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स्नातक में 50 फीसद से कम अंकों वाले प्राथमिक शिक्षकों के मामले में केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने प्राथमिक शिक्षक के पदों के लिए स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अंकों की अर्हता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार तथा एनसीटीई से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
इस मामले में अशोक रावत व राधा रानी आदि ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर एनसीईआरटी के 28 जून 2018 को जारी नोटिफिकेशन तथा 18 दिसंबर 2018 को जारी उत्तराखंड राजकीय प्राथमिक शिक्षक सेवा नियमावली के पांचवें संशोधन को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि 2010 से पूर्व प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए बीएड की डिग्री हासिल करने के लिए 50 प्रतिशत अंकों की अर्हता नहीं थी। लिहाजा ऐसे हजारों शिक्षक हैं जिनके पास बीएड की डिग्री है परंतु वे 50 प्रतिशत अंकों की अर्हता नहीं रखते हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा की जा रही भर्ती प्रक्रिया में 2010 से पुराने स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत से कम अंकों वाले बीएड डिग्री धारकों को भी शामिल करने की मांग भी की है।

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-खंडपीठ ने सरकार की तीन विशेष अपीलों को खारिज कर एकलपीठ के आदेश को फिर से बरकरार रखा
नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मार्च 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक की खंडपीठ ने अपने 1 जून 2018 को दिए गए निर्णय को यथावत रखते हुए इसके खिलाफ सरकार द्वारा दाखिल अपील को खारिज कर दिया है। इस आदेश के बाद एक बार फिर इग्नू से डीएलएड किये अभ्यर्थी सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हेतु योग्य घोषित हो गये हैं।
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2016 मंे पुष्पा बलोदी, दयाल कुमार व कमला आर्या आदि याचिकाकर्ताओं ने एकलपीठ में याचिका दायर कर कहा था कि उन्होंने 2014 में इग्नू से एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त दो वर्षीय डीएलएड किया है। साथ ही वे टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण भी हैं। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक द्वारा सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया हेतु जारी विज्ञप्ति दिनांक 21 नवम्बर 2015 के क्रम में आवेदन किया था, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) बागेश्वर द्वारा उनका अभ्यर्थन इग्नू से डीएलएड को अमान्य बताते हुए निरस्त कर दिया था। 1 जून 2018 को एकल पीठ ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को योग्य घोषित किया। इस दौरान एनसीटीई ने भी शपथ पत्र दाखिल कर हाईकोर्ट को अवगत कराया था कि याचिका कर्ताओं द्वारा इग्नू से किया गया डीएलएड मान्यता प्राप्त है। ऐसे ही समान मामले में अल्मोड़ा निवासी ममता आर्य की याचिका में भी उपरोक्त निर्णय को आधार बना कर एकल पीठ ने यही फैसला दिया था। अलबत्ता विभाग का आधार यह था कि इग्नू से डीएलएड केवल सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्र के रूप में सेवारत अभ्यर्थियों के लिए हैं जबकि याचिकाकर्ता पुष्पा बलोदी व दयाल कुमार शिक्षा मित्र नहीं हैं। लिहाजा सरकार की ओर तीन विशेष अपीलें दायर की गयीं, जिन्हें खारिज कर खंड पीठ ने एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा है।

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सेंट जोसफ कॉलेज के नये प्रधानाचार्य हैक्टर पिंटो।

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2019। मार्च 1888 में आयरलेंड के शिक्षाविद् एडमंड राइस की प्रेरणा से फादर रेवरन एंगलबर्ट ओएमसी द्वारा स्थापित नगर के 130 वर्ष पुराने व ऐतिहासिक सेंट जोसफ कॉलेज में नये प्रधानाचार्य रेवरन ब्रदर हैक्टर पिंटो ने नये प्रधानाचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वे पिछले दो वर्षों से स्कूल में ब्रदर के पद पर कार्यरत थे। इससे पूर्व विद्यालय में 13 वर्षों से कार्यरत प्रधानाचार्य डा. पीटर इमेन्युअल सेवानिवृत्त हो गये।

राष्ट्रीय सहारा, 3 मार्च 2019।

कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने विद्यालय की नयी वेबसाइट http://www.stjosephscollege.in/ का भी लोकार्पण किया है, जिसमें विद्यालय के गौरवशाली इतिहास से लेकर वर्तमान तक की संपूर्ण जानकारियां उपलब्ध हैं। इस अवसर पर आयोजित एसेंबली में उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें इस ऐतिहासिक विद्यालय की प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाना है। विद्यालय में अनुशासन बनाना उनकी प्राथमिकता होगी। इसके लिए उन्होंने अभिभावकों सहित सभी वर्गों से सहयोग की अपेक्षा की। साथ ही कहा है कि उनके दरवाजे हमेशा सभी के लिए बेहतर सुझावों हेतु खुले हुए हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2019। नगर से लगे गांधी ग्राम ताकुला में महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय शुरू हो गया है। शुक्रवार 1 मार्च से विद्यालय में विधिवत कक्षाएं शुरू हो गईं। उद्घाटन अवसर पर विशेष हवन पूजा-पाठ के साथ धार्मिक अनुष्ठान हुए।

राष्ट्रीय सहारा, 3 मार्च 2019।

उद्घाटन अवसर पर  मुख्य अतिथि बेलुवाखान ग्राम पंचायत के प्रधान हिमांशु पांडे ने फीता काटकर कर विद्यालय का शुभारंभ किया। उन्होंने ग्राम पंचायत के अंदर विद्यालय की स्थापना होने पर प्रबंधन को बधाई दी व आभार जताया। कहा कि इससे महात्मा गांधी की स्मृति से जुड़े ताकुला गांव को नया आयाम मिला है। प्रधानाचार्या डा. अंजलि चंद्रा ने ग्रामीणों व अभिभावकों के विद्यालय के नए परिसर में सहयोग की अपील की। सभी का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यालय उच्च आदर्श के साथ गांव का नाम रोशन करेगा। प्रबंधन ने उच्च स्तरीय गुणवत्तापूर्वक व सस्ती शिक्षा देने के लिए ग्रामीण इलाके में विद्यालय की स्थापना की है। फिलहाल विद्यालय नर्सरी से कक्षा 6 तक संचालित होगा। बच्चों के लिए बस सेवा उपलब्ध है। इस मौके पर विद्यालय के चंचल पांडे, राजेश कुमार सेन, आशुतोष भट्ट, दीवान सिंह अधिकारी, पूजा जोशी, दीपा बिष्ट समेत गंगादत्त भट्ट, रमेश जोशी, सतीश जोशी, यादराम, राकेश भट्ट, नेहा जोशी, , पीएस परिहार आदि लोग मौजूद रहे।

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-व्यायाम शिक्षक को विधि अधिकारी तो अंग्रेजी प्रवक्ता बने हज अधिकारी
-पहुंच वाले शिक्षकों की पौ बारह, स्कूलों में हो रहा शिक्षकों का इंतजार

नवीन समाचार, देहरादून,  22 फरवरी 2019। कहावत है, जिसकी चलती है, उसकी क्या गलती है। ऐसा ही कुछ उत्तराखंड में हो रहा है। सैकड़ों स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकारों में बैठे लोग अपने चहेते शिक्षकों पर इतने मेहरबान रहे हैं कि वे उन्हें उनकी मनपसंद जगहों पर भेज देते हैं। शिक्षकों की पहुंच और सत्ता में पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोई हज अधिकारी बन गया है तो कोई विधि अधिकारी, कोई वैज्ञानिक तो आयोगों में मौज काट रहे हैं। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में कार्यरत 20 प्रवक्ता, सात सहायक अध्यापक, एक प्रधानाचार्य, प्राइमरी के तीन शिक्षक व पांच अन्य कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर हैं। मजेदार बात यह है कि शिक्षक यूपी के कई जिलों से लेकर विहार, आयोग, निगमों व सचिवालय तक में पहुंचे हुए हैं। राइंका घिंडवाड़ा, पौड़ी में समाज शास्त्र के प्रवक्ता वर्तमान में नेहरू युवा केंद्र भागलपुर (विहार) में तैनात हैं। इसी तरह राइंका वज्यूला, बागेश्वर के प्रवक्ता सत्येंद्र कुमार मिश्रा सीतापुर (उत्तरप्रदेश) में, राइंका कौसानी के प्रवक्ता हरीश चंद्र संतकबीर नगर (यूपी) में तैनात हैं। राइंका बाड़ाकांडा, पौड़ी के प्रवक्ता विनोद कुमार मिश्रा इलाहाबाद तो राइंका साकिनखत, पौड़ी के प्रवक्ता शरद सिंह प्रतापगढ़ में तैनात हैं। एक अन्य एलटी शिक्षक पंकज कुमार वशिष्ठ मुजफ्फरनगर तो राइंका चौंरीखाल के प्रवक्ता शंकर सुवन प्रतापगढ़ में हैं। मजेदार बात यह है कि राइंका महुआखेड़ा ऊधमसिंहनगर के अंग्रेजी के प्रवक्ता नफीस अहमद उत्तराखंड हज कमेटी में हज अधिकारी के पद पर काम कर रहे हैं। राइंका चौरिया भरदार, रुद्रप्रयाग में भौतिकी के प्रवक्ता ओमप्रकाश नौटियाल उत्तराखंड विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र देहरादून में वैज्ञानिक के पद पर काम कर रहे हैं। ऊंची पहुंच वाला एक वाकया तो बहुत ही दिलचस्प है। राइंका गजरौला, ऊधमसिंहनगर में एलटी के सहायक अध्यापक (व्यायाम) संजीव पांडेय उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून में विधि अधिकारी के पद पर तैनात हैं। एक अन्य प्रवक्ता संतोष कुमार सिंह जो रुद्रप्रयाग में तैनात थे, वर्तमान में वे चंदौली (उत्तरप्रदेश) में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा टिहरी में तैनात प्रवक्ता सत्यनारायण कटियार रमाबाई नगर (यूपी), रामचंद्र चौहान टिहरी के बजाय आजमगढ़ में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं। उत्तराखंड का शिक्षा विभाग शिक्षकों की कमी का रोना रोता रहता है। इसके लिए लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में रिक्तियों के अध्याचन भी भेजे गये हैं। भर्तियों में विलंब होने की वजह से सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र बिना शिक्षकों के ही समय काट रहे हैं, लेकिन विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों के प्रवक्ताओं को उनके व्यक्तिगत फायदे के लिए मनचाही जगहों पर भेज दिया गया है। (इनपुट राष्ट्रीय सहारा देहरादून)

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नवीन समाचार, देहरादून/नैनीताल,  17 फरवरी 2019। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे जिन 80 शिक्षकों को शिक्षा विभाग ने बर्खास्त कर दिया था, अब सूत्रों के अनुसार उन्हें बहाल करने की तैयारी चल रही है। कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग की एकतरफा कार्रवाई पर कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए आदेश दिया था कि शिक्षकों को अपना पक्ष रखने को मौका दिया जाना चाहिए। इसके अनुपालन में विभाग अब इन्हें बहाल कर कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है।

हालांकि उच्च न्यायालय की ओर से बताया जा रहा है कि संबंधित शिक्षकों को बहाल करने का कोई आदेश पारित नहीं हुआ है। केवल नैनीताल जिले से संबंधित 5-6 शिक्षकों के मामले में यह कहा गया था कि उन्हें जांच अधिकारी द्वारा जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गयी थी। इस मामले में संबंधित औपचारिकता पूरी करने को कहा गया। वहीं उधमसिंह नगर जिले के कुछ मामलों में चार्ज शीट नहीं लगी थी। इस मामले में भी निलंबन जारी रखते हुए पुरानी चार्जशीट के आधार पर ही जांच पूरी करने को कहा गया है।

उधर शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया है कि काफी समय से शिक्षा विभाग और सरकार को शिकायतें मिल रही थी कि राज्य में बड़ी संख्या में शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्र हासिल कर नौकरी कर रहे हैं। सरकार ने इसकी जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। एसआईटी की जांच में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक मिले, जिनके प्रमाणपत्र जांच के दौरान फर्जी पाए गए थे। ऐसे करीब 80 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विभाग ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ कई शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने नियमों का पालन न करने पर सख्त नाराजगी जताते हुए विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाई। डबल बेंच में अपील के बाद भी शिक्षा विभाग को राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने कहा, शिक्षकों को बर्खास्त करने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था। शिक्षकों को नोटिस दिए बिना एकतरफा कार्रवाई की गई है। आरोपी शिक्षकों का पक्ष सुना जाना चाहिए था।

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को मुंबई में शुक्रवार को एक लाइव शो के दौरान मंच से एक बच्चे में अपना अक्स दिखाई दिया। उन्हें वह बालक पहचाना भी लगा। उन्होंने उसे मंच पर बुला लिया। परिचय पूछा तो पूरी फिल्म आंखों के आगे घूम गई। इस फ़िल्म में खुद अमिताभ तो थे ही, साथ ही था, उनके स्मृतियों में बसे उनके अपने शेरवुड कॉलेज, और नैनीताल, साथ ही वह होनहार छात्र अपूर्व गौरव, जिससे वह पहले भी इसी लाइव शो पर ऑनलाइन पर्दे पर मिल चुके थे।

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उल्लेखनीय है कि नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज के 12 वीं के छात्र अपूर्व गौरव को स्वच्छ बनेगा इंडिया कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। महानायक अमिताभ भी शेरवुड के 1958 बैच के छात्र रहे हैं। पिछले वर्ष आयोजित हुए कार्यक्रम में अपूर्व ने अपनी कविता पाठ के जरिए अमिताभ को खासा प्रभावित किया था। सो शो के दौरान अमिताभ बच्चन ने अपूर्व को स्टेज पर बुला लिया। अपूर्व ने यहां भी अपनी स्वरचित कविताओं से महानायक समेत कार्यक्रम में मौजूद लोगों को खासा प्रभावित किया।

अमिताभ सहित मंच पर मौजूद लोग अपूर्व की कविता से खासे प्रभावित हुए। कविता समाप्त होते ही उन्होंने अपूर्व को गले मिलकर शाबासी दी।

इस दौरान अपूर्व ने उन्हें शेरवुड कॉलेज के 2019 में मनाये जा रहे गौरवशाली 150वें स्थापना दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में सपरिवार आने के लिए आमंत्रण भी दे दिया। अमिताभ अपूर्व के इस आग्रह को नहीं ठुकरा सके। अमिताभ ने उन्हें कार्यक्रम में आने की मौखिक सहमति दे दी। विद्यालय में अमिताभ के मुख्य अतिथि बनने के आग्रह को स्वीकार करने से खुशी का माहौल है।

अपने ‘सुपर-डुपर जूनियर’ के ‘जबरा फैन’ हुए सदी के महानायक, अपूर्व ने कुछ ‘अपूर्व’ कर बढ़ाया ‘गौरव’

अपूर्व गौरव शाह

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p style=”text-align: justify;”>-शेरवुड कॉलेज के छात्र अपूर्व की कविता से अभिभूत होकर मांगा वीडियो, कहा अपने फेसबुक तथा अन्य सोशल साइटों पर करेंगे कविता का प्रचार
नवीन जोशी, नैनीताल। व्यक्ति की महानता अपनी नहीं दूसरों में प्रशंसा में निहित होती है। एक दिन पूर्व ही फिल्म ‘ठग ऑफ हिंदुस्तान’ के लिये स्वयं के बजाय अपने सह कलाकार आमिर खान को ‘महान’ बताने वाले सदी के महानायक-बिग बी यानी अमिताभ बच्चन अब अपने एक ‘सुपर-डुपर जूनियर” के मानो ‘जबरा फैन’ हो गये हैं। एक राष्ट्रीय चैनल द्वारा सीधे प्रसारित हो रहे एक कार्यक्रम में अमिताभ को उनके पूर्व विद्यालय रहे शेरवुड कॉलेज नैनीताल के नौवीं कक्षा के छात्र अपूर्व गौरव शाह ने स्वच्छता अभियान पर लिखी हुई कविता सुनाते हुए कुछ ऐसा ‘अपूर्व’ कर ‘गौरव’ बढ़ाया कि उसकी प्रशंशा करते हुये अमिताभ ने टिप्पणी की-ऐसी कविता उन्होंने आज तक कभी नहीं सुनी। उन्होंने अपूर्व का उत्साहवर्धन करते हुए उनसे उनकी कविता का वीडियो भी मांगा और कहा कि वह अपने फेसबुक तथा अन्य सोशल साइटों पर इस कविता को अपलोड कर इसका प्रचार करेंगे।

फिर अपने ‘सुपर जूनियर’ की कविता के कायल हुए ‘सीनियर बच्चन’

नैनीताल। अपने कवि पिता हरवंश राय बच्चन की तरह स्वयं भी कवि हृदय बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार पुनः अपने शेरवुड कॉलेज के ‘सुपर जूनियर’ अपूर्व गौरव की कविता के एक बार फिर से कायल हो गये, और उन्होंने एक टीवी चैनल पर बीती 2 अक्टूबर 2017 को सीधे जुड़ते हुए अपूर्व की स्वच्छता से संबंधित कविता की तालियां बजाकर सराहना की, और इस कविता की प्रति उन्हें अलग से भेजने को कहा। उल्लेखनीय है कि अमिताभ पूर्व में भी इसी चैनल के एक ऐसे ही कार्यक्रम में अपूर्व की स्वच्छता पर ही एक अन्य कविता सुन और सराह चुके हैं। गौरतलब है कि कि अपूर्व मूलतः बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के रामनगर कस्बे का निवासी है। अपनी नयी कविता में अपूर्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर सफाई करने वालों को देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की तरह बड़ा काम करने वाला बताया है। गौरतलब है कि अपूर्व की कविता सुनने के बाद तत्कालीन डीएम दीपक रावत ने भी उसे स्वच्छता अभियान के लिये जनपद का ब्रांड एंबेसडर बनाने की बात कही थी, हालांकि बात आगे बढ़ती नहीं दिखाई दी है। अपनी ताजा कविता से भी अपूर्व ने एक बार फिर अपने नाम के अनुरूप अपने विद्यालय व नगर का ‘गौरव’ बढ़ाया है। गत दिवस वे अपने विद्यालय में आयोजित हुई अखिल भारतीय वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेता भी चुने गए थे।

अपूर्व की अमिताभ के सम्मुख प्रस्तुत कविता को यहाँ क्लिक कर के देख सुन सकते हैं।

भूलना न होगा कि अमिताभ अपने दौर के महान कवि हरवंश राय बच्चन के पुत्र हैं। वह स्वयं भी कविता करते रहे हैं, और कई बार फिल्मों तथा अन्य मंचों पर स्वयं की तथा अपने पिता की प्रसिद्ध कविता मधुशाला के कई छंदों को खास अंदाज में स्वर भी देते रहे हैं। फिल्म ‘कभी-कभी’ में शीर्षक गीत ‘कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है’ हो या फिल्म अग्निपथ का शीर्षक गीत, उसे कविता के रूप में अमिताभ ने अपने स्वर देकर हमेशा के लिये अपने प्रशंसकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन उनकी वास्तविक महानता अपने प्रशंसकों की प्रशंसा करने में भी निहित है, जो यहां लाइव प्रसारित हो रहे टीवी कार्यक्रम के दौरान दिखी। उन्होंने अपूर्व की कविता के शब्दों-‘यदि निकला सफाई करने, संकल्प कड़ा मानें हम, कचरा उठाने की शर्मिंदगी से, देश बड़ा मानें हम।” को एकटक सुनते हुये आखिर में अपने खास अंदाज में जमकर तालियां बजायीं। अमिताभ ने कहा, ‘उन्होंने ऐसी कविता न कभी सुनी और न ही कभी बनाई। उन्होंने अपूर्व से पूछा, कहां से उसने यह सब सीखा और कहां से इतना आत्म विश्वास उसके अंदर आया। हमारे जमाने में तो ऐसा कुछ भी नहीं होता था।’ साथ ही उन्होंने गर्व जताया कि वह खुद शेरवुड कलेज के विद्यार्थी रहे हैं। इसके बाद अमिताभ से प्रशंसा के बोल सुनकर गदगद हुये मूल रूप से बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले के रामनगर निवासी अपूर्व ने कहा कि उनके क्षेत्र के एक दशरथ मांझी जब पहाड़ काट सकते हैँ तो हजारों-लाखों लोग भारत को स्वच्छ क्यों नहीं बना सकते। उसने बताया कि वह बचपन से ही कविता का शौक रहा है। वह पहले भी वाद विवाद समेत कई अन्य प्रतियोगिताएं जीतकर विद्यालय का नाम रोशन कर चुका है। अपूर्व के प्रधानाचार्य अमनदीप संधु ने कहा कि अमिताभ द्वारा उनके विद्यालय के छात्र की सराहना करना बेहद गर्व की बात है। इधर डीएम दीपक रावत ने अपूर्व को स्वच्छता अभियान के लिये नैनीताल जिले का ब्रांड एंबेसडर बनाने की घोषणा की।

अपनी कविता से अमिताभ बच्चन से प्रशस्ति पा चुके शेरवुड के अपूर्व गौरव रहे प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ वक्ता

नैनीताल। नगर के शेरवुड कॉलेज में चल रही पांचवी लेवलिन अखिल भारतीय अंतरविद्यालयी वाद-विवाद प्रतियोगिता मेजबान शेरवुड कॉलेज ने जीत ली, जबकि अजमेर राजस्थान का मेयो कॉलेज उपविजेता रहा। वहीं प्रतियोगिता के दौरान ही आयोजित हुई क्विज ट्रॉफी सैनिक स्कूल घोड़ाखाल को प्राप्त हुई, जबकि हिमांचल प्रदेश का पाइनग्रोव स्कूल उपविजेता रहा। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार शेरवुड के अपूर्व विक्रम शाह को चुना गया। उल्लेखनीय है कि अपूर्व पूर्व में स्वच्छता पर अपनी एक कविता से एक टीवी चैनल पर लाइव शो के दौरान इसी विद्यालय के छात्र अमिताभ बच्चन को प्रभावित कर उनसे हौंसला अफजाई प्राप्त कर चुके हैं। उनके अतिरिक्त नई दिल्ली के वसंत वैली स्कूल की अद्वया गुलाती को विपक्ष की सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार दिया गया। इससे पूर्व मेयो कॉलेज अजमेर की फाल्गुनी जोशी सेमी फाइनल की सर्वश्रेष्ठ वक्ता रहीं और अवंतिका छोडा को एक्सीलेंस अवार्ड प्राप्त हुआ।

अमिताभ के शेरवुड कॉलेज में उतरे ‘तारे जमीन पर’ : ‘तारे जमीन पर’ फेम दर्शील ने नाटक से रिझाया

शेरवुड कॉलेज में नाटक ‘द अडॉरेबल लूजर्स’ के एक दृश्य में सिने कलाकार दर्शील सफारी व अभिषेक पटनायक।

नैनीताल, 1 मई 2018। शिक्षा नगरी नैनीताल के सर्वश्रेष्ठ, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के विद्यालय-शेरवुड कॉलेज में मंगलवार को एक तरह से ‘तारे जमीन पर’ नजर आये। विद्यालय में ‘तारे जमीन पर’ हिंदी फिल्म से चर्चित हुए बाल कलाकार दर्शील सफारी ने कॉलेज के ‘बैस्टन सेंटर’ में अपने सह कलाकार अभिषेक पटनायक के साथ केवल दो चरित्रों, प्रोफेसर एवं छात्र युक्त हास्य नाटक प्रस्तुत किया। अभिषेक द्वारा ही लिखे एवं अनुराग खन्ना द्वारा ‘आउट ऑफ द वर्ल्ड’ थियेटर ग्रुप की ओर से प्रदर्षित नाटक ‘द अडॉरेबल लूजर्स’ का यहां 61वां शो था। बताया गया कि इससे पूर्व दर्शील स्कूली बच्चों को थियेटर से जोड़ने, उन्हें थियेटर की बारीकियों से अवगत कराने के लिए देश भर में इस नाटक के 60 शो कर चुके हैं। नाटक एक गणित में कमजोर छात्र-दर्शील एवं अंग्रेजी में कमजोर शिक्षक-अभिषेक के बीच के वार्तालापों व कई भावपूर्ण एवं हास्य दृश्यों के जरिये छात्र एवं शिक्षक के संबंधों को आगे बढ़ाता हुआ चलता है।

नाटक के समापन पर दर्शील एवं उनकी टीम को सम्मानित करते शेरवुड के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू

नाटक में विन्सो मिनोला, मनीस केतकर, सुभेदु साह, ऋतिक सिंह आदि ने भी सहयोग दिया। नाटक के समापन पर शेरवुड के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने दर्शील एवं उनकी टीम को सम्मानित किया। विद्यालय के उप प्रधानाचार्य हेम चंद्र पांडे, बासु साह, एसडी पाठक, पंकज चौधरी व अजय शर्मा सहित अनेक शिक्षकों व विद्याथियों ने करीब एक घंटा 40 मिनट के नाटक का पूरे समय खूब आनंद लिया।

नैनीताल के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान

शिक्षा नगरी के रूप में नैनीताल

नैनीताल को यूं ही शिक्षा नगरी के रूप में नहीं जाना जाता है। दरअसल, इसके अंग्रेज निर्माताओं ने यहां की शीतल व शांत जलवायु को देखते हुऐ इसे विकसित ही इसी प्रकार किया। १८ नवंबर १८४१ को आधिकारिक रूप से खोजा गया यह नगर अंग्रेजों को अपने घर जैसा लगा और उन्होंने इसे ‘छोटी बिलायत” के रूप में बसाया। सर्वप्रथम १८५७ में अमेरिकी मिशनरियों के आने से यहां शिक्षा का सूत्रपात हुआ। उन्होंने मल्लीताल में एशिया का पहला मैथोडिस्ट चर्च बनाया, तथा इसके पीछे ही नगर के पहले अमेरिकन मिशनरी स्कूल की आधारशिला रखी, जो वर्तमान में सीआरएसटी स्कूल के रूप में नऐ गौरव के साथ मौजूद है। १८६९ में यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में वर्तमान के शेरवुड कालेज एवं लड़कियांे के लिए यूरोपियन डायसन गल्र्स स्कूल भी खुला, जो वर्तमान में ऑल सेंट्स कालेज के रूप में विद्यमान है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन शेरवुड कालेज व सैम बहादुर जनरल मानेकशॉ जैसी हस्तियां यहां के छात्र रहे। इसके अलावा १८७७ में ओक ओपनिंग हाइस्कूल के रूप में वर्तमान बिड़ला विद्या मंदिर, १८७८ में वेलेजली गल्र्स हाइस्कूल के रूप में वर्तमान कुमाऊं  विश्व विद्यालय का डीएसबी परिसर, १८८६ में सेंट एन्थनी कान्वेंट ज्योलीकोट तथा १८८८ मंे सेंट जोजफ सेमीनरी के रूप में वर्तमान सेंट जोजफ कालेज की स्थापना हुई। इस दौर में यहां रहने वाले अंग्रेजों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते थे, और उन्हें अपने देश से बाहर होने या कमतर शिक्षा लेने का अहसास नहीं होता था। इस प्रकार आजादी के बाद २०वीं सदी के आने से पहले ही यह नगर शिक्षा नगरी के रूप में अपनी पहचान बना चुका था। यह परंपरा आज भी जारी है। नगर के द होली एकेडमी, अमेरिकन किड्ज व वृंदावन पब्लिक स्कूल आदि छोटे बच्चों के प्रिपरेटरी स्कूल और बिड़ला विद्या मंदिर, लोंग व्यू पब्लिक स्कूल, राधा चिल्ड्रन एकेडमी, ओकवुड स्कूल, रामा मांटेसरी, होली एंजिल्स स्कूल, द मदर्स हर्ट, बिशप शॉ इंटर कॉलेज, अम्तुल्स पब्लिक स्कूल व वसंत वैली पब्लिक स्कूल आदि स्कूल भी शिक्षा नगरी की इस प्रतिष्ठा को बढ़ाने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहे हैं। खास बात यह भी है कि यहां के स्कूलों ने आजादी के बाद भी अपना स्तर न केवल बनाऐ रखा, वरन ‘गुरु गोविंद दोउं खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद बताय” की विवशता यहां से निकले छात्र छात्रााओं में कभी भी नहीं दिखाई दी। आज भी दशकों पूर्व यहां से निकले बच्चे वृद्धों के रूप मंे जब यहां घूमने भी आते हैं तो नऐ शिक्षकों में अपने शिक्षकों की छवि देखते हुऐ उनके पैर छू लेते हैं।जाना जाता है। दरअसल, इसके अंग्रेज निर्माताओं ने यहां की शीतल व शांत जलवायु को देखते हुऐ इसे विकसित ही इसी प्रकार किया। १८ नवंबर १८४१ को आधिकारिक रूप से खोजा गया यह नगर अंग्रेजों को अपने घर जैसा लगा और उन्होंने इसे ‘छोटी बिलायत” के रूप में बसाया। सर्वप्रथम १८५७ में अमेरिकी मिशनरियों के आने से यहां शिक्षा का सूत्रपात हुआ। उन्होंने मल्लीताल में एशिया का पहला मैथोडिस्ट चर्च बनाया, तथा इसके पीछे ही नगर के पहले अमेरिकन मिशनरी स्कूल की आधारशिला रखी, जो वर्तमान में सीआरएसटी स्कूल के रूप में नऐ गौरव के साथ मौजूद है। १८६९ में यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में वर्तमान के शेरवुड कालेज एवं लड़कियांे के लिए यूरोपियन डायसन गल्र्स स्कूल भी खुला, जो वर्तमान में ऑल सेंट्स कालेज के रूप में विद्यमान है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन शेरवुड कालेज व सैम बहादुर जनरल मानेकशॉ जैसी हस्तियां यहां के छात्र रहे। इसके अलावा १८७७ में ओक ओपनिंग हाइस्कूल के रूप में वर्तमान बिड़ला विद्या मंदिर, १८७८ में वेलेजली गल्र्स हाइस्कूल के रूप में वर्तमान कुमाऊं  विश्व विद्यालय का डीएसबी परिसर, १८८६ में सेंट एन्थनी कान्वेंट ज्योलीकोट तथा १८८८ में सेंट जोजफ सेमीनरी के रूप में वर्तमान सेंट जोजफ कालेज की स्थापना हुई। इस दौर में यहां रहने वाले अंग्रेजों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते थे, और उन्हें अपने देश से बाहर होने या कमतर शिक्षा लेने का अहसास नहीं होता था। इस प्रकार आजादी के बाद २०वीं सदी के आने से पहले ही यह नगर शिक्षा नगरी के रूप मंे अपनी पहचान बना चुका था। यह परंपरा आज भी जारी है। नगर के द होली एकेडमी, अमेरिकन किड्ज व वृंदावन पब्लिक स्कूल आदि छोटे बच्चों के प्रिपरेटरी स्कूल और बिड़ला विद्या मंदिर, लोंग व्यू पब्लिक स्कूल, राधा चिल्ड्रन एकेडमी, ओकवुड स्कूल, रामा मांटेसरी, होली एंजिल्स स्कूल, द मदर्स हर्ट, बिशप शॉ इंटर कॉलेज, अम्तुल्स पब्लिक स्कूल व वसंत वैली पब्लिक स्कूल आदि स्कूल भी शिक्षा नगरी की इस प्रतिष्ठा को बढ़ाने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहे हैं। खास बात यह भी है कि यहां के स्कूलों ने आजादी के बाद भी अपना स्तर न केवल बनाऐ रखा, वरन ‘गुरु गोविंद दोउं खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद बताय” की विवशता यहां से निकले छात्र छात्रााओं में कभी भी नहीं दिखाई दी। आज भी दशकों पूर्व यहां से निकले बच्चे वृद्धों के रूप मंे जब यहां घूमने भी आते हैं तो नऐ शिक्षकों में अपने शिक्षकों की छवि देखते हुऐ उनके पैर छू लेते हैं।राधा चिल्ड्रन अकेडमी& साकार हुआ शिक्षा का सपनाराधा चिल्ड्रन अकेडमी की स्थापना सरोवरनगरी के संस्थापकों में शुमार स्वर्गीय मोती राम शाह के वंशज युवा शिक्षा प्रेमी दीपक शाह व उनके साथियों ने वर्ष १९९९ में छात्र-छात्राओं को महंगी शिक्षा से इतर सस्ती व गुणवत्तापूर्वक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई। कम समय में ही स्नोभ्यू स्थित राधा चिल्ड्रन अकेडमी की पहचान गरीब बच्चों को अच्छी व गुणवत्तापूर्वक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नगर भर में बन गई है, और इस क्षेत्र में यह विद्यालय अभिभावकों की पहली पसंद बन गया है। यहां पर आसपास के क्षेत्रों के करीब ढाई सौ से अधिक बच्चों को कुशल व अनुभवी शिक्षक-शिक्षिकाओं के द्वारा पढ़ाया जाता है। बेहतर क्लास रुम, कंप्यूटर लैब आदि की सुविधाएं स्कूल में उपलब्ध कराई गई हैं। आज विद्यालय के बच्चे नगर में आयोजित होने वाले विभिन्न प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ स्थानों पर अपना नाम दर्ज करा रहे हैं।

नगर के आम बच्चों की पहली पसंद बिशप शॉ इंटर कॉलेज

नगर का तल्लीताल डांठ जैसे सर्वाधिक सुगम स्थान पर स्थित बिशप शॉ इंटर कालेज नगर के आम निम्न एवं मध्यम वर्ग के बच्चों एवं उनके अभिभावकों की पहली पसंद है। मार्च १९७१ में स्थापित विद्यालय चार वर्ष पूर्व से उत्तराखंड बोर्ड के अंतर्गत बेहद कम शुल्क पर सीबीएसई पैटर्न पर इंटरमीडिएट तक की अंग्रेजी माध्यम से गुणवत्ता युक्त शिक्षा दे रहा है। यही नहीं विद्यालय में नैतिक शिक्षा एवं कम्प्यूटर शिक्षा भी दी जाती है। विद्यालय में विज्ञान वर्ग की शिक्षा भी उपलब्ध है। प्रबंधक नीलम दानी एवं प्रधानाचार्य जे.ए. विल्सन के कुशल निर्देशन में विद्यालय के विद्यार्थियों को खेल तथा नगर में होने वाली निबंध, चित्रकला, भाषण आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने और पढ़ाई के साथ ही चहुमुंखी व सर्वांगीण विकास करने का मौका उपलब्ध होता है। विद्यालय उत्तरोत्तर विकास के पथ पर अग्रसर है। इधर बीते वर्ष यहां के चंदन जोशी ने इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में उत्तराखंड राज्य में १७वां और कुलदीप सिंह कुरिया ने १९वां स्थान प्राप्त किया।

प्रगति पथ पर वसंत वैली पब्लिक स्कूल

वसंत वैली वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित वसंत वैली पब्लिक स्कूल की स्थापना वर्ष १९९८ में की गई थी। विद्यालय कान्वेंट शिक्षित एवं नैनीताल के शेरवुड कालेज के साथ दिल्ली के स्कूलों में शिक्षण कर चुकी एमए, एलएलबी व बीएड की उच्च शिक्षा प्राप्त प्रधानाचार्या श्रीमती नीरज सिंह के सफल निर्देशन में उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्तमान में उत्तराखंड शासन की मान्यता प्राप्त यह स्कूल नर्सरी से आठवीं कक्षा तक की उच्च स्तरीय शिक्षा उपलब्ध करा रहा है, तथा शीघ्र ही सीबीएसई बोर्ड से दसवीं तक की मान्यता प्राप्त करने जा रहा है। बच्चों को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए किताबी ज्ञान के अलावा यहां समय समय पर खेल-कूद, वाद-विवाद, कला तथा संगीत की प्रतियोगिताऐं आयोजित की जाती हैं। समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का महादान देने के लिये इस विद्यालय की अलग पहचान है।

गौरवशाली शेरवुड कालेज

शेरवुड कालेज को नगर के सबसे पुराने प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल के रूप में जाना जाता है। १८५९ में इस विद्यालय की स्थापना यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में हुई थी। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, देश के पहले थल सेनाध्यक्ष जनरल सैम मानेकशॉ सहित कई जानी मानी हस्तियों को शिक्षा व अनुशासन के साथ चर्तुर्दिक ज्ञान की दीक्षा देने वाले इस विद्यालय का अपना करीब डेढ़ शताब्दी लंबा गौरवशाली इतिहास रहा है। एटकिंसन लिखित प्रतिष्ठित ‘हिमालयन गजेटियर” में विद्यालय का उल्लेख है, जिससे इसकी प्रतिश्ठा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अपनी प्रतिश्ठा के अनुरूप दिनों दिन अत्याधुनिकता से कदमताल करता हुआ विद्यालय पठन पाठन के साथ विद्यार्थियों के चतुर्दिक विकास के महायज्ञ में जुटा हुआ है। इस प्रगति का श्रेय नि:संदेह विद्यालय के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू की नेतृत्व क्षमता और अनुशासन प्रियता को जाता है, जिन्होंने ‘ब्रांड’ बन चुके ‘शेरवुडियन्स’ में पुरानी बेहतरीन छवि के साथ जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का नयां जज्बा और जोश भरा है। विगत वर्ष विद्यालय में पत्नी जया, पुत्र अभिषेक, बहु ऐश्वर्या के साथ पधारे महानायक अमिताभ बच्चन के साथ ही इस वर्ष उनके भाई अजिताभ बच्चन, बॉलीवुड-हॉलीवुड कलाकार कबीर बेदी से भी श्री संधू को इन्हीं गुणों के लिए दिल खोलकर मिली प्रशंशा से इसकी पुष्टि हो गई।

शैक्षणिक उत्कृष्टता के नित नऐ मानदंड स्थापित करता बिड़ला विद्या मंदिर

शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं मूल्यों पर आधारित शिक्षा के समन्वय के बिना एक अच्छे समाज एवं उन्नत देश के निर्माण की कल्पना नहीं की जा सकती। १९७७ में स्थापित नगर के बिड़ला विद्या मंदिर नैनीताल का सतत प्रयास है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ ही उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास के भरपूर अवसर दिऐ जाऐं। यही कारण है कि यहां से पढ़े हुऐ विद्यार्थी अपने निजी जीवन में अत्यंत सफल रहने के साथ ही प्रशासनिक, इंजीनियरिंग, मेडिकल, सैन्य बलों तथा रंगमंच, राजनीति एवं अभिनय जैसे क्षेत्रों में अपनी सफलता के झंडे गाड़ते रहते हैं। यह विद्यालय अत्यंत योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों से युक्त होने के साथ-साथ बच्चों के विकास के लिए जरूरी सभी खेल-कूद सुविधाओं से संपन्न हैं। यहां कक्षा दस एवं बारह के बोर्ड परिणाम प्रति वर्ष अत्यंत उत्कृष्ट कोटि के होते हैं। यहां के विद्यार्थी हर वर्ष ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की मेरिट में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करते हैं। विद्यालय में एक बार पुन: पदार्पण करने वाले विद्वान एवं लंबा शैक्षणिक अनुभव रखने वाले प्रधानाचार्य एके शर्मा का मानना है कि बच्चों में शैक्षणिक उत्कृष्टता,

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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