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20 घंटे बाद भी नहीं पहुंचा मुख्यमंत्री का आदेश, पूरे दिन रहा भ्रम…

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मुख्य सचिव का आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 मई 2020। बृहस्पतिवार को करीब शाम आठ बजे मुख्यमंत्री के फेसबुक पेज सहित विभिन्न माध्यमों से बाजारों कें सुबह सात से शाम चार की जगह शाम सात बजे तक खुलने का निर्णय लेने की बात कही गयी थी। इस बारे में मुख्य सचिव का आदेश लोगों तक पहुंच भी गया। लेकिन करीब 20 घंटे से अधिक गुजर जाने के बावजूद इस संबंध में जिलों को कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ। इस कारण नगर के बाजारों के खुलने पर पूरे दिन कयास और चर्चाएं होती रहीं, और बाजार शाम चार बजे बंद हो गये। इस बारे में एसडीएम विनोद कुमार ने कोई आदेश प्राप्त नहीं होने की बात कही।

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-अब पूरे प्रदेश में सुबह सात से शाम छह की जगह दोपहर एक बजे तक ही खुलेंगी दुकानें
नवीन समाचार, देहरादून, 26 अप्रैल 2020। उत्तराखंड सरकार ने 24 घंटे से पहले ही प्रदेश के ग्रीन जोन के रूप में चिन्हित नौ जिलों में दुकानें खोलने के लिए समय में दी गई राहत वापस ले ली है। अब पूरे प्रदेश में केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही दुकानें पूर्व की भांति सुबह सात बजे से शाम 6 बजे की जगह दोपहर एक बजे तक ही खुलेंगी। रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में कोरोना संक्रमण की स्थिति की अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया।
बैठक में तय किया गया कि प्रदेश के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही दुकानों को खोलने की अनुमति दी जाऐगी। इस दौरान सामाजिक दूरी व मास्क पहनने का पालन भी करना होगा, और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, सचिव अमित नेगी, सचिव नितेश कुमार झा, सचिव राधिका झा मौजूद रहे।
यह रहा कारण
बताया जा रहा है कि रविवार को एम्स ऋषिकेष में नर्सिंग ऑफीसर एवं गर्भवती महिला में बिना खास लक्षणों के अचानक कोरोना की पुष्टि होने के बाद सरकार सहम गई। और इस कारण ही सरकार को ऐहतियात के तौर पर अपने निर्णय को बदलना पड़ा। बताया जा रहा है कि इन दोनों ही नये कोरोना संक्र्रमितों में एक-दो दिन पूर्व तक कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे, तथा उनका किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति से संपर्क होने का सीधा संबंध भी पता नहीं चला है। साथ ही यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि चूंकि वे कोरोना की पुष्टि होने से पहले किसी तरह के क्वारन्टाइन में नहीं थे, इसलिए अपने परिवार सहित कई लोगों के संपर्क में आये होंगे, इसलिए संभवतया सरकार को लगा कि ऐसे बिना लक्षण एवं संपर्क वाले कोरोना संक्रमित कहीं और भी न हों और छूट बढ़ा दिये जाने से अब तक बरती गई ऐहतियात की मेहनत बेकार न चली जाए, इसलिए सरकार ने पूर्व की तरह नियमों का पालन कराना ही उचित समझा।

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-शादी एवं रिश्तेदारी में फंसे लोगों को ग्रीन कैटेगरी के जिलों में भेजने की अनुमति देने और क्वारन्टाइन के 15वें दिन वापस भेजने को कहा
नवीन समाचार, देहरादून, 20 अप्रैल 2020। राज्य में लॉक डाउन के दौरान प्रशासन लॉक डाउन का कड़ाई से पालन कराने के साथ ही मानवीय संवेदनशीलता का ध्यान रखेगा। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में शासन के उच्चाधिकारियों के साथ सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 के दृष्टिगत इससे संबंधित बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 के दृष्टिगत सभी जिलाधिकारियों को जनपद की परिस्थिति के अनुकूल आम आदमी की समस्याओं के समाधान में मानवीय व व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि शादी विवाह में दूल्हा और दुल्हन दोनों के पक्षों की व्यावहारिकता देखें। ऐसे प्रकरण अंतर्जनपदीय भी हो सकते हैं। विवाह के लिए केंद्र सरकार के सामाजिक दूरी व अन्य निर्देशों का अनुपालन करते हुए अनुमति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जो लोग अपनी रिश्तेदारी आदि वजह से लॉक डाउन में फंस गए हैं उनका स्वास्थ्य परीक्षण करते हुए ग्रीन कैटेगरी के जनपदों में जाने की अनुमति प्रदान की जाए। यही नहीं जिन लोगों को क्वॉरेंटाइन में रखे हुए 14 दिन पूरे हो गए हैं उन्हें 15 वें दिन स्वास्थ्य परीक्षण के बाद यथा स्थान भेजने की व्यवस्था कर दी जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये हैं कि काश्तकारों के व्यापक हित में आम व लींची के सीजन के दृष्टिगत इसे क्रय करने हेतु आने वाले ठेकेदारों को भी आवश्यक चिकित्सा सुरक्षा जांच के बाद आवागमन की सुविधा प्रदान की जाए। साथ ही मटर की खेती करने वाले किसानों के हित में फ्रोजन मटर की प्रोसेसिंग करने वाले उद्योगों को भी प्रोत्साहित करने और गर्मी व सर्दी के मौसम में प्रदेश के सीमांत जनपदों उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ में प्रवास पर जाने वाले लोगों के आवागमन, पशुओं को चारा-पानी, गर्मी के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान के लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने की भी अपेक्षा की। इस धनराशि से जनकल्याण के कार्यों में बड़ी मदद मिल सकती है। वहीं मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने प्रवासी मजदूरों के हित में उद्योगों से समन्वय कर उनकी आवश्यकता के दृष्टिगत उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने, विस्थापन शिविरों में नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच व उनके मनोबल को बढ़ाने के भी प्रयास करने, आवश्यक सामान लेकर जाने वाले 14 दिन के लिए क्वॉरेंटाइन किए गये ट्रक ड्राइवरों को स्वास्थ्य की जांच कर जाने देने, वितरित की जा रही सामग्री की एकाउंटिंग पर भी ध्यान देने तथा कोरोना संक्रमण के कार्याें में लगाये गये वन विभाग के कर्मचारियों को वनाग्नि के बचाव कार्यों के दृष्टिगत कार्यमुक्त करने और इनके स्थान पर पीआरडी स्वयं सेवकों की तैनाती करने के निर्देश दिये। जबकि अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग, चार धाम सड़क परियोजना, कुंभ मेले से संबंधित कार्य, पुलों, नाबार्ड, लोनिवि, राज्य योजना व जिला योजना से संबंधित 75 प्रतिशत प्रगति वाले निर्माण कार्यों का परिचालन मानकों के अनुरूप करने एवं निर्माण कार्यों के मजदूरों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा कार्य स्थल पर अथॉरिटी इंजीनियर, जे.ई. की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।
प्रवास से लौटे लोगों के लिए भी बनी योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन के कारण प्रदेश में हजारों लोगों ने रिवर्स माइग्रेशन किया है, लॉक डाउन के बाद भी इनकी संख्या और बढ़ सकती है इसके लिए एक प्रोफॉर्मा तैयार किया गया है जिसमें उनकी दक्षता आदि का पूरा विवरण तैयार किया जाना है। इसके लिए 30 हजार आवेदन भेजे जा चुके हैं। यह प्रक्रिया भविष्य की योजना तैयार करने में मददगार हो सकेगी। जिला अधिकारी अपने जनपदों में इसका भी ध्यान रखें।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अप्रैल 2020। जनपद में समाज सेवियों एवं संगठनों को खाद्यान्न एवं पका-पकाया भोजन वितरित करने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना होगा। इसके बाद ही उन्हें नगर मजिस्टेªट या संबंधित एसडीएम से ऐसा करने की अनुमति दी जाएगी। उसके उपरान्त ही कोई समाज सेवी संगठन या गैर सरकारी संगठन खाद्य समाग्री का वितरण कर पायेंगे।
डीएम सविन बंसल ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान असंगठित श्रमिकों को विभिन्न समाज सेवी संगठनों द्वारा खाद्यान एवं भोजन वितरण में अत्यधिक जन समूह के एकत्रित होने एवं इस कारण सोशल डिस्टेसिंग यानी जरूरी सामाजिक दूरी का अनुपालन नहीं होने की शिकायतें आ रही हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी उत्पन्न हो रहा है। इसलिए नयी व्यवस्था की जा रही है। साथ ही डीएम बंसल ने कहा कि जिस समाज सेवी संगठन अथवा गैर सरकारी संगठनों को प्रशासन द्वारा पास जारी किये गये है वे निर्धारित तिथि एवं चिन्हित स्थल में ही पुलिस बल की मौजूदगी में ही घर पर जाकर खाद्यान एवं भोजन वितरित करेंगे। इसकी मॉनिटरिंग नगर मजिस्टेªट, उपजिलाधिकरी, अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाएगी। सामाजिक दूरी के मानकों का उल्लघन करने पर उनकी वितरण की अनुमति तत्काल निरस्त करते हुयें उनके विरूद्ध दंडात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।

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Blog single photoनवीन समाचार, देहरादून, 5 अप्रैल 2020। उत्तराखंड में कोरोना वायरस (कोविड 19) संक्रमण के मद्देनजर जारी लॉक डाउन के दौरान मरकज से लौटे ऐसे जमाती, जो खुद को शासन एवं प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ शासन कठोर कार्रवाई करेगा। ऐसे लोगों को खुद को मेडिकल जांच के लिए प्रस्तुत करने हेतु सोमवार तक का आखिरी मौका है। उसके बाद भी अगर जमाती छुपे रहे और उनकी वजह से किसी को कोरोना संक्रमण होता है तो उनके खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट के साथ हत्या का प्रयास (धारा 307) और किसी की मौत होने पर हत्या (धारा 302) का मुकदमा चलाया जाएगा। यह घोषणा राज्य के पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने आज शाम यहां की। 
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि देश और उत्तराखंड राज्य मौजूदा समय में कोरोना वायरस के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रहा है। उत्तराखंड में विगत दिनों में कुछ ऐसे दृष्टांत आए हैं, जहां दिल्ली से आए हुए तब्लीगी जमात के लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हालत में प्रदेश में दाखिल हुए हैं। राज्य की खुफिया पुलिस एवं शासन-प्रशासन का तंत्र ऐसे समस्त जमातियाें का पता लगाने का प्रयास कर रहा है, जो खासतौर पर निजामुद्दीन दिल्ली में थे और उसके बाद यहां आए। आशंका है कि इनमें से कुछ कोरोना वायरस से संक्रमित हों, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। इस तरह के लोगों से प्रांत में उनके संपर्क में आने वाले दूसरे लोगों में भी इसके संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसके दृष्टिगत हम ऐसे लोगों का पता लगा रहे हैं। रतूड़ी ने कहा कि मेरी ऐसे सभी तब्लीगियों से अपील है कि जो निजामुद्दीन मरकज गए थे या अन्य किसी तब्लीग जमात में गए थे और वापस आए हैं, वे कृपया सामने आएं और प्रशासन और पुलिस के समक्ष कल (6 अप्रैल, 2020) तक अपने आप को प्रस्तुत करें। आवश्यकता होगी तो उनकी मेडिकल जांच कराई जाएगी और उन्हें क्वॉरंटाइन कराया जाएगा। यदि कोई जानबूझकर इस चीज को छुपाता है और 6 अप्रैल, 2020 के बाद यह जानकारी में आता है कि वह जानबूझकर खुद को छुपा रहे थे, तब उनके विरुद्ध डिजास्टर मैनेजमेंट और और आईपीसी की धाराओं के तहत हत्या के प्रयास की धारा में मुकदमा दर्ज किया जायेगा। अगर उनकी वजह से हुए संक्रमण से किसी की मौत हो जाती है तो ऐसे लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जायेगा। इसलिए अगर 06 अप्रैल तक वह सामने आ जाते हैं तो हम उनका परीक्षण कराएंगे और पूरी चिकित्सा कराएंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अप्रैल 2020। नगर पालिका प्रशासन द्वारा कोरोना के संक्रमण से बचाव के कार्य में इन विषम परिस्थिती में भी अपने कार्य पर डटे हुए कर्मचारियों को प्रोत्साहन स्वरूप वार्ड सर्किल वार जरूरी राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए पालिका प्रशासन ने 350 से अधिक राशन के पैक बनाये हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को लगभग 4 से 5 सर्किल के लगभग 80 कर्मचारियों को नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी व अधिशासी अधिकारी अशोक वर्मा के हाथों सामाजिक दूरी बनाते हुए राशन उपलब्ध कराया गया। बताया गया कि प्रति दिन 3 से 4 सर्किल के कर्मचारियों को समयांतराल पर बुला कर राशन वितरित किया जाएगा। इसके लिए पूर्व में संबंाित सफाई हवलदार को सूचित किया जाएगा। इस मौके पर देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष धर्मेश प्रसाद, महासचिव सोनू सहदेव, उपाध्यक्ष संजय भगत, उपसचिव कमल कुमार, मंगूलाल, अमित सहदेव, सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अप्रैल 2020। डीएम सविन बंसल ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान स्वयं सेवी संस्थाओं, गणमान्यों से गरीब, असहायों को पका भोजन स्वयं वितरित करने की जगह कच्चा खाद्य पदार्थ जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा है। ताकि गरीब, असहाय, जरूरतमंदों को आवश्यकतानुसार खाद्यान्न वितरित किया जा सके। डीएम ने कहा कि लोगों द्वारा स्वयं पका हुआ भोजन वितरित करने में सोशल डिस्नटैंसिंग यानी सामाजिक दूरी का खयाल नही रखा जा रहा है, साथ ही अव्यवस्थाये भी हो रही हैं। लिहाजा उन्होंने स्वयं सेवी संस्थाओं व गणमान्यों से अपील की है कि वे गरीब, असहायों को पका भोजन वितरित ना करें।
उन्होंने कहा कि पका-पकाये भोजन के गर्मी के चलते बीमारी होने का खतरा भी बढ रहा है। इसलिए केवल भोजन वितरण हेतु पास प्राप्त स्वयंसेवी संस्थाएं ही गरीब असहाय लोगों को भोजन वितरित करेंगे। बिना प्रशासन द्वारा जारी पास के कोई भी संस्था अथवा व्यक्ति खाद्य पदार्थ वितरित करते हुये पाये जायेंगे तो उनके खिलाफ लॉक डाउन प्रतिबंध एवं आपदा अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कडी कार्यवाही की जायेगी।

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