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उत्तराखंड ने कोरोना से निपटने के साथ फिल्मों की शूटिंग के लिए दरवाजे खोले… दिशा-निर्देश जारी

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नवीन समाचार, देहरादून, 20 जून 2020। उत्तराखंड सरकार जहां एक ओर कोरोना से बचाव और रोकथाम को लेकर सख्ती बरत रही है, वहीं अब अनलॉक की ओर भी धीरे-धीरे कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में राज्य में फिल्मों की शूटिंग के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने इसके लिए दिशा-निर्देश मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) तय किये हैं, जिन्हें राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने आज जारी कर दिया।

इसके मुताबिक सभी प्रोडक्शन यूनिट, फिल्म शूटिंग यूनिट या ऑडियो विजुअल सेक्टर्स के लोगों को कोरोना से बचाव एवं रोकथाम के लिए सभी जरूरी मानक दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। मसलन 6 फीट की शारीरिक दूरी, मास्क पहनना, चेहरा ढकना, बार-बार साबुन से हाथ धोना, सैनिटाइज करना, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से परहेज करना और आरोग्य सेतु एप को यूनिट के सभी लोगों के मोबाइल फोन में इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। प्रोड्यूसर के लिए राज्य में प्रवेश से पहले या एक जिले से दूसरे जिले में जाने के क्रम में उत्तराखंड के आधिकारिक वेब पोर्टल (https://dsclservices.in/uttarakhand-migrant-registration.php) पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। प्रोडक्शन कंपनी या फिल्म शूटिंग यूनिट को महानिदेशक, सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखंड के ऑफिस को सभी सुरक्षा मानकों और राज्य सरकार तथा भारत सरकार द्वारा निर्धारित एसओपी के अनुपालन के संबंध में अंडरटेकिंग देना अनिवार्य होगा। इसमें फिल्म प्रोडक्शन हाउस का नाम, सदस्यों की सूची, मोबाइल नंबर, कितने दिनों तक शूटिंग चलेगी और कहां-कहां होगी। इस दौरान कहां पर यूनिट के लोग ठहरेंगे और जहां पर शूटिंग होगी वहां यूनिट के लोग किस परिवहन माध्यम (कार, बस, ट्रेन या फ्लाइट) से यात्रा करेंगे, इन सब का ब्यौरा देना होगा।

इन सब का परीक्षण करने के बाद महानिदेशक, सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखंड शूटिंग यूनिट को अनुमति देंगे, जिसे संबंधित जिला प्रशासन को दिखाना होगा। प्रोडक्शन कंपनी को एक नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त करना होगा, जो उस दौरान सभी गतिविधियों का डाटा प्रशासन के साथ साझा करेगा। यूनिट के लोगों को प्रतिदिन थर्मल स्क्रीनिंग करना अनिवार्य होगा। फिल्म यूनिट को किसी भी जोखिम क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) में ना तो शूटिंग करने की इजाजत होगी ना ही किसी जोखिम क्षेत्र से कोई व्यक्ति क्रू में शामिल हो सकेगा। प्रोडक्शन यूनिट के सभी लोगों को मास्क, हैंड ग्लव्स आदि पहनना अनिवार्य होगा। शूटिंग स्थल पर भीड़भाड़ इकट्ठा करने की मनाही होगी। अगर प्रोडक्शन यूनिट या फिल्म शूटिंग यूनिट के किसी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण पाया जाता है तो इस बारे में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य प्राधिकरण को यथाशीघ्र सूचित करना होगा। प्रोडक्शन यूनिट और फिल्म शूटिंग यूनिट को किसी भी स्थानीय व्यक्ति के साथ आसपास के इलाकों में बेवजह घूमने की इजाजत नहीं होगी। प्रोडक्शन यूनिट/फिल्म शूटिंग यूनिट में 65 साल से अधिक उम्र या गर्भवती महिला अथाव हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग से ग्रस्त, डायबिटीज तथा किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को शामिल करने में की मनाही होगी। इस श्रेणी के लोग कार्यस्थल या शूटिंग सेट पर जा भी नहीं सकेंगे। अगर किन्ही विशेष परिस्थितियों में ऐसे लोगों को ले जाने की नौबत आती है तो इस बारे में जिला प्रशासन को पहले से सूचित करना अनिवार्य होगा। शूटिंग शुरू करने से पहले और खत्म करने के बाद उस स्थान और सेट के फर्नीचर, रेलिंग, काउंटर इत्यादि को सैनिटाइज करना अनिवार्य होगा। इनडोर शूटिंग के लिए अधिकतम 15 और आउटडोर शूटिंग के लिए 30 लोगों की अनुमति होगी। रसोई में भोजन पकाने के दौरान और खाना परोसने के दौरान भी सभी अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। शूटिंग या आवागमन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को भी पहले और बाद में सैनिटाइज करना अनिवार्य होगा।

मुख्य सचिव ने कहा है कि फिल्म शूटिंग के दौरान उपरोक्त गतिविधियों की निगरानी के लिए आवश्यक तंत्र लगाने के मामले में सम्बन्धित जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, महामारी रोग अधिनियम, 1897 और आईपीसी की सम्बन्धित धाराओं के तहत इन दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराएगा।

यह भी पढ़ें : वर्ष 2012 में नैनीताल आये थे ऋषि कपूर, फिल्म में जरूरत न होने के बावजूद दिखायी थी शहर की खूबसूरती

नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अप्रैल 2020। इरफान खान के बाद सिने अभिनेता ऋषि कपूर भी अचानक बृहस्पतिवार को दुनिया से विदा हो गये। वे नवंबर 2012 में यशराज बैनर्स की फिल्म औरंजजेब की शूटिंग के लिए नैनीताल आये थे और तीन दिन शूटिंग की थी। खास बात यह रही कि इस फिल्म की शूटिंग नैनीताल में जरूर होनी थी, लेकिन नैनीताल का जिक्र नहीं होना था, लेकिन प्रकृति के प्रेमी ऋषि को नैनीताल की खूबसूरती ने ऐसा प्रभावित किया कि उन्होंने नैनीताल की सुंदरता को फिल्म में शामिल करवाया।

6 नवंबर 2012 को नैनीताल में माल रोड से शूटिंग के दौरान गुजरते दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर।

यह खुलासा औरंगजेब फिल्म के निर्माण में प्रोडक्शन का जिम्मा संभालने वाले सगीर खान ने किया। सगीर ने बताया कि पांच नवंबर 2012 को ऋषि फिल्म यूनिट के साथ नैनीताल में पहुंचे और यहां मनु महारानी होटल में रुके थे। इसी दिन देर शाम उन्होंने नैनीताल घूमने की इच्छा जताई थी और सगीर के साथ ही मॉल रोड पर घूमने आये थे। यहां उन्होंने मॉल रोड पर क्लासिक होटल के नीचे एक फड़ से ठंड लगने पर मफलर और सरदार सन्स से कोई अन्य कपड़ा खरीदा। इस दौरान ही वे नैनीताल की खूबसूरती से ऐसे प्रभावित हुए और कहा कि नैनीताल की सुंदरता को फिल्म में जरूर होना चाहिए। इस पर ही 6 नवंबर की सुबह तड़के पांच से साढ़े पांच बजे के बीच नगर के दृश्य फिल्माये गये। वहीं सुबह करीब साढ़े 10 बजे वे स्वयं होटल से पीछे चलते कैमरों के साथ निकले और माल रोड होते हुए तल्लीताल पहुंचे और वहां से सीधे निकलने के बजाय गाड़ी कलेक्ट्रेट-राजभवन रोड की ओर मोड़कर वापस डीएसबी से मस्जिद तिराहे पर उतर गये और फिर नैनी सरोवर का दूसरा चक्कर भी लगाया। इस तरह वाहनों पर कैमरे लगाकर नैनी झील के गिर्द ऋषि कपूर के शहर में कार से गुजरने तथा लाल व नीली बत्ती लगी गाड़ियों को इस ओर से उस ओर दौड़ाते हुए सीन भी शूट किये गये। इस दौरान तड़के से लोअर माल रोड पर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था। फोटो खींचने पर भी पाबंदी थी। फोटो खींचने वालों के कैमरों से फोटो भी डिलीट कर दी जा रही थीं।
उल्लेखनीय है कि औरंगजेब फिल्म की शूटिंग मूलतः नगर के अयारपाटा क्षेत्र में एक कर्नल साहब की कोठी में हुई और होनी थी। फिल्म में इसे डीसीपी बने ऋषि की कोठी के रूप में ही दिखाया गया था। यहां ऋषि, तन्वी आजमी और अभिनेता अर्जुन कपूर के बीच कुछ दृश्य फिल्माये गये। नगर के दृश्यों को फिल्माने की कोइ्र योजना नहीं थी, परंतु ऋषि के कहने पर ही नगर के दृश्य फिल्माये गये थे।
उल्लेखनीय है कि फिल्म औरंगजेब अमिताभ स्टारर त्रिशूल फिल्म की रिमेक बताई जाती है। इस फिल्म में ऋषि ने खलनायक प्रेम चोपड़ा वाला किरदार निभाया था। इस फिल्म में निर्माता निर्देशक बोनी कपूर के बेटे अर्जुन कपूर और मलयालम अभिनेता पृथ्वीराज नायक तथा पाकिस्तानी अभिनेत्री सलमा आगा की पुत्री साशा आगा उर्फ जारा नायिका की भूमिका में थे, साथ ही जैकी श्राफ व अमृता सिंह भी फिल्म में विभिन्न भूमिकाओं में थे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में शुरू हुई मूक फिल्म ‘टसल ऑफ वर्ड्स’ की शूटिंग

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 मार्च 2020। नैनीताल की खूबसूरती ऐसी है कि इसे शब्दों में व्यक्त कर पाना मुश्किल है, परंतु एक बार कोई इसे दिल से निहार ले तो बिना शब्दों के भी सब कुछ बयां कर देती है। ऐसा ही कुछ यहां फिल्माई जा रही लघु फिल्म ‘टसल ऑफ वर्ड्स’ की कहानी भी है। सोमवार को नगर की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के किनारे माल रोड पर कुछ दृश्यों के साथ इस फिल्म की शूटिंग प्रारंभ हुई। भारतीय फिल्म जगत के शुरुआती मूक फिल्मों के दौर को यादों कराती इस फिल्म में नायिका प्राची बंसल एक लेखक के रूप में है, और यह फिल्म एक लेखक की उधेड़बुन को दिखाती है। फिल्म के लिए आज लोवर माल रोड पर नायिका के भागने, नैनी झील में नौकायन एवं रेस्टोरेंट में नास्ता करते हुए कुछ दृश्य फिल्माए गए।

फिल्म के निर्देशक बरेली यूपी निवासी मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि फिल्म मुंबई बेस्ड प्रयांक प्रोडक्शन के लिए बनाई जा रही है। फिल्म में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध सिने अभिनेता हेमंत पांडे के भाई जितेंद्र पांडे भी मुख्य भूमिका में हैं। मयंक इससे पहले कुमाऊं के रानीखेत में पद्मावत फिल्म के ‘घूमर’ और पीके फिल्म के ‘ठरकी छोकरो’ गीतों के गायक स्वरूप खान के म्यूजिक वीडियो गली में आज चांद निकला की शूटिंग कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि केवल पार्श्व संगीत के साथ करीब 16-17 मिनट की यह फिल्म फिल्मोत्सवों के लिए तैयार की जा रही है। फिल्म में कोई संवाद नहीं होंगे। वहीं नायिका प्राची ने बताया कि वे जी टीवी के चर्चित धारावाहिक कलीरे सहित कई विज्ञापन फिल्मों एवं म्यूजिक वीडियो में काम कर चुकी हैं।

यह भी पढ़ें : ‘लाल इश्क’ में नजर आएंगी पहाड़ की बेटी रूप…

नवीन समाचार, बागेश्वर, 2 फरवरी 2020। देहरादून। एंड टीवी पर शुरू होने वाले ‘लाल इश्क’ (डेथ फॉर 15 मिनट्स) धारावाहिक में उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जनपद की बेटी रूप दुर्गापाल ‘सुपर वुमेन’ सानिया के रोल में नजर आएंगी, और एक महाशक्ति के तौर पर महिलाओं को उनकी ताकत का अहसास कराएंगी।
उल्लेखनीय है कि रूप ने कलर्स मंे ‘बालिका वधु’ से अपनी अभिनय यात्रा प्रारंभ की थी और जीटीवी में ‘तुझसे है रबता’, सब टीवी में बालवीर, कलर्स में स्वरागिनी, सोनी पर कुछ रंग प्यार के, एंड टीवी पर गंगा और वारिस के साथ ही सीआईडी के दूसरे भाग सीआईएफ में डाक्टर साक्षी की भूमिका निभा चुकी हैं। बावजूद उन्हें लाल इश्क से काफी उम्मीद हैं। रूप इस धारावाहिक में सोनिया नाम के मुख्य किरदार में हैं, जो शुरुआत में एक आम लड़की है। एक हादसे में वह 15 मिनट के लिए मर जाती हैं और उन्हें मृत्यु का अनुभव (नियर डेथ एक्सपीरियंस) होता है। इससे उसके पति, सास और ससुर परेशान हो जाते हैं लेकिन कुछ देर बाद वह जिंदा हो जाती है। फिर पता चलता है कि उसका ब्लड ग्रुप सुपर पावर है। उसके परिवार के पहले भी लोगों का ब्लड ग्रुप सुपर पावर रहा है। ये लड़की एक हैवान को भी खत्म करती है। समाज में जो बुरे लोग हैं। उनको खत्म करने के लिए काम करती है।

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-लक्सर के मूल निवासी हैं बाल कलाकार यज्ञ भसीन, नैनीताल में कार्यरत रहे यज्ञ के माता व पिता

फिल्म पंगा के पोस्टर में अन्य कलाकारों के साथ बाल कलाकार यज्ञ भसीन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 दिसंबर 2019। आगामी 24 जनवरी को रिलीज होने वाली हिंदी फीचर फिल्म पंगा का देवभूमि उत्तराखंड और नैनीताल से खास संबंध निकल आया है। कंगना रानावत, जस्सी गिल, नीना गुप्ता, पंकज त्रिपाठी और ऋचा चड्ढा अभिनीत इस फिल्म में एक कविता फिल्म के विषय को स्पष्ट करती है। वह कविता है-‘जो सपने देखते हैं वो सो नहीं पाते, उन्हें पूरा किये बिना बेचैन रहते हैं। जो सपने देखते हैं वो गिरते हैं, रुकते हैं, वो कमर कसते हैं, हर लिमिट फांद कर बढ़ते हैं। जो सपने देखते हैं वही खुद से मिलते हैं, अपनी दुनिया बदलते हैं और हर सपना सच करते हैं। जो सपने देखते हैं वो पंगा लेते हैं, हर बंधन से, हर रुकावट से, नामुमकिन से, खुद से, जोर लगा के पंगा लेते हैं।’

दिलचस्प बात यह भी है कि ‘पंगा’ फिल्म में प्रमुख चरित्र के रूप में नजर आने वाले व इसके विभिन्न पोस्टरों में मौजूद बाल कलाकार यज्ञ भसीन की खुद की कहानी इस कविता और फिल्म की थीम से पूरी तरह से मेल खाती है। बाल कलाकार यज्ञ भसीन का देवभूमि उत्तराखंड और नैनीताल नगर से सीधा संबंध है।यज्ञ का परिवार मूलतः उत्तराखंड के लक्सर (हरिद्वार) से है। यज्ञ का जन्म लक्सर में ही हुआ है। यज्ञ के जन्म के तीन माह बाद ही यज्ञ के पिता दीपक भसीन का चयन उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में सेक्शन अफसर के पद पर हो गया, लिहाजा उनका परिवार नैनीताल आ गया। दीपक यहां वर्ष 2014 से 2017 तक कार्यरत रहे, जबकि यज्ञ की माता सोनिया भसीन इस दौरान मल्लीताल स्थित हेड पोस्ट ऑफिस रोड पर रेडियन्स ब्यूटी सैलून के नाम से ब्यूटी पार्लर चलाने लगीं। इसी दौरान यज्ञ की प्रतिभा और अभिनय क्षमता दीपक और सोनिया को नजर आ गई तो उन्होंने यज्ञ को बॉलीवुड में अभिनेता बनाने की ठान ली, और अपने करियर से ‘पंगा’ ले लिया। यज्ञ के पिता हाई कोर्ट की अपनी प्रथम श्रेणी की नौकरी और मां ने अपना ब्यूटी पार्लर का चलता हुआ व्यवसाय त्याग कर सीधे बॉलीवुड को रुख किया और 2017 में सीधे मुंबई पहुंच गए। 2 साल के कठिन संघर्ष और बिना किसी गॉड फादर के आज यज्ञ भसीन फॉक्स स्टार स्टूडियोज के बैनर तले आ रही हिंदी फिल्म ‘पंगा’ से अपने अभिनय जीवन की शुरुआत करने जा रहा है। माता पिता का अपने बालक में अभिनय क्षमता और हुनर को आंक कर अपने पूरे करियर को दांव पर लगा देना किसी पंगे से कम नहीं है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल की सत्य घटना पर बनी फिल्म ‘ज़हर, झकझोर देगी…

-स्मैक के दुष्प्रभावों पर नगर के युवाओं ने बनाई फिल्म जहर
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 दिसंबर 2019।
समाज में तेजी से बढ़ रहे स्मैक के नशे के युवा पीढ़ी, परिवार व समाज पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से नगर के युवाओं ने ‘जहर’ नाम से एक लघु फिल्म का निर्माण किया है। बुधवार को इस फिल्म को प्रेस को दिखाया गया। फिल्म के निर्माता ‘प्रारंभ प्रोडेक्शन’ के निर्देशक प्रिंस परसाल ने बताया कि यह फिल्म नैनीताल व उत्तराखण्ड में बढ़ रहे नशे खास कर स्मैक के सेवन और उससे होने वाले दुष्परिणामों को दर्शाती है। फिल्म का उद्देश्य युवाओं को नशे की गलत लत से छुटकारा पाने के लिए जागरूक करना है।

देखें फ़िल्म ज़हर :

बताया गया कि फिल्म नगर की एक सत्य घटना पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष नगर में एक युवक के स्मैक का लती हो जाने पर उसके भाई ने स्मैक के तस्कर की हत्या कर दी थी। इस फिल्म का कथानक भी कुछ ऐसा ही है। मूल फिल्म में नशे के तस्कर को काफी भद्दी गालियों का प्रयोग करते दिखाया गया है, जो काफी खलता है, अलबत्ता फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान गालियों को म्यूट किया गया। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में मोहम्मद सोहेल, गौरव सिलोरियाल, अमित साह, पवन कुमार, शबनी राणा, बलजिंदर कौर हैं। फिल्म के निर्माण में दक्ष प्रसाद, धैर्य बिष्ट आदि ने तकनीकी टीम में तथा राजेश साह, मोहित सनवाल, अजय वीर पावर, सगीर खान ने सहयोग दिया है। 

यह भी पढ़ें : नैनीताल में मशहूर जासूस ‘व्योमकेश बख्शी’ फेम रजित कपूर व मीता वशिष्ठ के बीच पनपा प्यार…

-मुंबई में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने गत दिनों किया था वृद्धों के अकेलेपन को प्रदर्शित करती फिल्म का शुभारंभ, फिल्म में निर्देशक सहित कई लोग नैनीताल से
नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अक्तूबर 2019। एक दौर में छोटे पर्दें के चर्चित जासूसी धारावाहिक व्योमकेश बख्शी के मुख्य किरदार रजित कपूर और छोटे परदे के ही चर्चित धारावाहिक ‘कहानी घर-घर की’ की तृष्णा यानी मीता वशिष्ठ के बीच इन दिनों सरोवरनगरी में प्रेम चल रहा है। हम बात यहां फिल्माई जा रही फिल्म ‘पूनम’ की कर रहे हैं, जिसमें मीता पूनम के मुख्य किरदार में और रजित सूरज के किरदार में हैं। शुक्रवार को दोनों के बीच हिमालय दर्शन, नैनी झील, कैनेडी पार्क, बोट स्टेंड व हनुमान गढ़ी सहित कई स्थानों पर एक युगल गीत ‘सुनो दिल की बात कहता है, दिल जो कहता है-वही कहता हूं, ओ मेरी पूनम’ गीत के कई प्रणय दृश्य फिल्माए गए। इस दौरान रजित सहारा देकर मीता को नौकायन के लिए ले जाते, फिर स्वयं नाव खेते दिखाई देते हैं। बाद में मीता भी नाव खेने में उनकी मदद करती है और दोनों जीवन नैया को साथ पार ले जाते नजर आते हैं।

फिल्म पूनम के दृश्य में अभिनेता रजित कपूर व मीता वशिष्ठ।

फिल्म की निर्मात्री शिल्पी दास चौहान ने बताया कि हिंदी व अंग्रेजी में बन रही फिल्म पूनम वृद्धों के अकेलेपन को प्रदर्शित करने वाली बेहद भावनात्मक व मार्मिक कहानी पर आधारित है। आज लोगों के पास अपने वृद्ध माता-पिता के लिए समय नहीं है। ऐसे में अकेले वृद्ध किसी से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं तो सामाजिक बंदिशें उन्हें इसकी इजाजत भी नहीं देती है। इसी कश्मकश को यह फिल्म प्रदर्शित करती है। फिल्में में रजित व मीता 1960-70 के दशक में एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, परंतु शादी नहीं कर पाते। अब बुजुर्ग हो जाने पर एक दिन वे अनायास ही मिल जाते हैं तो पुरानी यादें ताजा हो आती हैं। इन्हीं दृश्यों को यहां फिल्माया जा रहा है। फिल्म की पूरी शूटिंग नैनीताल में ही होने जा रही है। खास बात यह भी है कि फिल्म का औपचारिक शुभारंभ गत 22 सितंबर को मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया था, और फिल्म में पटकथा लेखन व निर्देशन की जिम्मेदारी नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म मेकर संजय सनवाल संभाल रहे है, तथा इसी विद्यालय के छात्र रहे मुंबई के विदित तनवर फिल्म में संगीत दे रहे हैं। इनके अलावा भी फिल्म में नगर के प्रमोद प्रसाद सहायक निर्देशक, उदित साह स्टिल फोटोग्राफी में योगदान दे रहे हैं। साथ ही नगर के मदन मेहरा, अलिक्जा नदीम व मनोज आदि भी प्रोडक्शन से जुड़े हैं। इस प्रकार फिल्म का नैनीताल से खास जुड़ाव रहने वाला है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल से पढ़े लेखक, निर्देशक, गीतकार, यहीं पूरी शूटिंग, कोश्यारी ने किया शुभारंभ, नैनीताल के लिए खास रहने वाली है ‘पूनम’..

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्टूबर 2019। कभी फिल्मकारों की पसंदीदा रही सरोवरनगरी एवं आसपास के क्षेत्रों में इसी माह समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा के संजीदा विषय को लेकर ‘पूनम’ नाम की एक हिंदी-अंग्रेजी फिल्म की पूरी शूटिंग होने जा रही है। खास बात यह भी है कि फिल्म का औपचारिक शुभारंभ गत 22 सितंबर को मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया है, और फिल्म में पटकथा लेखन व निर्देशन की जिम्मेदारी नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म मेकर संजय सनवाल संभाल रहे है, तथा इसी विद्यालय के छात्र रहे मुंबई के विदित तनवर फिल्म में संगीत दे रहे हैं। इस प्रकार फिल्म का नैनीताल से खास जुड़ाव रहने वाला है। फिल्में प्रसिद्ध अभिनेता रजित कपूर व मीता वशिष्ठ की प्रमुख भूमिका है। फिल्म के गीतकार अमर ठाकुर, डीओपी कृष्ण एकताथ मोठे व एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूशर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनिल कुमार पी हैं।

फिल्म पूनम का मुंबई में शुभारंभ करते महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी।

फिल्म की निर्मात्री शिल्पी दास चौहान ने बताया कि वह लंबे समय से बुजुर्गों पर कार्य कर रही हैं। उनकी फिल्म उन बुजुर्गों की व्यथा पर आधारित है, जिन्होंने 60-70 के दशक में अपने बच्चों को बड़ी कठिनाई से पाला-पोशा और अच्छा मुकाम दिलाया, किंतु आज उन्होंने अपनी व्यस्तताओं की बात कह उन्हें एकाकी जीवन जीने को छोड़ दिया है।

यह भी पढ़ें : फिल्म फेस्टिवलों के लिए नैनीताल में बनी लघु फिल्म ‘पापा का आशीष’ का हुआ विमोचन

फिल्म पापा का आशीष का एक दृश्य।

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अक्टूबर 2019। नगर में सोमवार को मघुबन आर्ट्स की लघु फिल्म ‘पापा का आशीष’ का प्रेम प्रीमियर आयोजित हुआ। देश-दुनिया के विभिन्न फिल्म फेस्टिवलों के लिए बनी डा. मोहित सनवाल द्वारा लिखित व निर्देशत इस लघु फिल्म की मुख्य ‘प्रॉपर्टी’ फिल्म के उम्रदराज नायक (अनिल घिल्डियाल) को शादी के समय ससुराल से दहेज में मिला स्कूटर व आखिर तक खुद की ओर ध्यान खींचता बहन (शबनी राणा) की ससुराल में रहने वाला साला (कौशल साह जगाती है। अनिल खटारा हो चुके स्कूटर को बेच देते हैं, लेकिन बाद में अहसास होता है कि उसके कागजातों में नामांतरण तो हुआ नहीं। सो वे अपने मित्र (संदीपन विमलकांत नागर) के साथ स्कूटर को किसी तरह उसे खरीदने वाले पड़ोसी (डीके शर्मा), मैकेनिक (अजय पवार व मुकेश धस्माना), कबाड़ी (मनोज साह टोनी), बूचड़ (अमित साह) व चोर (पवन कुमार) आदि के पास तलाशते हैं, और स्कूटर को बेची हुई कीमत से अधिक में वापस पाने में सफल रहते हैं, परंतु स्कूटर को वापस लाने का पूरा क्रेडिट अपनी बहन के सामने साला ले लेता है। नैनीताल नगर व आसपास की लोकेशन्स में ही फिल्माई गई फिल्म में कैमरा नगर की छायाकार अदिति खुराना ने बखूबी संभाला है, और एडिटिंग किंशुक पांडे व समर बेलवाल ने की है। निर्माण में कविता सनवाल, अंकित शांडिल्य, मौलिक सनवाल, विनीता यशस्वी, प्रिंस परसाल, सुनील कुमार, दीपक सहदेव, नीरज डालाकोटी व पुनीत कांत आदि ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रीमियर में वयोवृद्ध रंगकर्मी केपी साह सहित फिल्म से जुड़े सभी लोग मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्टूबर 2019। कभी फिल्मकारों की पसंदीदा रही सरोवरनगरी एवं आसपास के क्षेत्रों में इसी माह समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा के संजीदा विषय को लेकर ‘पूनम’ नाम की एक हिंदी-अंग्रेजी फिल्म की पूरी शूटिंग होने जा रही है। खास बात यह भी है कि फिल्म का औपचारिक शुभारंभ गत 22 सितंबर को मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया है, और फिल्म में पटकथा लेखन व निर्देशन की जिम्मेदारी नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म मेकर संजय सनवाल संभाल रहे है, तथा इसी विद्यालय के छात्र रहे मुंबई के विदित तनवर फिल्म में संगीत दे रहे हैं। इस प्रकार फिल्म का नैनीताल से खास जुड़ाव रहने वाला है। फिल्में प्रसिद्ध अभिनेता रजित कपूर व मीता वशिष्ठ की प्रमुख भूमिका है। फिल्म के गीतकार अमर ठाकुर, डीओपी कृष्ण एकताथ मोठे व एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूशर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनिल कुमार पी हैं।

फिल्म पूनम का मुंबई में शुभारंभ करते महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी।

फिल्म की निर्मात्री शिल्पी दास चौहान ने बताया कि वह लंबे समय से बुजुर्गों पर कार्य कर रही हैं। उनकी फिल्म उन बुजुर्गों की व्यथा पर आधारित है, जिन्होंने 60-70 के दशक में अपने बच्चों को बड़ी कठिनाई से पाला-पोशा और अच्छा मुकाम दिलाया, किंतु आज उन्होंने अपनी व्यस्तताओं की बात कह उन्हें एकाकी जीवन जीने को छोड़ दिया है।

यह भी पढ़ें : मतदाता जागरूकता प्रतियोगिता में आकाश, मदन, वैभव, नीतेश, पंचम व अम्तुल्स ने जीते पुरस्कार

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अप्रैल 2019। जिला प्रशासन के द्वारा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम-स्वीप के तहत आयोजित लघु फिल्म एवं गीत प्रतियोगिताओं में नैनीताल के युवाओं की रचनात्मकता ने पुरस्कार हासिल किये हैं। लघु फिल्म प्रतियोगिता में हल्द्वानी के आकाश नेगी ने पहला, नैनताल के मदन मेहरा ने दूसरा व वैभव जोशी ने तीसरा जबकि गीत प्रतियोगिता में हल्द्वानी के नीतेश बिष्ट ने पहला, पंचम कुमार ने दूसरा और नैनीताल के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

प्रथम पुरस्कार प्राप्त फिल्म :

द्वितीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म :

तृतीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म : वैभव जोशी

प्रथम पुरस्कार जीतने वाले आकाश नेगी ने बताया कि उनकी फिल्म में अफसरों के पीछे अपना मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए भागते एक भिखारी के माध्यम से हर एक वोट की कीमत बताई गयी है। वहीं मदन मेहरा की ‘मतदान यानी राष्ट्र सम्मान’ की थीम पर बनी फिल्म में कहा गया है कि हमें मतदान के दिन छुट्टी मनाने नहीं जाना चाहिए। हम मौन रहकर धृतराष्ट्रों को सत्ता देते हैं। वहीं नगर के सेंट जोसफ कॉलेज के 11वीं कक्षा के छात्र वैभव जोशी की फिल्म ‘एक वोट की कीमत’ में स्वयं वैभव ने एक साथ तीन दोस्तों के चरित्र निभाकर इतिहास में एक वोट की वजह से हुए बड़े बदलावों की जानकारी देते हुए एक वोट की कीमत को बताया है। बताया गया है कि लघु फिल्म प्रतियोगिता में 8 एवं गीत प्रतियोगिता में 23 प्रविष्टियां आयी थीं। लघु फिल्म प्रतियोगिता में विजेताओं को क्रमशः 10, 7.5 एवं 5 हजार एवं गीत प्रतियोगिता के विजेताओं को 6, 4 एवं 2 हजार के पुरस्कार दिये जाएंगे। विजेताओं का चयन जिले के सीडीओ विनीत कुमार की अगुवाई में निर्णायकों-व्यापक जोशी, घनश्याम भट्ट व डा. प्रभा पंत ने चयन किया। प्रतियोगिता के संचालन में स्वीप के प्रभारी अधिकारी राजेश कुमार, विमल पांडेय, सुरेश अधिकारी, ललित पांडेय व गौरी शंकर कांडपाल की प्रमुख भूमिका रही है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मार्च 2019। आगामी अप्रैल माह में एफटीआईआई यानी फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के तत्वावधान में स्मार्टफोन से फिल्म निर्माण की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित होने जा रही है। कार्यशाला के स्थानीय समन्वयक राजेश साह व शालिनी साह ने बताया कि तीन से नौ अप्रैल के बीच मुख्यालय में हरमिटेज परिसर में स्थित यूजीसी एचआरडीसी में रितेश तकसंदे के निदेशन में यह कार्यशाला आयोजित हेागी। कार्यशाला के आवेदन करने की आखिरी तिथि 18 मार्च है। कार्यशाला में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। अधिक जानकारी www.ftiindia.com तथा ftiiskift@gmail.com पर तथा मोबाइल नंबर 9410544524 व 9411344136 पर ली जा सकती है।

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  • एफटीआईआई के 23 दिवसीय स्क्रीन एक्टिंग फाउंडेशन कोर्स में पहुंचे 9 राज्यों के प्रतिभागी

नैनीताल, 6 अगस्त 2018। कुमाऊं मंडल मुख्यालय में सोमवार को एफटीआईआई यानी फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे के तत्वावधान में स्थानीय हिमासीफ के तत्वावधान में आगामी 28 अगस्त तक चलने वाले 23 दिवसीय स्क्रीन एक्टिंग फाउंडेशन कोर्स प्रारंभ हो गया। इस पाठ्यक्रम में देश भर के 9 राज्यों के 1 छात्रा सहित कुल 11 प्रतिभागी पहुंचे हैं। पाठ्यक्रम में एक मूलतः राजस्थान निवासी प्रतिभागी देवांश मदान वास्तव में जापान से यहां पहुंचे हैं, परन्तु पाठ्यक्रम में उपलब्ध 24 में से 13 सीटें खाली रह जाने के बावजूद मेजबान राज्य उत्तराखंड से एक भी प्रतिभागी इस पाठ्यक्रम में प्रतिभाग नहीं कर रहा है। इस पर आयोजकों में भी नाराजगी स्पष्ट दिखाई दी। हिमासीफ की शालिनी साह ने कहा कि नैनीताल में यह पाठ्यक्रम इसलिये आयोजित कराया गया, ताकि यहां के बच्चों को भी इसका लाभ मिले। वहीं एफटीआईआई से आये प्रशिक्षकों ने भी इस पर अफसोस जताया। लेकिन इसे पाठ्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों के लिए सुखद बताया कि उन्हें सीखने के लिए अधिक समय मिल पायेगा। कम प्रतिभागियों के आने का एक कारण पाठ्यक्रम की फीस काफी अधिक (₹ 25,000) होना भी बताया जा रहा है।

नगर के रॉयल होटल में सोमवार सुबह पाठ्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। नगर की सामाजिक कार्यकत्री गीता साह ने सभी उपस्थित गणमान्य जनों एवं प्रतिभागियों को स्वयं परंपरागत रंग्वाली पिछौड़ा के परिधाम में आकर व परंपरागत तरीके से शंख-घंटे बजाकर व ‘पिठ्यां-अक्षत’ लगाकर स्वागत किया। एफटीआईआई पुणे के टीवी विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाठक व प्रशिक्षक सिद्धार्थ शास्ता ने कहा कि उत्तराखंड मूल के एफटीआईआई के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला की संस्थान में सीमित सीटों के बावजूद देश भर के प्रतिभाशाली युवाओं को एफटीआईआई की सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस तरह के पाठ्यक्रम देश भर में कराये जा रहे हैं। युगमंच संस्था के अध्यक्ष जहूर आलम ने कला व थियेटर की नगरी के रूप में सरोवरनगरी की कला यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया। शालिनी साह ने प्रतिभागियों को अच्छे अभिनय कॅरियर के लिए पढ़ने के महत्व को रेखांकित किया। संचालन हेमंत बिष्ट ने किया। इस मौके पर राजेश साह, सुदर्शन साह, नवीन जोशी, राजेश आर्य, मुकेश धस्माना सहित दिल्ली से स्पर्श राणा व मालविका महल, राजस्थान से देवांश मदान, पुणे महाराष्ट्र से मेघराज मल्लीनाथ शेट्टी व विशाल राउत, यूपी से यतेंद्र सोलंकी, गुरुग्राम हरियाणा से हर्ष कपूर, कोलकाता से बिक्रम सिखर रॉय, जम्मू-कश्मीर से लव गुप्ता, केरल से एस सेबेस्टियन व मध्यप्रदेश से आशुतोष ऋषि प्रतिभागी के तौर पर मौजूद रहे।

पूर्व समाचार : केरल सहित 10 राज्यों के 85 प्रतिभागियों ने नैनीताल में किया फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स 

बेला नेगी

-15 अप्रैल तक हुआ एफटीआईआई पुणे का फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स, एफटीआईआई की राज्य की ही ट्रेनर बेला नेगी व सुखमय सेन गुप्ता ने प्रतिभागियों को दिये फिल्म निर्माण से संबंधित शुरुआती टिप्स
नैनीताल। नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज परिसर में एफटीआईआई पुणे के तत्वावधान में 5 दिन का फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स बुधवार को प्रारंभ हुआ। खास बात यह रही कि इस प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम में उत्तराखंड ही नहीं सुदूर केरल के साथ ही राजस्थान गुजरात, मध्य प्रदेश व यूपी सहित 10 राज्यों के 85 प्रतिभागी शामिल हुए। इन प्रतिभागियों में फिल्मों से जुड़े व जुड़ने के इच्छुक युवा व किशोरों से लेकर उम्रदराज 71 पुरुष एवं 14 महिलाएं भी शामिल हैं। आगामी 15 अप्रैल तक चलने वाले इस पाठ्यक्रम में एफटीआईआई की उत्तराखंड मूल की ट्रेनर चर्चित उत्तराखंडी फिल्म ‘दांये या बांये’ की निर्देशक बेला नेगी व सुखमय सेनगुप्ता ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।
कुविवि के हरमिटेज परिसर में बुधवार को शुरु हुए इस पाठ्यक्रम के तहत पहले दिन सुश्री नेगी व सेनगुप्ता ने प्रतिभागियों को फिल्म निर्माण से संबंधित शुरुआती टिप्स दिये। बताया कि फिल्म निर्माण का मूलभूत तत्व दृश्य हैं। दृश्यों, चित्रों को देखने का सबका अलग-अलग नजरिया होता है। फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को इन दृश्यों के जरिये अपने विषय को दर्शकों के समक्ष रखना होता है। बताया कि कैसे करीब सवा सौ वर्ष पूर्व चलते-फिरते दृश्यों युक्त फिल्म विधा और उससे करीब 50 वर्ष पूर्व चित्र खींचने वाला कैमरा आने के बाद से लगातार यह विधा समृद्ध हो रही है। शुरुआती दौर में दर्शक परदे पर रेलगाड़ी के सामने की ओर आते देखकर डर जाते थे, जबकि अब कई न दिखाए दृश्यों की कल्पना अपने मन में स्वयं ही कर लेते हैं।

फिल्मी ज्ञान का अश्वमेध पूरे देश में लेकर जा रहा है एफटीआईआई: कैंथोला

फिल्म एप्रीशिएशन पाठ्यक्रम के शुभारंभ मौके पर बोलते एफटीआईआई के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला एवं मंचासीन अन्य गणमान्य।

नैनीताल। फिल्म एप्रीशिएशन पाठ्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर एफटीआईआई पुणे के निदेशक, उत्तराखंड मूल के ही भूपेंद्र कैथोला ने कहा कि वे एफटीआईआई का लोकतंत्रीकरण करने यानी एफटीआईआई को विभिन्न राज्यों में ले जाकर वहां लोगों को प्रशिक्षित करने के पक्षधर हैं, और इसी कोशिश में एफटीआईआई का अश्वमेध पूरे देश में लेकर जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड में भी नैनीताल से यह शुरूआत हो रही है। राज्य सरकार से अन्य कुछ पाठ्यक्रमों के लिए भी बात हो रही है। सरकार के सहयोग से स्थान की उपलब्धता आदि होने से प्रतिभागियों को कोर्स सस्ता पड़ता है। बताया कि कश्मीर सरकार इस दिशा में अत्यधिक संकल्पित नजर आती है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण एक गंभीर विषय है। एक फिल्म में ही 3-4 सौ लोगों को रोजगार मिलते हैं, जबकि देश में हर वर्ष 2-3 हजार फिल्में बनती हैं। कहा कि इस पाठ्यक्रम के बाद दर्शकों का भी फिल्म देखने को लेकर दृष्टिकोण बदल जाएगा। उन्होंने इस पाठ्यक्रम को कुविवि में शुरू करने के लिए एफटीआईआई से निकले नगर के सिनेमेटोग्राफर राजेश साह ‘काकू’ व उनकी धर्मपत्नी निर्देशिका शालिनी साह को पूरा योगदान दिया। इस अवसर पर यूजीसी एचआरडीसी के निदेशक प्रो. बीएल साह, नगर के सिने कलाकार इदरीश मलिक व शालिनी साह आदि ने भी विचार रखे।

अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिवल में यूएसए, यूके, जर्मनी, द. अफ्रीका, नेपाल की फिल्में भी छायीं

दूसरे अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिबल के आखिरी दिन देश-विदेश की फ़िल्में देखते दर्शक।

नैनीताल। कुमाऊं विवि द्वारा हरमिटेज परिसर स्थित सभागार में 7 से 9 अप्रैल 2018 के बीच आयोजित हुए दूसरे अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिवल में सोमवार का आखिरी दिन विदेशी फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गया। इसमें खासकर अमेरिका की ‘ह्वट मीट्स द आइज’ व ‘आफ्टर सोफी’, जर्मनी की ‘पल्स ऑफ लाइफ’, सिंगापुर की ‘सेकेंड चांइस’, यूनाइटेड किंगडम की ‘ऑफसाइड’, दक्षिण अफ्रीका की ‘स्टोन कार्स’ व नेपाल की ‘नीमा’ उल्लेखनीय रहीं। इनके अलावा भारत के एमसीआरसी नई दिल्ली की इन ‘पर्स्यू ऑफ द स्टार’, एसआरएफटीआई कोलकाता की ‘एक आदमी का न्यौता’, ‘थ्री चेप्टर्स ऑफ अ लाइफ इन चेन्स’ व ‘क्लोज यौर आइज’, एफटीआईआई पुणे कि ‘ठिया’, ‘डेड इंड’ व ‘डेज ऑफ ऑटम’, महाराष्ट्र की ‘दैवार’, इलाहाबाद विवि की ‘फोकलवा’, एसआईएफटी रोहतक की ‘ड्रीम ऑन ह्वील्स’, अंबेडकर विवि नई दिल्ली की ‘ऋषित नियोगी’ व एमआईटी की ‘ए सन्डे आफ्टरनून’ आदि फिल्में भी दिखाई और दर्शकों के द्वारा पसंद की गयीं। अमेरिका की फिल्म ‘ह्वट मीट्स द आइज’ वहां की किशोर वय बालिकाओं की समस्याओं, सेनिटरी नैपकिन आदि के प्रति वहां भी भारत जैसे ही दृष्टिकोण को दिखाती है।

इसके अलावा इस दूसरे अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट फिल्म फेस्टिबल में ईरानी फिल्म ‘अ लेटर टु द स्काई’, एसआईएफटी रोहतक की ‘आपका अमिताभ’ व फ्रांस के कान फिल्म फेस्टिवल के लिए चयनित एफटीआईआई पुणे की फिल्म ‘आफ्टरनून क्लाउड्स’ भी खास व उल्लेखनीय प्रस्तुतियां रहीं। वहीं एसआईएफटी रोहतक की ‘मैरिज बाजार’ फिल्म ने मजबूरीवश जिस्मफरोसी का धंधा करने वाली मां की अपने बच्चे को चॉकलेट देकर टॉयलेट में बंद कर काम पर जाने व इस दौरान पुलिस के छापे में पकड़े जाने से बच्चे के वहीं बंद रह जाने, अफगानी फिल्म ‘डे-39’ अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों द्वारा प्रताणित किये जा रहे एक अफगानी व उसकी गर्भवती पत्नी का प्रसव कराने के बाद अमेरिकी सैनिक में पितृत्व का भाव जागने तथा जर्मनी की ‘इन वन ड्रेग’ नाम की एनीमेटेड फिल्म एक सिगरेट पीने वाले को उसके द्वारा पी गयी सिगरेट की ठुड्डियों द्वारा निगल जाने का बेहतरीन तरीके से प्रस्तुतीकरण के लिए यादगार रहीं। महोत्सव के समन्वयक राजेश साह ‘काकू’ व शालिनी साह ने बताया कि आगे 11 से 15 अप्रैल तक एफटीआई पुणे की ओर से विवि के हरमिटेज भवन में फिल्म कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व फिल्म फेस्टिवल में दूसरे दिन सोपानम, डेर्बी, मूंगा, द एक्जाइल, सोमवार, संडाकफू, इन वन ड्रेग, प्रेगनेंट पॉज, द मोस्ट ब्यूटीफुल, सफर, अवरथनम, हीलियम, राचेस, मिस्टर राइटर एंड मिस्टर पेंटर, आफ्टरनून क्लाउड्स, अफसरनी, गुलदार, सिंडीस्वा, ओरुक्कम, फ्लोइग वाटर व टू सॉल्यूसन आदि फिल्में दिखायी गयीं। इसके अलावा रात्रि में कैंप फायर के दौरान कहानियों का सत्र भी आयोजित हुआ। महोत्सव के समन्वयक राजेश साह ‘काकू’ व शालिनी साह ने बताया कि इस तीन दिवसीय फेस्टिवल में यूूके, यूएसए, मलेशिया, बांग्लादेश, नेपाल, इरान 12 देशों तथा एफटीआई पूणे, एसआरएफटीआई, एलवी प्रसाद, चंडीगढ़ विवि, इलाहाबाद विवि, एमआईटी, जामियां विवि, अंबेडकर विश्वविद्यालय समेत देश के 14 फिल्म इंस्टीट्यूटों के प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड
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