधवार को जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर बाबा नीब करौरी के कैंची धाम में इस वर्ष का महाभंडारा आयोजित न होने का समाचार आने के अतिवृष्टि के साथ बड़ी प्राकृतिक कोप की घटना हुई। इससे भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग-87 कैंची धाम के पास ही तीन स्थानों पर बंद हो गया था। इस कारण अल्मोड़ा की ओर ऑक्सीजन सिलेंडर सहित कई चिकित्सा सुविधाएं लेकर जा रहे वाहन भी मार्ग में फंस गए थे। सांसद प्रतिनिधि गोपाल रावत ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही सांसद अजय भट्ट ने बीती शाम ही इस मामले में डीएम से वार्ता कर सड़क को तत्काल खोलने एवं कैंची धाम से मलवा हटाने के निर्देश दिए। इससे प्रशासन तत्काल सक्रिय हुआ।

वहीं एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह तड़के चार बजे तीनों स्थानों से जेसीबी से मलबा हटाकर अल्मोड़ा के लिए सड़क खोल दी गई है। इसके बाद कैंची धाम स्थित बाबा नीब करौरी के धाम से मलबा साफ करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रात्रि 11 बजे तक वह स्वयं तथा प्रशासनिक टीमें भी मौके पर जीम हुई थीं। श्री कुमार ने बताया कि बुधवार शाम करीब पांच बजे भवाली से शुरू होने वाली उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी के साथ ही खासकर कैंची धाम में, किरौला रेस्टोरेंट के पास का नाला, प्रसाद वितरण के पास एक नया नाला तथा मुख्य मंदिर से थोड़ा आगे सांई मंदिर के सामने का पुराना नाला अतिवृष्टि की वजह से उफन पड़े थे। गनीमत रही कि शिप्रा नदी अथवा मंदिर के पीछे से आया मलबा मंदिर में पूरी तरह से नहीं घुसा। साथ ही कोविद कर्फ्यू लगने की वजह से श्रद्धालुओं की मंदिर परिसर एवं आसपास मौजूदगी नहीं होने की वजह से कोई जनहानि नहीं हुई। यह भी गनीमत रही कि इस दौरान हुई अतिवृष्टि का आसपास के गांवों में उतना असर नहीं रहा। इस कारण वहां खेती, किसानों को उस अनुपात में नुकसान नहीं हुआ। प्रशासन को केवल तीन लोगों के घरों में मलबा आने की सूचना मिली है। वहां सहायता पहुंचाई जा रही है।

उड़ुवा में पैदल रास्ता व पेयजल व्यवस्था ध्वस्त
नैनीताल। बुधवार को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में हुई भारी बारिश, अंधड़ व ओलावृष्टि का प्रभाव जनपद के भीमताल विकास खंड के अनुसूचित जाति बहुल ग्राम उड़ुवा का पैदल संपर्क मार्ग तथा पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। इससे ग्रामीणों का गांव से आना-जाना मुश्किल हो गया है, तथा पेयजल के लिए नदी में उतरना पड़ रहा है। साथ ही हल्द्वानी से हैड़ाखान जाने वाली सड़क भी कई जगह बारिश से क्षतिग्रस्त हुई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 12 मई 2021। बाबा नीब करौरी के कैंची धाम में आज ही इस वर्ष का महाभंडारा आयोजित न होने का समाचार आया और आज ही संयोग अथवा दुर्योग रहा कि मंदिर परिसर सहित क्षेत्र में बादल फटने की बड़ी प्राकृतिक कोप की घटना हो गई। क्षेत्र में बीते कई दिनों से अपराह्न से हो रही वर्षा, अंधड़ व ओलावृष्टि की कड़ी में बुधवार शाम पांच बजे के बाद बादल फटने जैसी क्षेत्र में संभवतया अब तक की पहली घटना हो गई। इस घटना के बाद भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर भारी मात्रा में मलबा आने से अवरुद्ध हो गया है। साथ ही बाबा नीब करौरी के मुख्य एवं पास स्थित गुफा वाले वाले मंदिर में भी काफी मलबा आया है। मुख्य मंदिर में मलबा हटाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। शाम घिरने एवं हल्की बारिश जारी रहने के कारण मलबा हटाने के कार्य में व्यवधान भी आ रहा है। पुलिस-प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच रही हैं।

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-इंदिरा आवास योजना के तहत हुआ था एक कमरे के घर का निर्माण, पीएमजीएसवाई के तहत बन रही सड़क की अधूरी सुरक्षा दीवार की वजह से हुआ हादसा
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2020। जनपद के ओखलकांडा विकास खंड के टांडा गांव में शुक्रवार सुबह बारिश एवं प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत अधूरी बनी सुरक्षा दीवार की वजह से एक गरीब का आशियाना ढह गया। वहीं इस अधूरी व असुरक्षित तरीके से बन रही सड़क व सुरक्षा दीवार की वजह से कई अन्य घरों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता व नवयुवक मंगल दन टांडा के अध्यक्ष मदन परगांई ने बताया कि टांडा गांव में खनस्यूं से टांडा के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़क बन रही है। इस सड़क की सुरक्षा दीवार की वजह से सड़क के ऊपर स्थित घरों के लिए करीब 20 मीटर की गहरी खाई बन गई है। इससे कई घरों को खतरा पैदा हो गया है। इधर शुक्रवार पूर्वाह्न 11 बजे इसकी वजह से टांडा गांव के ज्ञानेंद्र प्रकाश का मकान ध्वस्त हो गया। यह सिर्फ एक कमरे का मकान कुछ वर्ष पूर्व इंदिरा आवास योजना के तहत बना था। उन्होंने बताया कि कुछ माह पूर्व से ही सड़क की वजह से मलबा गिर रहा था, इसलिए भवन स्वामी ने घर खाली कर दिया था। इसलिए हादसे में किसी की जान नहीं गई। परगांई ने स्थानीय राजस्व उपनिरीक्षक को घटना की सूचना देकर गरीब भवन स्वामी को जल्द भी मुआवजा एवं नया घर बना कर देने की मांग की है।

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-एसडीआरएफ ने एक गर्भवती महिला समेत तीन लोगों को मलबे से निकाला 
नवीन समाचार, देहरादून, 15 जुलाई 2020। राजधानी के चुखुवाला इन्दिरा कालोनी में बीती रात तेज बारिश के दौरान एक मकान ढह गया, जिसमे कई लोग दबे हुए हैं। स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ एसडीआरएफ की टीम राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है। 
एसडीआरएफ की सेना नायक तृप्ति भट्ट के अनुसार रेस्क्यू में अभी तक तीन घायल लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। इनमें एक पुरुष, एक बच्चा और एक गर्भवती महिला है। घायलों को 108 एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेज दिया गया है।उन्होंने बताया कि मकान के मलबे में कम से कम 8 लोगों के फंसे होने की आशंका है जिसमें से 3 लोगों को निकाल लिया गया है। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
अब तक एक गर्भवती महिला सहित तीन लोगों के शव निकाले जा चुके हैं. जबकि दो लोगों को जिंदा निकाला जा चुका है। बताया जा रहा है कि घर मे कुल 6 सदस्य थे।
अब तक एक गर्भवती महिला सहित तीन लोगों के शव निकाले जा चुके हैं. जबकि तीन लोगों को जिंदा निकाला जा चुका है। बताया जा रहा है कि घर मे कुल 6 सदस्य थे। एक अन्य सदस्य को निकालने के प्रयास जारी रहा। मकान ढहने की वजह एक पुश्ता बना जो मकान के पीछे की तरफ बना हुआ था। उस पुश्ते के गिरने से मकान ढह गया।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जुलाई 2020। शुक्रवार रात्रि हुई वर्षा के फलस्वरूप शनिवार सुबह दोगांव से आगे भेड़िया पखांणा पर बड़े पत्थर सड़क पर आ गये हैं। साथ ही आगे और पत्थर गिरने की संभावना बनी हुई है। आपदा प्रबंधन अधिकारी शैलेश कुमार ने बताया कि मौके पर जेसीबी पहुंच रही है। जल्द मार्ग खुलने की उम्मीद है।
इधर, उत्तराखंड में बीती रात्रि में हुई वर्षा के कारण खासकर सीमांत जिलों के कई महत्वपूर्ण मार्ग बंद हो गये हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार कुमाऊं तथा गढ़वाल दोनों मंडलों के कमोबेश सभी जनपदों में बादल छाये हुए हैं और आगे भी बारिश की स्थिति बनी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी जनपद का यमुनोत्री मार्ग पालीगाड के पास बंद है। वहीं चमोली जिले का बद्रीनाथ मार्ग चमोली में लामबगड़ पीपलकोटी टंगड़ी और पागलनाला के पास बंद है। इसी तरह पिथौरागढ़ में थल मुंसारी मार्ग अररिया के पास और चीन सीमा को जोड़ने वाला गूंजी-कुट्टी मार्ग 1 किलोमीटर टूट गया है। इसमें बीआरओ द्वारा कार्य किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : एक परिवार के लिए काल बनी बारिश, घर ढहा, परिवार के तीन सदस्यों, मां-बेटियों की मौत

नवीन समाचार, रानीखेत/अल्मोड़ा, 8 जुलाई 2020। कल से ही लगातार हो रही बारिश अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट क्षेत्र के एक गांव तैलमनारी के रहने वाले रमेश राम के परिवार के लिए काल साबित हुई। इस मौसम की कमोबेश पहली बारिश में ही रमेश राम का जीर्ण-शीर्ण घर मंगलवार की देर रात्रि करीब 11 बजे ढह गया। उस समय घर में रमेश के साथ ही उसकी पत्नी करीब 35 वर्षीया चंद्रा देवी, तथा तीन बेटियां-17 वर्षीया कमला, 12 वर्षीया पिंकी सो रहे थे। मकान दबने से तीनों मकान के मलबे में दब गए। प्रशासन ने सूचना मिलने पर रात्रि में ही गांव में बचाव-अभियान चलाया। घर में मौजूद लोगों को बाहर निकाला गया और घायलों को अस्पताल ले जाया गया। अलबत्ता, जब तक मां चंद्रा देवी और बेटी कमला को मलबे से बाहर निकाला जा सका, तक तक वे दम तोड़ चुकी थीं। जबकि दूसरी बेटी पिंकी ने रानीखेत के अस्पताल लाने के दौरान रास्ते में दम तोड़ा। रमेश जरूर बच गया। उसे प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। परिवार के एक अन्य सदस्य के भी बचने का समाचार है। जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने पीड़ित परिवार को यथाशीघ्र आपदा मद से अनुमन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।
वहीं अल्मोड़ा में माल रोड पर पोस्ट ऑफिस के पास पंत पार्क में स्थित नगर की खूबसूरती का दशकों से प्रतीक व पहचान बना वोगेनवेलिया की बेल युक्त विशाल देवदार का वृक्ष बुधवार सुबह ढह गया है। इससे माल रोड पर भी आवागमन प्रभावित हुआ है। इस पर कहा जा रहा है कि देवदार का यह विशाल पेड़ और वोगेनवेलिया की विशाल बेल दशकों से आपस में प्रेम में आलिंगनबद्ध थे। दोनों के साथ जीने-साथ मरने वाले इस प्रेम का बुधवार सुबह एक तरह से अंत हो गया। हालांकि कहा जा रहा है कि वोगेनबेलिया की बेल को पार्क के दूसरे पेड़ों के सहारे बचाने का प्रयास किया जाएगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जुलाई 2020। इस वर्ष मामूली बरसात में भी नुकसान की खबरें आ रही हैं। पहले रविवार को केवल 4 मिमी बारिश में ही लंघम छात्रावास के पास दो घरों और बिड़ला रोड पर बिल्डर द्वारा किये जा रहे निर्माण के पानी की टंकी के साथ ढहने की घटना हुई थी। अब आज भी मात्र 10 मिमी बारिश होने पर नगर के मल्लीताल बाजार स्थित ‘प्रताप रेस्टोरेंट’ नाम का एक प्रतिष्ठान रात्रि में हुई बारिश की वजह से ऊपरी जीर्ण-शीर्ण मंजिल के ढह जाने से पीछे की ओर से आये मलबे से पट गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसर दुकान नंबर 5 स्थित यह प्रतिष्ठान पूर्व में चार मंजिल रहे भवन के सबसे निचले तल में स्थित था। इसकी ऊपरी मंजिलें पिछले कई वर्षों से ढहती जा रही हैं, लेकिन भवन की मरम्मत नहीं की जा रही है। ऐसे में अब इस भवन के निचले तल में भी मलबा आ गया है। संयोग से मलबा रात्रि में आया। तब वहां कोई नहीं था। अन्यथा कोई जनहानि भी हो सकती थी। बताया गया है कि यह प्रतिष्ठान प्रेमा चमियाल के नाम से है।
उल्लेखनीय है कि नगर में ऐसे कई बहुमंजिले भवन बेहद जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। किराया व स्वामित्व संबंधी अन्य विवादों के चलते इन भवनों की कोई मरम्मत नहीं करता है, और इन्हें सुरक्षित तरीके से ढहाने की जगह लोग स्वयं बचकर इन्हें दूसरों की जान जोखिम में डाकलर स्वयं ढहने के लिए छोड़ देते हैं।

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-मुख्यालय में भी बिड़ला रोड पर भूस्खलन

लंघम छात्रावास के पास बस्ती में भूस्खलन होने पर घर से बाहर निकले लोग।

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जुलाई 2020। इस वर्ष अभी बरसात ठीक से शुरू भी नहीं हुई कि अभी से बारिश से नुकसान की खबरें आनी शुरू हो गई हैं। इससे आगे के लिए चिंताजनक संदेश नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग की चेतावनी को एक हद तक सही साबित करते हुए शनिवार को सरोवरनगरी सहित निकटवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। बारिश मामूली ही हुई, फिर भी अप्रत्याशित तौर पर बारिश से भूस्खलन के साथ संपत्ति का नुकसान होना प्रारंभ हो गया। पहली घटना नगर के तल्लीताल क्षेत्र में डीएसबी परिसर के लंघम छात्रावास के पास अयारपाटा वार्ड में देखने को मिली। यहां सुबह करीब 11 बजे लंघम छात्रावास के पीछे की बस्ती में दीपक कुमार व बाबूलाल के घर की छत पर पीछे की दीवार गिर गई। इससे दोनों के घर क्षतिग्रस्त हो गये। घटना के दौरान एक घर में दीपक कुमार टांक के 3 बच्चे और दूसरे घर में बाबूलाल की दो विवाहिता पुत्रियां और उनके 4 बच्चे घर के अंदर सोए हुए थे। वे भूस्खलन की आहट होते ही घर से बाहर भाग आए, अन्यथा कोई जनहानि भी हो सकती थी। अलबत्ता, घर के अंदर का सामान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया।

मुख्यालय में बिड़ला रोड पर भूस्खलन, जनपद में चार सड़कें बंद
नैनीताल। जनपद में बीते 24 घंटों में हुई बारिश के फलस्वरूप चार सड़कें-फतेहपुर-पीपलअनिया, डोला न्याय पंचायत मोटर मार्ग, सिमलखेत सनना एवं पतलोट-ल्वाड़ डोबा मोटर मार्ग मलबा आने से बंद हो गये हैं। सभी मार्गों को खोलने के लिए जेसीबी लगाई गई है। वहीं मुख्यालय में सीमेंट हाउस में बिड़ला रोड पर ओल्ड ग्रोव हाउसिंग सोसायटी की पार्किंग और सड़क के पास हो रहे एक भवन निर्माण के पास एक हिस्से पर भूस्खलन हो गया। इससे पानी का टैंक और सड़क क्षतिग्रस्त हो गयी। गनीमत रही कि धंसी सड़क व भूस्खलन का मलबा नीचे रहने वाली आबादी तक नहीं पहुंच पाया, इस कारण किसी का जान माल का नुकसान नहीं हुआ। अलबत्ता, नीचे की ओर रहने वाले लोगों में भविष्य के लिए भय जरूर व्याप्त हो गया है। सूचना मिलने पर जिला विकास प्राधिकरण, वन विभाग, लोनिवि और पुलिस की टीम ने मौका मुआयना किया। बताया गया है कि बिल्डर द्वारा सड़क के नीचे गलत तरीके से किये जा रहे निर्माण की वजह से यह भूस्खलन हुआ है। अधिशासी अभियंता विजय माथुर ने बताया कि फिलहाल भवन स्वामी को निर्माण कार्य रोकने को नोटिस भेजा जा रहा है।

एक इंच बढ़ा नैनी झील का जलस्तर
नैनीताल। झील नियंत्रण कक्ष के प्रभारी रजत पांडे से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यालय में सुबह आठ बजे तक मात्र चार मिमी बारिश हुई। इसके फलस्वरूप नगर की विश्वप्रसिद्ध नैनी झील का जल स्तर कल के मुकाबले एक इंच बढ़कर 6 फिट 7 इंच हो गया। यह जल स्तर पिछले वर्ष आज की तिथि में रहे एक फिट के जल स्तर से 5 फिट 6 इंच अधिक है। वहीं मौसम विभाग के अनुसर जनपद में सर्वाधिक 78 मिमी वर्षा कालाढुंगी एवं 21.6 मिमी वर्षा रामनगर में दर्ज की गई है।

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-नैनी झील का जल स्तर सात वर्षों के शीर्ष पर
नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जून 2020। जनपद में बारिश का सिलसिला जारी है। फल स्वरूप विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के जल स्तर में वृद्धि हो रही है, और सड़कों के मलबा आने के कारण बंद होने का सिलसिला भी प्रारंभ हो गया है। वहीं बीते 24 घंटे में हुई बारिश से जनपद के भवाली के पास स्थित ग्राम मेहरागांव धुलई निवासी महेश चंद्र पुत्र गोवर्धन की गौशाला ढह गई। इससे एक बकरी की मौत हो गई, जबकि दो बकरियां घायल हो गईं।
मौसम विभाग के अनुसार आज नैनीताल मुख्यालय में 20, कालाढुंगी में 23 तथा हल्द्वानी-काठगोदाम में 15 मिकी बारिश दर्ज की गई। वहीं बृहस्पतिवार को बंद हुई जनपद की दो सड़कें मंगोली-खमारी-जलालगांव व हैड़ाखान धाम मोटर मार्ग आज भी नहीं खुल पाई हैं। बताया गया है कि हैड़ाखान धाम रोड किमी संख्या दो पर बंद हुई है। जेसीबी से इसे खोलने का प्रयास किया जा रहा है। इसे कल शाम खोल लिया गया था, कितु यह पुनः मलबा आने से बंद हो गई। वहीं आज नैनीताल-कालाढुंगी रोड पर मुख्यालय से 23 किमी दूर सुबह एक पेड़ आने से यातायात अवरुद्ध हो गया था। इसके अलावा किमी संख्या 25 में सड़क की दीवार ढह गई है। इसकी मरम्मत पर करीब ढाई लाख रुपए का खर्च बताया गया है। वहीं मंगोली-खमारी रोड किमी संख्या 5, 6 व 9 पर बंद हो गई है। इसी कड़ी में आज नैनी झील का जल स्तर निर्धारित पैमाने पर एक इंच बढ़कर 6 फिट साढ़े सात इंच हो गया। बताया गया है कि वर्ष 2013 में इस दौरान नैनी झील का जल स्तर 8 फिट के स्तर पर था।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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