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अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने जनपदीय अधिकारियों के लिए जारी किए शिक्षकों-कर्मचारियों व विद्यार्थियों हेतु निर्देश..

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-शिक्षकों-कर्मचारियों की समस्याओं का यथासमय निस्तारण करने एवं प्रवासियों के बच्चों को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश व ऑनलाइन शिक्षा देने के निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2020। कुमाऊं मंडल के अपर निदेशक-माध्यमिक शिक्षा डा. मुकुल कुमार सती ने जनपदीय अधिकारियों को शिक्षकों एवं कार्मिकों के प्रकरण यथासमय निस्तारित किये जाने के निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कोविड-19 के चलते कोई भी शिक्षक एवं कार्मिक कदापि कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पायें। साथ ही उन्होंने कोरोना काल में घरों को लौट चुके प्रवासियों के बच्चों को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेश देने में विशेष प्राथमिकता देने तथा मौजूदा दौर में उन्हें आनलाईन शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। 
एडी डा. सती ने कहा है कि वर्तमान में कोविड-19 के चलते विद्यालयों के बंद होने से बच्चे घर पर रहकर वीडियो व व्हाट्सएप ग्रुप आदि माध्यमों से आनलाईन पढ़ाई कर रहे हैं। जनपदीय अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी स्कूली बच्चों के आनलाईन पठन-पाठन की अपने स्तर से भी समीक्षा करें और प्रधानाचार्य आनलाईन शिक्षण कार्य की नियमित रूप से मानीटरिंग करते रहे। आनलाईन पठन-पाठन के अंर्तगत बच्चों द्वारा किये जा रहे गृहकार्य का भी मूल्याकंन किया जाये। जिन दुर्गम इलाको में नेटवर्क की दिक्कतें आ रही हैं वहां पर अभिभावकों को बुलाकर बच्चों को शिक्षण कार्य दिया जाये तथा उसका नियमित मूल्याकंन किया जाये। उन्होंने पुनः बताया कि सभी ग्राम पंचायतों को भारत सरकार द्वारा शीघ्र ही तीस जीबी इंटरनेट संयोजन की सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके अलावा डा. सती ने प्रधानाचार्यों से अपनेे मुख्यालयों में बने रहने तथा बच्चों के पठन-पाठन पर विशेष ध्यान देने और बच्चों की ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के साथ उनकी मासिक परीक्षा भी लेने को भी कहा है। 

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में 21 से स्कूल खोलने पर राज्य सरकार का बड़ा फैसला, स्कूल फिलहाल नहीं खुलेंगे

नवीन समाचार, देहरादून, 15 सितंबर 2020। देश भर में आगामी 21 सितंबर से नौवीं से 12वीं कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों को खोलने के आदेश उत्तराखंड में लागू नहीं होंगे। इस संबंध में मंगलवार को प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने साफ कर दिया है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य में फिलहाल स्कूल बंद ही रहेंगे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इससे संबंधित निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड में 21 सितंबर से विद्यालयों को नहीं खोलने का निर्णय लिया है। कोरोना संकट के चलते प्रदेश में जैसे हालात बने हुए हैं, उसे देखते हुए फिलहाल स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर जरा भी संदेह रहा और संक्रमण का खतरा बढ़ा, तो स्कूल नहीं खोले जाएंगे। आज इस फैसले पर शिक्षा मंत्री ने मुहर लगा दी। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए उत्तराखंड में 21 सितंबर से स्कूल नहीं खुलेंगे। उल्लेखनीय है कि कोविड संकट के चलते मार्च से ही देशभर के स्कूल बंद हैं।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल में स्कूलों के खुलने के लिए जारी हुए दिशा-निर्देश

-अपर निदेशक-माध्यमिक शिक्षा डा. मुकुल सती ने जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को जारी किए निर्देश
-बच्चों को स्कूल आने के लिए किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाएगा
नवीन समाचार, नैनीताल, 13 सितंबर 2020। कुमाऊं मंडल के अपर निदेशक-माध्यमिक शिक्षा डा. मुकुल सती ने केंद्र सरकार के आगामी 21 सितंबर से नौवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय खोलने के प्राविधान पर अपनी ओर से दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 21 सितंबर से कक्षा नौ से 12 के बच्चों को शिक्षकों की सलाह लेने के लिए स्वेच्छा से स्कूल जाने की अनुमति दी गई है। इस दौरान यदि कोई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं तो उन पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाएगा। उन्होंने साफ किया है कि स्कूलों के खुलने में सरकार के दिशा-निर्देशों का पूर्णतया पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
डा. सती ने इस बारे में मंडल के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जनपदीय अधिकारी अपने जनपदों के जिलाधिकारियों से इस संबंध में पहले ही विचार-विमर्श कर लें और किसी भी प्रकार की असावधानी न बरतें। उन्होंने सभी विद्यालयों को सैनिटाइज करने, विद्यालयों में मास्क का प्रबंध रखने, आवश्यकतानुसार 50 फीसद शिक्षकों को ही बुलाने को कहा है। साथ ही प्रधानाचार्यों से पूर्व की तरह ऑनलाइन पठन-पाठन को भी जारी रखते हुए इसकी मॉनीटरिंग करने एवं विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने को भी कहा है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया है कि शिक्षकों के द्वारा ऑनलाइन शिक्षण में बेहतर कार्य किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : सर्वे में सामने आई ऑनलाइन पढ़ाई की जमीनी हकीकत: 60% से अधिक बच्चों के पास नहीं मिले एंड्राइड फोन, 78% गांवों में नेटवर्क की दिक्कत

-वीरांगना वाहिनी ने प्रदेश के चार जिलों के 10 विकासखंडों की 300 ग्राम पंचायतों में सर्वे कर निकले निष्कर्श से प्रदेश के शिक्षा मंत्री को अवगत कराया
दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली, 09 सितंबर 2020। केंद्र व राज्य सरकारें जहां बच्चों से कोविद-19 की महामारी के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई को अपनाने की सलाह दे रही हैं, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के 60 फीसद से अधिक बच्चों के पार ऑनलाइन पढ़ाई करने योग्य एंड्राइड फोन ही नहीं हैं, जबकि 78 फीसद ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की अत्यधिक दिक्कत है। यह दावा वीरांगना ग्राम पंचायत स्तरीय महिला जनप्रतिनिधि संगठन ने राज्य के चार जिलों-अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व नैनीताल के 10 विकासखंडों की 300 ग्राम पंचायतों में सर्वे करने से प्राप्त निष्कर्श के आधार पर किया है। संगठन ने इस निष्कर्श की जानकारी प्रदेश के शिक्षा मंत्री को दी है।
संगठन ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री को भेजे पत्र में सर्वे के आधार पर कहा है कि अल्मोड़ा जिले के ताकुला ब्लॉक की 51 ग्राम पंचायतों में सरकारी स्कूलों में कुल 3720 विद्यार्थियों में से 2252 यानी 60.5 फीसद विद्यार्थियों के पास एंड्राइड फोन नहीं हैं, जबकि 51 में से 40 यानी 78 फीसद ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की अत्यधिक दिक्कत है। सर्वे में यह भी दावा किया गया है कि बागेश्वर जिले में कहीं भी ऑनलाइन कक्षाएं नहीं चल रही हैं। केवल 2 प्रतिशत बच्चों को शिक्षकों द्वारा गृहकार्य दिया जा रहा है व इतने ही बच्चे दूरदर्शन से जुड़े हैं। 10 प्रतिशत के पास टेलीविजन भी नहीं हैं। 50 प्रतिशत ग्राम प्रचायतों में विद्युत आपूर्ति नहीं हो रही है। अलबत्ता 60 प्रतिशत बच्चों को ह्वाट्सएप के द्वारा गृहकार्य दिया जा रहा है। कमोबेश यही स्थिति अन्य जिलों की भी है। ऐसे में उन्होंने बच्चों को छोटे समूह में ऑफलाइन पढ़ाने, उचिन कनेक्टिविटी की व्यवस्था करने, स्कूल प्रबंधन समितियों को सक्रिय करने सहित अन्य विकल्पों पर विचार करने को कहा है।

यह भी पढ़ें : शिक्षक दिवस : यहाँ किया गया गुरुवंदन-गुरु पूजन

नवीन समाचार, नैनीताल, 05 सितंबर 2020। शिक्षक दिवस कोविद-19 की महामारी के बावजूद उत्साहपूर्वक अलबत्ता छात्र-छात्राओं के बिना मनाया गया। इस अवसर पर नगर के पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुर्गापुर में विद्यालय परिवार के छात्रों द्वारा गुरुवंदन कर गुरुपूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के 11वीं के छात्र सुदर्शन सौराड़ी सहित अन्य छात्रांे के गुरुजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भेजे गए वीडियो का प्रदर्शन तथा देश के दूसरे राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।
प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह ने कहा कि डा. राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के ज्ञानी, महान शिक्षाविद, महान दार्शनिक, चिंतक व महान वक्ता होने के साथ-साथ विज्ञानी व हिंदू विचारक भी थे। उन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप मे बिताया। उन्होंने सभी अध्यापकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

शिक्षण के इतर अन्य कार्यों में लगाए जाएं सरकारी स्कूलों के शिक्षक: डा. जंतवाल

नैनीताल। पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का भावपूर्ण स्मरण किया। उनका मानना था कि शिक्षा के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास व सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। उन्होंने इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया कि पूर्व में आश्वासनों के अनुरूप सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शैक्षणिक कार्यों से इतर अन्य कार्यों में न लगाया जाए

यह भी पढ़ें : ऑनलाइन शिक्षण में दिक्कत वाले स्कूलों में वर्क शीट से होगी पढ़ाई व मासिक परीक्षा

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 सितंबर 2020। कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल सती ने मंगलवार को मंडल के प्रधानाचार्यों से ऑनलाइन माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण की समीक्षा की, तथा निर्देश दिये कि जिन विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षण में दिक्कतें आ रही हैं, वहां वर्क शीट यानी प्रश्न लिखे प्रपत्रों या कापियों के माध्यम से विद्यालय आ रहे अभिभावकों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को पढ़ाएं एवं उनकी मासिक परीक्षा आयोजित कराएं। साथ ही ऑनलाइन शिक्षण के साथ गृहकार्य भेजकर कार्यों का मूल्यांकन करने का भी कहा और दूरदर्शन, ज्ञानदीप, अध्यापकों के वीडियो व व्हाट्सएप ग्रुप एवं स्वयंप्रभा चैनल आदि के माध्यम से पठन-पाठन कराने पर विशेष ध्यान देने पर भी जोर दिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानाचार्यों को ऑनलाइन पाठ्यक्रम पर प्रस्तुतीकरण भी दिया।
उन्होंने प्रधानाचार्यों को बताया कि मध्याह्न भोजन योजना में अच्छा कार्य हुआ है, इसकी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उत्तराखंड राज्य की प्रशंसा की है। बैठक में यह भी बताया कि फोन तथा विद्यालय आ रहे अभिभावकों के माध्मम से मंडल में अच्छी संख्या में बच्चों के प्रवेश भी हो रहे हैं। इस दौरान डा. सती ने मनान, गढ़ीनेगी, जजुराली, देवद्वार, द्वाराहाट, हल्सोकोरड़, कनालीछीना व मालधनचौड़ सहित कई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं खंड शिक्षा अधिकारियों से वार्ता की। डायट भीमताल के नीरज तिवारी, डा. विमल थपलियाल व आशुतोष साह ने प्रधानाचार्यों को ऑनलाइन माध्मय से बच्चों को पढ़ाने की जानकारी भी दी। ऑनलाइन बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जगमोहन रौतेला, संजय रौतेला व दिनेश साह आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : सूचना: तीसरे ‘टीचर ऑफ द इयर’ पुरस्कार के लिए ऐसे करें आवेदन..

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2020। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, यूकॉस्ट, सीएसटीटी, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में दिव्य हिमगिरि पत्रिका के द्वारा ‘सोसायी फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इन साइंस, तकनीकी एवं कृषि’ के तीसरे ‘टीचर ऑफ द इयर’ पुरस्कार के लिए नामांकन आमंत्रित किये गये हैं। शिक्षक, प्रधानाचार्य, विभागाध्यक्ष एवं कुलपति आदि इस लिंक से नामांकन कर सकते हैं। https://forms.gle/S2BTQPnEFQ2MnQa66

यह भी पढ़ें : दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, यूपी से 8 से 10 गुना हो गई दून एवं हल्द्वानी मेडिकल कालेज की फीस… विरोध में सरकार को जगाने की तैयारी

-यहां साढ़े बाइस लाख हो गई है फीस, जबकि मौलाना आजाद मेडिकल कालेज में मात्र 1200 और लेडीज हार्डिग मेडिकल कालेज दिल्ली में मात्र 6,500 है पांच साल की फीस
सोशल मीडिया में जुड़े सैकड़ों छात्र, ऑनलाइन पढ़ाई के बीच आधा घंटा आंदोलन को समर्पित
गणेश पाठक @ नवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 अगस्त 2020। दून एवं सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज में डाक्टरी की पढ़ाई के लिए फीस सरकार ने दूसरे मेडिकल कॉलेजों के मुकाबले 10 गुना से कुछ कम कर दी गई है। भारी भरकम फीस के खिलाफ हल्द्वानी मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों के आंदोलन को सोशल मीडिया में आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। अब इस आंदोलन में दून मेडिकल कालेज के छात्र भी जुड़ने लगे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उत्तराखंड के दो सरकारी मेडिकल कालेज में डाक्टरी की पढ़ाई के लिए पांच साल में साढ़े बाइस लाख रुपए खर्च करने पढ़ रहे हैं। पड़ोसी राज्य यूपी में केवल दो लाख तिरहत्तर हजार में डाक्टरी की पढ़ाई की जा रही है। इस असमानता से छात्र आहत हैं और सीएम त्रिवेंद्र रावत से दोनों मेडिकल कालेज में डाक्टरी की लिए बढ़ाई गई फीस को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को आने वाले विधान सभा सत्र में उठाने का भरोसा दिया है।
इस समय पूरा विश्व कोरोना के संकट से त्राहिमाम कर रहा है। सत्ता शीर्ष में बैठे नेता एवं नौकरशाहों को अस्पताल, डाक्टर एवं मेडिकल स्टाफ की कीमत याद आ रही है। कहने को इनको कोरोना योद्धा कहा जा रहा है, पर उत्तराखंड समेत देश के कई हिस्सों में डाक्टर एवं मेडिकल स्टाफ को समय पर पगार तक नहीं मिल रही है। यह अलग मुद्दा है। असली बात भाजपा की नीति का है। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के दौर पर सरकारी मेडिकल कालेज से डाक्टरी की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पांच साल में पचास हजार की फीस रखी गई थी। तब भाजपा ने दस हजार में डाक्टरी पढ़ाई का नारा दिया था। ठीक इसके उलट २०१९ में त्रिवेंद्र सरकार ने दून एवं हल्द्वानी मेडिकल कालेज से बॉन्ड सिस्टम को खत्म करने के साथ ही प्रति साल की फीस साढ़े चार लाख तय कर दी।
यह फीस हरियाणा में (५२ हजार ७०), यूपी ( ५४ हजार ६००), हिमाचल ( साठ हजार), पंजाब ( अस्सी हजार) है। इस का तब भारी विरोध भी हुआ। हाईकोर्ट में भी मामला गया। इसके वाबजूद अभी तक छात्रों को राहत नहीं मिली है। एक साल का लंबा सफर तय करने के बाद ठीक लॉकडाउन में सोशल मीडिया में हल्द्वानी मेडिकल कालेज के छात्रों का आंदोलन नए कदम बड़ा रहा है। शुरू में करीब १२५ छात्र छात्राओं से शुरू हुआ यह आंदोलन व्यापक रुप में सामने में आ रहा है। अभी इससे सीधे तौर पर तीन सौ मेडिकल के ही छात्र जुड़ गए हैं। हरेक दिन छात्र बारह बजे के बाद आधा घंटा आंदोलन कर रहे हैं। यह आनलाइन आंदोलन मीडिया की सुर्खिया नहीं बटोर रहा है, लेकिन भीतर ही भीतर ज्वालामुखी का रुप धारण करने लगा है।
इस आंदोलन से जुड़े हल्द्वानी मेडिकल कालेज के एक दर्जन छात्र छात्राओं ने बताया कि पूरे देश में केवल उत्तराखंड के दो मेडिकल कालेजों में भारी भरकम फीस ली जा रही है। छात्रों ने बताया कि दिल्ली में यह फीस काफी कम है। मौलाना आजाद मेडिकल कालेज में प्रतिवर्ष मात्र दो सौ पचास रुपए की फीस है। लेडीज हार्डिग मेडिकल कालेज दिल्ली में मात्र तेरह सौ, तमिलनाडू में चालीस हजार, महाराष्ट्र में औसस सत्तर हजार नौ सौ रुपए फीस है। इसके अलावा कई अन्य राज्यों में बहुत कम फीस है। आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार को आंदोलन के दो माह पूरे हो गए हैं। अब तक सीएम को कई प्रत्यावेदन भेजे जा चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश ने इस मामले को विस में उठाने का भरोसा दिया है। इसके अलावा राज्य के कई मंत्री एवं विधायकों को आंदोलनकारी छात्र फेस बुक, टिवटर, इस्ट्राग्राम में पोस्ट कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि यदि सीएम ने डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे छात्र एवं उनके अभिभावकों की पीड़ा के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखायी तो २०२२ के विस चुनाव में त्रिवेंद्र सिंह रावत को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

यह भी पढ़ें : स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होने पर हटना पड़ेगा अतिथि शिक्षकों को… परंतु…

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2020। उत्तराखंड के विद्यालयों में तैनात अतिथि शिक्षकों को स्थायी प्रवक्ताओं की नियुक्ति होने होने पर नौकरी से हटना पडेगा। वहीं अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति वाले प्रवक्ताओं के पद रिक्त ही माने जाएंगे। स्थायी शिक्षकों के विरोध को देखते हुए सरकार ने प्रवक्ताओं की काउंसलिंग के लिए जारी अपने 17 जुलाई के आदेश को पलट दिया है। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षीसुंदरम ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। नए शासनादेश में शिक्षा निदेशक आरके कुंवर को प्रवक्ताओं के पदों पर काउंसलिंग और नियुक्ति करने के आदेश दिए गए हैं।
शिक्षा सचिव ने बताया कि यदि स्थायी शिक्षक अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति वाले पद के लिए विकल्प भरता है और उसे वह मिल जाता है तो अतिथि शिक्षक को वहां से हटना पड़ेगा। लेकिन सरकार ने अतिथि शिक्षकों के लिए भी विकल्प रखा है। ऐसे अतिथि शिक्षक को दूसरे विद्यालय में रिक्त पद पर नियुक्ति पाने का विकल्प मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मई 2020 में एलटी से प्रवक्ता पद पर 1300 से अधिक शिक्षकों की पदोन्नतियां हुई थीं। इनमें मौलिक पदोन्नति वाले 600 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर विवाद बन गया था। तब प्रवक्ताओं को अतिथि शिक्षकों की तैनाती वाले पदों को छोड़कर बाकी स्कूलों के लिए विकल्प देने की छूट दी गई थी। जबकि शिक्षकों का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय ने अतिथि शिक्षकों को अस्थायी पद माना है। स्थायी शिक्षक के आने पर अतिथि शिक्षक को हटना होगा। इस मुद्दे को तूल पकड़ता देख शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा सचिव को पुनर्विचार करने के निर्देश दिए थे। अब इस पर शासन ने निर्णय ले लिया है।

यह भी पढ़ें : एक भारत-श्रेष्ठ भारत के स्वप्न को साकार करेगी नई शिक्षा नीति: नरेंद्र सिंह

नवीन समाचार, नैनीताल, 09 अगस्त 2020। पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नैनीताल के प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह ने ‘नई शिक्षा नीति 2020’ का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा नीति का शिक्षा जगत को वर्षों से इंतजार था। 34 वर्षों के बाद आई इस नीति से एक भारत-श्रेष्ठ भारत बनाने’ का सपना साकार होगा।
पहले शिक्षा नीति 10$ 2 पर आधारित थी नई शिक्षा नीति 5$3$3$4 के फॅार्मूले के आधार पर बनाई गई है। नई शिक्षा नीति के तहत 3 से 7 वर्ष के बच्चों को पहले 5 वर्षों में आधारभूत शिक्षा दी जायेगी जिसमें बच्चे खेल-कूद व क्रियाकलापों के माध्यम से अधिगम करेंगें। इसमें पहले तीन साल प्री-प्राईमरी के, इसके बाद कक्षा एक व 2 तथा अगले तीन वर्षों में कक्षा 3 से 5 तक की पढा़ई होगी जिसमें 8 से 10 वर्ष के बच्चे होंगें। अगले तीन वर्षों में कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा दी जायेगी। इस वर्ग के छात्र को वोकेशनल विषयों से भी अवगत कराया जाएगा। उदाहरण के लिए किसी छात्र की रुचि यदि कला में है तो वह छात्र स्कूल के समय में अपनी इच्छानुसार प्रतिष्ठित संस्था में जा सकेगा व इन्टर्नशिप कर सकेगा। अगले 4 वर्षों में 9 से 12 तक की शिक्षा प्रदान की जाऐगी। इस ग्रुप में स्ट्रीम व्यवस्था को समाप्त किया गया है। अब विज्ञान वर्ग का छात्र कला व कला वर्ग का छात्र विज्ञान के विषय भी पढ़ सकता है। नई शिक्षा नीति में विषयों की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। इस नीति में रटने की प्रवृति को दूर किया गया है। नई शिक्षा नीति में कक्षा पांच तक की शिक्षा मातृ भाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा में दी जाएगी। यह भी नई शिक्षा नीति की एक बड़ी विशेषता है।
इसके अलावा अब वर्षभर छात्रों को पढा़ई करनी पडे़गी। दोंनों सेमेस्टर के अंकों को जोडकर परीक्षा परिणाम घोषित होंगें। इससे छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम होगा। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बोर्ड के अंको पर निर्भर नहीं होना होगा। अपितु कैट कॅामन एप्टीट्यूट टेस्ट के अंको को भी सम्मिलित किया जाऐगा। उच्च शिक्षा में प्रवेश मिलेगा या नहीं इसका निर्णय बोर्ड व कैट के अंको को जोड़कर निर्धारित किया जाएगा। यदि कोई छात्र बोर्ड परीक्षाओं मंे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया तो उसका प्रभाव उच्च शिक्षा के प्रवेश पर नहीं पडेगा। अब छात्र को रटने की पद्धति छोडनी होगी केवल सीखना होगा तथा विषय का ज्ञान प्राप्त करना ही होगा। नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड 360 अंश पर आधारित होगा। 360 अंश का अर्थ है कि अब छात्र का रिपोर्ट कार्ड केवल शिक्षक द्वारा ही नहीं बनाया जाऐगा अपितु शिक्षक के साथ छात्र स्वयं भी व उसके सहपाठी छात्र भी मूल्यांकन करेंगें। इसके बाद छात्र कॉलेज में प्रवेश कैट के माध्यम से ही होगा। कॉलेज में प्रवेश की इस विधि को ‘मल्टी एन्ट्री एण्ड एक्जिट पॉलिसी’ कहा गया है। किसी भी कारण से छात्र पढ़ाई पूरी नहीं कर पाता था तो छात्र का वह समय नष्ट हो जाता था अब ऐसा नहीं होगा। इसमें यदि कोई ग्रेजुएशन में पहले एक वर्ष ही पढा़ई कर पाता है तो वह सर्टीफिकेट प्राप्त करेगा। दो वर्षो की पढ़ाई के बाद डिप्लोमा, तीन वर्षों की पढ़ाई कर पाता है तो बैचलर का प्रमाण पत्र प्राप्त करेगा। और यदि चार वर्षों तक की पढा़ई पूरी की जाती है तो ‘बैचलर विद् रिसर्च’ का प्रमाण पत्र छात्रों को मिलेगा।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भ्रष्टाचार के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी हुए निलंबित

नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अगस्त 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ और न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने हरिद्वार के जिला शिक्षा अधिकारी ब्रह्मपाल सैनी द्वारा पद का दुरुपयोग करने के सम्बंध में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की और सुनवाई के लिए अगली तिथि एक सप्ताह बाद की नियत की। वहीं खंडपीठ के इस मामले में पिछली तिथि को कड़े रुख को देखते हुए सरकार ने सैनी को आज की निलंबित कर दिया और न्यायालय को इसकी जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि पिछली तिथि में खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा था कि अभी तक इनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है। अगर नहीं की गई है तो इनको नोटिस देकर इनके खिलाफ आरोप तय करें। इसके प्रत्युत्तर में आज राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई है और अपराह्न दो बजे न्यायालय को बताया कि उनको निलंबित कर निदेशक माध्यमिक शिक्षा उत्तराखण्ड के कार्यालय में सम्बद्ध कर दिया है।
उल्लेखलीय है कि हरिद्वार निवासी पदम कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जिला शिक्षा अधिकारी सैनी ने अपने पद का दुरुपयोग कर कई शिक्षकों को नियम विरुद्ध तरीके से लाभ दिया है। वह नियमावली के विरुद्ध अपने गृह जनपद में कार्यरत हैं। इसकी शिकायत उन्होंने जिला अधिकारी से की। इस पर जांच भी हुई। जांच में उनके ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध हुए परन्तु अभी तक उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हुई।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: सभी ग्राम पंचायतों को बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मिलेगी 30 जीबी इंटरनेट संयोजन की सुविधा

-अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने जानकारी देते हुए घर लौटे प्रवासियों के बच्चों को भी ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने तथा उन्हें कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के दिये निर्देश
नवीन समाचार, नैनीताल, 04 अगस्त 2020। कुमाऊं मंडल की सभी ग्राम पंचायतों को भारत सरकार की ओर से ‘एफटीटीएच’ यानी ‘फाइबर टु दि होम’ योजना के अंतर्गत एक वर्ष के लिए 30 जीबी इंटरनेट संयोजन की सुविधा मिलेगी। राजकीय विद्यालयों को इस योजना से जोड़ने के लिए सचिव विद्यालयी शिक्षा ने जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया है। यह जानकारी कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल कुमार सती ने मंगलवार को मंडल के सभी जनपद स्तरीय अधिकारियेां के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक लेते हुए दी।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस सुविधा के बाद विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करने में इंटरनेट की तकनीकी समस्या नहीं आएगी। उन्होंने अधिकारियों से दूरदर्शन, ज्ञानदीप, अध्यापकों के वीडियो एवं ह्वाट्सएप ग्रुपों तथ स्वयंप्रभा चैनल आदि के माध्यम से बच्चों का ऑनलाइन पठन-पाठन कराने पर विशेष जोर देने को भी कहा। इस दिशा में उन्होंने कोरोना की महामारी के दौरान गांव लौटे प्रवासियों के बच्चों को भी ऑनलाइन शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवासियों के बच्चों को प्रवेश देने को विशेष प्राथमितका बरतने को भी कहा। इसके अलावा बैठक में डा. सती ने अधिकारियों से शून्य तथा 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों एवं असंगत विषयों में कार्यरत शिक्षकों का ब्यौरा तथा प्रधानाचार्य, प्रवक्ता एवं एलटी संवर्ग के पदों की सही-सही स्थिति से तत्काल अवगत कराने के निर्देश भी दिये। उन्होंने अधिकारियों से शिक्षकों व कार्मिकों के प्रकरणों को यथासमय निस्तारित करने को भी कहा। बैठक में जिलों के शिखा अधिकारियों के साथ ही विधि अधिकारी एमएम मिश्रा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पूरन बिष्ट, जगमोहन रौतेला, ललित उपाध्याय, ललित उपाध्याय, संजय रौतेला व दिनेश साह आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : डिजिटल अंक तालिका, एनओसी-माइग्रेशन प्रदान करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय बना उत्तराखंड का एक विश्वविद्यालय

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 31 जुलाई 2020। उत्तराखंड मुक्तविश्वविद्यालय राज्य का पहला विश्वविद्यालय बना जो छात्रों को डिजिटल अंक तालिका, एनओसी-माइग्रेशन प्रदान करेगा। शुक्रवार को सर्किट हाउस में राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विश्वविद्यालय के इस डिजिटल पोर्टल का उद्घाटन किया। डॉ. रावत ने विश्वविद्यालय की इस डिजिटल सहायता प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी के नेतृत्व में बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मुक्तविश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहा है, जिसका लाभ राज्य के छात्रों को मिलेगा और मिल रहा है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव भरत सिंह ने कहा कि यह विश्वविद्यालय की बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिससे विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्र अपनी स्नातक व स्नातकोत्तर की सभी वर्षों की अंकतालिका एवं माइग्रेशन व एनओसी आवश्यकता पड़ने पर स्वयं कभी भी कहीं भी निकाल सकते हैं। अब उन्हें विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय या अध्ययन केंदों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 1 लाख 5 हजार 400 का चेक भी उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपा। इस अवसर पर राज्य के उच्च शिक्षा उन्नयन परिषद के उपाध्यक्ष, डॉ. बीएस बिष्ट, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. कुमकुम रौतेला, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पीडी पंत व सहायक क्षेत्रीय निदेशक बृजेश बनकोटी आदि लोग उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : स्कूलों पर ट्यूशन फीस के नाम पर पूरी फीस मांगने के आरोप में शिक्षा सचिव को भेजा पत्र

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जुलाई 2020। नगर के सामाजिक संगठन आजाद मंच ने प्रदेश के शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर कुछ निजी विद्यालयों पर ट्यूशन फीस के नाम पर पूरी फीस लेने का आरोप लगाते हुए ऐसे विद्यालयों पर कार्रवाई करने की मांग की है। मंच के संयोजक मो. खुर्शीद हुसैन द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि लॉकडाउन ने आम आदमी की रोजगार-नौकरी छूटने के कारण कमर तोड़ दी है। फिर भी निजी विद्यालय प्रबंधन तानाशाह कि भूमिका में आते हुए प्रदेश के शिक्षा सचिव के लॉकडाउन के दौरान फीस न मांगने के निर्देशों, तथा देहरादून निवासी कुंवर जपेन्द्र सिंह कि जनहित याचिका पर आये उच्च न्यायालय के केवल ट्यूशन फीस मांगने के आदेशों की अवहेलना करते हुए,चालाकी दिखाते हुये पूरी फीस को ही ट्यूशन फीस का नाम देकर अभिभावको से मांग रहे हैं। अभिभावक इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं, क्योंकि उनहें भय है कि आवाज उठाने पर उनके बच्चों के साथ विद्यालयों में भेदभाव किया जाएगा। लिहाजा उन्होंने ऐसे विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

यह भी पढ़ें : डीएम का कैंप कार्यालय बना ‘ई-लर्निंग स्टूडियो’, साथ ही बच्चों के लिए हुआ स्मार्ट एलईडी पर पढ़ने का इंतजाम

-75 विद्यालयों में ई-लर्निंग हेतु स्मार्ट एलईडी टीवी खरीदे गए, स्कूलों को आधुनिकीकरण के लिए स्वीकृत कराये 14.78 करोड़ रुपए
डीएम के प्रयासों से स्कूल में लगा एलईडी टीवी।

 

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2020। डीएम सविन बंसल के प्रयासों से जनपद के सरकारी स्कूलों की दशा में ड़ा बुनियादी बदलाव आ रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कहना है कि डीएम के दिशा निर्देशन मे ई-लर्निंग कक्षाओं के संचालन के लिए डीएम के हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में ई-लर्निग स्टूडियो की स्थापना की गई है। इस स्टूडियों में अनुभवी अध्यापकों द्वारा ई कंटैंन्ट तैयार किया जा रहा है। समग्र शिक्षा विद्यालय अनुदान मद से जिले 75 विद्यालयो द्वारा ई-लर्निंग हेतु स्मार्ट एलईडी टीवी क्रय कर लिये गये है। साथ ही जिले के सरकारी स्कूलों को हाईटेक एवं सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए पिछले वर्ष स्वीकृत की गई लगभग 14 करोड 78 लाख की धनराशि में से विद्यालयों के सौन्दर्यीकरण एवं निर्माण कार्यो हेतु 808.249 लाख की धनराशि जारी की गई है।
इसमें से कक्षा-कक्षों के लिए 78.50 लाख, विज्ञान प्रयोगशालाओं के 225.555 लाख, विद्यालय प्रयोगशालाओं के लिए 11 लाख, आर्ट एवं क्राफ्ट कक्षों के लिए 221.592 लाख, पुस्तकालय कक्षों के लिए 181.432 लाख, कम्प्यूटर कक्षो के लिए 37.73 लाख, भौतिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए 28.84 लाख तथा शौचालयों तथा दिव्यांग बच्चों की सुविधा के लिए 23.58 लाख की धनराशि जारी की है। इसके अलावा डीएम बंसल के प्रयासोें से जिले के विद्यालयों मे ग्लोब, एटलस, डिक्शनरी के साथ ही हर कक्षा-कक्ष मे 10 वाट के न्यूनतम दो एलईडी बल्ब भी लगाये गये है। साथ ही बच्चों को खेलने के लिए भी बेहतर सुविधाएं देते हुए प्राथमिक स्तर के विद्यालयोें मे झूले व सी-सॉ. तथा माध्यमिक विद्यालयोें मे बालीबॉल कोर्ट, बास्केटबाल कोर्ट तथ नेट यानी जाली युक्त क्रिकेट की प्रेक्टिस पिच का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही सभी विद्यालय मे मध्याहन भोजन के तहत सब्जियों को पौष्टिक तरीके से पकाने के लिए लोहे की कड़ाईयां उपलब्ध करायी गई है। इसके अलावा स्कूलोें मे निशुल्क गणवेश, मध्याहन भोजन गतिविधि शिक्षण खेल सामग्री निशुल्क पुस्तकें, पर्याप्त फर्नीचर, अनुभवी शिक्षक, पुस्तकालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, और इनकी जानकारियां विद्यालय की दीवारों पर पेंटिग्स के माध्यम से दी जा रही हैं।

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-केवल ऑनलाइन पढ़ने वाले बच्चों से ही ट्यूशन फीस की मांग कर सकेंगे निजी विद्यालय
नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ से शुक्रवार को निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए साफ कहा है कि शिक्षा सचिव के 22 जून 2020 के आदेशानुसार स्कूल प्रबंधन जबरन फीस का दबाव नहीं बनाएंगे। केवल ऑनलाइन कक्षाएं पढ़ने वालों से ही स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं। साथ ही अभिभावकों की शिकायतों के निस्तारण के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश देते हुए याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया है।
देखें निजी स्कूलों की फीस सम्बन्धी शासनादेश यहाँ क्लिक करके   
उल्लेखनीय है कि देहरादून निवासी कुंवर जपेंद्र सिंह ने उच्च न्यायालय मे ंजनहित याचिका दायर कर प्रदेश के स्कूलों के द्वारा जबरन ऑनलाइन कक्षाएं पढ़ाए जाने व ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर जबरन अभिभावकों से फीस मांगने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। यह भी कहा है कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को ऑन लाइन पढ़ाई में कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा है। साथ ही राज्य में कई स्थानों पर इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है और कई लोगों के पास मोबाइल व अन्य गैजेट नहीं है, जिससे कई बच्चे पढ़ाई से वंचित हो जा रहे हैं, लिहाजा ऑनलाइन पढ़ाई के स्थान पर दूरदर्शन के माध्यम से सभी बच्चों की पढ़ाई की जाए।

यह भी पढ़ें : निजी स्कूलों के अभिभावकों को फीस पर राहत, सरकार ने जारी किये नये दिशा-निर्देश

-केवल ऑनलाइन पढ़ाने वाले स्कूलों को ट्यूशन फीस लेने की अनुमति
नवीन समाचार, देहरादून, 22 जून 2020। राज्य सरकार ने निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों को फीस के मामले में राहत दे दी है। इस बारे में राज्य सरकार ने नये दिशा-निर्देश जारी कर केवल ऑनलाइन पढ़ाने वाले निजी स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दे दी है। सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को यह फीस देनी ही होगी, जबकि अन्य लोग असमर्थ होने पर फीस जमा करने के लिए अतिरिक्त समय ले सकेंगे। सरकार के इन निर्देशों को इस मामले उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में देखा जा रहा है।
इस संबंध में सोमवार को राज्य सरकार की ओर से जारी नए आदेशों के अनुसार मात्र ऑनलाइन एवं अन्य संचार माध्यमों से शिक्षण कार्य जारी रखने वाले निजी स्कूलों को लॉकडाउन अवधि के लिए सिर्फ ट्यूशन फीस मांगने की अनुमति दी गई है। यदि किसी विद्यालय द्वारा अतिरिक्त विषयों का भी ऑनलाइन अध्यापन कराया जा रहा है तो उस विद्यालय द्वारा अतिरिक्त विषय पढ़ाने का पूर्व निर्धारित शिक्षण शुल्क लिया जा सकेगा। एसओपी के अनुसार यदि ऑनलाईन य अन्य माध्यमों से शिक्षण कराए जाने के बावजूद अभिभावक ट्यूशन फीस भी देने में असमर्थ हैं तो वे कारणों का उल्लेख करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य या प्रबंध समिति के सामने फीस जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग कर सकते हैं। ऐसे आवेदनों पर प्रबंध समिति को सकारात्मक रवैया अपनाते हुए वांछित अतिरिक्त समय अभिभावकों को देना होगा। वहीं लॉकडाउन की अवधि में सरकारी व अर्ध सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से वेतन प्राप्त करने व उनकी आजीविका में किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने के कारण ऑनलाइन व अन्य संचार माध्यमों से कक्षाओं का लाभ लेने के फलस्वरूप नियमित रूप से निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। इसके अलावा शासन ने यह भी साफ किया है कि निजी विद्यालयों द्वारा किसी भी परिस्थिति में इस साल शुल्क में वृद्धि नहीं की जाएगी।

यह भी पढ़ें : स्कूलों को खोलने के लिए एनसीईआरटी ने किया रोडमैप तैयार

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 17 जून 2020। कोरोना संक्रमण के लागू हुए लॉक डाउन के बाद अब सब कुछ खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। इसी कड़ी में शैक्षिक संस्थाओं को खोलने पर भी विचार शुरू हो गया है। स्कूलों को खोलने के लिए एनसीईआरटी ने मसौदा भी तैयार कर लिया है। हालांकि अधिकतर अभिभावक अभी स्कूल न खुलने के पक्ष में हैं, लेकिन सब के मन में यह प्रश्न भी कौंध रहा है कि कोरोना के हालात सामान्य होने के बाद जब स्कूल खुलेंगे तो कैसे खुलेंगे।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर एनसीईआरटी ने स्कूलों को खोलने के लिए पूरा रोड मैप तैयार कर लिया है। इसका पालन सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों को करना होगा। स्कूलों को छह चरणों में खोलने की तैयारी है। पहले चरण में बड़ी कक्षाएं यानी कक्षा ११ व १२ की कक्षाएं खोली जाएंगी। एक सप्ताह बाद ९वीं व १०वीं की कक्षाएं शुरू होंगी। उसके बाद ६ से ८वीं तक की कक्षाएं दो सप्ताह बाद शुरू होंगी। तीसरे सप्ताह प्राइमरी के कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को विद्यालय बुलाया जाएगा। चौथे सप्ताह पहली व दूसरी कक्षाओं के बच्चों को बुलाने की योजना रोड मैप में है। वहीं नर्सरी कक्षाओं को पांच सप्ताह के बाद तभी शुरू किया जाएगा, जब अभिभावक चाहेंगे। इतना ही नहीं छात्रों को समान विषयों के आधार पर बुलाया जाएगा, ताकि संख्या पर नियंत्रण करते हुए सामाजिक दूरी भी बनायी जा सके। रोड मैप में यह कहा गया है कि सभी बच्चों को होमवर्क अनिवार्य रूप से देना होगा। प्रत्येक कक्षा में ३० से ३५ छात्र ही बैठेंगे। सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए बच्चों के बीच में ६ फीट की दूरी होगी। स्कूल परिसर में सुबह की प्रार्थना जैसे सामूहिक क्रियाकलाप नहीं होंगे। कक्षाओं में छात्र, शिक्षक व अन्य सभी तरह के स्टाफ को मास्क का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना होगा। स्क्रीनिंग के दौरान संक्रमण के लक्षण देखे जाने पर स्कूल में प्रवेश वर्जित होगा। इसके साथ ही विद्यालयों में एसी का प्रयोग वर्जित होगा तथा सभी दरवाजे और खिड़कियां खुली रखनी होगी। छात्रों के लिए स्थान यानी उनकी सीट नियत होंगी और उनकी डेस्कों पर नाम लिखा होगा। छात्रों को अपना टिफन व पानी शेयर करने की अनुमति भी नहीं होगी। आसपास खाने के स्टाल होंगे। स्थान उपलब्ध होने पर खुले स्थानों में कक्षाएं लगायी जा सकती हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि स्कूल खुलेंगे कब। एचआरडी मंत्रालय इन सुझावों को राज्य सरकारों के साथ विचार करनेके बाद गृह मंत्रालय को भेजेगा। उसके बाद ही स्कूल खुलने पर अंतिम निर्णय होगा। हालांकि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक १५ अगस्त के बाद ही स्कूल खुलने की संभावना जता चुके हैं, लेकिन कोरोना के मामलों पर ही यह निर्भर करेगा।

यह भी पढ़ें : प्रदेश के साढ़े तीन हजार शिक्षकों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, अगले 24 घंटे भारी..

-हाईकोर्ट ने सरकार से फर्जी दस्तावेजों से बने फर्जी शिक्षकों पर 24 घंटे में अब तक हुई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा
नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जून 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की संयुक्त खंडपीठ ने प्रदेश के प्राथमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के जरिये नियुक्त हुए अध्यापकों के खिलाफ दायर जनहित याचिका में सरकार से अगले बुधवार तक ऐसे अध्यापकों के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि स्टूडेंट वेलफेयर सोसायटी हल्द्वानी द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई एक याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में लगभग साढ़े तीन हजार शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त हैं। याचिका में कहा गया है कि इन करीब साढ़े तीन हजार अध्यापकों में से कुछ अध्यापकों के दस्तावेजों की एसआईटी जांच भी की गई। इनमें जो नाम सामने आए उनके खिलाफ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई, यहां तक कि इनको क्लीन चिट दे दी गयी है और ये अभी भी पद पर बने हुए हैं। संस्था ने याचिका में अदालत से सरकार को इस प्रकरण की एसआईटी से जांच करने के निर्देश देने की मांग की गई है। इधर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना शपथपत्र पेश किया। इसमें कहा कि सम्बंधित मामले की एसआईटी जांच चल रही है। अभी तक 84 अध्यापक जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पाए गए हैं उन पर विभागीय कार्रवाई चल रही है।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल के 536 एलटी शिक्षकों का हुआ स्थायीकरण

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जून 2020। माध्यमिक शिक्षा के तहत एलटी स्नातक वेतनमान में कार्यरत 536 शिक्षकों के बृहस्पतिवार को स्थायीकरण के आदेश जारी हो गए हैं। इसमें 481 पुरुष संवर्ग के तथा 55 महिला संवर्ग के शिक्षक शामिल हैं। विभाग के मंडलीय कार्यालय की ओर से स्थायीकरण की सूची जिला स्तर पर जारी कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि दो वर्ष की परिवीक्षा काल के उपरांत आचरण एवं कार्य दक्षता व स्वास्थ्य पद के उपयुक्त पाये जाने संबंधी नियमों का पालन करने पर स्थायीकरण किया जाता है।
अपर निदेशक माध्यम शिक्षा कुमाऊं डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि एलटी शिक्षकों के स्थायीकरण के लिए मंडलीय कार्यालय को 735 आवेदन पत्र प्राप्त हुए थे। आवेदनों की जांच के बाद विभाग की ओर से विभिन्न जिलों के 536 एलटी शिक्षकों के स्थायीकरण के आदेश जारी किए गए हैं। संबंधित आदेश जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय और संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को प्रेषित कर दिये गये है। स्थायीकरण किए गए शिक्षकों में सर्वाधिक 195 एलटी शिक्षक नैनीताल जिले के हैं। साथ ही चम्पावत के 146, बागेश्वर के 134, ऊधमसिंह नगर के 57 और पिथौरागढ़ के 4 शिक्षक भी स्थायी हुए हैं। उन्होंने मुख्य शिक्षाधिकारियों से शिक्षकों के प्रकरणों पर जल्द कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।

यह भी पढ़ें : कोरोना काल में स्कूलों में फीस जमा करने पर हाई कोर्ट से आया निर्णायक आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जून 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोरोना संकट काल मे सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से ली जा रही फीस के खिलाफ दायर कुंवर जपिन्द्र सिंह व अन्य की तरफ से दायर जनहित याचिकाओ को निस्तारित करते हुये निजी विद्यालय संचालकों से शिक्षा सचिव को प्रत्यावेदन देने व सरकार को 2 मई 2020 के शासनादेश में 1 सप्ताह के भीतर आवश्यक संशोधन कर नया शासनादेश जारी करने को कहा है, जिससे कि स्कूलों व अभिभावकों के बीच फीस से सम्बंधित सामंजस्य बन सके।
कोरोना संकट काल के यकचिकर्ताओ का कहना है कि कोरोना काल मे सरकारी व गैर सरकारी स्कूलो की तरफ से अभिभावकों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य क्रियाकलापो के लिये फीस की मांग की जा रही थी। 2 मई को शासन ने एक शासनादेश जारी कर निजी व अर्द्ध सरकारी विद्यालयों को ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी थी। इस शासनादेश को देहरादून निवासी कुंवर जपिन्द्र सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए ऑन लाइन पढ़ाई को लेकर सवाल उठाए थे । इस याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को जबरन फीस के लिये बाध्य नहीं करेगा । साथ ही  सरकार को निर्देश दिया था कि वो जिलेवार शिक्षा अधिकारियों को इस पूरे मामले में नोडल अधिकारी बनाये तांकि उनके जरिये अभिभावकों की समस्त शिकायतें दर्ज कराई जा सके। इस आदेश के अनुपालन में सरकार ने शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर शिकायतों को सुना और जो स्कूल फीस को लेकर दवाब बना रहे थे उनको नोटिस जारी कर उचित कार्यवाही की। आज मामला दोबारा सुनवाई पर आया। आज आज कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में दायर याचिका को निस्तारित करते हुये विद्यालय संचालकों को अपना प्रत्यावेदन शिक्षा सचिव के समक्ष रखने व सरकार को एक सप्ताह  के भीतर नया शासनादेश जारी करने को कहा।

यह भी पढ़ें : योग्यता के नये नियमों से पदोन्नति से वंचित रह सकते हैं कई शिक्षक

नवीन समाचार, नैनीताल, 26 मई 2020। प्रदेश में इन दिनों 30 फीसद कोटे के आधार पर 300 पदों के लिए बेसिक संवर्ग के एलटी संवर्ग में पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है, किंतु शासन के पदोन्नतियों के लिए नये नियमों के कारण अनेक शिक्षक पदोन्नति से वंचित रह सकते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार पदोन्नति के लिए करीब 900 शिक्षकों ने आवेदन किये हैं। नियमों के अनुसार मुख्यालय स्थित मंडलीय शिक्षा निदेशक कार्यालय में इन दिनों प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग का कार्य चल रहा है। लेकिन पता चला है कि शासन ने चूंकि वर्ष 2019 में उत्तराखड अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 2014 में कई संशोधन किये हैं, जिसके तहत अब पदोन्नति के लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, संस्कृत, कला, गृह विज्ञान आदि विषयों के लिए बीटीसी की जगह बीएड की और व्यायाम के लिए बीपीएड, डीपीएड व व्यायाम रत्न की जगह केवल बीपीएड योग्यता धारी शिक्षक ही पदोन्नति के लिए अर्ह हैं, इसलिये अनेक आवेदक अर्ह नहीं पाये जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: हाईकोर्ट से हटी प्रवक्ता के 103 पदों पर लगी रोक, पदोन्नति का रास्ता भी साफ

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मई 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में भूगोल के प्रवक्ता के 103 पदों पर लगी रोक को हटा दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद इन पदों पर एलटी शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी ओमवीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वरिष्ठता के बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई। पूर्व में कोर्ट ने पदोन्नति पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया था कि सरकार ने वरिष्ठता निर्धारण में नियमों की अनदेखी नहीं की है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पदोन्नति पर लगी रोक को हटा दिया। कोर्ट के आदेश के बाद अब एलटी भूगोल के 103 पदों पर पदोन्नति पर रोक हट गई।

यह भी पढ़ें : लॉक डाउन में स्कूलों द्वारा ली जा रही फीस पर हाईकोर्ट ने सरकार को दिये निर्देश, पूछा-एलकेजी-यूकेजी के बच्चों को कैसे ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं

-अभिभावकों की फीस सम्बन्धी शिकायतों के लिए नोडल अफसर नियुक्त करे सरकार: हाईकोर्ट
-एलकेजी और यूकेजी के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा और फीस पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
नवीन समाचार, नैनीताल, 12 मई 2020। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने लॉक डाउन की अवधि में निजी व सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से स्थिति सामान्य होने तक ट्यूशन फीस ना लेने के मामले में दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में अभिभावकों की शिकायतें दर्ज करने के लिए सरकार से नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि एलकेजी व यूकेजी कक्षाओं में पढ़ रहे छोटे बच्चों को किस तरह से ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है? कितने प्रतिशत बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं तथा कितने स्कूल ये सुविधा दे रहे हैं? कोर्ट ने राज्य सरकार से शिक्षा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने के आदेश दिए हैं ताकि अभिभावकों से जबरन फीस की मांग कर रहे स्कूलों के खिलाफ अपनी शिकायत नोडल अधिकारी को दर्ज कर सकें। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 2 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी आकाश यादव ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि निजी और सरकारी स्कूलों में स्थिति सामान्य होने के बाद ही अभिभावकों से ट्यूशन फीस की मांग की जाए। साथ ही ट्यूशन फीस के नाम पर अन्य कोई शुल्क ना लिया जाए और न ही अगले सत्र में फीस में किसी तरह की वृद्धि की जाए। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि कक्षा 5 तक के बच्चों से किसी तरह का कोई शुल्क न लिया जाए।

 

यह भी पढ़ें : स्कूलों में 3 माह की फीस लेने के मामले में हाईकोर्ट ने किया केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 मई 2020। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने निजी व अर्ध शासकीय विद्यालयों द्वारा लॉक डाउन में अभिभावकों से फीस लिये जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और केंद्र सरकार से 12 मई तक जवाब पेश करने को कहा है। कोर्ट ने मामले अगली सुनवाई की तिथि 12 मई नियत की है।
 
मामले की सुनवाई आज न्यायमुर्ति सुधांशु धुलिया व न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की खण्डपीठ में हुई। मामले के अनुसार लॉक डाउन की अवधि में निजी व अर्द्ध शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं की तीन माह की फीस माफ करने व इस मामले में समुचित और व्यावहारिक नीति बनाये जाने की मांग को लेकर देहरादून निवासी जपिन्द्र सिंह ने  जनहित याचिका दायर की है।  याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार ने निजी व अर्द्ध शासकीय विद्यालयों को लॉक डाउन की अवधि की ट्यूशन फीस लेने के आदेश दे दिए हैं और कई विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर मार्च और अप्रैल महीने की फीस जमा कराने के लिए अत्यधिक दबाब डाला जा रहा है । याचिकाकर्ता का कहना है कि ऑन लाइन क्लासेस के लिए अभिभावकों के पास साधन नहीं हैं। नेट नहीं चल रहा है जबकि राज्य सरकार के पास अपना नेशनल चैनल दूरदर्शन है। उसके माध्यम से क्लासेस चलाई जाएं, क्योंकि हर घर मे दूरदर्शन आता है और टेलीविजन भी लगे हैं, जिससे बच्चों को पढ़ने में आसानी होगी। उसके माध्यम से क्लासेस शुरू की जाएं।
परीक्षा परिणाम घोषित
नैनीताल। कुमाऊं विवि ने मंगलवार को एमए गणित व साइकोलॉजी के पहले, एमए संगीत, कम्प्यूटर विज्ञान व वन विज्ञान विभाग के तीसरे सैमेस्टर की मुख्य एवं बैक परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिये हैं। विवि के उप कुलसचिव-परीक्षा ने बताया कि जिन विद्यार्थिों के परीक्षा आवेदन पत्र एवं परीक्षा के आवेदन शुल्क विवि को ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त नहीं हुए हैं, उनके परीक्षाफल रोके गये हैं।

यह भी पढ़ें : विद्यालयों में तीन माह की फीस माफी का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

-जनहित याचिका दायर, मंगलवार को हो सकती है सुनवाई
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 मई 2020। लॉक डाउन की अवधि में निजी व अर्द्ध शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं की तीन माह की फीस माफ करने व इस मामले में संयत व व्यवहारिक नीति बनाये जाने की मांग को लेकर देहरादून निवासी जपिन्द्र सिंह ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशू धुलिया व न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की खंडपीठ में विडियो कांफ्रेंसिंग से होगी। इस याचिका में सरकार द्वारा निजी व अर्द्ध शासकीय विद्यालयों को लॉक डाउन की अवधि की ट्यूशन फीस लेने के आदेश को भी चुनौती दी गई है। इस याचिका में याचिकाकर्ता का कहना है कि ऑन लाइन कक्षाएं पढ़ने के लिए अभिभावकों के पास साधन नहीं हैं। नेट नही चल रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को हर घर में आने वाले दूरदर्शन पर कक्षाएं चलानी चाहिए।

यह भी पढ़ें : हो गया समाधान, आज से बच्चे टीवी से भी पढ़ सकेंगे

-दूरदर्शन उत्तराखंड चैनल पर दोपहर एक से ढाई बजे तक होगा भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित तथा अंग्रेजी विषयों का शैक्षिक प्रसारण
नवीन समाचार, देहरादून, 24 अप्रैल 2020। आखिर लॉक डाउन के दौरान इंटरनेट की समस्या से बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन न हो पाने की समस्या का समाधान एक हद तक ढूंढ लिया गया है। शुक्रवार 24 अप्रैल से कक्षा नौ, 10 एवं 12 के विद्यार्थी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित तथा अंग्रेजी की पढ़ाई कर सकेंगे। टीवी पर दूरदर्शन के देहरादून से प्रसारित होने वाले उत्तराखंड चैनल पर दोपहर एक से ढाई बजे तक इनमें से तीन विषयों के आधे-आधे घंटे के तीन व्याख्यान देखे जा सकेंगे। डीडी उत्तराखंड के कार्यक्रम प्रमुख डॉ. सुभाष चंद्र थलेड़ी ने बताया कि इन व्याख्यानों को टीवी के साथ ही दूरदर्शन उत्तराखंड के यूट्यूब चैनल – https://www.youtube.com/channel/UCx55tefMzKkaA0uDmj9g2XA पर भी देखा जा सकेगा।
बृहस्पतिवार को इस संबंध में डीडी उत्तराखंड देहरादून और विद्यालयी शिक्षा विभाग उत्तराखंड सरकार के बीच ‘ज्ञानदीप’ श्रृंखला के तहत हर दिन आधे-आधे घंटे तीन शैक्षिक प्रसारणों के लिए करारनामा हस्ताक्षरित कर लिया गया है। आज हुए करारनामा में विद्यालयी शिक्षा विभाग की ओर से अपर परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा डा. मुकुल सती और दूरदर्शन उत्तराखंड की ओर से कार्यक्रम अधिशासी अधिकारी नरेंद्र रावत ने हस्ताक्षर किये।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अप्रैल 2020। उत्तराखंड में निजी स्कूल भी दिल्ली की केजरीवाल सरकार की तर्ज पर इस साल फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। साथ ही यह भी कहा है कि कोरोना लॉकडाउन की वजह से प्राइवेट स्कूलों को तीन महीने तक फीस न लेने का आदेश दिया गया है। वहीं प्राइवेट स्कूलों का कहना है कि जो लोग फीस देने में सक्षम हैं, उन्हें भुगतान की इजाजत दी जाए। साथ ही उन्होंने आरटीई का पूरा बकाया सरकार से देने की मांग भी की है। ऐसे में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने प्रदेश के शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम इस मांग के सभी पहलुओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री श्री पांडे ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से स्कूल बंद हैं। बाजार बंद होने से छात्रों को किताबें भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में पंचायत और निकाय प्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्र के बच्चों को चिह्नित कर उनके लिए किताबें लाने की छूट देने पर विचार किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि बाजार से किताबंे लाकर छात्रों को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मुहैया करा सकते हैं। शिक्षा सचिव को इस फार्मूले पर मुख्य सचिव के साथ बात करने को कहा गया। इसके अलावा उन्होंने लॉकडाउन की अवधि में सभी अधिकारियों से अपने-अपने स्तर पर शिक्षकों के तबादला, प्रमोशन, सेवानिवृत्ति लाभ, अतिथि शिक्षक नियुक्ति आदि विषयों की रूपरेखा-तैयारी पूरी करने को भी कहा है। कहा कि लॉकडाउन खुलते ही विभाग का पूरा फोकस केवल पढ़ाई पर ही रहना चाहिए। इस वक्त बड़ी संख्या में लोग वापस अपने गांव लौटे हैं। वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिला सकते हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अप्रैल 2020। लॉक डाउन के दौरान इन दिनों कई विद्यालयों के द्वारा जूम नाम के मोबाइल ऐप के जरिये वीडियो के साथ ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन इन कक्षाओं का लाभ छात्र-छात्राओं को कमोबेश नहीं ही मिल पा रहा है। कारण कभी यह ऐप ही काम करना बंद कर देता है, और कभी शिक्षक-शिक्षिकाओं व छात्र-छात्राओं को इंटरनेट की समस्या रहती है। शिक्षक-शिक्षिकाओं व छात्र-छात्राओं को इस ऐप के जरिये पढ़ने-पढ़ाने का ज्ञान न होना भी एक समस्या है। ऐसे में कभी भी कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं की इन ऑनलाइन कक्षाओं में उपस्थिति नहीं हो पा रही है। ऐसे में छात्र-छात्राएं ऑनलाइन कक्षाओं के साथ ही शिक्षक-शिक्षिकाओं से वीडियो बनाकर एवं पीडीएफ के माध्यम से पाठ्य सामग्री डालने की आवश्यकता जता रहे हैं।

ऑनलाइन कक्षाओं के साथ ही ऑफलाइन पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराने की मांग

नैनीताल। कुमाऊं विवि के सर्वप्रमुख डीएसबी परिसर के छात्रसंघ अध्यक्ष विशाल वर्मा ने कुलपति प्रो. केएस राणा से कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से आधुनिक तरीके से कक्षाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए वार्ता की तथा ईमेल के माध्यम से ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में कुमाऊं विश्वविद्यालय की वेबसाइट के माध्यम से कक्षाओं को ऑनलाइन, वेबीनार एवं पीडीएफ के माध्यम से पाठ्य सामग्री एवं हर विषय के ऑफलाइन डाटा अपलोड कर उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. राणा ने पहले ही इंटरनेट के माध्यम से पठन-पाठन की स्वीकृति प्रदान की थी परंतु पहाड़ी क्षेत्रों में नेटवर्क की दिक्कत होने की वजह से हर कोई ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल नहीं हो सकता है। इसीलिए वेबसाइट के माध्यम से ऑफलाइन भी पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने से छात्र-छात्राओं तक इस सुविधा को अधिक लाभ दिलाया जा सकता है। इस पर कुलपति प्रो. राणा ने सकारात्मक कदम उठाने की बात कही है।

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-हर रोज सुबह नौ से अपराह्न तीन बजे तक चलाई जा रही हैं ऑनलाइन कक्षाएं
पार्वती विहार के प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह।

 

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अप्रैल 2020। नगर के वीरभट्टी स्थित पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार, वरिष्ठ माध्यमिक पूर्ण आवासीय विद्यालय में कोरोना के दृष्टिगत लागू लॉकडाउन के दौरान विद्यार्थियों को यूट्यूब चैनल के माध्यम से वीडियो के जरिये ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेंद्र सिंह ने बताया कि सभी अध्यापकों सभी कक्षाओं को सभी विषयों के प्रतिदिन 30 मिनट की वीडियो विद्यालय के यूट्यूब चैनल-पीपीजेएसस्टडीएटहोम पर अपलोड करने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही 10वीं व 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए प्रातः नौ से दिन में तीन बजे तक विशेष ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
विद्यालय के इस प्रयास की अभिभावकों के साथ ही छात्र भी प्रशंसा कर रहे हैं, एवं इस प्रयास को समयानुकूल बता रहे हैं। 12वीं कक्षा के छात्र आयुश कुमार व 10वीं के श्रेय ने कहा ऑनलाइन कक्षाओं से वे लॉक डाउन के दौरान भी आनंददायक तरीके से पढ़ पा रहे हैं। इससे उनका समय भी सकारात्मक कार्यों में अच्छा व्यतीत हो रहा है। जरूरत पड़ने पर से आचार्यों जी से अपनी जिज्ञासा का समाधान व परामर्श भी प्राप्त कर पा रहे हैं। विद्यालय के आईटी प्रभारी विष्णु दत्त शुक्ला ने बताया कि विद्यालय के यूट्यूब चैनल पर विविध विषयों की लगभग 400 वीडियो उपलब्ध हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2020। समस्याएं समाधान का रास्ता भी दिखा देती हैं। कोरोना की महामारी के दृष्टिगत लागू लॉक डाउन में बच्चों की पढ़ाई को पहुंच रहे नुकसान से उबरने का रास्ता भी नजर आने लगा है। नगर के सेंट जोसफ कॉलेज ने मंगलवार को 11वीं कक्षा के विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए एक मोबाइल ऐप के जरिये वीडियो कांफ्रेंस कराकर ऑनलाइन वर्चुअल यानी आभासी कक्षा शुरू की। इस दौरान पूर्वाह्न 11 से साढ़े 11 बजे तक छात्र-छात्राओं को शिक्षिका अनुपा जॉर्ज ने भौतिकी विषय के पाठ पढ़ाए। उधर सेंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज में मंगलवार को ही अलग-अलग कक्षाओं व वर्गों के ह्वाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें शिक्षिकाएं विभिन्न पाठों के वीडियो, विभिन्न लिंक तथा प्रश्नोत्तरी आदि भेज रही हैं, तथा छात्राओं को इन वीडियो के जरिये पाठ पढ़ने को कह रही हैं, एवं प्रश्नों के उत्तर कॉपी में करने को कहा जा रहा है। इसी तरह नगर के ओकवुड स्कूल व रामा मांटेसरी स्कूल व पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार माध्यमिक विद्यालय दुर्गापुर के प्रधानाचार्यों ने बताया कि उनके विद्यालयों में भी लॉक डाउन के कारण स्कूल न आ पा रहे बच्चों को यथासंभव ऑनलाइन माध्यम से ह्वाट्सएप ग्रुप बनाकर विभिन्न कार्य देते हुए पढ़ाया जा रहा है।
इधर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. केएस राणा के सभी विभागों से विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने के निर्देशों पर सर्वप्रथम अमल करते हुए डीएसबी परिसर के पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गिरीश रंजन तिवारी एवं पूनम बिष्ट के द्वारा अटल पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययन केंद्र के द्वारा भी अपने छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व विवि के जेसी बोस तकनीकी परिसर भीमताल के कुछ विभागों ने भी ह्वाट्सएप के माध्यम से छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाना प्रारंभ कर दिया है।

यह भी पढ़ें : Breaking : उत्तराखंड बोर्ड की 23, 24 व 25 मार्च की परीक्षाएं-मूल्यांकन स्थगित

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2020। उत्तराखंड में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते खतरे के मद्देनजर शासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित करने के साथ ही अब उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य भी स्थगित कर दिया है। उत्तराखंड शासन ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद यानी उत्तराखंड बोर्ड की आगामी 23, 24 व 25 को होने वाली परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डा. मुकुल सती ने बताया कि इस संबंध में प्रदेश शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। बताया कि कोरोना के संक्रमण के कारण इन परीक्षाओं को स्थगित किया गया है। इन तिथियों को होने वाली परीक्षाओं के लिए तिथि बाद में घोषित की जाएगी। 

यह भी पढ़ें : सरकारी स्कूलों के विलय के आदेश पर रोक, यथास्थिति बनाए रखने के आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मार्च 2020। उत्‍तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने प्राथमिक विद्यालयों और जूनियर हाईस्कूलों के विलय के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ऊधमसिंह नगर जिले के डीएम के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए है ।
उल्लेखनीय है कि शांतिपुरी निवासी गणेश उपाध्याय की जनहित याचिका में कहा गया है शिक्षा विभाग उत्तराखण्ड ने शासनादेश जारी करते हुए कहा कि जनपद में चार किमी तक की परिधि के बेसिक विद्यालयों के माध्यमिक विद्यालयों में विलय की व्यवस्था की जा रही है, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धाराओं का खुला उल्लंघन है। जबकि भारत सरकार द्वारा पारित अधिनियम में प्रावधान है कि बच्चे के निवास से एक किमी की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय तथा 3 किमी की दूरी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय होना चाहिए। पूर्ववर्ती सरकारों ने भी इसी का आधार मानकर विद्यालय खोले थे। लेकिन इन विद्यालयों की निर्वाचित प्रबन्धन समितियों को बिना किसी आदेश के अस्तित्व विहीन किया जा रहा है। केवल उधम सिंह नगर के 1100 विद्यालयों में से 398 विद्यालयों को बंद कर उनका विलयीकरण मॉडल स्कूलों में करना सरकार की सोची समझी साजिश है। याचिकर्ता का यह भी कहना है कि इन स्कूलों में बच्चों की संख्या सौ से अधिक है। अगर विलयीकरण किया जाता है तो बच्चों को अपने घरों से कई किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए जाना पड़ सकता है।

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-फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट ने की तलब 
-याचिका में राज्य में 3500 शिक्षकों पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति पाने का लगाया है आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मार्च 2020। मंगलवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति अध्यापकों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को जिलेवार फर्जी शिक्षकों की जांच कर 15 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये है।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में लगभग 3500 शिक्षकों ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाई है। 2018 में एसआईटी की जांच में लगभग 100 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे और 53 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही चल रही है, लेकिन उसके बाद भी उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे शिक्षक अपने पदों पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता ने इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग करते हुए ऐसे अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है, जो कुछ शिक्षकों के फर्जी प्रमाणपत्रों को सही ठहरा रहे हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 16 मार्च 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाईस्कूलों के विलय के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सोमवार को डीएम उधमसिंह नगर से 18 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने सुनवाई की।
यह याचिका शांतिपुरी पंतनगर निवासी डॉ. गणेश उपाध्याय ने शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के विलय किए जाने के खिलाफ दायर की है। इसमें कहा गया है कि शिक्षा विभाग ने शासनादेश जारी करते हुए कहा है कि जनपद में चार किलोमीटर तक की परिधि के बेसिक विद्यालयों का माध्यमिक विद्यालयों में विलीनीकरण की व्यवस्था की जा रही है। याचिका में कहा गया है कि यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन है।  भारत सरकार द्वारा पारित अधिनियम में प्राविधान है कि बच्चे के निवास से एक किलोमीटर की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय तथा तीन किलोमीटर की दूरी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय होना चाहिए। पूर्ववर्ती सरकारों ने भी इसी को आधार मानकर विद्यालय खोले थे। लेकिन इन विद्यालयों की निर्वाचित प्रबन्धन समितियों को बिना किसी आदेश के अस्तित्व विहीन किया जा रहा है । 1100 विद्यालयों में से 398 विद्यालयों को बंद कर देना सरकार की सोची समझी साजिश है।

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-शासन के आदेश के बावजूद नहीं खुल पाएंगे नगर के बोर्डिंग स्कूल
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मार्च 2020। शासन ने पहले शुक्रवार को प्रदेश के इंटर तक के सभी विद्यालयों को बंद करने के आदेश दिये। फिर शनिवार को पूर्णतया बोर्डिंग वाले स्कूलों को खुले रहने की छूट दे दी। इसके बावजूद मुख्यालय स्थित दोनों पूर्णतया बोर्डिंग वाले प्रतिष्ठित विद्यालय शेरवुड कॉेलेज और बिड़ला विद्या मंदिर खुल नहीं पा रहे हैं। कारण, दोनों विद्यालय शासन के आदेशों पर अपने यहां बोर्डिंग में रहकर पढ़ने वाले बच्चों को पहले आदेश पर ही घर भेजे चुके हैं, जिन्हें अब वापस नहीं लौटाया जा सकता है। बिड़ला विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा ने पूछे जाने पर कहा कि बोर्डिंग स्कूलों के बारे में कभी समय पर सोचा नहीं जाता है। बारिश होने पर आम विद्यालयों में छुट्टी के आदेशों को बोर्डिंग स्कूलों में भी बेवजह लागू कर दिया जाता है, जबकि वहां बच्चों की सुरक्षा की अलग से कोई समस्या नहीं होती है। इस बार भी पहले बोर्डिंग स्कूलों को भी बिना समय दिये बंद करने के आदेश दिये गए। ऐसे में 95 फीसद बच्चों के घर चले जाने के बाद स्कूल खोलने के आदेश का पालन करना फिलहाल संभव नहीं है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 मार्च 2020। शनिवार को 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा थी। नैनीताल में ओलावृष्टि व बर्फबारी के कारण बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं को अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ा। लेकिन इस दौरान नगर के बिड़ला विद्या मंदिर ने जो व्यवस्थाएं उनके लिए कीं, उससे उनकी परेशानियां पर मरहम लगा बल्कि उनका परीक्षा देने के लिए मनोबल भी बढ़ गया।
हुआ यह कि आज बर्फबारी के कारण नगर के 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा देने वाले करीब 2 दर्जन बच्चों को, जिनका परीक्षा केंद्र बिड़ला चोटी पर स्थित बिड़ला विद्या मंदिर में था, परीक्षा देने के लिए तीन से चार किमी की चढ़ाई वाली दूरी पैदल चलकर काटनी पड़ी। क्योंकि रास्ते में आधा से एक फिट तक पड़े ओलों की वजह से वाहन माल रोड से ही ऊपर नहीं चढ़ पाए। ऐसे में थके-हारे व ठंड से कांपते बच्चों को बिड़ला विद्या मंदिर प्रशासन ने मानवता का परिचय देते हुए गर्म पानी और चाय उपलब्ध कराई। इससे बच्चों की जान में जान आई और वे संयत होकर परीक्षाा दे पाए। बिड़ला के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा ने हालांकि इसे सामान्य बात बताया किंतु नगर पालिका सभासद मनोज साह जगाती, भाजपा नेता अरविंद पडियार सहित नगर के अनेक लोग उनके इस कृत्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा कर रहे हैं। श्री शर्मा ने आगे भी मौसम की खराबी को देखते हुए प्रशासन से बिड़ला चुंगी तक के मार्ग से सोमवार को होने वाली परीक्षा से पहले बर्फ हटाने की अपील की, और यहां से आगे स्वयं मार्ग साफ कराने का भरोसा दिलाया।

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कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि प्राप्त करते पद्मश्री डा. सौमित्र रावत।

नवीन समाचार, नैनीताल 7 मार्च 2020। प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड में पांचवा सैनिक धाम बताने का जिक्र कर कहा कि उत्तराखंड में छठा विद्या धाम है। इसके लिए उन्होंने अपने तर्क भी दिए। कुमाऊं विवि के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए उन्होंने यह बात कही। साथ ही उन्होंने प्रदेश के महाविद्यालयों में कक्षाओं के दौरान मोबाइल फोन बंद करने की बात भी कही। कहा कि वे जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। साथ ही यह बात भी कही कि इसके लिए पूरे प्रदेश में संबंधितों के साथ विचार-विमर्श और बहस भी करेंगे। उन्होंने प्रदेश के महाविद्यालयों में 180 दिन से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को परीक्षा नहीं देने का प्राविधान करने की बात भी कही। वहीं राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने भी पूछे जाने पर कहा-हां, जरूर, कक्षाओं में मोबाइल फोन बैन होने चाहिए।
उत्तराखंड को छठे-विद्या धार्म के रूप में परिभाषित करते हुए डा. रावत ने कहा कि राज्य में 12 सरकारी एवं 23 निजी विश्वविद्यालय एवं सात केंद्रीय संस्थान हैं। छात्रों के मुकाबले दो गुनी छात्राएं उच्च शिक्षा ले रही है। उन्होंने दावा कि राज्य में 39 फीसद लोग उच्च शिक्षा ले रहे हैं, जो कि केरल से भी अधिक और देश मंे सर्वाधिक है। उन्होंने राज्य के महाविद्यालयों में 91 फीसद फैकल्टी एवं 100 फीसद प्राचार्य होने का दावा भी किया। कहा कि मौजूदा बजट में सभी पीजी कॉलेजों में 5-5 रोजगारपरक पाठ्यक्रम चलाने, वाईफाई की सुविधा एवं 100 फीसद पुस्तकें उपलब्ध कराने का प्राविधान रखा गया है। उन्होंने बच्चों को पीएचडी व डीलिट में बेहतर प्रदर्शन कराने वाले प्रोफेसरों के लिए प्रो. भक्तदर्शन पुरस्कार की घोषणा भी की, जिसके तहत पुरस्कार राशि के साथ ही एक ऐच्छिक स्थानांतरण व एक अतिरिक्त पदोन्नति सहित अन्य सुविधाएं देने की बात कही। कहा कि राज्य में 5 लाख से कम आय के 30 मेधावी बच्चों को आईएएस की निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी। दावा किया कि इससे 2022 में उत्तराखंड देश में सर्वाधिक आईएएस देने वाला राज्य बन जाएगा। कहा कि अपनी विधानसभा से पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कर हर विधानसभा में राज्य की दूसरी भाषा- संस्कृत बोलने वाला एक मॉडल गांव बनाएंगे साथ ही विद्यार्थियों को अपनी लोकभाषा से जोड़ने के लिए हर राजकीय महाविद्यालय में संस्कृत, कुमाउनी, गढ़वाली व जौनसारी भाषा का अध्ययन केंद्र स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए 180 दिन की उपस्थिति अनिवार्य होगी। कम उपस्थिति होने पर परीक्षा में नहीं बैठने दिया जायेगा।
राज्य को छटा विद्या धाम के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महाविद्यालय में पॉच-पॉच रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किये जायेंगे साथ ही कॉलेजों में स्मार्ट क्लास, वाईफाई, ई-लाईब्रेरी, किताबे दान अभियान से भी उपलब्ध करायी जायेंगी। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष अच्छा कार्य करने वाले पॉच प्रोफेसरों को भी सम्मानित किया जायेगा, सम्मानित होने वाले प्रोफेसरों को उनकी इच्छानुसार एक बार स्थानान्तरण व एक पदोन्नति भी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि पॉच लाख से कम आय वाले अभिभावकों के तीस बच्चों को सरकार आईएएस की कोचिंग करा रही है साथ ही 100 गरीब मेधावी बच्चों को विभिन्न परीक्षाओं की भी कोचिंग करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संस्कृत भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि राजकीय विश्वविद्यालयों में संस्कृत, कुमाऊॅनी, गढ़वाली व जोनसारी भाषा अध्ययन केन्द्र संचालित किये जायेंगे। प्रत्येक जिले में एक मोडल कॉलेज खोला जायेगा जिसमें सभी विषय संचालित होंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य में विधि विश्वविद्यालय भी खोला जायेगा,इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गयी है। 

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नवीन समाचार, देहरादून, 29 जनवरी 2020। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रदेश के 72 टीचरों को शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बुधवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने 10 हजार की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र देकर टीचरों को पुरस्कृत किया।

इन शिक्षकों को मिला शैलेश मटियानी शैक्षिक
पुरस्कार (2015 में चयनित शिक्षक) : रीता सेमवाल, प्रमिला भंडारी, डॉ. मंजू कपरवाण, वीरेंद्र सिंह राणा,
डॉ. कुसुम रानी नैथानी, वीरेंद्र सिंह राणा, कुंवर सिंह गुसांई,
वीरेंद्र सिंह नेगी, रामाश्रय सिंह, रामशंकर सिंह, नीलम नेगी,
जीवन चंद्र दुबे, ललित मोहन बोहरा, रेखा रानी कोटियाल,
कुसुमलता, ममता डिमरी, किशन पाल महर, पुष्पा जोशी, रामलाल, भानुप्रकाश गुप्त, विमला जोशी, दीपा कालाकोटी, महेश गिरी, गीता लोहनी, दरपान राम टम्टा, स्वतंत्र कुमार मिश्रा, सत्ये सिंह राणा व दिनेश प्रसाद बड़ोनी।

2016 में चयनित शिक्षक : डॉ. सुशील सिंह राणा,
डॉ. राजकुमारी मनराल, सुकन्या थपलियाल, राकेश कुमार असवाल, विजया रावत, डॉ. दिनेश चंद्र बडोनी, पुष्पा रावत, शशि कंडवाल, मोहम्मद अनीस, चंपा कोरंगा, डोरी लाल लोधी, आशीष चौहान, गजपाल सिंह जगवाण, शैलेंद्र कुमार नौटियाल, किशोरी सिंह, सुरेश चंद्र पाठक, उम्मेद सिंह रावत, डॉ. दिग्विजय सिंह चौहान, कौस्तुभ चंद्र जोशी, कृष्ण गोपाल पाठक व दीपक रतूड़ी।

2017 में चयनित शिक्षक : माधव सिंह नेगी, चंद्रकला शाह, डॉ. यशवंत सिंह नेगी, जमुना प्रसाद तिवारी, शोभा, सुरेंद्र सिंह रौतेला, उषा त्रिवेदी, सर्वेश्वरी, ममता मिश्रा, उर्मिला सिंह पुंडीर, इमराना परवीन, नीता अल्मिया, लक्ष्मी काला, प्रमोद कुमार कर्नाटक, संजीव कुमार पांडेय, पुष्कर सिंह नेगी, सुधा सेमवाल, गोविंद सिंह रावत, भास्करानंद डिमरी, रोहिताश्व कुंवर चौहान, किशोर चंद्र पाटनी, राधेश्याम खर्कवाल, डॉ. वीर सिंह रावत, कीर्तिबल्लभ जोशी।

रायपुर स्थित राजीव गांधी नवोदय स्कूल तपोवन में आयोजित सम्मान समारोह में प्राथमिक, माध्यमिक, संस्कृत शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों के कुल 72 टीचरों को उत्कृष्ट कार्य के लिए शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार दिया गया। इसमें वर्ष 2015 में 27 टीचरों, वर्ष 2016 में 21 और वर्ष 2017 के लिए 24 टीचरों को पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार से सम्मानित टीचरों को दो साल का सेवा विस्तार मिलेगा।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि बेसिक शिक्षा में अभी भी कई कमियां हैं। जिनको दूर करने की चुनौती है।  विभागीय अधिकारियों और टीचरों को मिल कर शिक्षा में और सुधार करना होगा। शिक्षा में कमियों के लिए सिर्फ टीचर को दोषी मानना उचित नहीं है। इसके लिए हम सब दोषी हैं। उन्होंने प्राथमिक स्कूलों में घट रही बच्चों की संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि नए शैक्षिक सत्र से बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन मोहन बिष्ट ने किया। इस मौके पर शिक्षा निदेशक आरके कुंवर, निदेशक शिक्षा एवं प्रशिक्षण अकादमी सीमा जौनसारी, अपर निदेशक प्राथमिक बीएस रावत, अपर निदेशक माध्यमिक आरके उनियाल, संस्कृत शिक्षा निदेशक एसपी खालिद आदि मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, देहरादून, 14 जनवरी 2020। मंगलवर का दिन उत्तराखंड के अतिथि शिक्षक के पद पर कार्य करने की इच्छा रखने वाले व पूर्व में अतिथि शिक्षक के तौर पर कार्य कर चुके युवाओं के लिए बड़ी खबर लेकर आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को गेस्ट टीचर की सेवाएं लेने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कह दिया है कि जब तक शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक गेस्ट टीचर्स नियुक्त कर लिये जाएं। यानि अब पांच हजार बेरोजगारों को तैनाती मिलने के साथ ही स्कूलों को शिक्षक मिल जाएंगे। अब एलटी व प्रवक्ता के जो भी पद रिक्त हैं, सरकार उन पर तुरंत गेस्ट टीचर की नियुक्ति कर सकती है। वर्तमान में करीब पांच हजार पद रिक्त हैं। इसमें एलटी के ८०० व प्रवक्ता के ४२०० पद खाली हैं, जिन पर सरकार ने पिछले वर्ष जनवरी में गेस्ट टीचर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। सरकार की ओर से तीन जनवरी तक जिलावार स्क्रूटनी करने के बाद गेस्ट टीचर्स को स्कूलों का आवंटन भी कर दिया गया था, लेकिन संगठन के ही चार लोगों ने प्रक्रिया से बाहर होने की स्थिति में प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगायी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने चार जनवरी सरकार ने गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने की बहुत कोशिश की, लेकिन मामला मुख्य न्यायाधीश की बेंच में होने की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। मुख्य न्यायाधीश की अदालत में राम
मंदिर के मुद्दे पर लगातार सुनवाई चलने के कारण उत्तराखंड सरकार की ओर से इस बात के प्रयास भी हुए थे कि गेस्ट टीचर का मामला दूसरे जजों की बेंच में ट्रांसफर हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। लंबे समय बाद इस मामले की सुनवाई के लिए १४ जनवरी की तिथि निर्धारित हुई। इस बीच शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने प्रोटोकाल तोड़ते हुए मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मुकुल रोहतगी व डिप्टी एडवोकेट जनरल विजय अरोड़ा से मुलाकात की और गेस्ट टीचर की सेवाओं की जरूरत बतायी। शिक्षा मंत्री के पीआरओ नरेद्र तिवारी ने बताया है कि आज इस मामले की सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी व विजय अरोड़ा ने बहस में हिस्सा लिया और गेस्ट टीचर की आवश्कयता को प्रबल तरीके से कोर्ट के सामने रखा। उल्लेखनीय है कि गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति का फैसला तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने लिया था। रावत के कार्यकाल में ही गेस्ट टीचर्स की सेवाएं ३१ मार्च को बाधित हो गयी थी, लेकिन तब सरकार ने हाईकोर्ट से अनुमति ले ली थी। उसके बाद ३१ मार्च २०१८ को फिर से गेस्ट टीचर की सेवाएं स्वतरू समाप्त हो गयी। हाईकोर्ट ने इस बार योग्यता को वरीयता देते हुए नियुक्ति देने की अनुमति दी, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होते-होते दिसंबर आ गया था। तब सरकार ने प्रत्येक जिला मुख्यालय पर गेस्ट टीचर की काउंसलिंग करके नियुक्तियां शुरू की थी और चयनित गेस्ट टीचर को काउंसलिंग के साथ ही स्कूलों का आवंटन भी किया जा रहा था। तभी चार जनवरी २०१९ को सुप्रीम कोर्ट से नियुक्ति पर स्टे हो गया था

यह भी पढ़ें : यहां 847 पदों पर नियुक्तियों का रास्ता साफ, 3 माह के भीतर होंगी नियुक्तियां

नवीन समाचार, देहरादून, 10 जनवरी 2020। उच्च शिक्षा में 877 पदों के लिए अधियाचन भेजा गया था। न्यायालय का रास्ता खुलने के बाद रिक्त पदों पर करीब तीन महीने के भीतर असिस्टेंड प्रोफेसरों की नियुक्ति कर दी जायेगी।
इसके साथ ही यह निर्णय भी लिया गया है कि जिन महाविद्यालयों में छात्र नहीं हैं, वहां के पदों को दूसरे महाविद्यालयों में शिफ्ट कर दिया जाए। डा. रावत ने विधान सभा स्थित कार्यालय कक्ष में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जतायी कि 19 महाविद्यालयों के कार्य अपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये कि सम्बन्धित अपूर्ण कार्य 31 मार्च तक पूर्ण कर लिये जाएं। इस संबंध में सचिव उच्च शिक्षा को निर्देश दिया कि महाविद्यालयों के प्राचार्याें, नियोजन विभाग एवं वित्त विभाग की एक बैठक बुला ली जाए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग ने 877 पदों के लिए अधियाचन भेजा था। अब चूंकि न्यायालय की ओर से इस भर्ती के लिए रास्ता खुल गया है, ऐसे में कोशिश की जाए की तीन महीने के भीतर असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति कर दी जाए। बैठक में कहा गया कि जिन महाविद्यालयों में पद स्वीकृत हैं, किन्तु छात्र नहीं हैं उन पदों को आवश्यकतानुसार अन्य महाविद्यालयों में भेजा जाए। इसके अलावा 17 महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित बीएड संकाय गवर्निंग बॉडी की बैठक भी आयोजित करने का निर्देश दिया।

यह भी पढ़ें : 97 शिक्षकों की डिग्री फर्जी निकली, 1 ही विश्वविद्यालय की हैं सबकी फर्जी डिग्रियां

नवीन समाचार, देहरादून 10 जनवरी 2019। एसआईटी की जांच में 11 और शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गई है। सभी ने नौकरी के समय चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की बीएड की डिग्री लगाई थी। इसे जांच में फर्जी पाया गया है। अब तक कुल 97 शिक्षकों की डिग्री जांच में फर्जी पाई जा चुकी है।
एसआईटी प्रभारी आईपीएस मणिकान्त मिश्र अपनी टीम में शामिल निरीक्षक भगवन्त सिंह बिष्ट, कांस्टेबल कुश कुमार, कांस्टेबल बृजेश और महिला कांस्टेबल शबाहत जबी के साथ मामले की जांच कर रहे हैं। उनकी जांच में कुल 86 शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई जा चुकी है। जांच के
इसी क्रम में कुल 11 और शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गई है। यह सभी शिक्षक रुद्रप्रयाग के विभिन्न स्कूलों में तैनात हैं। फर्जी डिग्री के साथ नौकरी कर रहे इन 11 फर्जी डिग्रीधारियों में राजकीय प्राथमिक विद्यालय जयकण्डी में तैनात माया, जूनियर हाईस्कूल जखन्याल गांव में तैनात विरेन्द्र सिंह, राजकीय प्राथमिक विद्यालय लुखन्द्री में तैनात महेन्द्र सिंह, राजकीय प्राथमिक विद्यालय कैलाश नगर में तैनात संगीता, राजकीय प्राथमिक विद्यालय सारी में तैनात मोहन लाल, राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैली में तैनात कान्ति प्रसाद भट्ट, राजकीय प्राथमिक विद्यालय जौला में तैनात जगदीश लाल, राजकीय प्राथमिक विद्यालय धारतोन्दला में तैनात राकेश सिंह, राजकीय प्राथमिक विद्यालय भुनाल गांव में तैनात विजय सिंह, राजकीय प्राथमिक विद्यालय सौराखाल में तैनात शिक्षक भवानी लाल और राजकीय प्राथमिक विद्यालय अरखुण्ड में तैनात शिक्षक कौशल नरेश राणा शामिल हैं। सभी के खिलाफ अग्रिम कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

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नवीन समाचार, रामनगर, 6 जनवरी 2019। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षाओं की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। इस बार इंटर की परीक्षाएं दो मार्च से तथा हाईस्कूल की परीक्षाएं तीन मार्च से आरंभ होंगी।

उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा समि​ति की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। तय हुआ कि 2 मार्च को इंटर की हिंदी विषय से परीक्षा की शुरूआत होगी, वहीं 3 मार्च से हाईस्कूल का पहला पेपर होगा। 25 मार्च को बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होंगी। सचिव नीता तिवारी की मौजूदगी में बताया गया कि परीक्षाओं के लिए 1324 केंद्र बनाए गये हैं. हाईस्कूल में 150289 व इंटर की परीक्षा में 121326 परीक्षार्थी भाग लेंगे।
बताते चले कि 2019 में उत्तराखंड बोर्ड में इंटरमीडिएट का कुल परीक्षाफल 80.13 फीसदी रहा था। इसमें बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत 76.29 और बालिकाओं का 83.79 फीसदी था। वहीं दसवीं का कुल परीक्षाफल 76.43 प्रतिशत था। इसमें बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत 70.60 और बालिकाओं का 82.47 फीसदी था। 2018 में हाईस्कूल का रिजल्ट 74.57 एवं इंटरमीडिएट का 78.97 प्रतिशत था। जबकि 2019 के परिणामों में 12वीं में शताक्षी तिवारी 98 फीसदी अंकों के साथ तो 10वीं में अनंता सकलानी 99 फीसदी अंकों के साथ टॉपर रहीं।

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